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                <title>आम पंजाबियों की लड़ाई लड़े आम आदमी पार्टी</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब में खालिस्तानी उग्रपंथी राजनीति करने वाले लोग खासकर जो विदेशों में रह रहे हैं 2020 रेफरेंडम संग्रह का अभियान छेड़े हुए हैं। यह अभियान आईएसआई द्वारा प्लान किया हुआ है जोकि पंजाब पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दिए इनपुट के अनुसार सरकार के संज्ञान में आया है। खालिस्तान के कट्टर सर्मथक पूर्व आईपीएस सिमरन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/aam-aadmi-party-fought-for-common-punjabis/article-4263"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/aap-logo.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पंजाब में खालिस्तानी उग्रपंथी राजनीति करने वाले लोग खासकर जो विदेशों में रह रहे हैं 2020 रेफरेंडम संग्रह का अभियान छेड़े हुए हैं। यह अभियान आईएसआई द्वारा प्लान किया हुआ है जोकि पंजाब पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दिए इनपुट के अनुसार सरकार के संज्ञान में आया है। खालिस्तान के कट्टर सर्मथक पूर्व आईपीएस सिमरन जीत सिंह मान हालांकि रेफरेंडम 2020 को एक फ्र ॉड बिजनेस करार दे रहे हैं। स्पष्ट है पंजाब में अब खालिस्तान व खालिस्तानी नरमपंथी-उग्रपंथी राजनीति का कोई आधार नहीं रहा। खालिस्तान शब्द अब मात्र डॉलर या आईएसआई से धन ऐंठने का कुछ लोगों का शिगूफा मात्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">परंतु रेफरेंडम 2020 पर पंजाब में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखपाल सिंह खैहरा का समर्थनकारी रूख विचलित करने वाला है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह का इस पर आम आदमी पार्टी चीफ व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से स्पष्टकरण मांगना बेहद महत्वपूर्ण मांग है। यदि आम आदमी पार्टी वास्तव में पंजाब की तरक्की व खुशहाली चाहती है तब वह आतंक पसंद लोगों से क्यों नजदीकियां बनाए हुए है? स्पष्ट करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब विधानसभा चुनावों 2017 के समय भी आम आदमी पार्टी ने खुले आम खालिस्तानी नेताओं का समर्थन लिया इतना ही नहीं चुनाव प्रचार के दौरान खुद केजरीवाल एक चर्चित खालिस्तानी के घर रूके। पंजाब ने खालिस्तानी आतंक की बहुत भारी कीमत चुकाई है, पंजाब उस आतंक के दौर से दशकों पीछे चला गया। प्रदेश ने अपने बहुत से जाबांज अधिकारी, नेता व युवा खो दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सब जानते हैं कि अब रेफरेंडम 2020 का भी कुछ नहीं होना, पंजाब के लोगों ने बहुत पहले ही खालिस्तानी मांग को खारिज कर दिया है, फिर क्योें आम आदमी पार्टी इस रेफरेंडम में दिलचस्पी ले रही है? वह भी तब जब खालिस्तान का एक बड़ा चेहरा बन चुके सिमरनजीत सिंह मान इस रेफरेंडम को धन एेंठने का अभियान बता रहे हैं। फिर खालिस्तान की मांग करने वालों की सबसे हास्यस्पद बात यह भी है कि खुद ये विदेशी नागरिकताएं ले रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पष्ट है इन्हें पंजाब, पंजाबियों की समस्याओं में कोई दिलचस्पी नहीं। पंजाब छोड़कर ये लोग आखिर खालिस्तान बनाना कहां चाह रहे हैं समझ से परे है। भारत के हर कोने में बसने वाला पंजाबी यह कतई नहीं चाहता कि पंजाब को अलग किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">सुखपाल खैहरा व उसकी पार्टी को चाहिए कि उन्हें पंजाबियों ने इस विश्वास पर समर्थन दिया है कि वह भ्र्रष्टाचार के विरुद्ध लडेंÞगे, पंजाब की नौजवानी को नशों से मुक्त करने की लड़ाई लड़ेंगे। पंजाब कर्ज व गरीबी में पिस रहा है। आम आदमी पार्टी प्रदेश में विपक्ष का एक दमदार पक्ष है। अत: आप व इसके नेताओं को चाहिए कि वह आम पंजाबी की लड़ाई लडेंÞ न कि आतंक व स्वार्थ की मुहिम का हिस्सा बन पंजाबियों की बर्बादी लिखें।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jun 2018 08:46:00 +0530</pubDate>
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