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                <title>Positive - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>सकारात्मक सोच से ही बनती है ऊँचाइयों की राह</title>
                                    <description><![CDATA[Positive: यदि जीवन में बुलंदियों को छूना है, तो सोच को सकारात्मक बनाना अनिवार्य है। क्योंकि बिना सकारात्मक सोच के कोई भी व्यक्ति न तो अच्छा चरित्र बना सकता है और न ही एक सफल जीवन जी सकता है। सकारात्मक विचार ही अच्छे चरित्र की नींव होते हैं। जो व्यक्ति सदा ऊँचे, स्वच्छ और सकारात्मक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/positive-thinking-is-the-only-way-to-reach-heights/article-72431"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/positive.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Positive: यदि जीवन में बुलंदियों को छूना है, तो सोच को सकारात्मक बनाना अनिवार्य है। क्योंकि बिना सकारात्मक सोच के कोई भी व्यक्ति न तो अच्छा चरित्र बना सकता है और न ही एक सफल जीवन जी सकता है। सकारात्मक विचार ही अच्छे चरित्र की नींव होते हैं। जो व्यक्ति सदा ऊँचे, स्वच्छ और सकारात्मक विचार रखता है, वह मानसिक रूप से मजबूत होता है और जीवन के उद्देश्य की ओर स्पष्टता से बढ़ता है। इसके विपरीत, नकारात्मक सोच व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। यह सोच उसे जीवन की सच्ची राह से भटका देती है और एक समय आता है जब वह अपने लक्ष्य से भी दूर हो जाता है। नकारात्मक विचारों से घिरा मन बेचैन रहता है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है और आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब आपकी सोच सकारात्मक होती है, तो आपकी ऊर्जा, आपका स्वास्थ्य और आपका व्यवहार—सबमें निखार आता है। आप खिलते हुए फूल की तरह लगते हैं और आपका चेहरा प्रसन्नता से दमकने लगता है। समाज में आपकी बातों की अहमियत बढ़ती है, लोग आपके पास रहना पसंद करते हैं, आपके विचारों का सम्मान करते हैं। सकारात्मक सोच न केवल आपको व्यक्तिगत रूप से सशक्त बनाती है, बल्कि आपके सामाजिक संबंधों को भी मजबूत करती है। परंतु, यदि आप नकारात्मक सोच वाले लोगों की संगति में रहते हैं, तो धीरे-धीरे आप भी उसी दिशा में बहने लगते हैं। ऐसे लोग हर बात में कमी निकालते हैं, दूसरों का उत्साह तोड़ते हैं और निराशा फैलाते हैं। उनसे दूरी बनाए रखना ही श्रेयस्कर है। सदैव उन लोगों के साथ रहें जिनकी सोच आशावादी और प्रेरणादायक हो।</p>
<p style="text-align:justify;">कभी भी अपने मन में स्वयं या किसी अन्य के लिए बुरे विचार न आने दें। ऐसा करने से आपका मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है और स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ता है। चिड़चिड़ापन, तनाव और अवसाद घर कर लेते हैं। इसका प्रभाव आपके परिवार और कार्यक्षमता पर भी पड़ता है। इसीलिए जीवन में सदैव ऐसा सोचें जो आपके मन को शांति और ऊर्जा दे। सकारात्मक सोच का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह न केवल आपकी उम्र को सुखद बनाती है, बल्कि आपको समाज में आदर और विशेष पहचान भी दिलाती है। जीवन का यही फलसफा है—खुश रहो और दूसरों को भी प्रसन्न रखो। जैसे फूल अपनी सुगंध से वातावरण को महकाते हैं, वैसे ही सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति अपने व्यवहार से समाज को सुंदर बना देते हैं। यदि आप सच्चे अर्थों में एक सफल, सशक्त और प्रेरक व्यक्तित्व बनना चाहते हैं, तो सोच को निर्मल और सकारात्मक बनाइए। यही सुंदर जीवन जीने की सर्वोत्तम राह है।<br />
–लेक्चरार अजीत खन्ना</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Jun 2025 15:46:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बैंकों का विलय करने की सकारात्मक पहल</title>
                                    <description><![CDATA[इंफा पिछली सरकार द्वारा सरकारी बैंकों का घाटा कम करने के लिए उनका विलय करने का निर्णय सही दिशा में उठाया गया कदम है। भरतीय स्टेट बैंक के पांच अनुषंगी बैंकों के विलय से इस बैंक की संपत्ति 37 ट्रिलियन डालर की हो गयी है और उससे देश का सबसे बडा व्यावसायिक बैंक मजबूत हुआ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/positive-initiative-to-merge-banks/article-4792"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/bank.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इंफा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पिछली सरकार द्वारा सरकारी बैंकों का घाटा कम करने के लिए उनका विलय करने का निर्णय सही दिशा में उठाया गया कदम है। भरतीय स्टेट बैंक के पांच अनुषंगी बैंकों के विलय से इस बैंक की संपत्ति 37 ट्रिलियन डालर की हो गयी है और उससे देश का सबसे बडा व्यावसायिक बैंक मजबूत हुआ है। बैंकों के विलय से बैंकों की स्थिति मजबूत होगी, उनका घाटा कम होगा और फिजूलखर्ची पर रोक लगेगी और एक सकारात्मक वातावरण बनेगा। इस बात की अटकलें लगायी जा रही हैं कि इलाहाबाद बैंक का पंजाब नैशनल बैंक के साथ विलय किया जा रहा है और सरकार बैंक आॅफ बडौदा, ओरिएंटल बैंक आॅफ कामर्स, सेन्ट्रल बैंक आॅफ इंडिया और आईडीबीआई बैंक के विलय के बारे में भी विचार कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
इलाहाबाद बैंक और पंजाब नेशनल बैंक का विलय इस आधार पर उचित बताया जा रहा है कि इलाहाबाद बैंक पूर्वी क्षेत्र में और पंजाब नेशनल बैंक उत्तरी क्षेत्र में अच्छा कारोबार कर रहे हैं और यदि उक्त चार सरकारी बैंकों का भी विलय किया गया तो उनकी संयुक्त परिसंपत्ति 16.18 ट्रिलियन रूपए होगी और वे वित्तीय दृष्टि से मजबूत बनेंगे। सरकार द्वारा बैंकों के विलय का प्रस्ताव न केवल स्टेट बैंक आफ इंडिया के विलय से प्रभावित है अपितु इससे इन सरकारी बैंकों का अशोध्य ऋण भी कम होगा और उनकी संचालनात्मक कार्य कुशलता बढेगी किंतु कुछ विशेषज्ञों की राय इससे भिन्न है।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व अध्यक्ष केसी चक्रवर्ती का कहना है कि अकुशल बैंकों का कुशल बैंकों के साथ विलय से आवश्यक नहंी है कि उनमें कार्य कुशलता आए और उत्पादकता बढे। बैंकों का निजीकरण कुछ सीमा तक किया जा सकता है। जिसके अंतर्गत प्रबंधन पर नियंत्रण सरकार और निजी साझीदार दोनों का रहे किंतु बैंकों की बहुमत हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को देने के बारे में संदेह व्यक्त किया गया कि वे प्राथमिक क्षेत्र ऋण देने के मानदंडों का पालन न करें। इस बात से इंकार नहंी किया जा सकता है कि सरकारी क्षेत्र के बैंक संकट का सामना कर रहे हैं, उनका पुनरूत्थान किए जाने की आवश्यकता है और उनहें आर्थिक दृष्टि से सक्षम बनाया जाना चाहिए। अधिकतर अर्थशास्त्री और बैंक विशेषज्ञों का मानना है कि विलय इस दिशा में पहला संभावित कदम है। इसके साथ ही बैंकों के प्रबंधन को भी पेशेवर बनाया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में भारतीय रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए। सरकारी बैंकों को पेशेवर दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इस दिशा में पहला कदम बैंकों के बोर्डों में मंत्रालय के प्रतिनिधि या अधिकारियों की नियुक्ति के बजाय बैंक उद्योग का अनुभव रखने वाले पेशेवर नियुक्त किए जाने चाहिए। व्यापक दृष्टिकोण से उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। बैंकों को अधिक स्तंत्रता देने के मुद्दे पर विशेषज्ञों द्वारा अनेक बार चर्चा की गयी है और राजनेताओं द्वारा हस्तक्षेप के बिना बैंकों को स्वतंत्रता देना एक स्वागत योग्य कदम है। किंतु यह संभव नहंी है। सरकार को कठोर कदम उठाने होंगे साथ ही बैंकों के शीर्ष स्तर पर कडी निगरानी रखनी होगा ताकि बैंक प्रबंधन बेईमान व्यवसाइयों के जाल में न फंसे।<br />
वस्तुत: बडे ऋणों को मंजूरी देने का निर्णय शीर्ष स्तर पर किया जाना चाहिए और यदि इस ऋण का भुगतान नहंी किया जाता है तो उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाना चाहिए। वर्तमान में यह देखा गया है कि छोटे व्यवसाई अपने ऋण का भुगतान कर देते हैं किंतु बडे व्यवसाई कई बार ऐसा नहंी करते हैं। बडे व्यवसाई कई बार ऋण ली गयी राशि को अन्य प्रयोजनों के लिए खर्च करते हैं जिससे बैंकों को नुकसान होता है। बडे चूककतार्ओं की सूची को सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है। समय आ गया है कि ऐसे चूककतार्ओं की सूची सार्वजनिक की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष मार्च में सकल गैर-निष्पादनकारी आस्तियों का अनुपात बढकर 11.6 प्रतिशत हो गया है। किंतु आशा की जाती है कि दिवालियापन कोड और अशोध्य ऋणों के समाधान के लिए त्वरित मानदंड निर्धारित करने जैसी पहलों से अल्पकाल में संकट के बावजूद बैंकों में वित्तीय स्थिरता आएगी। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गर्वनर विरल आचार्य के अनुसार वर्तमान में सरकार ने संकट से जूझ रहे सरकारी बैंकों के लिए शुरू किए गए पुर्न पंूजीकरण कार्यक्रम से इस पूरे क्षेत्र में मजबूती आनी चाहिए। दूसरी ओर समाज के एक वर्ग को बैंकों का पैसा हजम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। पेशेवरता अपनायी जानी चाहिए और यह स्पष्ट संदेश दिया जना चाहिए कि बैंकों का ऋण वापस किया जाएगा चाहे इसके लिए कंपनी की संपत्ति या उसके निवेशकों की संपत्ति को बेचना ही क्यों न पडे।</p>
<p style="text-align:justify;">
यदि सरकार चाहे तो एक दो साल में बैंकों की स्थिति में बदलाव आ सकता है। वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में आशा व्यक्त की गयी है कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वर्ष 2020 तक त्वरित सुधारात्मक ढ़ांचा अपनाए जाने से स्थिति में सुधार आएगा। वर्तमान में ऋण देने के कार्य में आए ठहराव को दूर किया जा सकता है किंतु इसके लिए आवश्यक है कि कुछ अशोध्य ऋणों की वसूली हो जिसके लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही बैंकों द्वारा यह स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि सरकारी पैसे को हजम नहंी किया जा सकता है और समय पर बैंकों का पैसा लौटाया नहंी गया तो ऐसे चूककतार्ओं को कडा दंड दिया जाएगा। कुल मिलाकर बैंकिंग प्रणाली में विश्वास बहाल किए जाने की आवश्यकता है।</p>
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                <pubDate>Thu, 12 Jul 2018 02:14:28 +0530</pubDate>
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