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                <title>CentralGovernment - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>CentralGovernment RSS Feed</description>
                
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                <title>5000 से ज्यादा जमा पर यू-टर्न</title>
                                    <description><![CDATA[दो दिन में वापिस ली कड़ी शर्तें 500 और 2,000 रुपये के 2.2 अरब नए नोट जारी : आरबीआई Mumbai: रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआई) ने बंद किये जा चुके पुराने नोटों को 19 दिसंबर से 30 दिसंबर के बीच जमा कराने के लिए लगाई गई कड़ी शर्तें दो दिन बाद ही वापस ले ली […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/plus-more-than-5000-deposit-u-turn/article-604"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/rbi.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>दो दिन में वापिस ली कड़ी शर्तें</strong></li>
<li><strong>500 और 2,000 रुपये के 2.2 अरब नए नोट जारी : आरबीआई</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Mumbai:</strong> रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआई) ने बंद किये जा चुके पुराने नोटों को 19 दिसंबर से 30 दिसंबर के बीच जमा कराने के लिए लगाई गई कड़ी शर्तें दो दिन बाद ही वापस ले ली हैं। अब केवाईसी वाले खातों में बिना किसी पूछताछ के कितनी भी रकम जमा कराई जा सकेगी। केन्द्रीय बैंक ने बुधवार को एक नई अधिसूचना जारी कर कहा कि अब ये शर्तें ‘अपने ग्राहक को जानो’(केवाईसी) पूरा कर चुके खातों पर लागू नहीं होंगी। इससे पहले 19 दिसंबर को जारी अधिसूचना में उसने कहा था कि 30 दिसंबर तक<br />
पुराने नोटों के माध्यम से पाँच हजार रुपये से ज्यादा जमा कराने पर लोगों को लिखित में बताना होगा कि उन्होंने अब तक ये नोट जमा क्यों नहीं कराए। उनके जवाब को आॅडिट के लिए बैंक के रिकॉर्ड में रखे जाने की हिदायत दी गई थी। पाँच हजार रुपये या इससे कम जमा कराने पर कोई शर्त नहीं थी, लेकिन यह भी कहा गया था कि जैसे ही किसी खाते में पुराने नोटों के माध्यम से 19 दिसंबर से 30 दिसंबर के बीच जमा कुल राशि पाँच हजार रुपये से ज्यादा हो जाएगी तो उस स्थिति में भी जमाकर्ता को जवाब देना होगा। माना जा रहा है कि इस प्रावधान पर विपक्षी दलों के विरोध तथा जनता की व्यापक नाराजगी के मद्देनजर रिजर्व बैंक को नियम वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। आरबीआई ने जारी अधिसूचना में कहा कि उपरोक्त नियम की समीक्षा के बाद हम यह सलाह देते हैं, उक्त सर्कुलर के सब पैरा एक और दो केवाईसी पूरा कर चुके खातों पर लागू नहीं होंगे।’</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Dec 2016 17:05:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब नकद नहीं मिलेगा वेतन</title>
                                    <description><![CDATA[चैक या बैंक खाते में जाएंगे पैसे केन्द्रीय कैबिनेट का अहम फैसला New Delhi: केन्द्र ने बुधवार को वेतन भुगतान कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने का फैसला किया है। इसके तहत कंपनियां और औद्योगिक प्रतिष्ठान वेतन का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके या चेक से कर सकेंगे। एक सूत्र ने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वेतन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/no-longer-will-pay-cash/article-603"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/baithak.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>चैक या बैंक खाते में जाएंगे पैसे</strong></li>
<li><strong>केन्द्रीय कैबिनेट का अहम फैसला</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>New Delhi: </strong>केन्द्र ने बुधवार को वेतन भुगतान कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने का फैसला किया है। इसके तहत कंपनियां और औद्योगिक प्रतिष्ठान वेतन का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके या चेक से कर सकेंगे। एक सूत्र ने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वेतन भुगतान कानून, 1936 में संशोधन के लिए अध्यादेश का रास्ता चुना। इसके जरिए नियोक्ता तथा कुछ उद्योग वेतन का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके या चेक से कर सकेंगे। इसके अलावा नियोक्ताओं के पास वेतन का भुगतान नकद में करने का भी विकल्प होगा। सरकार आमतौर पर नए नियमों को तत्काल क्रियान्वित करने के लिए अध्यादेश लाती है। अध्यादेश छह माह के लिए वैध होता है। इस अवधि में सरकार को इसे संसद में पारित कराने की जरूरत होती है। वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2016 के तहत मूल कानून की धारा छह में संशोधन का प्रस्ताव है, जिससे नियोक्ता अपने कर्मचारियों को उनके वेतन का भुगतान चेक से या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से उनके बैंक खाते में डालकर कर सकेंगे। पिछले दिनों नोटबंदी पर हंगामे के बीच श्रम<br />
मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने संसद में यह विधेयक पेश किया था। इसके तहत राज्य सरकारें ऐसे उद्योग या प्रतिष्ठान तय कर सकती हैं, जो वेतन देने के लिए नकदीरहित तरीके का इस्तेमाल करते हैं। विधेयक में कहा गया है कि यह नई प्रक्रिया डिजिटल और कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था के उद्देश्य को पूरा करती है। यह कानून 23 अप्रैल, 1936 को अस्तित्व में आया था। इसके तहत वेतन का भुगतान सिक्के और मुद्रा नोटों या दोनों में किया जा सकता है। इसमें वेतन का भुगतान चेक या बैंक खाते के जरिए करने के प्रावधान को 1975 में शामिल किया गया। फिलहाल इस कानून के दायरे में प्रतिष्ठानों के कुछ श्रेणियों के वे कर्मचारी आते हैं, जिनका वेतन 18,000 रुपये मासिक से अधिक नहीं है। केन्द्र सरकार वेतन भुगतान के बारे में रेलवे, हवाई परिवहन सेवाओं, खान, तेल क्षेत्र और स्वयं के प्रतिष्ठानों के मामले में नियम बना सकती है। अन्य मामलों में राज्यों को फैसला करना होता है। कानून में राज्य स्तर पर संशोधन के जरिए आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, केरल और हरियाणा ने पहले ही चेक और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वेतन भुगतान का प्रावधन कर दिया है। फिलहाल कर्मचारी से लिखित में लेकर उसका वेतन चेक के जरिए या उसके खाते में सीधे डाला जा सकता है। <em>Agency</em></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/no-longer-will-pay-cash/article-603</link>
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                <pubDate>Wed, 21 Dec 2016 16:59:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘15 दिन में सामान्य होंगे हालात’</title>
                                    <description><![CDATA[नोटबंदी से दिक्कतों पर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार ने दिया जवाब मामले में सुनवाई के लिए कोर्ट ने तय किए 9 बिन्दु जोर से बोलने पर वकीलों को पड़ी फटकार New Delhi: केन्द्र सरकार इस मामले पर पूरी तरह निगरानी रख रही है। नोटबंदी को लेकर हालात किसी तरह बिगड़े नहीं हैं। यहां तक कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/things-will-be-normal-in-15-days/article-452"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/sc.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li>नोटबंदी से दिक्कतों पर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार ने दिया जवाब</li>
<li>मामले में सुनवाई के लिए कोर्ट ने तय किए 9 बिन्दु</li>
<li>जोर से बोलने पर वकीलों को पड़ी फटकार</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>New Delhi: </strong>केन्द्र सरकार इस मामले पर पूरी तरह निगरानी रख रही है। नोटबंदी को लेकर हालात किसी तरह बिगड़े नहीं हैं। यहां तक कि कोई दूधवाला या किसान इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं आया है। ये सब मामला राजनीति से प्रेरित है। यह बात एटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए कही। मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की खंडपीठ के समक्ष उन्होंने कहा कि पीएम ने 31 दिसंबर तक हालात सामान्य होने के लिए कहा था, जिसमें अभी भी वक्त है। 10-15 दिनों में सरकार हालात और सामान्य करेगी।वहीं सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी पर सुनवाई के लिए ऐसे नौ बिंदु तय किए, जिसके जरिये इस बात पर विचार किया जाएगा कि नोटबंदी का फैसला संवैधानिक है या नहीं। मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने कहा कि वह इन याचिकाओं की सुनवाई 14 दिसम्बर को करेगी। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि जरूरी हुआ तो इस मामले की सुनवाई पांच-सदस्यीय संविधान पीठ को सौंपी जाएगी। न्यायालय ने संकेत दिए हैं कि वह विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से सुनवाई करेगा। हालांकि खंडपीठ ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि वह आर्थिक नीति में बहुत ज्यादा दखल नहीं देना चाहती, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में दायर याचिकाओं की वजह से पैदा हुए बड़े सवालों पर विस्तृत सुनवाई जरूरी है। न्यायालय 14 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में इन बातों पर विचार करेगा कि लोगों को हो रही असुविधा को कम करने के लिए क्या फौरी उपाय हो सकते हैं? क्या हर हफ्ते 24 हजार रुपये निकालने की सीमा में बदलाव किया जा सकता है? जिला सहकारी बैंकों को फिलहाल पैसे जमा लेने की इजाजत दी जा सकती है या नहीं? न्यायालय इस बात पर भी विचार करेगा कि देश के अलग-अलग उच्च न्यायालयों में दायर मुकदमों को चलने दिया जाए या उन पर रोक लगा दी जाए? आगे की विस्तृत सुनवाई किन सवालों पर हो?<br />
शुक्रवार को लगभग डेढ़ घंटा चली सुनवाई में कई बार माहौल गर्म होता नजर आया। कुछ वकीलों के जोर से बोलने पर मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें कड़ी फटकार भी लगाई। केरल और महाराष्ट्र के जिला सहकारी बैंकों की ओर से मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदम्बरम ने इन बैंकों का काम ठप हो जाने की दुहाई दी। उन्होंने कहा कि इन बैंकों को न तो नोट बदलने की इजाजत है, न नोट जमा लेने की। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। पूरे देश में जिला सहकारी बैंकों को काम करने की इजाजत मिलनी चाहिए। इसका विरोध करते हुए एटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि जिला सहकारी बैंकों में बड़ी संख्या में किसान सोसाइटी के खाते हैं। ऐसी सोसाइटी में हजारों किसानों को सदस्य दिखाया जाता है। इस तरह की सोसाइटी पर प्रभावशाली लोगों का नियंत्रण होता है। इस बात की आशंका है कि हजारों किसानों का नाम लेकर बड़े लोगों के पैसे जमा होने लगेंगे। नकली नोट भी बड़े पैमाने पर जमा होंगे। इन बैंकों को अभी 20 दिन और इंतजार करना होगा। चिदम्बरम ने दावा किया कि नोटों की छपने की रफ्तार बहुत धीमी है। सिर्फ तीन लाख करोड़ के नोट अब तक छपे हैं। ऐसे में, नोट की पूरी आपूर्त्ति में पांच से छह महीने का वक्त लगेगा। इस पर एटर्नी जनरल ने दावा किया कि चार लाख करोड़ के नए नोट छप चुके हैं। इनमें से 3.5 लाख करोड़ बैंक में पहुंच चुके हैं। सरकार नकदी रहित लेनदेन प्रक्रिया को बढ़ावा दे रही है। जरूरी नहीं कि पूरे नोट की जरूरत पड़े ही।</p>
<p><strong>एक्सिस बैंक की ब्रांच में 450 करोड़ रुपये जमा</strong><br />
<strong>15 खाते मिले फर्जी, जांच जारी</strong><br />
नोटबंदी के बाद काला धन को सफेद करने के खेल में एक्सिस बैंक निशाने पर है। आय कर अधिकारियों ने दिल्ली के चांदनी चौक में एक्सिस बैंक के खातों का सर्वे किया है। इनमें से 15 बैंक अकाउंट फर्जी पाए गए हैं। इन खातों में बैंक अधिकारियों ने 70 करोड़ रुपये जमा कराए थे। केवाईसी (अपने ग्राहक को जानो) मानक पूरा नहीं करने वाले 44 खातों में 100 करोड़ रुपये जमा पाए गए हैं। अधिकारियों ने पाया है कि इस ब्रांच में 8 नवंबर के बाद से 450 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं। आय कर अधिकारियों को इसमें बड़ी गड़बड़ी की आशंका है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। इससे पहले एक्सिस बैंक की कश्मीरी गेट ब्रांच भी राडार पर था। वहां भी मामले की जांच चल रही है। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही एक्सिस बैंक ने नोटबंदी के बाद गैरकानूनी गतिविधियों में आरोपी पाए गए अपने 19 अधिकारियों को निलंबित किया है। कालाधन सफेद करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अपने दो प्रबंधकों की गिरफ्तारी के बाद एक्सिस बैंक ने फोरेंसिक आॅडिट के लिए केपीएमजी की भी नियुक्ति की है। यह संस्था इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए प्रणाली को चुस्त बनाने के उपाय सुझाएगी। एक्सिस बैंक के कार्यकारी निदेशक राजेश दहिया के अनुसार, बैंक ने 19 अधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें से छह कश्मीरी गेट शाखा के अधिकारी हैं।</p>
<p><strong>बैंकों ने जारी किए 4.27 लाख करोड़ रुपये</strong><br />
<strong>मुम्बई:</strong> देश भर के बैंकों ने 10 नवंबर से 7 दिसंबर के बीच 4,27,684 करोड़ रुपये जारी किए हैं। रिजर्व बैंक के अनुसार बैंकों ने अपने काउंटर या एटीएम के जरिये चार लाख 27 हजार 684 करोड़ रुपये जारी किए हैं। केन्द्रीय बैंक के मुताबिक 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के प्रचलन पर गत 8 नवंबर की मध्यरात्रि से प्रतिबंध लगाया गया था, जिसके कारण आरबीआई ने इन नोटों को रिजर्व बैंक, वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तथा शहरी सहकारी बैंकों के काउंटर पर जमा करने तथा बदलने की सुविधा दी थी।</p>
<p><em>सहकारी बैंकों को न तो नोट बदलने की इजाजत है, न नोट जमा लेने की। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। पूरे देश में जिला सहकारी बैंकों को काम करने की इजाजत मिलनी चाहिए। </em><br />
<strong><em>पी. चिदंबरम, वरिष्ठ अधिवक्ता</em></strong></p>
<p><em>जिला सहकारी बैंकों में बड़ी संख्या में किसान सोसाइटी के खाते हैं। ऐसी सोसाइटी में हजारों किसानों को सदस्य दिखाया जाता है। इस तरह की सोसाइटी पर प्रभावशाली लोगों का नियंत्रण होता है। इस बात की आशंका है कि हजारों किसानों का नाम लेकर बड़े लोगों के पैसे जमा होने लगेंगे। नकली नोट भी बड़े पैमाने पर जमा होंगे। इन बैंकों को अभी 20 दिन और इंतजार करना होगा। </em><br />
<strong><em>मुकुल रोहतगी, एटर्नी जनरल</em>  </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><em>Agency</em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/things-will-be-normal-in-15-days/article-452</link>
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                <pubDate>Sat, 10 Dec 2016 00:34:19 +0530</pubDate>
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