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                <title>Homosexuality - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Same Sex Marriage Update: समलैंगिकता एक विकार, सर्वोच्च न्यायालय ने किया साफ!</title>
                                    <description><![CDATA[Same Sex Marriage Update: माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कर दिया कि न्यायालय में कानून नहीं बनाया जा सकता। विशेष विवाह अधिनियम में बदलाव का अधिकार केवल संसद के पास है। केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह की मान्यता का विरोध करते हुए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/homosexuality-is-a-disorder-supreme-court-made-it-clear/article-53836"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/supreem-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Same Sex Marriage Update: माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कर दिया कि न्यायालय में कानून नहीं बनाया जा सकता। विशेष विवाह अधिनियम में बदलाव का अधिकार केवल संसद के पास है। केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह की मान्यता का विरोध करते हुए कहा कि भारतीय समाज में इस प्रकार के संबंध को स्वीकार नहीं किया जा सकता। विवाह एक सामाजिक मान्यता है, जिसका हल अदालत में नहीं किया जा सकता। Homosexuality</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग व संत समिति ने भी सर्वोच्च न्यायालय में हस्तक्षेप याचिका दायर कर कहा कि समलैंगिक विवाह की अवधारणा पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव है। भारत की महान संस्कृति में किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं। भारत की संस्कृति में परिवार की व्यवस्था, जो समाज के सुख व खुशहाली का आधार है, जिसे किसी भी तरह से विकृत नहीं किया जा सकता। बेशक दुनिया के 33 देश ऐसे हैं, जिनमें समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता है लेकिन 71 ऐसे भी देश हैं जिनमें समलैंगिकता एक अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके तहत कठोर दंड का प्रावधान है। धर्मों के अनुसार भी समलैंगिकता एक बुराई है, विकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">समलैंगिकता एक विकृत मानसिकता का परिणाम है, जिसका वैज्ञानिक व मनोवैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाना चाहिए। पुरूष का पुरूष के साथ, स्त्री का स्त्री के साथ प्रेम प्यार से रहना कोई बुराई नहीं बल्कि यह तो सभ्य समाज का अंग है लेकिन पुरूष का पुरूष के साथ या स्त्री का स्त्री के साथ वैवाहिक संबंध या लैंगिक संबंध न तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सही है और न ही धार्मिंक व प्राकृतिक दृष्टि से। Homosexuality</p>
<p style="text-align:justify;">प्रकृति ने (भगवान ने) सृष्टि की रचना के साथ इसके विकास के लिए नर और मादा बनाए। नर और मादा केवल मनुष्य जाति में ही नहीं बल्कि हर जीव-जन्तु में बनाए और इस तरह वंश वृद्धि की एक व्यवस्था कायम की। प्रकृति द्वारा स्थापित व्यवस्था में दखल देने पर अवश्य गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। जिस प्रकार किसी समाज की व्यवस्था में दखल देना, किसी राष्ट्र की व्यवस्था में दखल देना उस समाज व राष्ट्र को स्वीकार्य नहीं होता तो प्रकृति की व्यवस्था में दखल देना प्रकृति को स्वीकार्य कैसे हो सकता है। प्रकृति की व्यवस्था में दखल का मतलब है प्रकृति का कोप भाजन बनना। अत: समलैंगिकता को एक मनोविकार की तरह लेना चाहिए और इलाज करवाना चाहिए। Homosexuality</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="MSP News: मोदी सरकार ने किसानों को दी खुशखबरी, गेहूं व मसूर की फसल पर हो गई चांदी, इतना बढ़ा एमएसपी" href="http://10.0.0.122:1245/modi-government-gave-good-news-to-farmers/">MSP News: मोदी सरकार ने किसानों को दी खुशखबरी, गेहूं व मसूर की फसल पर हो गई चांदी, इतना बढ़ा एमएसपी</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Oct 2023 17:58:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बुद्धिजीवी लोग भी मान रहे गुरु जी के ये वचन, आज से कई वर्ष पहले ही कर दिए थे वचन</title>
                                    <description><![CDATA[समलैंगिक संबंध राक्षसों की प्रथा, हमारे शास्त्रों में है अपराध: साजी नारायणन आरएसएस के बड़े नेता हैं साजी नारायणन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी जताई आपत्ति नई दिल्ली (एजेंसी)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) (Homosexuality) के एक वरिष्ठ नेता ने समलैंगिक संबंधों को राक्षसों से जोड़ते हुए इसे अप्राकृतिक बताया है। उनका कहना है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/homosexual-practice-of-demons-crime-in-our-scriptures-saji-narayanan/article-45816"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/homosexuality-1.jpg" alt=""></a><br /><h3>समलैंगिक संबंध राक्षसों की प्रथा, हमारे शास्त्रों में है अपराध: साजी नारायणन</h3>
<h4>आरएसएस के बड़े नेता हैं साजी नारायणन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी जताई आपत्ति</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)</strong>। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) (Homosexuality) के एक वरिष्ठ नेता ने समलैंगिक संबंधों को राक्षसों से जोड़ते हुए इसे अप्राकृतिक बताया है। उनका कहना है कि समलैंगिक संबंध भारतीय शास्त्रों में अपराध हैं और यह राक्षसों की प्रथा है। इतना ही नहीं समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाले ऐतिहासिक 2018 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों की भी आरएसएस नेता ने आलोचना की है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने समलैंगिकता को अप्राकृतिक बताया है। आरएसएस (Homosexuality)  से संबंधित मैगजीन द आॅर्गेनाइजर में छपे एक लेख में संघ की श्रमिक शाखा, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के पूर्व अध्यक्ष सीके साजी नारायणन ने दावा किया कि भारत के धर्मशास्त्र इस तरह के यौन व्यवहार को अपराध मानते हैं। नारायणन ने अपने आर्टिकल में कहा कि रामायण में समलैंगिकता का उल्लेख एक प्रथा के रूप में किया गया है, जिसे हनुमान जी ने लंका में देखा था। उन्होंने कहा कि धर्मशास्त्र और अर्थशास्त्र में समलैंगिकता को दंडित किया गया है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/supreme-court-lgbtq/">समलैंगिक विवाह का केंद्र सरकार ने किया विरोध, पूज्य गुरु जी की मुहिम का असर</a></p>
<h3>समलैंगिक पर पहले ही कर दिए थे वचन</h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि ये जो समलैंगिकता की बीमारी चली है जिसे लड़को में गे और लड़कियों में लेस्बियन कहा जाता है। बड़ी ही भयानक बीमारी है। इसके रिजल्ट आने वाले टाइम में भयानक जरूर होंगे। क्योंकि कुदरत के उलट जब-जब भी इन्सान चला है तब-तब ही उसे लेने के देने पड़े ही पड़े हैं। पशुओं से रिलेशन बनाया तो एड्स बीमारी ने आके घेर लिया, काला पीलिया आके चिपट गया। अब यें लेस्बियन या गे जो है जैसे-जैसे ये बीमारी बढ़ती जा रही है यानि आदमी का आदमी से रिश्ता, औरत का औरत से रिश्ता क्योंकि कइयों को अनपढ़ बेचारे पता नहीं होता ये गे या लेस्बियन क्या है। तो ये जो रिश्ता बढ़ता जाए जो कामुकता बढ़ती जा रही है ये भी ऐसी बीमारियां सामने लाएंगी जो बताते हुए शर्म आएगी पर छुपाई नहीं जा पाएगी। एड्स को काई छुपा थोड़ा नहीं पाता है। कितनी भयानक बीमारी है। ऐसी बीमारियों को बुला रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिखने में भक्त नजर आते हैं। हाव भाव सारे भक्तों वाले है और कर्म सारे राक्षसों वाले हैं। कहां से घर परिवार में बाधा हो, कहां से खुद को भगवान के नूरी स्वरूप तो दूर साधारण स्वरूप के दर्शन कहां से हों। तो ये बीमारी भी हमारे समाज को खोखला कर रही है। कामवासना की आंधी है। इन्सान इतना गिर गया है पशु भी तब विषय विकार में पड़ते हैं जब उन्होंने बच्चा, औलाद लेना होता है। कुदरत के नियम को पूरा करना होता है। आदमी पशु से गिर गया है। इसको कोई लेना देना नहीं इन चीजों से। तो भाई ये एक बीमारी महाबीमारी बनती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कहीं भी देख लो, किधर भी देख लो इस बीमारी से जब हम निगाह घुमाते हैं कोई-कोई बचा नजर आता है। वो भी जिसके अच्छे संस्कार हैं। सतगुरु, अल्लाह मालिक से बेहद प्यार है। वरना तो सतगुरु के वचनों की धज्जियां उड़ाते हुए ऐसे कर्म करते नजर आते हैं और पल-पल उनको भोगना होगा। अगर वो ना चेते, अगर वो ना जागे, तो फिर ऐसे चिल्लाएंगे कि दुनिया जागेगी उनको पता चलेगा कि ये बीमारी के घर हैं।</p>
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                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Apr 2023 17:27:17 +0530</pubDate>
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                <title>समलैंगिकता अपराध है या नहीं, आज से होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट इस मामले में रिव्यू पिटिशन पहले खारिज कर चुका है नई दिल्ली(एजेंसी)।सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ समलैंगिक मुद्दे सहित चार अहम मामलों पर आज से सुनवाई शुरू करेगी मुख्‍य न्‍यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने मामले को संवैधानिक बेंच को रेफर किया था। समलैंगिकता अपराध की श्रेणी में रखा जाए या […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/whether-homosexuality-is-crime-or-not-hearing-from-today/article-4774"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/high-court-1.jpg" alt=""></a><br /><h2>सुप्रीम कोर्ट इस मामले में रिव्यू पिटिशन पहले खारिज कर चुका है</h2>
<p><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)</strong>।सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ समलैंगिक मुद्दे सहित चार अहम मामलों पर आज से सुनवाई शुरू करेगी मुख्‍य न्‍यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने मामले को संवैधानिक बेंच को रेफर किया था। समलैंगिकता अपराध की श्रेणी में रखा जाए या नहीं, यह बेंच तय करेगी। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में रिव्यू पिटिशन पहले खारिज कर चुका है, जिसके बाद सुधारात्मक याचिका (क्यूरेटिव पिटीशन) दाखिल किया गया था जो पहले से बड़े बेंच को भेजा गया था।</p>
<h2>सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ सुनवाई करेगी</h2>
<p>इस याचिका में धारा-377 के कानूनी प्रावधान को चुनौती दी गई है। धारा-377 के तहत कानूनी प्रावधान है कि दो बालिग भी अगर सहमति से अप्राकृतिक संबंध बनाते हैं तो वह अपराध माना जाएगा और इस मामले में 10 साल तक कैद या फिर उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। याचिका में कहा गया है कि 377 के तहत जो प्रावधान है वह संविधान के खिलाफ हैं।</p>
<p>बता दें कि शीर्ष अदालत ने 11 दिसंबर 2013 को समलैंगिकता को अपराध घोषित कर दिया था। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं और जब उन्हें भी खारिज कर दिया गया तो प्रभावित पक्षों ने क्यूरेटिव पिटीशन दायर की ताकि मूल फैसले का फिर से परीक्षण हो।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Jul 2018 04:28:12 +0530</pubDate>
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