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                <title>lakh - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>12 लाख में दो आतंकियों को करने वाला था आजाद</title>
                                    <description><![CDATA[डीएसपी देवेन्द्र सिंह ने पूछताछ में कबूला | Terrorist helper नई दिल्ली (एजेंसी)। वांछित आतंकियों के साथ पकड़े गए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित डीएसपी देविन्दर सिंह से पूछताछ में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। पूछताछ में डीएसपी ने कबूला कि आतंकियों (Terrorist) को जम्मू और उसके बाद चंडीगढ़ (Chandigarh) पहुंचाने के लिए 12 लाख रुपये […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/got-rs-12-lakh-to-help-terrorist-reach-delhi/article-12470"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/terrorist-helper-dsp.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">डीएसपी देवेन्द्र सिंह ने पूछताछ में कबूला | Terrorist helper</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> वांछित आतंकियों के साथ पकड़े गए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित डीएसपी देविन्दर सिंह से पूछताछ में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। पूछताछ में डीएसपी ने कबूला कि आतंकियों (Terrorist) को जम्मू और उसके बाद चंडीगढ़ (Chandigarh) पहुंचाने के लिए 12 लाख रुपये मिले थे। इसके बाद आतंकियों की योजना दिल्ली जाने की थी। यह जानकारी आईजी (कश्मीर) विजय कुमार ने मीडिया को दी। खुफिया सूत्रों ने बताया, ‘असली मकसद नवीद बाबू और उसके सहयोगी को कश्मीर से बाहर ले जाना था। इसके बाद इन्हें पाकिस्तान भागने में मदद करना था। नवीद बाबू शोपियां में आतंक का चेहरा था। इस आतंकी के ऊपर कई पुलिस अफसरों की हत्या का आरोप है।</p>
<h3>गणतंत्र दिवस पर हमले करने की थी योजना</h3>
<p style="text-align:justify;">खुफिया सूत्रों ने कहा कि आतंकवादियों (Terrorist) ने गणतंत्र दिवस पर हमले करने की योजना बनाई थी। बता दें कि गिरफ्तारी के वक्त देवेन्द्र सिंह की तैनाती श्रीनगर हवाई अड्डे पर जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा और एंटी-हाईजैकिंग यूनिट में थी। गत दिवस डीएसपी को निलंबित कर दिया गया और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मिले राष्ट्रपति सम्मान सहित उनके सभी अवार्ड वापस लिए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार पुलिस के अलावा आईबी, मिलिट्री इंटेलिजेंस, रॉ सहित कई खुफिया एजेंसियों ने देविन्दर से पूछताछ की। इंटेलिजेंस सूत्रों ने बताया कि पूछताछ में देवेन्द्र ने खुलासा किया कि उन्होंने आतंकियों को श्रीनगर स्थित अपने इंदिरा नगर वाले घर में पनाह दी थी। यह घर आर्मी के 15 कॉर्प्स हेडक्वार्टर के बगल में है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ऐसे खुला भेद</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>देवेंद्र सिंह कई हफ्तों से पुलिस के रडार पर थे। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>शोपियां के एसपी संदीप चौधरी ने देवेंद्र सिंह से जुड़े संदिग्ध कॉल को सबसे पहले रिकॉर्ड किया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>उन्होंने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>देवेंद्र सिंह आतंकी नवीद बाबू को श्रीनगर लाने कुछ दिन पहले शोपियां गया हुआ था। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>डीएसपी देवेंद्र सिंह अब नवीद बाबू और रफी को भागने में मदद कर रहा था। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>तीनों को जवाहर टनल से पहले पकड़ा गया।</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">घर से मिला हथियारों का जखीरा</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>देवेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने श्रीनगर के इंदिरा नगर स्थित उसके घर की तलाशी ली। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>यहां हथियारों का जखीरा मिला। पुलिस ने यहां से 5 ग्रेनेड, 3 एके-47 राइफल बरामद किए हैं।</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">बांग्लादेश में डॉक्टरी पढ़ रही हैं बेटियां</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>देवेंद्र सिंह (57) की एक संपत्ति श्रीनगर और दूसरी जम्मू में हैं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इसका परिवार त्राल में रहता है और यहां उसका सेब का बगान है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>देवेंद्र के माता-पिता दिल्ली में उसके भाई के पास रहते हैं। देवेंद्र सिंह की पत्नी शिक्षक है और इसके तीन बच्चे हैं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>दो बेटियां बांग्लादेश में डॉक्टरी पढ़ रही हैं, जबकि बेटा स्कूल जाता है।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2020 12:03:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली सरकार ने रद्द किए 40 लाख वाहनों के रजिस्ट्रेशन</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा 7  अप्रैल, 2015 को पुराने डीजल वाहनों  पर पाबंदी के दिए थे निर्देश नई दिल्ली (सच कहूँ) Edited By Vijay Sharma । दिल्ली सरकार ने  उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी में पंजीकृत 1.10 करोड़ वाहनों में से 40 लाख 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल और 10 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/registration-of-forty-lakh-vehicles-canceled-by-delhi-government/article-6531"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/vical.jpg" alt=""></a><br /><h2>राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा 7  अप्रैल, 2015 को पुराने डीजल वाहनों  पर पाबंदी के दिए थे निर्देश</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ) Edited By Vijay Sharma ।</strong> दिल्ली सरकार ने  उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी में पंजीकृत 1.10 करोड़ वाहनों में से 40 लाख 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल और 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों का पंजीकरण खत्म कर दिया है। दिल्ली सरकार ने यह जानकारी न्यायालय से साझा की, हालांकि शीर्ष अदालत ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि दिल्ली में इतने अधिक पुराने वाहनों के परिचालन पर पाबंदी लगाने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण और शीर्ष अदालत के 2015 के आदेशों पर अभी तक अमल नहीं किया गया है।</p>
<h2>दिल्ली सरकार ने क्या कहा?</h2>
<p>दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता वसीम कादरी ने पीठ से कहा कि इस तरह के वाहनों को दिल्ली की सड़कों पर चलने की इजाजत नहीं दी जायेगी। केन्द्र और केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने पीठ को बताया कि न्यायालय के 29 अक्टूबर के आदेश के अनुरूप प्रदूषण के बारे में शिकायत दर्ज कराने के लिये ट्विटर और फेसबुक पर नागरिकों की सुविधा के लिये अकाउंट खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बुधवार तक इन अकाउंट पर 18 शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने अपनी वेबसाइट का लिंक भी दिया है, जहां दिल्ली-एनसीआर में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों की सूची देखी जा सकती है।</p>
<ul>
<li>दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील से शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा सात अप्रैल, 2015 को अपने आदेश में दिल्ली-एनसीआर में 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों और 10 साल पुराने डीजल वाहनों के प्रचालन पर पाबंदी लगाने के निर्देश दिए थे।</li>
<li>यही नहीं, ऐसे वाहनों के प्रचालन पर पाबंदी लगाने के अधिकरण के निर्देशों के खिलाफ दायर याचिका शीर्ष अदालत ने मई, 2015 में खारिज कर दी थी।</li>
<li>पीठ ने कहा, ‘‘साढ़े तीन साल बीत गये परंतु ऐसा लगता है कि अधिकरण के आदेश और इस न्यायालय द्वारा उनकी पुष्टि के बाद भी उनपर अभी अमल नहीं हो रहा है। दिल्ली सरकार के वकील से कहा गया है कि वह अपने मुवक्किल को तत्परता से कार्रवाई करने की सलाह दें।’’</li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Nov 2018 08:37:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भ्रूण जांच की सूचना दो, 2 लाख का ईनाम पाओ</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ/ विनोद शर्मा फतेहाबाद। प्रदेश में लगातार बढ़ रहे भ्रूण हत्या के मामलों पर रोक लगाने के लिए एक सामाजिक संस्था ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में कहीं भी भ्रूण हत्या हो रही है तो आप उसकी जानकारी इस संस्था तक पहुंचाएंगे तो संस्था आपको 2 लाख रूपए इनाम के तौर पर देगी। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/notice-of-fetal-inquiry-will-meet-two-lakh/article-4976"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/fetal-information.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/ विनोद शर्मा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>फतेहाबाद।</strong> प्रदेश में लगातार बढ़ रहे भ्रूण हत्या के मामलों पर रोक लगाने के लिए एक सामाजिक संस्था ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में कहीं भी भ्रूण हत्या हो रही है तो आप उसकी जानकारी इस संस्था तक पहुंचाएंगे तो संस्था आपको 2 लाख रूपए इनाम के तौर पर देगी। और सूचना देने वाले का नाम भी गुप्त रखा जाएगा। रविवार को हिसार रोड स्थित पशु चिकित्सालय परिसर में आयोजित राह क्लब भूना की महत्वपूर्ण बैठक मेंं कन्या भ्रूण हत्या रोकने, किसानों को पशुपालन व कृषि की आधुनिक तकनीकों से रुबरु करवाने व होनहार विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने सहित विभिन्न मामलों में फैसले लिए गए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राह क्लब जागरुकता अभियान चलाएगा</h2>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर नव नियुक्त अध्यक्ष डा. परमजीत सिंह व महिला अध्यक्षा सुशीला कस्वां ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए जहां राह क्लब जागरुकता अभियान चलाएगा, वहीं इसे रोकने में मददगार लोगों को दो लाख का नकद ईनाम (कन्या भ्रूण हत्या बारे में सूचना देकर मदद करने वालों को) भी दिया जाएगा। यह ईनाम हरियाणा सरकार की ओर से घोषित एक लाख की रकम के अलावा दिया जाएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा होगी फोन नंबरों की सूची</h2>
<p style="text-align:justify;">लिंग जांच की सूचना के लिए बाकायदा राह क्लब भूना के पदाधिकारियों व सदस्यों के फोन नंबर की सूचि जारी की गई है। जल्द ही यह फोन नंबरों की सूचि विभिन्न स्कूलों, आंगनवाड़ी केन्द्रों व दूसरे सार्वजनिक व अन्य संस्थानों में चस्पा की जाएगी जिससे कि जरुरत पड़ने पर इस संबंध में जरुरी सूचना क्लब के पदाधिकारियों तक पहुंच सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jul 2018 05:12:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा बनाम लोक संस्कृति</title>
                                    <description><![CDATA[हाल ही में राजस्थान के समाचार पत्रों में एक खबर पढ़ने को मिली कि राजस्थान सरकार ने निर्णय किया है कि आने वाले शिक्षा सत्र में राजस्थान शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त सभी सरकारी व गैर सरकारी प्रारम्भिक व माध्यमिक स्कूलों में हर शनिवार को सामाजिक सरोकार से जुड़ी शिक्षा प्रदान की जायेगी। इसके लिये […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/education-public-culture/article-4305"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/lakhe.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हाल ही में राजस्थान के समाचार पत्रों में एक खबर पढ़ने को मिली कि राजस्थान सरकार ने निर्णय किया है कि आने वाले शिक्षा सत्र में राजस्थान शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त सभी सरकारी व गैर सरकारी प्रारम्भिक व माध्यमिक स्कूलों में हर शनिवार को सामाजिक सरोकार से जुड़ी शिक्षा प्रदान की जायेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिये माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने शिविरा पंचाग जारी किया है। शिक्षा विभाग के स्कूलों में प्रथम शनिवार को किसी महापुरूष के जीवन से सम्बन्धित प्रेरक जानकारी दी जायेगी। दूसरे शनिवार को दादी, नानी से जुड़ी प्रेरक कहानियां सुनायी जायेंगी। माह के तीसरे शनिवार को संत, महात्माओं, धर्मगुरूओं के प्रवचन करवाये जायेगें। चौथे शनिवार को महाकाव्यों पर प्रश्रोत्री होगी। पांचवे शनिवार को प्रेरक नाटकों का मंचन व राष्ट्रभक्ति गीतो का गायन होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा विभाग से उक्त आदेश जारी होते ही कई शिक्षक संगठनो ने सरकार के इस आदेश का यह कह कर विरोध करना शुरू कर दिया कि इससे शिक्षा का भगवाकरण होगा। मेरी नजर में सरकार का यह एक अच्छा कदम है। आज के दौर में विद्यार्थी दर्जनों किताबो व कापियों से भरे भारी भरकम बस्तो का बोझ उठाये मानसिक रूप से इतने दब चुके है कि उन्हे समाजिक गतिविधियों का ज्ञान ही नहीं रहता है। छात्र दिन भर अपनी पढ़ाई की चिंता में डूबा रहता है। आज छात्र बोर्ड की परीक्षा में 500 में 499 अंक प्राप्त करने लगा है। पहले के समय में प्रथम श्रेणी से पास होने वाला श्रेष्ठ छात्र माना जाता था। छात्रों के 70-75 प्रतिशत अंक आना तो बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। ऐसे में आज के समय में छात्रों के मध्य पढ़ाई को लेकर भारी प्रतिस्पर्धा चल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज हर बच्चे के अभिभावक भी चाहते हैं कि उनका बच्चा क्लास में सर्वाधिक अंक लाये। बच्चे भी अभिभावकों के दबाव में दिन भर किताबों में डूबे रहने लगे हैं। ऐसे में बच्चो की पूरी दुनिया किताबो के बस्तों व स्कूल तक ही सिमट कर रह गयी है। आज बच्चे को घर में क्या हो रहा है, क्या सामाजिक रीति-रिवाज, मान्यतायें है इससे उन्हे कोई सरोकार नहीं हैं। बच्चों की पूरी दुनिया तो अधिकाधिक अंक प्राप्त करने का प्रयास करने तक ही रह गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में राजस्थान सरकार का निर्णय एक नयी आस जगाता है। इस निर्णय से बच्चों को अपनी संस्कृति को, अपने स्थानीय रीति-रिवाजों को निकट से जानने, समझने का मौका तो मिलेगा ही उनकी जिन्दगी में एक नया नवाचार भी होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले के समय में छोटे बच्चे गांव के स्कूल में पढ़ते थे तब आज की तरह स्मार्ट फोन का जमाना नहीं था। उस वक्त सभी बच्चे रात में सोने से पहले घर के बड़े बुर्जुगों, दादी, नानी से कहानियां सुनते थे। गर्मी की छुट्टियों में बच्चे जब अपनी ननिहाल जाते थे तो उनको सबसे अधिक उत्सुकता नानी से कहानियां सुनने की होती थी। नानी भी बच्चों को बड़े चाव से कहानियां सुनाती थी। उस जमाने के बुर्जुगों को बहुत सारी कहानियां याद रहती थी जो रोजाना बच्चों को सोने से पहले सुनाया करती थी।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूलों में महापुरूषों के जीवन पर चर्चा करना, प्रेरक कहानियां सुनाना, धर्मगुरूओं के प्रवचन सुनाना, महाकाव्यों पर प्रश्रोत्री, प्रेरक नाटकों का मंचन करना कतई गलत नहीं हैं। हम जब स्कूल में पढ़ते थे तो गांव के स्कूल में प्रतिवर्ष दो-तीन नाटको का मंचन किया जाता था। स्कूल में खेले जाने वाले नाटकों के सभी पात्र स्कूल के अध्यापक व विद्यार्थी निभाते थे। कई दिन पहले से नाटक का रिहर्सल शुरू हो जाता था। नाटक देखने पूरा गांव उमड़ पड़ता था। नाटक के माध्यम से स्कूल में कुछ अतिरिक्त आय हो जाती थी जिससे गरीब बच्चों की फीस, किताब, कापी व ड्रेस की व्यवस्था की जाती थी। उसमें से कुछ पैसा स्कूल के कमरों में सफेदी करने पर भी खर्च किया जाता था। सफेदी बच्चे स्वंय ही करते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के तकनीकी युग में बच्चे अपने महापुरूषों, बड़ों-बुर्जुगों को भूलते जा रहे हैं। स्कूलों में महापुरूषो के जीवन पर चर्चा की जायेगी तो बच्चों में उनके बारे में जानने की जिज्ञासा उत्पन्न होगी। हमारे झुंझुनू जिले के खेतड़ी में स्वामी विवेकानन्द जी ने तीन बार यात्रा की थी व कई दिनों तक यहां ठहरे थे। उनको भगवाबाना व स्वामी विवेकानन्द नाम भी शिकागो धर्म सम्मेलन में जाते वक्त खेतड़ी के राजा अजीतसिंह जी द्वारा ही प्रदान किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मगर आज इस बात का ज्ञान कितने विद्यार्थियों को है। स्कूलों में जब महापुरूषों के जीवन पर चर्चा होगी तब स्वामी विवेकानन्द जी का प्रसंग जरूर आयेगा व विद्यार्थियों को उनके बारे में पता लग सकेगा। इसी प्रकार की अन्य पे्ररणादायक बातों से छात्र रूबरू होगें। स्कूलों में धर्मगुरू छात्रों को धर्म से जुड़ी सामाजिक एकता की बाते बतायेंगें तो उनकी सोच का दायरा बढ़ेगा। धर्म कोई भी हो सभी धर्मो में समाज को एकसूत्र में पिरोने की बातें होती हंै। कोई भी धर्म समाज को तोड़ने की शिक्षा नहीं देता हैं। सभी धर्म शान्ति के मार्ग पर चलने की राह दिखाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के प्रतियोगिता के दौर में मनुष्य एक दूसरे का प्रतिस्पर्धी बन कर रह गया है। वर्तमान समय में स्कूल शिक्षा का केन्द्र ना होकर पढ़ाई के कारखाने बन चुके हैं। हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा उसके पड़ोसी के बच्चे से अधिक अंक प्राप्त करें।</p>
<p style="text-align:justify;">ऊंची पढ़ाई पढ़ कर बड़े पद पर काम करें। अभिभावक प्रतिस्पर्धी के चक्कर में यह भी नहीं देखता की उसका बच्चा क्या पढ़ना चाहता है। उसकी किस विषय में रूचि है। बच्चों को उनकी रूचि का विषय नहीं मिलने पर सही ढ़ंग से पढ़ नहीं पाते हैं, उपर से कम अंक लाने पर घर वालों का डर। ऐसे माहौल में बच्चा अवसाद की स्थिति में आ जाता है व कई बार इसी प्रकार के तनाव के चलते वह गलत कदम उठा लेता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान का कोटा शहर कोचिंग के क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी मंडी बन चुका हैं। यहां प्रतिवर्ष लाखों छात्र पढ़ने आते हैं मगर तनाव के चलते प्रतिवर्ष दर्जनो छात्र आत्महत्या भी कर लेते हैं। हालांकि यहां से हर साल कई टापर भी निकलते हैं मगर आत्म हत्या करने वाले उनपर एक बदनुमा दाग बन जाते है। यहां पढ़ने वाले छात्र द्वारा आत्म हत्या करने का कारण पढ़ाई का दवाब रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन छात्रों के घरवाले उनपर लाखों रुपए खर्च कर उन्हे कोटा इस आस में पढ़ने भेजते हैं कि वहां जाकर वह प्रतियोगी परीक्षा अवश्य पास कर लेगा ऐसे में परीक्षा में असफल होने पर वे मानसिक दबाव में आकर गलत कदम उठा लेते हैं। जिसका खामियाजा उनके अभिभावकों को जिन्दगी भर उठाना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज की शिक्षा मात्र किताबी व कम्प्यूटर वाली रह गयी है। शिक्षा में व्यावहारिक पक्ष गायब हो गया है। शिक्षा का पूर्णत: व्यावसायी करण हो चुका है। इस प्रकार की शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों से व्यावहारिकता की उम्मीद करना बेमानी है। सरकारों को शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन कर इसे व्यवहारिक, रोजगारपरक व सामाजिक समरसता वाली बनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिये ताकि शिक्षा पूर्ण करने के बाद मात्र सरकारी नौकरी की आश ना रख अपने स्वरोजगार पर भी ध्यान केन्द्रित कर सके। जिससे शिक्षित बेरोजगारों की बढ़ती संख्या पर काबू पाया जा सके।</p>
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                <pubDate>Tue, 19 Jun 2018 08:11:07 +0530</pubDate>
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