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                <title>Historical Decision - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Historical Decision RSS Feed</description>
                
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                <title>फतेहाबाद कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[फतेहाबाद(सच कहूँ/विनोद शर्मा)। सिविल जज जतिन गर्ग की अदालत (Fatehabad Court) ने एक ऐतिहासिक फैसले में आवारा पशुओं के हमले में घायल लोगों को मुआवजा देने का रास्ता साफ कर दिया है। आवारा पशुओं के हमले में घायल होने पर नगर परिषद देगा मुआवजा (Fatehabad Court) कोर्ट ने आवारा सांड के हमले में घायल पत्रकार रामकुमार भारती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/historical-decision-fatehabad-court/article-5269"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/awara-pashu.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>फतेहाबाद(सच कहूँ/विनोद शर्मा)।</strong> सिविल जज जतिन गर्ग की अदालत <strong>(Fatehabad Court)</strong> ने एक ऐतिहासिक फैसले में आवारा पशुओं के हमले में घायल लोगों को मुआवजा देने का रास्ता साफ कर दिया है।</p>
<h2>आवारा पशुओं के हमले में घायल होने पर नगर परिषद देगा मुआवजा (Fatehabad Court)</h2>
<p>कोर्ट ने आवारा सांड के हमले में घायल पत्रकार रामकुमार भारती को दो लाख रुपये मुआवजा व हर्जाना देने के आदेश दिए हंै। नगर परिषद को यह मुआवजा देना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि 13 अप्रैल 2015 को जब भारती घर से निकले तो गली में आवारा सांड ने उन्हें पीछे से टक्कर मार कर उछाल दिया, जिससे उनकी टांग टूट गई थी। डाक्टरों ने भारती को शरीरिक तौर पर 15 फीसद अपंग बताया था।</p>
<p>रामकुमार को दो माह तक बेड रेस्ट करना पड़ा और इलाज पर हजारों रुपये खर्च आया। भारती ने एडवोकेट देवीलाल की मार्फत नगर परिषद फतेहाबाद के विरुद्ध केस दायर कर मुआवजें की मांग की।</p>
<p>नगर परिषद का कहना था कि ऐसे मामले में किसी तरह के मुआवजे का कोई भी प्रोविजन नहीं है, लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने एक्ट व हाईकोर्ट का रुलिंग दिखाकर साबित किया कि कोर्ट को मुआवजा व हर्जाना तय करने का अधिकार है।</p>
<p>कोर्ट <strong>(Fatehabad Court)</strong> ने याचिकाकर्ता के मेडिकल खर्च, अपंगता, आर्थिकता नुकसान व हुई मानसिक परेशानी के आधार पर दो लाख रुपये मुआवजा व हर्जाना देने के आदेश दिए हैं। इस फैसले के बाद अब आवारा पशुओं से घायल लोग कोर्ट की शरण ले सकेंगे। वहीं नगर परिषद को भी समझ आ जाएगी कि अगर वह आवारा पशुओं पर नियंत्रण नहीं रखेगी तो उसे आए दिन मुआवजा देना पडेगा।</p>
<h2>बाइक से टकराया सांड, चालक व सांड दोनों की मौत</h2>
<p><strong>सरसा (सच-कहूँ न्यूज)।</strong> गांव कोटली के समीप बाइक सवार व्यक्ति की आवारा पशु के आगे आ जाने से मौत हो गई। यही नहीं बाइक के आगे आए सांड की भी कुछ देर बाद मौत हो गई। कुछ देर बाद आसपास के लोगों ने घटना बारे पुलिस को सूचित किया।</p>
<p>पुलिस ने मौके पर आकर पहचान के बाद मृतक के परिजनों को सूचित किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल में पहुंचाया। जानकारी अनुसार हिसार निवासी रमेश कुमार (45) पुत्र रामनाथ, जोकि गांव कोटली में रिश्तेदारी में आया हुआ था। बीती रात 11 बजे के करीब वह बाइक लेकर सरसा से कोटली लौट रहा था। इसी दौरान गांव के समीप ही सड़क पर बाइक के आगे अचानक आवारा सांड आ गया जिससे बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई।</p>
<p>गंभीर चोटें लगने के कारण बाइक सवार की मौत हो गई। वहीं टक्कर लगने के कुछ देर बाद आवारा सांड ने भी दम तोड़ दिया। पुलिस ने सुबह परिजनों के बयानों के आधार पर शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सांैप दिया।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Aug 2018 15:57:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>ऐतिहासिक फैसला: दिल्ली में अब एलजी नहीं सीएम की चलेगी</title>
                                    <description><![CDATA[हर काम में उपराज्यपाल की इजाजत जरूरी नहीं | Historical Decision सरकार के फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकते उपराज्यपाल Agency/Edit By Deepak Tyagi नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में चुनी हुई सरकार और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि उपराज्यपाल के बीच आखिर किसकी चलेगी इस पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला (Historical Decision) सुना दिया है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/historical-decision/article-4656"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/kejriwal.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">हर काम में उपराज्यपाल की इजाजत जरूरी नहीं | Historical Decision</h2>
<ul>
<li><strong>सरकार के फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकते उपराज्यपाल</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Agency/Edit By Deepak Tyagi </strong><strong>नई दिल्ली।</strong> राजधानी दिल्ली में चुनी हुई सरकार और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि उपराज्यपाल के बीच आखिर किसकी चलेगी इस पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला <strong>(Historical Decision)</strong> सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली होईकोर्ट के फैसले को बदलकर कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल निर्वाचित सरकार के प्रत्येक फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकते और वह मंत्रिपरिषद की सलाह मानने को बाध्य हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अलग-अलग, परंतु सहमति वाले फैसले में कहा कि उपराज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 239एए के प्रावधानों को छोड़कर अन्य मुद्दों पर निर्वाचित सरकार की सलाह मानने को बाध्य हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं | Historical Decision</h1>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति मिश्रा ने साथी न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति ए के सिकरी एवं न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की ओर से फैसला पढ़ा, जबकि न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने अपना-अपना फैसला अलग से सुनाया। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले को यहां के लोगों की जीत बताया है।</p>
<h1 style="text-align:center;"><strong>सुप्रीम कोर्ट का फैसला जनता की जीत: केजरीवाल</strong></h1>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">A big victory for the people of Delhi…a big victory for democracy…</p>
<p>— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) <a href="https://twitter.com/ArvindKejriwal/status/1014387139583373313?ref_src=twsrc%5Etfw">July 4, 2018</a></p></blockquote>
<p></p>
<h1 style="text-align:center;">सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा | Historical Decision</h1>
<ul>
<li><strong>कुछ मामलों को छोड़कर दिल्ली विधानसभा बाकी मसलों पर कानून बना सकती है। संसद का बनाया कानून सर्वोच्च है। </strong></li>
<li><strong>एलजी दिल्ली कैबिनेट की सलाह और सहायता से काम करें।</strong></li>
<li><strong>इतना ही नहीं कोर्ट ने यह भी कहा है कि एलजी को दिल्ली सरकार के काम में बाधा नहीं डालनी चाहिए। </strong></li>
<li><strong>हर काम में एलजी की सहमति अनिवार्य नहीं है।</strong></li>
<li><strong>सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है, </strong></li>
<li><strong>इसलिए यहां के राज्यपाल के अधिकार दूसरे राज्यों के गवर्नर से अलग है। </strong></li>
<li><strong>दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं है। इसलिए यहां बाकी राज्यपालों से अलग स्थिति है।</strong></li>
<li><strong>सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर एलजी को दिल्ली कैबिनेट की राय मंजूर न हो तो वह सीथे राष्ट्रपति के पास मामला भेज सकते हैं। </strong></li>
<li><strong>शक्तियों में समन्वय होना चाहिए। शक्तियां एक जगह केंद्रित नहीं हो सकती।</strong></li>
<li><strong>लोकतांत्रिक मूल्य सर्वोच्च हैं। जनता के प्रति जवाबदेही सरकार की होनी चाहिए। </strong></li>
<li><strong>संघीय ढांचे में राज्यों को भी स्वतंत्रता मिली हुई है। </strong></li>
<li><strong>जनमत का महत्व बड़ा है। इसलिए तकनीकी पहलुओं में उलझाया नहीं जा सकता।</strong></li>
</ul>
<h1 style="text-align:center;">बीजेपी ने अपनी जीत बताया | Historical Decision</h1>
<p style="text-align:justify;">बीजेपी के दिल्ली अध्यक्ष मनोज तिवारी ने फैसले का स्वागत किया है। उनका तर्क है कि कोर्ट ने सीएम और उप-राज्यपाल को संविधान सम्मत होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्ज नहीं देने की बात कह कर सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को आईना दिखाया है। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष ने आगे कहा कि केजरीवाल संविधान को नहीं मानते और सुप्रीम कोर्ट ने अराजक शब्द का इस्तेमाल करके केजरीवाल के गाल पर तमाचा मारा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>यह उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला है। अब दिल्ली सरकार को फाइलें उप राज्यपाल को नहीं भेजनी होंगी और काम नहीं रुकेगा। हम दिल्ली की जनता की ओर से सुप्रीम कोर्ट का आभार जताते हैं। उपराज्यपाल को कैबिनेट के फैसले को मानना होगा। तबादला और नियुक्ति सरकार ही करेगी। सिसोदिया ने कहा कि पूर्ण राज्य का आंदोलन चलता रहेगा।</em><br />
<strong>मनीष सिसोदिया</strong></p>
<h2 style="text-align:center;">केजरीवाल ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती | Historical Decision</h2>
<p style="text-align:justify;">केजरीवाल सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी जिसमें उसने कहा था कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रशासनिक अधिकारी हैं। केजरीवाल सरकार का आरोप था कि केंद्र सरकार दिल्ली में संवैधानिक रूप से चुनी गयी सरकार के अधिकारों का हनन करती है। इस वजह से दिल्ली के विकास कार्य प्रभावित होते हैं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Jul 2018 10:35:50 +0530</pubDate>
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