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                <title>Rural - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Rural RSS Feed</description>
                
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                <title>eGramSwaraj: ग्रामीण सुशासन को ई-ग्राम स्वराज की दरकार</title>
                                    <description><![CDATA[eGramSwaraj: साल 2025 तक देश में इंटरनेट की पहुंच 90 करोड़ से अधिक जनसंख्या तक हो जाएगी जो वर्तमान में 70 करोड़ है। तकनीक किस गति से अपना दायरा बढ़ा रही है यह बढ़े हुए सुशासन से आंक सकते हैं। गौरतलब है कि ई-गवर्नेंस से प्रशासनिक कार्य एवं सेवाओं की दक्षता तथा गुणवत्ता में सुधार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rural-good-governance-needs-e-gram-swaraj/article-50580"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/egramsavraj.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">eGramSwaraj: साल 2025 तक देश में इंटरनेट की पहुंच 90 करोड़ से अधिक जनसंख्या तक हो जाएगी जो वर्तमान में 70 करोड़ है। तकनीक किस गति से अपना दायरा बढ़ा रही है यह बढ़े हुए सुशासन से आंक सकते हैं। गौरतलब है कि ई-गवर्नेंस से प्रशासनिक कार्य एवं सेवाओं की दक्षता तथा गुणवत्ता में सुधार होता है और यह भ्रष्टाचार को कम करने का औजार भी है। जाहिर है ऐसी दोनों परिस्थितियों में सुशासन की बयार बहना संभव है। भारत गांवों का देश है और डिजिटल इंडिया का विस्तार व प्रसार शहर तक ही सीमित नहीं किया जा सकता। नि:संदेह गांव तक इसकी पहुंच को बढ़ाने की पुरजोर कोशिश हो रही है और ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ई-गवर्नेंस से प्रखर हुई ई-ग्राम समाज अभियान की अवधारणा को भी बल मिलेगा मगर तकनीक यदि रोड़ा बनी रही तो ई-ग्राम स्वराज की अवधारणा जाहिर है कमजोर भी होगी। eGramSwaraj</p>
<p style="text-align:justify;">इससे गांव के डिजिटलीकरण का सपना अधूरा रहेगा और 1922 में जो सपना महात्मा गांधी ने गांव के लिए देखा था वह भी कसमसाहट में भी रह जाएगा। विदित हो कि आगामी अक्टूबर 2023 से गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पोर्टल से ही पंचायतों में खरीद को अनिवार्य किया जाना है। लाख टके का सवाल यह है कि जब इंटरनेट सेवाएं आधी पंचायतों तक भी नहीं पहुंची है तो इस पोर्टल से जुड़े सपने को जमीन कैसे मिलेगी। स्पष्ट कर दें कि जनवरी 2023 तक लगभग 81 हजार पंचायतों तक ही इंटरनेट सेवाएं पहुंच पायी हैं जबकि संसद की स्थायी समिति को मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग पौने तीन लाख पंचायतें हैं। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि हजारों पंचायतों में सेवा शुरू होने वाली है और छ: माह में इसे और गति देते हुए आगामी दो वर्श में शत-प्रतिशत पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ दिया जाएगा। Rural</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि स्टार्टअप से लेकर मोटे अनाज पर जोर समेत कई संदर्भ पिछले कुछ समय से फलक पर है। उत्पाद, उद्यम और बाजार ई-ग्राम स्वराज की अवधारणा में एक अनुकूल वातावरण ला सकते हैं। मगर इसके लिए इंटरनेट की सेवाएं समुचित रूप से बहाल करनी होंगी। दावे राजनीतिक दृश्टि से कुछ भी हों मगर सुशासन का दृश्टिकोण यह कहता है कि समावेशी ढांचा बिना सुनिश्चित किए ग्रामीण विकास को उचित रूप दिया ही नहीं जा सकता जिसके कारण लोक सशक्तिकरण एक चुनौती बना रहेगा। ई-गवर्नेंस की दृश्टि से देखें तो इसका भी टिकाऊ पक्ष इंटरनेट कनेक्टिविटी ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी साल के फरवरी में पेश बजट में भी किसानों को डिजिटल ट्रेनिंग देने की बात देखी जा सकती है मगर यह कैसे सम्भव होगा यह भी सोचनीय मुद्दा है। गांव में 8 करोड़ से अधिक महिलाएं जो व्यापक पैमाने पर स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उत्पाद करने का काम कर रही हैं और इन्हें देश-विदेश में बाजार मिले इसके लिए भी तकनीक तो चाहिए। इंटरनेट एण्ड मोबाइल एसोसिएशन के सर्वे पर आधारित एक रिपोर्ट जो थोड़ी पुरानी है उससे पता चलता है कि 2020 में गांव में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या 30 करोड़ तक पहुंच चुकी थी। देखा जाए तो औसतन हर तीसरे ग्रामीण के पास इंटरनेट सुविधा है। पौने तीन लाख पंचायतों में 80 हजार पंचायतों तक इंटरनेट की पहुंच इसी आंकड़े को तस्तीक करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरा भारत साढ़े छ: लाख गांवों से भरा है और इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों में 42 फीसद ग्रामीण महिलाएं हैं। गांव में महिलाओं की श्रम शक्ति में हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। कृषि क्षेत्र में अभी भी 60 प्रतिशत के साथ यह बढ़त लिए हुए है। इतना ही नहीं बचत दर सकल घरेलू उत्पाद का 33 प्रतिशत इन्हीं से सम्भव है और डेयरी उद्योग में तो महिलाएं ही छायी हैं जहां 94 फीसद का आंकड़ा देखा जा सकता है। इंटरनेट की बढ़त से चौतरफा सम्भावनाओं में बाढ़ आना स्वाभाविक तो है मगर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि यह सुलभ के साथ कहीं अधिक सस्ता भी हो।</p>
<p style="text-align:justify;">पंचायती राज मंत्रालय, पंचायतों को पारदर्शी और सशक्त बनाने के लिए कई अभियान और कार्यक्रम चला रहा है। पंचायतों को इस बात के लिए भी निर्देशित किया गया है कि ग्राम पंचायत स्तर पर किसी भी मद में पैसे का लेन-देन फिलहाल यूपीआई से ही किया जाए जिस हेतु 15 अगस्त 2023 का लक्ष्य रखा गया। स्पश्ट है कि डिजिटल लेन-देन व ई-गवर्नेंस को यहां तवज्जो देने की बात है मगर इसका भी पूरा ताना-बाना इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर है। इसके अलावा मंत्रालय की केन्द्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने राज्यों से यह भी कहा है कि राज्य विशेष की सभी पंचायतों में जीईएम पोर्टल के माध्यम से ही वस्तुओं और सेवाओं की खरीद-फरोख्त को केन्द्रीय वित्त आयोग द्वारा अनिवार्य किया जा रहा है। यहां भी ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने की बात है बशर्ते चुनौती में इंटरनेट सेवा ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यों में इंटरनेट सेवा की पड़ताल यह बताती है कि लगभग पूरे देश में हालत कमोबेश कमजोर और एक जैसी है मसलन उत्तर प्रदेश मे 58189 पंचायतों में महज 5014 पंचायतें इंटरनेट से जुड़ पायी हैं। यह आंकड़ा इस बात का उदाहरण है कि पंचायतें इंटरनेट सेवा के मामले में बहुत बेहतर नहीं बल्कि चिंतनीय अवस्था में है। उत्तराखण्ड में यही आंकड़ 7791 के मुकाबले 1010 पर है। इसी क्रम में राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश समेत सभी राज्यों की हालत कुछ ऐसी ही है। पंजाब इस मामले में कहीं अधिक बेहतर अवस्था लिए हुए है। यहां कि 13241 पंचायतों में 9483 पंचायतें इंटरनेट से सरोकार रखती है जबकि हरियाणा में 6220 पंचायतों के मुकाबले इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले पंचायतों की संख्या 3570 है। देखा जाए तो गुजरात में 14359 पंचायतों में 11167 का जुड़ाव इंटरनेट से है जो अपने आप में एक बेहतर आंकड़ा तो हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दावे अपनी जगह है नीयत और नीति में भी कोई संदेह नहीं है मगर ई-ग्राम स्वराज में पंचायतों की तकनीकी स्थिति को देखते हुए यह आंकलन आसान है कि अभी एड़ी-चोटी का जोर लगाना बाकी है। लेकिन एक हकीकत यह है कि जनवरी में किए गए तमाम दावो को छ: महीने बीत चुके हैं, हो सकता है कि पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ने का क्रम बीते छ: महीने में बड़ा रूप लिया हो मगर यह कहना अतार्किक सा प्रतीत होता है कि अक्टूबर से जीईएम पोर्टल से ही पंचायते अनिवार्य रूप से खरीद मामले से जुड़ जाएंगी। इसका सबसे बड़ा कारण फिर वही तकनीक की चुनौती ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">वोकल फॉर लोकल का नारा कोरोना काल में तेजी से बुलंद हुआ। मोटे अनाज को लेकर इन दिनों चर्चा खूब जोरों पर है। अच्छे बीज, अच्छी सीख और अच्छी खेती समेत मुनाफे से भरी बिकवाली की अगर कोई बड़ी चुनौती है तो वह तकनीक का समुचित न होना ही है। गांव श्रम का सस्ता रास्ता है लेकिन वित्तीय कठिनाईयों के चलते संसाधन की कमी से जूझते कौशलयुक्त ग्रामीण श्रम शहर का रास्ता पकड़ लेता है। जिसका सबसे बड़ा असर ग्राम स्वराज की उस अवधारणा पर पड़ता है जो राश्ट्रपति महात्मा गांधी का सपना था। ग्रामीण उद्यमी वित्तीय रूप से सशक्त होंगे व तकनीक से युक्त होंगे तो जाहिर है गांवों का देश भारत उन्नति का परिचायक हो जाएगा। फलस्वरूप सुशासन का सपना पाले सरकार को भी इसकी पूरी परिभाशा गढ़ने का अवसर मिलेगा। Good Governance</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. सुशील कुमार सिंह, वरिष्ठ स्तम्भकार एवं प्रशासनिक चिंतक (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Jul 2023 10:07:20 +0530</pubDate>
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                <title>हाथी ने ग्रामीण को कुचला, सीमा विवाद के चलते 18 घंटे मौके पर पड़ा रहा शव</title>
                                    <description><![CDATA[पत्थलगांव (एजेंसी)। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)के जशपुर जिले के तपकरा वन परिक्षेत्र के सागजोर के जंगल में हाथी द्वारा एक ग्रामीण को कुचलकर मार देने के घटना के बाद दो राज्यों की सीमा विवाद के चलते ग्रामीण का शव 18 घंटे तक मौके पर ही पडा रहा। हालांकि बाद में समझौते के बाद शव उठाया गया। जिले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/elephant-crushes-rural-due-border-dispute-lying-dead-18-hour-deadline-chhattisgarh/article-5966"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/chhatisgarh.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पत्थलगांव (एजेंसी)।</strong> छत्तीसगढ़ (<strong>Chhattisgarh</strong>)के जशपुर जिले के तपकरा वन परिक्षेत्र के सागजोर के जंगल में हाथी द्वारा एक ग्रामीण को कुचलकर मार देने के घटना के बाद दो राज्यों की सीमा विवाद के चलते ग्रामीण का शव 18 घंटे तक मौके पर ही पडा रहा। हालांकि बाद में समझौते के बाद शव उठाया गया। जिले के तपकरा वन परिक्षेत्र अन्तर्गत सागजोर जंगल में जंगली हाथी के कुचले जाने से मृत ग्रामीण का शव दो राज्य के वन अधिकारियों की सरकारी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाने के अभाव में 18 घंटे तक मौके पर ही पड़ा रहा।घटना स्थल के समीप पड़ोसी राज्य उड़ीसा की सीमा के विवाद के चलते दोनो राज्य के वन अधिकारियों के बीच पत्र व्यवहार का काम पूरा नहीं हो पाने से</p>
<h2>मृतक के परिजनों को शव का पंचनामा के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ा</h2>
<p>जशपुर वन मंडल अधिकारी पंकज राजपूत ने आज बताया कि तपकरा वन परिक्षेत्र अन्तर्गत ग्राम सागजोर जंगल में जंगली हाथी के हमले से उड़ीसा राज्य के सुन्दरगढ़ जिले का निवासी सन्तोष कुमार की मौत हो गई थी। इस मामले में उड़ीसा राज्य के वन अधिकारियों को सूचना दे दी गई थी, लेकिन मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की बात स्पष्ट नहीं हो पाने से इस कार्रवाई में विलंब हो गया। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस की जांच में जंगली हाथियों के दल ने छत्तीसगढ़ राज्य की सरहद के भीतर हमला करने की पुष्टि की गई है। इसके बाद मृतक के परिजनों के लिए जशपुर वन मंडल से क्षतिपूर्ति मुआवजा का प्रकरण बनाया जा रहा है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Sep 2018 19:32:53 +0530</pubDate>
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                <title>नोटबंदी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था ध्वस्त : नारायणमूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता (एजेंसी)। जानी-मानी आईटी कंपनी इंफोसिस के प्रमुख एन आर नारायणमूर्ति ने कहा कि नोटबंदी के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गयी है। इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायणमूर्ति ने यहां प्रेसीडेंसी यूनीवर्सिटी में कल एक कार्यक्रम में सरकार के द्वारा वर्ष 2016 में किये नोटबंदी के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा ”मैं नोटबंदी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/describing-rural-economy-collapse-narayana-murthy/article-3629"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/naryan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता (एजेंसी)। </strong>जानी-मानी आईटी कंपनी इंफोसिस के प्रमुख एन आर नारायणमूर्ति ने कहा कि नोटबंदी के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गयी है। इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायणमूर्ति ने यहां प्रेसीडेंसी यूनीवर्सिटी में कल एक कार्यक्रम में सरकार के द्वारा वर्ष 2016 में किये नोटबंदी के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा ”मैं नोटबंदी के पीछे के तर्क को समझ नहीं सका हूं।” उन्होंने कहा कि सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था उसके बावजूद नोटबंदी का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय तो ग्रामीण ‘भारतीयों को कुएं में धकेलने’ के समान है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा ”नोटबंदी में एक हजार और पांच सौ रुपये के नोटों को प्रचलन से बाहर किया गया लेकिन इसके बदले उससे बड़े नोटों के लाया गया। यह मेरे समझ से परे है।” नोटबंदी करने के कारणों के बारे में तो सिर्फ विशेषज्ञ ही बता सकते हैं। एक सवाल के जवाब में नारायणमूर्ति ने कहा कि 1950 से अब तक भारत में कम तकनीक वाले मैनुफैक्चरिंग को बढ़ावा नहीं दिया गया है जैसा कि चीन और जापान ने किया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के साथ संतुलन बनाने के लिए गुणवत्तापरक शिक्षा तथा कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Mar 2018 06:13:12 +0530</pubDate>
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                <title>गिरफ्तार करने की मांग, टंकी पर चढ़े ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[ घर में घुसकर मारपीट व गाली-गलौच करने का आरोप हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। घर में घुसकर मारपीट व गाली-गलौच करने के आरोप में टाउन थाने में दर्ज प्रकरण में आरोपित सरपंच सहित अन्य की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार को गांव मोहनमगरिया में चार ग्रामीण टंकी पर चढ़ गए। चारों ग्रामीणों ने आरोपितों की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/demand-of-rural-for-arrest-to-accused/article-3076"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/rural1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;"> घर में घुसकर मारपीट व गाली-गलौच करने का आरोप</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> घर में घुसकर मारपीट व गाली-गलौच करने के आरोप में टाउन थाने में दर्ज प्रकरण में आरोपित सरपंच सहित अन्य की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार को गांव मोहनमगरिया में चार ग्रामीण टंकी पर चढ़ गए। चारों ग्रामीणों ने आरोपितों की गिरफ्तारी न होने तक टंकी से नीचे नहीं उतरने की चेतावनी दी। सूचना मिलने पर टाउन थाना प्रभारी मोहम्मद अनवर सहित अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा टंकी पर चढ़े ग्रामीणों से समझाइश की।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे गांव रणजीतपुरा निवासी श्रीराम बरोड़ पुत्र मनीराम मेघवाल, आत्माराम पुत्र गिरधारीलाल नायक, बलवीर सिंह पुत्र सुबाराम जटसिख व दयाराम पुत्र जेठाराम मेघवाल गांव मोहनमगरिया स्थित जलदाय विभाग की टंकी पर चढ़ गए। टंकी पर चढ़े श्रीराम बरोड़ ने बताया कि 20 जून को गांव रणजीतपुरा सरपंच इन्द्रजीत पुत्र भागीरथ, योगेश पुत्र ओमप्रकाश निवासी मोहनमगरिया व सात-आठ अन्य उसके घर आए तथा उसकी माता व भाई से गाली-गलौच करते हुए मारपीट की। उसकी माता को उठाकर ले जाने लगे तो आसपास के लोगों ने छुड़ाया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मौके पर पहुंची पुलिस</h2>
<p style="text-align:justify;">बरोड़ ने बताया कि इस संबंध में टाउन थाने में दर्ज मामले की जांच एससीएसटी सेल के सीओ कर रहे हैं। मामला दर्ज हुए करीब डेढ़ माह हो चुके हैं लेकिन अभी तक सरपंच व अन्य को गिरफ्तार नहीं किया गया। उन्होंने आरोपितों को गिरफ्तार न करने पर टंकी से कूदकर आत्महत्या करने की धमकी दी। दोपहर को मौके पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निर्मला बिश्नोई गांव मोहनमगरिया पहुंची। उन्होंने टंकी पर चढ़े ग्रामीणों से वार्ता कर आरोपितों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2017 06:45:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[पेयजल को लेकर ग्रामीणों में पनपा आक्रोश बींझबायला (सच कहूँ न्यूज)। पिछले कुछ दिनों से स्थानीय वाटर वर्क्स द्वारा गन्दे पानी की सप्लाई दी जा रही है। कभी-कभी तो पानी का रंग मटमेला सप्लाई होता है। जलदाय विभाग इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा। समस्या को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। नायब तहसीलदार को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rural-compelled-to-drinking-the-contaminated-water/article-2838"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/rural.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">पेयजल को लेकर ग्रामीणों में पनपा आक्रोश</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बींझबायला (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पिछले कुछ दिनों से स्थानीय वाटर वर्क्स द्वारा गन्दे पानी की सप्लाई दी जा रही है। कभी-कभी तो पानी का रंग मटमेला सप्लाई होता है। जलदाय विभाग इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा। समस्या को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। नायब तहसीलदार को जिला कलेक्टर के नाम मांग पत्र सौंपकर कहा कि दूषित पानी पीने से बीमारियां लगने का डर है जोकि बिना फिल्टर के पानी की सीधे सप्लाई दी जा रही है।</p>
<ul>
<li><strong>नायब तहसीलदार को जिला कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन</strong></li>
<li><strong>वाटर-वर्क्स की डिग्गी में गन्दगी का अंबार</strong></li>
<li><strong>विभाग को अवगत करवाने पर भी समस्या जस की तस</strong></li>
</ul>
<p>ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर है। बींझबायला में दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है। कॉलोनी की वाटर वर्क्स टैंकी की सफाई हुए 2-3 वर्ष हो गए जिसके कारण पानी दूषित हो रहा है। ग्रामीणों ने वाटर वर्क्स का निरीक्षण किया। पानी की डिग्गीयां सप्लाई फिल्टर के बारे में जानकारी ली तो गांव में पेयजल सप्लाई देने वाले फील्डर बन्द पड़े थे। बिना फिल्टर सीधा पानी सप्लाई किया जा रहा है, जिससे घातक बीमारियां फैलने का खतरा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बीस हजार की आबादी पी रही गन्दा पानी</h3>
<p style="text-align:justify;">बीस हजार की आबादी इस गंदे पानी को पी रही है। कस्बा कर्मचारियों की अनदेखी का शिकार होता नजर आ रहा है। जलदाय विभाग को अवगत करवाने पर भी यह समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन को अंतिम चेतवानी दी है कि पानी की डिग्गी गन्दगी का अंबार है। वहीं विभाग के कर्मचारियों का कहना है हमारे पास लाल दवा व फिटकडी की कमी है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">विभाग से मिला आश्वासन</h2>
<p style="text-align:justify;">सरपंच देवी लाल भाम्भू ने विभाग उच्च अधिकारियों अवगत करवाया और इस दूषित पानी समस्या का जल्द ही समाधान करवाने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने आज ज्ञापन सौंपा व चेतावनी दी कि अगर इस समस्या की और शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो मजबूरन ग्रामीणों को धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस मौके पर सरपंच देवीलाल भाम्भू, बनवारीलाल गोदारा, राकेश अरोड़ा, पवन गोस्वामी, भादरराम, सुशील, श्रवण कुमार, भागीरथ, बीरबलराम, सुरजाराम सहित ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपा।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2017 06:09:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिग्गियों में नहीं रहा पेयजल, ग्रामीण परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[सूखी डिग्गियों से कैसे मिलेगा गांवों को पेयजल अनूपगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। तहसील क्षेत्र के गांव पतरोड़ा के ग्रामीणों को इन दिनों में पेयजल के लिए भयंकर मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। जैसे-जैसे गर्मी का मौसम आगे बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे ही पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। ग्राम पंचायत मुख्यालय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rural-distress-for-drinking-water/article-1022"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/anupgarh-04.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सूखी डिग्गियों से कैसे मिलेगा गांवों को पेयजल</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>अनूपगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> तहसील क्षेत्र के गांव पतरोड़ा के ग्रामीणों को इन दिनों में पेयजल के लिए भयंकर मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। जैसे-जैसे गर्मी का मौसम आगे बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे ही पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। ग्राम पंचायत मुख्यालय पतरोड़ा क्षेत्र में मुख्यालय के अलावा आस-पास अनेक चक तथा ढाणियां भी हैं जिनकी आबादी को ग्राम पंचायत के ही वाटर-वर्क्स से पेयजल की आपूर्ति दी जाती है, परंतु जलदाय विभाग एवं प्रशासन की उदासीनता ने ग्रामीणों को दी जाने वाली पेयजल सुविधा पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि डिग्गियों में पानी समाप्त होने से पूर्व कुछ समय तक पानी ग्रामीणों को दिया गया, लेकिन यह पानी स्वच्छ एवं शुद्ध नहीं था। वर्तमान हालात ग्रामीणों के लिए चिंताजनक बने हुए हैं, खासकर महिलाओं के लिए, क्योंकि महिलाआें को घर से दूर मटकों में पानी लेने जाना पड़ता है, जोकि परेशानी का विषय है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">डिग्गियों में नहीं है पानी</h2>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्र के इस बड़े एवं महत्वपूर्ण गांव में पिछले तीन दिनों से पेयजल सप्लाई पानी के अभाव में नहीं हो पा रही है, जिससे ग्रामीणों को दिक्कत हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण जब पेयजल सप्लाई नहीं होने का कारण जानने के लिए वाटर वर्क्स गए तो वहां जाकर पता चला कि वाटर-वर्क्स की डिग्गियां काफी हद तक खाली हो चुकी है, जो भी पानी बचा हुआ है, उसमें कचरा एवं गंदगी है, जो सप्लाई योग्य नहीं है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">डिग्गियों में नहीं हो पाता पूर्ण रूप से भंडारण</h3>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायत के वाटर वर्क्स में नहरबंदी के दौरान जल एकत्रित करने के लिए 3 डिग्गियां बनी हुई हैं जो नहर चलने पर जल भंडारण के लिए इस्तेमाल होती है। लेकिन इन डिग्गियों में पूर्ण रूप से पानी का भंडारण नहीं हो पाता है। क्योंकि डिग्गियों को भरने के लिए नहर से वाटर-वर्क्स तक बनी नाली काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे पानी सही मात्रा में डिग्गियों तक नहीं पहुंच पाता है। जिसके कारण डिग्गियां पूरी तरह से भर नहीं पाती और जिसका नुक्सान ग्रामीणों को उठाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार डिग्गियों की मुरम्मत हुए कई वर्ष हो चुके हैं। क्षतिग्रस्त हो चुकी डिग्गियों की मुरम्मत की बड़े पैमाने पर आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2017 08:40:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कार्रवाई न होने पर भड़के ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[सुरक्षा गार्ड का तबादला करने की मांग पंचायत ने शाखा प्रबंधक को सौंपा मांग-पत्र Abohar, Sudhir/Naresh:  गत दिवस गांव झुमियांवाली स्थित ओबीसी बैंक के एक सुरक्षागार्ड द्वारा बैंक उपभोक्ता के साथ दुर्व्यवहार करने के बाद बैंक प्रबंधक द्वारा उक्त सुरक्षा कर्मी के खिलाफ कार्रवाही न किए जाने के विरोध में शनिवार को गांव झुमियांवाली व […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/the-action-is-not-taken-rural-fierce/article-469"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/hand-raised1.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>सुरक्षा गार्ड का तबादला करने की मांग</strong></li>
<li><strong>पंचायत ने शाखा प्रबंधक को सौंपा मांग-पत्र</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Abohar, Sudhir/Naresh: </strong> गत दिवस गांव झुमियांवाली स्थित ओबीसी बैंक के एक सुरक्षागार्ड द्वारा बैंक उपभोक्ता के साथ दुर्व्यवहार करने के बाद बैंक प्रबंधक द्वारा उक्त सुरक्षा कर्मी के खिलाफ कार्रवाही न किए जाने के विरोध में शनिवार को गांव झुमियांवाली व बजीतपुर कटियांवाली की पंचायत ने शाखा पं्रबधक को मांग-पत्र भेजते हुए उक्त सुरक्षागार्ड का तबादला करने की मांग की है।<br />
जानकारी के अनुसार बैंक प्रबंधक को सौंपे गए मांग-पत्र में गांव झुमियांवाली के सरपंच अर्जुन राम, पंचायत मैंबर दयाल कस्वां, दिनेश सिहाग, हरीराम शर्मा, कांग्रेस देहात मंडल के सचिव पवन शर्मा, इंद्रसैन, नरेश कुमार, कालूराम ने बताया कि दिवस दिनों उक्त बैंक में तैनात सुरक्षागार्ड ने गांव के ही एक बैंक उपभोक्ता से दुर्व्यवहार करने के साथ साथ उसको जान से मारने तक की धमकी दी थी जिसके विरोधस्वरूप पंचायत सदस्यों व ग्रामीणों ने बैंक को बंद कर धरना लगाया तो मौके पर पहुंची पुलिस की मौजूदगी में बैंक प्रबंधक ने उक्त सुरक्षागार्ड की यहां से बदली किए जाने की मांग की थी। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना उठा दिया था। इसके बाद भी उक्त सुरक्षागार्ड की यहां से बदली नहीं की गई तो गत दिवस उन्होंने बैंक के प्रबंधक को उक्त सुरक्षागार्ड की यहां से बदली किए जाने की मांग की लेकिन बैंक प्रबंधक द्वारा अभी तक कोई कार्रवाही नहीं की जा रही। रोषित उपभोक्ताआें ने कहा कि यदि शीघ्र उक्त सुरक्षागार्ड का यहां से तबादला न किया गया तो वे आगामी दिनों में फिर से संघर्ष करने को मजबूर होंगे जिसकी जिम्मेवारी पुलिस प्रशासन व बैंक प्रबंधकों की होगी। इधर इस बारे में थाना सदर के प्रभारी तेजिंदर पाल सिंह से बात करने पर उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में शाखा प्रबंधक से बात करके शीघ्र समस्या का समाधान निकालेंगें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Dec 2016 01:48:44 +0530</pubDate>
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