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                <title>Forest - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Amazon Forest: जाको राखे साइयां मार सके ना कोई! दुनिया के सबसे बड़े जंगल में 40 दिन बच्चे कैसे रहे जिंदा</title>
                                    <description><![CDATA[बोगोटा: 4 Children Survived 40 Days in Amazon Forest:कोलम्बियाई अमेजन में 40 दिनों तक गुम रहे 4 स्वदेशी बच्चे उन बीजों, जड़ों और पौधों को खाने से जिंदा रहे। जिन्हें वे जानते थे कि इनको खाया जा सकता है। और इसके साथ ही कोलंबियाई सैनिकों के साथ खोज में शामिल स्थानीय लोगों ने बड़ी भूमिका […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/amazon-forest/article-48727"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/amazon-forest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बोगोटा:</strong> 4 Children Survived 40 Days in Amazon Forest:कोलम्बियाई अमेजन में 40 दिनों तक गुम रहे 4 स्वदेशी बच्चे उन बीजों, जड़ों और पौधों को खाने से जिंदा रहे। जिन्हें वे जानते थे कि इनको खाया जा सकता है। और इसके साथ ही कोलंबियाई सैनिकों के साथ खोज में शामिल स्थानीय लोगों ने बड़ी भूमिका निभाई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोलम्बिया के देशज लोगों के राष्टÑीय संगठन ने कहा कि “बच्चों को जीवित रहना प्राकृतिक पर्यावरण के साथ ज्ञान और संबंध का संकेत है, जिसे मां के गर्भ में शुरू करना सिखाया जाता है।” Amazon Forest</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि 4 भाई बहन एक मई को एक छोटे विमान दुर्घटना में बाल-बाल बच गए थे। जिसने पायलट, उनकी मां और एक तीसरे शख्स की जान चली गई थी। बच्चों के परिजनों को उम्मीद थी कि जंगलों से परिचत बच्चे जिंदा रहेंगे और इनका भरोसा ही आज बच्चे जिंदा बच गए है। ये बच्चे युक्का आटा खाने से जिंदा बचे जो कि क्रैश हुए प्लेन में था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चों में ‘आध्यात्मिक शक्ति’ भरी हुई थी | Amazon Forest</h3>
<p style="text-align:justify;">तलाशी अभियान में हिस्सा लेने वाले अकोस्टा ने कहा कि बच्चों में ‘आध्यात्मिक शक्ति’ भरी हुई थी। स्वदेशी नेताओं के बीच यह एक साझा धारणा है, और एकोस्टा ने कहा कि एक अभिभावक को सैन्य अस्पताल के बाहर तैनात किया जाना था, जहां डॉक्टर “आध्यात्मिक रूप से” बच्चों की मदद करने के लिए बच्चों की देखभाल कर रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">ओएनआईसी के एक अन्य नेता जेवियर बेटनकोर्ट ने एएफपी को बताया, “प्रकृति से हमारा विशेष संबंध है।” “दुनिया को प्रकृति के साथ इस तरह के विशेष संबंध की जरूरत है, जो उन स्वदेशी लोगों की तरह हैं जो जंगल में रहते हैं और इसकी देखभाल करते हैं।” खोज के दौरान, सैनिकों ने 20 दिनों तक स्वदेशी ट्रैकर्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ने की प्रशंसा | Amazon Forest</h3>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने प्रशंसा की जिसे उन्होंने “स्वदेशी और सैन्य ज्ञान की बैठक” कहा, जो उन्होंने कहा कि जंगल के प्रति सम्मान दशार्ता है। सेना के हेलीकॉप्टरों ने बच्चों की दादी की रिकॉर्डिंग प्रसारित की, जिसमें उन्हें स्वदेशी हुइतोटो भाषा में बचाव दल के पहुंचने तक एक स्थान पर रहने के लिए कहा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अकोस्टा ने स्थानीय मीडिया से सैनिकों और स्वदेशी विशेषज्ञों का जिक्र करते हुए कहा, “यह राष्ट्रपति पेट्रो थे जो हमें एक साथ लाए थे।” उन्होंने कहा, “खोज शुरू होने से आठ दिन पहले एक प्रारंभिक बैठक में, राष्ट्रपति ने हमसे कहा कि हमें सेना के साथ जाने की जरूरत है क्योंकि सेना इसे अकेले नहीं कर सकती।”</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jun 2023 17:09:35 +0530</pubDate>
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                <title>ब्रिटिश पत्रकार और ब्राजील का विशेषज्ञ अमेजन में लापता</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रासीलिय (एजेंसी)। ब्राजील की सुदूर जवारी घाटी में एक जानेमाने ब्रिटिश पत्रकार और ब्राजील के स्वदेशी मामलों के विशेषज्ञ लापता हो गए हैं। सीएनएन ने स्वदेशी संगठन के समन्वयक (यूएनआइअीएरेए) के हवाले से सोमवार को बताया कि पन्द्रह वर्षो से ब्राजील में काम कर रहे 57 वर्षीय पत्रकार डोम फिलिप्स और छुट्टी पर चल रहे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/british-journalist-and-brazilian-expert-missing-in-amazon-forest/article-34277"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/jungle-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्रासीलिय (एजेंसी)।</strong> ब्राजील की सुदूर जवारी घाटी में एक जानेमाने ब्रिटिश पत्रकार और ब्राजील के स्वदेशी मामलों के विशेषज्ञ लापता हो गए हैं। सीएनएन ने स्वदेशी संगठन के समन्वयक (यूएनआइअीएरेए) के हवाले से सोमवार को बताया कि पन्द्रह वर्षो से ब्राजील में काम कर रहे 57 वर्षीय पत्रकार डोम फिलिप्स और छुट्टी पर चल रहे स्वदेशी राष्ट्रीय फाउंडेशन (एफयूएनएआई) के एक कर्मचारी ब्रूनो अराउजो परेरा 30 घंटे से अधिक समय से लापता है। संगठन ने बताया कि उपग्रह से प्राप्त सूचना के अनुसार इन दोनो की जोड़ी की आखरी उपस्थित साओ राफेल पर पायी गयी थी। इन दोनों का रविवार सुबह यहां के स्थानीय नेता से मिलने कार्यक्रम था लेकिन वह नहीं पहुंचे। उन्होंने बताया कि इसके अलावा यह दोनों दो घंटे की यात्रा पर अटालिया डो नोर्टे भी जाने वाले थे लेकिन वह वहां नहीं पहुंचे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला:</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">संगठन ने लापता लोगों की तलाश के लिए दो दलों का गठन किया है। अमेजॅन के गवर्नर विल्सन लीमा ने तलाशी अभियान को मजबूती और गति देने के लिए पुलिस की विशेष टुकड़िया तैनात करने के आदेश दिये। लेकिन द गार्जियन की रिपोर्ट अनुसार दूसरे दिन सोमवार की रात तक तलाशी के बाद भी इन दोनों लोगों का कोई सुराग नहीं मिला। उत्तर-पूर्वी शहर सल्वाडोर में रहने वाली उनकी पत्नी एलेसेंड्रा सैम्पाइओ ने एक बयान में जारी कर ब्राजील के अधिकारियों से कहा कि हमारे परिवार में निराशा है लापता लोगों की तलाशी अभियान को तेज किया जाये।</p>
<p style="text-align:justify;">उनहोंने कहा कि उनके पति को लापता हुये 30 घंटे से ज्यादा वक्त बीत चुका है और जंगल में गुम हुये व्यक्तियों के लिए एक एक क्षण जीवन मरण का प्रश्न होता है। सीएनएन के अनुसार जावरी घाटी में कई नदियां है और घने जंगल है जिससे किसी भी चीज तक पहंचना काफी मुश्किल है। करीब 16 समूह जिनका आपस में कोई सम्पर्क नहीं है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jun 2022 15:08:14 +0530</pubDate>
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                <title>कसौली और सनावर के जंगलों में लगी भीषण आग</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। भीषण गर्मी के बीच हरियाणा-हिमाचल बॉर्डर पर स्थित कसौली और सनावर के जंगलों में आग लग गई। आग को बुझाने के लिए भारतीय सेना के जवान जी-जान से जुटे हैं। इसके लिए वे हेलीकॉप्टर की मदद से पंचकूला के कौशल्या डैम से पानी लेकर आग बुझा रहे हैं। इसके साथ ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/a-fierce-fire-broke-out-in-the-forests-of-kasauli-and-sanawar/article-33468"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/fire-of-australia.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> भीषण गर्मी के बीच हरियाणा-हिमाचल बॉर्डर पर स्थित कसौली और सनावर के जंगलों में आग लग गई। आग को बुझाने के लिए भारतीय सेना के जवान जी-जान से जुटे हैं। इसके लिए वे हेलीकॉप्टर की मदद से पंचकूला के कौशल्या डैम से पानी लेकर आग बुझा रहे हैं। इसके साथ ही पंचकूला पुलिस को डैम पर तैनात किया गया है, ताकि जब हेलिकॉप्टर वाटर टैंकर में यहां से पानी भर रहा हो तो उस समय डैम के आसपास लोग न जा सकें। बताया जा रहा है कि सोलन जिले के कसौली के नजदीक मणौन गांव के जंगल में आग लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सूचना मिलते ही दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों ने भी आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान आग की चपेट में आने से तीन लोग झुलस गए। घायलों को कसौली कैंट अस्पताल में भर्ती किया गया। बाद में स्थिति गंभीर होने के चलते चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया। आग टीवी टॉवर के पास पहुंच गई। वहीं सनावर में लगी आग दो साल से बंद ईको पार्क तक पहुंच गई। सेना के जवान आग बुझाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। लेकिन भीषण गर्मी के चलते चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 12:00:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>न्यू मैक्सिको में भीषण आग, 97 हजार एकड़ क्षेत्र चपेट में</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको के जंगलों में लगी भीषण आग 97,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैल गयी है। राज्य के अग्निशमन अधिकारियों ने रविवार को बताया कि पूरे क्षेत्र में तेज हवाओं के कारण आग कल बहुत तेजी से पूर्व में लास वेगास और दक्षिण में गैलिनास कैन्यन तक फैल गयी। हवा के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/massive-fire-in-new-mexico-97-thousand-acres-in-the-grip/article-32864"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/fire-in-slums.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको के जंगलों में लगी भीषण आग 97,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैल गयी है। राज्य के अग्निशमन अधिकारियों ने रविवार को बताया कि पूरे क्षेत्र में तेज हवाओं के कारण आग कल बहुत तेजी से पूर्व में लास वेगास और दक्षिण में गैलिनास कैन्यन तक फैल गयी। हवा के कारण आग अनुमानित से तेज गति से फैल रही है, जिससे लोगों की निकासी और सड़कों के बंद किये जाने की स्थिति में कई बदलाव करने पड़े। यह स्थिति आज भी जारी रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह लगी इस आग की चपेट में 97,064 एकड़ जमीन आ चुकी है, जिसमें से 32 फीसदी पर लगी आग पर काबू पा लिया गया है। पिछले 24 घंटों में, आग 30,000 एकड़ में फैल गयी है और अब कुल 1,020 दमकलकर्मी इसे बुझाने में लगे हुए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यू मैक्सिको के कुछ हिस्सों में लोगों को निकालने के आदेश जारी कर दिये गये हैं।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 May 2022 11:09:21 +0530</pubDate>
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                <title>जंगलों को बचाना बेहद जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रालय द्वारा 17वीं भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2021 जारी की गयी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में वन और पेड़ आच्छादित भू-भाग का दायरा पिछले दो वर्षों में 2,261 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। देश में वन अच्छादित भू-भाग 8,09,537 वर्ग किलोमीटर तक विस्तृत हो गया है। इससे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/it-is-very-important-to-save-the-forests/article-30213"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/save-tree.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रालय द्वारा 17वीं भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2021 जारी की गयी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में वन और पेड़ आच्छादित भू-भाग का दायरा पिछले दो वर्षों में 2,261 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। देश में वन अच्छादित भू-भाग 8,09,537 वर्ग किलोमीटर तक विस्तृत हो गया है। इससे पहले 2017 की तुलना में 2019 में जंगल एवं वृक्षों के आवरण में 5,188 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गयी थी। तीव्र आर्थिक विकास के साथ-साथ देश में हरियाली का बढ़ता ग्राफ जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने तथा सतत पोषणीय विकास की अवधारणा को अपनाने की दिशा में भारत सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, कर्नाटक और झारखंड क्रमश: पांच ऐसे राज्य हैं, जो बीते दो वर्षों में हरियाली बढ़ाने में सबसे आगे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं क्षेत्रफल के हिसाब से देश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र मध्य प्रदेश में है। प्रतिशतता के हिसाब से सबसे आगे मिजोरम है, जहां के 84.53 फीसदी भूभाग पर वन है। जंगल सृष्टि के खूबसूरत सृजनों में से एक है। ये धरती के फेफड़े की तरह कार्य करते हैं और पर्यावरण से प्रदूषक गैसों जैसे नाइट्रोजन आॅक्साइड, अमोनिया, सल्फर डाइ-आॅक्साइड तथा ओजोन को अपने अंदर समाहित कर वातावरण में प्राणवायु छोड़ते हैं। साथ ही जंगल वर्षा कराने, तापमान को नियंत्रित रखने, मृदा के कटाव को रोकने तथा जैव-विविधता को संरक्षित करने में भी सहायक हैं। जंगलों से उपलब्ध होने वाले दर्जनों उपदानों का उपभोग हम सब किसी न किसी रूप में करते ही हैं। प्रकृति के निकट रहनेवाले कई समुदायों के लिए जंगल जीवन-रेखा की तरह है। हालांकि औद्योगीकरण और नगरीकरण की प्रकिया के साथ जंगलों के प्रति मानव दृष्टिकोण भी बड़ी तेजी से बदला है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज प्राकृतिक जंगलों को उजाड़ कर वहां कंक्रीट के जंगल तैयार किये जा रहे हैं। प्रकृति के प्रति मानव की संवेदनशीलता मृतप्राय होती जा रही है, जिससे मानवजाति विभिन्न जलवायविक समस्याओं का सामना कर रही है। वास्तव में पर्यावरण संबंधी अधिकांश समस्याओं की जड़ वनोन्मूलन ही है। वैश्विक ऊष्मण, बाढ़, सूखे जैसी समस्याएं वनों के ह्रास के कारण ही उत्पन्न हुई हैं। इसका समाधान भी पौधारोपण में ही छिपा है। भारत में जन्मदिन के मौके पर लोगों से पौधे लगाने का आह्वान किया जाता रहा है, लेकिन शायद ही एक बड़ी आबादी इस पर जोर देती है! अगर वास्तव में एक खुशहाल विश्व बनाना है, तो प्रकृति को सहेजने के लिए हम सभी को आने आना होगा। जो जंगल शेष हैं, उनकी रक्षा करनी होगी। साथ ही पौधरोपण के लिए हरेक स्तर से प्रयास करने होंगे। आपदा प्रबंधन को लेकर भी आम नागरिकों को जागरूक करना होगा। प्राकृतिक संतुलन के लिए जंगलों को बचाना बेहद जरूरी है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Jan 2022 10:02:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>देश के वन एवं वृक्षों से भरे क्षेत्र में 2,261 किमी. का इजाफा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत ने वन एवं वृक्षों से भरे क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में 2,261 वर्ग किलो मीटर का विस्तार हुआ है। इस दौरान देश में सबसे ज्यादा वन क्षेत्र में वृद्धि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में हुई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की जारी रिपोर्ट के अनुसार देश के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/in-the-forest-and-tree-filled-area-of-the-country-2261-km-increase/article-29954"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/oak-tree-uttarakhand.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारत ने वन एवं वृक्षों से भरे क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में 2,261 वर्ग किलो मीटर का विस्तार हुआ है। इस दौरान देश में सबसे ज्यादा वन क्षेत्र में वृद्धि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में हुई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की जारी रिपोर्ट के अनुसार देश के 17 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में एक तिहाई भौगोलिक हिस्सा वनों से पटा हुआ है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने यह रिपोर्ट जारी की। वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी करते हुए यादव ने बताया कि देश का कुल वन और वृक्षों से भरा क्षेत्र 8.09 करोड़ हेक्टेयर है, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 24.62 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 के आकलन की तुलना में देश के कुल वन और वृक्षों से भरे क्षेत्र में 2,261 वर्ग किमी की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर की कि वर्ष 2021 के मौजूदा मूल्यांकन से पता चलता है कि 17 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों का 33 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र वनों से पटा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का ध्यान वनों को न केवल मात्रात्मक रूप से संरक्षित करने पर है बल्कि गुणात्मक रूप से इसे समृद्ध करने पर भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि वन सर्वेक्षण रिपोर्ट यानी आईएसएफआर-2021 भारत के जंगलों में वन आवरण, वृक्ष आवरण, मैंग्रोव क्षेत्र, जानवरों की बढ़ती संख्या, भारत के वनों में कार्बन स्टॉक, जंगलों में लगने वाली आग की निगरानी व्यवस्था, बाघ आरक्षित क्षेत्रों में जंगल का फैलाव, एसएआर डेटा का उपयोग करके जमीन से ऊपर बायोमास के अनुमानों और जलवायु परिवर्तन के संवेदनशील जगहों (हॉटस्पॉट) के बारे में जानकारी प्रदान करता है। मंत्रालय के मुताबिक देश का कुल वन और वृक्षों से भरा क्षेत्र 8.09 करोड़ हेक्टेयर हैं, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 24.62 प्रतिशत है। वर्ष 2019 के आकलन की तुलना में देश के कुल वन और वृक्षों से भरे क्षेत्र में 2,261 वर्ग किमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसमें से वनावरण में 1,540 वर्ग किमी और वृक्षों से भरे क्षेत्र में 721 वर्ग किमी की वृद्धि पाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">वन आवरण में सबसे ज्यादा वृद्धि खुले जंगल में देखी गई है, उसके बाद यह बहुत घने जंगल में देखी गई है। इस दौरान सबसे ज्यादा वन क्षेत्र में वृद्धि आंध्र प्रदेश (647 वर्ग किमी) में हुई है। इसके बाद तेलंगाना (632 वर्ग किमी) और ओडिशा (537 वर्ग किमी) हैं। क्षेत्रफल के हिसाब से, मध्य प्रदेश में देश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र है। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र हैं। कुल भौगोलिक क्षेत्र के प्रतिशत के रूप में वन आवरण के मामले में, शीर्ष पांच राज्य मिजोरम (84.53 प्रतिशत), अरुणाचल प्रदेश (79.33 प्रतिशत), मेघालय (76.00 प्रतिशत), मणिपुर (74.34 प्रतिशत) और नगालैंड (73.90 प्रतिशत) हैं। वहीं 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का 33 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र वन आच्छादित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से पांच राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों लक्षद्वीप, मिजोरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में 75 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र हैं, जबकि 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों अर्थात् मणिपुर, नगालैंड, त्रिपुरा, गोवा, केरल, सिक्किम, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, दादरा- नगर हवेली, दमन- दीव,असम और ओडिशा में वन क्षेत्र 33 प्रतिशत से 75 प्रतिशत के बीच है।देश में कुल मैंग्रोव क्षेत्र 4,992 वर्ग किमी है। वर्ष 2019 के पिछले आकलन की तुलना में मैंग्रोव क्षेत्र में 17 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि पाई गई है। मैंग्रोव क्षेत्र में सबसे ज्यादा वृद्धि ओडिशा (8 वर्ग किमी), महाराष्ट्र (4 वर्ग किमी) और कर्नाटक (3 वर्ग किमी) हुई हैं। देश के जंगल में कुल कार्बन स्टॉक 7,204 मिलियन टन होने का अनुमान है और 2019 के अंतिम आकलन की तुलना में देश के कार्बन स्टॉक में 79.4 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। कार्बन स्टॉक में वार्षिक वृद्धि 3.97 करोड़ टन है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में वनों की स्थिति के वर्तमान मूल्यांकन में प्राप्त सटीकता का स्तर काफी अधिक है। वनावरण वर्गीकरण की सटीकता का आकलन 92.99 प्रतिशत किया गया है। वन और गैर-वन वर्गों के बीच वर्गीकरण की सटीकता का मूल्यांकन 85 फीसदी से अधिक के वर्गीकरण की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत सटीकता के मुकाबले 95.79 प्रतिशत किया गया है। इसमें कठिन क्यूसी और क्यूए अभ्यास भी किया गया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Jan 2022 11:22:47 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ब्रिटिश कोलंबिया: जंगल में लगी आग, आपातकाल की हुई घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[आग बुझाने में 3,000 से अधिक कर्मचारी मॉस्को (एजेंसी)। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में जंगलों में लगी भीषण आग को देखते हुए प्रांत में बुधवार से आपातकाल स्थिति घोषित कर दी है। सरकार ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि प्रांतीय सरकार जंगल में लगी आग की स्थिति को देखते हुए प्रांत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/british-columbia-forest-fires-emergency-declared/article-25351"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/fire-in-slums.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">आग बुझाने में 3,000 से अधिक कर्मचारी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>मॉस्को (एजेंसी)।</strong> कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में जंगलों में लगी भीषण आग को देखते हुए प्रांत में बुधवार से आपातकाल स्थिति घोषित कर दी है। सरकार ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि प्रांतीय सरकार जंगल में लगी आग की स्थिति को देखते हुए प्रांत में आपातकाल की घोषणा कर रही है। उन्होंने कहा कि आपातकाल 14 दिनों के लिए लागू रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि मंगलवार तक स्थानीय अधिकारियों ने पूरे प्रांत में 299 जंगलों में आग घटनाएं सामने आई है। करीब 6,000 लोगों को निकाला गया है और 32,000 से अधिक लोगों को निकाले जाने अलर्ट मिला है। प्रांत के सभी हिस्सों में आग बुझाने में 3,000 से अधिक दमकलकर्मी लगे हुए हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jul 2021 11:11:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हाथियों के हमले से तीन ग्रामीण की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[पत्थलगांव l छत्तीसगढ़ के जशपुर वन मंडल के पत्थलगांव वन परिक्षेत्र में हाथियों के हमले की अलग-अलग घटना में 3 ग्रामीणों की मौत हो गई है। वन मंडल अधिकारी जधव श्रीकृष्ण ने बताया कि हाथियों का दल भोजन की तलाश में कल झिमकी और खुंटापानी गांव में पहुंचा था। जहाँ उन्होंने दो ग्रामीणों को कुचल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/three-villagers-died-due-to-elephant-attack/article-21030"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/forest-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पत्थलगांव l</strong> छत्तीसगढ़ के जशपुर वन मंडल के पत्थलगांव वन परिक्षेत्र में हाथियों के हमले की अलग-अलग घटना में 3 ग्रामीणों की मौत हो गई है। वन मंडल अधिकारी जधव श्रीकृष्ण ने बताया कि हाथियों का दल भोजन की तलाश में कल झिमकी और खुंटापानी गांव में पहुंचा था। जहाँ उन्होंने दो ग्रामीणों को कुचल कर मार डाला जबकि सरईटोला जंगल के समीप एक युवक को हाथियों ने मार दिया है। उन्होंने बताया कि हाथियों के हमले से मारे गए तीनों लोगों के परिजनों को 25-25 हजार रुपये की तत्कालीन आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध करा दी गई है।</p>
<h3 style="text-align:center;"><strong>वन विभाग के सूत्रों के अनुसार एक ही रात मे तीन लोगों की मौत के बाद इस क्षेत्र के लोगों मे दहशत व्याप्त है। (Pathalgaon Forest)</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पत्थलगांव के झंडाघाट और डुमरबहार के छोटे जंगल में एक पखवाडे से डेरा डाल कर बैठे हाथियों को भोजन पानी नहीं मिल पाने के कारण हाथी शाम ढ़लते ही आस पास के आबादी क्षेत्रों में पहुंच कर घरों में तोड़ फोड़ कर अनाज चट कर रहे हैं। इन हाथियों को बड़े जंगल में नहीं खदेड़े जाने से कल रात तीन ग्रामीणों की मौत के दुखद हादसे हो गए। वन अमला हाथियों से बचाव के लिए ग्रामीणों को लगातार समझाईश दे रहा है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Jan 2021 12:04:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्य में 44 हजार 424 जनजातीय परिवारों को वनाधिकार पट्टे वितरित</title>
                                    <description><![CDATA[उदयपुर। राजस्थान में वनाधिकार अधिनियम के तहत वन में निवास करने वाले अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वनवासी परिवारों को 44 हजार 424 पट्टों का वितरण कर 34 हजार 849 हैक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया है। इनमें 44 हजार 72 पट्टे व्यक्तिगत श्रेणी में तथा 352 सामुदायिक श्रेणी में जारी किये गये है। जनजाति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/forest-rights-lease-distributed-to-44-thousand-424-tribal-families-in-the-state/article-18894"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/forest-rights-lease.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>उदयपुर।</strong> राजस्थान में वनाधिकार अधिनियम के तहत वन में निवास करने वाले अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वनवासी परिवारों को 44 हजार 424 पट्टों का वितरण कर 34 हजार 849 हैक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया है। इनमें 44 हजार 72 पट्टे व्यक्तिगत श्रेणी में तथा 352 सामुदायिक श्रेणी में जारी किये गये है। जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश्वर सिंह ने बताया कि राज्य में वन क्षेत्र मुख्यतः उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सिरोही, चित्तौड़गढ़, बांरा, अलवर, सवाई माधोपुर जिलों में फैला हुआ है। वनाधिकार अधिनियम के तहत अनुसूचित जनजाति तथा अन्य परम्परागत् वन निवासियों को अधिकतम चार हैक्टेयर भूमि का पट्टा दिया जा सकता है, जबकि सामुदायिक अधिकार के तहत निवास, वनोपज का संग्रहण, पशुचारण हेतु उपयोग इत्यादि सम्मिलित है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुसूचित जनजाति के वनवासियों के लिए पट्टा प्राप्त करने हेतु 13 दिसम्बर, 2005 से पूर्व वन भूमि का अधिभोग किया जाना जरूरी है, जबकि अन्य परम्परागत वनवासियों के लिए उक्त तिथि से पूर्व कम से कम 3 पीढियों तक वन भूमि में निवास करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 79,600 दावे प्राप्त हुए थे, जिनमें व्यक्तिगत दावें 77 हजार 925 तथा सामुदायिक दावें 16 हजार 775 थे, जिनमें से 44 हजार 72 व्यक्तिगत अधिकार पत्र एवं 352 सामुदायिक अधिकार पत्र जारी किये गये। प्रक्रियाधीन दावों की संख्या 2026 है जिनमें 1944 व्यक्तिगत दावे और 82 सामुदायिक दावे है। सिंह ने बताया कि पट्टाधारी परिवारों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए भारत सरकार से 5 करोड़ रूपये की परियोजना स्वीकृत करवायी गई है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Oct 2020 13:57:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कैलिफोर्निया में आग से जला 20.30 लाख एकड़ में फैला जंगल</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिका में कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजोम ने कहा है कि प्रांत के जंगलों में लगी आग के कारण 20.30 लाख एकड़ में फैला जंगल जल गया है जो एक वर्ष में इतने बड़े क्षेत्र में जंगल जलने की सबसे बड़ी घटना है। वहीं 2019 में आग की वजह से 118,000 एकड़ में फैला […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/fire-spread-over-20-30-lakh-acres-of-forest-in-california/article-18267"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/fire-in-slums.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका में कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजोम ने कहा है कि प्रांत के जंगलों में लगी आग के कारण 20.30 लाख एकड़ में फैला जंगल जल गया है जो एक वर्ष में इतने बड़े क्षेत्र में जंगल जलने की सबसे बड़ी घटना है। वहीं 2019 में आग की वजह से 118,000 एकड़ में फैला जंगल नष्ट हो गया था। गेविन ने यह बातें मंगलवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कही। उधर, कैलिफोर्निया के वानिकी एवं अग्नि नियंत्रण विभाग के अनुसार सैन डिएगो के जंगलों में लगी आग सोमवार तक 17000 एकड़ क्षेत्रफल में फैल चुकी थी। विभाग ने कहा था कि लगभग 14000 दमकलकर्मी आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। आग में जलने के कारण कम से कम आठ लोगों की मौत हो गयी है तथा 3300 संरचनाएं नष्ट हो गयी हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Sep 2020 10:58:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वन क्षेत्र घटना मानव सभ्यता के लिए खतरे का संकेत: गंगवा</title>
                                    <description><![CDATA[हिसार। हरियाणा विधानसभा उपाध्यक्ष रणबीर गंगवा ने कहा है कि पेड़ पौधों के फायदों की गिनती नहीं की जा सकती। ये कुदरत का बेहद ही अनमोल तोहफा है और इनके बिना मनुष्य जीवन असम्भव है। गंगवा ने हारा हरा-भरा हरियाणा अभियान के तहत सोमवार को कैमरी और मंगाली गांवों में पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान यह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/forest-area-event-signals-danger-to-human-civilization-gangwa/article-17485"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/ranbir-singh-gangwa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हिसार।</strong> हरियाणा विधानसभा उपाध्यक्ष रणबीर गंगवा ने कहा है कि पेड़ पौधों के फायदों की गिनती नहीं की जा सकती। ये कुदरत का बेहद ही अनमोल तोहफा है और इनके बिना मनुष्य जीवन असम्भव है। गंगवा ने हारा हरा-भरा हरियाणा अभियान के तहत सोमवार को कैमरी और मंगाली गांवों में पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि पेड़ पौधे हमारे लिए ईश्वरीय वरदान हैं, इसलिए हमें इनकी रक्षा का संकल्प लेना होगा। पेड़ पौधों के कारण से ही हम बहुत सी बिमारियों से बच पाते हैं। ऐसे में इनकी अनावश्यक रूप से इनकी कटाई से बचना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आह्वान किया कि मौजूदा मानसून सीजन में सभी को अपने आसपास खाली पड़ी जगहों पर पौधारोपण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 20 प्रतिशत वन क्षेत्र की आवश्यकता के विपरीत मौजूदा समय में लगभग चार प्रतिशत वन क्षेत्र मौजूद हैं जो मानव सभ्यता के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसी स्थिति में सभी को अपने जीवन में अधिकाधिक पौधे लगाने चाहिएं। उन्होंने मंगाली क्षेत्र के लोगों की समस्याएं भी सुनीं और उनके शीघ्र निस्तारण के लिए अधिकारियों से तत्परता से कार्य करने को कहा। इस अवसर पर ग्रामवासियों की मांग पर उन्होंने पिछड़ा वर्ग की चौपाल के निर्माण के लिए दस लाख रुपये की राशि स्वैच्छिक कोष से देने की घोषणा की।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2020 16:50:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वनों को आग से बचाने के लिए बने ठोस नीति</title>
                                    <description><![CDATA[वनों के बिना धरती दिवस मनाने का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। वनों की तबाही के होते विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। बेहतर हो यदि अमीर देश व अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं वनों को बचाने के लिए कोई ठोस मुहिम चलाएं, हर घटना पर चुप रहने से समस्या का निराकरण नहीं हो सकता।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/make-a-concrete-policy-to-protect-the-forest-from-fire/article-12344"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/make-a-concrete-policy-to-p.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आस्ट्रेलिया के वनों में लगी भयानक आग वातावरण के लिए चुनौती है जिसमें 50 करोड़ जानवरों की मौत होने का अनुमान है। इस हादसे में 2 हजार घर भी जल गए हैं। आग की भयानकता का अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि हमारे देश के राज्य पश्चिम बंगाल के क्षेत्रफल जितना जंगल जल गया है। तीन हजार के करीब सैनिक आग बुझाने में जुटे हुए हैं। कुछ माह पूर्व ही दुनिया के फेफड़े माने जाने वाले अमेजन के वनों को आग लग गई थी। गत वर्षों में कनाडा में भी बड़े स्तर पर वन आग की चपेट में आ गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">आग लगने का कारण भले ही कोई भी क्यों न हो लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि हरियाली कायम रखने और बढ़ाने संबंधी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस प्रकार के कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं उसके मुताबिक वनों को आग से बचाने के लिए तकनीक विकसित नहीं हो सकी और न ही प्रबंध मुकम्मल किए जा सके हैं। कनाडा में आज भी आग से वनों का उतना नुक्सान हो जाता है जितना कभी 100 साल पूर्व होता था। इस मामले में शक्तिशाली देशों के बीच सहयोग व तालमेल की कमी बनी रहती है। अधिकतर देश ऐसी घटनाओं में अपनी लड़ाई अकेला ही लड़ता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आस्ट्रेलिया, कनाडा जैसे देश तकनीक व अनुदान के लिए समर्थ देश हैं। कई वन एक से अधिक देशों की सीमाओं के साथ सटे हुए हैं।  एक देश में घटित घटना दूसरे देशों के लिए भी मुसीबत बनती है। इन हालातों में सबंधित देशों का कोई संयुक्त अभियान चलाया जा सकता है। वृक्ष प्रकृति के वरदान हैं जो मानव को आॅक्सीजन देते हैं। एक वृक्ष तैयार करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन आग से मिनटों में लाखों पेड़ जलकर राख हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लगभग हर साल की तरह ऐसी घटनाएं घटती हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आग से हो रहे नुक्सान को रोकने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई। यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि बढ़ रही जनसंख्या, उद्यौगिकरण व कई अन्य कारणों के चलते वन ही धरती का अस्तित्व का आधार हैं। वनों के बिना धरती दिवस मनाने का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। वनों की तबाही के होते विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। बेहतर हो यदि अमीर देश व अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं वनों को बचाने के लिए कोई ठोस मुहिम चलाएं, हर घटना पर चुप रहने से समस्या का निराकरण नहीं हो सकता। वनों को हर हाल में आग से बचाने की आवश्यकता है।</p>
<p> </p>
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</span></span></p>
<p><span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title=""> </span></span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2020 20:52:38 +0530</pubDate>
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