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                <title>सीनियर खिलाड़ी न हो नजरअंदाज</title>
                                    <description><![CDATA[रोमेश पोवार व कप्तान मिताली राज के बीच विवाद ने काफी सुर्खियां बटोरी पिछले दिनों महिला क्रिकेट टी-20 विश्व कप के बाद भारतीय क्रिकेट में महिला टीम के प्रशिक्षक रोमेश पोवार व एक दिवसीय टीम की कप्तान मिताली राज के बीच विवाद ने काफी सुर्खियां बटोरी जिसके परिणामस्वरूप प्रशिक्षक पोवार के 30 नवंबर को टीम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/senior-player-ignore/article-6776"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/sports-player.jpg" alt=""></a><br /><h2>रोमेश पोवार व कप्तान मिताली राज के बीच विवाद ने काफी सुर्खियां बटोरी</h2>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों महिला क्रिकेट टी-20 विश्व कप के बाद भारतीय क्रिकेट में महिला टीम के प्रशिक्षक रोमेश पोवार व एक दिवसीय टीम की कप्तान मिताली राज के बीच विवाद ने काफी सुर्खियां बटोरी जिसके परिणामस्वरूप प्रशिक्षक पोवार के 30 नवंबर को टीम के कोचिंग करार के खत्म होने पर उसे आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया गया <strong>(senior player ignore)</strong>। हालांकि टी-20 की कप्तान हरमनप्रीत व अन्य खिलाड़ी पोवार के काम से संतुष्टि नहीं, लेकिन मिताली जैसी वरिष्ठ खिलाड़ी द्वारा नाराजगी प्रकट करने पर शायद बीसीसीआई यह समझ चुका था कि प्रशिक्षक पोवार का कार्यकाल को ओर बढ़ाने का मतलब टीम में खिलाड़ियों की आपसी रंजिश को हवा देना ही होगा इसीलिए बीसीसीआई के इस फैसले की तारीफ करनी बनती है कि उसने प्रशिक्षक के कार्यकाल को यहीं समाप्त करते हुए इस झगड़े को समाप्त कर दिया।</p>
<h2>मिताली राज पिछले लगभग 20 सालों से भारतीय टीम की सबसे अहम खिलाड़ी है</h2>
<p style="text-align:justify;">देखा जाये तो यहां प्रशिक्षक पोवार व चयनकर्ताओं के मिताली को इंग्लैंड के खिलाफ बाहर बिठाने का फैसला सही भी पड़ सकता था क्योंकि भारत ने विश्व कप टी-20 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड विरुद्ध मैच से पहले मिताली के बाहर होने के बावजूद विश्व चैंपियन आस्ट्रेलिया को हराया था। यदि टीम सेमीफाइनल जीत जाती तो शायद यह विवाद जन्म भी न लेता लेकिन इसमें यह ज्यादा सही रहता कि मिताली को बाहर बिठाने के फैसले में उसे यह बात समझाकर पूरे विश्वास में लिया जाता क्योंकि यह बात छिपी हुई नहीं कि मिताली राज पिछले लगभग 20 सालों से भारतीय टीम की सबसे अहम खिलाड़ी है और उसे सेमीफाइनल में फिट होने के बावजूद उसकी राय से ऊपर होकर बाहर बिठाने का फैसला कर लिया गया।</p>
<h2>पुरूष टीम के कप्तान सदैव सुर्खियों में बने रहते हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">खेल एक और कप्तान दो, एक पुरूष क्रिकेट टीम का तो दूसरी महिला क्रिकेट टीम की और अगर बात उपलब्धियों की करें तो दोनों का खेल बेमिसाल हैं और दोनों के ही खाते में ढ़ेरों रिकॉर्ड दर्ज हैं लेकिन इसे पितृसत्तात्मक सोच कहें या कुछ और कि पुरूष टीम के कप्तान सदैव सुर्खियों में बने रहते हैं, उन्हें खेल प्रेमियों के साथ-साथ खेल संघों द्वारा भी सिर-आंखों पर बिठाया जाता रहा है मगर महिला कप्तान के मामले में ऐसा नजारा कम ही देखने को मिलता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं पुरूष टीम के कप्तान विराट कोहली और महिला टीम की कप्तान मिताली दोराई राज की, जिन्हें लेडी सचिन भी कहा जाता है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> मिताली ने कुआलालंपुर में टीम इंडिया और श्रीलंका के बीच खेले गए टी-20 महिला एशिया कप में 2000 रन बनाकर एक इतिहास रच डाला था</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि इसके साथ ही वह इतने रन बनाने वाली पहली भारतीय बल्लेबाज बन गईं थी।</li>
<li style="text-align:justify;">महिला एशिया कप टी-20 टूनार्मेंट के पहले ही मैच में मिताली की कप्तानी में भारतीय टीम ने पूरी मलेशियाई टीम को सिर्फ 13.4 ओवर में महज 27 रनों पर ही ढ़ेर कर दिया था और 142 रनों के बहुत बड़े अंतर से ऐतिहासिक जीत हासिल की थी।</li>
<li style="text-align:justify;">इसी मैच में मिताली ने 69 गेंदों पर नाबाद 97 रनों की पारी खेली थी, जिसके लिए उन्हें ‘प्लेयर आॅफ द मैच’ चुना गया था</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन आप जानकर चौंक जाएंगे कि इसके लिए उन्हें पुरस्कार स्वरूप चैक मिला</li>
<li style="text-align:justify;">महज 17 हजार रुपये का जबकि यदि यही खिताब भारतीय पुरूष टीम के किसी खिलाड़ी को मिलता तो इसी पुरस्कार की राशि होती करीब एक लाख साठ हजार रुपये।</li>
</ul>
<h2>विराट कोहली सहित दूसरे पुरूष खिलाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया है</h2>
<p>दरअसल मिताली की कुछ उपलब्धियां तो ऐसी हैं कि कुछ रिकॉर्डों के मामले में उन्होंने विराट कोहली सहित दूसरे पुरूष खिलाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया है। हाल ही में मिताली ने अंतर्राष्ट्रीय टी-20 मैचों में रन बनाने के मामले में रोहित शर्मा को भी पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने 87 टी-20 मुकाबलों में 2007 रन बनाए हैं जबकि कप्तान विराट कोहली 72 पारियों में अब तक 2102 रन बना सके हैं लेकिन मिताली 84 टी-20 मैचों में 2232 रन बनाकर सभी को पीछे छोड़ चुकी हैं। हालांकि हाल ही में छठे महिला टी-20 विश्व कप के भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए सेमीफाइनल से मिताली को बाहर रखे जाने को लेकर टीम की कप्तान हरमनप्रीत, टीम के मैनेजमेंट को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>योगेश कुमार गोयल</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Dec 2018 09:18:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस: जीते जी की अटल की उपेक्षा, अब बीजेपी कर रही राजनीतिक इस्तेमाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस पार्टी ने अस्थि कलश यात्रा को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा नई दिल्ली (सच कहूँ)। [Edited By:Vijay Sharma ] पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि कलश यात्रा पूरे देश में निकाली जा रही है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी के सभी प्रदेश अध्यक्षों को अस्थि कलश सौंपे, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/congress-ignore-atals-leadership-bjp-is-now-using-political/article-5544"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/aatal.jpg" alt=""></a><br /><h2>कांग्रेस पार्टी ने अस्थि कलश यात्रा को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ)। [Edited By:Vijay Sharma ]</strong> पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि कलश यात्रा पूरे देश में निकाली जा रही है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी के सभी प्रदेश अध्यक्षों को अस्थि कलश सौंपे, जिसके बाद ये हर राज्य में जा रहे हैं। अब इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस पार्टी ने अस्थि कलश यात्रा को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी इसे एक राजनीतिक यात्रा के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।</p>
<h2>वाजपेयी की भतीजी और करुणा शुक्ला ने भी अटल की अस्थि कलश यात्रा पर सवाल उठाए थे</h2>
<ul>
<li>इससे पहले भी अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी और कांग्रेस नेता करुणा शुक्ला ने भी अटल की अस्थि कलश यात्रा पर सवाल उठाए थे।</li>
<li>उनका कहना था कि बीजेपी ये कलश यात्रा सिर्फ वोट के लिए और दिखाने के लिए निकाल रही है।</li>
<li>गौरतलब है कि गुरुवार को अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि कलश लखनऊ पहुंचे</li>
<li>जहां गृहमंत्री राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, राम नाईक आदि उपस्थित रहे।</li>
<li>शुक्रवार को भी देश के कई हिस्सों में वाजपेयी की अस्थि कलश यात्रा निकाली जाएगी।</li>
</ul>
<h2>आज मुरली मनोहर और लालकृष्ण आडवाणी को बीजेपी के पोस्टरों में  जगह नहीं मिलती</h2>
<p>कांग्रेस नेता पीएल पूनिया ने कहा कि जब अटल जी जिंदा थे, तब बीजेपी ने उनकी अपेक्षा की। आज अटल बिहारी वाजपेयी, मुरली मनोहर जोशी और लालकृष्ण आडवाणी को भारतीय जनता पार्टी के पोस्टरों में भी जगह नहीं मिलती है।पोस्टर्स में सिर्फ नरेंद्र मोदी और अमित शाह मिलते हैं। पूनिया ने कहा कि अब वाजपेयी के निधन के बाद इस तरह उनका राजनीतिक इस्तेमाल करना सही नहीं है।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Aug 2018 09:00:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>प्रकृति की चेतावनियों को कब तक अनदेखा करेंगे हम?</title>
                                    <description><![CDATA[देश के एक दर्जन से अधिक राज्यों में पिछले कुछ दिनों के भीतर कुदरत ने अपना जो कहर बरपाया है, वह कुदरत के साथ बड़े पैमाने पर हो रही मानवीय छेड़छाड़ का ही दुष्परिणाम है। कुदरत के कहर से हो रही भारी तबाही का आलम यह है कि प्रचण्ड धूल भरी आंधियों, बेमौसम बर्फबारी, ओलावृष्टि, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/how-long-will-we-ignore-the-warnings-of-nature/article-4637"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/alrt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश के एक दर्जन से अधिक राज्यों में पिछले कुछ दिनों के भीतर कुदरत ने अपना जो कहर बरपाया है, वह कुदरत के साथ बड़े पैमाने पर हो रही मानवीय छेड़छाड़ का ही दुष्परिणाम है। कुदरत के कहर से हो रही भारी तबाही का आलम यह है कि प्रचण्ड धूल भरी आंधियों, बेमौसम बर्फबारी, ओलावृष्टि, बादलों का फटना, भारी बारिश और आसमान से गिरती बिजली ने न केवल सैंकड़ों जिंदगियां लील ली हैं बल्कि हजारों लोग घायल हुए हैं, हजारों मकान बुरी तरह ध्वस्त हुए हैं और हजारों मवेशी मारे गए हैं, अरबों रुपये की सम्पत्ति और फसलें तबाह हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बदरीनाथ-केदारनाथ में बेमौसम बर्फबारी ने हर किसी को हैरत में डाल दिया है, हिमाचल के शिमला, मनाली, रोहतांग सहित कई इलाके सफेद चादर से ढ़क गए, जम्मू कश्मीर में बेमौसम बर्फबारी से कई इलाके एकाएक सर्दी की चपेट में आने से मुसीबतें बढ़ गई और अब मौसम विभाग द्वारा पुन: तूफान की आशंका के मद्देनजर देश के 23 राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">संभवत: देश के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर चेतावनियां जारी हो रही हैं। 9 मई को सायंकाल देश के कई हिस्सों में आए भूकम्प के झटकों ने हर किसी को भयभीत कर डाला है। दूसरी ओर अमेरिका की विख्यात अतंरिक्ष अनुसंधान संस्था ‘नासाझ् द्वारा सौर तूफान पृथ्वी के करीब पहुंचने की पुष्टि की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य के पृष्ठ भाग में होने वाले परिवर्तन के कारण इस तरह के सौर तूफान प्राय: 100-200 वर्षों में आते रहे हैं लेकिन इस बार इसे लेकर भयावह स्थिति की आशंका इसलिए जताई जा रही है कि अगर अंतरिक्ष में स्थापित उपग्रहों को सौर तूफान और कॉस्मिक किरणों का झटका लगा तो इन उपग्रहों पर निर्भर मोबाइल, इंटरनेट, दूरसंचार, जीपीएस सरीखे तमाम अत्याधुनिक नेटवर्क ठप्प हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक फिलहाल देश में प्रकृति की विनाशलीला की बात है तो अगर हम अतीत में झांककर देखें तो देश में इससे पहले भी कई बड़े तूफान आए हैं, दिल्ली में ही 1974 में आए टोरनाडो तूफान के दौरान तूफानी हवाओं ने डीटीसी बस को भी उड़ा दिया था। उसके बाद भी देश में कई बार बड़े आंधी-तूफान आए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">1990 और 1996 में आंध्र प्रदेश में आया भयानक तूफान हो या 1998 में गुजरात का विनाशकारी तूफान अथवा 1999 में उड़ीसा में आया प्रचण्ड चक्रवात, जिनमें हजारों लोग काल के ग्रास बन गए और गांव के गांव मरघट में तब्दील हो गए थे किन्तु इस बार इतने व्यापक दायरे में मौसम का आकस्मिक बदलाव पहली बार देखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्षा ऋतु में आसमान में बादलों का नामोनिशान तक नजर नहीं आता, वहीं वसंत ऋतु में बादल झमाझम बरसने लगते हैं, सर्दियों में मौसम एकाएक गर्म हो उठता है और गर्मियों में अचानक पारा लुढ़क जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अचानक ज्यादा बारिश होना या एकाएक ज्यादा सर्दी या गर्मी पड?ा और फिर तूफान आना, पिछले कुछ समय से जलवायु परिवर्तन के ये भयावह खतरे बार-बार सामने आ रहे हैं और मौसम वैज्ञानिक अब स्वीकारने भी लगे हैं कि इस तरह की घटनाएं आने वाले समय में और भी जल्दी-जल्दी विकराल रूप में सामने आ सकती हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 03 Jul 2018 09:23:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रकृति के रौद्र रूप को कब तक अनदेखा करेंगे हम?</title>
                                    <description><![CDATA[योगेश कुमार गोयल इस साल अप्रैल माह से ही देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग रूपों में प्रकृति का जो प्रकोप देखा जा रहा है, उससे हर कोई चिंतित और बेबस है। कहीं आंधी तूफान में परिवर्तित होकर सैंकड़ों लोगों का काल बन गई तो कहीं भारी बारिश, बर्फबारी, आसमान से गिरती बिजली ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/how-long-will-we-ignore-the-form-of-nature/article-4590"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/artical-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">योगेश कुमार गोयल</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल अप्रैल माह से ही देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग रूपों में प्रकृति का जो प्रकोप देखा जा रहा है, उससे हर कोई चिंतित और बेबस है। कहीं आंधी तूफान में परिवर्तित होकर सैंकड़ों लोगों का काल बन गई तो कहीं भारी बारिश, बर्फबारी, आसमान से गिरती बिजली ने खूब तबाही मचाई। इस दौरान मौसम विभाग द्वारा बार-बार कहीं धूल भरी आंधी के साथ तूफान की चेतावनियां दी जाती रही तो कहीं भारी बारिश के कारण बाढ़ के हालात उत्पन्न होने की। मौसम की बेरूखी का आलम यह है कि जहां मानसून की दस्तक के साथ ही पूर्वोत्तर राज्य बाढ़ की भयानक विभीषिका झेलने को अभिशप्त हुए और उससे लाखों लोग प्रभावित हुए, इन राज्यों के कई हिस्सों का सम्पर्क देश से कट गया, वहीं केरल में बाढ़ और भू-स्खलन से जान-माल का काफी नुकसान हुआ, मुम्बई में भारी बारिश के चलते नेवी को राहत बचाव के लिए अलर्ट करना पड़ा, उत्तराखण्ड में भारी बारिश की चेतावनी जारी हुई, दिल्ली, चण्डीगढ़, पंजाब सहित उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों की हालत पिछले दिनों तपती गर्मी में प्रदूषित हवा और धूल के गुबार के चलते गैस चैंबर जैसी हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">
देश की राजधानी दिल्ली पहले से ही दुनिया के सबसे प्रदूषित 20 शहरों में शामिल है और पश्चिमी विक्षोभ के चलते उत्तर भारत का अधिकांश हिस्सा जिस प्रकार धूल-अंधड़ की चपेट में आया, जिससे दिल्ली में प्रदूषण के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए थे। तमाम प्रयासों के बावजूद दिल्ली पिछले कई महीनों से दम घोंटू प्रदूषित हवा से बुरी तरह जूझ रही है किन्तु पिछले दिनों दिल्ली की हवा 14 गुना जहरीली दर्ज की गई। जहां गर्द के गुबार ने दिल्ली का दम निकाल दिया, वहीं गत वर्ष नवम्बर माह में भी ऐसे ही भयावह हालात पैदा हुए थे, जब 144 घंटे तक आपात स्थिति बरकरार रही थी। अक्तूबर से दिसम्बर के बीच स्मॉग के चलते दिल्ली का दम घुटता रहा था लेकिन विड़म्बना ही है कि उन हालातों से कोई सबक नहीं लिया गया। न आम नागरिकों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई और न ही सरकारों ने पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम उठाए। हालांकि अब दिल्ली सहित उत्तर भारत में मानसून की दस्तक के साथ पर्यावरण प्रदूषण की हालत में सुधार हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">
स्मॉग के चलते घुटन भरा माहौल बने या फिर चारों ओर छाई धूल की चादर की वजह से दम घुटने लगे, अक्सर नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वो घर से बाहर न निकलें किन्तु कामकाजी या मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले लोगों के लिए क्या यह संभव है कि वे घर में बैठकर अपनी रोजी-रोटी का बंदोबस्त कर सकें। हालांकि यह बात सही है कि प्रकृति के समक्ष हम बेबस हैं और हमें ऐसी स्थितियों में राहत भी प्रकृति से ही मिल सकती है किन्तु हम प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पर्यावरण प्रदूषण के स्थानीय कारकों पर तो नियंत्रण कर ही सकते हैं। तमाम प्रतिबंधों के बावजूद आज भी खुले में कचरा जलाते लोग व खेतों में जलती पराली के दृश्य जगह-जगह दिख जाएंगे। बार-बार अदालतों को प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने हेतु निर्देश देने के लिए बाध्य होना पड़ता है लेकिन उससे भी स्थिति नहीं सुधर रही क्योंकि मौसम की बेरूखी देखने-समझने के बावजूद अभी तक हमारी आंखें नहीं खुली हैं।</p>
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वायु गुणवत्ता के मानक आंकड़ों पर नजर डालें तो शून्य से पचास तक का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त माना गया है जबकि इक्यावन से सौ तक संतोषजनक, एक सौ एक से दो सौ के बीच मध्यम, दो सौ एक से तीन सौ के बीच खराब, तीन सौ एक से चार सौ के बीच बहुत खराब और चार सौ एक से पांच सौ के बीच सूचकांक को खतरनाक माना गया है और पिछले कुछ महीनों के आंकड़े देखें तो दिल्ली और उसके आसपास की आबोहवा बहुत खराब है। मार्च में एक्यूआई का स्तर 203, अप्रैल में 222 और मई में 217 दर्ज किया गया जबकि गत 14 जून को यह सारी हदें पार करते हुए 1093 तक जा पहुंचा। वायु में पीएम-10, पीएम-2.5 और नाइट्रोजन की बात करें तो इनकी मात्रा भी सामान्य से कई गुना ज्यादा देखी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">गत दिनों पीएम-10 का स्तर 1407 और पीएम-2.5 का स्तर 371 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक जा पहुंचा जबकि मानकों के अनुसार पीएम-10 तथा पीएम-2.5 की मात्रा वातावरण में क्रमश: 100 व 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। वायु में पीएम-2.5 और पीएम-10 का स्तर बढ़ जाने से यह प्रदूषित वायु फेफड़ों के अलावा त्वचा तथा आंखों को भी बहुत नुकसान पहुंचाती है। इन हालातों के मद्देनजर यदि कहा जाए कि यहां स्वस्थ जीवन के लिए प्राणवायु अब न के बराबर बची है तो असंगत नहीं होगा। पिछले कुछ ही वर्षों में कैंसर, हृदय रोग, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों का संक्रमण, निमोनिया, लकवा इत्यादि के मरीजों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ी है और लोगों की कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा अब इन बिन बुलाई बीमारियों के इलाज पर ही खर्च हो जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में हर दस में से नौ व्यक्ति विषैली हवा में सांस लेने को विवश हैं और प्रतिवर्ष करीब 70 लाख लोग असमय ही काल का ग्रास बन जाते हैं।</p>
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माना कि पिछले दिनों गर्द के गुबार के चलते दिल्ली और आसपास के इलाकों की हालत बदतर हुई थी किन्तु स्थिति पहले भी अच्छी नहीं थी। कार्बन उत्सर्जन के मामले में दिल्ली दुनिया के 20 शीर्ष शहरों में शामिल है और इस मामले में उसने कोलकाता और मुम्बई को भी पीछे छोड़ दिया है। ऐसे शीर्ष 500 शहरों में 22 भारत के हैं। नार्वे विज्ञान व तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा दुनिया के तेरह हजार शहरों में कराए गए अध्ययन के आधार पर सर्वाधिक प्रदूषण फैलाने वाले शहरों की सूची जारी की गई और इन तेरह हजार शहरों में से भारत के कोलकाता, मुम्बई, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरू, पुणे और अहमदाबाद क्रमश: 49, 70, 90, 108, 110, 130 व 185वें पायदान पर हैं जबकि दिल्ली 20 सर्वाधिक प्रदूषण फैलाने वाले शहरों में शामिल है। हवा में बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को लेकर चाइनीज एकेडमी आॅफ साइंस द्वारा किए गए एक शोध में कहा गया है कि यदि कार्बन उत्सर्जन कम नहीं हुआ तो अगले 50-80 वर्षों में धरती का तापमान चार डिग्री तक बढ़ सकता है और अगर वैश्विक तापमान इतना बढ़ जाता है तो भीषण गर्मी, भयंकर बाढ़ और सूखे की स्थिति पैदा होगी। पहाड़नुमा कूड़े के ढ़ेरों से निकलती जहरीली गैसें, औद्योगिक इकाईयों से निकलते जहरीले धुएं के अलावा सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या भी कार्बन उत्सर्जन का बड़ा कारण है और कहा जाता रहा है कि अगर दिल्ली जैसे अत्यधिक प्रदूषित शहर में वायु प्रदूषण पर कुछ नियंत्रण पाना है</p>
<p style="text-align:justify;">तो लोगों को निजी वाहनों का प्रयोग कम कर सार्वजनिक परिवहन को अपनाना चाहिए किन्तु धरातल पर देखें तो दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन के साधन बहुत सीमित हैं, सड़कों पर बसों की भारी कमी है और जितनी बसें चल रही हैं, उनमें यात्री अक्सर जानवरों की भांति ठूंसे नजर आते हैं। बहरहाल, धरती के गर्म होते जाने और प्रकृति के बढ़ते प्रकोप की जड़ हम स्वयं ही हैं लेकिन बार-बार प्रकृति द्वारा अपना रौद्र रूप दिखाते रहने के बावजूद हम समझना ही नहीं चाहते कि प्रकृति का मिजाज क्यों बदलता जा रहा है। हमें समझना होगा कि प्रकृति हमसे चाहती क्या है। प्रकृति ने शुद्ध हवा, शुद्ध पानी, शुद्ध वनस्पतियां, फल-फूल इत्यादि हमें बहुत सारी अनमोल चीजें दी हैं किन्तु हमने अपने निहित स्वार्थों के चलते प्रकृति की दी हुई हर चीज का जायका बिगाड़ दिया है। प्राकृतिक सम्पदाओं का बुरी तरह से दोहन कर हमने न हवा को सांस लेने लायक छोड़ा है, रसायन और गंदगी बहा-बहाकर न पावन नदियों को निर्मल व पवित्र छोड़ा है, खेतों में यूरिया सहित अन्य कीटनाशकों का छिड़काव कर अपने ही भोजन को विषाक्त बना लिया है। इसमें भला प्रकृति का क्या दोष? प्रकृति तो हमें समय-समय पर सचेत करती रही है कि हम समय रहते संभल जाएं अन्यथा प्रकृति के साथ खिलवाड़ के परिणाम इतने विनाशकारी होंगे कि कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।</p>
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                <pubDate>Sun, 01 Jul 2018 08:24:34 +0530</pubDate>
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