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                <title>Government's - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>सीआईडी विभाग अभी भी मेरे पास : अनिज विज</title>
                                    <description><![CDATA[इसी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यहां जारी बयान में विज ने कहा कि मुख्यमंत्री चाहे तो सीआईडी विभाग गृहमंत्री से वापिस ले सकते हैं लेकिन वह मंत्रिमंडल की बैठक के बिना नहीं हो सकता, इसलिए सीआईडी अभी तक उनके पास ही है। उन्होंने कहा कि सरकारें वेबसाइटों से नहीं रूल आफ लॉ से चलती हैं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/home-minister-clarified-that-chief-minister-is-supreme/article-12328"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/vij-main.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सुप्रीम होते हैं (Anil Vij)</h1>
<p><strong>अंबाला (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने बुधवार को कहा कि सरकारें वेबसाईटों से (Anil Vij)  नहीं रूल आॅफ लॉ से चलती हैं। सीआईडी पर नियंत्रण को लेकर विज और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच तनातनी के बीच सरकारी वेबसाईट अपडेट करते हुए कहा गया है कि सीआईडी मुख्यमंत्री के पास है। इसी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यहां जारी बयान में विज ने कहा कि मुख्यमंत्री चाहे तो सीआईडी विभाग गृहमंत्री से वापिस ले सकते हैं लेकिन वह मंत्रिमंडल की बैठक के बिना नहीं हो सकता, इसलिए सीआईडी अभी तक उनके पास ही है। उन्होंने कहा कि सरकारें वेबसाइटों से नहीं रूल आफ लॉ से चलती हैं।</p>
<h3>गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सुप्रीम होते हैं( (Anil Vij)</h3>
<ul>
<li>चाहें तो ऐसा कर सकते हैं और सीआईडी उनसे वापिस ले सकते है</li>
<li> कानून के मुताबिक बिना कैबिनेट की मीटिंग के पास हुए और विधानसभा में पास किए ऐसा नहीं जा सकता</li>
<li>अभी तक इस मामले में कोई बैठक भी नहीं हुई हैं।</li>
<li>विज ने कहा कि अफसरशाही से उनका कोई झगड़ा नहीं है।</li>
<li> काम न करने वालों को ठीक करना उनका धर्म और कर्म हैं और यह कार्य वह आखिरी सांस तक करता रहेंगे।</li>
</ul>
<p> </p>
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</span></span></p>
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</div>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2020 16:35:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>भाषा को लेकर संवेदनशील हो सरकारें</title>
                                    <description><![CDATA[आज संसार में 6809 से अधिक भाषाएं और अनगिनत बोलियां है। जिसमें से एक भाषा हिन्दी भी है। हिन्दी संसार की दूसरी बड़ी भाषा है जिसका उपयोग सर्वाधिक युवा आबादी करती है। हिन्दी का व्यक्तित्व इसकी वर्णमाला के कारण विराट है। निस्संदेह, हिन्दी में सामर्थ्य की सुगंध है। उदाहरणार्थ, हम ‘कोण’ बोलेंगे तो हिन्दी में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/governments-are-sensitive-about-language/article-5935"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/kgjgfjf-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज संसार में 6809 से अधिक भाषाएं और अनगिनत बोलियां है। जिसमें से एक भाषा हिन्दी भी है। हिन्दी संसार की दूसरी बड़ी भाषा है जिसका उपयोग सर्वाधिक युवा आबादी करती है। हिन्दी का व्यक्तित्व इसकी वर्णमाला के कारण विराट है। निस्संदेह, हिन्दी में सामर्थ्य की सुगंध है। उदाहरणार्थ, हम ‘कोण’ बोलेंगे तो हिन्दी में लिखेंगे भी ‘कोण’ ही। ‘ण’ को हम ‘ण’ ही लिखेंगे, ‘न’ नहीं। परंतु उर्दू, अरबी, फ्रेंच और अंग्रेजी भाषा में ‘ण’ को ‘न’ ही लिखा जाएगा। इस प्रकार हिन्दी भाषा का ‘कोण’ अन्य भाषाओं में ‘कोन’ हो जाएगा। परिणामस्वरूप अर्थ में ही अंतर आ जाएगा। इससे सिद्ध है कि सामर्थ्य की जो सुगंध हिन्दी के पास है वह अन्य भाषाओं के पास नहीं। मातृभाषा जब मात्र कुछ लोगों की भाषा बनकर रह जाए तो उसका कैसा और कितना विकास होगा यह सहज चिंतनीय है। हिन्दी भाषा मादक भी है, आकर्षक भी है, मोहक भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यही कारण है कि रूस के वरान्निकोव और बेल्जियम के बुल्के भारत आकर हिन्दी को समर्पित हो गये। जाहिर-सी बात है कि गुलाम देश के पास अपनी कोई राज या राष्ट्रभाषा नहीं होती। परतंत्र राष्ट्र बिन भाषा के गूंगे अपाहिज की तरह ही होता है, जो अपनी आंखों के सामने सबकुछ देखता है, पर बोल नहीं सकता। समय की करवट के साथ हिन्दी का आकाश सूना होता गया। लोग अंग्रेजी को भूलाने के बजाय ओर भी इसके दीवाने होते गए। मां के जगह मम्मी और पिता की जगह डैड हो गया। बस, इसी में सब बैड हो गया ! ओर फिर हिन्दी को एक दिन की भाषा बनाकर ऐसे याद किया जाने लगा कि जैसी किसी की पुण्यतिथि हो। दरअसल, हमें अपनी भाषा का गौरव नहीं पता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उसका मूल्य हम भूल चुके है। हालात यह है कि आज हिन्दवासियों को अंग्रेजी की गाली भी प्रिय लगने लगी है। वस्तुत: सौंदर्य और सुगंध से परिपूर्ण हिन्दी का यश मिटता जा रहा है। आलम है कि हम हिन्दी को कुलियों की और अंग्रेजी को कुलीनों की भाषा मानते हैं। देश स्वाधीन है परंतु वैचारिक और मानसिक दृष्टि से हम आज भी दास हैं। इसी कारण हिन्दी को कूड़े-करकट का ढेर और अंग्रेजी को अमृत-सागर समझने की हमारी मान्यता आज भी नहीं बदली है। सवाल है कि हिन्दी के प्रति हीनता का बोध राष्ट्र को क्या उन्नति के शिखर पर ले जायेगा? स्मरण रहे कि कोई राष्ट्र अपनी भाषा का आदर किये बगैर विकसित एवं समृद्धशाली नही हो सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">आज भारत ही नहीं विदेश भी हिन्दी भाषा को अपना रहे हैं तो फिर हम देश में रहकर भी अपनी भाषा को बढ़ावा देने के बजाय उसको खत्म करने पर तुले हैं? आज भाषा को लेकर संवेदनशील और गंभीरतापूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। इस सवाल पर भी सोचना चाहिए कि क्या अंग्रेजी का कद कम करके ही हिन्दी का गौरव बढ़ाया जा सकता है? और आज आजाद भारत में हिन्दी कर्क रोग पीड़ित से क्यों है? लेकिन, अफसोस इस बात का भी है कि हम हिन्दी का यश बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध तो है पर नवभारत नहीं न्यू इंडिया में। यदि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का वास्तविक कायाकल्प करना चाहते हैं, तो हिन्दी को उसकी गरिमा पुन: लौटाये। डिजिटल इंडिया के इस युग में चरमराती हिन्दी को चमकाना होगा। तकनीकि और वैज्ञानिक दौर में हिन्दी के लिए अप्रत्यक्ष रुप से बाध्यता अनिवार्य करनी होगी।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Sep 2018 20:21:17 +0530</pubDate>
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                <title>आउटसोर्सिंग भर्ती मामला: भाजपा सरकार के गले की फांस बना कोर्ट का फेसला</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी भाजपा सरकार चंडीगढ़। कांग्रेस सरकार के आखिरी साल में लागू की गई पॉलिसियों के तहत नियमित हुए कर्मचारियों के मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद अब भाजपा सरकार के गले की फांस बन गया है, क्योंकि हाईकोर्ट ने पॉलिसियों के तहत लगे सभी करीब 4600 कर्मचारियों को हटाए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/outsourcing-recruitment-case-bjp-governments/article-4336"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kijk-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी भाजपा सरकार</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस सरकार के आखिरी साल में लागू की गई पॉलिसियों के तहत नियमित हुए कर्मचारियों के मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद अब भाजपा सरकार के गले की फांस बन गया है, क्योंकि हाईकोर्ट ने पॉलिसियों के तहत लगे सभी करीब 4600 कर्मचारियों को हटाए जाने का फैसला सुनाया था। साथ ट सोर्सिंग पॉलिसी के तहत लगे कर्मचारियों की जगह छह महीने में रेगुलर भर्ती करने का भी आदेश दिया है, जिनकी संख्या करीब सवा लाख है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब भाजपा सरकार को ये नहीं खल रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में सरकार इतनी जल्दी भर्ती कैसे करें। अभी हालही में इतनी भीर्तियां भाजपा सरकार नहीं कर सकती, इसी बात से परेशान भाजपा सरकार अब इस फरमान से निजात पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
इसी कडी मेेंं संज्ञान लेते हुए अब सभी महकमों से जिला वाइज उन कर्मचारियों की संख्या इकट्ठी करनी शुरू कर दी है जो आउट सोर्सिंग पॉलिसियों के तहत काम कर रहे हैं। मुख्य सचिव कार्यालय से इस संबंध में सभी महकमों के एचओडी को चिट्ठी जारी कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">
बता दें कि आउट सोर्सिंग पॉलिसियों के तहत सवा लाख कर्मचारी लगे हैं। हरियाणा में सरकार की आउट सोर्सिंग पॉलिसी-1 व 2 के तहत करीब सवा लाख कर्मचारी विभिन्न महकमों में काम कर रहे हैं। 14 हजार गेस्ट टीचर, 5 हजार कंप्यूटर टीचर्स एवं लैब सहायक, 2600 वोकेशनल टीचर्स10 हजार ग्रामीण सफाई कर्मी इन पॉलिसियों में आ रहे हैं। इनके अलावा बिजली निगम में 14 हजार, जनस्वास्थ्य विभाग में 12 हजार और हेल्थ विभाग में 15 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><h4 style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">HINDI NEWS </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">FACEBOOK</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">TWITTER</a> पर फॉलो करें।</h4>
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</p><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/outsourcing-recruitment-case-bjp-governments/article-4336</link>
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                <pubDate>Wed, 20 Jun 2018 13:28:22 +0530</pubDate>
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