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                <title>Tiger - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Uttarakhand News: अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर कार्बेट पार्क में मिला बाघ का शव</title>
                                    <description><![CDATA[नैनीताल (सच कहूँ न्यूज)। Uttarakhand Corbett Tiger Reserve: देश के प्रसिद्ध नेशनल कार्बेट पार्क और कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में शनिवार को बाघिन की मौत का मामला सामने आया है। शव को कब्जे में ले लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर बाघ का शव मिलने से सीटीआर प्रशासन में सकते में है। प्रशासन की ओर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/tiger-carcass-found-in-corbett-park-on-international-tiger-day/article-50558"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/uttarakhand-news-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Uttarakhand Corbett Tiger Reserve: देश के प्रसिद्ध नेशनल कार्बेट पार्क और कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में शनिवार को बाघिन की मौत का मामला सामने आया है। शव को कब्जे में ले लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर बाघ का शव मिलने से सीटीआर प्रशासन में सकते में है। प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच शुरू कर दी गयी है।</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार ढेला रेंज के सांवल्दे पुल के पार्क के सुरक्षाकर्मियों को आज सुबह एक बाघ का शव दिखायी दिया। तत्काल अधिकारियों को इसकी सूचना दी गयी। अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में ले लिया। साथ ही शव को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया गया है। मृतक बाघिन की उम्र पांच से छह साल बतायी जा रही है। माना जा रहा है कि वन्य जीवों के आपसी संघर्ष में बाघिन की मौत हुई है। प्रशासन को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर बाघ का शव मिलने से पार्क प्रशासन सकते में है।</p>
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                                                            <category>उत्तराखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2023 16:39:13 +0530</pubDate>
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                <title>9 लोग मार चुका आदमखोर बाघ ढेर, शूटर्स ने चारों तरफ से घेरकर बरसाई गोलियां</title>
                                    <description><![CDATA[बगहा (एजेंसी)। पिछले एक महीने से बिहार के बगहा में आदमखोर बाघ के आतंक का अंत हो गया है। वन विभाग के कर्मियों ने नरभक्षी बाघ को मार गिराया है। गन्ने के खेत में घिर चुके बाघ को वनकर्मियों ने 4 गोलियां मारी। चार गोली खाकर बाघ वहीं ढेर हो गया। बता दें कि पिछले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/man-eating-tiger-killed-9-people/article-38794"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/tiger-in-india.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बगहा (एजेंसी)।</strong> पिछले एक महीने से बिहार के बगहा में आदमखोर बाघ के आतंक का अंत हो गया है। वन विभाग के कर्मियों ने नरभक्षी बाघ को मार गिराया है। गन्ने के खेत में घिर चुके बाघ को वनकर्मियों ने 4 गोलियां मारी। चार गोली खाकर बाघ वहीं ढेर हो गया। बता दें कि पिछले तीन दिन से लगातार इंसानों को अपना शिकार बना रहा था। गुरुवार को एक लड़की को मारा था। जबकि शुक्रवार को एक युवक को अपना शिकार बनाया था, तो वहीं इसके कुछ घंटे बाद मां-बेटे पर हमला कर मार डाला। इस तरह बाघ ने एक महीने के भीतर 9 लोगों को अपना शिकार बनाया था।</p>
<h3>बगहा में बाघ के खौफ का अंत</h3>
<p>लगातार कई लोगों को अपना शिकार बना चुके आदमखोर बाघ को अब मारने का आदेश जारी किया गया था। बिहार के चीफ वाइल्ड लाईफ वार्डन पीके गुप्ता ने बाघ को मारने का आदेश जारी किया था। जिसके बाद टीम ने पहले उसे पकड़ने की कोशिश की लेकिन बाघ के खतरनाक रुख को देखते हुए उसे गोली मारनी पड़ी। गौरतलब हैं कि इलाके में बढ़ते गुस्से को देखते हुए यह आदेश जारी किया गया था।</p>
<h3><strong>बाघ को देखते ही गोली मारने का था आदेश</strong></h3>
<p>सरकार ने आदमखोर बन चुके इस बाघ को देखती ही गोली मारने का आदेश दे दिया था। वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक नेशामणि के ने बताया कि बाघ के रेस्क्यू के लिए हैदराबाद, पटना से आई टीम पहले से तैनात थी। बाघ को मारने के लिए पुलिस के शार्प शूटर की भी मदद ली गई। बाघ पर काबू पाने के लिए करीब 25 दिन से वन विभाग की टीम प्रयास कर रही थी। आखिरकार शनिवार को वन विभाग की टीम ने बाघ का अंत कर दिया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 08 Oct 2022 18:24:54 +0530</pubDate>
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                <title>बाघ के मुंह से अपने 15 माह के बेटे को बचा लाई माँ</title>
                                    <description><![CDATA[उमरिया (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन के रोहनिया ज्वालामुखी में रविवार को एक बाघ के हमले में अपने 15 माह के बच्चे को एक माँ स्वयं घायल होने के बाद सकुशल बचा लाई। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के सूत्रों ने बताया कि मानपुर तहसील से लगे बांधवगढ़ के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/mother-saved-her-15-month-old-son-from-the-mouth-of-a-tiger/article-37428"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/tiger-in-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>उमरिया (एजेंसी)।</strong> मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन के रोहनिया ज्वालामुखी में रविवार को एक बाघ के हमले में अपने 15 माह के बच्चे को एक माँ स्वयं घायल होने के बाद सकुशल बचा लाई। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के सूत्रों ने बताया कि मानपुर तहसील से लगे बांधवगढ़ के बफर जोन के रोहनिया ज्वालामुखी में शौच कराने बाड़ी में माँ अपने 15 माह के बेटे को ले गई थी। इस दौरान बाड़ी में छुपे बाघ ने 15 माह के लड़के पर हमला कर दिया, जिससे उसकी माँ ने बाघ से बचाव कर बच्चे को बचा लिया। हमले में घायल माँ और बेटे का इलाज मानपुर के स्वास्थ्य केन्द्र में चल रहा है। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि बाघ हमले में 15 माह के राजबीर चौधरी के सिर और कमर में चोट आई है। वहीं, उसकी 27 वर्षीय माँ अर्चना चौधरी के कन्धे, सीने, पीठ और जांघ पर चोटें आई हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है। दोनों ही खतरे से बाहर हैं। माँ के इस साहसिक कदम की जिले में आज चर्चा हो रही है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़े:- </strong></span><a href="http://10.0.0.122:1245/the-news-is-a-bit-different-know-why-are-lions-seen-only-in-the-herd-why-the-tiger-is-always-alone/">जानें, झुंड में ही क्यों नजर आते हैं शेर? बाघ क्यों रहता है हमेशा अकेला</a></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 05 Sep 2022 14:05:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कूनो पालपुर सेंचुरी में अगस्त के अंत या सितंबर के पहले सप्ताह तक आएंगे चीते: तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[मुरैना (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के चंबल संभाग के श्योपुर जिले में स्थित कूनो पालपुर नेशनल पार्क में अफ्रीका और नोमोबिया से एक साथ एक दर्जन चीते अगस्त के अंत या सितंबर के पहले सप्ताह तक आ जाएंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कूनो सेंचुरी में चीतों के आने की पुष्टि करते हुए कहा कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/tigers-will-come-in-kuno-palpur-century/article-36619"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/tiger-lion.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुरैना (एजेंसी)।</strong> मध्यप्रदेश के चंबल संभाग के श्योपुर जिले में स्थित कूनो पालपुर नेशनल पार्क में अफ्रीका और नोमोबिया से एक साथ एक दर्जन चीते अगस्त के अंत या सितंबर के पहले सप्ताह तक आ जाएंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कूनो सेंचुरी में चीतों के आने की पुष्टि करते हुए कहा कि पहले ये चीते 15 अगस्त तक आने थे, लेकिन साउथ अफ्रीका से एमओयू की प्रक्रिया में विलंब होने के कारण देरी हुई है। तोमर कल श्योपुर में तिरंगा यात्रा में शामिल होने होने आये हुए थे। कूनो सेंचुरी में चीते लाये जाने को लेकर पत्रकारों के सवालों का जबाव देते हुए उन्होंने कहा कि नमोबिया के साथ एमओयू साइन हो चुका है और साउथ अफ्रीका के साथ भी जल्द एमओयू साइन होते ही दोनों देशों से एक साथ एक दर्जन चीते सेना के विशेष विमान से दिल्ली और बाद में ग्वालियर आएंगे। ग्वालियर से इन्हें सड़क मार्ग से कूनो सेंचुरी लाया जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>दो हाथियों के आने की पुष्टि</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय मंत्री तोमर ने बताया कि नामोबिया और साउथ अफ्रीका से एक साथ एक ही वाहन से चीते लाये जाने हैं। उन्होंने बताया कि अभी सिर्फ नामोबिया के साथ ही एमओयू साइन हो पाया है और साउथ अफ्रीका के साथ एमओयू की प्रक्रिया चल रही है, वह इसी सप्ताह पूरी हो जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों देशों से एक साथ एक ही वाहन से एक दर्जन चीते कूनो नेशनल पार्क में अगस्त के अंत या सितंबर के पहले सप्ताह में आ जाएंगे। उधर सीसीएफ निनामा ने मध्यप्रदेश के सतपुड़ा रिजर्व से कूनो पालपुर सेंचुरी में चीतों के लिये बनाये गए बाड़े में घुसे दोनों तेंदुओं को निकालने के लिये दो हाथियों के आने की पुष्टि की है।</p>
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                <pubDate>Sun, 14 Aug 2022 11:02:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुंभलगढ़ में जल्द घोषित हो सकता है टाइगर रिजर्व</title>
                                    <description><![CDATA[तेजी से काम कर रही है पर्यावरण कमेटी उदयपुर (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान में उदयपुर अंचल के कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को टाईगर रिजर्व घोषित करने की संभावनाओं को तलाशने के लिए राष्ट्रीय व्याघ्र प्राधिकरण द्वारा विशेषज्ञों की एक कमेटी तैयार की है। केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय व्याघ्र प्राधिकरण की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/tiger-reserve-may-be-declared-soon-in-kumbhalgarh/article-25477"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/tiger-in-india.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">तेजी से काम कर रही है पर्यावरण कमेटी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>उदयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान में उदयपुर अंचल के कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को टाईगर रिजर्व घोषित करने की संभावनाओं को तलाशने के लिए राष्ट्रीय व्याघ्र प्राधिकरण द्वारा विशेषज्ञों की एक कमेटी तैयार की है। केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय व्याघ्र प्राधिकरण की वन उप महानिरीक्षक डॉ. सोनाली घोष ने आदेश जारी कर चार सदस्यीय यह एक्सपर्ट कमेटी गठित की है। जारी पत्र के अनुसार सांसद दीयाकुमारी द्वारा भेजे गए अर्धशासकीय पत्र के संदर्भ में गठित इस कमेटी में रिटायर्ड आईएफएस आर एन मेहरोत्रा, रिटायर्ड आईएफएस एनके वासु एवं भारतीय वन्यजीव संस्थान में टाईगर सेल में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ. कौशिक बनर्जी को सदस्य तथा राष्ट्रीय व्याघ्र प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालय नागपुर के सहायक वन महानिरीक्षक हेमंत कामडी को समन्वयक सदस्य नियुक्त किया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पर्यावरण प्रेमियों द्वारा उठाई जा रही मांग को बल मिलेगा: राहुल भटनागर</h4>
<p style="text-align:justify;">यह कमेटी कुंभलगढ़ अभयारण्य में वर्तमान मानवीय बस्तियों की स्थिति, टाईगर के अनुकूल पयार्वास, बाउंड्री, लेंडस्केप कनेक्टिविटी, अतिक्रमण की स्थिति इत्यादि समस्त बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इधर, कुंभलगढ़ अभयारण्य को टाईगर रिजर्व घोषित करने की संभावनाओं को तलाशने के लिए एक्सपर्ट्स की समिति गठित करने के निर्णय पर उदयपुर के रिटायर्ड सीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) राहुल भटनागर ने खुशी जताई है और कहा कि इससे कई वर्षों से इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और पर्यावरणप्रेमियों द्वारा उठाई जा रही मांग को बल प्राप्त होगा।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/tiger-reserve-may-be-declared-soon-in-kumbhalgarh/article-25477</link>
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                <pubDate>Sun, 25 Jul 2021 10:58:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अजब-गजब : जब एक शख्स ने बाघ से दोस्ती करने की कोशिश की&amp;#8230;.और फिर क्या हुआ?</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। पूरी दुनिया में ऐसा कोई ही व्यक्ति होगा जो बाघ से डरता ना हो। अगर सामने आ जाए तो सबसे हाथ पैर कांपने लग जाते हैं। जरा सोचिए, अगर बाघ आपको सामने आ गया तो आप उससे हालचाल पूछेंगे या उलटे पैर वापस भागेंगे? जी हां आज हम आपको ऐसी अजब-गजब खबर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/when-a-man-tried-to-befriend-a-tiger/article-25318"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/tigers-protected..jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> पूरी दुनिया में ऐसा कोई ही व्यक्ति होगा जो बाघ से डरता ना हो। अगर सामने आ जाए तो सबसे हाथ पैर कांपने लग जाते हैं। जरा सोचिए, अगर बाघ आपको सामने आ गया तो आप उससे हालचाल पूछेंगे या उलटे पैर वापस भागेंगे? जी हां आज हम आपको ऐसी अजब-गजब खबर बताने जा रहे हैं जिसमें एक युवक बाघ को कुछ ऐसा बोलता है जो सबको हैरान कर देता है। वहीं इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है और सभी को खूब हंसा भी रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वीडियो में एक शख्स बाघ से दोस्ती करने की कोशिश कर रहा है। उत्तर प्रदेश का यह वायरल वीडियो जंगल में शूट किया गया है, जहां एक शख्स बाघ के बिल्कुल सामने पहुंच जाता है। पास पहुंचने के बाद वो बड़े ही बिंदास आवाज में उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहता है ‘हेलो ब्रदर’ जिसके बाद बाघ उसे गुस्से में घूरने लगता है। इस वीडियो को इंटरनेट पर लोग खूब पसंद कर रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सोशल मीडिया पर खुब हो रहा है वीडिया वायरल</h4>
<p style="text-align:justify;">ट्विटर पर वायरल हो रहा यह वीडियो यूपी लखीमपुर में इंडो-नेपाल बॉर्डर के तिकोनिया जंगल के पास का है। आपको बता दें, यह बाघ अभी तक चार लोगों को खा चुका है। आदमी कि इस हरकत पर लोग तरह तरह के कमैंट्स कर रहे हैं, कोई इसे बेवकूफी बता रहा है तो कोई कमाल। एक युवक ने कमेंट करते हुए कहा- “इस हरकत को बेवकूफी कहना ज्यादा बेहतर होगा।” दूसरे ने लिखा- “कोई बाघ आदमखोर नहीं होता।”</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं एक ने बाघ कि तरफ से जवाब देते हुए लिखा- “बाघ का जवाब होगा, पेट भरा है चले जाओ वरना सारी रंगबाजी निकाल देंगे।” एक अन्य ने मजाकिया मिजाज में कहा- “शायद ब्रदर का हेलो का रिप्लाई करने का मूड नहीं होगा”। कई लोग इस वीडियो पर अपनी राय लिख रहे हैं और अलग अलग अंदाज में कमेंट कर रहे हैं। लेकिन ऐसी हरकत जानलेवा भी साबित हो सकती है। ऐसी हरकत ना करें।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jul 2021 11:01:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाघ परियोजना के विस्थापितों को लाभान्वित करने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[अलवर। राजस्थान में अलवर की जिला कलक्टर आनन्दी ने बाघ परियोजना, सरिस्का के विस्थापितों को केन्द्र एवं राज्य सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित करवाए जाने के निर्देश दिए हैं। जिला कलक्टर ने आज जिला स्तरीय इम्पलीमेंटिग कमेटी की बैठक में सरिस्का से बर्डोद रून्ध (बहरोड) एवं मौजपुर (लक्षमणगढ) विस्थापित परिवारों को लाभान्वित करने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/instructions-to-benefit-the-migrants-of-the-tiger-project/article-19379"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/tiger-in-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अलवर।</strong> राजस्थान में अलवर की जिला कलक्टर आनन्दी ने बाघ परियोजना, सरिस्का के विस्थापितों को केन्द्र एवं राज्य सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित करवाए जाने के निर्देश दिए हैं। जिला कलक्टर ने आज जिला स्तरीय इम्पलीमेंटिग कमेटी की बैठक में सरिस्का से बर्डोद रून्ध (बहरोड) एवं मौजपुर (लक्षमणगढ) विस्थापित परिवारों को लाभान्वित करने के लिये समस्त उपखण्ड अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि बाघ परियोजना सरिस्का क्षेत्र में 9 गांव एवं ग्वाडों के 216 परिवारों को अन्यत्र विस्थापित किए जाने की योजना है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए उपखण्ड अधिकारी इनके विस्थापित के लिये भूमि का चिन्हित करके एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने बर्डोद एवं मौजपुर रून्ध में विस्थापित परिवारों के पशुधन का टीकाकरण करवाने और कृषि विभाग से संबंधित अपना गांव खेत योजना के तहत विस्थापित परिवारों को लाभान्वित करवाए जाने के निर्देश दिये। उन्होंने अन्य विभागों को भी इसी अनुसार निर्देश दिये।</p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/instructions-to-benefit-the-migrants-of-the-tiger-project/article-19379</link>
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                <pubDate>Wed, 21 Oct 2020 12:06:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्य-प्रदेश में मरते बाघ</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य-प्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में बाघ के अजीब व्यवहार से प्राणी विशेषज्ञ परेशान हैं। यहां का एक बाघ दूसरे बाघों को मारकर खा रहा है। आमतौर पर ऐसा तभी देखने को मिलता है, जब उद्यान में आहार के लिए प्राणियों की कमी आ गई हो। जबकि इस उद्यान में ऐसा है नहीं। यहां […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">मध्य-प्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में बाघ के अजीब व्यवहार से प्राणी विशेषज्ञ परेशान हैं। यहां का एक बाघ दूसरे बाघों को मारकर खा रहा है। आमतौर पर ऐसा तभी देखने को मिलता है, जब उद्यान में आहार के लिए प्राणियों की कमी आ गई हो। जबकि इस उद्यान में ऐसा है नहीं। यहां बाघ के लिए चीतल, बारहसिंघा व अन्य प्राणी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। बाघों को भैंसे का मांस भी डाला जाता है। बीते जनवरी और फरवरी माह में बाघ दो बाघिनों का शिकार करके खा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">वनाधिकारी बाघ के इस बदले व्यवहार पर शोध करने की बात कहकर हकीकत पर पर्दा डालने में लगे हैं। वैसे भी मध्य-प्रदेश में हर साल औसतन 27 बाघ मर रहे हैं। इस कारण अर्से से प्रदेश टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त करने से बाहर है। प्रदेश में गिनती के रह गए बाघ निरंतर बेमौत मारे जा रहे हैं। कहीं इनका शिकार किया जा रहा है तो कहीं दुर्घटना की चपेट में आकर अकाल मौत मर रहे हैं। मानव बस्तियों में एकाएक आ जाने के कारण भी ये लोगों के गुस्सा का शिकार हो रहे हैं। टोनों-टोटकों और तांत्रिक क्रियाओं के लिए भी बाघ बड़ी संख्या में मारे जा रहे हैं। चीन में बाघ की हड्डियों से शराब बनाई जाती है, इसके लिए भी प्रदेश के बाघ शिकारियों के निशाने पर बने रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में इस समय 21 राज्यों के 30,000 बाघ के रहवासी क्षेत्रों में गिनती का काम चल रहा है। 2018 में प्रथम चरण की हुई इस गिनती के आंकड़े बढ़ते क्रम में आए हैं। यह गिनती चार चरणों में पूरी होगी। बाघ गणना बाघ की जंगल में प्रत्यक्ष उपस्थिति की बजाय, उसकी कथित मौजूदगी के प्रमाणों के आधार पर की जा रही है। इनकी गिनती पर विश्वसनीयता के सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि जब 201 बाघ दो साल के भीतर ही मर गए तो फिर इनकी संख्या बढ़ कैसे रही है ?</p>
<p style="text-align:justify;">वनाधिकारी बाघों की संख्या बढ़-चढ़कर बताकर एक तो अपनी पीठ थपथपाना चाहते हैं, दूसरे उसी अनुपात में धनराशि भी बाघों के सरंक्षण हेतु बढ़ाने की मांग करते लगते हैं। मध्य-प्रदेश में साल 2017 में 11 महीने के भीतर 23 बाघ विभिन्न कारणों से मारे भी गए हैं, इनमें 11 शावक थे। दुनियाभर में इस समय 3890 बाघ हैं, इनमें से 2226 भारत में बताए जाते हैं। जबकि विज्ञान-सम्मत की गई गणनाओं का अंदाजा है कि यह संख्या 1500 से 3000 के बीच हो सकती है। इतने अधिक अंतर ने प्रोजेक्ट टाइगर जैसी विश्व विख्यात परियोजना पर कई संदेह के सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे यह भी अशंका उत्पन्न हुई है कि क्या वाकई यह परियोजना सफल है भी अथवा नहीं ?</p>
<p style="text-align:justify;">बीती सदी में जब बाघों की संख्या कम हो गई तब मध्य प्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में पैरों के निशान के आधार पर बाघ गणना प्रणाली को शुरूआती मान्यता दी गई थी। ऐसा माना जाता है कि हर बाघ के पंजे का निशान अलग होता है और इन निशानों को एकत्र कर बाघों की संख्या का आकलन किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कान्हा के पूर्व निदेशक एचएस पवार ने इसे एक वैज्ञानिक तकनीक माना था, लेकिन यह तकनीक उस समय मुश्किल में आ गई, जब साइंस इन एशिया के मौजूदा निदेशक के उल्लास कारंत ने बंगलुरु की वन्य जीव सरंक्षण संस्था के लिए विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में बंधक बनाए गए बाघों के पंजों के निशान लिए और विशेषज्ञों से इनमें अंतर करने के लिए कहा। इसके बाद पंजों के निशान की तकनीक की कमजोरी उजागार हो गई और इसे नकार दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद कैमरा ट्रैपिंग का एक नया तरीका पेश आया। जिसे कारंत की टीम ने शुरूआत में दक्षिण भारत में लागू किया। इसमें जंगली बाघों की तस्वीरें लेकर उनकी गणना की जाती थी। ऐसा माना गया कि प्रत्येक बाघ के शरीर पर धारियों का प्रारूप उसी तरह अलग-अलग है, जैसे इंसान की अंगुलियों के निशान अलग-अलग होते है। यह एक महंगी आकलन प्रणाली थी। पर यह बाघों के पैरों के निशान लेने की तकनीक से कहीं ज्यादा सटीक थी। इसके तहत कैप्चर और री-कैप्चर की तकनीकों वाले परिश्कृत सांख्यिकी उपकरणों और प्रारूप की पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर का प्रयोग करके बाघों की विश्वसनीय संख्या का पता लगाने की शुरूआत हुई। इस तकनीक द्वारा गिनती सामने आने पर बाघों की संख्या नाटकीय ढंग से घट गई। इसी गणना से यह आशंका सामने आई कि इस सदी के अंत तक बाघ लुप्त होे जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में चीन में बाघ के अंग और खालों की सबसे ज्यादा मांग हैं। इसके अंगों से यहां पारंपरिक दवाएं बनाई जाती है और इसकी हड्डियों से महंगी शराब बनाई जाती है। भारत में बाघों का जो अवैध शिकार होता है, उसे चीन में ही तस्करी के जरिए बेचा जाता है। बाघ के अंगों की कीमत इतनी अधिक मिलती है कि पेशेवर शिकारी और तस्कर बाघ को मारने के लिए हर तरह का जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं। बाघों की दुर्घटना में जो मौंते हो रही हैं, उनका कारण इनके आवासीय क्षेत्रों में निरंतर आ रही कमी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जंगलों की बेतहाशा हो रही कटाई और वन-क्षेत्रों में आबाद हो रही मानव बस्तियों के कारण भी बाघ बेमौत मारे जा रहे हैं। पर्यटन के लाभ के लिए उद्यानों एवं अभ्यारण्यों में बाघ देखने के लिए जो क्षेत्र विकसित किए गए हैं, उस कारण इन क्षेत्रों में पर्यटकों की अवाजाही बढ़ी है, नतीजतन बाघ एकांत तलाशने के लिए अपने पारंपरिक रहवासी क्षेत्र छोड़ने को मजबूर होकर मानव बस्तियों में पहुंचकर बेमौत मर रहे हैं। बाघ सरंक्षण विशेश क्षेत्रों का जो विकास किया गया है, वह भी इसकी मौत का कारण बन रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र में बाघ का मिलना तय होता है। बाघों के निकट तक पर्यटकों की पहुंच आसान बनाने के लिए बाघों के शरीर में जो कॉलर आईडी लगाए गए हैं, वे भी इनकी मौत का प्रमुख कारण हैं। आईडी से वनकर्मियों को यह जानना आसान होता है कि इस वक्त बाघ किस क्षेत्र में हैं। तस्करों से रिश्वत लेकर वनकर्मी बाघ की उपस्थिति की जानकारी दे देते हैं। नतीजतन शिकारी बाघ को आसानी से निशाना बना लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अप्रत्यक्ष व अप्रामाणिक तौर से यह सत्य सामने आ चुका है कि बाघों के शिकार में कई वनाधिकारी शामिल हैं, इसके बावजूद जंगल महकमा और कुलीन वन्य जीव प्रेमी वनखण्डों और उनके आसपास रहने वाली स्थानीय आबादी को वन्यप्राणी संरक्षण से जोड़ने की कोशिश करने की बजाय भोले-भाले आदिवासियों पर झूठे मुकदमे लादने और उन्हें वनों से बेदखल करने की कोशिशों में लगे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि सदियों से वनों में आदिवासियों का बाहुल्य उनका प्रकृति और प्राणी से सह-अस्तित्व की जीवन शैली ही ईमानदारी से वन और वन्य जीवों का सुरक्षा व संरक्षण का मजबूत तंत्र साबित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाघों की गणना के ताजा व पूर्व प्रतिवेदनों से भी यह तय हुआ है कि 90 प्रतिशत बाघ आरक्षित बाघ अभ्यारण्यों से बाहर रहते हैं। इन बाघों के संरक्षण में न वनकर्मियों का कोई योगदान होता है और न ही बाघों के लिए मुहैया कराई जाने वाली धनराशि बाघ संरक्षण के उपायों में खर्च होती हैं ? इस तथ्य की पुष्टि इस बात से भी होती है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में जो जंगल हैं, उनमें बाघों की संख्या में गुणात्मक वृद्धि हुई है। जाहिर है इन क्षेत्रों में बाघ संरक्षण के सभी सरकारी उपाय पहुंच से बाहर हैं। लिहाजा वक्त का तकाजा है कि जंगल के रहबर वनवासियों को ही जंगल के दावेदार के रुप में देखा जाए तो संभव है वन प्रबंधन का कोई मानवीय संवेदना से जुड़ा जनतांत्रिक सहभागितामूलक मार्ग प्रशस्त हो।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रमोद भार्गव</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/dying-tiger-in-madhya-pradesh/article-7946</link>
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                <pubDate>Wed, 06 Mar 2019 22:00:38 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टाइगर व हिमालियन भालू के इंतजार में बीत गई छुट्टियां</title>
                                    <description><![CDATA[ सेंट्रल कमेटी से मंजूरी पर अटका मामला अभी अधिकारियों के पास नहीं कोई सपष्ट जवाब (Vacations, Waiting, Tiger, And, Himalayan, Bears) सच कहूँ/इंद्रवेश भिवानी। चौ. सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल भिवानी मिनी जू में दुर्लभ प्रजाति के वन्य प्राणियों के आने का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। हिमालियन भालू और टाइगर आने के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/vacations-in-the-waiting-of-tiger-and-himalayan-bears/article-4614"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/vacations-waiting-tiger-and-himalayan-bears.jpg" alt=""></a><br /><h1> सेंट्रल कमेटी से मंजूरी पर अटका मामला</h1>
<h3>अभी अधिकारियों के पास नहीं कोई सपष्ट जवाब</h3>
<p><strong>(Vacations, Waiting, Tiger, And, Himalayan, Bears)</strong></p>
<p><strong>सच कहूँ/इंद्रवेश </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी।</strong> चौ. सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल भिवानी मिनी जू में दुर्लभ प्रजाति के वन्य प्राणियों के आने का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। हिमालियन भालू और टाइगर आने के इंतजार में ग्रीष्म कालीन अवकाश भी बीत गए और आज से स्कूली बच्चे फिर से पढ़ाई की और लौट जाएंगे।ग्रीष्म कालीन अवकाश से पहले ही मिनी जू प्रशासन के अधिकारियों का दावा था कि हिमालियन भालू और टाइगर के बाड़े आबाद हो जाएंगे और यहां आने वाले दर्शकों को भी इन दोनों ही दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों का दीदार होगा, मगर इंतजार है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। वन्य प्राणी विभाग के उच्चाधिकारियों की मानें तो इन दोनों ही दुर्लभ वन्य जीवों को यहां लाने के लिए जू सेंट्रल कांउसिंल से बातचीत चल रही हैं, मगर मामला अभी तक अनुमति को लेकर अटका हुआ है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">मिनी जू में संरक्षित हैं ये प्रजातियां</h1>
<p style="text-align:justify;">भिवानी मिनी जू में फिलहाल दरियाई घोड़ा, मगरमच्छ, घडियाल, तेंदुआ, काला हीरन, लोमड़ के अलावा कई परिंदों की प्रजातियां यहां संरक्षित की हुई हैं। जबकि मिनी जू में भालू और टाइगर का बाड़ा लम्बे अर्से से सूना पड़ा है। जल में रहने वाले वन्य जीवों के यहां कभी कभार ही दर्शकों को दर्शन होते हैं, क्योंकि गर्मी के कारण ये जीव पानी से पल भर के लिए ही बाहर झांकते हैं और फिर पानी में विलुप्त हो जाते हैं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">डीएफओ बोले, जारी है प्रक्रिया</h1>
<p style="text-align:justify;">इस सम्बंध में वन्य प्राणी विभाग के डीएफओ पवन ग्रोवर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि भिवानी मिनी जू में फिलहाल भालू और टाइगर को लाने की प्रक्रिया चल रही हैं, मगर निश्चित तौर पर अभी ये नहीं कहा जा सकता कि ये दोनों वन्य जीव यहां कब तक आ पाएंगे। सेंट्रल कमेटी से लगातार सम्पर्क किया जा रहा है और इस मामले में वे खुद भी चाहते हैं कि जल्द से जल्द दोनों वन्य जीव यहां लाए जाएं, ताकि यहां की रौनक बढ़े।</p>
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                <pubDate>Mon, 02 Jul 2018 12:26:27 +0530</pubDate>
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