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                <title>गांधी की खादी को मिला मोदी का सहारा</title>
                                    <description><![CDATA[बाल मुकुन्द ओझा गांधी की खादी एक बार फिर चर्चा में है। इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लोकप्रिय बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास किये जा रहे है। सरकार खादी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रमुख भारतीय ब्रैंड के रूप में स्थापित करने की योजना बना रही है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ही इस ब्रैंड […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/gandhis-khadi-found-modis-support/article-4532"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/gandi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
<p>गांधी की खादी एक बार फिर चर्चा में है। इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लोकप्रिय बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास किये जा रहे है। सरकार खादी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रमुख भारतीय ब्रैंड के रूप में स्थापित करने की योजना बना रही है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ही इस ब्रैंड का प्रचार कर सकेगा और खादी ब्रैंड पर उसका ही दावा होगा। खादी ग्रामोद्योग आयोग खादी को दुनियाभर में भारतीय मिशनों में और प्रदर्शिनियों में पेश करेगा और इसका प्रचार करेगा। इससे उन विदेशी कंपनियों को दिक्कतें हो सकती हैं जो खादी को ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत कराने की कोशिश में लगी हैं। सरकार की लगातार मुहिमों के दम पर मार्च 2019 में समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष के दौरान खादी उत्पादों की बिक्री में भारी उछाल की संभावना भी व्यक्त की जा रही है ।</p>
<p>खादी हमारे स्वतंत्रता आंदोलन और महात्मा गांधी की विरासत है। गांधी की खादी का मोदी को सहारा मिला है। खादी विकास की मोदी की योजना बाजारीकरण और लालफीताशाही की शिकार नहीं हुई तो लगता है वह दिन दूर नहीं जब खादी का जलवा एक बार फिर दुनिया को देखने को मिलेगा। इससे जहाँ खादी मजदूरों और कारीगरों को नया जीवनदान मिलेगा वहां सरकार के राजस्व में भी अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिलेगी। खादी की बिक्री में भी बढ़ोतरी हुई है जिसके कारण गरीब लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। वर्ष 2015-16 में खादी उत्पादों की बिक्री जहां 1,635 करोड़ रुपये की हुई थी वहीं 2016-17 में यह बढ़कर 2,005 करोड़ रुपये और 2017 -18 में 3900 करोड़ रुपए हो गई। वर्तमान में देश में खादी उत्पादों की वार्षिक बिक्री 39,00 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,000 करोड़ रुपये हो गई है जो एक रिकार्ड है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खादी को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं।</p>
<p>इससे खादी के उत्पादन व बिक्री में भारी वृद्धि हुई है। मोदी जैकेट व मोदी कुर्ते दुनिया भर में मशहूर हो गए हैं। मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 36वें संस्करण में कहा था कि खादी कपड़ा नहीं बल्कि आंदोलन है, जिसे आगे ले जाना चाहिए। मोदी ने कहा कि उन्होंने देखा है कि खादी के प्रति लोगों की रुचि बढ़ी है। पिछले 70 वर्षों में खादी उद्योग की खराब होती हालात को वर्तमान सरकार की योजनाओं से सहारा मिला है और आज खादी वैश्विक बाजार में अपनी नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। खादी ग्रामोद्योग आयोग भी इस दिशा में प्रयासरत है। सरकार के प्रयास रंग ला रहे है। पहले खादी केवल राजनीतिक वर्ग की पसंद थी लेकिन आम उपभोक्ता भी आजकल प्राकृतिक उत्पादों की ओर ज्यादा तवज्जोे दे रहे हैं जिससे ये उद्योग विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है। खादी अंतररष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना रहा है। विदेशी बाजारों में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार खादी योग के साथ भारत के सबसे लोकप्रिय ब्रांड में से एक है।</p>
<p>देश के खादी एवं ग्रामोद्योग में जान फूंकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी योजना बनाई है। वह इन उत्पादों के लिए अलग ग्राहक वर्ग बनाने जा रही है। अमीर ग्राहकों के लिए खादी उत्पादों का सुपर प्रीमियम सेगमेंट शुरू होगा। सरकार सुपर प्रीमियम सेगमेंट से अमीर ग्राहकों को खादी की तरफ आकर्षित करना चाहती है। इससे खादी के कपड़ों की पहुंच बढ़ाने के साथ ही उनकी बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी। खादी एक स्वदेशी सोच है जो शुरूआती दौर में भारत की गरीबी दूर करने में बहुत सहायक हुई थी। चरखा एक शक्तिशाली प्रतीक था, जिसका महात्मा गांधी ने विदेशी गुलामी और अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई के दौरान हथियार के रूप में उपयोग किया। आजादी के बाद खादी को वह स्थान नहीं मिला जिसका सपना गांधी ने संजोया था।</p>
<p>धीरे धीरे खादी बाजारीकरण का शिकार हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लंबे समय से खादी पहनते रहे हैं। वे खादी के ब्रांड एंबेसडर के रूप में उभर कर आये हैं। पिछले कुछ वर्षों को दौरान मोदी ने खादी को लोकप्रिय बनाने और इसे एक जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया था। उनका आग्रह है कि सभी लोग खादी के सामान खरीदें, खासतौर से गांधी जयंती के दिन। जब हम एक खादी खरीदते हैं, तो हम उन लाखों बुनकरों के जीवन में उजाला कर रहे हैं, जो दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं।आधुनिक समय में फैशन के साथ ही खादी की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। खादी किसी भी प्रकार से फैशन के मामले में पीछे नहीं है। खादी को आज हर उम्र के व्यक्ति पसंद कर रहे है।ं वर्तमान में खादी से बनी हर चीज मौजूद है, जैसे शर्ट, कुर्ता-सलवार, साड़ी, टॉप, हैट, बैग, चप्पलें, यहां तक कि ईयररिगंस आदि भी मार्केट में मिल रहे हैं। खादी को सिल्क, वूल और कॉटन के साथ मिक्स किया जा रहा है।</p>
<p>सिल्क और खादी के वस्त्रों को 50-50 प्रतिशत के अनुपात से बनाया जाता है। खादी और वूल के मेल से बने वस्त्र भी आपकी पर्सनेलिटी में चार चांद लगा देंगे। ओवरकोट, नाइटगाउन, जैकेट, लॉन्ग जैकेट, शॉल, स्टोल, टोपी, कंबल, जुराबें आदि खादी भंडार से अच्छी रेंज में आप ले सकते हैं। ये वस्त्र आपकी त्वचा को कोई नुकसान नहीं देंगे और लुक को बनाएंगे बेहतर। खादी के बने कपड़े गर्मी और सर्दी दोनों ही मौसम के अनुकूल होते हैं। गर्मी के मौसम में ये पसीने को सोख लेते हैं, साथ ही मजबूत होने के कारण सर्दियों में ये ठंड से भी बचाते हैं।</p>
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                <pubDate>Wed, 27 Jun 2018 10:13:41 +0530</pubDate>
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