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                <title>Trade - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>भारत आसियान व्यापारिक संबंध व्यापक रणनीतिक स्तर पर</title>
                                    <description><![CDATA[नामपेन्ह (कंबोडिया) (एजेंसी)। भारत और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संघ (आसियान) ने पारस्परिक संबंधों को विस्तृत और प्रगाढ़ करते हुए इससे अब “व्यापक रणनीतिक भागीदारी” के स्तर पर ले जाने की घोषणा की है। यहां 19वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के बाद शनिवार को जारी संयुक्त घोषणा-पत्र में कहा गया है, ‘आसियान के हम सभी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/india-asean-trade-relations-at-a-comprehensive-strategic-level/article-39800"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/india-asean.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नामपेन्ह (कंबोडिया) (एजेंसी)।</strong> भारत और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संघ (आसियान) ने पारस्परिक संबंधों को विस्तृत और प्रगाढ़ करते हुए इससे अब “व्यापक रणनीतिक भागीदारी” के स्तर पर ले जाने की घोषणा की है। यहां 19वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के बाद शनिवार को जारी संयुक्त घोषणा-पत्र में कहा गया है, ‘आसियान के हम सभी सदस्य देश और भारत द्वारा एक ऐसी आसियान-भारत व्यापक रणनीति भागीदारी स्थापित करने की घोषणा करते हैं जो सार्थक ठोस और परस्पर लाभदायक होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत इस क्षेत्रीय संगठन के साथ तीन दशक पहले कुछ क्षेत्र विशेष से जुड़े मामलों पर भागीदार के रूप में जुड़ा था। अब यह भागीदारी इस समय रणनीतिक भागीदारी का रूप ले चुकी है। भारत आसियान संबंध के तीस वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में समर्पित 19वीं शिखर बैठक में इस संबंध को व्यापक रणनीतिक भागीदारी का रूप देने का यह निर्णय हुआ है ।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में काम करेंगे</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इसके तहत भारत और आसियान ने समुद्री नौवहन के क्षेत्र में और उन्नत सहयोग, आतंकवाद एवं सीमा पार से संचालित संगठित अपराधों से निपटने, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में संवाद का एक नया मंच शुरू करने , डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, फिनटेक के क्षेत्र में सहयोग के विस्तार की संभावनाओं का पता लगाने, नई खेती और खाद्य सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला को भरोसेमंद बनाने, परिवहन एवं संपर्क सुविधाओं के विस्तार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर रक्षा मंत्रियों के अनौपचारिक सम्मेलन के रूप में संवाद की एक नई पहल शुरू करने की घोषणा की है।</p>
<p style="text-align:justify;">आसियान शिखर बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया। उनके साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर भी कंबोडिया आए हैं। इस बैठक का आयोजन 40 में और 41 में आसियान शिखर सम्मेलन के साथ किया गया है। धनखड़ रविवार को भारत पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन में भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे। भारत आसियान शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णयों और उपराष्ट्रपति तथा विदेश मंत्री की द्विपक्षीय बैठकों के बारे में जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय में सचिव पूर्व सौरभ कुमार ने संवाददाताओं को बताया कि भारत और आसियान के नेताओं ने भारत आसियान मुक्त व्यापार समझौते की समीक्षा का दायरा तय करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब इसकी समीक्षा जल्द शुरू होगी।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Nov 2022 10:16:37 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते में देरी संभव</title>
                                    <description><![CDATA[लंदन। ब्रिटेन की लिज़ ट्रस सरकार की आव्रजन पर सख्ती के चलते भारत और ब्रिटेन के बीच एक बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता अंतिम समय में विफल हो गया है लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि चीन के “ सामान्य खतरे की धारणा” के कारण दोनो पक्षों के पास इस पर टिक रहने का एक कारण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/india-uk-trade-deal-delayed/article-39173"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/india-uk.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लंदन।</strong> ब्रिटेन की लिज़ ट्रस सरकार की आव्रजन पर सख्ती के चलते भारत और ब्रिटेन के बीच एक बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता अंतिम समय में विफल हो गया है लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि चीन के “ सामान्य खतरे की धारणा” के कारण दोनो पक्षों के पास इस पर टिक रहने का एक कारण है।” साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि सौदे की प्राथमिकता पर भी सवाल घूम रहे हैं, अब जब ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रज़ को पार्टी का नेता चुने जाने के ठीक एक महीने बाद उनकी सत्तारुढ कंजर्वेटिव पार्टी अब उन्हें बदलने का इरादा रखती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूगोव के नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार 80 प्रतिशत अभूतपूर्व मतदाताओं की ट्रज़ के बारे में नकारात्मक राय है, जो उन्हें ब्रिटेन के हालिया राजनीतिक इतिहास में सबसे अलोकप्रिय नेता साबित करती है। इस साल की शुरुआत में ब्रिटेन के पूर्व नेता बोरिस जॉनसन ने समझौते को “उन सभी में सबसे बड़ा” करार दिया गया था। इस पर सप्ताह के अंत में होने वाले हिंदू त्योहार दीवाली पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद थी। भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर समय सीमा निर्धारित की थी और दोनों पक्षों द्वारा बार-बार इस जोर दिया जाता रहा है। इसमें दुनिया की पांचवीं और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत और ब्रिटेन के बीच मौजूदा 29 अरब डॉलर के व्यापार को दोगुना करने की क्षमता है। बीबीसी ने कहा कि ब्रिटिश फर्मे विशेष रूप से कार- और व्हिस्की बनाने वाली कंपनियां उच्च करों के लिए बदनाम और प्रवेश में थकान भरी बाधाओं वाले उपभोक्ता बाजार तक बड़े पैमाने पर पहुंच हासिल करने के लिए तैयार थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिए इस सौदे से उच्च निवेश प्रवाह, विनिर्माण को बढ़ावा देने और ब्रिटेन में अपने नागरिकों के लिए आव्रजन नियमों को आसान बनाने की उम्मीद थी। फिर पिछले हफ्ते ब्रिटिश व्यापार सचिव केमी बडेनोच ने कहा कि सरकार “अब दीवाली की समय सीमा पर काम नहीं कर रही है”, लेकिन यह भी कहा कि दोनों पक्ष एक सौदे के “करीब” है और वे इस पर “अभी भी काम” कर रहे है। भारतीय मीडिया रिपोर्टों ने एजेंसी के सूत्रों के हवाले से पुष्टि की है कि सौदा जल्द ही किसी भी समय होने की संभावना नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नई दिल्ली में अटकलें लगाई जा रही थीं कि सौदे पर अगले साल ही हस्ताक्षर हो सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विभाग के एक प्रवक्ता ने एशिया में इस सप्ताह को बताया कि यह “गति के लिए गुणवत्ता का त्याग नहीं करेगा और केवल तभी हस्ताक्षर करेगा जब हमारे पास दोनों देशों के हितों को पूरा करने वाला सौदा होगा”,। यह एक ऐसा संकेत है कि लंदन अब मोदी द्वारा तय की गयी समय सीमा से मेल बिठाने के उत्सुक नहीं है।</p>
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                <pubDate>Fri, 21 Oct 2022 09:17:28 +0530</pubDate>
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                <title>मुक्त निर्यात लाइसेंस से भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग बढेगा: राजनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ब्रिटेन की भारत को मुक्त सामान्य निर्यात लाइसेंस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे दोनों देशों के उद्योगों के बीच सहयोग बढेगा। सिंह ने मंगलवार को ब्रिटेन के रक्षा खरीद मंत्री जेर्मी क्विन के साथ मुलाकात कर विमानन, पोत निर्माण और अन्य रक्षा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/free-export-license-will-increase-cooperation-between-india-and-uk-rajnath/article-32730"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/home-minister-rajnath-singh1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ब्रिटेन की भारत को मुक्त सामान्य निर्यात लाइसेंस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे दोनों देशों के उद्योगों के बीच सहयोग बढेगा। सिंह ने मंगलवार को ब्रिटेन के रक्षा खरीद मंत्री जेर्मी क्विन के साथ मुलाकात कर विमानन, पोत निर्माण और अन्य रक्षा उद्योग कार्यक्रमों तथा अवसरों के बारे में चर्चा की। रक्षा मंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘ ब्रिटेन के रक्षा खरीद मंत्री जेर्मी क्विन के साथ शानदार मुलाकात हुई। हमने विमानन, पोत निर्माण के क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों और दोनों देशों के बारे में रक्षा उद्योग कार्यक्रमों पर चर्चा की। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘मैं दोनों देशों के उद्योगों के बीच मुक्त सामान्य निर्यात लाइसेंस की घोषणा का स्वागत करता हूं। हम रक्षा क्षेत्र में साझीदार देशों के साथ सह विकास तथा सह उत्पादन की दिशा में काम कर रहे हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">I welcome the UK’s announcement of an Open General Export License to facilitate industry to industry collaboration between both the countries. </p>
<p>We are looking forward to co-development and co-production with partner nations in the defence domain.</p>
<p>— Rajnath Singh (@rajnathsingh) <a href="https://twitter.com/rajnathsingh/status/1518848557632999424?ref_src=twsrc%5Etfw">April 26, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Apr 2022 14:06:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते पर हुए हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते को मोदी ने बताया ऐतिहासिक नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और आॅस्ट्रेलिया के व्यापार, पर्यटन एवं निवेश मंत्री डैन टेहान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की मौजूदगी में भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (इंडआॅस एकता) पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-australia-economic-cooperation-and-trade-agreement-signed/article-31996"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/india-australia-trade-agreement.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते को मोदी ने बताया ऐतिहासिक</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और आॅस्ट्रेलिया के व्यापार, पर्यटन एवं निवेश मंत्री डैन टेहान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की मौजूदगी में भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (इंडआॅस एकता) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार पांच वर्ष में बढ़कर 45 से 50 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर पहुंचने की उम्मीद है, जो इस समय 27 अरब अमेरिकी डॉलर है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि दोनों देश बहुत कम समय में इस समझौते पर पहुंचे हैं, जो दोनों देशों के बीच परस्पर विश्वास का सबूत है। उन्होंने कहा कि यह समझौता वैश्विक आपूर्ति शृंखला को भरोसेमंंद बनाने और भारत-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में सहायक होगा। उन्होंने दोनों मंत्रियों और वार्ता में शामिल दोनों देशों के अधिकारियों की टीम को बधाई दी और कहा कि वह (मोदी) इससे बहुत खुश हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>इस समझौते से शिक्षा, व्यापार, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में विस्तार होगा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मॉरिसन ने कहा कि यह समझौत (इंडआॅस एकता) दोनों देशों के बीच निरंतर प्रगाढ़ हो रहे संबंधों में एक और ऐतिहासिक आयाम जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया कोयला, तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी), दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति के माध्यम से भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में सहयोग बढ़ा सकेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग में स्थिरता क्वाड समूह के नेताओं के बीच बातचीत का एक मुख्य विषय रहता है। मॉरिसन ने कहा कि इस समझौते से शिक्षा, व्यापार, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में विस्तार होगा और यह अवसरों का एक विशाल द्वारा खेलने वाला समझौता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत और ऑस्ट्रेलिया स्वाभाविक भागीदार</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वहीं, वाणिज्य मंत्री गोयल ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया स्वाभाविक भागीदार हैं और दोनों देशों ने कोविड-19 महामारी के दौरान दो भाइयों की तरह आपस में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री मॉरिसन के बीच घनिष्ठता और दोनों की प्रेरणा से यह समझौता इतनी शीघ्रता से हो सका है। उन्होंने कहा कि इससे आने वाले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापारी वर्तमान 27 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 45 से 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।</p>
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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 12:17:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>भारत और चीन सामरिक संबंध बढ़ाने के पक्षधर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत और चीन (India and China) ने रक्षा सहयोग और सामरिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के प्रति सहमति जताई है। भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों के बीच गुरुवार को यहां हुई शिष्टमंडल स्तर की वार्ता में इस बात पर जोर दिया गया। भारत की यात्रा पर आये चीन के रक्षा मंत्री […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/india-china-favor-increasing-trade-ties/article-5524"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/india-and-china.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारत और चीन <strong>(India and China)</strong> ने रक्षा सहयोग और सामरिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के प्रति सहमति जताई है। भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों के बीच गुरुवार को यहां हुई शिष्टमंडल स्तर की वार्ता में इस बात पर जोर दिया गया।</p>
<p>भारत की यात्रा पर आये चीन के रक्षा मंत्री जनरल वी फेंग्हे ने सुबह श्रीमती सीतारमण से मुलाकात की जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच शिष्टमंडल स्तर की वार्ता हुई। इससे पहले जनरल वी ने सलामी गारद का निरीक्षण किया।</p>
<h2>रक्षा मंत्री सीतारमण ने चीन के रक्षा मंत्री से की वार्ता</h2>
<p>श्रीमती सीतारमण ने बातचीत के बाद ट्वीट किया, ‘चीनी रक्षा मंत्री के साथ शिष्टमंडल स्तर की वार्ता हुई जिसमें भारत और चीन <strong>(India and China)</strong> के बीच रक्षा सहयोग और सामरिक संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। दोनों देशों की सेनाओं के बीच गत जुलाई में डोकलाम क्षेत्र में लगभग ढाई महीने चले गतिरोध के बाद चीन का कोई वरिष्ठ रक्षा अधिकारी पहली बार भारत यात्रा पर आया है।</p>
<p>समझा जाता है कि दोनों पक्षों ने बातचीत के दौरान सीमा पर परस्पर विश्वास बढ़ाने के उपायों तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। दोनों देशों के बीच लगभग साढ़े तीन हजार किलोमीटर लंबी सीमा है जिस पर कई क्षेत्रों में दोनों के बीच विवाद है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Aug 2018 16:28:15 +0530</pubDate>
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                <title>विश्व व्यापार संगठन को खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[भले ही किसी एक विचारधारा विशेष के लोग विश्व व्यापार संगठन की आलोचना करते हैं फिर भी वास्तविकता यह है कि इस संगठन को बचाया जाना व मजबूत किया जाना जरूरी है। केन्द्रीय वाणिज्य तथा उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने खुलासा किया है कि विश्व व्यापार संगठन बड़े नाजुक दौर से गुजर रहा है। भारत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/threat-to-the-world-trade-organization/article-4769"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/wto.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भले ही किसी एक विचारधारा विशेष के लोग विश्व व्यापार संगठन की आलोचना करते हैं फिर भी वास्तविकता यह है कि इस संगठन को बचाया जाना व मजबूत किया जाना जरूरी है। केन्द्रीय वाणिज्य तथा उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने खुलासा किया है कि विश्व व्यापार संगठन बड़े नाजुक दौर से गुजर रहा है। भारत की यह फिक्रमंदी वाजिब है। यदि इतिहास पर दृष्टियात करें तो उद्यौगिक प्रगति के बाद शक्तिशाली देशों के विकासशील व गरीब देशों से टकराव पैदा हो गए थे। इंग्लैंड व फ्र ांस ने भारत व अन्य देशों से कच्चा माल सस्ते दामों में लूटने के लिए हर हथकंडा अपनाया। पहले इन शक्तिशाली देशों ने मशीनरी व तकनीक से वंचित देशों के साथ व्यापार शुरु करने के बाद लूट को बरकरार रखने के लिए सत्ता पर भी कब्जा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई दो राया नहीं कि आज लोकतंत्रीय व मानववादी युग में सीधे तौर पर राजनीतिक दखलंदाजी तो खत्म हो गई है परंतु व्यापार में तानाशाही की आदत ज्यों की त्यों है। यह प्रवृति ही आज विश्व व्यापार संगठन के संकट की मुख्य वजह है। यहां भी गुटबाजी पैदा हो रही है। शक्तिशाली देश अपना माल बेचने के लिए विकासशील देशों पर दवाब बढ़ा रहे हैं, खासकर किसानों को दी जा रहीं सब्सिडीस खत्म करने पर जोर दे रहे हैं। विकासशील देशों में सरकारों पर सार्वजनिक दवाब है जिस कारण ये देश पक्षपात के विरूद्ध एकजुट हो रहे हैं। अमेरिका-भारत पर किसानों की सब्सिडीज खत्म करने का दवाब डाल रहा है, जिसका भारत व चीन द्वारा विरोध करना जायज है। अमेरिका का विश्व व्यापार संगठन के प्रति रवैया काफी सख्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">चाहे ट्रंप कह रहे हैं कि अमेरिका इस संगठन से बाहर नहीं होगा परंतु उनका यह कहना अपने आप में दुनिया को अमेरिका की अहमियत का अहसास करवाना है। अमेरिका, भारत, चीन में किसी भी देश का इस संगठन से बाहर होना सारी दुनिया के व्यापार को गड़बड़ा सकता है। संगठन के प्रमुख रोबर्टो ऐजवेडो का यह कहना बिल्कुल ठीक है कि यदि विश्व व्यापार संगठन ना होता तो विश्व में फिरे से विश्व युद्ध होता। संयुक्त व्यापार की नींव ईमानदारी, निष्पक्षता व कल्याणकारी सोच पर टिकी होती है। जब किसी देश का किसान लड़खड़ाता है तो वह दुनिया से ज्यादा कमाने की इच्छा रखता है, जो विवादों का कारण बनती है। विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों को ईमानदारी से दूसरों के हितों की रक्षा करनी चाहिए। संयुक्त व्यापार के बिना किसी भी देश का विकास संभव नहीं। आर्थिक तानाशाही का समय निकल चुका है।</p>
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                <pubDate>Tue, 10 Jul 2018 03:05:46 +0530</pubDate>
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                <title>बॉर्डर पार से थम गया व्यापार</title>
                                    <description><![CDATA[नोट की चोट: वाघा-अटारी पर भी नोटबंदी का असर, पाकिस्तान से ट्रक आने बंद पहले रोजाना 150 से ज्यादा ट्रक आते थे पाक से मजदूरों को भी नहीं मिल पा रही तनख्वाह ChandiGarh, Anil Kakkar: प्रदेश में कालाधन पर चोट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cross-border-trade-has-subsided/article-461"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/notes.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>नोट की चोट: वाघा-अटारी पर भी नोटबंदी का असर, पाकिस्तान से ट्रक आने बंद</strong></li>
<li><strong>पहले रोजाना 150 से ज्यादा ट्रक आते थे पाक से </strong></li>
<li><strong>मजदूरों को भी नहीं मिल पा रही तनख्वाह</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ChandiGarh, Anil Kakkar: </strong>प्रदेश में कालाधन पर चोट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद से अमृतसर के अटारी-वाघा पर क्रॉस बॉर्डर व्यापार में बड़ी कम नज़र आई है। हालात यहां तक है कि पाकिस्तान से गत दिनों एक भी ट्रक भारत में माल लेकर नहीं आया। कैश की कमी के कारण इधर के लगभग 1500 मजदूरों की तनख्वाहें रुकी हुई हैं। बता दें कि आम दिनों में पाकिस्तान से अटारी-वाघा बॉर्डर से करीबन 150 से ज्यादा ट्रक भारत में विभिन्न तरह का सामान लेकर पहुंचते हैं। जो कि भारत के बाजारों में बेचा जाता है। इन ट्रकों से माल-उतारने, लादने के लिए इंटेग्रेटिड चैक पोस्ट (आईसीपी) पर करीबन 1433 मजदूर रजिस्टर्ड हैं। जो कि महीने भर में मजदूरी से 12 से 15 हजार रुपए कमाते हैं। लेकिन नोटबंदी के बाद से बॉर्डर पार से ट्रक आना कम होते गए और अब हालात ये हैं कि एक भी ट्रक पाकिस्तान से भारत में दाखिल नहीं हो रहा। इसकी मुख्य वजह करंसी का कैश में न होना है। इधर के मजदूरों को व्यापारी उनकी मजदूरी के बदले में कैश नहीं दे पा रहे जिस कारण मजदूरों ने यहां ट्रक खाली करने से मना कर दिया है। एक अंग्रेजी दैनिक के अनुसार इन मजदूरों को लगभग 5 से 7 लाख रुपए कैश मजदूरी के रूप में दिए जाते हैं। मजदूरों के प्रतिनिधि बलविंद्र सिंह का कहना है कि पिछले 15 दिनों से उन्हें उनकी मजदूरी नहीं मिली। उनके परिवार बेहद आर्थिक तंगी से गुज़र रहे हैं। इसकी वजह व्यापारियों के पास कैश का न होना है। बलविंद्र ने बताया कि उरी हमले व सर्जीकल स्ट्राइक के बाद जब बॉर्डर पर गांव खाली करवा दिए गए थे तब भी पाकिस्तान से सामान लेकर ट्रक निरंतर आते रहे उन्हें रोका नहीं गया लेकिन नोटबंदी के बाद अब ट्रक आना बंद हो गए हैं। वहीं प्राइवेट कंपनी पंजाब कंटेनर सर्विस (पीसीएस) के मैनेजर का कहना है कि वे मजदूरों को उनका वेतन आॅनलाइन ट्रांसफर करने के लिए कह रहे हैं लेकिन मजदूर पैसा कैश में चाहते हैं। वे एटीएम और बैंकों की लंबी लाइनों में खड़े नहीं होना चाहते।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Dec 2016 04:50:32 +0530</pubDate>
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