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                <title>मिट्टी दरकने से 20 फीट गहरे गड्ढे में फंसे तीन युवक, रेस्क्यू कर निकाला बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[सीहोर (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के नसरुल्लागंज तहसील में बिना संसाधन के एक टेलीकॉम कंपनी द्वारा फाइबर केवल डालने के दौरान बीस फिट गहरे गड्डे की मिट्टी दरकने से तीन युवक उसमें फंस गए, जिन्हें रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार गहरे गड्ढे में मजदूरों के फंसने पर मौके […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/three-youths-trapped-in-a-20-feet-deep-pit-rescued-and-pulled-out/article-38201"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/rescue.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सीहोर (एजेंसी)।</strong> मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के नसरुल्लागंज तहसील में बिना संसाधन के एक टेलीकॉम कंपनी द्वारा फाइबर केवल डालने के दौरान बीस फिट गहरे गड्डे की मिट्टी दरकने से तीन युवक उसमें फंस गए, जिन्हें रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार गहरे गड्ढे में मजदूरों के फंसने पर मौके पर मौजूद लोगों ने इसकी सूचना प्रशासन को दी और बिना देर किए मजदूरो को बचाने जागरूक लोग गड्ढे में उतर गए।</p>
<p style="text-align:justify;">लगभग आधा घंटे तक मशक्कत के बाद दो मजदूरोंं को और पांच घंटे की मशक्कत के बाद तीसरे मजदूर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रेस्क्यू आपरेशन के दौरान बुरी तरह फंसे मजदूर के ऊपरी हिस्से को प्रशासन ने दो जेसीबी की मदद से जैसे-तैसे मिट्टी से बाहर कर लिया था, लेकिन मजदूर उसमें दब रहा था। रात्रि साढ़े आठ के लगभग मजदूर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कैसे हुआ हादसा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">कल दोपहर नगर की स्वप्न सिटी के नजदीक इंदौर मुख्य मार्ग पर टेलीकॉम कंपनी के द्वारा फाइबर केवल लाइन डालने का काम शुरू किया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो जमीन में सीधे अडंर ग्राउंड केवल डालने के लिए ब्लोईंग ड्रील मशीन का उपयोग किया जा रहा था। इस काम में पांच मजदूर लगे हुए थे, जिनमें से एक मजदूर जेसीबी पर, एक ब्लोईंग मशीन, एक मजदूर गड्ढे के अंदर और दो मजदूर बाहर केवल अंदर करने का काम कर रहे थे। जेसीबी की मदद से लगभग 15 से 20 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था, जिसमें मजदूर संतोष निवासी शुजालपुर गड्ढे के अंदर उतरकर केवल खींच रहा था। इसी बीच साइड की मिट्टी दरककर मजदूर के ऊपर गिरने लगी। यह देख 2 अन्य मजदूर अपने साथी को बचाने के लिए गड्ढे में उतर गए, लेकिन मिट्टी का दरकना बंद नहीं हुआ। जिससे तीनों ही मजदूर मिट्टी में दब गए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जिदंगी बचाने के लिए उसे आॅक्सीजन की सप्लाई शुरू की</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">वहां पर मौजूद 2 अन्य कर्मचारियों ने यह बात मार्ग से निकल रहे आमजन और अन्य दुकानदारों को बताई तो लोगों ने बिना देर किए प्रशासन को सूचित कर मजदूरो को निकालने का प्रयास शुरू कर दिया। जब तक प्रशासन मौके पर पहुंचता तब तक जागरूक नागरिकों द्वारा दो मजदूरों को सुरक्षित निकाला जा चुका था, लेकिन गड्ढे में काम कर रहा तीसरा मजदूर मिट्टी में पूरी तरह से दब चुका था, जिसे निकालने का प्रयास जारी था। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर प्रशासन मौके पर पहुंचा और मजदूर संतोष बलाई निवासी शुजालपुर को बचाने के लिए रेस्क्यू शुरू कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">गड्डे की गहराई अधिक होने व पुरानी पेयजल लाईन का पानी सीधे गड्डे में जाने के कारण मजदूर उसमें धंसता ही चला गया। प्रशासन ने सबसे पहले मजदूर की जिदंगी बचाने के लिए उसे आॅक्सीजन की सप्लाई शुरू की। इसके बाद मजदूर को निकाला गया।</p>
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                <pubDate>Sun, 25 Sep 2022 11:47:01 +0530</pubDate>
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                <title>बोरवेल में फंसे राहुल के रेस्क्यू में लगा सरकारी अमला</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर/जांजगीर (एजेंसी)। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चाम्पा जिले के पिहरीद में बोरेवेल के लिए किए गए गड्ढे में गिरे 11 वर्षीय राहुल साहू का रेस्क्यू आपरेशन अब भी जारी है।इस कार्य में 500 से अधिक सरकारी अमला लगा हुआ हैं और अब इसमें सेना की भी मदद ली जा रही हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/government-staff-engaged-in-rescue-of-rahul-trapped-in-borewell/article-34443"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/borwell.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रायपुर/जांजगीर (एजेंसी)।</strong> छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चाम्पा जिले के पिहरीद में बोरेवेल के लिए किए गए गड्ढे में गिरे 11 वर्षीय राहुल साहू का रेस्क्यू आपरेशन अब भी जारी है।इस कार्य में 500 से अधिक सरकारी अमला लगा हुआ हैं और अब इसमें सेना की भी मदद ली जा रही हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर मासूम राहुल के रेस्क्यू के लिए बीते 43 घंटे से भी अधिक समय से घटनास्थल पर जिला कलेक्टर जितेन्द्र शुक्ला एवं पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल समेत विभिन्न विभागों के 500 से अधिक अधिकारियों कर्मचारियों की टीम मौजूद है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही रेस्क्यू आॅपरेशन में अत्याधुनिक मशीनों और वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राहुल परसो खेलते समय घर के पास ही खुदे बोरवेल के गड्ढे में जा गिरा था। इसकी जानकारी परिजनों को लगभग तीन घंटे बाद मिली, फिर प्रशासन को इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर जितेन्द्र शुक्ला, पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल पूरे दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए। बताया जा रहा है 80 फीट गहराई वाले बोरवेल में राहुल 60 फीट पर फंसा हुआ है। जिला प्रशासन ने बचाव कार्य के लिए त्वरित कार्यवाही शुरू कर दी। राहुल को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए बोरवेल के पास ही सुरंग खोदी जा रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सेना की जवान कर रहे प्रयास</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">राहुल के रेस्क्यू के लिए एसडीआरएफ व एनडीआरएफ के साथ अब सेना की भी मदद ली जा रही है। मासूम राहुल की सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जिला कलेक्टर को आवश्यक निर्देश दिए हैं। वहीं मुख्यमंत्री ने राहुल के परिजनों से भी बात कर उन्हें शासन-प्रशासन की ओर से यथासंभव प्रयास करने आश्वस्त किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">रेस्क्यू आपरेशन के लिए के लिए घटनास्थल पर चार आईएएस, दो आईपीएस, पांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, चार एसडीओपी,पांच तहसीलदार, आठ थाना प्रभारी समेत बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी, होमगार्ड्स मौके पर मौजूद हैं।भारतीय सेना से मेजर गौतम सूरी के साथ चार सदस्यीय टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक कार्यवाही कर रही है।</p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 12 Jun 2022 15:10:51 +0530</pubDate>
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                <title>नहर में फंस 7 श्रमिकों को सुरक्षित निकाला</title>
                                    <description><![CDATA[2 अन्य को बचाने का कार्य जारी कटनी/भोपाल (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र में नहर की खुदायी के दौरान मिट्टी धसकने के कारण फंसे 9 में से 7 श्रमिकों को रात भर चले राहत एवं बचाव कार्य के जरिए सुरक्षित बचा लिया गया और शेष दो को बचाने का कार्य आज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/7-workers-trapped-in-the-canal-were-rescued/article-30763"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/untitled-1-copy.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">2 अन्य को बचाने का कार्य जारी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कटनी/भोपाल (एजेंसी)।</strong> मध्यप्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र में नहर की खुदायी के दौरान मिट्टी धसकने के कारण फंसे 9 में से 7 श्रमिकों को रात भर चले राहत एवं बचाव कार्य के जरिए सुरक्षित बचा लिया गया और शेष दो को बचाने का कार्य आज सुबह भी जारी है। राज्य के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि कुल 07 श्रमिकों को रात भर चले राहत एवं बचाव कार्य में सुरक्षित निकाल लिया गया है। शेष 2 को भी सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार शनिवार देर शाम नर्मदा दार्इं तट नहर योजना से संबंधित सुरंग (टनल) की खुदाई का कार्य मशीन से किया जा रहा था। इसी दौरान जमीन धसकने से काम कर रहे 9 मजदूर दब गए। इसके बाद राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया गया और भोपाल स्थित अत्याधुनिक संसाधनों से सुसज्जित राज्य सिचुएशन रूम (एसएसआर) से गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ राजौरा और अन्य अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए घटनास्थल की निगरानी करते रहे और आवश्यक दिशानिर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बचाव कार्य के लिए एसडीईआरएफ कटनी और जबलपुर टीम औजारों के साथ मौके पर पहुंची और उसने रात भर राहत एवं बचाव कार्य किए। इसके चलते रात्रि में तीन श्रमिकों को और अलसुबह तक कुल सात श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया। अब शेष दो श्रमिक फसे हुए हैं, जिन्हें निकालने का कार्य जारी है। श्रमिकों के नाम मोनीदास कोल, दीपक कोल, नर्मदा कोल, विजय कोल, इंद्रमणि कोल, नंदकुमार यादव, मोतीलाल कोल, गोरेलाल कोल और रवि बताए गए हैं। इनमें से सात श्रमिक सुरक्षित हैं और इन्हें अस्पताल भेजा गया है। उम्मीद है कि शेष दो श्रमिक भी सुरक्षित निकाल लिए जाएंगे। बताया गया है कि बरगी से बाणसागर तक जाने वाली नर्मदा दायीं तट परियोजना के तहत ह्यअंडरग्राउंडह्ण सुरंग निर्माण संबंधी कार्य चल रहा है। इसे हैदराबाद की एक निजी कंपनी द्वारा बनाया जा रहा है।</p>
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]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 13 Feb 2022 11:10:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चमोली गलेशियर आपदा में 15 की मौत, तपोवन की सुरंग में फंसे 30 लोगों का रेस्क्यू जारी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। चमोली जिले के रेनी गांव में ग्लेशियर की चपेट में आने से 15 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 153 लोग अभी भी लापता है। सोमवार सुबह फिर से तपोवन सुरंग के पास रेस्क्यू आॅप्रेशन किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सुरंग में अभी भी 30 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/15-killed-in-chamoli-glacier-disaster-rescue-of-people-trapped/article-21595"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/chamoli-glacier-rescue.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> चमोली जिले के रेनी गांव में ग्लेशियर की चपेट में आने से 15 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 153 लोग अभी भी लापता है। सोमवार सुबह फिर से तपोवन सुरंग के पास रेस्क्यू आॅप्रेशन किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सुरंग में अभी भी 30 लोगों के फंसने की सूचना है। केन्द्र सरकार राज्य सरकार को हर संभव मदद दी जा रही है। गौरतलब है कि ग्लेशियर के टूटने से ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है और बाढ़ के कारण अलकनंदा नदी में जलस्तर कई फुट बढ़ गया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Glorious footage of a labourer being rescued from the sediment inundated area near Tapovan tunnel area by ITBP personnel. Watch full. <a href="https://twitter.com/IndiaToday?ref_src=twsrc%5Etfw">@IndiaToday</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Uttarakhand?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Uttarakhand</a> <a href="https://t.co/eGe1oYEISu">pic.twitter.com/eGe1oYEISu</a></p>
<p>— Shiv Aroor (@ShivAroor) <a href="https://twitter.com/ShivAroor/status/1358388733247070209?ref_src=twsrc%5Etfw">February 7, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<h3 style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार राज्य सरकार के सम्पर्क में</h3>
<p style="text-align:justify;">चमोली से बीते दिन जैसी तस्वीर देखने को मिली है वो 2013 के खौफनाक मंजर को फिर से उजागर कर दिया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस बार तुरंत रिएक्ट किया गया। सेना, वायुसेना, नौ सेना, एनडीआरएफ समेत कई एजेंसियां बचाव कार्यों में जुटी हुई है। प्रधानमंत्री भी सीएम से कई बार बात कर चुके है और हर संभव मदद का भरोसा जताया है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/several-bridges-were-fell-down-away-in-the-glacier-accident/"><strong>यह भी पढ़े – ग्लेशियर हादसे में कई पुल बहे, गांवों का संपर्क कटा</strong></a></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr" xml:lang="hi">टनल में फंसे लोगों के लिए राहत एवं बचाव कार्य जारी। जेसीबी की मदद से टनल के अंदर पहुंच कर रास्ता खोलने का प्रयास किया जा रहा है।<br />अब तक कुल 15 व्यक्तियों को रेस्क्यू किया गया है एवं 14 शव अलग-अलग स्थानों से बरामद किये गये हैं।<a href="https://twitter.com/hashtag/tapovanrescue?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#tapovanrescue</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Chamoli?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Chamoli</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Uttarakhand_Disaster?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Uttarakhand_Disaster</a> <a href="https://t.co/szSaxJfEy7">pic.twitter.com/szSaxJfEy7</a></p>
<p>— Chamoli Police Uttarakhand (@chamolipolice) <a href="https://twitter.com/chamolipolice/status/1358603235502616578?ref_src=twsrc%5Etfw">February 8, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Feb 2021 13:40:09 +0530</pubDate>
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                <title>बचाव कार्यों में भारतीय तकनीक</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/indian-tech-in-rescue-operations/article-4832"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/editorial.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">थाईलैंड की एक गुफा में फंसे बच्चों को तीन दिन पहले सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन इस बचाव कार्य में यह बात कहीं चर्चा में नहीं आई कि इस कार्य में भारतीय तकनीक की भी अहम भूमिका रही। थाईलैंड में भारतीय दूतावास ने थाई प्रशासन को भारत के किर्लोस्कर ब्रदर्स के पास पानी निकालने की पम्पिंग तकनीक के बारे में बताया तब थाई सरकार ने भारत से पम्पिंग सैट मंगवा लिए। किर्लाेस्कर कम्पनी के तकनीक प्रमुख ने स्वयं थाईलैंड पहुंचकर वहां के अधिकारियों की सहायता की।</p>
<p style="text-align:justify;">गुफा से किर्लोस्कर के पम्पिंग सैट ने पानी बाहर खींचा, तब गोताखोर गुफ ा में बच्चों तक पहुंचे, तत्पश्चात एक-एक कर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जहां पर पल-पल मौत का खतरा मंडरा रहा था। उक्त घटनाक्रम भारत सहित कई देशों के लिए एक बड़ा संदेश भी है कि आफत कितनी भी बड़ी या जटिल हो मनुष्य देश, भाषा, जाति, लिंग की दीवारें गिराकर यदि एक हो जाए तब वह जीत हासिल कर लेता है। परंतु यहां एक सवाल भी है कि आफत में तो सब एक दूसरे का साथ देने दौड़ पड़ते हैं लेकिन बहुत बार ऐसा भी होता है कि दूसरों की सहायता करने वाले देश खुद अपने लिए कुछ खास प्रबंध भी नहीं कर पाते क्यों?</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की यदि बात करें तब यहां कई ऐसी आपदाएं भी लोगों ने देखी है कि प्रशासन ही वक्त पर मदद करने नहीं पहुंचा। आपदा में प्रशासन पहुंचता भी है तब आधी अधूरी सामग्री के साथ, जिससे कम आपदा भी अधिक नुकसान कर डालती हैं। भारत में प्रतिदिन बहुमंजिला इमारत गिर जाने, नहर टूट जाने, आग लग जाने, जैसी घटनाएं कहीं न कहीं घट ही जाती हैं, इन सब के लिए एनडीआरएफ की स्थापना की गई है, लेकिन एनडीआरएफ की संख्या भी कम है । महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों कस्बों में भी आपदा से बचाव के मॉक ड्रिल करवाए जाते हैं बावजूद इस सबके भारतीय छोटी सी आफत में भी जान नहीं बचा पाते।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां तक कि आपदा से बचाव की मॉक ड्रिल में भी अपने को चोट पहुंचा बैठते हैं। ताजा घटना तमिलनाडू की है यहां एक कॉलेज में मॉक ड्रिल में बरती गई लापरवाही व ट्रेनर की जबरदस्ती ने 19 वर्षीय एक छात्रा की जान ले ली, क्योंकि टैÑनर ने न तो पूरी ईमारत का ही मुआयना किया व न ही छात्रा की नहीं कूदने की असहमति की परवाह की, जिस कारण जीवन बचाने की शिक्षा ने ही जीवन लील लिया। भारत की बेहिसाब आबादी उस पर बेहिसाब मानवीय भूलों व प्राकृतिक आपदाआें के मद्देनजर देश में आपदा राहत बल के विस्तार व आमजन में आपदा से बचने की शिक्षा दिया जाना बेहद आवश्यक है।</p>
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                <pubDate>Sat, 14 Jul 2018 06:25:00 +0530</pubDate>
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