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                <title>Mango - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Mango RSS Feed</description>
                
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                <title>Aam Mahotsav: लखनऊ में सजेगा उत्तर प्रदेश आम महोत्सव, सीएम योगी करेंगे शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA['उत्तर प्रदेश आम महोत्सव- 2026' का आयोजन 3 से 5 जुलाई तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/uttar-pradesh-mango-festival-will-be-decorated-in-lucknow-cm/article-87512"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/mango.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> 'उत्तर प्रदेश आम महोत्सव- 2026' का आयोजन 3 से 5 जुलाई तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को तीन दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। महोत्सव में सात श्रेणियों और 56 वर्गों में लगभग 800 से अधिक आम की प्रजातियों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह जानकारी उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने पत्रकार वार्ता में दी। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि 4 जुलाई को 'जन भवन', लखनऊ में आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने बताया कि महोत्सव में मेजबान उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के उ‌द्यान विभाग के प्रतिनिधि, प्रगतिशील बागवान एवं निर्यातक हिस्सा लेंगे। महोत्सव में प्रदर्शन के लिए रखे गए आम के पौधे बिक्री के लिए भी उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने अपील की कि महोत्सव में आए नागरिक अपने साथ कम से कम एक पौधा ले जाकर अवश्य रोपित करें।</p>
<p style="text-align:justify;">उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता और आम से बने व्यंजनों की प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण होगी। साथ ही बागवानों के लिए उन्नत तकनीक, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन, कीटव्याधि नियंत्रण और विपणन पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित होंगी। बागवानों को सीधा बाजार देने के लिए पहली बार 4 जुलाई को 'जन भवन', लखनऊ में आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश आम उत्पादन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश के 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 61.96 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है, जो पूरे देश के कुल आम उत्पादन का लगभग 26.22 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश के दशहरी, लंगड़ा, चौसा, गौरजीत, लखनऊ सफेदा, रटौल और आम्रपाली जैसी प्रजातियां दुनियाभर में विख्यात हैं। इनका लखनऊ, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज मंडलों में बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एपीडा के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश से आम के निर्यात में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। वर्ष 2024-25 में जहां 2.63 करोड़ रुपए मूल्य का 404 मीट्रिक टन आम व पल्प निर्यात हुआ था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 12.67 करोड़ रुपए मूल्य का 3,563 मीट्रिक टन हो गया है। उत्तर प्रदेश का आम यूनाइटेड किंगडम (लंदन), यूएई, सऊदी अरब, मलेशिया, सिंगापुर, कुवैत, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, कतर और रूस जैसे विकासशील व विकसित देशों को निर्यात किया जा रहा है। इस वर्ष भी महोत्सव के अवसर पर प्रदेश से अन्य देशों को आम का निर्यात किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ, सहारनपुर, वाराणसी और अमरोहा में आधुनिक मैंगो पैक हाउस स्थापित किए गए हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत आम की प्रीप्रोसेसिंग और उपचार किया जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट के पास फलों की टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट सेंटर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में औद्यानिक निर्यात को और अधिक रफ्तार मिलेगी। आम को कीटों/रोगों से बचाने, उनका आकार, स्वाद और चमक सुधारने के लिए इस वर्ष विभाग द्वारा किसानों को लगभग 1.50 करोड़ फल बैग वितरित किए गए हैं। अनुत्पादक और पुराने पड़ चुके बागों के कैनोपी प्रबंधन हेतु प्रति हेक्टेयर इकाई लागत पर 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-07/mango.jpg" alt="Mango" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:28:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Aam Mela: दुनिया का सबसे महंगा आम, कैंसर जैसी बीमारी को करता है ठीक, पहुंचा हरियाणा</title>
                                    <description><![CDATA[कुरुक्षेत्र पहुंचा दुनिया का सबसे महंगा आम, दुबई में बिकता है 3 लाख रुपए किलो कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। Mango Fair: कुरुक्षेत्र के लाड़वा क्षेत्र में आयोजित आम मेले में इस बार एक विशेष किस्म का आम सबका ध्यान खींच रहा है- जापान का प्रसिद्ध मियाजाकी आम। यह आम दुबई जैसे देशों में 2.5 लाख […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mango-fair-organised-in-ladwa-area-of-kurukshetra/article-73084"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/kurukshetra-news.jpg" alt=""></a><br /><h3>कुरुक्षेत्र पहुंचा दुनिया का सबसे महंगा आम, दुबई में बिकता है 3 लाख रुपए किलो</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)।</strong> Mango Fair: कुरुक्षेत्र के लाड़वा क्षेत्र में आयोजित आम मेले में इस बार एक विशेष किस्म का आम सबका ध्यान खींच रहा है- जापान का प्रसिद्ध मियाजाकी आम। यह आम दुबई जैसे देशों में 2.5 लाख से लेकर 3 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक की कीमत पर बिकता है, जो इसे दुनिया का सबसे महंगा आम बनाता है। भारत में इसकी कीमत भी 50 हजार से 70 हजार रुपए प्रति किलो तक जाती है। Kurukshetra News</p>
<p style="text-align:justify;">इसे ‘एग आॅफ द सन’ के नाम से जाना जाता है और यह अपने गहरे लाल रंग व स्वास्थ्यवर्धक गुणों के लिए जाना जाता है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार यह आम सिर्फ स्वाद का खजाना नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक औषधि भी है, जो कैंसर रोगियों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लाड़वा के सब-ट्रॉपिकल सेंटर में शोध कार्य शुरू | Kurukshetra News</h3>
<p style="text-align:justify;">मियाजाकी आम का एक पौधा लाड़वा स्थित इंडो-इजराइल सब-ट्रॉपिकल सेंटर में लगाया गया है। इस सेंटर ने इसे भविष्य का फल मानते हुए गहन शोध कार्य शुरू कर दिया है। इस वर्ष इस पौधे पर फल आना भी शुरू हो गया है। सेंटर के विशेषज्ञों के अनुसार इस किस्म को तैयार करने में लगभग पाँच वर्ष लगते हैं। इसकी देखरेख विशेष विधियों से की जाती है और टपका विधि से इसकी सिंचाई की जाती है। सेंटर के अधिकारी बताते हैं कि फरवरी माह में पेड़ पर बौर आने लगता है और जून-जुलाई में फल लगना शुरू हो जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मुजफ्फरनगर से लाए किसान ने दी जानकारी</h3>
<p style="text-align:justify;">आम मेले में इस दुर्लभ किस्म के आम को लेकर पहुंचे मुजफ्फरनगर के किसान मोहम्मद साजिद के अनुसार मियाजाकी आम जापान के मियाजाकी प्रांत की उपज है। भारत में यह किस्म अब धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है। उन्होंने बताया कि इसका पौधा करीब चार फुट ऊँचा होता है, लेकिन इसे फल देने योग्य बनने में पाँच साल लगते हैं। एक आम का वजन 300 से 350 ग्राम तक होता है और इसकी रंगत गहरे लाल होती है, जो इसे और भी आकर्षक बनाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्वास्थ्य के लिए भी है वरदान</h3>
<p style="text-align:justify;">जिला उद्यान अधिकारी डॉ. शिवेंद्र प्रताप ने बताया कि मियाजाकी आम न केवल स्वाद में बेजोड़ है, बल्कि यह स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भी भरपूर है। इसमें एंटीआॅक्सीडेंट, बीटा-कैरोटीन और फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इन गुणों के कारण यह आम कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में सक्षम है। साथ ही, यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। Kurukshetra News</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. शिवेंद्र ने बताया कि इस आम का स्वाद उत्तर भारत के प्रसिद्ध रटौल आम से मिलता-जुलता है। अब इसकी बागवानी उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में भी हो रही है और भारत से विदेशों में इसका निर्यात भी शुरू हो गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="महिलाओं की सुरक्षा, आत्मसम्मान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता: कल्पना सक्सेना" href="http://10.0.0.122:1245/polices-special-seminar-on-women-empowerment-and-security/">महिलाओं की सुरक्षा, आत्मसम्मान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता: कल्पना सक्सेना</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Jul 2025 16:09:47 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Mango India: आपने कभी नहीं देखे होंगे ऐसे सवा-सवा किलो के हापुस आम</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (सच कहूँ न्यूज़)। Mango India: आमों का राजा कहे जाने वाला अल्फांसो ‘हापुस आम’ अपनी मधुर सुगंध, रसीले स्वाद और मलाईदार गूदा के लिए प्रसिद्ध है। विशेष रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी, देवगड़, सिंधुदुर्ग और रायगढ़ जिलों में उगाया जाने वाला यह आम दुनिया भर में अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए जाना जाता […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/alphonso-mango/article-72186"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/mango-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="ai-optimize-7 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (सच कहूँ न्यूज़)। </strong>Mango India: आमों का राजा कहे जाने वाला अल्फांसो ‘हापुस आम’ अपनी मधुर सुगंध, रसीले स्वाद और मलाईदार गूदा के लिए प्रसिद्ध है। विशेष रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी, देवगड़, सिंधुदुर्ग और रायगढ़ जिलों में उगाया जाने वाला यह आम दुनिया भर में अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए जाना जाता है।</p>
<p class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;">आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी कि डेरा सच्चा सौदा के मुंबई के नजदीक स्थित MSG मानवता भलाई केंद्र शाह सतनाम जी परमसुख आश्रम पनवेल (मुंबई )में हर साल हापुस आम ऑर्गेनिक (जैविक) खेती के माध्यम से तैयार किए जाते हैं। पूज्य गुरु संत डॉ एम एस जी की शिक्षाओं के फलस्वरूप मुम्बई व पुणे की साध-संगत द्वारा इनका खास ख्याल रखते हुए सवा-सवा किलो प्रति आम की विशेष पैदावार देखने को मिलती है जो कि अपने आप में अचंभित करने योग्य है। Mango India</p>
<p class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">इस संदर्भ में उक्त डेरा सच्चा सौदा इकाई में मौजूद जी एस एम सेवादार बंता इन्सां जी ने बताया की पूज्य गुरुजी के मार्गदर्शन में यहाँ हर वर्ष ऐसे ही अद्भुत एवम स्वाथ्यवर्धक आम लगते हैं जिनकी विशेष तौर पर गुणवत्ता अपने आप में मंत्रमुग्ध करने वाली होती है। Mango India</p>
<p class="ai-optimize-10"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Corona Virus News: देश में कोरोना के सक्रिय मामलों में गिरावट, 10 और मरीजों की मौत" href="http://10.0.0.122:1245/decline-in-active-corona-cases-in-the-country-ten-more-patients-died/">Corona Virus News: देश में कोरोना के सक्रिय मामलों में गिरावट, 10 और मरीजों की मौत</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Jun 2025 17:01:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sugar Free Mango: आम ये शुगर फ्री, खाकर होगी तबीयत भी हरी, किसान भी हो रहे हैं मालामाल</title>
                                    <description><![CDATA[किसान भी हो रहे हैं मालामाल, इस आम का ऐसा है कमाल Mango farming &amp; Marketing: आप सभी ये जानकारी हैरान हो सकते हैं कि आम (Mango) भी शुगर फ्री हो सकते हैं जिसे खाकर आपको कोई परेशानी कोई टेंशन लेने की जरूरत नहीं पड़ती। क्योंकि कई लोगों को होता है कि आम तो खाने का […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/mangoes-are-sugar-free-health-will-also-be-green-after-eating-them-farmers-are-also-getting-rich/article-50909"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/mango-farming.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">किसान भी हो रहे हैं मालामाल, इस आम का ऐसा है कमाल</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">Mango farming &amp; Marketing: आप सभी ये जानकारी हैरान हो सकते हैं कि आम (Mango) भी शुगर फ्री हो सकते हैं जिसे खाकर आपको कोई परेशानी कोई टेंशन लेने की जरूरत नहीं पड़ती। क्योंकि कई लोगों को होता है कि आम तो खाने का काफी मन होता है लेकिन शुगर की तकलीफ होने के कारण वो आम का स्वाद चखने से महरूम रह जाते हैं। वो शुगर की बीमारी के चलते चाहकर भी आम का स्वाद चख नहीं पाते हैं। ऐसे में हम आपके लिए लेकर आए है शुगर फ्री आम।Sugar Free Mango</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/sahakari-gramin-awas-yojana/">किसानों को सरकार देने जा रही 50 लाख रुपये, जानें क्या है योजना</a></p>
<p style="text-align:justify;">जिससे किसान मालामाल हो रहे हैं। आपकी सेहत के लिए वरदान इस आम की बाजार में है काफी डिमांड है। आइये जानते हैं कि कैसे इस मालामाल करने वाले आम की खेती की जा सकती है। आपको पहले ही बताया है कि आज के दौर में ज्यादातर लोग शुगर की बीमारी से पीड़ित हंै जिसके चलते उन्हें काफी चीजों से परहेज करना पड़ता है। लेकिन अब उनको घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस आम की वैराइटी इतनी खास होती है कि इसमें आपको शुगर की बहुत ही कम मात्रा मिलती है, जिसकी वजह से शुगर के मरीज भी इसे आसानी से खा सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बाजार में है बहुत मांग | Sugar Free Mango</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि आम के आशिक शुगर की बीमारी के चलते लोग इस आम की काफी डिमांड करते हैं, यही खास वजह है कि इस आम की डिमांड विदेशों तक की जाती है। शुगर फ्री होने के कारण इस आम को लोग बड़े चाव से खाते है क्योंकि इसमें शुगर लेवल बढ़ने का बिलकुल भी खतरा नहीं रहता है। बीमारी से लड़ने का गुण होने के कारण इस आम को लोग मुँह मांगे दामों पर खरीद लेते हैं। ये तो हो गई आम खाने की बात। अब बात करते हैं खेती की। बता दें कि ऐसे लाजवाब और खास आम की खेती भी हर किसान करना चाहेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बड़ा ही आसान है खेती करने का तरीका | Sugar Free Mango</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर आप भी एक किसान हैं और फ लों की खेती करते हैं तो बता दें कि इस शुगर फ्री आम की खेती कीजिए, जिससे आप भी मालामाल हो जाएंगे। तो आइये जानते हैं कि ऐसे लाजवाब और मालामाल करने वाले आम की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु का निर्धारण करना चाहिए। आम एक उष्ण जलवायु का फल है। कहा जाता है कि आम की फसल में जितनी जलवायु गर्म होती है, आम उतना ही मीठा और स्वादिष्ट होता है। हालांकि 24 से 27 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त है। Sugar Free Mango</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं बारिश की बात करें तो 125 से 250 सेंटीमीटर बारिश इस फसल के लिए पर्याप्त है। अगर वर्षा कम होती है तो सिंचाई द्वारा इसकी कमी को पूरी किया जा सकता है। इसके लिए मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 7.5 तक होना जरूरी है। हाल ही में राम किशोर सिंह, मुजफ्फरपुर बिहार स्थित अपनी नर्सरी में इसकी बड़ी मात्रा में पौधों की तैयारी करते हैं। यदि कोई किसान इस शुगर फ्री आम की खेती करना चाहते हैं तो नर्सरी से पौधा ले जा सकते हैं। और अपने खेत में इसे लगा कर इससे अच्छी कमाई कर सकता है। इसके एक पौधे की कीमत 4000 रुपए है। इसके लिए आपको ज्यादा मात्रा में पानी की आवश्यकता भी नहीं होती है। Mango Farming</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि आजकल ज्यादातर किसान लगातार उपभोक्ताओं की जरूरत और बाजार की डिमांड अनुसार ही खेती कर रहे हैं। ऐसे किसान बागवानी, नकदी और उद्यानिकी फसलों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। चूंकि देश में बड़ी संख्या में शुगर के मरीज हैं और अपनी बीमारी के कारण आम जैसे स्वादिष्ट और रसीले फलों का स्वाद नहीं चख पाते। आज बाजार में शुगर फ्री चीनी, शुगर फ्री आटा आदि बहुत से उत्पाद आ गए हैं लेकिन डायबिटीज के मरीजों के लिए अब शुगर फ्री आम की किस्में भी विकसित हो गई हैं। Sugar Free Mango</p>
<p style="text-align:justify;">बिहार का एक किसान शुगर फ्री आम का उत्पादन कर काफी अच्छा मुनाफा कमा रहा है। इस आम की खास बात यह है कि यह बेहद स्वादिष्ट होने के साथ-साथ शुगर के मरीजों के लिए बिल्कुल भी नुकसानदायक नहीं है। बिहार में शुगर फ्री आम का उत्पादन करने वाले इस किसान का नाम राम किशोर सिंह है, जो मुजफ्फरपुर के मुशहरी प्रखंड के बिंदा गांव का रहने वाला है। पिछले कई सालों से आम के ऊपर वे रिसर्च कर रहे हैं। उनकी लंबे समय की मेहनत के बाद शुगर फ्री आम की इस किस्म को विकसित किया जा सका है। लैब टेस्टिंग के बाद इस आम को शुगर फ्री आम माना गया है। राम किशोर सिंह जी के इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए उन्हें सरकार से कई पुरस्कार भी मिले हैं। Sugar Free Mango</p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/mangoes-are-sugar-free-health-will-also-be-green-after-eating-them-farmers-are-also-getting-rich/article-50909</link>
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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2023 16:00:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Nur Jahan Mango: OMG! इतना बड़ा आम, देखकर हर कोई हैरान!!</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Nur Jahan Mango Weight: भारत में सबसे बड़े आम (Mango) को देखकर लोग अपने दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए। इतने बड़े आम को देखकर लोगों के मुंह से बरबस ही निकल पड़ता, OMG! इतना बड़ा आम! हैरानगी की वजह ये भी थी कि इसकी कीमत और खूबियाँ सबसे अलग, सबसे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/nur-jahan-mango-weight/article-49001"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/nur-jahan-mango-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Nur Jahan Mango Weight: भारत में सबसे बड़े आम (Mango) को देखकर लोग अपने दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए। इतने बड़े आम को देखकर लोगों के मुंह से बरबस ही निकल पड़ता, OMG! इतना बड़ा आम! हैरानगी की वजह ये भी थी कि इसकी कीमत और खूबियाँ सबसे अलग, सबसे हटकर थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि अभी हाल ही में एमपी में एक मैंगो फेस्टिवल का आयोजन हुआ, जिसमें ये आम अपनी खासियत के कारण लोगों में चर्चा का विषय बना रहा। इस आम के स्वाद के बारे में तो बस पूछो ही मत। ये खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता है जिससे लोग इसे खाना हद से ज्यादा पसंद करते हैं। इस आम में बहुत सी ऐसी खासियतें हैं जो इसे दूसरों से अलग बनाती हंै। Nur Jahan Mango Weight</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि भोपाल में इन दिनों आम महोत्सव मनाया जा रहा है, जहाँ विभिन्न प्रकार के आमों की प्रदर्शनी लगी हुई है और दूर-दूर से लोग इस प्रदर्शनी का हिस्सा बन रहे हैं। यहाँ भारत का सबसे बड़ा आम भी अपनी एक अलग छवि बना रहा है। यह नूरजहां नामक आम अपने स्वाद और कीमत के कारण दुनिया भर में मशहूर है। इस आम की क्वालिटी ऐसी है जिसके कारण इन आमों का भार भी सबसे ज्यादा होता है। Nur Jahan Mango</p>
<p style="text-align:justify;">Nur Jahan Mango: इस फेस्टिवल में लोग विभिन्न तरह के आमों की किस्में अपने साथ लेकर आये हैं लेकिन नूरजहां आम खास किस्म का लगा। यह आम मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश का अनोखा आम है। इसका एक आम 2 से 4 किलो के बराबर होता है, जो अन्य आमों की तुलना में काफी ज्यादा भारी है। इसके एक आम की कीमत 1200 से 1300 रुपए तक होती है, जिसे खरीद पाना आम आदमी के बस की बात नहीं है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नूरजहां का इतिहास | Nur Jahan Mango</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि इस आम का इतिहास काफी पुराना है। इस आम के उत्पादक रुमाल बघेल हैं। नूरजहां आम की पैदावार सबसे पहले अफगानिस्तान में हुई थी। सन 1577 से 1645 में इसे भारत लाया गया तो मल्लिका नूरजहां के नाम पर इस आम का नाम पड़ा था। क्योंकि उन्हें यह आम बहुत पसंद था। हाल ही में पूरे देश में केवल 3 ही नूरजहां आम के पेड़ हैं। जिसके कारण इनकी कीमत काफी ज्यादा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2023 11:57:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आम फलों का राजा है, गलत ढंग से खाने पर नुकसान भी ज्यादा है</title>
                                    <description><![CDATA[आम आजकल ‘आम’ है, लेकिन समर सीजन में आने वाला यह फल (Mango) बहुत ही खास भी है और इसे खाना भी बहुत ही रोचक है। इसे खाते समय गुठली फिसल-फिसलकर इधर-उधर भाग जाती है, कहीं फिसलकर कपड़ों पर गिर गई तो कहीं फर्श पर जा गिरती है लेकिन इसे खाने में मजा भी बहुत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/right-time-and-right-way-to-eat-mango/article-47389"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/mango.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आम आजकल ‘आम’ है, लेकिन समर सीजन में आने वाला यह फल (Mango) बहुत ही खास भी है और इसे खाना भी बहुत ही रोचक है। इसे खाते समय गुठली फिसल-फिसलकर इधर-उधर भाग जाती है, कहीं फिसलकर कपड़ों पर गिर गई तो कहीं फर्श पर जा गिरती है लेकिन इसे खाने में मजा भी बहुत आता है। वहीं दूसरी ओर अगर आम को खाने में कोई लापरवाही बरती जाए या इसे खाने का सही ढंग न अपनाया जाए तो यही आम खाना भारी भी पड़ सकता है। आपको लेने के देने पड़ सकते हैं। आइये जानते हैं इसे खाने का सही तरीका क्या है और क्या-क्या सावधानियां बरतनी जरूरी हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="वजन कम करने की कहानी, जानें जीरे की जुबानी | Jeera Ka Pani" href="http://10.0.0.122:1245/cumin-water-is-very-effective-in-reducing-weight/">वजन कम करने की कहानी, जानें जीरे की जुबानी | Jeera Ka Pani</a></p>
<p style="text-align:justify;">आपको याद होगा कि बड़े-बुजुर्गों द्वारा पहले आपको समझाया जाता था कि (Mango) खाने से पहले आपको क्या करना है और खाने के बाद क्या-क्या सावधानियां बरतनी हैं। फलों का राजा आम बहुत ही गुणकारी और स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसमें पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर होती है। पर मायने यह रखता है कि आप इसे खाते कैसे हैं। फलों को गलत ढंग या गलत समय पर खाने से आपके स्वास्थ्य पर भी गलत प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए आपके लिए सबसे पहले ये जानना बहुत ही जरूरी है कि कोई भी वस्तु खाने से पहले या खाने के बाद किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। क्योंकि आम खाने के बाद कुछ लोगों के पेट में गड़बड़ी होने लगती हैं और इसका कारण होता है आम खाने का गलत ढंग।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आम खाने की सही जानकारी होना बहुत अनिवार्य | Mango</h3>
<p style="text-align:justify;">आयुर्वेद भी कहता है कि कोई भी फल सही समय और सही ढंग से खाया जाए तो ही उसके पोषक तत्वों का भरपूर लाभ मिल सकता है अन्यथा अंजाम गलत भी भुगतने पड़ सकते हैं। कई बार क्या होता है कि आम खाने से पेट और त्वचा से संबंधित कुछ समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं इसकी वजह है उसे खाने का गलत ढंग और गलत समय। इसलिए तो बड़े-बुजुर्ग भी कहते थे कि इसे खाने के सही ढंग और सही समय की सही जानकारी होना बहुत अनिवार्य है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>आइये जानते हैं आम खाने से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें कि किस तरह आम का सेवन करना हमारे लिए फायदेमंद रहेगा।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">एक रसीले एवं भरपूर पके हुए आम में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की मात्रा होती है। एक मेडिसिन लाइब्रेरी द्वारा आम को लेकर प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार आम प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, कॉपर, फॉलेट, विटामिन ए, विटामिन के, विटामिन ई, नियासिन, पोटैशियम, राइबोफ्लेविन, मैग्नीशियम, थायमीन का एक बेहतरीन स्रोत है। आम में प्राकृतिक रूप से शुगर उपलब्ध होती है। पर इसमें मौजूद अन्य पोषक तत्व डायबिटीज मरीजों के लिए भी फायदेमंद होते हैं। बता दें कि यदि आपको डायबिटीज है तो एक सीमित मात्रा में ही आम का सेवन करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कब खाएं आम</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर आम खाने के सही समय की बात की जाए तो आम दोपहर के खाने के कुछ देर बाद खाना बहुत लाभदायक होता है। लेकिन आप इसे सनैकिंग तौर पर भी ले सकती हैं। इस तरह से अगर आम खाया जाए तो आपका ब्लड ग्लूकोज लेवल सामान्य रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आजकल घरों में आम खाने में कुछ घरेलू तरीके प्रयोग में लिए जाते हैं जोकि खतरनाक भी हो सकते हंै। जैसे आम के साथ दही खाना। यह बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए कभी भी आम के साथ दही नहीं खानी चाहिए। कई बार खाली पेट आम खाने से आपका ब्लड शुगर लेवल तेजी से ट्रिगर करता है। इसलिए जितना हो सके सुबह खाली पेट आम न खाएं। इसी प्रकार रात को भी आम खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि जब भी आप आम बाजार से खरीदकर लाते हैं तो आते ही इसे नहीं खाना चाहिए। आम खाने से पहले कम से कम आधा घंटा पानी में डुबोकर रखें, जिससे आम में फाइटिक एसिड नामक नेचुरल मॉलिक्यूल कम हो जाए और आपके शरीर को कोई नुकसान ना पहुंचे। क्योंकि अधिक मात्रा में फाइटिक एसिड लेना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए हो सके तो आम को पानी में डालकर कुछ देर छोड़ दें ताकि पानी एक्स्ट्रा फाइटिक एसिड को सोख ले।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मैंगों शेक से परहेज करें</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि रात को खाने के बाद आम खाना भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। क्योंकि रात का आम खाने से ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है, जिसके कारण शुगर का खतरा बढ़ सकता है और शुगर के मरीजों के लिए यह और भी नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए इसे कभी भी रात को खाने के बाद नहीं खाना चाहिए। अगर एक्सपर्ट की मानें तो आम को पूरे फल के रूप में खाना चाहिए। जितना हो सके मैंगो जूस से परहेज रखें। सुबह ब्रेकफास्ट में आम खाया जा सकता है। साथ ही ओट्स और अन्य हेल्दी ब्रेकफास्ट लेने भी जरूरी है। सुबह खाली पेट केवल आम खाना आपका ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। आम को फ्रूट सलाद के रूप में खाना आपके लिए बहुत ही लाभदायक रहेगा। साथ ही अन्य फलों और सब्जियों को भी इसके साथ खाया जा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/home-and-family/right-time-and-right-way-to-eat-mango/article-47389</link>
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                <pubDate>Tue, 09 May 2023 12:49:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फलों के राजा चौसा लंगड़ा आम का स्वाद विदेशों में भी चख रहें है लाखों लोग</title>
                                    <description><![CDATA[जापान, दुबई व चीन जैसे देशों में हर साल कई टन आम का हो रहा है निर्यात लाडवा(रामगोपाल)। विदेशों में भी फलों के राजा चौसा लंगड़ा आम के स्वाद के लोग दिवाने है। हर साल टनों की मात्रा में चौसा लंगड़ा आम को सहारनपुर के रायपुर के पैक हाउस से निर्यात किया जा रहा है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/millions-of-people-are-tasting-the-taste-of-mango-the-king-of-fruits/article-35063"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/mango-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"><strong>जापान, दुबई व चीन जैसे देशों में हर साल कई टन आम का हो रहा है निर्यात</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>लाडवा(रामगोपाल)।</strong> विदेशों में भी फलों के राजा चौसा लंगड़ा आम के स्वाद के लोग दिवाने है। हर साल टनों की मात्रा में चौसा लंगड़ा आम को सहारनपुर के रायपुर के पैक हाउस से निर्यात किया जा रहा है। यह आम अधिकतर जापान, दुबई, चीन जैसे अनेक देशों में सप्लाई किया जा रहा है। इन आमों की खपत उस्मान जैसे किसान कर रहे है। अहम पहलू यह है कि उस्मान ने अपनी जमीन पर आम की करीब 235 किस्मों के पेड़ लगाए है। इन आमों को बेच कर उस्मान हर साल लाखों रुपए कमा रहे है।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर के गांव रायपुर से उस्मान लाडवा के उप उष्णकटिबंधीय फल केंद्र में 235 किस्मों के आम ले कर आए है। इन किस्मों को देख कर इस क्षेत्र के किसान व प्रदर्शनी देखने वाले लोग हैरान है और आम की खेती से प्रेरित हो रहे है। यहां पर किसान उस्मान ने विशेष बातचीत करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार की तरफ से आम उत्सव जैसे कार्यक्रमों के आयोजन से प्रगतिशील किसान को मंच मुहैया करवा कर प्रगति करने का एक मार्ग दिखाया है।</p>
<h3><strong>उस्मान के आम के बाग भी कर रहे है देश व विदेशी लोग के                      स्वाद की पूर्ति, हर साल कमा रहे है लाखों रुपए की आमदनी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि आम की खेती करना उनका पुश्तैनी काम है। इस पुश्तैनी खेती के लिए अपनी जमीन में आम की करीब 235 किस्मों के आम के पेड़ लगाए हुए है इन की देखभाल स्वयं तथा परिवार के अन्य लोग कर रहे है। इस खेती के लिए ज्यादा पैसा भी खर्च भी नहीं हो रहा है और हर साल करीब लाखों रुपए कमा रहे हैै।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सहारनपुर व रायुपर के पैक हाउस के संचालक आम खरीदते हैै और इस पैक हाउस से आम का निर्यात जापान, दुबई व चीन जैसे देशों में किया जा रहा है। उनके बाग से कई टन आम विदेशों में बेचे रहा है। उन्होंने एक सवाल का जवाब का देते हुए कहा कि आम उत्सव में पिछले कई साल से अपनी आम की किस्मों को लेकर आ रहे है। इस बार 235 किस्मों के आम को लेकर आएं है। उनकी किस्मों को किसान काफी पसंद कर रहे है और आम की खेती को अपनाने के लिए चर्चा कर रहे है। इससे राज्य सरकार का सपना भी साकार हो रहा है। इस प्रकार के कार्यक्रमों से किसानों को फसल चक्र अपनाने के लिए ही प्रेरित किया जा रहा है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jun 2022 18:14:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आया अगात आम का सीजन बाजार में उतरा आम</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। समय से पहले आर्थिक लाभ के लिए कृत्रिम तरीके से आमों को पकाकर बाजार में उतारे जाने से इसके प्रेमी भले ही खुश हों लेकिन प्राकृतिक रूप से पके आम का स्वाद उन्हें नहीं मिल रहा है। पिछले चार पांच साल से किसानों और व्यापारियों का ऐसा आकलन है कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/mango-season-start/article-23506"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/mango.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> समय से पहले आर्थिक लाभ के लिए कृत्रिम तरीके से आमों को पकाकर बाजार में उतारे जाने से इसके प्रेमी भले ही खुश हों लेकिन प्राकृतिक रूप से पके आम का स्वाद उन्हें नहीं मिल रहा है। पिछले चार पांच साल से किसानों और व्यापारियों का ऐसा आकलन है कि अगात आम उतना लाभदायक अब नहीं है जो कुछ साल पहले हुआ करता था। आम के शौकीन अगात आम की किस्मों का स्वाद लेने से बचते हैं और उसके सही तरीके से पकने के समय का इंतजार करते हैं। बेहतर परिवहन सुविधा के कारण आमों को जल्दी पेड़ से तोड़ लिया जाता है और उसे जबरन पकाकर बाजार में उतार दिया जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दक्षिण भारतीय आमों का दबदबा</h4>
<p style="text-align:justify;">पूरा उत्तरी क्षेत्र अगात आम के लिए दक्षिण भारत पर निर्भर रहता है। दक्षिण भारत को प्राकृतिक रुप से यह फायदा है कि इस क्षेत्र में हल्की ठंड होती है और आम के पेड़ो पर जल्दी मंजर आते हैं जिसके कारण आम जल्दी पक जाता है। जम्मू से लेकर पश्चिम बंगाल तक उपोष्ण क्षेत्र में देर से फलों का राजा आम तैयार होता है। इसके कारण आम बाजार पर दक्षिण भारतीय आमों का दबदबा होता है ।</p>
<p style="text-align:justify;">बंगनपल्ली जो सफेदा के नाम से भी विख्यात है वह पिछले कुछ दिनों से बाजार में आया हुआ है। मध्यम आय वाला परिवार इस आम से मिल्कसेक बनाकर इसका आनंद उठाता है। समय से प्राकृतिक रूप से इस आम के तैयार होने पर डेजर्ट रूप में उपयोग में लाकर गुणवत्तापूर्ण स्वाद का लुफ्त लिया जा सकता है। सफेदा को यदि प्राकृतिक रूप से तैयार होने पर उपयोग किया जाए तो इसका लजीज स्वाद मिलता है। आंध्र प्रदेश के किसान बेहतर मूल्य मिलने में लालच में सफेदा को परिपक्व होने से पहले ही इसे पेड़ से तोड़कर बाजार में उतार देते हैं जिसका उत्तर भारत में लंबे समय से इंतजार किया जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पिछले साल लॉकडाउन के कारण किसानों को काफी नुक्सान हुआ था</h4>
<p style="text-align:justify;">बेहतरीन किस्म के आमों में शामिल आॅलफोंसो जल्दी बाजार में आने वाले किस्मों में शामिल हैं, लेकिन अधिक कीमत होने के कारण आम लोगों के पहुंच के बाहर है। दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों के चुनिंदा फल दुकानों पर अल्फोंसो उपलब्ध है जिसका खास लोग इसका मुंहमांगा कीमत अदा करने को तैयार हैं। फरवरी से अल्फोंसो बाजार में दस्तक देने लगता है और मुंबई एवं गुजरात में लोग इसकी कोई भी कीमत देने को तैयार रहते हैं। अप्रैल के बाद मध्यम वर्ग इसकी कीमत देने की स्थिति में होते हैं। वर्षा के शुरू होने पर इसके मूल्य में गिरावट शुरू हो जाती है क्योंकि गुजराती पहली बारिश के बाद से ही अलफोंसो आम से परहेज करने लगते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल लॉकडाउन के कारण अल्फोंसो आम का दूर दराज के क्षेत्रों में परिवहन नहीं हो सका था जिसके कारण किसानों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था । इस साल परिवहन पर रोक नहीं है जिसके कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग इसके बेहतरीन स्वाद का आनंद उठा रहे हैं। ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरेख भी बाजार में दिखने लगा है। दूर से ही आकर्षक लाल रंग का यह आम लोगों को अपनी ओर खींचता है। इसका फल बहुत बढ़िया नहीं है लेकिन अपने आकर्षक रंग के बदौलत बाजार में जगह बना लेता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के दशहरी के आने के बाद आम का असली स्वाद</h4>
<p style="text-align:justify;">उत्तर भारतीय अगात आम की किस्मों के बाजार में आने के पहले तक सफेदा और सुवर्णरेखा का दबदबा बना रहता है। देश के पूर्वी हिस्से से अगात लंगड़ा और गुलबखास किस्मों के आने के बाद दूसरे आमों का प्रभाव कम होने लगता है। गुलाबखास और लंगड़ा कम मात्रा में उपलब्ध होता है। उत्तर प्रदेश के आमों के विशेषकर दशहरी के आने के बाद आम का असली स्वाद मिल पाता है। इससे पहले बॉम्बे ग्रीन और कई अन्य किस्म के आम काफी कम मात्रा में आता है। दशहरी के आने के बाद मिल्कसेक का बेहतरीन मजा आने लगता है। आमों को समय से पहले जबरन पकाने से इसका असली स्वाद नहीं मिल पाता है। देश के अधिकांश हिस्सा में कार्बाइड से फलों के पकने पर रोक लगा दी गई है, जिसके कारण अब लोग इसे इथाईलीन से पकाने लगते हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/mango-season-start/article-23506</link>
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                <pubDate>Sun, 09 May 2021 16:35:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब सालभर रसीले ‘आम’ देगा पौधा</title>
                                    <description><![CDATA[ कोटा के किसान श्रीकृष्ण ने ईजाद की नई किस्म (New Variety of Mango)  स्वाद और पौषक तत्वों से है भरपूर नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान में कोटा के किसान श्रीकृष्ण सुमन ने आम की एक ऐसी नई किस्म विकसित कर ली, जिसमें नियमित तौर पर पूरे साल सदाबहार नाम का आम पैदा होता है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/kota-farmer-shri-krishna-invented-a-new-variety-of-mango/article-23017"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/new-variety-of-mango.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong> कोटा के किसान श्रीकृष्ण ने ईजाद की नई किस्म </strong></h2>
<h2 style="text-align:center;"><strong>(New Variety of Mango)</strong></h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong> स्वाद और पौषक तत्वों से है भरपूर</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान में कोटा के किसान श्रीकृष्ण सुमन ने आम की एक ऐसी नई किस्म विकसित कर ली, जिसमें नियमित तौर पर पूरे साल सदाबहार नाम का आम पैदा होता है। आम की यह किस्म आम के फल में होने वाली ज्यादातर प्रमुख बीमारियों से मुक्त भी है। इसका फल स्वाद में ज्यादा मीठा, लंगड़ा आम जैसा होता है और नाटा पेड़ होने के चलते किचन गार्डन में लगाने के लिए उपयुक्त है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इसका पेड़ काफी घना होता है और इसे कुछ साल तक गमले में भी लगाया जा सकता है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके अलावा इसका गूदा गहरे नारंगी रंग का और स्वाद में मीठा होता है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके गूदे में बहुत कम फाइबर होता है, जो इसे अन्य किस्मों से अलग करता है।</li>
<li style="text-align:justify;">पोषक तत्वों से भरपूर आम स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>परम्परागत खेती को अलविदा कह पकड़ी अलग राह</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आम की इस नई किस्म का विकास करने वाले किसान श्रीकृष्ण ने कक्षा दो तक पढ़ाई करने के बाद स्कूल छोड़ दिया था और अपना पारिवारिक पेशा माली का काम शुरू कर दिया था। उनकी दिलचस्पी फूलों और फलों के बागान का प्रबंधन करने में थी, जबकि उनका परिवार सिर्फ गेहूं और धान की खेती करता था। उन्होंने यह जान लिया था कि गेहूं और धान की अच्छी फसल लेने के लिए कुछ बाहरी तत्वों जैसे बारिश, पशुओं के हमले से रोकथाम और इसी तरह की चीजों पर निर्भर रहना होगा और इससे सीमित लाभ ही मिलेगा।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए फूलों की खेती शुरू की।</li>
<li style="text-align:justify;">सबसे पहले उन्होंने विभिन्न किस्म के गुलाबों की खेती की और उन्हें बाजार में बेचा।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके साथ ही उन्होंने आम के पेड़ लगाने भी शुरू किए।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>15 साल में मिली कामयाबी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2000 में उन्होंने अपने बागान में आम के एक ऐसे पेड़ को देखा, जिसके बढ़ने की गति बहुत तेज थी, जिसकी पत्तियां गहरे हरे रंग की थी। उन्होंने देखा कि इस पेड़ में पूरे साल बौर आते हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">यह देखने के बाद उन्होंने आम के पेड़ की पांच कलमें तैयार की।</li>
<li style="text-align:justify;">इस किस्म को विकसित करने में उन्हें करीब 15 साल का समय लगा ।</li>
<li style="text-align:justify;">इस बीच उन्होंने कलम से बने इस पौधों का संरक्षण और विकास किया।</li>
<li style="text-align:justify;">कलम लगाने के बाद पेड़ में दूसरे ही साल से फल लगने शुरू हो गए।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>नई किस्म को एनआईएफ से मिली मान्यता</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इस नई किस्म को नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ) इंडिया ने भी मान्यता दी। एनआईएफ भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्तशासी संस्थान है। <strong>(New Variety of Mango) </strong>एनआईएफ ने आईसीएआर-इंडियन इंस्ट्रीट्यूट आॅफ हार्टिकल्चरल रिसर्च (आईआईएचआर), बेंगलूर को भी इस किस्म का स्थल पर जाकर मूल्यांकन करने की सुविधा दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा राजस्थान के जयपुर के जोबनर स्थित एसकेएन एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने इसकी फील्ड टेस्टिंग भी की। अब इस किस्म का पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम तथा आईसीएआर-नेशनल ब्यूरो आॅफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज (एनवीपीजीआर) नई दिल्ली के तहत पंजीकरण कराने की प्रक्रिया चल रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>राष्ट्रपति भवन में लगाया पौधा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">एनआईएफ ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डेन में इस सदाबहार आम की किस्म का पौधा लगाने में भी सहायता की है। इस सदाबहार किस्म के आम का विकास करने के लिए श्रीकृष्ण सुमन को एनआईएफ का नौवां राष्ट्रीय तृणमूल नवप्रवर्तन एवं विशिष्ट पारंपरिक ज्ञान पुरस्कार (नेशनल ग्रासरूट इनोवेशन एंड ट्रेडिशनल नॉलेज अवार्ड) दिया गया है और इसे कई अन्य मंचों पर भी मान्यता दी गई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>8000 से ज्यादा पौधों के मिले आॅर्डर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">श्रीकृष्ण सुमन को 2017 से 2020 तक देशभर से और अन्य देशों से भी सदाबहार आम के पौधों के 8,000 हजार से ज्यादा आॅर्डर मिल चुके हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वह 2018 से 2020 तक आंध्रप्रदेश, गोवा, बिहार, छत्तीसगढ़,</li>
<li style="text-align:justify;">गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल,</li>
<li style="text-align:justify;">कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब,</li>
<li style="text-align:justify;">राजस्थान, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड,</li>
<li style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल, दिल्ली और चंडीगढ़ को 6,000 से ज्यादा पौधों की आपूर्ति कर चुके हैं।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">पांच सौ से ज्यादा पौधे राजस्थान और मध्यप्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों में वह खुद लगा चुके हैं। इसके अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात के विभिन्न अनुसंधान संस्थानों को भी 4,00 से ज्यादा पौधे भेजे जा चुके हैं।</p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/kota-farmer-shri-krishna-invented-a-new-variety-of-mango/article-23017</link>
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                <pubDate>Sun, 18 Apr 2021 15:56:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना के साथ आम के बागों पर भी देना होगा ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। अप्रैल का महीना आदमी और आम दोनों के ही स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मनुष्य तो इन दिनों कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की समस्या से जूझ रहा है उधर आम के बागों में भी ध्यान देने की जरूरत है। वैसे ही इस बार आम की फसल कम है लेकिन यदि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/along-with-corona-mango-orchards-will-also-have-to-be-given-attention/article-22499"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-03/mango-orchards.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> अप्रैल का महीना आदमी और आम दोनों के ही स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मनुष्य तो इन दिनों कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की समस्या से जूझ रहा है उधर आम के बागों में भी ध्यान देने की जरूरत है। वैसे ही इस बार आम की फसल कम है लेकिन यदि ध्यान नहीं दिया गया तो रही सही फसल के भी नष्ट होने की संभावना बढ़ जाती है। इस बार लंबे समय तक सर्दी और असमय बारिश के कारण देर से आम के बौर कम संख्या में निकले और उन्हें कीट एवं व्याधियों के प्रकोप की कम समस्याएं झेलनी पड़ीं।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिक बारिश और ठंड के कारण आम के बागों पर रोग का प्रकोप कम हुओ केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच) लखनऊ के निदेशक डॉ शैलेन्द्र राजन के अनुसार इस वर्ष जनवरी में हुई अत्यधिक सर्दी ने भुनगा कीट का वंश नाश किया तो लगातार वर्षा ने थ्रिप्स कीट को मिट्टी में ही मार दिया। जिसके परिणामस्वरूप यह दोनों कीट अभी तक अधिकांश बागों में कम दिखे। भुनगा तो फिर भी कही-कहीं है लेकिन थ्रिप्स अभी तक पिछले वर्ष की तरह कहीं नहीं दिखा।</p>
<h3>मिज कीट ने किसानों को किया परेशान</h3>
<p style="text-align:justify;">आम के बौर बहुत कम संख्या में निकले हैं इसलिए स्वाभाविक रूप से फसल कमजोर होगी। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ पी के शुक्ला ने बताया कि सहारनपुर में 19 मार्च तथा लखनऊ और बाराबंकी जिलों के बागों में 28 मार्च तक के निरीक्षण के आधार पर यह उपरोक्त जानकारी दी जा रही है। कोरोना महामारी के मद्देनजर ाॉकडाउन के बाद भी यह बात संस्थान के व्हाट्सएप समूहों पर और मोबाइल पर आ रहे किसानों के संदेशों के आधार पर वर्तमान में भी लगभग यही स्थिति है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दो दिन में किसानों से प्राप्त संदेशों और फरवरी से अभी तक बागों के निरीक्षण के आधार पर स्पष्ट है कि इस वर्ष मिज कीट ने किसानों को परेशान किया। यह शुरू से ही बौर को क्षति करता रहा और अब नन्हें फलों को भी क्षति पहुंचा रहा है। इस कीट की फलों पर उपस्थिति की पहचान छोटे से काले धब्बे, जिसके बीचों बीच बारीक छेद हो, से की जाती है। इसका प्रबंधन क्विनाल्फोस 25 ई सी के दो मिलीलीटर या डाईमेथोएट 30 ई सी के दो मिलीलीटर प्रति लीटर के छिड़काव से किया जा सकता है। अगर किसी बाग में भुनगा बढ़ रहा हो तो थायमेथोकजाम 25 डब्लूजी के एक ग्राम प्रति तीन लीटर पानी का छिड़काव किया जा सकता है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 27 Mar 2021 15:29:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जर्दालू आम की भारी मांग, यातायात के साधनों की कमी से आपूर्ति पर असर</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। भागलपुरी जर्दालू आम उत्पादक संघ ने कहा है कि जर्दालू आम की भारी मांग है लेकिन यातायात के साधनों की कमी से इसकी आपूर्ति प्रभावित हो रही है। संघ के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने मंगलवार को बताया कि बिहार सरकार का उद्यान विभाग डाक विभाग के माध्यम से इस बार लोगों के घरों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/heavy-demand-for-jardalu-mango-shortage-of-means-of-transport-affects-supply/article-15669"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/mango-orchards1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> भागलपुरी जर्दालू आम उत्पादक संघ ने कहा है कि जर्दालू आम की भारी मांग है लेकिन यातायात के साधनों की कमी से इसकी आपूर्ति प्रभावित हो रही है। संघ के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने मंगलवार को बताया कि बिहार सरकार का उद्यान विभाग डाक विभाग के माध्यम से इस बार लोगों के घरों पर आम आपूर्ति के लिए ऑर्डर ले रहा है। किसान उत्पादक संघ को इसके लिए दस हजार किलो आम की आपूर्ति का ऑर्डर मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">चौधरी ने बताया कि एक जून से आम की आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि देश के अन्य हिस्सों से भी इस आम की आपूर्ति के बारे में पूछताछ की जा रही है लेकिन लॉकडाउन के कारण रेल गाड़ियों के नहीं चलने से बाहर का ऑर्डर नहीं लिया जा रहा है । आम बाहर जाने से किसानों को और बेहतर मूल्य मिलता लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है ।ट्रक से आम भेजने के लिए उतनी मात्रा में एक साथ आम होना चाहिए, जो संभव नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इस बार तापमान में भारी वृद्धि होने के कारण पिन बोरेर कीड़े का भारी प्रकोप हो गया है जो आम को नुकसान पहुंचा रहे हैं । इससे पहले आंधी के कारण भी जर्दालू आम को भारी नुकसान हुआ था। चौधरी ने कहा कि जर्दालू आम के सुपाच्य , सुगंधित और अन्य आम के पहले बाजार में आने के कारण इसकी भारी मांग है । उल्लेखनीय है कि जर्दालू आम को जी आई पहचान मिली हुई है । इस आम की मांग में पिछले कुछ वर्षों में हुई वृद्धि के कारण किसानों ने इसके नए बाग लगाए हैं जिसके दो-तीन साल में फैलने की आशा है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>कृषि</category>
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                <pubDate>Tue, 26 May 2020 15:40:04 +0530</pubDate>
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                <title>कलीमुल्ला के आम की नयी किस्म चिकित्सकों को समर्पित</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/new-variety-of-mangoes-of-kalimullah-dedicated-to-physicians/article-14969"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/mango-orchards.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलीहाबाद इलाके मे आम के एक पेड़ पर सैकड़ों किस्म उगाने वाले पदमश्री सम्मानित कलीमुल्ला ने इस बार भी नये किस्म का आम उगाया है और उसे डाक्टर नाम दिया है। कलीमुल्ला कहते हैं कि यह नयी किस्म उन डाक्टरों को समर्पित है जो कोरोना जैसी महामारी मे खुद की जान और अपने परिवार की चिंता किये बगैर लोगों की जिंदगी बचाने मे लगे हुए हैं। उन्हें अफसोस होता है जब लोगों की जान बचाने मे लगे इन डॉक्टरों पर जानलेवा हमले होते हैं।</p>
<h3>मोदी के नाम से भी आम की नयी किस्म उगा चुके | Variety of Mangoes</h3>
<p style="text-align:justify;">वो हर साल आम की कोई न कोई अलग किस्म उगाते हैं और उसे नया नाम देते हैं। आम के पेड़ पर अमिताभ ,अभिषेक, ऐश्वर्या आम अभी तक पैदा होते हैं। इसके अलावा कलीमुल्ला अखिलेश,मुलायम,आजम के अलावा एपीजे अब्दुल कलाम के नाम से भी आम की नयी किस्म उगा चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से भी वो आम की नयी किस्म उगा चुके हैं। वो हर साल अपने बाग मे लोगों को आम की दावत देते हैं। इस बार उनकी इच्छा डाक्टरों को दावत देने की है। उन्होने कहा कि अगर आने वाले दिनों मे सब कुछ सामान्य हुआ तो डाक्टरों को बुलाकर उन्हें खुशी होगी। हर साल आम की नयी किस्म उगाने के कारण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल मे उन्हें पदमश्री से सम्मानित किया गया था।</p>
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                <pubDate>Sun, 03 May 2020 09:39:12 +0530</pubDate>
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