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                <title>alive - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>थाईलैंड में गुफा के भीतर जिंदा मिले 13 लापता लोग</title>
                                    <description><![CDATA[23 जून को अभ्यास के बाद से लापता हो गये थे ( people Found Alive) चियांग राई  थाईलैंड के चियांग राई प्रांत में नौ दिन  ( people Found Alive) पहले लापता हुए  12 लड़के और उनके सहायक फुटबॉल कोच एक गुफा के अंदर जीवित मिले हैं। प्रांत के गवर्नर नारोंगसाक ओसोत्तानाकोर्न ने बताया कि 11 से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/people-found-alive/article-4645"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/people-found-alive.jpg" alt=""></a><br /><h1>23 जून को अभ्यास के बाद से लापता हो गये थे</h1>
<p><strong>( people Found Alive)</strong></p>
<p><strong>चियांग राई  </strong></p>
<p style="text-align:justify;">थाईलैंड के चियांग राई प्रांत में नौ दिन  <strong>( people Found Alive)</strong> पहले लापता हुए  12 लड़के और उनके सहायक फुटबॉल कोच एक गुफा के अंदर जीवित मिले हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रांत के गवर्नर नारोंगसाक ओसोत्तानाकोर्न ने बताया कि 11 से 16 वर्ष की आयु के बीच के 12 लड़के और 25 वर्षीय एक सहायक फुटबॉल कोच 23 जून को अभ्यास के बाद से लापता हो गये थे। वे फुटबॉल के अभ्यास के बाद थाम लुआंग गुफा परिसर में घूमने गये अौर उसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल सका था।</p>
<h1>भारी बारिश से राहत कार्य में काफी बाधाएं आ रही थी</h1>
<h3><strong>( people Found Alive)</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उनकी खोज के लिए अंतरराष्ट्रीय बचाव अभियान चलाया गया हालांकि खराब मौसम और भारी बारिश के कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी बाधाएं आ रही थी। बचाव दल गुफा परिसर में कीचड़ और गहरे पानी में उनकी तलाश कर रहे थे। नौ दिन के अथक प्रयास के बाद थाई नौसेना के जवानों ने सभी 13 लोगों को जीवित खोज निकाला।</p>
<h1>गुफा से बाहर नहीं निकाला जा सका</h1>
<h3><strong>( people Found Alive)</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">ओसोत्तानाकोर्न ने बताया कि बचावकर्मी गुफा के भीतर एक ऊंचे टीले जिसका नाम ‘पट्टाया बीच’ रखा गया है, पर ध्यान केंद्रित किये हुए थे। गुफा में बाढ़ का पानी घुसने के बाद संभवत: इसी टीले ने लड़कों को शरण दी। बचावकर्मियों ने पट्टाया बीच से 400 मीटर की दूरी पर सभी लापता लोगों को सुरक्षित स्थिति में देखा और उनके परिजनों काे इसका जानकारी दी। चिकित्सकों के एक दल ने गुफा के अंदर जाकर उनके स्वास्थ्य की जांच की है। गुफा में पानी भरे होने के कारण उन्हें अभी गुफा से बाहर नहीं निकाला जा सका है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jul 2018 11:48:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>डॉ लोहिया ने जलाई थी गोवा मुक्ति संग्राम की अलख</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर लुभाता भारत का खूबसूरत शहर गोवा 18 जून को क्रांति दिवस के रूप में मनाता है। इस दिन समाजवादी नेता डॉ. क्टर राम मनोहर लोहिया ने पुर्तगालियों के खिलाफ आंदोलन का शंखनाद किया था। यह दिन गोवा की आजादी की लडाई के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/dr-lohia-had-burnt-alive-for-the-liberation-struggle-of-goa/article-4262"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/dr-lohia.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर लुभाता भारत का खूबसूरत शहर गोवा 18 जून को क्रांति दिवस के रूप में मनाता है। इस दिन समाजवादी नेता डॉ. क्टर राम मनोहर लोहिया ने पुर्तगालियों के खिलाफ आंदोलन का शंखनाद किया था। यह दिन गोवा की आजादी की लडाई के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुर्तगालियों के 550 वर्ष के शासन से गोवा को आजादी दिलाने वाले डॉक्टर लोहिया ने 18 जून को गोवा के लोगों को एकजुट होने और पुर्तगाली शासन के खिलाफ लड़ने का संदेश दिया था। भारत को 1947 में आजादी मिल गई थी, लेकिन इसके 14 साल बाद भी गोवा पर पुर्तगाली अपना शासन जमाये बैठे थे। 19 दिसम्बर, 1961 को भारतीय सेना ने आॅपरेशन विजय अभियान शुरू कर गोवा, दमन और दीव को पुर्तगालियों के शासन से मुक्त कराया था</p>
<p style="text-align:justify;">18 जून 1946 को डॉ. राम मनोहर लोहिया ने गोवा जाकर स्थानीय निवासियों को पुर्तगालियों के खिलाफ आंदोलन करने के लिए प्रेरित किया था। लंबे अरसे तक चले आंदोलन के बाद 19 दिसम्बर 1961 को गोवा को पुर्तगाली आधिपत्य से मुक्त कराकर भारत में शामिल कर लिया गया था। 1946 में आज ही के दिन डॉ.क्टर राममनोहर लोहिया ने पुर्तगालियों के खिलाफ आंदोलन का नारा दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">तब अंग्रेजी साम्राज्य डूब रहा था, कई बड़े राष्ट्रीय नेताओं का मानना था कि अंग्रेजों के जाते ही पुर्तगाली भी गोवा से कूच कर जाएंगे। पर स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता डॉ. राममनोहर लोहिया सहमत नहीं थे कि बिना आंदोलन छेड़े ऐसा संभव हो पाएगा। हालांकि गोवा को पुर्तगालियों के कब्जे से मुक्त करवाने में कई साल और लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">गोवा की आजादी का शंखनाद समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया ने किया था। आज भी वहाँ के लोकगीतों में डॉ. लोहिया का वर्णन पौराणिक नायकों की तरह होता है। गोवा की आजादी में लोहिया और उनके समाजवादी साथियों का बड़ा योगदान था।</p>
<p style="text-align:justify;">लोहिया ने पहली बार गोवा के आजादी के मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाया और लोगों का ध्यान आकर्षित करने में सफल हुए। अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए मगर गोवा पर पुर्तगाल का कब्जा बना रहा। लोहिया गोवा मुक्ति आंदोलन के महान सेनानी थे। उन्होंने 1942 से ही गोवा मुक्ति आंदोलन का बीड़ा उठाया।</p>
<p style="text-align:justify;">15 जून 1946 को पंजिम में डॉ. लोहिया की सभा हुई जिसमें तय हुआ 18 जून से सविनय अवज्ञा प्रारम्भ होगा। पुलिस ने टैक्सी वालों को मना कर दिया था। डॉ. लोहिया मड़गाँव सभा स्थल घोड़ागाड़ी से पहुँचे। घनघोर बारिश, 20 हजार की जनता और मशीनगन लिए हुए पुर्तगाली फौज। गगनचुम्बी नारों के बीच डॉ. लोहिया के ऊपर प्रशासक मिराण्डा ने पिस्तौल तान दिया, लेकिन लोहिया के आत्मबल और आभामण्डल के आगे उसे झुकना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">पांच सौ वर्ष के इतिहास में गोवा में पहली बार आजादी का सिंहनाद हुआ। लोहिया गिरफ्तार कर लिए गए। पूरा गोवा युद्ध-स्थल बन गया। पंजिम थाने पर जनता ने धावा बोल कर लोहिया को छुड़ाने का प्रयास किया। एक छोटी लड़की को जयहिन्द कहने पर पुलिस ने काफी पीटा। 21 जून को गवर्नर का आदेश हुआ कि आम-सभा व भाषण के लिए सरकारी आदेश लेने की आवश्यकता नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">लोहिया चौक पर झण्डा फहराया गया। गोवा को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा पुर्तगाल को तीन माह की नोटिस देकर लोहिया लौट आए। 26 जून 1946 के अंक में महात्मा गांधी ने लेख लिख कर लोहिया की गिरफ्तारी का पुरजोर विरोध किया।</p>
<p style="text-align:justify;">तीन महीने पश्चात डॉ. लोहिया दोबारा गोवा के मड़गाँव के लिए चले। उन्हें कोलेम में ही गिरफ्तार कर लिया गया। 29 सितम्बर से 8 अक्टूबर तक उन्हें आग्वाद के किले में कैदी बनाकर रखा गया, बाद में अनमाड़ के पास लाकर छोड़ा गया। 2 अक्टूबर को अपने जन्मदिन के दिन गांधी जी ने लार्ड बेवेल से लोहिया की रिहाई के लिए बात की। लोहिया पर गोवा-प्रवेश के लिए मनाही हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">गोवा मुक्ति आंदोलन के इतिहास में जिन लोगों ने अपना खून पसीना बहाया और जेल की यंत्रणा सही इस दिन उनका समरण देशवासियों के लिए जरुरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">गोवा आंदोलन में समाजवादी नेता डॉ. लोहिया और उनके साथियों की भूमिका अविसमरणीय है जिन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए गोवा को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोहिया के लम्बे जनजागरण के बाद गोवा को आजादी मिली थी।</p>
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                <pubDate>Mon, 18 Jun 2018 08:43:32 +0530</pubDate>
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                <title>बेरवाला के पास मिला 6 फीट, 5 क्विंटल वजनी जिंदा मिसाईल बम</title>
                                    <description><![CDATA[रिहायशी इलाके से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर मिलने से सनसनी Morni SachKahoon News:  मोरनी-पंचकूला मार्ग पर बेरवाला गांव के पास शनिवार को 6 फीट, 5 क्विंटल वजनी जिंदा मिसाईल बम मिलने से सनसनी फैल गई। मिसाईल बंब की खबर से इलाके में दहशत का महौल है। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/found-5-quintals-weight-missile-warhead-alive/article-474"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/02-10.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>रिहायशी इलाके से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर मिलने से सनसनी </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Morni SachKahoon News:</strong>  मोरनी-पंचकूला मार्ग पर बेरवाला गांव के पास शनिवार को 6 फीट, 5 क्विंटल वजनी जिंदा मिसाईल बम मिलने से सनसनी फैल गई। मिसाईल बंब की खबर से इलाके में दहशत का महौल है। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंच कर आर्मी को सूचित किया गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस, आइटीबीपी, एयरफोर्स एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। बड़ी सावधानीपूर्वक बम शैल को कब्जे में ले लिया। जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह 11 बजे के आसपास बेरवाला गांव के लोगों ने चंडीमंदिर पुलिस को सूचना दी की गांव से मोरनी की तरफ जाते हुए माता के मंदिर के बास बाई तरफ जंगल में एक लोहे की मिसाईल बंब पड़ा है। जिसके बाद सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने आर्मी को सूचित किया, उन्होंने मौके पर पहुंच कर आर्मी और बम स्कवैड को घटना स्थल पर बुलाया गया है।<br />
पास ही है स्कूल<br />
जहां मिसाइल मिली है वहां से मात्र एक किलोमीटर दूर होली चाईलड स्कूल है जहां सैकड़ों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इससे पहले आधा किलोमीटर पर बेरवाला गांव है जहां सैकड़ों लोग रहते हंै। वहीं इस मार्ग पर रैड वुड होटल आदि अन्य व्यवसायिक भवन है। जहां सैकड़ों लोगों का दिन रात आना जाना रहता है। मोरनी पंचकूला के बेरवाला रिहायशी इलाके से करीब 500 मीटर की दुरी पर जंगलों में गिरा बंब मिला है।</p>
<p><strong>बम पर लिखा है शाइन बिल्डर</strong><br />
मिसाईल बंब पर अग्रेजी में शाईन बिल्डर का नाम अंकित है। यह मिसाईल छह फुट के करीब लंबी है। जिसका वजन पांच किवटंल के आसपास बताया जा रहा है। जंगल में मिली को देखकर पुलिस और आर्मी हैरान है कि आखिर यह मिसाइल जंगल में कौन फैक गया। यह जिंदा मिसाईल बंब जंगल में कहां से और कैसे आया इसकी जांच में अर्मी,पुलिस,एयर फॉर्स व मौके पर जुटी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>राजनीतिक प्रेरित बताया मामला</strong><br />
उधर सरपंच मिंटू शर्मा का कहना है कि राजनितिक दबाव के चलते फैक्ट्ररी संचालको ने उन पर दबाव बनाने के लिए मामला दर्ज करवाया हैै। जबकि उसने फैक्ट्ररीयो से निकलने वाले कैमिकल युक्त पानी को जमीन में छोडे जाने की जांच करवाने के लिए करीब तीन माह पहलें जिला उपायुक्त को शिकायत दी थी। उसी शिकायत के आधार पर हुई कार्यवाही से बचने के लिए फैक्ट्ररी संचालक अपने बचाव में उनके ऊपर झूठा मामला दर्ज करवाकर दबाव बनाना चहाते है। और उन्होने न्याय दिलाने के लिए विधायक रविन्द्र मच्छरौली के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Dec 2016 02:26:17 +0530</pubDate>
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