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                <title>‘15 दिन में सामान्य होंगे हालात’</title>
                                    <description><![CDATA[नोटबंदी से दिक्कतों पर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार ने दिया जवाब मामले में सुनवाई के लिए कोर्ट ने तय किए 9 बिन्दु जोर से बोलने पर वकीलों को पड़ी फटकार New Delhi: केन्द्र सरकार इस मामले पर पूरी तरह निगरानी रख रही है। नोटबंदी को लेकर हालात किसी तरह बिगड़े नहीं हैं। यहां तक कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/things-will-be-normal-in-15-days/article-452"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/sc.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li>नोटबंदी से दिक्कतों पर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार ने दिया जवाब</li>
<li>मामले में सुनवाई के लिए कोर्ट ने तय किए 9 बिन्दु</li>
<li>जोर से बोलने पर वकीलों को पड़ी फटकार</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>New Delhi: </strong>केन्द्र सरकार इस मामले पर पूरी तरह निगरानी रख रही है। नोटबंदी को लेकर हालात किसी तरह बिगड़े नहीं हैं। यहां तक कि कोई दूधवाला या किसान इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं आया है। ये सब मामला राजनीति से प्रेरित है। यह बात एटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए कही। मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की खंडपीठ के समक्ष उन्होंने कहा कि पीएम ने 31 दिसंबर तक हालात सामान्य होने के लिए कहा था, जिसमें अभी भी वक्त है। 10-15 दिनों में सरकार हालात और सामान्य करेगी।वहीं सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी पर सुनवाई के लिए ऐसे नौ बिंदु तय किए, जिसके जरिये इस बात पर विचार किया जाएगा कि नोटबंदी का फैसला संवैधानिक है या नहीं। मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने कहा कि वह इन याचिकाओं की सुनवाई 14 दिसम्बर को करेगी। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि जरूरी हुआ तो इस मामले की सुनवाई पांच-सदस्यीय संविधान पीठ को सौंपी जाएगी। न्यायालय ने संकेत दिए हैं कि वह विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से सुनवाई करेगा। हालांकि खंडपीठ ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि वह आर्थिक नीति में बहुत ज्यादा दखल नहीं देना चाहती, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में दायर याचिकाओं की वजह से पैदा हुए बड़े सवालों पर विस्तृत सुनवाई जरूरी है। न्यायालय 14 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में इन बातों पर विचार करेगा कि लोगों को हो रही असुविधा को कम करने के लिए क्या फौरी उपाय हो सकते हैं? क्या हर हफ्ते 24 हजार रुपये निकालने की सीमा में बदलाव किया जा सकता है? जिला सहकारी बैंकों को फिलहाल पैसे जमा लेने की इजाजत दी जा सकती है या नहीं? न्यायालय इस बात पर भी विचार करेगा कि देश के अलग-अलग उच्च न्यायालयों में दायर मुकदमों को चलने दिया जाए या उन पर रोक लगा दी जाए? आगे की विस्तृत सुनवाई किन सवालों पर हो?<br />
शुक्रवार को लगभग डेढ़ घंटा चली सुनवाई में कई बार माहौल गर्म होता नजर आया। कुछ वकीलों के जोर से बोलने पर मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें कड़ी फटकार भी लगाई। केरल और महाराष्ट्र के जिला सहकारी बैंकों की ओर से मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदम्बरम ने इन बैंकों का काम ठप हो जाने की दुहाई दी। उन्होंने कहा कि इन बैंकों को न तो नोट बदलने की इजाजत है, न नोट जमा लेने की। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। पूरे देश में जिला सहकारी बैंकों को काम करने की इजाजत मिलनी चाहिए। इसका विरोध करते हुए एटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि जिला सहकारी बैंकों में बड़ी संख्या में किसान सोसाइटी के खाते हैं। ऐसी सोसाइटी में हजारों किसानों को सदस्य दिखाया जाता है। इस तरह की सोसाइटी पर प्रभावशाली लोगों का नियंत्रण होता है। इस बात की आशंका है कि हजारों किसानों का नाम लेकर बड़े लोगों के पैसे जमा होने लगेंगे। नकली नोट भी बड़े पैमाने पर जमा होंगे। इन बैंकों को अभी 20 दिन और इंतजार करना होगा। चिदम्बरम ने दावा किया कि नोटों की छपने की रफ्तार बहुत धीमी है। सिर्फ तीन लाख करोड़ के नोट अब तक छपे हैं। ऐसे में, नोट की पूरी आपूर्त्ति में पांच से छह महीने का वक्त लगेगा। इस पर एटर्नी जनरल ने दावा किया कि चार लाख करोड़ के नए नोट छप चुके हैं। इनमें से 3.5 लाख करोड़ बैंक में पहुंच चुके हैं। सरकार नकदी रहित लेनदेन प्रक्रिया को बढ़ावा दे रही है। जरूरी नहीं कि पूरे नोट की जरूरत पड़े ही।</p>
<p><strong>एक्सिस बैंक की ब्रांच में 450 करोड़ रुपये जमा</strong><br />
<strong>15 खाते मिले फर्जी, जांच जारी</strong><br />
नोटबंदी के बाद काला धन को सफेद करने के खेल में एक्सिस बैंक निशाने पर है। आय कर अधिकारियों ने दिल्ली के चांदनी चौक में एक्सिस बैंक के खातों का सर्वे किया है। इनमें से 15 बैंक अकाउंट फर्जी पाए गए हैं। इन खातों में बैंक अधिकारियों ने 70 करोड़ रुपये जमा कराए थे। केवाईसी (अपने ग्राहक को जानो) मानक पूरा नहीं करने वाले 44 खातों में 100 करोड़ रुपये जमा पाए गए हैं। अधिकारियों ने पाया है कि इस ब्रांच में 8 नवंबर के बाद से 450 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं। आय कर अधिकारियों को इसमें बड़ी गड़बड़ी की आशंका है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। इससे पहले एक्सिस बैंक की कश्मीरी गेट ब्रांच भी राडार पर था। वहां भी मामले की जांच चल रही है। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही एक्सिस बैंक ने नोटबंदी के बाद गैरकानूनी गतिविधियों में आरोपी पाए गए अपने 19 अधिकारियों को निलंबित किया है। कालाधन सफेद करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अपने दो प्रबंधकों की गिरफ्तारी के बाद एक्सिस बैंक ने फोरेंसिक आॅडिट के लिए केपीएमजी की भी नियुक्ति की है। यह संस्था इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए प्रणाली को चुस्त बनाने के उपाय सुझाएगी। एक्सिस बैंक के कार्यकारी निदेशक राजेश दहिया के अनुसार, बैंक ने 19 अधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें से छह कश्मीरी गेट शाखा के अधिकारी हैं।</p>
<p><strong>बैंकों ने जारी किए 4.27 लाख करोड़ रुपये</strong><br />
<strong>मुम्बई:</strong> देश भर के बैंकों ने 10 नवंबर से 7 दिसंबर के बीच 4,27,684 करोड़ रुपये जारी किए हैं। रिजर्व बैंक के अनुसार बैंकों ने अपने काउंटर या एटीएम के जरिये चार लाख 27 हजार 684 करोड़ रुपये जारी किए हैं। केन्द्रीय बैंक के मुताबिक 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के प्रचलन पर गत 8 नवंबर की मध्यरात्रि से प्रतिबंध लगाया गया था, जिसके कारण आरबीआई ने इन नोटों को रिजर्व बैंक, वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तथा शहरी सहकारी बैंकों के काउंटर पर जमा करने तथा बदलने की सुविधा दी थी।</p>
<p><em>सहकारी बैंकों को न तो नोट बदलने की इजाजत है, न नोट जमा लेने की। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। पूरे देश में जिला सहकारी बैंकों को काम करने की इजाजत मिलनी चाहिए। </em><br />
<strong><em>पी. चिदंबरम, वरिष्ठ अधिवक्ता</em></strong></p>
<p><em>जिला सहकारी बैंकों में बड़ी संख्या में किसान सोसाइटी के खाते हैं। ऐसी सोसाइटी में हजारों किसानों को सदस्य दिखाया जाता है। इस तरह की सोसाइटी पर प्रभावशाली लोगों का नियंत्रण होता है। इस बात की आशंका है कि हजारों किसानों का नाम लेकर बड़े लोगों के पैसे जमा होने लगेंगे। नकली नोट भी बड़े पैमाने पर जमा होंगे। इन बैंकों को अभी 20 दिन और इंतजार करना होगा। </em><br />
<strong><em>मुकुल रोहतगी, एटर्नी जनरल</em>  </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><em>Agency</em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Dec 2016 00:34:19 +0530</pubDate>
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