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                <title>आतंकवाद पर कमजोर पड़ता संयुक्त राष्ट्र</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व में अमन शांति कायम रखने के उद्देश्य से बनाई राष्ट्रीय संस्था United Nations Weakens On Terrorism संयुक्त राष्ट्र विश्व भर में बढ़ रहे आतंकवाद के सामने कमजोर पड़ती दिख रही है। यह संस्था किसी विवाद से संबंधित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का पक्ष रखने का स्थान बनकर रह गई है। कार्रवाई पर अमल न के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/united-nations-weakens-on-terrorism/article-6090"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/united-nations-weakens-on-terrorism.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विश्व में अमन शांति कायम रखने के उद्देश्य से बनाई राष्ट्रीय संस्था <strong>United Nations Weakens On Terrorism</strong> संयुक्त राष्ट्र विश्व भर में बढ़ रहे आतंकवाद के सामने कमजोर पड़ती दिख रही है। यह संस्था किसी विवाद से संबंधित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का पक्ष रखने का स्थान बनकर रह गई है। कार्रवाई पर अमल न के बराबर है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ पेश तथ्यों पर गौर नहीं किया जा रहा। एक देश (पाकिस्तान) आतंकवाद को सरकारी सरंक्षण देकर भी संयुक्त राष्ट्र का सदस्य रह सकता है। पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में मारे गए आतंकवादी बुरहान वानी के नाम पर टिकट जारी कर यह दिखाया है कि इस्लामाबाद आतंकवाद को खुला समर्थन करता है। जबकि वानी की आतंकी कार्रवाईयों को उसके पिता सहित परिवार का कोई भी सदस्य स्वीकार नहीं करता।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र भी इस्लाम व आतंकवाद को एक नहीं मानता लेकिन पाकिस्तान <strong>United Nations Weakens On Terrorism</strong> में इस्लाम व आतंकवाद को जोड़कर पेश किया जा रहा है। पाकिस्तान की दोगली नीतियों का खुलासा करने के बावजूद संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान लगातार बचता आ रहा है और चीन जैसा देश सुरक्षा परिषद् में उसका समर्थन कर रहा है। चीन ने एक बार फिर भारत को वांछित आतंकवादी मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने में बाधा डालकर संयुक्त राष्ट्र को बेजान संस्था साबित कर दिया है। दरअसल संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, चीन व रूस के लिए एक खिलौना बनकर रह गया है। यह संस्था आतंकवाद के कारण उजड़े परिवारों के लिए हजारों अरबों रुपए की मदद बांट रही है, लेकिन आंतकवाद के खिलाफ निष्पक्ष व असरदार कार्रवाई के लिए ताकतवर देशों की मर्जी से आगे नहीं बढ़ पा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत-पाक के बीच संबंधों में बड़ी रुकावट आतंकवाद है और भारत निरंतर आतंकवाद के खात्मे से पहले बातचीत के लिए राजी नहीं। संयुक्त राष्ट्र को इन बातों पर विचार करना चाहिए कि अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने ही शरण दी थी। अमेरिका द्वारा आतंकवादी घोषित हाफिज मौहम्मद सैय्यद भी पाकिस्तान में सरेआम घूम रहा है। फिर भी पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य होने के साथ-साथ आतंकवाद प्रभावित देशों के साथ बहस कर रहा है। यदि संयुक्त राष्ट्र की भूमिका केवल बैठक की व्यवस्था करवाने तक सीमित है तब पाकिस्तान की तरह अन्य देश भी अंतरराष्ट्रीय संस्था के भय से मुक्त हो जाएंगे। भारत को सर्जिकल स्ट्राईक तक की नौबत आ गई। यदि यह तनातनी यूं ही बढ़ती रही तब युद्ध के हालात बनने तय हैं। संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद की परिभाषा के तहत पाकिस्तान के हालातों का विश्लेषण कर ठोस निर्णय ले ताकि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठा कायम रह सके।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Oct 2018 12:54:44 +0530</pubDate>
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                <title>संयुक्त राष्ट की एकतरफा व अधूरी रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट ने जम्मू कश्मीर बारे अपनी रिपोर्ट में मानवीय अधिकारों के हनन का जिक्र किया है जिसको भारत सरकार तथा भारतीय सेना ने रद्द किया है। दरअसल संयुक्त राष्ट की रिपोर्ट में बुनियादी तथ्यों को ही नजरअंदाज कर दिया गया है। मानवीय अधिकारों के हनन के लिए सेना को जिम्मेदार बताया गया है पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/united-and-incomplete-report-of-united-nations-2/article-4553"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/letter1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट ने जम्मू कश्मीर बारे अपनी रिपोर्ट में मानवीय अधिकारों के हनन का जिक्र किया है जिसको भारत सरकार तथा भारतीय सेना ने रद्द किया है। दरअसल संयुक्त राष्ट की रिपोर्ट में बुनियादी तथ्यों को ही नजरअंदाज कर दिया गया है। मानवीय अधिकारों के हनन के लिए सेना को जिम्मेदार बताया गया है पर यह तथ्य गायब है कि आखिर राज्य में सेना की तैनाती क्यों है?</p>
<p style="text-align:justify;">कश्मीर में विदेशी आतंकवाद ने गड़बड़ फैलाई है। आतंकवादी कार्रवाई में सिर्फ पुलिस तथा फौज के जवान ही शहीद नहीं होते बल्कि आम नागरिक भी मारे जा रहे हैं। आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकार शुजात बुखारी के कत्ल के पीछे भी पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठन का हाथ बताया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरहदी गांवों पर पाक रेजरां की गोलीबारी ने घरों को छलनी कर दिया है। लाखों लोग घर से बेघर हो चुके हैं। ऐसे हालातों में आतंकवाद का जिक्र ही ना करना रिपोर्ट तैयार करने वाले विशेषज्ञ पर शक की सुई जाती है। फौजी कार्रवाइयों में मानवीय अधिकारों की रक्षा का मसला होता है तथा इस बात पर पहरा देने की जरूरत होती है। जम्मू कश्मीर में सुरक्षा कर्मियों की ज्यादतियों के कारण उन पर मुकदमें भी हुए और उन्हें सजाएं भी सुनाई गर्इं। कानून के आगे हर गुनहगार बराबर है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये मिसालें ही इस बात का सबूत हैं कि कश्मीर में मानवीय अधिकारों की रक्षा के लिए पूरा कानूनी ढांचा है। ऐसी व्यवस्था में सुरक्षा बल मानवीय अधिकारों के प्रति जिम्मेदार बने रहते हैं। संयुक्त राष्टÑ जैसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा तथा आंकड़ों की जांच किये बिना ही जम्मू कश्मीर में मानवीय अधिकारों के हनन का मुद्दा बनाना एकतरफा तथा किसी उद्देश्य की तरफ प्रेरित होता नजर आता है। जम्मू कश्मीर में चल रहे अरबों रुपये के उन विकास कार्यों को रिपोर्ट में जगह नहीं मिली जो आम कश्मीरियों की बेहतरी के लिए किये जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी रिपोर्टें आतंकवाद से निपटने में विश्व की समस्या है तथा कश्मीर में आतंकवाद को भी इससे अलग नहीं किया जा सकता। मानवीय अधिकारों के नाम पर आतंकवाद को बढ़ने देना जायज नहीं। आतंकवाद के खिलाफ अंतर्रराष्टय मंचों को स्थितियों की बारीकियों को देखने की जरूरत है।</p>
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                <pubDate>Fri, 29 Jun 2018 08:35:55 +0530</pubDate>
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