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                <title>ladakh - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>लद्दाख के नये जिलों के गठन से ख्रड़ा हुआ विवाद, कारगिल नेताओं ने लगाया ‘विभाजन के प्रयास’ का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[ लद्दाख के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस केंद्र शासित प्रदेश में बनाये गये पांच नये जिलों का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया, वहीं कारगिल के कई राजनीतिक नेताओं ने इस कदम को सांप्रदायिक और क्षेत्रीय आधार पर क्षेत्र को विभाजित करने का ‘सोचा-समझा प्रयास’ करार दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/controversy-arose-over-the-formation-of-new-districts-of-ladakh/article-84040"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/ladakh.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>श्रीनगर (एजेंसी)। </strong>Ladakh: लद्दाख के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस केंद्र शासित प्रदेश में बनाये गये पांच नये जिलों का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया, वहीं कारगिल के कई राजनीतिक नेताओं ने इस कदम को सांप्रदायिक और क्षेत्रीय आधार पर क्षेत्र को विभाजित करने का ‘सोचा-समझा प्रयास’ करार दिया है। सक्सेना द्वारा जारी अधिसूचना के बाद नुब्रा, शाम, चांगथांग, जांस्कर और द्रास सहित पांच और जिलों को बनाये जाने से लद्दाख में जिलों की संख्या दो से बढ़कर सात हो गयी। कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के नेता सज्जाद कारगिली ने कहा कि जिलों की कुल संख्या को दो से बढ़ाकर सात करना प्रशासनिक सुधार से अधिक लद्दाख के लोगों के एकजुट लोकतांत्रिक और राज्य आंदोलन को विभाजित करने के उद्देश्य से उठाया गया एक सुनियोजित कदम प्रतीत होता है। उनहोंने आरोप लगाया</p>
<p style="text-align:justify;">कि यह विशेष रूप से बौद्ध और मुस्लिम समुदायों की सामूहिक आवाज को कमजोर करने का प्रयास है। लेह सर्वोच्च निकाय (एलएबी) के साथ, केडीए केंद्र सरकार से बातचीत कर रहा है और लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों, जिनमें राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची का दर्जा, रोजगार सुरक्षा और संसदीय प्रतिनिधित्व शामिल हैं, की मांग कर रहा है। एक बयान में, श्री कारगिली ने द्रास और जांस्कर जैसे क्षेत्रों को जिÞला का दर्जा दिये जाने का स्वागत करते हुए आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में क्षेत्रीय संवेदनशीलता, जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों की अनदेखी की गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए, कारगिली ने कहा कि लद्दाख की आबादी में लगभग 46.40 प्रतिशत मुस्लिम और 39.65 प्रतिशत बौद्ध हैं, लेकिन पुनर्गठन के परिणामस्वरूप पांच बौद्ध-बहुसंख्यक जिÞले और केवल दो मुस्लिम-बहुसंख्यक जिÞले बने हैं। उन्होंने इस विभाजन को ‘असंतुलित’ और ‘पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण मानसिकता’ का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने सांकू-सुरु, बारसू और शकरकत्ना को जिÞला दर्जा देने की मांग को भी दोहराया और कहा कि इन क्षेत्रों के निवासियं ने बार-बार ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन क्षेत्रों के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए, कारगिली ने कहा कि लद्दाख को सांप्रदायिक या क्षेत्रीय आधार पर विभाजित करने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध किया जाएगा, और इस बात पर जोर दिया कि केंद्र शासित प्रदेश की ताकत उसकी एकता और विविधता में निहित है। दूसरी तरफ लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद, कारगिल के मुख्य कार्यकारी पार्षद मोहम्मद जाफर अखून ने नये जिलों के गठन का स्वागत करते हुए, सांकू उपमंडल और शाकर चिकतान शारगोल उपमंडल को बाहर रखे जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘यह बहिष्कार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य कार्यकारी पार्षद ने कहा कि कारगिल जिले में 80 गांव शेष हैं, जबकि लेह में 44 हैं। उन्होंने कहा, ‘अपनी जनसंख्या और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए, कारगिल अधिक प्रशासनिक राहत का हकदार है। नवगठित जिलों में गांवों का आवंटन मनमाना प्रतीत होता है और इसमें स्पष्ट औचित्य का अभाव है।  उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और लद्दाख के उप राज्यपाल से आग्रह किया कि वे सांकू और शकर चिकतान-शारगोल को नये जिलों के रूप में तत्काल अलग अधिसूचना जारी करें। लद्दाख सीट से सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने कहा कि नये जिलों का गठन जमीनी स्तर पर शासन को मजबूत करने और क्षेत्र में विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, ‘मैं दृढ़ता से दोहराना चाहता हूं कि सांकू-सुरु और शकर-चिकतान-शारगोल लद्दाख के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में से हैं और जिले का दर्जा पाने की इनकी वास्तविक आवश्यकता है। इन क्षेत्रों की विशाल जनसंख्या और विस्तृत भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, एक अलग जिले का गठन न केवल उचित है बल्कि अत्यंत आवश्यक भी है। मुझे पूरी उम्मीद है कि इस वास्तविक मांग को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 15:20:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Viral News : लद्दाख यात्रा कैसे बन गई दुखदायी! जानें, विशेष वायरल लद्दाख यात्रा गाइड!</title>
                                    <description><![CDATA[Ladakh, a Dream Destination : चेन्नई (एजेंसी)। चेन्नई निवासी किरुबाकरण राजेंद्रन जिसकी हाल ही में की गई एक्स पर एक पोस्ट वायरल हो गई है, जिसे 6 मिलियन से अधिक लोगों ने देखा है। इस पोस्ट में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल लद्दाख यात्रा के अप्रत्याशित खतरों पर प्रकाश डाला गया है। अपने व्यक्तिगत अनुभव शेयर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/how-ladakh-travel-became-painful-know-the-special-viral-ladakh-travel-guide/article-60625"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/ladakh-travel-guide.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Ladakh, a Dream Destination : चेन्नई (एजेंसी)। चेन्नई निवासी किरुबाकरण राजेंद्रन जिसकी हाल ही में की गई एक्स पर एक पोस्ट वायरल हो गई है, जिसे 6 मिलियन से अधिक लोगों ने देखा है। इस पोस्ट में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल लद्दाख यात्रा के अप्रत्याशित खतरों पर प्रकाश डाला गया है। अपने व्यक्तिगत अनुभव शेयर करते हुए राजेंद्रन इस लुभावने क्षेत्र में अप्रत्याशित यात्रियों की प्रतीक्षा कर रहे संभावित दुखदायी सफर को उजागर करते हैं। Ladakh Travel Guide</p>
<p style="text-align:justify;">राजेंद्रन अपनी फैमिली के साथ एक आरामदायक छुट्टी पर गया था, लेकिन वह आरामदायक छुट्टी उसके लिए दुखदायी बन जाएगी, वह नहीं जानता था। उसकी छुट्टी ऑक्सीजन के स्तर के कम होने के कारण स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गई। राजेंद्रन ने शेयर किया कि लेह हवाई अड्डे पर उतरते ही उनके परिवार को सांस की दिक्कत होने लगी, जो समुद्र तल से 10,000 फीट से अधिक ऊपर स्थित है। यहां तक ​​कि साधारण गतिविधियाँ भी परिवार के लिए थका देने वाली साबित हुईं। Ladakh Travel Guide</p>
<h3 style="text-align:justify;">राजेंद्रन ने लद्दाख जाने वाले लोगों के लिए मार्गदर्शिका पोस्ट की।</h3>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">I went on a ten days family trip to Ladakh, what was suppose to be an adventure trip turned into a nightmare. If you are planning a Ladakh travel, this thread might help you in what you should expect once you land in Leh. 🧵 <a href="https://t.co/2sIjXab90G">pic.twitter.com/2sIjXab90G</a></p>
<p>— Kirubakaran Rajendran (@kirubaakaran) <a href="https://twitter.com/kirubaakaran/status/1818270533588504882?ref_src=twsrc%5Etfw">July 30, 2024</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">राजेंद्रन ने एक्स पर पोस्ट शेयर की, ‘‘कृपया ध्यान दें कि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने पर आॅक्सीजन की उपलब्धता कम हो जाती है। जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, वायुमंडलीय दबाव कम होता जाता है और प्रति सांस आॅक्सीजन के अणुओं की संख्या कम होती जाती है। समुद्र तल की तुलना में लेह/लद्दाख जैसी जगहों पर हवा में आॅक्सीजन कम होती है। विशेष रूप से नुब्रा घाटी और हनले जैसी जगहों पर, जहाँ ऑक्सीजन बहुत कम है। 18,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित खारदुंग ला दर्रे की भी यही स्थिति है। इन जगहों पर आॅक्सीजन बहुत कम है, जिससे सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है, यहां तक ​​कि कैब ड्राइवर भी आपको इन चोटियों पर 10 मिनट से ज्यादा बाहर खड़े न रहने के लिए कहते हैं।’’ Ladakh Travel Guide</p>
<h3 style="text-align:justify;">अनुकूल होने में लगे दो दिन</h3>
<p style="text-align:justify;">हालांकि राजेंद्रन ने कहा कि उन्हें और उनके परिवार को कठोर परिस्थितियों के अनुकूल होने में दो दिन लगे, लेकिन उन्हें सांस लेना और लद्दाख में ऊंचाई पर रहना मुश्किल लगा। इसलिए, उन्होंने अपनी बुकिंग रद्द कर दी और घर वापस जाने के लिए फ्लाइट पकड़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">राजेंद्रन ने निष्कर्ष निकाला, ‘‘छुट्टियाँ आरामदेह और मजेदार होनी चाहिए थीं, लेकिन इतनी रोमांचकारी नहीं, जिससे स्वास्थ्य को खतरा हो। लद्दाख बहुत खूबसूरत है, इसमें कोई दो राय नहीं, लेकिन यह हर किसी को पसंद नहीं आ सकता है।’’ कई एक्स यूजर्स ने राजेंद्रन को उनकी इस जानकारी को साझा करने के लिए धन्यवाद दिया, जबकि अन्य ने कहा कि आपने अपनी सलाह पोस्ट करने या अपनी यात्रा के अनुभव साझा करने के लिए एक्स का सहारा लिया है। Ladakh Travel Guide</p>
<p><a title="10th, 12th CBSE Compartment Result 2024: 10वीं, 12वीं का कम्पार्टमेंट रिजल्ट! ऐसे करें अपना रिजल्ट चेक!" href="http://10.0.0.122:1245/10th-12th-cbse-compartment-result-2024/">10th, 12th CBSE Compartment Result 2024: 10वीं, 12वीं का कम्पार्टमेंट रिजल्ट! ऐसे करें अपना रिजल्ट च…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Aug 2024 17:40:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Rahul Gandhi: पिता राजीव गांधी की 79वीं जन्मतिथि को राहुल ने बनाया यादगार</title>
                                    <description><![CDATA[राहुल ने बाइक से किया लद्दाख से पैंगोंग तक का सफर | Rahul Gandhi लद्दाख(सच कहूँ न्यूज)। राहुल गांधी अपने पिता राजीव गांधी की 79वीं जन्मतिथि को यादगार बनाने के लिए शनिवार को राइडर लुक में नजर आए। वे लद्दाख के दौरे पर हैं। बाइक द्वारा राहुल गांधी लद्दाख से पैंगोंग त्सो लेक के लिए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rahul-traveled-from-ladakh-to-pangong-by-bike/article-51373"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/rahul-gandhi.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">राहुल ने बाइक से किया लद्दाख से पैंगोंग तक का सफर | Rahul Gandhi</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>लद्दाख(सच कहूँ न्यूज)।</strong> राहुल गांधी अपने पिता राजीव गांधी की 79वीं जन्मतिथि को यादगार बनाने के लिए शनिवार को राइडर लुक में नजर आए। वे लद्दाख के दौरे पर हैं। बाइक द्वारा राहुल गांधी लद्दाख से पैंगोंग त्सो लेक के लिए रवाना हुए। इस दौरान उन्होंने रास्ते के कुछ फोटो भी खींचकर सोशल मीडिया पर शेयर किए। फेसबुक पोस्ट डालकर उन्होंने लिखा- ‘पैंगोंग त्सो जाने के रास्ते में। मेरे पिता कहते थे, ये दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में शामिल है।’ Rahul Gandhi</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल ने बताया कि वे 27 जून को दिल्ली के करोल बाग में मैकेनिक्स से मिले थे। उसको उन्होंने बताया था कि वे बाइक से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख की यात्रा करना चाहते हैं। उनके पास बाइक है, लेकिन वो पड़ी है, क्योंकि सिक्योरिटी वाले चलाने नहीं देते। 9 जुलाई को राहुल ने इस बातचीत का वीडियो यू-ट्यूब पर शेयर किया था। Rahul Gandhi</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश के सभी संस्थानों में अपने लोग भर रहा है। यह बात राहुल गांधी ने शुक्रवार को लद्दाख दौरे के दौरान कहे। उन्होंने कहा कि आरएसएस भाजपा की ही देन है, वही सब कुछ चला रही है। देश को 1947 में आजादी मिली और ये आजादी बनी रहे ये सुनिश्चित करने के लिए संविधान है। संविधान लागू करने के लिए ऐसे संस्थानों को स्थापित करना चाहिए, जो संविधान के विजन को सपोर्ट करते हों। भाजपा और आरएसएस सभी संस्थानों में अपने लोगों तैनाती कर रहे हैं। Rahul Gandhi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जनधन खातों की संख्या 50 करोड़ के पार" href="http://10.0.0.122:1245/the-number-of-jan-dhan-account-crossed-fifty-crores/">जनधन खातों की संख्या 50 करोड़ के पार</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2023 18:25:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लद्दाख में बड़ा हादसा, सैन्य गाड़ी पलटने से 7 जवानों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीनगर (एजेंसी) लद्दाख में शुक्रवार को तुरतुक के समीप सेना के एक वाहन के खाई श्योक नदी में गिरने से सात सैनिक की मृत्यु हो गयी और अन्य 19 सैनिक घायल हो गए। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना पूर्वाह्न 10 बजे परतापुर और तुरतुक के बीच […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/accident-in-ladakh-7-soldiers-killed-in-military-vehicle-overturning/article-33904"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/accident-in-ladakh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>श्रीनगर (एजेंसी)</strong> लद्दाख में शुक्रवार को तुरतुक के समीप सेना के एक वाहन के खाई श्योक नदी में गिरने से सात सैनिक की मृत्यु हो गयी और अन्य 19 सैनिक घायल हो गए। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना पूर्वाह्न 10 बजे परतापुर और तुरतुक के बीच घटी। एक अधिकारी ने कहा, ‘26 सैनिकों का एक दल अग्रिम ठिकाने की ओर जा रहा था। रास्ते में उनका वाहन फिसलकर श्योक नदी में गिर गया। अधिकारी ने बताया कि इस हादसे में सात सैनिकों की मृत्यु हो गयी और 19 घायल हो गए, इनमें कई बुरी तरह जख्मी हुए हैं। सेना ने तत्काल राहत और बचाव का अभियान शुरू कर दिया था, घायलों को वहां से निकालकर चिकित्सा के लिए ले जाया गया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 May 2022 18:32:07 +0530</pubDate>
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                <title>लद्दाख गतिरोध: भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच 12वें दौर की वार्ता कल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच बने सैन्य गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के कोर कमांडरों की 12वें दौर की वार्ता रविवार को होगी। सेना के सूत्रों के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारियों की यह बैठक नियंत्रण रेखा पर चीन की सीमा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ladakh-standoff-12th-round-of-talks-between-corps-commanders-of-india-and-china-tomorrow/article-25613"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/ladakh-standof.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
<strong>नई दिल्ली।</strong> पूर्वी लद्दाख में नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच बने सैन्य गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के कोर कमांडरों की 12वें दौर की वार्ता रविवार को होगी। सेना के सूत्रों के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारियों की यह बैठक नियंत्रण रेखा पर चीन की सीमा में मोल्दो क्षेत्र में सुबह साढ़े दस बजे होगी। दोनों पक्षों के बीच अब तक 11 दौर की वार्ता हो चुकी है और कमांडो के बीच अंतिम दौर की वार्ता 09 अप्रैल को हुई थी। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्ष बातचीत के दौरान हॉट स्प्रिंग और गोगरा हाइट्स क्षेत्र से सैनिकों को पीछे हटाने के बारे में मुख्य रूप से चर्चा करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों पक्षों के बीच पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय से पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध बना हुआ है। अब तक सैन्य कमांडरों की बातचीत में बनी सहमति के आधार पर पैगोंग झील क्षेत्र से सैनिकों को पीछे हटाया गया है। लेकिन कुछ अन्य विवादास्पद क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे हटाने को लेकर अभी तक दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई है। पिछले वर्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने-अपने समकक्ष मंत्रियों के साथ अलग-अलग मौकों पर विदेशों में आयोजित कार्यक्रमों में बातचीत की थी जिसके आधार पर दोनों पक्षों में नियंत्रण रेखा पर शांति तथा परस्पर विश्वास बढ़ाने के लिए सहमति बनी थी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jul 2021 19:19:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लद्दाख में चीन की हरकतों के बाद हिमाचल के सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[शिमला (एजेंसी)। पूर्वी लद्दाख में पेंगोंग झील के निकट घुसपैठ कर रहे चीनी सैनिकों के साथ भारतीयों जवानों की झड़प के बाद उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति के बाद हिमाचल प्रदेश में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। सेना के हैलीकाप्टर शिमला से लेकर किन्नौर के पूह खंड के कई सीमावर्ती क्षेत्रों और समदो सीमा पर कल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/increased-security-in-himachal-border-region-after-chinas-antics-in-ladakh/article-18018"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/alert-on-border-with-nepal-in-siddharthnagar.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>शिमला (एजेंसी)।</strong> पूर्वी लद्दाख में पेंगोंग झील के निकट घुसपैठ कर रहे चीनी सैनिकों के साथ भारतीयों जवानों की झड़प के बाद उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति के बाद हिमाचल प्रदेश में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। सेना के हैलीकाप्टर शिमला से लेकर किन्नौर के पूह खंड के कई सीमावर्ती क्षेत्रों और समदो सीमा पर कल से ही उड़ानें भर कर चीन की किसी भी नापाक हरकत पर निगराानी रखे हुये हैं। किन्नौर जिला उपायुक्त गोपाल चंद ने बताया कि सभी सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था चौकस कर दी गई है तथा यहां सेना के जवान तैनात हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तिब्बत सीमा के साथ पूह खंड के नमज्ञा, कुन्नोचारंग, नेसंग, पूह का रिशी डोगरी और छितकुल के साथ लगती तिब्बत सीमाओं पर भी सेना के जवान चीन के किसी भी दुस्साहस को पस्त करने के लिये चौकस हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से सेना बीच-बीच में हेलीकॉप्टर के माध्यम से सीमाओं का निरीक्षण कर रही है। पूह की प्रधान सुमन साना, कुन्नोचारंग के प्रधान पूर्ण सिंह नेगी, नेसंग के प्रधान अशोक नेगी, छितकुल की प्रधान राजकुमारी नेगी ने बताया कि किन्नौर जिले की तिब्बत के साथ लगतीं सभी सीमाएं सुरक्षित हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2020 16:05:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लद्दाख में बर्फीले तूफान,  10 लोग दबे</title>
                                    <description><![CDATA[राहत और बचाव कार्य में जुटी सेना कश्‍मीर(एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में बर्फीले तूफान से खारदूंगला दर्रे के पास कई वाहन बर्फ के नीचे दब गए हैं। बताया जा रहा है कि बर्फ के नीचे लगभग 10 लोग फंसे हुए हैं। सेना और पुलिस ने राहत और बचाव काम शुरू कर दिया है। खबरों के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">राहत और बचाव कार्य में जुटी सेना</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>कश्‍मीर(एजेंसी)।</strong> जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में बर्फीले तूफान से खारदूंगला दर्रे के पास कई वाहन बर्फ के नीचे दब गए हैं। बताया जा रहा है कि बर्फ के नीचे लगभग 10 लोग फंसे हुए हैं। सेना और पुलिस ने राहत और बचाव काम शुरू कर दिया है। खबरों के मुताबिक, इस हिमस्‍खलन में अभी तक तीन लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है।सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के एक अधिकारी ने कहा कि वाहन सुबह 7 बजे हिमस्खलन की चपेट में आए थे। उन्होंने कहा कि बीआरओ ने बर्फ के नीचे फंसे लोगों को बचाने के लिए तुरंत अपने जवानों और मशीनरी को लगा दिया। सेना और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें भी बचाव अभियान में जुटी हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि लद्दाख में बर्फ का पहाड़ खिसकने के बाद कई वाहन उसकी चपेट में आ गए। ये वाहन बर्फ के नीचे दब गए। घटना की जानकारी मिलने ही भारतीय सेना की टीम घटनास्थल पर पहुंची और राहत व बचाव अभियान शुरू किया। हालांकि यहां मौसम लगातार बदल रहा है। इसकी वजह से राहत और बचाव काम में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जम्‍मू-कश्‍मीर में इन दिनों पारा काफी नीचे चला गया है। घाटी बर्फ की चार से ढक गई है। लद्दाख में तो सफेद बर्फ के अलावा कुछ नजर ही नहीं आ रहा है। लोगों को अपने घरों से निकलने से पहले भी दस बार सोचना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने कश्मीर घाटी और हिमाचल प्रदेश में अगले दो दिन में जमकर बर्फबारी जारी रहने का पूर्वानुमान जताया है। ऐसे में आने वाले समय में हालात और खराब हो सकते हैं।</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Jan 2019 12:39:43 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गढ़ी केसरी के शुभम कौशिक ने फतह की लद्दाख की चोटी</title>
                                    <description><![CDATA[इससे पहले भी विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर भारत का ध्वज फहरा चुके हैं शुभम गन्नौर। गढ़ी केसरी के शुभम कौशिक ने 20.500 फिट की ऊंचाई पर स्थित लद्दाख की चोटी पर 15 जून को तिरंगा फहराया है, जीसकी चढ़ाई लोग 7 दिन में पूरी करते हैं, उस चढाई को शुभम ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/shubham-kaushik-top-of-ladakh/article-4427"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/subm-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1>इससे पहले भी विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर भारत का ध्वज फहरा चुके हैं शुभम</h1>
<p><strong>गन्नौर।</strong></p>
<p>गढ़ी केसरी के शुभम कौशिक ने 20.500 फिट की ऊंचाई पर स्थित लद्दाख की चोटी पर 15 जून को तिरंगा फहराया है, जीसकी चढ़ाई लोग 7 दिन में पूरी करते हैं, उस चढाई को शुभम ने 3 दिन में पूरा कर भारत का ध्वज फहराया। बता दे की शुभम ने इससे पहले विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर भारत का ध्वज फहरा चुके हैं। शुभम कौशिक दिल्ली के आदर्श नगर पंचवटी निवासी है।</p>
<p>शुभम ने बताया कि लद्दाख की चोटी को भी भारत का माउंट एवरेस्ट कहा जाता है, क्योंकि इसकी जो चढ़ाई होती है वह एवरेस्ट की तरह होती है। इस पर चढ़ाई करते समय मुश्किल तो होती है, साथ ही सांस लेना भी बड़ा मुश्किल होता है।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Jun 2018 12:34:51 +0530</pubDate>
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