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                <title>Asia - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>केरल बाढ़ में फंसा है तैराक साजन प्रकाश का परिवार</title>
                                    <description><![CDATA[केरल में कई दिनों से जारी है बाढ का प्रकोप|Kerala floods disaster जकार्ता (एजेंसी)। इंडोनेशिया में 18वें एशियाई खेलों की तैराकी (Kerala floods disaster) प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे तैराक साजन प्रकाश का परिवार इन दिनों केरल में आई भयानक बाढ़ से पीड़ित है, हालांकि व्यक्तिगत चिंताओं के बावजूद वह राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को निभाने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/swaroop-sajjan-prakashs-family-is-trapped-in-kerala-disaster/article-5500"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/parkash.jpg" alt=""></a><br /><h2>केरल में कई दिनों से जारी है बाढ का प्रकोप|Kerala floods disaster</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>जकार्ता (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इंडोनेशिया में 18वें एशियाई खेलों की तैराकी <strong>(Kerala floods disaster)</strong> प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे तैराक साजन प्रकाश का परिवार इन दिनों केरल में आई भयानक बाढ़ से पीड़ित है, हालांकि व्यक्तिगत चिंताओं के बावजूद वह राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को निभाने में जुटे हैं। 24 वर्षीय साजन के परिवार के पांच सदस्य बाढ़ में लापता हो गए थे। बाढ़ के कारण प्रकाश का घर भी पूरी तरह से नष्ट हो गया है। इसके बावजूद साजन ने एशियाई खेलों की तैराकी प्रतियोगिता में रविवार को शानदार प्रदर्शन किया और पुरुषों की 200 मीटर बटरफ्लाई के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय तैराक बन गए। प्रकाश पदक की दौड़ में पांचवें स्थान पर रहे। प्रकाश की प्रार्थनाएं काम आईं और उनके एक संबंधी ने फोन कर परिवार के सुरक्षित होने की सूचना दी। गौरतलब है कि केरल में आई भयंकर बाढ़ के कारण 350 से अधिक लोग मारे गए हैं।</p>
<h2>मुझे परिवार के सुरक्षित होने की सूचना दी| Kerela floods Disaster</h2>
<p style="text-align:justify;">भारतीय तैराक ने कहा, “मैं अपने परिवार के बारे में सोचकर ठीक से सो नहीं पा रहा था। मेरा उनसे कोई संपर्क नहीं था। इसलिए मैं चिंतित था। लेकिन मेरी चाचा ने मुझे परिवार के सुरक्षित होने की सूचना दी।” बुधवार को 100 मीटर बटरफ्लाई हीट में शीर्ष पर रहकर फाइनल के लिये क्वालीफाई करने के बाद उन्होंने कहा, “ मैं जब जकार्ता पहुंचा तब जानता था कि केरल में भारी बारिश हो रही है, लेकिन मुझे नहीं पता था कि स्थिति इतनी भयंकर हो जायेगी।” प्रकाश ने फाइनल में एक मिनट 57.75 सेकेंड का समय लेकर 200 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में पांचवां स्थान हासिल किया था। उन्होंने क्वालिफिकेशन के 1 मिनट 58.12 सेकेंड के अपने समय में सुधार किया लेकिन यह उन्हें पदक दिलाने के लिए काफी नहीं था। जापान ने इस स्पर्धा में स्वर्ण और रजत तथा चीन ने कांस्य पदक जीता था। प्रकाश ने वर्ष 2016 में हुए रियो ओलंपिक में भी हिस्सा लिया था।</p>
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<pre class="tw-data-text tw-ta tw-text-small" dir="ltr">Kerela Disaster, Jakarta, Asia, Games, 2018, Sports</pre>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Aug 2018 15:47:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>हैदराबाद में जन्मी एशिया की सबसे छोटी व हल्की बच्ची</title>
                                    <description><![CDATA[375 ग्राम वजनी बच्ची का जन्म, दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे छोटी बच्ची होने की दावा हैदराबाद (एजेंसी) तेलंगाना में हैदराबाद के रेनबो अस्पताल में 375 ग्राम वजन की बच्ची ने जन्म लिया। इसे दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे छोटी बच्ची होने का दावा किया जा रहा है। उसकी लंबाई केवल 20 सेमी है। लगभग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/asia-s-smallest-and-lightest-child-born-in-hyderabad/article-4939"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/new-born-baby-news.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">375 ग्राम वजनी बच्ची का जन्म, दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे छोटी बच्ची होने की दावा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हैदराबाद (एजेंसी)</strong> तेलंगाना में हैदराबाद के रेनबो अस्पताल में 375 ग्राम वजन की बच्ची ने जन्म लिया। इसे दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे छोटी बच्ची होने का दावा किया जा रहा है। उसकी लंबाई केवल 20 सेमी है। लगभग हथेली के साइज की। डॉक्टरों ने बताया कि बच्‍ची की डिलीवरी 25वें हफ्ते में ही कर दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर बच्‍चे गर्भ के 36वें से 40वें हफ्ते में पैदा होते हैं। इससे पहले पैदा होने वाले बच्‍चों को प्री-मेच्‍योर बेबी कहा जाता है। समय से पहले जन्‍म लेने वाले बच्‍चों के अंग पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं। उनके जीवित बचने की संभावना भी बेहद कम होती है। बच्ची को बचाना मुश्किल था। लेकिन चमत्कारी रूप से वह बच गई।</p>
<p style="text-align:justify;">वह अभी एकदम स्वस्थ है और अब उसका वजन ढाई किलो है। बच्ची का नाम चेरी रखा गया है। उसका जन्म 27 फरवरी, 2018 को हुआ था। दुनिया का सबसे छोटे साइज की बच्ची का जन्म जर्मनी में हुआ है। इस बच्ची की लंबाई 8.6 इंच और वजन केवल 229 ग्राम था।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Jul 2018 07:28:27 +0530</pubDate>
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                <title>एशिया के दिल में क्या है</title>
                                    <description><![CDATA[गत दिनों अमृतसर में संपन्न हुए हार्ट आॅफ एशिया के छठे मंत्रिस्तरीय सम्मलेन का केंद्र बिंदु निश्चित तौर पर आतंकवाद से त्रस्त एशिया ही था लेकिन जिस तरह रूस ने अफगानिस्तान के काउंटर टेररिज्म फ्रेमवर्क की राह में अड़ंगा लगाया और पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय कूटनीति पर प्रश्न खड़े किये उससे कुछ प्रश्नों का उठना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/what-is-at-the-heart-of-asia/article-462"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/heart-o-fasia.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गत दिनों अमृतसर में संपन्न हुए हार्ट आॅफ एशिया के छठे मंत्रिस्तरीय सम्मलेन का केंद्र बिंदु निश्चित तौर पर आतंकवाद से त्रस्त एशिया ही था लेकिन जिस तरह रूस ने अफगानिस्तान के काउंटर टेररिज्म फ्रेमवर्क की राह में अड़ंगा लगाया और पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय कूटनीति पर प्रश्न खड़े किये उससे कुछ प्रश्नों का उठना लाजिमी है। प्रश्न यह कि आखिरकार रूस का रुख भारत के प्रति बदला-बदला नजर क्यों आ रहा है? भारत को रूस ने सलाह दी कि इस प्रकार की आपसी आक्रामकता को शांति के लिए काम करने वाले मंचों पर नहीं उठाया जाना चाहिए। रूस का यह बदला हुआ तेवर भारत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।<br />
गौरतलब है कि रूस पहले भी ब्रिक्स सम्मेलन में आतंक को लेकर पाकिस्तान को अलग-थलग करने वाली भारत की मुहिम को झटका दे चुका है, जबकि रूस दशकों से भारत का प्रगाढ़ मित्र है। दरअसल, पाकिस्तान की रणनीति बड़ी तेजी से बदल रही है। वह पहले से अमेरिका के निकट रहा है, जबकि इन दिनों उसने चीन और रूस के साथ भी अपनी नजदीकी बढ़ा ली है। इसका प्रभाव भी अब साफ दिखने लगा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अभी तक चीन ही उसकी तरफदारी करता दिखता था, लेकिन अब रूस भी भारत को आंखें दिखाने लगा है। यह संकेत कुछ अच्छे नहीं है।<br />
हालांकि सम्मलेन के मंच से अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पाकिस्तान को आतंकवादी गतिविधियों के चलते खूब खरी-खोटी सुनाई और संयुक्त घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने पर पूरी सहमति देखी जा सकती है। फिलहाल इस सम्मेलन में अफगानिस्तान को भारत के साथ जबरदस्त दोस्ती निभाते हुए देखा जा सकता है। जिस तर्ज पर पाकिस्तान को अफगानिस्तान ने लताड़ा है उसे भारत अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रहा है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में आतंकवाद को लेकर दरारें आ रहीं थी, उससे पाकिस्तान को इस बात को लेकर पहले से ही आशंका थी कि अफगानिस्तान इस मंच से उस पर हमला कर सकता है।<br />
इसके अतिरिक्त पाक भारत की आक्रामक कूटनीति से पहले से ही डरा हुआ है वह जानता है कि भारत किसी भी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय मंच पर उसे घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ेगा। शायद यही कारण था कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज एक दिन सम्बन्धों में कुछ तनाव कम करने के उद्देश्य से भारत पहुँच गए थे और उन्होंने पहले अफगानी राष्ट्रपति से मुलाकात भी की थी ,पर पर अजीज के प्रयास निरर्थक चले गये क्योंकि भारत ने तो उसे लताड़ा ही बल्कि अशरफ गनी ने भी यह तक कह डाला कि जो पांच सौ करोड़ डॉलर की मदद उन्हें पाकिस्तान दे रहा है उसे वह स्वयं आतंकवाद को खत्म करने में प्रयोग करें।<br />
विदित हो हार्ट आॅफ एशिया अफगानिस्तान में शांति व स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2 नवम्बर, 2011 को तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में स्थापित किया गया था । दरसल अफगानिस्तान को आतंकवाद का केंद्र माना जाता था और वहां पर शांति एशिया में शांति व स्थिरता लाने का एक बड़ा माध्यम हो सकती है। एशिया के 14 देशों का यह संगठन क्षेत्रीय संतुलन साधने, समन्वय बिठाने साथ ही आपसी सहयोग बढ़ाने का भी काम करता है। 18 सहयोगी राष्ट्र और 12 सहायक और अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी इसमें शामिल हैं। अमृतसर में हुए हार्ट आॅफ एशिया का यह छठवां आयोजन था जिसका मुख्य उद्देश्य आतंकवाद का खात्मा है पर इस मामले में कितने कदम आगे बढ़े इसका भी लेखा-जोखा किया जाना चाहिए। इसकी खासियत घोषणापत्र में पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद का नाम शामिल मिल किया जाना है। दरअसल हार्ट आॅफ एशिया के इस छठे सम्मलेन को अपेक्षित रूप से सफल मान सकते हैं, क्योंकि हार्ट आॅफ एशिया के मंच से पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया गया है कि आतंकियों और हिंसक चरमपंथियों को पनाह देना शांति के लिए कितना बड़ा खतरा हो सकता है।<br />
इस बीच इस बात पर भी चर्चा जोरों पर है कि क्या भारत के राष्टÑीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सरताज अजीज के बीच कोई मुलाकात हुई है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी की ओर से बीते 3 दिसम्बर को विदेश मंत्रियों के लिए डिनर का आयोजन किया गया था। डिनर के बाद अजीत डोभाल और सरताज अजीत के बीच मुलाकात की बात कही जा रही है। पाकिस्तानी मीडिया मुलाकात होने का दावा कर रहा है जबकि भारत इससे इंकार कर रहा है। देखा जाए तो पाकिस्तानी मीडिया और पाकिस्तान सरकार समेत उसके तमाम प्रतिनिधि अक्सर बात को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करते रहे हैं साथ ही अपनी शेखी बघारने में पीछे नहीं रहते। बीते दिनों पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शरीफ ने तब हद कर दी जब उन्होंने यह कह डाला कि नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें न केवल शानदार व्यक्ति कहा बल्कि पाकिस्तान को सम्भावनाओं वाला देश करार दिया जबकि व्हाईट हाउस की ओर से इस पर कोई तवज्जो नहीं दिया गया। पाकिस्तानी मीडिया किसी अपवाह तंत्र से कम नहीं है और सरताज अजीज जैसे लोग किसी भी परिस्थिति को भुनाने में तनिक मात्र भी पीछे नहीं रहते हैं।<br />
फिलहाल हार्ट आॅफ एशिया के मंच पर पाकिस्तान की आतंकवाद के मामले में बोलती बंद हो गयी। लेकिन यह हमारे लिए चिंता का विषय है कि क्यों कुछ देशों का झुकाव पाकिस्तान की तरफ बढ़ रहा है। क्या एशिया के सभी देश अब आतंकवाद को भी अपनी कूटनीतिक चालों में शामिल कर चुके हैं। क्यों प्रत्येक मंच सभी देश खुलकर आतंकवाद के विरोध में सामने नहीं आते। यकीनन, इस पूरे परिदृश्य में अब भारतीय कूटनीतिज्ञों को समझ लेना चाहिए कि जब पाकिस्तान के साथ भारत जूझेगा, तो उसके लिए विश्व समुदाय के ताकतवर देशों में से भारत के पक्ष में कौन खड़ा होगा? अब भारत को सोचना होगा कि आखिर वह किस रास्ते चले? इसके आलावा भारत अब यह भी टटोले कि आखिरकार एशिया के दिल में क्या है। <em>पार्थ उपाध्याय </em></p>
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                <pubDate>Sat, 10 Dec 2016 04:59:02 +0530</pubDate>
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