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                            <item>
                <title>वसुंधरा राजे को सुप्रीम कोर्ट का झटका, पूर्व सीएम को नहीं मिलेंगी सुविधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[बंगला करना पड़ेगा खाली, अन्य सुविधाओं पर भी रोक | Vasundhara Raje राजस्थान सरकार की एसएलपी को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज Edited By Vijay Sharma नई दिल्ली(एजेंसी)। (Vasundhara Raje ) सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सुविधाएं नहीं मिलने के राजस्थान हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>बंगला करना पड़ेगा खाली, अन्य सुविधाओं पर भी रोक | Vasundhara Raje</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>राजस्थान सरकार की एसएलपी को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज</strong></li>
</ul>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> <strong>(Vasundhara Raje )</strong> सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सुविधाएं नहीं मिलने के राजस्थान हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान सरकार  की एसएलपी को खारिज कर दिया। राजस्थान सरकार ने  हाइकोर्ट के 4 सितंबर 2019 के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए राजस्थान हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल देने का कोई आधार नहीं दिख रहा है। इसके चलते एसएलपी को खारिज किया जाता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हाइकोर्ट ने यह दिया था फैसला |Vasundhara Raje</h2>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान हाइकोर्ट ने मिलापचंद डांडिया की याचिका पर राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन अधिनियम 2017 को असंवैधानिक व शून्य करार दिया था। इसके तहत सरकार को पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली सुविधाओं को वापस लेना था। इसके चलते पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली आजीवन बंगला, टेलीफोन, कार-ड्राइवर, स्टॉफ समेत अन्य सुविधाओं पर रोक लग गई थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राजे और पहाडिय़ा होंगे प्रभावित</h2>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के फैसले का राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और जगन्नाथ पहाडिय़ा पर असर पड़ेगा। फिलहाल दोनों नेताओं को पूर्व मुख्यमंत्री की सुविधाएं राजस्थान सरकार की ओर से दी जा रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भाजपा सरकार ने पारित किया था विधेयक</h2>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान में भाजपा की तत्कालीन सरकार के दौरान राजस्थान मंत्री वेतन अधिनियम 1956 में संशोधन कर राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन नियम 2017 के तहत बंगला टेलीफोन समेत कई सुविधाएं पूर्व मुख्यमंत्रियों को देने का विधेयक विधानसभा में पारित किया गया था। इसके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री को एक सरकारी बंगला, कार, पूर्व सीएम या उनके परिवार के लिए राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को बतौर निजी सचिव नियुक्त करने सहित नौ कर्मचारियों का स्टाफ शामिल है।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jan 2020 13:13:15 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वीवीपैट मामले पर आज सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट,</title>
                                    <description><![CDATA[21 दलों ने की है 50 फीसदी पर्ची मिलान की मांग आंध्रप्रदेश (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान को लेकर सुनवाई होगी। इसके लिए कुल 21 विपक्षी दलों ने याचिका दायर की थी। ये दल चाहते हैं कि चुनाव आयोग 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-3/article-8931"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-05/court.jpg" alt=""></a><br /><h1>21 दलों ने की है 50 फीसदी पर्ची मिलान की मांग</h1>
<p><strong>आंध्रप्रदेश (एजेंसी)।</strong> सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान को लेकर सुनवाई होगी। इसके लिए कुल 21 विपक्षी दलों ने याचिका दायर की थी। ये दल चाहते हैं कि चुनाव आयोग 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों के ईवीएम से मिलान का आदेश दे। बीते महीने सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि मतगणना के लिए ईवीएम के साथ लगी वीवीपैट की पर्चियों के मिलान की प्रक्रिया प्रति विधानसभा क्षेत्र में एक मतदान केंद्र से बढ़ाकर पांच मतदान केंद्र की जाए।</p>
<p>हालांकि, कोर्ट ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 50 फीसदी पर्चियों का मिलान करने का विपक्षी नेताओं का अनुरोध अस्वीकार कर दिया था।प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई करने का अनुरोध किया था। पीठ ने सिंघवी का यह अनुरोध स्वीकार करते हुए कहा था कि पुनर्विचार याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई की जाएगी।</p>
<p>पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि वीवीपैट पर्चियों के मिलान में सिर्फ दो फीसदी की वृद्धि पर्याप्त नहीं होगी और इससे न्यायालय के आदेश से पहले की स्थिति में बहुत अधिक बदलाव नहीं आएगा। इससे चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बढ़ाने का मकसद भी पूरा नहीं हो पाएगा। इसलिए, याचिकाकर्ता मेरिट के आधार पर अपनी दलीलों में सफल रहे हों लेकिन उनकी यह सफलता उनकी शिकायत का समाधान नहीं करती है।</p>
<h2>मिलान के लिए पांच मतदान केंद्र पर्याप्त नहीं</h2>
<p>आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में इन विपक्षी दलों के नेताओं ने पुनर्विचार याचिका में कहा था कि वीवीपैट पर्चियों के औचक मिलान के लिए एक मतदान केंद्र से बढ़ाकर पांच मतदान केंद्र करना पर्याप्त नहीं है और इससे न्यायालय द्वारा अपेक्षित संतोषप्रद नतीजे नहीं मिलेंगें। याचिका में निर्वाचन आयोग की इस दलील का विरोध किया गया है कि चुनाव नजदीक हैं और ऐसी स्थिति में ईवीएम के साथ वीवीपैट की पर्चियों के मिलान की संख्या को बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है। याचिका में कहा गया है कि मिलान के लिए व्यावहारिक संख्या तर्कसंगत होनी चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आंध्रप्रदेश में अनेक मतदान केंद्रों पर वीवीपैट मशीनें सही तरीके से काम नहीं कर रही थीं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 May 2019 09:20:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट आदेश: सभी दल 30 मई तक चुनाव आयोग को दें चंदे की जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे चुनावी बॉन्ड की रसीदों को निर्वाचन आयोग को सौंपे। न्यायालय ने कहा कि वे दानदाताओं की पहचान और उनके खातों में मौजूद धनराशि का ब्यौरा 30 मई तक एक सील बंद लिफाफे में चुनाव पैनल को सौंप दें। उच्चतम न्यायालय ने कहा, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-order/article-8490"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/high-court-order.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे चुनावी बॉन्ड की रसीदों को निर्वाचन आयोग को सौंपे। न्यायालय ने कहा कि वे दानदाताओं की पहचान और उनके खातों में मौजूद धनराशि का ब्यौरा 30 मई तक एक सील बंद लिफाफे में चुनाव पैनल को सौंप दें।<br />
उच्चतम न्यायालय ने कहा,</p>
<p>अगले आदेश तक चुनाव आयोग भी चुनावी बॉन्ड से एकत्रित की गई धनराशि का ब्यौरा सील बंद लिफाफे में ही रखे। न्यायालय ने कहा कि वह कानून में किए गए बदलावों का विस्तार से परीक्षण करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि संतुलन किसी दल के पक्ष में न झुका हो। इससे पहले चुनावी बॉन्ड की वैधता को चुनौती देने वाली एनजीओ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता संगठन एडीआर ने चुनावी बॉन्ड की वैधता को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता संगठन का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह जानना जरूरी है कि इसके जरिये राजनीतिक दलों को चंदा कौन दे रहा है। संगठन के वकील का कहना था कि इनमें से ज्यादातर चंदा सत्तारूढ़ दल के पक्ष में गया है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Apr 2019 11:40:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आसिफ सईद खोसा  होंगे पाकिस्तान उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद (एजेंसी)। न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा को पाकिस्तान उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। कानून मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के अनुसार पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने बुधवार को न्यायाधीश खोसा की नियुक्ति को स्वीकृति दी ।बयान में कहा गया है कि न्यायाधीश खोसा उच्च्तम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश हैं । […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद (एजेंसी)।</strong> न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा को पाकिस्तान उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है<strong>। </strong>कानून मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के अनुसार पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने बुधवार को न्यायाधीश खोसा की नियुक्ति को स्वीकृति दी ।बयान में कहा गया है कि न्यायाधीश खोसा उच्च्तम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश हैं ।</p>
<h2 style="text-align:justify;">वह 18 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश की शपथ लेंगे ।</h2>
<p style="text-align:justify;">न्यायाधीश खोसा दिसंबर 2016 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बने थे। इससे पहले उन्होंने लाहौर उच्च न्यायालय में न्यायाधीश की सेवाएं दी ।<br />
पाकिस्तान के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार 17 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Jan 2019 13:50:47 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>त्यौहार, लोग और सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[दीवाली में पटाखों पर सुनवाई करना सुप्रीम कोर्ट की एक सराहनीय कदम है। एक समय अंतराल तक ही पटाखे फोड़ना पर्यावरण के सेहत में कम असर पड़ेगा। देश में वायु प्रदूषण को गंभीर समझना जरूरी हो चला है। आज पर्यावरण का बिगड़ता स्वास्थ्य काफी गंभीर समस्या बनती जा रही है। लगातार हरियाली में कमी आने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/festivals-people-and-supreme-court/article-6536"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/sc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
दीवाली में पटाखों पर सुनवाई करना सुप्रीम कोर्ट की एक सराहनीय कदम है। एक समय अंतराल तक ही पटाखे फोड़ना पर्यावरण के सेहत में कम असर पड़ेगा। देश में वायु प्रदूषण को गंभीर समझना जरूरी हो चला है। आज पर्यावरण का बिगड़ता स्वास्थ्य काफी गंभीर समस्या बनती जा रही है। लगातार हरियाली में कमी आने के कारण अनुकूल रहने वाला मौसम आज दिन प्रतिदिन बिगड़ रहा है। हवा में घुल चुका प्रदूषण रूपी जहर मानव की सेहत के लिए काफी हानिकारक बनता जा रहा है। इन दिनों प्रदूषण से बचने के लिए सरकार भी गंभीर दिख रही है।लेकिन हालत ज्यादा खराब होने के कारण पर्यावरण में फैल रहे इस जहर को रोकना एक चुनौती बन गई है।शहरों में हालत और ज्यादा नाजुक हंै।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण आज इतना ज्यादा दूषित हो चुका है कि देश का राजधानी दिल्ली में सांस लेना भारी पड़ रहा है। सिर्फ भारत की राजधानी दिल्ली में नही बल्कि देश भर में प्रदूषण की समस्या तेजी से बढ़ रही है।अब तो हालत इतना नाजुक हो चुका है की बढ़ते वायु प्रदूषण हमारी सेहत ही नहीं बल्कि हमारी उम्र को भी घटाने में जिम्मेदार है।वैज्ञानिकों की ओर से कराए गए एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि हवा में घुल चुके प्रदूषण से औसत भारतीय की उम्र डेढ़ साल तक कम हो रही है।वायु प्रदूषण से हर वर्ग के लोग प्राभवित हैं। बूढ़े हो या युवा हो या बच्चे हो।सब उम्र के वर्ग इनसे गहरा प्राभवित होता है। लेकिन बच्चों की बात करें तो उनमें श्वास संबधी रोग ज्यादा है। वायु प्रदूषण के कारण संभावित बच्चों में जन्मदर कम होने के साथ साथ अस्थमा व निमोनिया जैसे अन्य कई श्वास रोग होने की संभावना बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली जैसे त्योहार पर पटाखों पर पूरी पाबंदी ना करते हुए एक समय अंतराल तक ही पटाखों को फोड़ने की अनुमति दी है ताकि भारतीय त्योहारों और धार्मिक उत्सव में ज्यादा खलल ना पड़े। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने ज्यादा छेड़छाड़ ना करते हुए इस मामले की सुनवाई की है,क्योंकि भारत में धार्मिक मामलों में संवैधानिक रूप से कई छूट है। दीवाली आने में अभी सप्ताह बाकी है इसके पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई कर दी है अब देखने वाली बात होगी कि पूरे देश में यह किस तरह लागू होती है।भारत में त्योहारों की धूम तो बनते ही देखा जाता है।दीवाली भी एक मुख्य त्योहार है जिसको बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।सम्पूर्ण भारत मे इनकी धूम देखी जा सकती है।लेकिन इस त्योहार में वायु प्रदूषण को बढ़ावा भी कहीं ना कहीं दिया जाता है। सम्पूर्ण देश में व्यापक रूप से पटाखे फोड़े जाते हैं जो उच्च ध्वनि के साथ वायु को प्रदूषित कर वायुमंडल में जहर घोलने का कार्य करते हंै।</p>
<p style="text-align:justify;">
सिर्फ दीवाली को देखते हुए ही वायु प्रदूषण पर विचार करना उपाय नही है बल्कि यह एक गंभीर मुद्दा बन चुका है।दीवाली में जो प्रदूषण बढ़ेगा वो तो है ही लेकिन तात्कालित समय में ही वायु प्रदूषण गहराया जा रहा है।हालात यह है कि पर्यावरण आज इतना ज्यादा दूषित हो चुका है कि देश की राजधानी दिल्ली में सांस लेना भारी पड़ रहा है।सिर्फ दिल्ली ही नही भारत के कई राज्यों में वायु प्रदूषण व्यापक रूप से फैली हुई है।बढ़ती विकास की रफ्तार में हम इतने मगन हो गए हैं कि पर्यावरण और अपनी सेहत के प्रति उदासीन दिखते हैं। कुछ ही दिन पहले भारत प्रदूषण फैलाने वालों की सूची में अव्वल आया था। बढ़ते उद्योगों और परिवहन के कारण शहर की हरियाली पूरी तरह तबाह हो चुकी है। लोग खुली और स्वक्ष हवा लेने के लिए तरस गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हवाओं में फैली इस जहर के कारण कई रोगों का जन्म होता है। जिनसे कई लोग जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं। जिनका प्रतिकूल प्रभाव सभी उम्र के लोगों पर पड़ता है। लेकिन बच्चे सबसे ज्यादा प्राभवित होते हैं। आजकल सांसों का बढ़ता रोग प्रदूषण के कारण ही जोर पकड़ा हुआ है। ऐसा पहली मर्तबा है कि लोगों को पर्यावरण के प्रति चेताया गया है। हर बार विश्व संगठन लोगों को चेताने का काम करता है। लेकिन लोगों में जरा सी चेतना नही नजर आती है। जिसका अंजाम इतना बुरा होगा कि मानव को संभलने का मौका तक नहीं मिलेगा।भारत ही नही बल्कि दुनिया के बहुत सारे देश है जो वायु प्रदूषण को झेल रहा है। खास कर ऐसा देश जो विकाशील हो वहां प्रदूषण की मार ज्यादा है। गौरतलब है कि भारत भी विसकशील देशों की गिनती में आता है। जहाँ विकास को प्राथमिक मानते हुए प्रदूषण को अनदेखा किया जाता है। हालांकि भारत मे भी जागरूकता फैलाई जा रही है।कई बड़े बड़े आयोजन के जरिये भी लोगों को संदेश देने का काम करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन विडंबना यह है कि ऐसे संदेश बस मंच तक ही सीमित रह जाते हैं। लोगों की चेतना नही होने के कारण आज प्राकृतिक आपदा अपना उग्र रूप दिखाती है। प्रदूषण का बेहद खराब स्तर यह देखने के लिए काफी है कि दिल्ली में बुधवार को ही प्रदूषण का धुंध छाया रहा।बीते दिन में राजधानी के पांच इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर दर्ज किया गया है।गौरतलब है कि अभी भी दीवाली आने में सप्ताह बाकी है और प्रदूषण स्तर इतना उच्च है तो दो घंटे में ही हवा कितनी जहरीली हो जाएगी? इनका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही लोगों को इससे बचना जरूरी नहीं है बल्कि खुद के स्वास्थ्य और देश की राजधानी समेत पूरे देश में बढ़ रहे प्रदूषण रूपी मानवी जहर हो रोकना होगा तभी त्योहारों के मजे लिए जा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>नीलेश मेहरा</strong></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Nov 2018 10:04:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रंजन गोगोई आज लेंगे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ) Edited By Vijay Sharma।  सुप्रीम कोर्ट के सीनियर मुख्य जज रंजन गोगोई अाज देश के 46वें मुख्य जज के रूप में शपथ लेंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उनको सी.जी.आई. के तौर पर शपथ दिलाएंगे। गोगोई का कार्यकाल 13 महीने 12 दिन रहेगा। वह 17 नवंबर 2019 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। 1954 में जन्मे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/justice-ranjan-gogoi-today-sworn-in-as-chief-justice-of-the-supreme-court/article-6101"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/hc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ) Edited By Vijay Sharma। </strong> सुप्रीम कोर्ट के सीनियर मुख्य जज रंजन गोगोई अाज देश के 46वें मुख्य जज के रूप में शपथ लेंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उनको सी.जी.आई. के तौर पर शपथ दिलाएंगे। गोगोई का कार्यकाल 13 महीने 12 दिन रहेगा। वह 17 नवंबर 2019 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। 1954 में जन्मे गोगोई वर्ष 1978 में बार काउंसिल में शामिल हुए थे। इसके बाद, 28 फरवरी, 2001 को उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया। फरवरी, 2011 में वह पंजाब व हरियाणा के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए। उन्हें पदोन्नति देकर अप्रैल, 2012 में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली और मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर लगाए थे सवालिया निशान</h2>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस रंजन गोगोई उस बैंच में शामिल रहे हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू को सौम्या मर्डर केस पर ब्लॉग लिखने के संबंध में निजी तौर पर अदालत में पेश होने के लिए कहा था। गौरतलब है कि रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। रंजन उन चार जजों में से एक हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली और मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवालिया निशान लगाए थे। इन लोगों ने कहा था कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है और चीफ जस्टिस अपने पद का फायदा उठाकर रोस्टर के मामले में मनमानी कर रहे हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Oct 2018 09:14:18 +0530</pubDate>
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                <title>राफेल डील मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अाज</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ, Edited By Vijay Sharma )। मोदी सरकार के लिए फांस बन चुका राफेल विमान सौदे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है और अब इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होने जा रही है। मनोनीत चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच राफेल विमान सौदे से जुड़े मामले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/hearing-in-supreme-court-today-in-rafael-deal-case/article-5975"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/rafael-deal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ, Edited By Vijay Sharma )</strong>। मोदी सरकार के लिए फांस बन चुका राफेल विमान सौदे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है और अब इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होने जा रही है। मनोनीत चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच राफेल विमान सौदे से जुड़े मामले की सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ता ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पक्षकार बनाया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राफेल डील में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले कांग्रेस ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा था कि पार्टी नहीं समझती है कि ये मसला उठाने के लिए सुप्रीम कोर्ट उचित फोरम है और पार्टी का न तो तहसीन पूनावाला से कोई संबंध और न ही उनकी याचिका से। कांग्रेस ने कहा था कि मीडिया में ऐसी भ्रम की स्थिति रहती है कि तहसीन पूनावाला कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ऐसे में हम साफ करना चाहते हैं कि राफेल डील के खिलाफ तहसीन पूनावाला की याचिका और उनसे पार्टी का कोई संबंध नहीं है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या है राफेल डील?</h2>
<p style="text-align:justify;">राफेल सौदे के तहत 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भारत और फ्रांस की सरकारों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। राफेल लड़ाकू विमान दोहरे इंजन वाला अनेक भूमिकाएं निभाने वाला मध्यम लड़ाकू विमान है। इसका निर्माण फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन करती है। राफेल विमान फ्रांस की डेसाल्ट कंपनी द्वारा बनाया गया 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है। राफेल लड़ाकू विमानों को ओमनिरोल विमानों के रूप में रखा गया है, जो कि युद्ध के समय अहम रोल निभाने में सक्षम हैं। हवाई हमला, जमीनी समर्थन, वायु वर्चस्व, भारी हमला और परमाणु प्रतिरोध ये सारी राफेल विमान की खूबियां हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Sep 2018 08:38:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अनुच्छेद 35-ए: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज,  हालात तनावपूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीनगर (एजेंसी)।  सर्वाेच्च न्यायालय में आज सोमवार को अनुच्छेद 35-ए को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई होनी है। पहले की तरह इसे कुछ समय के लिए स्थगित किया जाता है या नहीं। इस पर संशय बना हुआ है। पूरे देश व सियासतदानों की इस मुद्दे पर नजर टिकी है। उधर, अनुच्छेद के हटने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/article-35-a-hearing-in-supreme-court-today-circumstance-stressful/article-5164"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/hc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>श्रीनगर (एजेंसी)।</strong>  सर्वाेच्च न्यायालय में आज सोमवार को अनुच्छेद 35-ए को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई होनी है। पहले की तरह इसे कुछ समय के लिए स्थगित किया जाता है या नहीं। इस पर संशय बना हुआ है। पूरे देश व सियासतदानों की इस मुद्दे पर नजर टिकी है। उधर, अनुच्छेद के हटने की आशंका को देखकर कश्मीर में तनाव का माहौल बना हुआ है। अनुच्छेद 35-ए के तहत जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष शक्तियां मिली हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट जारी</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य प्रशासन ने कश्मीर में हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कड़ी करते हुए अलगाववादी नेताओं की नजरबंदी सख्त कर दी गई है। शरारती तत्वों की धरपकड़ भी की जा रही है। कश्मीर में अलगाववादी संगठनों से लेकर मुख्यधारा की सियासत करने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, माकपा भी धारा 35-ए के हक में लामबंद हो चुकी है। कश्मीर के सभी व्यापारिक, सामाजिक, मजहबी संगठनों से लेकर ट्रेड यूनियनें और कर्मचारी संगठन 35-ए के मुद्दे पर अलगाववादियों के साथ खड़े हैं और चाहते हैं कि सर्वाेच्च न्यायालय 35-ए को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अलगाववादियों ने बुलाया कश्मीर बंद</h2>
<p style="text-align:justify;">इस मुद्दे पर अलगाववादी खेमे का दो दिवसीय कश्मीर बंद रविवार को शुरू हो चुका है। राज्य प्रशासन ने दो दिन पहले सर्वाेच्च न्यायालय में याचिका दायर कर 35-ए पर सुनवाई को स्थगित करने का आग्रह किया है, लेकिन इस आग्रह पर अभी तक कोई फैसला नहीं आया है। राज्य प्रशासन ने सर्वाेच्च न्यायालय को बताया है कि राज्य में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी चल रही है। इसलिए 35-ए पर सुनवाई को स्थगित किया जाए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">फैसला खिलाफ आया तो बिगड़ सकती है स्थिति</h2>
<p style="text-align:justify;">खुफिया तंत्र ने अलर्ट जारी करते हुए संबंधित प्रशासन को चेताया है कि सर्वाेच्च न्यायालय में फैसला 35-ए के खिलाफ जाने पर कश्मीर में स्थिति बिगड़ सकती है और कानून व्यवस्था का संकट पैदा हो सकता है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक अलगाववादी और आतंकी संगठन 35-ए के मुद्दे पर होने वाले प्रदर्शनों के जरिए वादी में आग लगाने की साजिश को अमली जामा पहनाने की फिराक में हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">
आतंकी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में</h2>
<p style="text-align:justify;">इस मुद्दे पर होने वाले प्रदर्शनों के बहाने आतंकी संगठन किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। उसका जिम्मा सुरक्षा एजेंसियों के माथे मढ़ने की फिराक में बैठे हैं। एक अन्य खुफिया एजेंसी के अलर्ट के मुताबिक, राज्य पुलिस में भी इस मामले को लेकर तनाव की स्थिति नजर आ रही है। सूत्रों ने बताया कि राज्य प्रशासन ने सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त करते हुए सभी सुरक्षा एजेंसियो को एलर्ट रहने के लिए कहा है। वादी में सभी संवेदनशील इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिकबलों की गश्त बढ़ाई गई है। प्रमुख अलगाववादी नेताओं को नजरबंद करने के अलावा पुलिस विभिन्न अलगाववादी संगठनों के प्रमुख कार्यकर्ताओं और शरारती तत्वों की धरपकड़ भी कर रही है, ताकि किसी को भी सोमवार को वादी में हालात बिगाड़ने का मौका नहीं दिया जाए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अमरनाथ यात्रा पर लगा ब्रेक</h2>
<p style="text-align:justify;">दो दिन की हड़ताल के चलते अमरनाथ यात्रा को भी ऐहतियातन रोक दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू में रुके तीर्थयात्रियों को रविवार सुबह भगवती नगर आधार शिविर से आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। दरअसल, अनुच्छेद 35 ए को लेकर न केवल अलगाववादियों बल्कि विभिन्न धार्मिक और समाजिक संगठनों ने हड़ताल का आह्वान किया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या है अनुच्छेद 35-A?</h2>
<ul>
<li>अनुच्छेद 35-A को वर्ष 1954 राष्ट्रपति आदेश के जरिए संविधान में जोड़ा गया।</li>
<li>अनुच्छेद 35-ए जम्मू कश्मीर के स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार देता है।</li>
<li>इसके तहत राज्य से बाहर के किसी व्यक्ति से शादी करने वाली महिला से संपत्ति का अधिकार छीन जाता है।</li>
<li>कोई बाहरी शख्स राज्य सरकार की योजनाओं का फायदा भी नहीं उठा सकता है।</li>
<li>कोई बाहरी न ही वहां सरकारी नौकरी पा सकता है।</li>
</ul>
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                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/article-35-a-hearing-in-supreme-court-today-circumstance-stressful/article-5164</link>
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                <pubDate>Mon, 06 Aug 2018 09:11:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट पहुंचा रकबर खान की हत्या का मामला, 20 अगस्त को होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। देश के कई हिस्सों से सामने आए लिंचिंग के मामलों ने हर किसी को हैरत में डाल दिया है। राजस्थान के अलवर में गोरक्षकों द्वारा की गई रकबर खान की हत्या का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को स्वीकार कर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/case-of-murder-of-rakbar-khan-reached-supreme-court-hearing-on-august-20/article-4980"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>देश के कई हिस्सों से सामने आए लिंचिंग के मामलों ने हर किसी को हैरत में डाल दिया है। राजस्थान के अलवर में गोरक्षकों द्वारा की गई रकबर खान की हत्या का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें अलवर मामले को लेकर राजस्थान सरकार और अधिकारियों पर सर्वोच्च अदालत के निर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 20 अगस्त को होगी। सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका तहसीन पूनावाला की तरफ से डाली गई है। आपको बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने लिंचिंग को लेकर कई दिशा निर्देश जारी किए थे, केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देशों का पालन करने को कहा गया था । लेकिन SC के आदेश के बावजूद भी देश में इस प्रकार की घटनाएं नहीं रुकीं।</p>
<h2>क्या है अलवर मामला?</h2>
<p>आपको बता दें कि राजस्थान के अलवर जिले में मॉब लिंचिंग में रकबर खान की मौत के मामले में राज्य पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि पुलिस ने रकबर को अस्पताल पहुंचाने की जगह बरामद गायों को पहले गौशाला पहुंचाने को तरजीह दी। यही नहीं, पुलिस ने खुद भी रकबर की पिटाई की। इसकी वजह से रकबर को अस्पताल पहुंचाने में तीन घंटे की देरी हुई और उसकी मौत हो गई। उक्त आरोपों पर अलवर के एसपी राजेंद्र सिंह ने आजतक से कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी। मीडिया में आई खबरों में यह कहा गया था कि रकबर को अस्पताल पहुंचाने में तीन घंटे लग गए और पुलिस ने रकबर को अस्पताल पहुंचाने की जगह पहले गायों को गौशाला तक पहुंचाने को प्राथमिकता दी।गौरतलब है कि रामगढ़ थाना क्षेत्र के लालवंडी गांव में गो तस्करी के आरोप में कुछ कथित गोरक्षकों ने रकबर खान नामक एक शख्स को पीट-पीटकर मार डाला था।</p>
<h2>लिंचिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश जारी किए थे…</h2>
<ul>
<li>1. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भीड़तंत्र की इजाजत नहीं दी जा सकती है</li>
<li>2. कानून का शासन कायम रहे यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है</li>
<li>3. कोई भी नागरिक कानून अपने हाथों में नहीं ले सकता है</li>
<li>4. संसद इस मामले में कानून बनाए और सरकारों को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए</li>
<li>5. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भीड़तंत्र के पीड़ितों को सरकार मुआवजा दे</li>
</ul>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jul 2018 06:08:27 +0530</pubDate>
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                <title>सीवीसी की नियुक्ति को रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार</title>
                                    <description><![CDATA[कोर्ट राजनीतिक पक्षपात के पहलू पर गौर नहीं करेगा (Supreme, Court, Denies, Cancellation, Appointment, CVC) नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने मुख्य सतर्कता आयुक्त एवं और सतर्कता आयुक्त की नियुक्तियों को रद्द करने से सोमवार को इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि इसमें उसे कोई आधार नहीं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-court-denies-cancellation-of-appointment-of-cvc/article-4620"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/supreme-court-denies-cancellation-appointment-cvc.jpg" alt=""></a><br /><h1>कोर्ट राजनीतिक पक्षपात के पहलू पर गौर नहीं करेगा</h1>
<p><strong>(Supreme, Court, Denies, Cancellation, Appointment, CVC)</strong></p>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय ने मुख्य सतर्कता आयुक्त एवं और सतर्कता आयुक्त की नियुक्तियों को रद्द करने से सोमवार को इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि इसमें उसे कोई आधार नहीं मिला, जिससे इन्हें रद्द किया जा सके। गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज और सेंटर फॉर इंटीग्रिटी एंड गवर्नेंस ने याचिका दायर की थी। न्यायालय को इस मामले में फैसला सुनाना था कि सीवीसी और सतर्कता आयुक्तों के पदों पर नियुक्त व्यक्ति बेदाग छवि होने का मानदंड पूरा करता है या नहीं। कॉमन कॉज ने सीवीसी के वी. चौधरी और सतर्कता आयुक्त वीसी टी. एम. भसीन की नियुक्ति को चुनौती दी थी और कहा था कि ये नियुक्ति गैरकानूनी है।</p>
<h1>वर्ष 2013 में उनके खिलाफ आरोपों पर सीवीसी ने जांच भी की थी</h1>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह राजनीतिक पक्षपात के पहलू पर गौर नहीं करेगा, लेकिन केवल इस बात की जांच करेगा कि सीवीसी और सतर्कता आयुक्तों के पदों पर नियुक्त व्यक्ति बेदाग छवि होने का मानदंड पूरा करता है या नहीं। शीर्ष अदालत ने 2015 में दायर एक याचिका पर सुनवाई की थी जिसमें सीवीसी के. वी. चौधरी और सतर्कता आयुक्त वीसी टी. एम. भसीन की नियुक्ति पर यह आरोप लगाते हुए चुनौती दी गई थी कि उनका रिकॉर्ड साफ नहीं है और उनकी नियुक्ति के दौरान अपारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया गया। वर्ष 2013 में उनके खिलाफ आरोपों पर सीवीसी ने जांच भी की थी। श्री चौधरी को सीवीसी पद पर छह जून 2015 को जबकि भसीन को 2015 में 11 जून को वीसी नियुक्त किया गया था।</p>
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<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jul 2018 14:03:21 +0530</pubDate>
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