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                <title>पाकिस्तान में विपक्षी दल लामबंद, सरकार हरकत में</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद l पाकिस्तान में इमरान खान सरकार के खिलाफ विपक्षी दल लामबंद होने को देखते हुए सरकार भी हरकत में है और सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के दामाद कैप्टन सफदर अवान को गिरफ्तार कर लिया गया है। रविवार को इमरान खान की सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने बड़ी रैली की थी जिसमें हजारों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/opposition-parties-mobilized-in-pakistan-government-in-action/article-19321"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/opposition-parties-mobilized-in-pakistan-government-in-action.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">
<strong>इस्लामाबाद</strong> l पाकिस्तान में इमरान खान सरकार के खिलाफ विपक्षी दल लामबंद होने को देखते हुए सरकार भी हरकत में है और सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के दामाद कैप्टन सफदर अवान को गिरफ्तार कर लिया गया है। रविवार को इमरान खान की सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने बड़ी रैली की थी जिसमें हजारों की संख्या में लोग जुटे थे। नवाज शरीफ की पुत्री और पाकिस्तानी मुस्लिम लीग-नवाज की नेता मरियम शरीफ ने ट्वीट कर अपने पति को गिरफ्तार किये जाने की जानकारी दी।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">मरियम ने आरोप लगाया , “पुलिस सुबह-सुबह कराची में हमारे होटल कक्ष में आई और दरवाज़ा तोड़कर कैप्टन सफदर को गिरफ्तार कर लिया।” गत दिवस की रैली में शामिल रैली में मरियम शरीफ के अलावा बिलावल भुट्टो, शाहिद खक्कान अब्बासी, मौलाना फजलुर रहमान और आवामी पार्टी के महमूद आदि नेता प्रमुख थे। रैली को संबोधित करते हुए विपक्षी नेताओं के निशाने पर प्रधानमंत्री इमरान खान ही रहे । इससे पहले हाल में ही एक रैली का आयोजन किया गया था, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने लंदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए को संबोधित किया था।</h6>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Oct 2020 09:51:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सीसीए विरोध में गच्चा खाएगा विपक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, लखनऊ, इलाहाबाद में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की वजह यह है कि इसे मुस्लिमों के खिलाफ माना जा रहा है। लोगों में डर है कि इस बिल के चलते उनकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी। कांग्रेस सहित कुछ प्रमुख विपक्षी दल इस कानून के खिलाफ हैं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/opposition-will-have-to-face-defeat-at-caa/article-12942"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/caa.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">दिल्ली, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, लखनऊ, इलाहाबाद में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की वजह यह है कि इसे मुस्लिमों के खिलाफ माना जा रहा है। लोगों में डर है कि इस बिल के चलते उनकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी। कांग्रेस सहित कुछ प्रमुख विपक्षी दल इस कानून के खिलाफ हैं। राहुल गांधी, ममता बनर्जी, औबेसी, अरविन्द केजरीवाल, अखिलेश यादव और वामपंथी दलों के नेताओं के बयानों से कानून के विरोध को हवा मिल रही है। इस बिल में देश के मुस्लिम नागरिकों के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।</h3>
<p> </p>
<h4 style="text-align:justify;">भाजपा की केन्द्र सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में धारा 370 समाप्ति, और तीन तलाक कानून बनाकर यह साबित कर दिया है कि वह बिना पक्की तैयारी के आगे कदम नहीं बढ़ाती। रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में भी लगभग अपनी सोच के अनुरूप भाजपा को सफलता मिली। भाजपा को यह मालूम था कि जो कानून वह बना रही है, वह विपक्षी दलों के गले नहीं उतरेगा और उसके विरोध में वे भ्रामक प्रचार करने के साथ ही अराजकता पैदा करने वाली स्थिति पैदा करेंगे। कुछ हद तक उक्त तीनों मामलों में हुआ भी, लेकिन कुछ समय में मामला शान्त पड़ गया। कुछ इसी तरह का मामला सीसीए और एनआरसी को लेकर हो रहा है। वही एनआरसी जिसे किसी वक्त कांग्रेस लागू करना चाहती थी और उसके मुताबिक उस समय भाजपा के विरोध के कारण वह लागू नहीं कर पाईं। अब जबकि भाजपा ने उसे लागू करने के लिए संसद में कानून बना दिया है। राज्य सभा में उठा-पटक चल रही है। उसी कानून का आज सबसे ज्यादा विरोध कांग्रेस कर रही है। विपक्षी दलों में तूणमूल कांग्रेस, आप, समाजवादी पार्टी जैसे कई दल है, जो इसे भुनने के लिए दुष्प्रचार कर मुद्दे को हवा दे रहे है। हालांकि माना यह जा रहा है कि जिस पिच पर विपक्षी दल खेल रहे है, उनका एम्पायर स्वंय गृहमंत्री अमित शाह है। सरकार इस मुद्दे में विपक्ष को बेनकाब करने की ओर बढ़ रही है। सरकार का यह सोचना कतई गलत नहीं कि जिस देश में रहना है, उस देश के कानून का न मानना राष्ट्र विरोधी गतिविधि है। यह बात देश की जनता समझ रही है। यही कारण है कि विरोध का स्वरूप धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।<br />
दिल्ली, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, लखनऊ, इलाहाबाद में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की वजह यह है कि इसे मुस्लिमों के खिलाफ माना जा रहा है। लोगों में डर है कि इस बिल के चलते उनकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी। कांग्रेस सहित कुछ प्रमुख विपक्षी दल इस कानून के खिलाफ हैं। राहुल गांधी, ममता बनर्जी, औबेसी, अरविन्द केजरीवाल, अखिलेश यादव और वामपंथी दलों के नेताओं के बयानों से कानून के विरोध को हवा मिल रही है। इस बिल में देश के मुस्लिम नागरिकों के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है। इस कानून से उनका कोई संबंध नहीं है। लेकिन, कुछ लोगों में यह डर है कि इस बिल की वजह से उनकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी।<br />
हालांकि देश में जो हालात हैं, उनको देखते हुए कहा जा सकता है कि यह बयान काफी देर से आया है, हालांकि चीजों को यह कितना दुरुस्त कर पाएगा, इस बारे में अभी कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। लेकिन राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी के बारे में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में जो बयान दिया, वह लिखित में है और संसद में दिए गए मंत्री के लिखित बयान का अपना एक महत्व होता है। अन्य बयानों की तरह इसमें न तो बाद में यह कहने की कोई आशंका होती है कि बातों को गलत तरह से पेश किया गया और न विरोधियों के लिए ही कोई संभावना बनती है कि वे बात को तोड़-मरोड़कर उसकी कोई अलग व्याख्या पेश करें। गृह राज्यमंत्री ने एनआरसी के बारे में जो लिखित बयान दिया, उसमें कोई नई बात नहीं है। सिर्फ इतना ही कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी जैसी कोई कवायद कराने की केंद्र सरकार की फिलहाल कोई योजना नहीं है। यह लगभग यही बात कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली की अपनी एक जनसभा में कही थी। प्रधानमंत्री जब जनसभा में कुछ कहते हैं, तो उसका एक महत्व होता है, लेकिन बहुत से लोगों ने उस बात पर यकीन नहीं किया था।<br />
हालांकि यूरोपीय संसद में लाए गए किसी प्रस्ताव का कोई मूल्य-महत्व नहीं है और इसे यूरोपीय समुदाय ने भी स्पष्ट कर दिया है, फिर भी देश में कुछ लोग यह रेखांकित करने में लगे हुए हैं, जैसे भारत के हितों के खिलाफ कोई बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहल होने जा रही है। कुछ तो ऐसे भी हैं, जो यूरोपीय समुदाय और यूरोपीय संसद में भेद करने की भी जहमत नहीं उठा रहे हैं। जाहिर है कि ऐसा इसीलिए किया जा रहा है, क्योंकि इससे ही उनके संकीर्ण राजनीतिक हित सध रहे हैं। किसी अन्य देश के आंतरिक मामलों में यूरोपीय संसद की ओर से पारित प्रस्ताव एक ज्ञापन से अधिक महत्व नहीं रखते। वहां से पारित प्रस्ताव जिस यूरोपीय समुदाय को विचार के लिए दिए जाते हैं, उसके प्रमुख देश पहले ही यह कह चुके हैं कि नागरिकता कानून भारत का आंतरिक मामला है। इसीलिए उसकी ओर से हर संभव तरीके से दुष्प्रचार का सहारा लिया जा रहा है। यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि ऐसा इसीलिए किया जा रहा है, ताकि शाहीन बाग जैसे धरनों को खाद-पानी मिलता रहे। राजधानी दिल्ली में यह धरना एक ऐसी सड़क पर कब्जा करके दिया जा रहा है, जिसके बाधित होने से लाखों लोगों को परेशानी हो रही है। विपक्ष इससे परिचित है, लेकिन पता नहीं क्यों वह आम जनता की इस परेशानी में ही अपनी जीत देख रहा है? इससे इन्कार नहीं कि सीएए पर विपक्ष को गहरी आपत्ति है, लेकिन इसमें संदेह है कि वह अपनी आपत्ति दर्ज कराने को लेकर गंभीर है। इसका प्रमाण यह है कि वह सीएए के साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर पर भी आपत्तियां दर्ज करा रहा है। वह ऐसा तब कर रहा है, जब दस साल पहले एनपीआर की कवायद की जा चुकी है। आखिर जो काम पहले भी हो चुका है, उसे लेकर सवाल खड़े करने का क्या मतलब? विचित्र है कि विपक्षी दल एक ओर यह चाह रहे हैं कि संसद में सीएए पर फिर बहस हो और दूसरी ओर उनकी ओर से इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है।<br />
क्या यह उचित नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा की जाए? आखिर जो मसला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है, उस पर संसद में बहस करने का क्या मतलब? यह भी ध्यान रहे कि सीएए के खिलाफ एक बड़ी संख्या में याचिकाएं विपक्षी दलों की ओर से ही दायर की गई हैं। बेहतर होगा विपक्ष इस पर गौर करे कि सीएए पर उसने जैसा नकारात्मक रवैया अपना लिया है, वह केवल लोगों को भ्रमित करने वाला ही नहीं, बल्कि शासन करने के अधिकार को बाधित करने वाला भी है। ऐसे में अगर सरकार संविधान के मुताबिक दण्डात्मक कार्रवाई पर उतर आए तो यह विरोध प्रदर्शन कितने दिन चल पाएगा। वाकई इतने विरोध प्रदर्शन के बाद भी सरकार का जो सकारात्मक रवैया है, वह सराहनीय है।</h4>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2020 20:50:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NRC-CAA को लेकर विपक्ष की बैठक आज, माया-ममता और AAP ने बनाई दूरी</title>
                                    <description><![CDATA[देश में हो रहे छात्रों के विरोध, नागरिकता कानून, एनआरसी  और मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा के लिए विपक्षी पार्टियां सोमवार को 2 बजे बैठक करेंगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/opposition-meeting-on-nrc-caa-today/article-12448"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/caa.jpg" alt=""></a><br /><h2>देश भर में नए नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी |NRC-CAA</h2>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> देश में हो रहे छात्रों के विरोध, नागरिकता कानून, एनआरसी<strong> (NRC-CAA )</strong> और मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा के लिए विपक्षी पार्टियां सोमवार को 2 बजे बैठक करेंगी। इसमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बसपा प्रमुख मायावती शामिल नहीं होंगी। आम आदमी पार्टी ने भी मीटिंग में शामिल न होने का ऐलान किया है।</p>
<h2>आज दोपहर 2 बजे विपक्षी दलों की बैठक | NRC-CAA</h2>
<p>बता दें, कांग्रेस ने सभी समान विचारधारा वाले दलों को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) पर एक संयुक्त रणनीति को औपचारिक बनाने के लिए बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है, इस बीच देश भर में नए नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। कांग्रेस, विपक्षी दलों के साथ संसद भवन में दोपहर 2 बजे बैठक करेगी। सोमवार को सीएए पर एक संयुक्त रणनीति बनाने के लिए और छात्रों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कई मुख्यमंत्रियों ने कहा- वे अपने राज्यों में सीएए-एनआरसी लागू नहीं करेंगे</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>सीएए को लेकर विरोध कर रहे जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसके बाद देशभर के यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन शुरू हो गए थे।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसमें राजनीतिक दल भी शामिल हो गए थे। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>भाजपा ने सीएए को लेकर कांग्रेस पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> कांग्रेस शासित राज्यों में कई मुख्यमंत्रियों ने कहा है कि वे अपने राज्यों में सीएए या एनआरसी की अनुमति नहीं देंगे। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>उधर, केरल के विधानसभा में सीएए को राज्य में पारित नहीं किए जाने संबंधी प्रस्ताव भी पास किया गया था।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2020 11:26:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नागरिकता कानून का विरोध: अहमदाबाद से कांग्रेस पार्षद समेत 49 लोग गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन में शामिल रहे 5 हजार लोगों पर हत्या की साजिश और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। शुक्रवार को इस मामले में अहमदाबाद से कांग्रेस पार्षद समेत 49 लोगों की गिरफ्तारी हुई। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/opposition-to-citizenship-law-49-people-including-congress-councilor-arrested-from-ahmedabad/article-11878"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/88-1.jpg" alt=""></a><br /><h3>उत्तर प्रदेश के संभल में हिंसा  मामले में 17  के खिलाफ एफआईआर |<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title=""> Citizenship Law</span></span></h3>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p><strong>गुजरात (एजेंसी)।</strong> पुलिस ने नागरिकता कानून <strong>(<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title=""> citizenship Law</span></span>)</strong> के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन में शामिल रहे 5 हजार लोगों पर हत्या की साजिश और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। शुक्रवार को इस मामले में अहमदाबाद से कांग्रेस पार्षद समेत 49 लोगों की गिरफ्तारी हुई। उधर, उत्तर प्रदेश के संभल में हिंसा के मामले में 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई। इनमें समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क और फिरोज खान भी शामिल हैं। वहीं, असम में प्रदर्शन और हिंसा के बाद बंद हुई इंटरनेट सेवा 9 दिन बाद बहाल हुई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दिल्ली: हिंसक प्रदर्शन के बाद राज्यों के हालात</h2>
<p style="text-align:justify;">नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ जामिया नगर समेत कई जगहों पर प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण ने जामा मस्जिद से जंतर मंतर तक मार्च निकालेंगे, हालांकि पुलिस की तरफ से उन्हें इजाजत नहीं मिली। डीएमआरसी के मुताबिक, राजधानी में आज सभी मेट्रो स्टेशन खुले हैं। पुलिस ने स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, शिक्षाविद हर्ष मंदर, छात्र नेता उमर खालिद और कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित समेत 1200 लोगों को हिरासत में लिया था। जिन्हें बवाना, नांगलोई और केशवपुरम में बनाई गई अस्थायी जेलों में रखा गया है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>बिहार: राजद ने नागरिकता कानून के खिलाफ शनिवार को प्रदेश में बंद बुलाया है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>तेजस्वी यादव ने कहा कि यह कानून असंवैधानिक और मानवता विरोधी है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इससे भाजपा का विभाजनकारी चरित्र सामने आ गया है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> गुरुवार को बंद के दौरान राज्य के कई जिलों में माकपा कार्यकर्ताओं ने रेलवे ट्रैक और हाईवे जाम किए थे।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>असम: सभी जिलों में शुक्रवार को इंटरनेट सेवा बहाल हो गई है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> यहां प्रदर्शन और हिंसा के चलते 11 दिसंबर से इंटरनेट पर रोक लगाई गई थी।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा- किसी के अधिकारों का हनन नहीं होगा।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/opposition-to-citizenship-law-49-people-including-congress-councilor-arrested-from-ahmedabad/article-11878</link>
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                <pubDate>Fri, 20 Dec 2019 12:18:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिहायशी इलाके में कूड़ा डंप लगाने का विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[मोहल्लावासियों ने महामारी फैलने संबंधी अधिकारियों को सूचित किया | Garbage Dump नगर कौंसिल ने विरोध होने पर पुलिस को दी सूचना सुनाम ऊधम सिंह वाला (सच कहूँ न्यूज)। नगर कौंसिल सुनाम की ओर से बाबा फरीद सिंह कालोनी (Garbage Dump) के नजदीक सरकारी जगह पर बनाए जा रहे कूड़े के पिट्स का मोहल्ला निवासियों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/opposition-to-dumping-garbage-in-residential-area/article-10601"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/garbage-dump.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">मोहल्लावासियों ने महामारी फैलने संबंधी अधिकारियों को सूचित किया | Garbage Dump</h1>
<ul>
<li><strong>नगर कौंसिल ने विरोध होने पर पुलिस को दी सूचना</strong></li>
</ul>
<p><strong>सुनाम ऊधम सिंह वाला (सच कहूँ न्यूज)।</strong> नगर कौंसिल सुनाम की ओर से बाबा फरीद सिंह कालोनी <strong>(Garbage Dump)</strong> के नजदीक सरकारी जगह पर बनाए जा रहे कूड़े के पिट्स का मोहल्ला निवासियों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। मोहल्ला निवासियों का तर्क है कि रिहायशी इलाके के समीप गंदगी के डंप बनाए जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा, जिससे वह किसी कीमत पर नहीं बनने देंगे। नगर कौंसिल ने लोगों के इस विरोध की पुलिस को सूचना दे दी है।</p>
<h2><strong>नगर कौंसिल द्वारा </strong><strong>बनाए जा रहे है </strong><strong>कूड़े के पिट्टस </strong>| Garbage Dump</h2>
<p>उल्लेखनीय है कि सुनाम नगर कौंसिल ने बाबा फरीद सिंह कालोनी के नजदीक सरकारी जमीन पर बनाए जा रहे कूड़े के पिट्टस का मोहल्ला निवासियों की तरफ से विरोध किया गया। मोहल्ला निवासी हरभजन सिंह, हरदियाल सिंह, प्रदीप सिंह, नीरज बांसल ने बताया कि उनके घरों के पास नगर कौंसिल द्वारा कूड़े के पिट्टस बनाए जा रहे है, जिस कारण गंदगी व बीमारियों के फैलने के खतरे को देखते हुए उनके द्वारा नगर कौंसिल के अधिकारियों को कूड़े के डंप के निर्माण को बंद करने की गुहार लगाई। इसके बावजूद नगर कौंसिल के अधिकारियों ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।</p>
<ul>
<li><strong>मोहल्ला निवासियों ने नगर कौंसिल की इस धक्केशाही का विरोध करते हुए </strong></li>
<li><strong>कहा कि वह यहां कूड़े के डंप नहीं बनने देंगे। </strong></li>
<li><strong>कार्य करने वाले मजदूरों ने बताया कि वह रोज की तरह आज भी कार्य कर रहे थे </strong></li>
<li><strong>मोहल्ला निवासियों द्वारा उन्हें कार्य करने से रोक दिया।</strong></li>
<li><strong> गौर हो कि कुछ समय पहले स्थानीय रोज गार्डन में भी इस तरह के पिट्ट बनाने का </strong></li>
<li><strong>मोहल्ला निवासियों द्वारा विरोध किया गया था व तब भी मामला पुलिस के पास पहुंच गया था। </strong></li>
<li><strong>स्थानीय लोगों ने मांग की कि कूड़े के डंप को लोगों के लिए परेशानी बनने से बचाया </strong></li>
<li><strong>जाए व इसके लिए उचित स्थान का प्रबंध किया जाए।</strong></li>
</ul>
<h2>बेकार सामान से तैयार होगी खाद | Garbage Dump</h2>
<ul>
<li><strong>इस संबंधी कार्यसाधक अफसर संजय बांसल से बात की </strong></li>
<li><strong>उन्होंने कहा कि यहां बनाए जा रहे पिट्ट में रसोई के बेकार समान से खाद्य तैयार की जाएगी, जो बहुत उपयोगी है। </strong></li>
<li><strong>उन्होंने कहा कि लोगों का विरोध करना गलत है, जिसकी सूचना पुलिस को कार्रवाई करने के लिए दी गई है।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Oct 2019 19:36:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या विपक्ष एकजुट होगा?</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की राजनीति आज ऐसी दिखायी दे रही है कि मानो रजनीतिक पार्टियां कह रही हों मेरे साथ रहोगे तो ऐश करोगे। राजनीतिक दलों ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में चुनावों की तैयारी कर दी है। दूसरी ओर इतिहास अपनी पुनरावृति कर रहा है जिसके अंतर्गत विपक्षी पार्टियां 2019 के चुनावों में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/what-will-happen-consolidate-the-opposition/article-6608"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/rahul.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत की राजनीति आज ऐसी दिखायी दे रही है कि मानो रजनीतिक पार्टियां कह रही हों मेरे साथ रहोगे तो ऐश करोगे। राजनीतिक दलों ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में चुनावों की तैयारी कर दी है। दूसरी ओर इतिहास अपनी पुनरावृति कर रहा है जिसके अंतर्गत विपक्षी पार्टियां 2019 के चुनावों में सश्क्त भाजपा के विरुद्ध एक महागठबंधन बनाने का प्रयास कर रही हैं। कुल मिलाकर यह किसी भी कीमत पर कुर्सी और सत्ता का खेल है।</p>
<p style="text-align:justify;">कर्नाटक में उपचुनावों में लोक सभा और विधान सभा की पांच सीटों में से चार सीटों पर कांग्रेस-जद (एस) विजयी हुआ। यह बताता है कि यद्यपि राजनीतिक दल विभिन्न सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व करते हों किंतु यदि वे एकजुट हों तो उनका प्रत्याशी जीत सकता है। इससे भाजपा कुछ परेशान है और निकट भविष्य में उसके मार्ग में बाधाएं आ सकती हैं। विशेष रूप से तब जब जून में 11 राज्यों में लोक सभा और विधान सभाओं की 15 सीटों में से राजग केवल 3 सीटें जीत पाया। यह भाजपा के लिए बुरी खबर थी और विपक्ष को यह संकेत मिला था कि स्थानीय स्तर पर एकजुटता से भाजपा को हराया जा सकता है और इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश का कैराना है जहां पर अजीत सिंह के राष्ट्रीय लोक दल के उम्मीदवार ने बसपा, सपा और कांग्रेस के समर्थन से भाजपा उम्मीदवार को हराया।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा इस बात से चिंतित है कि ये पार्टियां न केवल एकजुट हो रही हैं अपितु उनमें परस्पर विरोध के बावजूद वे जीत रही हैं और लोक सभा में अल्पमत में रहने के बावजूद वह यह संदेश देने में सफल हो रहा है कि उसके पास संख्या न हो किंतु फिर भी वह सरकार को धूल चटाने में सक्षम है। इसके विपरीत राज्य सभा में विपक्षी दल अपने संख्या बल के आधार पर सदन को चलने नहीं दे रहे हैं। दूसरी ओर तेलंगाना में प्रबल प्रतिद्वंदियों कांग्रेस, तेदेपा और माकपा के बीच गठबंधन से तेलंगाना राष्ट्र समिति की समस्याएं बढी हैं और वहां का राजनीतिक समीकरण बदल गया है। राज्य में आशा की जा रही है कि तेदेपा सत्ता में वापसी करेगी। छत्तीसगढ़ में बसपा अजीत जोगी की पार्टी के साथ गठबंधन कर रही है और वह भाजपा सरकार को कड़ी चुनौती दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष की इस नई नवेली एकता की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि दक्षिण के क्षेत्रीय क्षत्रप तेदेपा के चन्द्रबाबू नायडू 2019 में भाजपा के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए आगे आ रहे हैं और इस मामले में उन्होंने तृणमूल की ममता को पीछे छोड़ दिया है। नायडू एक मुख्य रणनीतिकार के रूप में उभरे हैं और उन्होंने कांग्रेस, जद (एस) और वामपंथी मोर्चे को एकजुट करने का कार्य किया है। यही नहीं अपने प्रबल प्रतिद्वंदी कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर उन्होने मोदी विरोधी खेमे का साथ दिया है और यह स्पष्ट किया है कि यदि उद्देश्य बड़ा हो तो वे दशकों पुरनी प्रतिद्वंद्धिता को छोड़ सकते हैं। नायडू की राकांपा के शरद पवार, तृणमूल की ममता, सपा के मुलायम और आप के केजरीवाल के साथ भी अच्छी पटरी बैठती है। वे और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक नई शुरूआत कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वे जानते हैं कि कुछ क्षेत्रीय क्षत्रप कायर हैं और वे अंतिम क्षणों में पक्ष बदल देते हैं इसलिए उन्होंने शरद यादव और अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेस को भी अपने साथ मिला लिया है। हालांकि विपक्षी एकता की यह अभी शुरूआत है किंतु उनकी पार्टी के कार्यकर्ता और प्रतिंद्वंद्धी उन्हें शांत और सजगता से कार्य करने वाला मानने लगे हैं। मोदी की तरह नायडू भी विकास के एजेंडा में विश्वास करते हैं, प्रौद्योगिकी प्रेमी हैं और जनता के साथ उनका जुड़ाव है। वे जोखिम लेते हैं और उनके साथ कोई घोटाला नहीं जुडा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रश्न उठता है कि क्या विपक्ष की एकता केवल एक दिखावा है। क्या नायडू विपक्ष को एकजुट कर पाएंगे? क्या चह एकजुटता केवल विधान सभा चुनावों के दौरान देखने को मिलेगी क्योंकि भाजपा, कांग्रेस, तेदेपा, तेलंगाना राष्ट्र समिति और बसपा के अलावा सपा, तृणमूल, द्रमुक, अन्नाद्रमुक और बीजद का मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ, तेलंगाना और मिजोरम की राजनीति से कोई सरोकार नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष की विभिन्न पार्टियों के अलग-अलग एजेंड़ा और उद्देश्यों को देखते हुए विपक्षी एकता आसान नहीं है। विपक्ष में विश्वसनीय एकता के लिए इसका नेतृत्व सबसे बड़ी पार्टी या किसी अन्य बड़ी पार्टी के नेता द्वारा किया जाना चाहिए। कांग्रेस के राहुल गांधी को अगंभीर राजनीतिक नेता माना जा रहा है और तृणमूल की ममता का महागठबंधन एक दिवास्:वप्न बन गया है और इस स्थिति में तेदेपा के नायडू जिनकी पार्टी लोक सभा में सातवें नंबर पर है विपक्षी एकता का जिम्मा संभाल रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रश्न यह भी उठता है कि क्या भाजपा की अविजेयता समाप्त हो रही है? क्या हिंदुत्व कार्ड का प्रभाव समाप्त होने लगा है? क्या प्रशासन विरोध लहर तथा विपक्ष की एकता भाजपा की चुनावी मशीन पर ब्रेक लगा रहे हैं? इस स्थिति के लिए भाजपा स्वयं जिम्मेदार है। मोदी सरकार अपने वायदे पूरे नहीं कर पायी है। अर्थव्यवस्था का निष्पादन अपेक्षानुरूप नहीं रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष है। शहरी लोग मतदान के प्रति उदासीन हैं। रोजगार सृजन न करने की वजह से युवाओं में आक्रोश है और सांप्रदायिक धु्रवीकरण से शायद चुनावी लाभ न मिले। साथ ही भाजपा के मत प्रतिशत में गिरावट भी आ रही है। किंतु इन सबने भाजपा के लिए नए विकल्प भी खोले हैं। भाजपा के लिए एक वर्ष पूर्व जिस भारी जीत की संभावनाए ंथी अब वो संभावनाएं कुछ कम हो गयी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उपचुनावों में भाजपा की हार से वह विपक्षी एकता को हल्के में नहीं ले सकती है और उसे एक नई रणनीति बनानी पड़ेगी। इस दौरान भाजपा ने दस लोक सभा सीटों पर हार का सामना किया है और अब लोक सभा में उसका साधारण बहुमत 272 सांसद रह गए हैं तथा अपने बहुमत को सिद्ध करने के लिए वह अपने सहयोगी दलों पर निर्भर है। 2019 के चुनावों में उसकी संख्या और कम हो सकती है किंतु भाजपा में एक कुशल खिलाड़ी है। मोदी का कोई प्रतिस्पर्धी नहीं है और अमित शाह ने भाजपा को एक चुनावी मशीन बना दिया है जो अच्छा परिणाम दे रहे हैं और पार्टी ने त्रिपुरा सहित 21 राज्यों में विजय प्राप्त की। फिलहाल भाजपा का कोई विकल्प नहीं दिखायी देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी और विपक्षी एकता के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के प्रयोगों ने विपक्ष को 2019 के चुनावों में अलीबाबा की गुफा में प्रवेश के लिए खुल जा सिमसिम का कोड दिया है। बिहार, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक के उपचुनावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि विपक्ष एकजुट होता है तो मोदी के रथ को रोका जा सकता है और मुख्य राज्यों में बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक जैसे महागठबंधन बनाए जा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी पार्टियां जानती हैं कि वे अपनी वे अपनी-पुरानी प्रतिद्वंदिता को इसलिए किनारे रख रहे हैं ताकि भाजपा का मुकाबला किया जा सके। उन्हें कुशल राजनीतिक कदम उठाने होगे और भाजपा की उत्कृष्ट चुनावी मशीनरी का मुकाबला करने के लिए ठोस चुनाव प्रबंधन करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या कांग्रेस अपनी क्षमताओं की पहचान कर पाएगी और इस प्रयोग को आगे बढ़ा पाएगी? क्या वह 2019 के चुनावों में नमो की भाजपा का मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय पार्टियों की पिछलग्गू बनेगी? दूसरी ओर मोदी और शाह की जोड़ी को हाल के चुनावों में जो हार मिली है उससे उन्हें अपनी पार्टी की स्थिति में सुधार लाना होगा और बढ़त बनने के लिए राज्य नेतृत्व को मजबूत करना होगा। भाजपा को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने होगे क्योंकि पार्टी में किसी भी तरह के मतभेदों से उसका राजनीतिक समर्थन गिर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यही नहीं मोदी की परीक्षा विधान सभा चुनावों और अगले वर्ष आम चुनावों में होगी। इसलिए पार्टी के पास अभी सुधार का समय है। भाजपा सत्ता में है इसलिए उसके पास लोगों को लुभाने और प्रतिद्वंदियों को अपने साथ मिलाने की क्षमता है। कुल मिलाकर यह भारत के लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है कि इसमें अंतत: विपक्ष अपनी भूमिका निभाने लगा है। वह एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभा रहा है। जिसमें जो जीता वही सिकंदर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पूनम आई कौशिश</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 15 Nov 2018 11:51:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चकनाचूर होता विपक्षी एकता का सपना</title>
                                    <description><![CDATA[लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां होती हैं। लेकिन जब विपक्ष के पास संख्या बल का अभाव होता है तो वह घायल शेर की तरह से दिखाने का प्रयास करता है। इसी दिखावे के प्रयास में कई बार ऐसी चूक हो जाती है कि उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। संसद में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/break-opposition-unitys-dream/article-4993"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/break-opposition.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां होती हैं। लेकिन जब विपक्ष के पास संख्या बल का अभाव होता है तो वह घायल शेर की तरह से दिखाने का प्रयास करता है। इसी दिखावे के प्रयास में कई बार ऐसी चूक हो जाती है कि उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। संसद में विपक्षी दल तेलगुदेशम पार्टी की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष की जिस प्रकार से किरकिरी हुई, उसकी कसक विपक्षी राजनीतिक दलों को लम्बे समय तक रहेगी। लोकसभा में पर्याप्त संख्याबल न होने के बाबजूद अविश्वास प्रस्ताव को लाना किसी भी प्रकार से न्याय संगत नहीं कहा जा सकता। इस प्रस्ताव को भले ही तेलगुदेशम पार्टी की ओर से लाया गया, लेकिन इसके केन्द्र में कांग्रेस पार्टी के नेता ही दिखाई दिए। विरासती पृष्ठ भूमि के उपजे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने आपको देश के सामने एक परिपक्व राजनेता के रुप में प्रस्तुत करने का राजनीतिक खेल खेला। इसे राहुल गांधी का राजनीतिक अभिनय कहा जाए तो भी ठीक ही होगा, क्योंकि इससे पूर्व कई लोग राहुल गांधी को पप्पू जैसे संबोधन दे चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात सही है कि अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में दोपहर में जब राहुल गांधी अपना वक्तव्य दे रहे थे, उस समय पूरे देश के विपक्षी दलों में एक आस बनती दिखाई दी कि राहुल गांधी अब परिपक्व राजनेता की श्रेणी में आ रहे हैं। समाचार चैनलों में चली बहस में भी राहुल गांधी के नए उदय को नए ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा था, लेकिन जैसे ही समय निकलता गया राहुल गांधी की वास्तविकता देश के सामने आने लगी। राहुल गांधी ने अपने आपको एक बार फिर से पप्पू होने का प्रमाण दे दिया। पहली बात तो यह है कि राहुल गांधी जिस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से गले मिले, वह जबरदस्ती पूर्वक गले मिलना ही था, क्योंकि इसके लिए संसद उचित स्थान नहीं था।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे बड़ी बात यह भी है कि राहुल गांधी सरकार पर आरोप लगाते समय यह भूल जाते हैं कि वर्तमान सरकार जनता द्वारा चुनी हुई सरकार है। यानी लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार है, इसलिए राहुल गांधी को कम से कम लोकतंत्र का सम्मान तो करना ही चाहिए। राहुल गांधी वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, इसलिए उन्हें अपने पद की गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिए। ऐसे आरोप लगाने से उन्हें बचना चाहिए, जिनका कोई आधार नहीं है। हम जानते हैं कि राहुल गांधी ने राफेल मुद्दे पर जो वक्तव्य दिया था, वह सार्वजनिक करने वाला नहीं था, क्योंकि रक्षा मामले बेहद संवेदनशील होते हैं, उन्हें उजागर करना भी ठीक नहीं होता, लेकिन राहुल गांधी ने ऐसा किया, जो ठीक नहीं था। अगर राहुल गांधी को संसदीय मयार्दाओं का ज्ञान नहीं है तो उन्हें पहले इनका अध्ययन करना चाहिए, नहीं तो वह नादानी में भविष्य में भी ऐसी ही गलती करते जाएंगे और कांग्रेस पार्टी की जो वर्तमान हालत है वह और खराब होती चली जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कहा जाता है कि आज कांग्रेस के समक्ष जो अस्तित्व का संकट पैदा हुआ है, उसके लिए कांग्रेस के नेता ही जिम्मेदार हैं, और कोई नहीं। चार वर्ष पहले जिस केन्द्र सरकार का अंत हुआ, उसके कार्यकाल से जनता प्रताड़ित थी, घोटाले होना तो जैसे सरकार की नियति ही बन गई थी। संप्रग सरकार के कार्यकाल में हुए घोटाले के कई प्रकरण आज न्यायालय में विचारधीन हैं। कांग्रेस अगर स्वच्छ प्रशासन देने की बात करती है तो इसके प्रति फिलहाल जनता में विश्वास का भाव पैदा नहीं हो सकता। इसके लिए कांग्रेस को अपने आपको बदलना होगा और कांग्रेस का चाल, चरित्र और चेहरा बदल जाएगा, ऐसा अभी लगता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तवविकता यह भी है कि जिस अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से विपक्ष सरकार को घेरने की योजना बना रहा था, उसमें किसी प्रकार का कोई वजन नहीं था, यह विपक्षी भी भलीभांति जानते थे। इतना ही नहीं उनको अपना संख्या बल भी पता था, फिर भी उन्होंने केवल अपनी राजनीति चमकाने के उद्देश्य से इस अविश्वास प्रस्ताव को रखा। बाद में क्या हुआ यह सभी को पता है। जितनी उम्मीद थी, उतना भी समर्थन इस प्रस्ताव को नहीं मिला और औंधे मुंह गिर गया। जबकि कांग्रेस पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जोर देते हुए कहा था कि हमारे पास अविश्वास प्रस्ताव लाने के पर्याप्त कारण हैं और हमारे पास संख्या संख्या बल है। इसे कांग्रेस का सबसे बड़ा झूठ भी कहा जा सकता है। इससे ऐसा ही लगता है कि कांग्रेस नेता झूठ बोलकर देश की जनता को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। राहुल गांधी ने भी राफेल मामले में संसद में झूठ बोला। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को ऐसे झूठ बोलने से बचना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अविश्वास प्रस्ताव के निर्णय के बाद राजग सरकार पर तो कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन विपक्ष द्वारा जिस प्रकार से सत्ता की तड़प को उजागर करने वाली राजनीति की जा रही थी, उसको जरुर गहरा आघात पहुंचा है। अब यह तय सा लगने लगा है कि विपक्षी गठबंधन की जो कवायद देश में चल रही थी, उसमें दरार पड़ेगी। क्योंकि इससे कांग्रेस का वास्तविक आधार देश के सामने आ गया। वर्तमान में कांग्रेस की राजनीतिक शक्ति का आकलन किया जाए तो ऐसा ही लगता है कि कांग्रेस के पास उतनी भी ताकत नहीं है, जितनी चार वर्ष पूर्व थी। इसके पीछे तर्क यही दिया जा सकता है कि चार वर्ष पहले कांग्रेस के प्रति अच्छा रवैया रखने वाले कई सांसद थे, आज उन सांसदों की संख्या में कमी आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">हां, इतना अवश्य हो सकता है कि जिन राजनीतिक दलों को भाजपा का भय होगा या अपने भविष्य के प्रति संदेह होगा, वह जरुर इस मुहिम का हिस्सा बन सकता है, लेकिन यह एक बार फिर से प्रमाणित हो गया है कि देश में विपक्ष अभी मजबूत विकल्प नहीं बन सका है। सरकार मजबूत है, यह संसद ने भी बता दिया है और जनता भी बता रही है।<br />
आज देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति का अध्ययन किया जाए तो यही दिखाई देता है कि कांग्रेस पार्टी को देश के कई क्षेत्रीय दल अपने स्तर का भी नहीं मान रहे हैं। यह सच भी है कि कई राज्यों में क्षेत्रीय दल आज कांग्रेस से ज्यादा प्रभाव रखते हैं। ऐसे में वह कांग्रेस को कितना महत्व देंगे, इसका पता चल ही जाता है। कांग्रेस की मजबूरी यह है कि वह कई राज्यों में अपने स्वयं की ताकत के सहारे चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं कर सकती, इसलिए उसे कई राज्यों में सहारे की आवश्यकता महसूस हो रही है। कर्नाटक में भी यही दिखाई दिया, कांग्रेस ने अपने से कम राजनीतिक प्रभाव रखने वाले दल को राज्य की सत्ता सौंप दी। इसी प्रकार के हालात उत्तरप्रदेश में बन रहे हैं, यहां अभी गठबंधन बना ही नहीं, दरार के संकेत मिलने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></p>
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                <pubDate>Tue, 24 Jul 2018 03:38:17 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रिपल तलाक के विरोध में महिला कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[विरोध। महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष सुमित्रा चौहान ने बताया अमानवीय करनाल(सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष सुमित्रा चौहान ने कहा है कि महिलाएं देश में ट्रिपल तलाक का विरोध करेंगी। महिला कांग्रेस भी इसका विरोध करती है। यह अमानवीय परपंरा है। इसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चार सालों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/women-congress-in-opposition-to-triple-divorce/article-4920"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/tripple-divoce.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">विरोध। महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष सुमित्रा<br />
चौहान ने बताया अमानवीय</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>करनाल(सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष सुमित्रा चौहान ने कहा है कि महिलाएं देश में ट्रिपल तलाक का विरोध करेंगी। महिला कांग्रेस भी इसका विरोध करती है। यह अमानवीय परपंरा है। इसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चार सालों में महिलाओं से संबंधित अपराध चार गुणा बढ़ गए हैं। सरकार इन पर रोक लगाने में विफल रही हैं। मंहगाई और महिला सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा के लिए 21 जून को करनाल के जाट भवन में प्रदेश स्तरीय महिला कार्यक्रम का आयोजन महिला कांग्रेस द्वारा किया जा रहा है।</p>
<h2 style="text-align:center;">महिला अपराध व मंहगाई पर 21 को करनाल में करेंगी प्रदर्शन</h2>
<p style="text-align:justify;">जिसमें कई और विषयों पर चर्चा की जाएगी। इस कार्यक्रम में कांग्रेस की सी.डब्लयू.सी की सदस्य तथा राज्यसभा सांसद कुमारी शैलजा मुख्यातिथि होगी। यह कार्यक्रम महिला कांग्रेस की ग्रामीण अध्यक्ष निशा एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जोगिन्द्र सिंह नली और शहरी प्रधान करिश्मा और सुधा भारद्वाज के संयोजकत्व में आयोजित किया जा रहा है। वह आज पत्रकारों से बातचीत कर रही थी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में महिला एप्स भी लॉन्च की जाएगी। जिसके माध्यम से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से सीधा सम्पर्क किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि चार साल पहले पानीपत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दिया था। लेकिन चार साल में न तो बेटियों को पढ़ने के लिए विश्वविद्यालय खोले गए और न ही बेटियां सुरक्षित रह पाई। सरकार को घेरने के लिए रणनीति तय की जा रही है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि एन.सी.आर में पिछले चार सालो में चार गुणा महिला अपराध बढ़े। यहां पर निर्भया जैसे कांड हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">सोनीपत, झांसा, गुड़गांव ओर मानेसर में बच्चियों के साथ दुष्कर्म कर उनकी हत्या की गई। सोनीपत में एक दुकान की सरेआम हत्या की गई। इस मौके पर उन्होंने बताया कि 31 अगस्त को ताल कटोरा स्टेडियम दिल्ली में महिला सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिसमें राहुल गांधी संबोधित करेंगे। इस अवसर पर बिमला सरोहा, सुधा भारद्वाज, सेवा देवी, ग्रामीण अध्यक्ष निशा, करिश्मा, संतोष तेजान, सुषमा नागपाल, शमसिदा, जोगिन्द्र वाल्मीकि, राजकिरण, राजेन्द्र नम्बरदार, अरूण कुमार, दिलबाग सिंह सहित तमाम नेता मौजूद थे।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jul 2018 06:30:54 +0530</pubDate>
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                <title>विपक्षी एकता का नाटक और कुमारस्वामी के आंसू</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले दिनों कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी एक सभा में रो पड़े। यह भी माना जा सकता है कि गठबंधन सरकार का प्रमुख बनने के बाद की परिस्थितियों ने उनके आंसू निकाल दिए। कुमारस्वामी के आंसू जेडीएस और कांग्रेस के खट्टे और तल्ख रिश्तों की पोल तो उजागर करते ही हैं, वहीं देश में विपक्ष एकता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-drama-of-opposition-unity-and-the-tears-of-kumaraswamy/article-4893"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/kumar-sawamy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले दिनों कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी एक सभा में रो पड़े। यह भी माना जा सकता है कि गठबंधन सरकार का प्रमुख बनने के बाद की परिस्थितियों ने उनके आंसू निकाल दिए। कुमारस्वामी के आंसू जेडीएस और कांग्रेस के खट्टे और तल्ख रिश्तों की पोल तो उजागर करते ही हैं, वहीं देश में विपक्ष एकता की सच्चाई का बयान भी करते हैं। ये वहीं कुमारस्वामी हैं जिनके शपथ ग्रहण समारोह के मंच पर विपक्षी दलों ने अपनी ताकत और मित्रता को संदेश पूरे देश को दिया था। अभी तो कर्नाटक की सरकार को बने चंद महीने ही हुए हैं और गठबंधन की सरकार के प्रमुख कुमारस्वामी के आंसू पूरा देश देख रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमं़त्री कुमारस्वामी के सहयोगी दल कांग्रेस ने उनके दुखी होने पर तंज कसा है कि मुख्यमंत्री को खुश रहना चाहिए वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल भाजपा ने कुमारस्वामी के आंसुओं को अवार्ड मिलने लायक बताकर उनका मजाक उड़ाया है। मुख्यमंत्री वाकई रोये या उन्होंने इसका अभिनय किया ये तो वही बेहतर बता सकते हैं लेकिन जिस तरह जम्मू कश्मीर में भाजपा और पीडीपी का गठबंधन बेमेल विवाह जैसा था ठीक वैसे ही कर्नाटक में कांग्रेस द्वारा फेंके दाने को जिसे कुमार ने लपका उसमें कोई सैद्धांतिक सोच तो थी नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल दोनों ही पार्टियां आगामी चुनाव के मद्देनजर अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी हुई हैं। गठबंधन कब तक चलेगा ये भी नहीं कहा जा सकता। ऐसे में शुरूवाती दौर में ही कुमार स्वामी ने आंसू पोछते हुए जो सन्देश दिया वह बेहद साफ है। इससे यह तो साफ हो गया है कि कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। वैसे देखा जाए तो नेता आंसुओं की ताकत जानते हैं। कई ने इसके जरिए अपना भविष्य ही संवार लिया। नेताओं के लिए आंसू बहुत सी चीजों का इंश्योरेंस होते हैं। एचडी कुमारस्वामी भी बहुत मंझे हुए नेता है।</p>
<p style="text-align:justify;">तभी उन्होंने हिंदू मान्यता की याद दिलाते हुए आंसू बहाए कि वह भी शिवजी की तरह विषपान कर रहे हैं। कुमारस्वामी का ये बयान पूरी मीडिया में हेडलाइन बना। इससे सहयोगी दल कांग्रेस चिंतित भी है और उसकी किरकिरी भी हुई, विपक्षी बीजेपी ने इसे डरामा करार दिया और कहा कि उन्हें बेस्ट एक्टर का अवार्ड दिया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने तो इसे गठबंधन की समाप्ति की शुरूआत तक कह दिया। राजनीति के कुछ जानकार कह रहे हैं कि यह गठबंधन के कमजोर होने का संकेत है। आगे चल कर सरकार भी गिर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन कुछ मान रहे हैं कि ये सोची समझी रणनीति है। इस रणनीति का अपना एक मकसद भी है। जेडीएस कार्यकतार्ओं के सामने आंसू बहा कर कुमारस्वामी ने एक चतुराई भरा कदम उठाया है। गौड़ा के सुपुत्र इस ताकतवर सेंटीमेंटल कार्ड को खेल कर एक तरह से कांग्रेस को चेतावनी दी है कि अगर वे टांग खिंचना जारी रखेगी तो दिक्कत होगी। वह अपने को सताया हुआ साबित कर देंगे। साथ ही उन्होंने बीजेपी को भी संकेत दे दिए कि 11 साल पहले उनके सहयोगी रहे बीएस येदुरप्पा ने जैसे उनके साथ ह्यविश्वासघातह्ण किया था वैसा वह भी कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके पिता, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगैड़ा ने भी कर्नाटक के हुबली जिले में एक तरह से अपने बेटे के इस रुख का समर्थन किया। साथ ही कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर हमला भी किया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कुमारस्वामी को खुल कर काम करने नहीं दिया जा रहा है। उन पर बहुत अधिक दबाव है। दो महीने पहले जब यह कांग्रेस जेडीएस की साझा सरकार बनी तभी से पिता-पुत्र दोनों सताए जाने का कार्ड खेल रहे हैं ताकि कुछ सहानुभूति पैदा की जा सके। कुमारस्वामी अक्सर अपनी बेचारगी के बयान करते रहे हैं कि वे तो कांग्रेस के रहम पर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि 104 सदस्यों वाला विपक्ष उन्हें हटाने में लगा है। गठबंधन के कोआर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सार्वजनिक तौर पर सरकार के स्थिरता को लेकर विवादास्पद बयान दे चुके हैं। उन्हें कभी गौड़ा का प्रतिद्वंदी माना जाता रहा। बीजेपी इसमें लगी है कि सरकार को उत्तर कर्नाटक के विरोधी के रूप में स्थापित किया जाय। बीजेपी के मुताबिक सरकार वहीं विकास के काम कर रही है जहां उसकी पकड़ मजबूत है। वैसे कर्नाटक की राजनीति को करीब से जानने वाले यह कहते हैं कि पिता-पुत्र दोनों बहुत चतुर हैं। अांसू बहाकर उन्होंने सरकार को सुरक्षित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर कांग्रेस उनके लिए परेशानी पैदा करती है, तो लोगों की भावना कांग्रेस के विरोध में और जेडीएस के पक्ष में ही होगी. अगर बीजेपी उनके खिलाफ जाती है तो वो भगवा-दल को पुराने मैसूर और वोकालिंगा समुदाय के विरुद्ध बता सकते हैं। हाल में किसानों के कर्जमाफी के बाद कांग्रेस और बीजेपी दोनों को मजबूर कर दिया। सहयोगी कांग्रेस भी कर्जमाफी नहीं चाह रही थी, क्योंकि पूरा के्रडिट जेडीएस को मिल जाएगी। राहुल गांधी को इसे मुद्दा न बनाने के लिए कांग्रेसियों को मनाना पड़ा। बीजेपी को डर है कि आने वाले लोक सभा चुनाव में यह मुद्दा उनके खिलाफ जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमारस्वामी के इस भावुक भाषण की तात्कालिक वजह सोशल मीडिया पोस्ट हैं। मीडिया में आयी रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के भावुक भाषण के पीछे सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चल रहा वह अभियान है जिसमें ‘कुमारस्वामी हमारे सीएम नहीं हैं।’ बताया गया है। इसके अलावे एक वीडियो में कोडागू के एक लड़के को यह कहते सुना जा रहा है कि जिले में भारी बारिश के बाद सड़कें बह गई हैं लेकिन मुख्यमंत्री को इसकी फिक्र नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमारस्वामी ने गठबंधन की मजबूरियां बताते हुए कहा कि बिना बहुमत के सरकार चलाना काफी मुश्किल है। स्पष्ट जनादेश नहीं मिलने से सरकार चलाने में मुझे ज्यादा खुशी नहीं हो रही है। विपक्षी पार्टियां अगले लोकसभा चुनाव से पहले एकजुटता दिखाने के तरीके खोज रही हैं। इस बीच कुमारस्वामी का बयान विपक्षी एकता के झूठे नाटक को शीशा दिखाने का काम कर रहा है। असल में सत्ता पाने और मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए जो देश भर में परस्पर विरोधी और विचारधारा से विपरीत दल आपस में गले मिल रहे हैं, उसकी जमीनी सच्चाई यही है, जो इन दिनों कर्नाटक में दिख रहा है। कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस की सरकार के शपथ लेने के मौके पर देश भर के विपक्षी नेता बेंगलुरू में जुटे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उसके बाद अभी ऐसी जुटान का दूसरा मौका नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि चेन्नई में विपक्षी पार्टियों के नेताओं का जमावड़ा होगा। डीएमके नेता एमके स्टालिन तमाम विपक्षी नेताओं की मेजबानी करेंगी। यह भी कहा जा रहा है कि विपक्षी पार्टियां भारत बंद की योजना भी बना रही हैं। किसानों के मसले पर और रोजगार व आर्थिक गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष मानसून सत्र के दौरान भारत बंद का ऐलान कर सकता है। कुमारस्वामी के बयान के बाद विपक्षी एकता को धक्का लगना तय है।</p>
<p style="text-align:justify;">गठबंधन की सरकार बनने के बाद कुमारस्वामी ने भगवान शंकर जी की तरह विषपान करने की जो बात कही वह सरासर गलत है क्योंकि ऐसा करने के लिए उन्हें किसी ने मजबूर नहीं किया था। स?ाा की लालच में जिसे वे अमृत समझकर गटक गए अब यदि वह उन्हें विष लग रहा है तो उसके लिए कोई दूसरा कसूरवार नहीं है। हालांकि रोने और आंसू पोछने की विवशता के बावजूद कुमारस्वामी ने अब तक पद से इस्तीफा नहीं दिया है। यह भी लगभग निश्चित है कि वह इस्तीफा तब तक नहीं देंगे जब तक उसके लिए मजबूर नहीं कर दिए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ये पहला अवसर नहीं जब देवेगौड़ा परिवार स?ाा के लालच में कांग्रेस के शिकंजे में फंसा हो लेकिन दूसरी तरफ ये भी सच है कि कुमार यदि स?ाा में न आते तो वे कर्नाटक की राजनीति में हांशिये पर सिमटने की स्थिति में आ चुके थे। उस लिहाज से तो ये स?ाा उनके लिए अमृत जैसी हो गई। वे खुद भी जानते हैं ये ज्यादा दिन रहेगी नहीं इसीलिए वे इस तरह का नाटक दिखाकर सहानुभूति बटोरना चाह रहे हैं। फिलवक्त कर्नाटक के नाटक से कांग्रेस और भाजपा दोनों की मुसीबतें तो बढ़ी ही हैं, वहीं विपक्षी एकता की गाड़ी में भी फिलवक्त ब्रेक लगता दिख रहा है।</p>
<p> </p>
<p><strong>राजेश महेश्वरी</strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 18 Jul 2018 08:19:15 +0530</pubDate>
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                <title>विपक्ष की एकजुटता</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक में कुमारास्वामी का मुख्यमंत्री शपथ समारोह भाजपा के खिलाफ विपक्ष पार्टियों को एक मंच दे गया। कांग्रेस सहित इन सभी पार्टियों की एकजुटता ने संदेश दे दिया है कि मिशन 2019 में भाजपा को टक्कर देने के लिए वह एक मंच पर एकत्रित होने के लिए तैयार हैं। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार सहित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/consolidation-of-opposition/article-3790"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/sam.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कर्नाटक में कुमारास्वामी का मुख्यमंत्री शपथ समारोह भाजपा के खिलाफ विपक्ष पार्टियों को एक मंच दे गया। कांग्रेस सहित इन सभी पार्टियों की एकजुटता ने संदेश दे दिया है कि मिशन 2019 में भाजपा को टक्कर देने के लिए वह एक मंच पर एकत्रित होने के लिए तैयार हैं। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार सहित 6 राज्यों के मुख्यमंत्री व पूर्व मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में भारी संख्या बल की ताकत साफ नजर आती है। इन पार्टियों के पास वर्तमान समय में 125 के करीब लोकसभा सीटें हैं, फिर इनमें कितना दम भी है कि ये 11 राज्यों की 349 सीटों पर यह पार्टियां बड़ी चुनौती दे सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले महीनों में विभिन्न राज्यों में हुए लोकसभा उप-चुनावों में भी विपक्षी पार्टियों ने सत्ताधारी भाजपा को मात दी है। खासकर भाजपा उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की लोकसभा सीट गोरखपुर भी नहीं बचा पाई। ऐसा ही कुछ राजस्थान में भी हुआ है। गुजरात विधान सभा चुनावों में चाहे भाजपा फिर से सरकार बनाने में कामयाब हुई लेकिन पार्टी को सीटें उम्मीद से बहुत कम मिली। कर्नाटक में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से 20 के करीब रैलियां करने के बावजूद भाजपा बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर सकी। दरअसल कांग्रेस ने गठबंधन की राजनीति को स्वीकार कर लिया है। इस गठबंधन राजनीति के कारण ही यूपीए ने लगातार दो बार केन्द्र में सरकार बनाई है। इस गठबंधन की ताकत को भाजपा ने 2014 में अच्छी तरह समझ लिया था व जबरदस्त बहुमत मिलने के बावजूद सहयोगी पार्टियों को मंत्री-मंडल में जगह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां तक कि भाजपा ने सिर्फ दो सीटें जीतने वाली लोजपा से भी एक मंत्री ले लिया। कांग्रेस भी इसी तर्ज पर क्षेत्रीय पार्टियों की ताकत को सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ प्रयोग करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती। हर पार्टी अपने पारम्परिक रूख की बजाए मौके के अनुसार कोई भी फैसला लेकर विपक्ष को मात देने के लिए रणनीति तैयार करती नजर आ रही है। जिस तरह कांग्रेस ने कर्नाटक में जनता दल को समर्थन देने का फैसला लेकर भाजपा को सत्ता से बाहर रखने में कामयाब हुई वह काफी हैरत भरा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस की वैचारिक साझीदार राष्टÑीय व क्षेत्रीय पार्टियां भी इस बात को समझ रही हैं कि केन्द्रीय राजनीति में एक पार्टी के प्रभाव का समय नहीं रहा। चुनावों में अभी एक वर्ष का समय शेष रहा है। अभी तक हालांकि विपक्ष की तरफ से औपचारिक तौर पर गठबंधन की घोषणा नहंी की गई है फिर भी यह बात स्पष्ट है कि मुद्दों पर नीतियों के साथ-साथ विपक्ष की एकजुटता बड़ी चुनौती बन रही है। देखना अब यह है कि भाजपा नोटबंदी, जीएसटी के बाद पैदा हुए हालात, महंगाई, कृषि की दुर्दशा जैसे मुद्दों पर विपक्ष को पछाड़ने के लिए क्या रणनीति तैयार करती है?</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 May 2018 21:21:36 +0530</pubDate>
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                <title>कैराना: एकजुट विपक्ष पर भारी पड़ सकती है BJP</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/karaana-united-opposition/article-3724"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/yogi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लखनऊ। कैराना लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए गोरखपुर-फूलपुर की तर्ज पर विपक्ष आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन को जिताने के लिए एकजुट हो गया है। तबस्सुम का मुकाबला बीजेपी के दिवंगत सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह से है।हालांकि आरपार की इस चुनावी जंग में तबस्सुम की राह आसान नहीं दिख रही, क्योंकि उनके रास्ते में अपनों ने ही कांटे बिछा रखे हैं। परिवार से ही चुनौती आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन के खिलाफ सपा, बसपा और कांग्रेस ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा उनके ही देवर कंवर हसन हैं। कंवर हसन लोक दल से उम्मीदवार हैं। इसके अलावा तबस्सुम के दूसरे देवर कैराना से नगर पालिका अध्यक्ष अनवर हसन भी उनके खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। तबस्सुम हसन के भाई वसीम चौधरी को लेकर मुसलमानों के एक तबके में काफी नाराजगी है। कहा जा रहा है कि कंवर हसन के उतरने के पीछे कांग्रेस नेता इमरान मसूद का हाथ है. इमरान मसूद के भाई सलमान बाकायदा कंवर हसन के लिए वोट भी मांग रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गोरखपुर-फूलपुर जैसा एकजुट नहीं है विपक्ष</h3>
<p style="text-align:justify;">कैराना सीट पर विपक्ष की ओर से आरएलडी ने तबस्सुम हसन को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन जिस प्रकार गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में बीजेपी के खिलाफ विपक्ष एकजुट होकर मैदान में उतरा था, वैसा नजारा यहां नहीं दिख रहा है।<br />
गोरखपुर और फूलपुर में सपा उम्मीदवार के लिए बाकायदा बसपा कार्यकर्ता वोट मांगते नजर आए थे. सपा के कुछ नेता भले ही कैराना में दिख रहे हैं, लेकिन बसपा नेता कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं. सपा के मूलवोट यादव मतदाता इस लोकसभा सीट पर बहुत कम हैं।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 May 2018 09:41:49 +0530</pubDate>
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                <title>‘भ्रष्टाचार से नौकरी देने वाले आज जेल में’</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने विपक्ष पर साधा निशाना रोहतक (सच कहूँ ब्यूरो)। हरियाणा में अब नौकरी पूरी तरह से पारदर्शी सिस्टम में मिलती है। योग्य लोगों को नौकरी के लिए अवसर मिलता है। यह तब संभव हुआ है जब हरियाणा में किसी जाति, वर्ग या परिवार विशेष की नहीं बल्कि हरियाणवी सरकार है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने विपक्ष पर साधा निशाना</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक (सच कहूँ ब्यूरो)।</strong> हरियाणा में अब नौकरी पूरी तरह से पारदर्शी सिस्टम में मिलती है। योग्य लोगों को नौकरी के लिए अवसर मिलता है। यह तब संभव हुआ है जब हरियाणा में किसी जाति, वर्ग या परिवार विशेष की नहीं बल्कि हरियाणवी सरकार है। यह बात भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने दौरे के अंतिम दिन महर्षि दयांनद विवि के टैगोर थियेटर में भाजपा मोर्चों के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही। शाह ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि भ्रष्टाचार करके नौकरी देने वाले नेता आज जेल में हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हरियाणा में अब पारदर्शी सिस्टम, नौकरी में मेरिट ही आधार</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करते हुए पूछा कि क्या आपको ऐसी सरकार चाहिए जो भ्रष्ट हो, कार्यकर्ताओं के नहीं कहने पर शाह ने कहा कि फिर तो हरियाणा में आप 5 नहीं 25 साल की सरकार बनाएंगे। कार्यकर्ताओं को मंत्र देते हुए कहा कि हर बूथ पर अपनी ताकत बढ़ाएं और पार्टी की नीतियों व सरकार की योजनाओं को अंतिम आदमी तक पहुंचाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमित शाह ने कहा कि प्रदेश में ईमानदारी से काम करके मैरिट वाले युवाओं को नौकरी देकर सरकार ने नई मिसाल कायम की है। पुलिस भर्ती, पटवारी, अभियंता सहित कई विभागों की नौकरियों के नाम लेते हुए पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि केवल परिवार और कार्यकर्ताओं को नहीं बल्कि योग्यजनों को अवसर मिले, ऐसा सिस्टम अपनाया गया है। उन्होंने कहा कि नौकरी में हमें ये सोच रखनी चाहिए कि भले ही हमारा कोई अपना रह जाए, मगर योग्य नौकरी से वंचित नहीं होना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">-फर्जी राशन कार्ड रद्द करने से रूकी करोड़ों की कालाबाजारी</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कांग्रेस और इनेलो की सरकारों का जिक्र करते हुए कहा कि उन सरकारों के समय में हरियाणा के योग्य बच्चों में निराशा थी। बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दिया था। मगर इस सरकार ने बच्चों के विश्वास को बहाल किया है। अब बच्चे अपने करियर को बनाने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने लगे हैं। सरकार ने सस्ते राशन के डिपूओं की सप्लाई को डिजीटल करके 38 हजार फर्जी राशन कार्ड पकड़े हैं। इन कार्डों को सस्पेंड करने से करोड़ों की कालाबाजारी को रोका है। इसके अलावा ई-पंजीकरण, ई स्टाम्प, सिंगल विंडो सिस्टम आदि ऐसे अनेक काम किए हैं, जो आम आदमी के लिए लाभकारी सिद्ध हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2017 08:44:17 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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