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                <title>Creation - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>हरियाणा के पानी में कटौती की फिराक में पंजाब</title>
                                    <description><![CDATA[परंतु कहीं से भी राहत नहीं मिलने के चलते हरियाणा राज्य में सुप्रीम कोर्ट की तरफ अपना रुख किया हुआ है। हरियाणा अपने राज्य में अधिक सिंचित क्षेत्र होने के आधार पर 6.90 एमएएफ पानी लेने का दावा कई बार पेश कर चुका है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/demand-for-creation-of-new-tribunal-in-all-party-meeting-of-punjab/article-12709"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/demand-...jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">पंजाब की सर्वदलीय बैठक में नया ट्रिब्यूनल बनाने की उठी मांग (Demand)</h2>
<ul>
<li>
<h3>इंटर स्टेट रिवर वॉटर डिस्प्यूट एक्ट में संशोधन करने की करेगा मांग</h3>
</li>
</ul>
<h3></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>अश्वनी चावला चंडीगढ़।</strong> यमुना सतलुज लिंक नहर के तहत हरियाणा को मिलने वाले पानी को पंजाब की तरफ से देने की जगह अब मौजूदा समय में मिल रहे पानी को भी पंजाब सरकार छीनने की फिराक में है। जिसके चलते उन्होंने पंजाब में सर्वदलीय बैठक करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का ऐलान कर दिया है। पंजाब की सर्वदलीय बैठक में नया टर्मिनल बनाने की मांग की गई है। अगर इस तरह का कोई नया ट्रिब्यूनल बन जाता है और पहले से चल रहे पानी के बंटवारे को लेकर फिर से बंटवारा किया जाता है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान हरियाणा को हो सकता है। जिसके चलते पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे दक्षिण हरियाणा का हाल बद से बदतर हो सकता है।</p>
<h3> दक्षिण हरियाणा में पानी की किल्लत, नए सिरे से बंटवारा तो बढ़ेंगी मुश्किलें (Demand)</h3>
<p style="text-align:justify;">सर्वदलीय बैठक में प्रस्ताव पास किया गया है कि इंटर स्टेट रिवर वॉटर डिस्प्यूट एक्ट में उपयुक्त संशोधन करने के साथ-साथ ने ट्रिब्यूनल की स्थापना की जाए। जिसमें मौजूदा समय में आने वाले पानी का बंटवारा फिर से करने के लिए पूरी कार्रवाई होनी चाहिए। पंजाब राज्य का तर्क है कि जिस समय पानी का बंटवारा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली के बीच में हुआ था, उस वक्त 17 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी की उपलब्धता थी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">आज पानी की उपलब्धता 13 एमएएफ रह गई है।</li>
<li style="text-align:justify;">जिसमें से हरियाणा को 3.50 एमएएफ व राजस्थान को 8.60 से ज्यादा एमएएफ पानी जा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">दिल्ली को 0.20 व जम्मू को 0.65 एमएएफ पानी दिया जा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">जिसके चलते पंजाब के पास पानी कम रह रहा है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">रावी ब्यास के पानी पर फिर मंथन तो बिगड़ेंगे हालात (Demand)</h3>
<p style="text-align:justify;">सर्वदलीय बैठक में लिए फैसले के अनुसार अगर पानी के बंटवारे को लेकर फिर से ट्रिब्यूनल का गठन करते हुए बंटवारे पर मंथन हुआ तो हरियाणा पंजाब सहित राजस्थान में हालात काफी बिगड़ सकते हैं। क्योंकि आने वाले समय में लगातार जमीन के नीचे वाला पानी खत्म हो रहा है, जिसके चलते नदियों का पानी ही एकमात्र ऐसा विकल्प है, जिससे पानी की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। परंतु अब रावी ब्यास के पानी पर फिर से बंटवारे की बात करने के चलते हरियाणा सहित राजस्थान को झटका लग सकता है। ट्रिब्यूनल के गठित होने के चलते एसवाईएल के जरिए मिलने वाला पानी का मुद्दा खत्म होने के आसार पर पहुंच जाएगा।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जिस कारण दो दशकों से सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ने के बाद भी ।</li>
<li style="text-align:justify;">हरियाणा के हाथ में कुछ भी नहीं आने के आसार होंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">जबकि मौजूदा समय में आ रहे पानी में भी कटौती के आसार बन सकते हैं।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">पानी के बंटवारे को लेकर आए कई फैसले</h3>
<p style="text-align:justify;">स्वतंत्र विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय समिति की तरफ से फरवरी 1971 में हरियाणा राज्य को पानी आवंटन में 3.79 मिलियन एकड़ फीट पानी आवंटित किया गया था, जबकि उसके पश्चात योजना आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष डी.पी. धरे के नेतृत्व में बनी कमेटी ने काफी ज्यादा रिसर्च करने के पश्चात हरियाणा के पानी में कुछ कटौती करते हुए 3.74 मिलियन एकड़ फीट पानी देने की सिफारिश की थी। इसके पश्चात केन्द्र सरकार की तरफ से 24 मार्च 1976 को एक अधिसूचना जारी करते हुए पंजाब और हरियाणा को एक जैसा पानी का बंटवारा करते हुए 3.5-3.5 एमएएफ पानी को आबंटित किया गया था।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस पानी के आवंटन के लिए एसवाईएल नहर का प्रस्ताव किया गया।</li>
<li style="text-align:justify;">पंजाब सरकार की तरफ से केन्द्र की अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए चैलेंज किया था।</li>
<li style="text-align:justify;">जिसके बाद से दोनों राज्यों के बीच में पानी के बंटवारे को लेकर विवाद चलता रहा है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">हरियाणा को 6.90 एमएएफ पानी की जरूरत</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले 5 दशकों से हरियाणा ज्यादा पानी आवंटित करने की मांग को लेकर कई बार पंजाब से लेकर केन्द्र सरकार तक का दरवाजा खटखटा चुका है। परंतु कहीं से भी राहत नहीं मिलने के चलते हरियाणा राज्य में सुप्रीम कोर्ट की तरफ अपना रुख किया हुआ है। हरियाणा अपने राज्य में अधिक सिंचित क्षेत्र होने के आधार पर 6.90 एमएएफ पानी लेने का दावा कई बार पेश कर चुका है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">परंतु हरियाणा के इस दावे पर आज तक गौर नहीं फरमाया गया है।</li>
<li style="text-align:justify;">जिसके चलते ही 5 दशकों से हरियाणा राज्य आधे से कम पानी को लेकर ही अपना काम चला रहा है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">अब हरियाणा बुलाएगा सर्वदलीय बैठक</h3>
<p style="text-align:justify;">पंजाब की तरफ से की गई सर्वदलीय बैठक के बाद अब हरियाणा सरकार भी सर्वदलीय बैठक बुलाने पर विचार कर रही है। ताकि पंजाब की तरफ से इस तरह की मांग केन्द्र में पहुंचने से पहले ही हरियाणा सरकार पानी की डिमांड और मौजूदा स्थिति पर श्वेत पत्र तैयार करके केन्द्र सरकार तक पहुंचे कि वह पंजाब की तरफ से आने वाली किसी भी मांग को स्वीकार न करें। हरियाणा सरकार पंजाब की मांग को गैर वाजिब और गलत करार दे रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लटकाने की फिराक में पंजाब</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में किए गए केस को पंजाब अभी लंबे समय तक लगाना चाहता है, जिसके चलते ही वह इस तरह की हरकत कर रहा है। क्योंकि पंजाब पूरी तरह से इस पहलू को जानता है कि सुप्रीम कोर्ट में पंजाब के खिलाफ कई आदेश जारी हो चुके हैं और आने वाले दिनों में पंजाब सरकार को एक और झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर सकती है। जिसके तहत पंजाब को यमुना सतलुज लिंक नहर के जरिए हरियाणा को पानी देना होगा। पंजाब इस तरह की कार्रवाई से बचने के लिए सर्वदलीय बैठक करने के बाद केन्द्र के पास ट्रिब्यूनल की मांग को लेकर जा रहा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अगर केन्द्र सरकार ट्रिब्यूनल बनाने के मामले में विचार करना शुरू करती है।</li>
<li style="text-align:justify;">यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लटक सकता है।</li>
<li style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की तरफ से इस तरह के तर्क दिए जाएंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">जिसको लेकर कहीं न कहीं पंजाब को कुछ समय के लिए राहत मिलने के आसार बन सकते हैं।</li>
</ul>
<p> </p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2020 20:42:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानवीय योजनाओं की बजाए विकसित देशों का हथियार बनाने पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[मेरिका व रूस सहित विश्व के कुछ अन्य देश हथियारों की फैक्ट्री बन चुके हैं भले युद्ध व आतंकवाद से लड़ने के लिए हथियार जरूरी हैं लेकिन विकसित देशों के लिए जब हथियार आय का स्त्रोत बन जाएं तो विकासशील व गरीब देशों के लिए नई मुश्किलें पैदा हो जाती हैं। अमेरिका व रूस सहित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/emphasis-on-the-creation-of-weapons-of-developed-countries/article-6150"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/s-400-2.jpg" alt=""></a><br /><h2>मेरिका व रूस सहित विश्व के कुछ अन्य देश हथियारों की फैक्ट्री बन चुके हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">भले युद्ध व आतंकवाद से लड़ने के लिए हथियार जरूरी हैं लेकिन विकसित देशों के लिए जब हथियार आय का स्त्रोत बन जाएं तो विकासशील व गरीब देशों के लिए नई मुश्किलें पैदा हो जाती हैं। अमेरिका व रूस सहित विश्व के कुछ अन्य देश हथियारों की फैक्ट्री बन चुके हैं जिनकी जीडीपी में हथियारों का बड़ा योगदान है। ताजा मामले में भारत ने रूस के साथ करीब 40,000 करोड़ के मिसाईल का सौदा किया है। इससे पहले ऐसे कई समझौते अमेरिका, फ्रांस व इज्रराइल के साथ किए हैं।हथियार भारत की जरूरत है। पाकिस्तान व चीन जैसे पड़ोसियों के मंसूबों को देखते हुए भारत हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकता लेकिन भारत सहित अन्य देशों के आपसी टकराव ही विकसित देशों की आय बन गए हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">विकसित देशों ने खुद बना रखे हैं गुट</h2>
<p style="text-align:justify;">बेहद दुख की बात है कि जिस संस्था (संयुक्त राष्ट्र) का निर्माण ही दो विश्व युद्धों की बर्बादी को न दोहराने के लिए किया गया था उसी संस्था के सदस्य देश (अमेरिका, चीन, रूस व फ्रांस) हथियारों की फैक्टरियों को लगातार चला ही नहीं रहे बल्कि जो विकासशील देश हथियार खरीदने में देरी करते हैं उन पर शिकंसा भी कस देते हैं। इन आर्थिक नीतियों को देखते हुए आतंकवाद की कार्रवाईयां खेल प्रतीत होने लगी हैं। विकसित देशों ने खुद गुट बना रखे हैं और अपने-अपने साथी विकासशील देशों के साथ मित्रता के नाम पर अरबों के हथियार बेचे जा रहे हैं। विकासशील देशों का जितना पैसा हथियारों की खरीद में बह रहा है, उतने पैसे से उनके झुग्गियों में बसने वाले करोड़ों लोगों को शानदार घर बनाकर दिए जा सकते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, अनपढ़ता जैसी समस्याएं तो नजर भी नहीं आएंगी।</p>
<h2>नए-नए हथियारों का अविष्कार करने की बजाय कैंसर व अन्य भयानक बीमारियों को रोकने पर हो फोकस</h2>
<p>विश्व को केवल सुरक्षा की जरूरत नहीं बल्कि स्कूलों, कॉलेजों, यूनिवर्सिटियों, लैबोरेट्री, अस्पतालों, आधुनिक ट्रेनों व हवाई सेवाओं की आवश्यकता है। हथियारों की खरीद में प्रयोग किए जाने वाला पैसा भलाई कार्यों में इस्तेमाल किया जाए तो विश्व का नक्शा ही बदल जाएगा। परमाणु हथियारों का खात्मा करने के लिए विकसित देश पहल कर रहे हैं लेकिन लड़ाकू जहाज, मिसाइलों पर हो रहा खर्च आर्थिक बर्बादी ला रहे हैं। इस बर्बादी से आंखें नहीं फेरी जानी चाहिए। खुशहाल विश्व का सपना पूरा करना है तब केवल नए-नए हथियारों का अविष्कार करने की बजाय कैंसर व अन्य भयानक बीमारियों को रोकने के लिए खर्च करने की आवश्यकता है। युद्ध की बर्बादी कब होती है यह तो भविष्य की बात है लेकिन कैंसर जैसी बीमारियां हजारों जिंदगीयां लील रही हंै। विकसित देशों को नागरिक मुद्दों ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Oct 2018 09:29:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आबादी तथा सद्र ने की राजनीतिक गठबंधन बनाने की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[सद्र की पार्टी क्रमश: तीसरे और पहले स्थान पर नजफ, इराक (Varta): इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी तथा इराकी शिया क्लर्क एवं मिलिशिया नेता मुक्तादा अल- सद्र ने राजनीति गठबंधन बनाने की घोषणा की है। दोनों नेताओं ने शनिवार को नजफ में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उनका गठबंधन सांप्रदायिक और जातीय बंटवारे से हटकर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/announcement-of-creation-of-political-coalition-of-population-and-sadr/article-4454"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/bhadar.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सद्र की पार्टी क्रमश: तीसरे और पहले स्थान पर</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नजफ, इराक (Varta):</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी तथा इराकी शिया क्लर्क एवं मिलिशिया नेता मुक्तादा अल- सद्र ने राजनीति गठबंधन बनाने की घोषणा की है। दोनों नेताओं ने शनिवार को नजफ में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उनका गठबंधन सांप्रदायिक और जातीय बंटवारे से हटकर होगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले श्री सद्र तथा शिया मिलिशिया कमांडर हादी अल-अमिरी ने गठबंधन बनाने की घोषणा की थी। श्री अमिरी इरान के नजदीकी माने जाते हैं और उनकी पार्टी गत मई महीने में हुए संसदीय चुनावों में दूसरे स्थान रही है। वहीं श्री अबादी तथा श्री सद्र की पार्टी क्रमश: तीसरे और पहले स्थान पर रही है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/announcement-of-creation-of-political-coalition-of-population-and-sadr/article-4454</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Jun 2018 09:13:22 +0530</pubDate>
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