<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/coaching-centers/tag-7715" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Coaching Centers - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/7715/rss</link>
                <description>Coaching Centers RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>देश की राजधानी में मौत की कोचिंग!</title>
                                    <description><![CDATA[Coaching Center: देश की राजधानी दिल्ली में एक नहीं सैकड़ो की संख्या में ऐसे कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनमें सुरक्षा के प्रबंध न कही हैं। करोलबाग एरिया के ओल्ड राजेंद्र नगर में स्थित एक कोचिंग सेंटर की बेसमेंट में उन विद्यार्थियों की कोचिंग चल रही थी जो भविष्य में असल मायने में देश के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/hundreds-of-coaching-centers-are-running-in-the-countrys-capital-delhi/article-60424"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/exam-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Coaching Center: देश की राजधानी दिल्ली में एक नहीं सैकड़ो की संख्या में ऐसे कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनमें सुरक्षा के प्रबंध न कही हैं। करोलबाग एरिया के ओल्ड राजेंद्र नगर में स्थित एक कोचिंग सेंटर की बेसमेंट में उन विद्यार्थियों की कोचिंग चल रही थी जो भविष्य में असल मायने में देश के सबसे बड़े अधिकारी बनना चाह रहे थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था कोचिंग सेंटर उनका भविष्य नहीं बल्कि उनका मौत का कारण बनेगा। यदि इन कोचिंग सेंटर्स को सुविधाओं के अभाव में मौत के कोचिंग सेंटर कहा जाए तो भी किसी प्रकार की अतिशयोक्ति नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अब सबसे बड़ी बात यह है की इन कोचिंग सेंटर्स को एमसीडी सहित फायर ब्रिगेड विभाग से एनओसी लेनी अनिवार्य होती है। किसी भी स्कूल,कॉलेज व कोचिंग सेंटर्स को किसी भी प्रकार की एनओसी की जरूरत होती है तो उन्हें एनओसी बड़ी आसानी से मिल जाती है। क्योंकि यह भ्रष्टाचार का जमाना है। भ्रष्टाचार से कुछ भी असंभव नहीं है। यदि फायर ब्रिगेड विभाग के नियमों पर नजर डाली जाए तो किसी भी शिक्षण संस्थान व औद्योगिक संस्थान को विभाग की एनओसी लेने के लिए सबसे पहले एनबीसी एक्ट के तहत सभी प्रकार के उपकरण लगवाने होते हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में आगजनी व जलभराव की स्थिति में निपटा जा सके। Coaching Center</p>
<p style="text-align:justify;">जब फायर ब्रिगेड के पास एनओसी के लिए ऑनलाइन अप्लाई किया जाता है तो इसी एनबीसी एक्ट के तहत सबसे पहले फायर फाइटिंग स्कीम जारी की जाती है। इसमें साफ तौर पर लिखा होता है कि एनबीसी एक्ट के तहत तमाम उपकरणों का प्रबंध करना होगा। उसके बाद फिर से फायर ब्रिगेड विभाग के पास एनओसी के लिए अप्लाई करना होता है। एनओसी अप्लाई करने के बाद फायर सिक्योरिटी ऑफिसर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर मुआयना करता है कि क्या वास्तव में इस कोचिंग सेंटर या शिक्षण संस्थान में वे सभी उपकरण लगे हुए हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में बच्चों को बचा सके। लेकिन ऐसा नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">देश की राजधानी दिल्ली में ही नहीं ऐसा कहीं भी नहीं होता। अधिकारियों की जेब भारी करते ही ऐसी हजारों एनओसी हर रोज जारी की जाती है। यदि जिन संस्थाओं को पहले एनओसी जारी की गई है, यदि उनकी भी कड़ाई से दोबारा जांच की जाए तो ऐसे शिक्षण संस्थानों में फायर एक्सटिंग्विशर के अलावा और दूसरे कोई क प्रकार के इक्विपमेंट दिखाई नहीं देंगे। क्योंकि मामला भ्रष्टाचार का है। पर ऐसा नहीं होना चाहिए। यह तो हम एक ही प्रकार की एनओसी की बात कर रहे हैं। लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में ऐसी तमाम प्रकार की एनओसी घर बैठे दलालों के माध्यम से आसानी से मिल रही है। भ्रष्टाचार के इन मामलों पर दिल्ली सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार का भी ध्यान होना चाहिए, क्योंकि दिल्ली ऐसा राज्य है, जहां जहां से देश की सरकार भी चलती है। Coaching Center</p>
<p style="text-align:justify;">यानी पूरी केंद्र सरकार दिल्ली में विराजमान है। अब खास बात यह है कि बरसाती पानी निकासी का प्रबंध सिर्फ उन्हीं इलाकों में सही तरीके से किया गया है जहां या तो नेताओं के बंगले हैं या फिर सरकारी अधिकारियों के सरकारी निवास है। जिसे हम दिल्ली का पॉश एरिया का सकते हैं। यदि दिल्ली के इस पॉश एरिया को छोड़ दिया जाए तो बाहरी दिल्ली का हाल बेहाल है। बारिश के दिनों में जलभराव की स्थिति इतनी ज्यादा हो जाती है कि सीवरेज सिस्टम पूरी तरह से ब्लॉक हो जाता है। इतना ही नहीं कहने को तो सड़क के दोनों किनारो पर बरसाती पानी निकासी के लिए बड़े-बड़े अंडरग्राउंड नाले भी बनाए गए हैं। लेकिन इन नालों को वर्षों से खोल करके भी नहीं देखा गया है। यानी यह नाले गंदगी से पूरी तरह से बंद है। दिल्ली में वर्तमान में आम आदमी पार्टी की सरकार है व दिल्ली में ही केंद्र सरकार भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे अधिकार ना दिल्ली सरकार को है और ना ही केंद्र सरकार के पास सुरक्षित हैं। इन्हीं दो चक्की के दो पाटों के बीच दिल्ली की जनता पीस रही है। दिल्ली की जनता आखिर जाए तो जाए कहां? यह स्थिति किसी के भी समझ दूर की बात है। पूंजीपति घराने के लोग तो सेक्टर में निवास करते हैं। लेकिन गरीब और मध्यम स्तर के लोग दिल्ली के गांव में रहते हैं। असल मायने में जमीनी स्तर पर यदि दिल्ली की एक-एक गली का मुआयना किया जाए तो देखा जा सकता है की बारिश के दिनों में यहां से गाड़ियों से तो दूर की बात कोई भी इंसान पैदल भी नहीं गुजर सकता। यही हाल कोचिंग सेंटर्स और विभिन्न प्रकार के शिक्षण संस्थाओं का है। पहली बात तो कोई भी कोचिंग सेंटर या शिक्षण संस्थान बेसमेंट में चलना ही नहीं चाहिए। बेसमेंट की एनओसी आखिर दे ही क्यों जाती है? क्योंकि बेसमेंट किसी भी तरीके से आपातकाल में सुरक्षित नहीं माना जाता। दिल्ली जैसा इलाका जिस देश का दिल कहा जाता है। Coaching Center</p>
<p style="text-align:justify;">बेसमेंट दिल्ली के दिल में सबसे बड़ा छेद है। पर यह छेद एक जगह पर नहीं है, यह हर गली मोहल्ले या पॉश से पॉश इलाके में भी बने हुए हैं। बात करते हैं करोल बाग इलाके में स्थित ओल्ड राजेंद्र नगर के उस कोचिंग सेंटर्स की। जिसकी बेसमेंट में पानी भरने से यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन की परीक्षा की तैयारी करने के लिए आए हुए बच्चों की सुरक्षा के बारे में देश के कोने-कोने से ओल्ड राजेंद्र नगर वी मुखर्जी नगर में लाखों की संख्या में बच्चे अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए आते हैं। लेकिन यहां किसी भी कोचिंग सेंटर्स में सुरक्षा के लिहाज से प्रबंध नहीं है। यदि ऐसे ही प्रबंध होते तो ओल्ड राजेंद्र नगर के कोचिंग सेंटर की बेसमेंट में बारिश के पानी में डूब कर बच्चे दम नहीं तोड़ते। जब भी कोई बेसमेंट बनाई जाती है तो उसे उसमें एक बोर करके पानी निकासी का प्रबंध भी किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक मेन दरवाजे के साथ-साथ एग्जिट दरवाजे का प्रबंध भी किया जाता है। लेकिन इस कोचिंग सेंटर्स में यह बात सामने आ चुकी है कि ना तो यहां पानी निकासी का प्रबंध था और ना ही यहां एग्जिट डोर, तो आखिर कब तक बच्चों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ चलता रहेगा। जिन विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन की तैयारी करवाने के लिए आईएएस व आईपीएस के सपने देखे थे,आज उनके बच्चे इन कोचिंग सेंटर्स में दम तोड़ रहे हैं। यह तो बात है बेसमेंट के पानी में डूब कर कर मारने वाले बच्चों की। अब कोचिंग सेंटर ऐसे भी है, जिनमें बच्चे यूपीएससी सहित नीट या दूसरे किसी भी कोशिश की कोचिंग के लिए भी आते हैं। ऐसी कोचिंग दिल्ली के साथ-साथ राजस्थान के कोटा में भी प्रदान की जाती है। कोटा की घटनाएं पहले ही देश भर के सामने आ चुकी है कि कोटा के कोचिंग सेंटर्स में पढ़ने वाले बच्चे पानी भरने से नहीं बल्कि सुविधाओं के होते हुए भी आत्महत्या कर रहे हैं। Coaching Center</p>
<p style="text-align:justify;">जब ऐसी बातें जनसंचार के माध्यम से लोगों या सरकार के सामने आती है तब एक बार जांच बैठा कर इस मामले को शांत कर दिया जाता है। उसके बाद फिर से शुरू हो जाता है बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का खेल। इस विषय पर सत्ता का सुख भोग रहे नेताओं को व एनओसी देने वाले विभाग के अधिकारियों को अपने जमीर पर हाथ रखकर सोचना चाहिए कि इन कोचिंग सेंटर्स में कोचिंग लेने वाले बच्चे उनके अपने भी हो सकते हैं। कोई भी कोचिंग या शिक्षण संस्थान हो सबसे पहले वहां सुरक्षा के प्रबंध देखे जाने चाहिए। नहीं तो हर बार ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। घटना के बाद आंदोलन होगा और फिर मामला शांति की पेटी में बंद हो जाएगा। दिल्ली की घटना के बाद यह राजनीति करने का वक्त नहीं है। यह ऐसा वक्त है कि इन कोचिंग सेंटर्स या दिल्ली की स्थिति को पूरी तरह से देखा जाए कि देश की राजधानी दिल्ली आमजन के जीवन के लिए कितनी सुरक्षित है और सुरक्षित नहीं है तो उसे सुरक्षित कैसे बनाया जा सकता है। इस मुद्दे पर जनता से विचार करने की जरूरत है। Coaching Center                                                                                                                                <strong> डॉ. संदीप सिंहमार, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Imd Alert: उमस भरी गर्मी से छूटे पसीने, जानिए कब होगी बारिश, आईएमडी ने दिया अपडेट" href="http://10.0.0.122:1245/the-humid-heat-has-made-you-sweat-know-when-it-will-rain-imd-gives-an-update/">Imd Alert: उमस भरी गर्मी से छूटे पसीने, जानिए कब होगी बारिश, आईएमडी ने दिया अपडेट</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/hundreds-of-coaching-centers-are-running-in-the-countrys-capital-delhi/article-60424</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/hundreds-of-coaching-centers-are-running-in-the-countrys-capital-delhi/article-60424</guid>
                <pubDate>Sun, 28 Jul 2024 15:09:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-07/exam-2.jpg"                         length="51630"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Commercialization of Education: परीक्षा तैयारी के नाम पर कोचिंग सेंटरों का हो रहा व्यवसायीकरण</title>
                                    <description><![CDATA[Commercialization of Education: केंद्रीय उपभोक्ता फोरम ने आईएएस परीक्षा की तैयारी कराने वाले दिल्ली के कई कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किया है और इन सेंटरों पर परीक्षा के नाम पर व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगा है। दरअसल, कोचिंग को कभी अतिरिक्त मदद के रूप में देखा जाता था। जो छात्र किसी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/coaching-centers-are-being-commercialized-in-the-name-of-exam-preparation/article-54148"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/education-commercialization.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Commercialization of Education: केंद्रीय उपभोक्ता फोरम ने आईएएस परीक्षा की तैयारी कराने वाले दिल्ली के कई कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किया है और इन सेंटरों पर परीक्षा के नाम पर व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगा है। दरअसल, कोचिंग को कभी अतिरिक्त मदद के रूप में देखा जाता था। जो छात्र किसी कारण से परीक्षा की तैयारी में पिछड़ जाते थे, वे कोचिंग लेकर अपना नुकसान पूरा करते थे, लेकिन जैसे-जैसे शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढ़ती गई, परीक्षा तैयारी के नाम पर कोचिंग सेंटरों को व्यावसायिक रंग दे दिया गया। Coaching Centers</p>
<p style="text-align:justify;">एक समय था जब केवल अनुभवी या सेवानिवृत्त शिक्षकों ही कोचिंग या ट्यूशन देते थे। अब कोचिंग सेंटरों के मालिक वे लोग हैं जिनके पास पैसा है और वे केवल व्यवसाय के लिए कोचिंग सेंटर चला रहे हैं और अध्यापकों को कोचिंग देने के लिए सैलरी पर रखते हैं। जब कोई चीज व्यवसाय या उद्योग का रूप ले लेती है लाभ ही एकमात्र उद्देश्य रह जाता है। इन परिस्थितियों में मिशन खत्म हो जाता है, बस कमीशन ही रह जाता है। आज के दौर में कोचिंग के हालात यह है कि कोचिंग सेंटरों के प्रचार-प्रसार की होड़ इस कद्र बढ़ गई है कि जैसे कंपनियां किसी उत्पाद को बेचने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विज्ञापन के तरीके भी ऐसे हो गए हैं कि किसी कोचिंग सेंटर में दाखिला लेना बड़ी सफलता मानी जाती है। कोचिंग सेंटरों की भारी भरकम फीस ने समाज में असमानता की भावना पैदा कर दी है। विज्ञापन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इस चलन का सबसे बुरा प्रभाव विद्यार्थियों पर मानसिकता पर पड़ रहा है। कोचिंग सेंटरों में शिक्षा के ज्यादा दबाव के कारण छात्र आत्महत्या भी कर चुके हैं। कोटा शहर इसका उदाहरण है जहां एक माह में करीब दो दर्जन छात्रों ने आत्महत्या कर ली।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में कोचिंग सेंटर शिक्षा और रोजगार के बीच संबंध को बढ़ावा देकर शिक्षा को धुंधला कर रहे हैं। शिक्षा का संबंध रोजगार से तो है लेकिन यह व्यवसाय नहीं। शिक्षा का उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास करना है। शिक्षा मनुष्य को मानवता का पाठ पढ़ाती है। यदि कोई आईएएस या आईपीएस नहीं बन सका तो उसका जीवन लक्ष्यहीन नहीं हो जाता। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को भी कोचिंग सेंटरों के जाल के प्रति सतर्क रहना होगा। Coaching Centers</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Rajasthan Election 2023: ”महिलाओं को 500 रुपए में सिलेंडर व हर साल 10 हजार मिलेंगे”" href="http://10.0.0.122:1245/rajasthan-chief-minister-ashok-gehlot-promised/">Rajasthan Election 2023: ”महिलाओं को 500 रुपए में सिलेंडर व हर साल 10 हजार मिलेंगे”</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/coaching-centers-are-being-commercialized-in-the-name-of-exam-preparation/article-54148</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/coaching-centers-are-being-commercialized-in-the-name-of-exam-preparation/article-54148</guid>
                <pubDate>Thu, 26 Oct 2023 10:20:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-10/education-commercialization.jpg"                         length="31604"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आठवीं कक्षा तक के स्टूडेंट्स को कोचिंग सेंटर पर एडमिशन पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर (सच कहूं न्यूज)। मुख्य सचिव उषा शर्मा (Chief Secretary Usha Sharma) की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में प्रदेश में संचालित कोचिंग संस्थानों (Coaching Centers) में अध्यनरत विद्यार्थियों में तनाव कम करने एवं उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर करने हेतु दिशा निर्देश 2023 की अनुपालना में एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/ban-on-admission-to-coaching-centers-for-students-up-to-class-8th/article-52997"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/usha-sharma.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूं न्यूज)।</strong> मुख्य सचिव उषा शर्मा (Chief Secretary Usha Sharma) की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में प्रदेश में संचालित कोचिंग संस्थानों (Coaching Centers) में अध्यनरत विद्यार्थियों में तनाव कम करने एवं उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर करने हेतु दिशा निर्देश 2023 की अनुपालना में एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चों में पढ़ाई के अवांछित तनाव को कम करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि वह हताश और निराश होकर गलत कदम ना उठा लें। Jaipur News</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चे अपने उम्र के बहुत ही नाजुक दौर में अपने माता-पिता से दूर कोचिंग में पढ़ने आ जाते हैं जहां उन्हें गला काट प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। कोचिंग संस्थानों द्वारा भी अपनी सफलता दर बढ़ाने के लिए बच्चों को इस अंधी दौड़ में धकेल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चे हमारी धरोहर हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि पढ़ाई के बोझ की वजह से किसी बच्चे की जान ना जाए। Jaipur News</p>
<p style="text-align:justify;">श्रीमती शर्मा ने कहा कि पढ़ने वाले बच्चों में इस तरह की किसी भी अप्रिय घटना को रोकने की जिम्मेदारी कोचिंग संचालकों की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा गंभीरता से इस दिशा में प्रयास किया जा रहे हैं। उन्होंने हर 10 दिन में इस संबंध में बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टर और जिला एसपी को भी जिले के कोचिंग संस्थानों में राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में प्रमुख शासन सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा भवानी सिंह देथा ने बताया कि विषय की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए समिति द्वारा संबंधित स्टेकहोल्डर जैसे कोचिंग संचालकों, अभिभावकों, मनोवैज्ञानिक सलाहकारों,शिक्षाविदों आदि से विस्तृत विचार विमर्श कर सुझाव प्राप्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्राप्त सुझावों का गहन अध्ययन एवं विश्लेषण करने के बाद उच्च स्तरीय समिति द्वारा रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत कर दी गई है। Jaipur News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि प्रदेश में कोचिंग संस्थानों के विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या के प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा कोचिंग संचालकों के साथ संवाद भी किया गया था। मुख्यमंत्री के निर्देशों की अनुपालना में समस्या के समाधान हेतु कार्य योजना बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है। Jaipur News</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में कोचिंग संस्थाओं हेतु दिशा निर्देश जारी किए गए जिसमें मुख्यता से इस बात पर बल दिया गया की नौंवी क्लास से पहले कोचिंग संस्थानों में प्रवेश न दिया जाए। समिति द्वारा विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव व मानसिक दबाव के कारणों की चर्चा भी की गई तथा इससे निजात पाने के उपायों पर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें असेसमेंट रिजल्ट सार्वजनिक नहीं करने, डेढ़ दिन का साप्ताहिक अवकाश देने, बच्चों और शिक्षकों का अनुपात सही करने, इजी एग्जिट एवं हेल्पलाइन सेवाएं एवं निगरानी व्यवस्था को 24 घंटे सुचारू रूप से चलाये जाने की व्यवस्था के निर्देश दिए गए। साथ ही रिफंड पॉलिसी को अपनाने पर भी जोर दिया गया। काउंसलिंग एवं ट्रेनिंग संबंधित दिशा निर्देश भी जारी किए गए। Jaipur News</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में शासन सचिव स्कूल शिक्षा नवीन जैन, आयुक्त कॉलेज शिक्षा सुनील शर्मा और राजस्थान स्वास्थ्य मिशन के निदेशक जितेंद्र कुमार सोनी ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा सुझाव दिए। बैठक में कोचिंग संचालकों द्वारा सभी दिशा निर्देशों की पूरी तरह पालना सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया गया। Jaipur News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="…यहां जिंदा इंसान की तरह संभालकर रखते हैं शव, नहीं करते अंतिम संस्कार!" href="http://10.0.0.122:1245/here-the-dead-body-is-preserved-like-a-living-person-but-no-last-rites-are-performed/">…यहां जिंदा इंसान की तरह संभालकर रखते हैं शव, नहीं करते अंतिम संस्कार!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/ban-on-admission-to-coaching-centers-for-students-up-to-class-8th/article-52997</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/ban-on-admission-to-coaching-centers-for-students-up-to-class-8th/article-52997</guid>
                <pubDate>Thu, 28 Sep 2023 18:54:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-09/usha-sharma.jpg"                         length="56516"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अस्तित्व की लड़ाई में दो-चार होते कोचिंग सेंटर</title>
                                    <description><![CDATA[बीते जून विश्व बैंक का अनुमान था कि 1979 के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे बुरे दौर से गुजरने वाली है और यह आर्थिक विकास दर को ध्यान में रख कर आंका और नापा गया था परन्तु स्थिति देख कर तो ये लगता है कि भारत की अर्थव्यवस्था इतनी गर्त में कभी नहीं रही होगी। यहां […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/coaching-centers-are-struggling-in-the-fight-for-survival/article-17871"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/coaching-centers-are-struggling-in-the-fight-for-survival.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:center;"><strong>बीते जून विश्व बैंक का अनुमान था कि 1979 के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे बुरे दौर से गुजरने वाली है और यह आर्थिक विकास दर को ध्यान में रख कर आंका और नापा गया था परन्तु स्थिति देख कर तो ये लगता है कि भारत की अर्थव्यवस्था इतनी गर्त में कभी नहीं रही होगी। यहां बड़ी बातों का कोई मतलब नहीं है बल्कि बड़ी समस्याओं से जूझ रहे छोटी संस्थाओं और अर्थव्यवस्था के लिए संघर्ष कर रहे लोगों की बात करना तार्किक होगा।</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;">इन्हीं में एक देश में फैले कोचिंग सेन्टर हैं हालांकि इसमें कई पूंजी की क्रान्ति ला चुकी हैं और कई किराये के लिए भी संघर्ष करते हैं। इनसे जुड़े कार्मिक अर्थात शिक्षक, सहायक व तकनीकी आदि देखे जा सकते हैं। मतलब साफ है कि एक सेंटर यदि बर्बाद होता है तो कई घर तबाह होते हैं। इनमें मसलन सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कराने वाली संस्थाएं, इंजीनियरिंग, मेडिकल से जुड़ी संस्थाएं व सीडीएस, एनडीए, एसएससी और बैंकिंग समेत अन्य संस्थाएं देखी जा सकती हैं। मसला यह है कि विगत 5 माह से सब कुछ तहस-नहस हो गया है। पढ़ाई बदल गयी है, पढ़ाने वाले भी बदल गये हैं मगर अस्तित्व के संघर्ष से कोचिंग सेन्टरों को मुक्ति नहीं मिल रही है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">सरकार की तरफ बरबस नजर चली जाती है कि क्या पता कुछ सावधानी और गाइडलाइन के साथ गर्त में जा चुकी अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर सेन्टर खोलने का कोई फरमान आ जाये मगर यहां बात उम्मीदों के सिवा आगे नहीं बढ़ पा रही है। हालांकि कोरोना ने ऐसा सरकार को भी सोचने नहीं दिया है। फिर भी सवाल यह है कि जो बिगड़ रहा है वह कैसे बनेगा और साथ ही क्या केवल कोचिंग सेंटर बर्बाद हो रहे हैं, एक चिंतक की दृष्टि से देखें तो भारत और राज्य सरकार को मिलने वाली 18 फीसद जीएसटी की प्राप्ति भी तो इसके चलते नहीं हो रही है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">जिस तरह परीक्षाओं के आयोजन को लेकर संघ लोक सेवा आयोग व लोक सेवा आयोग तारीख घोषित कर रहा है, आगामी कलेंडर जारी कर रहा है उसे देखते हुए यह भी लगता है कि कोरोना की दहशत इन पर नहीं है। हालांकि इसके लिए दुनिया नहीं रोकी जा सकती मगर पढ़ाई के संकट से जूझ रहे प्रतियोगी क्या मुक्त होकर उन्मुक्त भाव से परीक्षा दे रहे हैं। जबकि जिन कोचिंगों के सहारे प्रतियोगी अपनी पढ़ाई की कठिनाई को समाधान में बदलता था वे बंद पड़ी हैं। हालांकि ऑनलाइन में परिवर्तन भी तेजी से हो रहा है मगर इसमें भी सभी की पहुंच अभी बनी नहीं है। उसका प्रमुख कारण डूबी अर्थव्यवस्था और इंटरनेट की कनेक्टिविटी भी है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">कोरोना की वजह से छात्रों के अपने-अपने घर लौट जाने के कारण स्थानीय लोगों की आमदनी अचानक गिर गयी है। कोचिंग क्लासेज अमूमन जून तक अपना नया सत्र शुरू करते हैं और इसी समय स्थानीय मकान मालिक से लेकर चाय-समोसे या भोजन देने वाले भोजनालय भी बड़े रोजगार की ओर चले जाते हैं। बात यहां प्रत्यक्ष रूप से कोचिंग सेंटर के बंद होने की हो रही है परन्तु इसके सहारे रहने वाले कई रोजगार भी खत्म हो गये हैं। केपीएमजी की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2016 में ऑनलाइन कोचिंग करने वालों की तादाद महज 16 लाख थी 2021 तक यह एक करोड़ हो जायेगी। वैसे देखा जाय तो कई मिथक भी टूटे हैं। पहले ऑनलाइन शिक्षा या कोचिंग उतनी असरदार नहीं मानी जाती थी लेकिन कोरोना ने ऑनलाइन कोचिंग को बड़ा अवसर दिया है। जिसके चलते अब प्रतियोगी भी डिजिटल कोचिंग को एक विकल्प बना रहे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">अच्छी बात यह है कि छोटे शहरों के प्रतियोगियों को कम खर्चे पर यह सुविधा मिल सकती है। दिल्ली समेत बड़े शहरों की कोचिंग सेंटरों में लाखों फीस जमा करने के बाद जो शिक्षा मिलती थी अब वह कुछ हजार रुपए में ही उनके घर पर पहुंच रही है। इंजीनियरिंग और मेडिकल की कोचिंग हब कोटा इन दिनों वीरान है। जिस तरह कोरोना अभी पैर पसार रहा है उसे देखते हुए लगता है कि इंतजार अभी लम्बा है। सरकार क्या सोचती है, कैसे करेगी यह तो वो जाने पर छोटे और मझोले किस्म के बहुतायत में कोचिंग सेंटर या तो इन दिनों बंद हो चुके है या बंद होने के कगार पर है। जिस तरह कोचिंग का कारोबार तेजी से बढ़ा है उसे देखते हुए बड़ी अर्थव्यवस्था की दृश्टि से इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वैश्विक महामारी कोरोना का प्रभाव हर सेक्टर पर पड़ा है। एजूकेशन इंडस्ट्री भी इससे अछूति नहीं है। लॉकडाउन के साथ आये शब्द सोशल डिस्टेंसिंग ने भविष्य में आने वाले बदलाव के संकेत दिये हैं। बीते 5 माह में शिक्षा जगत के बड़े समूह कोचिंग इंडस्ट्री पर इस महामारी का जबरदस्त प्रभाव पड़ा है। इसी के कारण इसने खुद को काफी बदल लिया है और यह बदलाव ऑनलाइन क्लासेज है। ऑनलाइन क्लास एक सुविधा तो है मगर कईयों के लिए यह एक नया संघर्ष है। मैं स्वयं एक संस्था का संस्थापक हूं जिसकी स्थापना 2002 में हुई थी। मैं यह मानता हूं कि 2020 में आई कोरोना महामारी मेरे संघर्ष को 2002 के बराबर में लाकर खड़ा कर दिया है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">ऑनलाइन क्लास में मेरी संस्था भी जा चुकी है जिसके चलते यह रोज आभास होता है कि पहले एक प्राध्यापक के तौर पर कक्षा में जाते ही क्लास शुरू हो जाती थी और अब पहले मशीन, वीडियो, ऑडियो आदि दुरूस्त होता है तब अपनी बारी आती है। तकनीकी रूप से ऑनलाइन शिक्षा भारत में अभी भी काफी महंगी है मुख्यत: उपकरण की दृष्टि से। कोरोना काल में इस क्षेत्र के कारोबारी भी कोचिंग सेंटर की मजबूरी का लाभ उठा रहे हैं और उन्हें इससे जुड़ा सब सामान महंगा दे रहे हैं। अब कोचिंग सेंटर एक स्टूडियो में सिमटता जा रहा है। यदि यह लम्बे समय तक चला तो एक कयास यह है कि कहीं प्रतियोगी और पढ़ाने वाले ऑनलाइन के आदती न हो जायें।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">कोरोना की वजह से देश में 75 हजार करोड़ के कोचिंग कारोबार को नुकसान पहुंचा है। देश में बहुत कम लोग होंगे जिन्होंने दिल्ली, इलाहाबाद और कोटा का नाम नहीं सुना होगा। हालांकि लखनऊ, देहरादून, हैदराबाद, बंगलुरू, जयपुर सिविल सेवा सहित अन्यों की कोचिंग के लिए उभरा क्षेत्र है। इन छोटे जगहों में भी लाखों-करोड़ों का खूब कारोबार होता है मगर यहां भी सन्नाटा उतना ही पसरा है। कोचिंग संस्थानों की सांस उखड़ रही है और यह कब खुलेगा इसके आसार बनते नहीं दिख रहे हैं। देश में कई स्थानों पर किराया माफी को लेकर कोचिंग संस्थानों ने एसोसिएशन बना लिया है इसके भी कई स्वरूप हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">कोरोना जहां एक ओर जीवन पर भारी है वहीं बंद पड़ी कोचिंगें जेब पर भारी हैं। ई-एजूकेशन को इन दिनों बढ़ावा मिला है। छोेटे बच्चों के स्कूल से लेकर बडे-बड़े विश्वविद्यालय इसी माध्यम का सहारा ले रहे हैं। मगर क्या शिक्षा की यह विधा कक्षा वाली शिक्षा का विकल्प बन पायेगी यह प्रश्न पहले भी जिन्दा था अभी भी है। कारोबार में आसमान छू रहे कोचिंग सेंटर जहां बच्चों का भविष्य संवार रहे थे वहीं अपनी और देश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान कर रहे थे अब सब कुछ सिमटता दिख रहा है। स्वरूप इतना बिगड़ गया है कि कोचिंग सेंटर अस्तित्व की लड़ाई में दो-चार हो रहे हैं।</h6>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/coaching-centers-are-struggling-in-the-fight-for-survival/article-17871</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/coaching-centers-are-struggling-in-the-fight-for-survival/article-17871</guid>
                <pubDate>Wed, 26 Aug 2020 21:45:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-08/coaching-centers-are-struggling-in-the-fight-for-survival.gif"                         length="137237"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉलरों की चमक ने की आईलैटस कोचिंग सेंटरों की चांदी</title>
                                    <description><![CDATA[आईलैट्स सेंटरों ने जमाया मार्केट पर कब्जा संगरूर(गुरप्रीत सिंह)। विदेशों में पढ़ाई की मोटी फीसों के बावजूद पंजाब के लड़के-लड़कियों में डॉलरों की चमक दमक के सपने दिनों दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। आज हर रोज सैंकड़ों की संख्या में पंजाब के विभिन्न स्थानों से युवा अमेरिका, कनाडा, आॅस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों में जाने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/silver-of-ilets-coaching-centers-by-dollar-shine/article-4759"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/flight.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">आईलैट्स सेंटरों ने जमाया मार्केट पर कब्जा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर(गुरप्रीत सिंह)।</strong> विदेशों में पढ़ाई की मोटी फीसों के बावजूद पंजाब के लड़के-लड़कियों में डॉलरों की चमक दमक के सपने दिनों दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। आज हर रोज सैंकड़ों की संख्या में पंजाब के विभिन्न स्थानों से युवा अमेरिका, कनाडा, आॅस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों में जाने वाले जहाजों में चढ़ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">युवाओं की विदेश जाने की इतनी बड़ी लालसा को देख कर आईलैट्स करवाने वाले विभागों व वीजा लगा कर बाहर भेजने वाले एजेंटों ने पंजाब के कारोबार पर अपनी पकड़ कायम कर ली है, जिस का सीधा प्रभाव अन्य निजी कॉलेजों व सरकारी कालेजों पर जबरदस्त हो रहा है। हासिल की जानकारी मुताबिक आज पंजाब में से हर रोज तकरीबन 100 से 150 लड़के-लड़कियां वीजा लगवा कर बाहर के देशों को जहाज चढ़ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संख्या सिर्फ सही तरीके से वीजा हासिल करने वालों की है जब कि बड़ी संख्या में युवा धोखेबाज एजेंटों के हत्थे चढ़ कर गलत तरीके से भी विदेशों की धरती पर पैर रखने के लिए तत्पर हो रहे हैं। ऐसे गलत तरीकों से फंसे हुए युवाओं की बड़ी संख्या में वीडियो सोशल मीडिया पर आम देखी जा सकती है जो फंसे हुए मदद की गुहार लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मैंबर पार्लियामेंट भगवंत मान द्वारा ऐसे फंसे हुए कई युवाओं को साऊदी अरब व अन्य देशों में से वापिस भारत लाया गया है। आज हालात यह हो गए हैं कि अधिकतर गांवों के युवा जो मध्यम वर्गीय परिवारों से सबंधित हैं, वह भी किसी न किसी तरीके से बाहर जाने का सपना संजोए बैठे हैं वह किसी भी हालत में बाहर जाने के लिए अपने माता-पिता को मजबूर कर रहे हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">विदेशों में भी काम के पड़े लाले</h1>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका में रह रहे युवा हरजीत सिंह ने बताया कि अमेरिका, कनाडा जैसे देशों में भी भारतियों की संख्या बढ़ने के कारण कामकाज कम ही मिल रहा है, जिस कारण बड़े स्तर पर लड़के-लड़कियां को पढ़ाई करने उपरांत मायूस होकर वापिस भारत लौटना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पंजाबी विद्यार्थी अधिक संख्या में लोन वगैरह लेकर या जमीन बेच कर इन देशों में काम करने के लिए पढ़ाई का आसरा लेते हैं परन्तु जब उनको काम नहीं मिलता तो वह मजबूरन गलत कामों की तरफ धकेले जा रहे हैं इस का खुलासा प्रसिद्ध कारोबारी विनय हैरी ने अपने एक इंटरव्यू में भी किया था कि कनाडा में आज विद्यार्थियों को कोई काम नहीं मिल रहा।</p>
<h1 style="text-align:center;">18 हजार रुपये प्रति माह फीस ले रही आईलैट्स कोचिंग सैंटर</h1>
<p style="text-align:justify;">लड़के-लड़कियों के विदेशों में जाने के रुझान को देखते विभिन्न शहरों व कस्बों में हजारों की संख्या में आईलैट्स सैंटर खुल चुके हैं जो अपनी अपने स्तर पर विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा बोलना, लिखना, सुनना और पढ़ने संबंधी शिक्षा दे रहे हैं पंजाब के बहुत से विद्यार्थियों से 9500 रूपये से ले कर 10,000 रुपये प्रति माह फीस ली जा रही है। चण्डीगढ़ और मोहाली में यह फीस 18,000 तक पहुंच गई है, जिसमें 8 घंटे की कक्षा लगाई जाती है। यह कोर्स तकरीबन 45 दिनों का होता है</p>
<h1 style="text-align:center;">कनाडा में रिहायश के लिए देना पड़ता पांच लाख सालाना</h1>
<p style="text-align:justify;">कनाडा में जाने के चाह्वानों की संख्या सब से अधिक है बेशक कनाडा जाने का आधार पढ़ाई बनाया जाता है परंतु वास्तव में वहां काम कर गुजर बसर करना ही होता है। मौजूदा समय में कनाडा के किसी कॉलेज में दाखिला लेने के लिए कम से -कम एक साल की 8 लाख रुपये फीस भरनी पड़ती है, इसके अलावा 5 लाख रुपए विद्यार्थी को वहां रहने (अकंमोडेशन) का देना पड़ता है। इसके अलावा तैयारी के लिए भी कम से कम डेढ़ लाख रुपये का खर्चा हो जाता है।</p>
<h1 style="text-align:center;">अन्य कॉलेजों के दाखिले बुरी तरह हुए प्रभावित</h1>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के इस तरफ रुझान के साथ पंजाब के विभिन्न निजी और सरकारी कॉलेजों में दाखिलों की संख्या बुरी तरह के साथ कम रही है इस संबंधी बातचीत करते संगरूर के प्रसिद्ध कॉलेज नेशनल नर्सिंग इंस्टीट्यूट के डॉयरैक्टर शिव आर्य ने बताया कि पिछले माह दौरान नर्सिंग में दाखिले में 25 प्रतिशत कमी आई है। उन्होेंने कहा कि आज -कल विद्यार्थियों का लक्ष्य 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई करने उपरांत आईलैट्स करने के बाद बाहर जाने का ही हो चुका है, जिस कारण बच्चे नर्सिंग, इंजीनियर आदि कोर्सों से मुंह फेर रहे हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">बेरोजगारी भी है बड़ा कारण</h1>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी बातचीत करते समाज सेवी मोहन शर्मा ने बातचीत दौरान कहा कि आज पंजाब का हर तीसरा युवा बाहर के देश में जाने के बारे में सोच रहा है। इसका यह भी कारण है कि पंजाब में बड़े स्तर पर बेरोजगारी है आज लाखों युवा डिग्रियां हासिल कर सड़कों की खाक छान रहे हैं, उनको नौकरियां नहीं मिल रही, जिस कारण उनका मन बाहर के देशों में जाकर कमाई कर अच्छे माहौल-सुविधा में रहने का बना हुआ है। युवा नेता रुपिन्दर धीमान किक्की ने कहा कि यदि सरकारें पढ़े-लिखे युवाओं को अपने देश में ही रोजगार दें तो वह अपना देश छोड़ कर पराए देश जा कर क्यों रहें?</p>
<h1 style="text-align:center;">आईलैट्स सैंटर</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>पटियाला 75</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा 35 </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>संगरूर 25</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बरनाला 20</strong></li>
</ul>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/silver-of-ilets-coaching-centers-by-dollar-shine/article-4759</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/silver-of-ilets-coaching-centers-by-dollar-shine/article-4759</guid>
                <pubDate>Mon, 09 Jul 2018 05:51:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-07/flight.jpg"                         length="50088"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        