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                <title>Pimples: चेहरे पर दाग-धब्बों से हो परेशान, तो अपनाएं ये समाधान पीएं ये हर्बल ड्रिंक</title>
                                    <description><![CDATA[चेहरे पर पड़े पिम्पल्स यानि दाग-धब्बे, मुंहासे आपकी खूबसूरती (Pimples) बिगाड़ने का काम करते हैं। दाग-धब्बे कई कारणों से हो सकते हैं। ये पेट संबंधी समस्याएं होने की वजह से भी हो जाते हैं तो वहीं धूल, प्रदूषित हवा के सम्पर्क में आने से भी आपके चेहरे पर कई समस्याएं हो सकती हैं। इतना ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/if-you-are-troubled-by-spots-on-the-face-then-adopt-this-solution-drink-this-herbal-drink/article-46001"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/pimples.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चेहरे पर पड़े पिम्पल्स यानि दाग-धब्बे, मुंहासे आपकी खूबसूरती (Pimples) बिगाड़ने का काम करते हैं। दाग-धब्बे कई कारणों से हो सकते हैं। ये पेट संबंधी समस्याएं होने की वजह से भी हो जाते हैं तो वहीं धूल, प्रदूषित हवा के सम्पर्क में आने से भी आपके चेहरे पर कई समस्याएं हो सकती हैं। इतना ही नहीं अगर आप हेल्दी खान-पान नहीं खाते हंै तो भी ये समस्या उत्पन्न हो सकती है। बहुत अधिक जंग फूड, आॅयली, अनहेल्दी फूड का सेवन करने से भी मुंहासों की समस्या उत्पन्न हो सकती है। अगर आप भी मुंहासे की समस्या से परेशान हैं तो आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है, सिर्फ आपको अपनी डाइट में कुछ हर्बल ड्रिंक को शामिल करना है। इन ड्रिंक्स के सेवन से दाग-धब्बों, मुंहासे से छुटकारा पा सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">राहत पाने हेतु पीएं ये हर्बल ड्रिंक्स | Pimples</h3>
<p style="text-align:justify;">1. हल्दी और नींबू ड्रिंक-</p>
<p style="text-align:justify;">हल्दी में एंटीआॅक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो मुंहासे दूर करने और संक्रमण से बचाने में मदद कर सकते हैं। नींबू में विटामिन सी पाया जाता है जो स्किन को हेल्दी रखने में मदद कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">2. आंवला एवं एलोवेरा ड्रिंक-</p>
<p style="text-align:justify;">आंवला और एलोवेरा दोनों को सेहत के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है। आंवला और एलोवेरा जूस को मिलाकर रोज सुबह पीने से मुंहासे की समस्या से राहत पा सकते हैं। इन दोनों में एंटीआॅक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो स्किन को हेल्दी रखने में मदद कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">3. फ्रूट्स ड्रिंक-Pimples</p>
<p style="text-align:justify;">संतरा, तरबूज, अनार जैसे फलों का जूस पीने से सेहत ही नहीं स्किन को भी हेल्दी रखा जा सकता है। इनमें पाए जाने वाले पोषक तत्व स्किन को हेल्दी और मुंहासों को दूर करने में मदद कर सकते हैं।</p>
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                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Apr 2023 14:57:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>प्रेरणास्त्रोत : मृत्यु से साक्षात्कार</title>
                                    <description><![CDATA[तीन मित्रों ने मृत्यु का साक्षात्कार करने की इच्छा एक महात्मा के समक्ष रखी महात्मा ने सामने एक गुफा की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘तुम लोग उस गुफा में जाओ। वहाँ मृत्यु से तुम्हारा साक्षात्कार हो जाएगा।’ तीनों तेजी से चलकर गुफा तक पहुँचे। गुफा में झांका तो देखा कि वहाँ तो सोने का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/face-to-death/article-12994"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/face-to-death.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">तीन मित्रों ने मृत्यु का साक्षात्कार करने की इच्छा एक महात्मा के समक्ष रखी महात्मा ने सामने एक गुफा की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘तुम लोग उस गुफा में जाओ। वहाँ मृत्यु से तुम्हारा साक्षात्कार हो जाएगा।’ तीनों तेजी से चलकर गुफा तक पहुँचे। गुफा में झांका तो देखा कि वहाँ तो सोने का ढेर लगा है। उन्होंने एक-दूसरे से कहा, मृत्यु तो यहाँ कहीं नहीं है। उसके बदले तो सोने का ढेर दिखाई दे रहा है। अभी यह सोना अपने-अपने घर ले चलें। बाद में फिर इस गुफा में आकर मृत्यु को ढूँढ़ लेंगे। इस विचार-विमर्श के बाद सोना घर ले जाने पर विचार हुआ। एक ने कहा, तुम दोनों पास के गाँव से रोटी और पानी ले आओ। मैं सोने की रखवाली करता हूँ। दो साथी भोजन और पानी लाने चले। पहला गुफा में ही रहा। थोड़ी देर में एक साथी भोजन लेकर लौटा। गुफा में जैसे ही उसने प्रवेश किया। वहाँ रखवाली के लिए मौजूद साथी ने तलवार से उसकी हत्या कर दी। एक और साथी जब थोड़ी देर बाद पानी लेकर घुसा तो उसने उसे भी मौत के घाट उतार दिया। दोनों साथियों को ठिकाने लगाने के बाद उसने सोचा कि अब सब कुछ निरापद हो गया। उसने उनका लाया भोजन खाकर सारा सोना अकेले ही घर ले जाने का निर्णय किया। लेकिन भाग्य की विडंबना! रोटी खाते ही उसे चक्कर आया और वह चल बसा। रोटी लाने वाले साथी ने उसमें जहर मिला दिया था। उसने सोचा था कि बाकी दो को जहर मिला खाना खिलाकर खत्म कर दूँगा और संपूर्ण स्वर्ण का मालिक बन जाऊँगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हाँ, तीनों साथियों ने गुफा में मृत्यु के दर्शन जरूर कर लिए।</h4>
<h2 style="text-align:justify;">कर्म एक साधना</h2>
<h4 style="text-align:justify;">एक कथा है कि एक खदान में हीरों को खोजने वाला थककर चूर हो चुका था। उसने बहुत कोशिश की पर उसको सफलता नहीं मिली थी। अब उसने आगे श्रम करने का विचार छोड़ दिया। वह बहुत दु:खी होकर अपने साथियों से बोला- ‘‘मैं तो अब इस खोज से बहुत थक चुका हूँ। अब तक मैंने 99999 निन्यानवें हजार सौ निन्यानवें पत्थर को हटाकर देख लिया है, परन्तु अभी तक उनमें एक कण भी हीरे का नहीं मिला।’’ उसके एक साथी ने हँसी में कहा कि एक और पत्थर को खोदकर देखो तो एक लाख की संख्या पूरी हो जाएगी। उसने कहा कि ‘‘अच्छा एक पत्थर और उठाकर देखता हूँ।’’ उसने एक पत्थर और उठाया। उस पत्थर को देखकर वह खुशी से चिल्ला उठा, अरे! ये तो हीरा है। कथा का सार है कि कर्म एक निरंतर साधना है, उसमें संयोंग या अकस्मात के लिए कोई स्थान नहीं है।</h4>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2020 11:53:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>उद्घाटन मैच में ओमान से भिड़ेगा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[मस्कट (ओमान)। भारतीय पुरुष हॉकी टीम वीरवार को यहां पांचवें एशियन चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट में मेज़बान ओमान के खिलाफ उद्घाटन मैच में उतरेगी जहां उसका लक्ष्य विजयी शुरुआत के साथ लय बनाए रखना होगा। भारत और ओमान वीरवार को यहां सुल्तान काबूस स्पोटर्््स कॉम्लैक्स में टूर्नामेंट के पहले मुकाबले के लिए उतरेंगे। विश्व की पांचवें […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/india-to-face-oman-in-inaugural-match/article-6330"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/india-to-face-oman-in-inaugural-match-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मस्कट (ओमान)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय पुरुष हॉकी टीम वीरवार को यहां पांचवें एशियन चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट में मेज़बान ओमान के खिलाफ उद्घाटन मैच में उतरेगी जहां उसका लक्ष्य विजयी शुरुआत के साथ लय बनाए रखना होगा। भारत और ओमान वीरवार को यहां सुल्तान काबूस स्पोटर्््स कॉम्लैक्स में टूर्नामेंट के पहले मुकाबले के लिए उतरेंगे। विश्व की पांचवें नंबर की टीम भारत टूर्नामेंट में शीर्ष रैंक टीम है और इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए एशियाई खेलों में कांस्य पदक के निराशाजनक अनुभव को पीछे छोड़ने का प्रयास करेगी। वर्ष 2014 में हुए एशियाई खेलों में आखिरी बार भारत और ओमान की भिड़ंत हुई थी जिसमें भारतीय टीम 7-0 से विजेता रही थी। भारत टूर्नामेंट में गत चैंपियन के तौर पर उतरेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उसने 2016 के संस्करण में पाकिस्तान को 3-2 से हराया था। भारतीय टीम ओमान के खिलाफ पहले मैच में खेलने के बाद 20 अक्तूबर को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से खेलेगा जबकि 21 अक्तूबर को उसका मैच जापान, 23 अक्तूबर को मलेशिया और 24 अक्तूबर को दक्षिण कोरिया से होगा। एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के आखिरी संस्करण में भारतीय टीम अपराजेय रही थी जिसमें उसने जापान को 10-2 से हराया, दक्षिण कोरिया से मैच 1-1 से ड्रॉ किया, पाकिस्तान को 3-2 से, चीन को 9-0 और मलेशिया को 2-1 से पूल चरण में हराया जबकि सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया को 5-4 से शूटआउट में हराया था। भारत और पाकिस्तान दोनों ने दो-दो बार एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के खिताब जीते हैं जबकि अच्छी लय में चल रही भारतीय टीम इस बार तीसरी बार खिताबी हैट्रिक के लिए उतरेगी। भारत ने वर्ष 2011 और 2016 में खिताब जीते थे जबकि पाकिस्तान ने 2012 और 2013 में खिताब जीते हैं।</p>
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                <pubDate>Thu, 18 Oct 2018 14:29:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चुनौतियों से समझौता नहीं, बल्कि सामना करें</title>
                                    <description><![CDATA[क्या आपको दशरथ मांझी याद है? वही दशरथ मांझी जिसने 22 वर्षों तक कठोर परिश्रम करते हुए छैनी-हथौड़े से 360 फुट लम्बे, 30 फुट चौड़े और 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काटकर सड़क बना दी। जिसके प्रयासों से अतरी और वजीरगंज की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर रह गई। हालांकि, यह घटना लगभग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/do-not-deal-with-challenges-but-face-it/article-4442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/article.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">क्या आपको दशरथ मांझी याद है? वही दशरथ मांझी जिसने 22 वर्षों तक कठोर परिश्रम करते हुए छैनी-हथौड़े से 360 फुट लम्बे, 30 फुट चौड़े और 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काटकर सड़क बना दी। जिसके प्रयासों से अतरी और वजीरगंज की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर रह गई। हालांकि, यह घटना लगभग 36 वर्ष पुरानी है, लेकिन हाल ही में ओड़िशा के एक व्यक्ति ने ऐसा ही वाकया दोहराया। बैतरणी गांव के एक ओर गोइनसिका नाम का पहाड़ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके दूसरी ओर नहर बहती है, लेकिन पहाड़ बीच में होने के कारण दइतरी और उसके आस-पास के खेतों में पानी पहुंचा पाना बहुत मुश्किल था। पानी के अभाव में दइतरी को मेहनत का आशातीत लाभ नहीं मिल पा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए दइतरी ने पहाड़ के बीच से रास्ता निकालने की ठानी। उसके पास साधन-संसाधन नहीं थे, लेकिन फिर भी उसने हार नहीं मानी। अपने भाईयों की मदद से उसने पहाड़ को चीरते हुए रास्ता निकालने का प्रण किया और जुट गया इस कार्य में। चार वर्षों तक अथक मेहनत करते हुए आखिर उसने सफलता हासिल कर ही ली।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने खेतों तक कल-कल करता पानी पहुंचा, तो मानो ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। पहले विरोध करने वाले लोग भी अब दइतरी के साथ खड़े दिखे और खड़े हों भी क्यों नहीं, अब सौ एकड़ क्षेत्र में खेती करने वालों को धान की पैदावार के लिए तरसना नहीं पड़ेगा। आज दइतरी खुश है, क्योंकि उसका सपना साकार हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">अब लोग उसे ‘कैनाल मेन’ के नाम से पुकारने लगे हैं। ठीक उसी तरह जिस तरह दशरथ मांझाी को आज भी लोग ‘माउंटेन मेन’ के नाम से जानते हैं। हालांकि दशरथ का माउंटेन मेन बनने का सफर भी बेहद चुनौतियों भरा था। वह बिहार के गहलौर गांव का रहने वाला था। वह जिस गांव में रहते थे, वहां से कस्बे के बीच एक पर्वत था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार मांझी इसी क्षेत्र में कार्य कर रहा था। उसकी पत्नी फाल्गुनी देवी उसके लिए खाना लेकर जा रही थी। रास्ते में वह एक दर्रे में गिर गई और दवाईयों के अभाव में उसकी मौत हो गई। इस घटना ने दशरथ का जीवन बदल कर रख गया। दु:खी मांझी ने यह प्रण लिया कि जो घटना उसके साथ हो गई, वह किसी और के साथ नहीं हो।</p>
<p style="text-align:justify;">बस, इसी संकल्प के साथ छैनी और हथौड़ी लेकर वह जुट गया और 1960 में प्रारम्भ हुई उसकी यह कर्मयात्रा 1982 में पूर्ण हुई। अब वह एक रास्ता बना चुका था और जैसा कि पहले बताया गया कि अब वहां से कस्बे तक पहुंचने की दूरी 55 से घटकर 15 किलोमीटर हो चुकी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">आज दशरथ मांझी दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके द्वारा किया गया कार्य उन्हें सदैव जिंदा रखेगा। मांझी के जीवन पर फिल्म बन चुकी है। उनकी कर्मण्यता ने अनेक पुस्तकों में स्थान पाया। उन्होंने इतिहास रचा, क्योंकि उन्होंने सिर्फ सपना देखा ही नहीं बल्कि इसे साकार किया। इसके लिए पूरे 22 साल तपस्या की। दइतरी भी इसी राह पर चला।</p>
<p style="text-align:justify;">एक ओर आज भी जहां ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन चुनौतीपूर्ण है। जहां पर्याप्त साधन नहीं हैं, इसके बावजूद दशरथ और दइतरी ने बता दिया कि इच्छाशक्ति हो और चुनौतियों का सामना करने का माद्दा हो तो यह बाधाएं मनुष्य के आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से बड़ी नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">दशरथ और दइतरी के साथ यही तो हुआ। उनसे पहले किसी ने समस्या का सामना करने का साहस नहीं जुटाया। वे मुसीबतों से समझौता करते गए। इस कारण वे अपनी कोई पहचान नहीं बना पाए।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी छाप नहीं छोड़ पाए, लेकिन दशरथ और दइतरी इनसे जुदा थे। मानो, ऐसे लोग मुसीबतों को हराने के लिए ही बनते हैं और ऐसे ही लोगों को दुनिया हमेशा याद रखती है। तो इस ‘संडे’ का ‘फंडा’ यह है कि चुनौती से समझौता नहीं बल्कि उसका सामना करना चाहिए। कठोर परिश्रम करते हुए हम हरेक बाधा को लांघकर सफलता को चूम सकते हैं और यही सफलता हमें भीड़ से अलग अलहदा पहचान दिला पाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हरि शंकर आचार्य</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 24 Jun 2018 08:13:55 +0530</pubDate>
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