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                <title>Drama - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अमीरी-गरीबी के फर्क को दिखाता है नाटक गधे की बारात</title>
                                    <description><![CDATA[व्यंगयात्मक भाषा में खूब किए गए प्रहार गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)। विश्वदीपक त्रिखा द्वारा निर्देशित नाटक (Drama) गधे की बारात का यहां मंचन किया गया। हंसी, व्यंगय के बीच नाटक में अमीरी और गरीबी के फर्क को दिखाया, समझाया गया है। हिन्दुस्तान के साथ-साथ पाकिस्तान तक इस नाटक की धूम रही है। जितनी बार देखो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-drama-shows-the-difference-between-rich-and-poor/article-32551"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/drama.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>व्यंगयात्मक भाषा में खूब किए गए प्रहार</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)।</strong> विश्वदीपक त्रिखा द्वारा निर्देशित नाटक (Drama) गधे की बारात का यहां मंचन किया गया। हंसी, व्यंगय के बीच नाटक में अमीरी और गरीबी के फर्क को दिखाया, समझाया गया है। हिन्दुस्तान के साथ-साथ पाकिस्तान तक इस नाटक की धूम रही है। जितनी बार देखो उतनी ही बात यह नाटक नया नजर आता है। त्रिखा स्वयं भी इस नाटक में राजा की भूमिका में नजर आते हैं। विश्व रंग मंच दिवस के उपलक्ष्य में इस नाटक का मंचन संस्कृति के सारथी संस्था के तत्वावधान में नाट्य शस्त्र के जनक भरतमुनि की स्मृ़ति में यहां आर्य कन्या विद्या मंदिर सेक्टर-7 के प्रेक्षा गृह में किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर आरएसएस के महानगर संघसंचालक जगदीश ग्रोवर का सानिध्य प्राप्त हुआ, वहीं शिक्षाविद् भीष्म भारद्वाज ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। पर्यावरण संरक्षण विभाग भाजपा हरियाणा प्रमुख नवीन गोयल मुख्य अतिथि थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा नेता सुमेर तंवर, अभिनेता राज चौहान, नगर निगम के चेयरमैन ब्रह्म यादव, समाजसेवी रणधीर सिंह, शिक्षाविद् सुनील गुप्ता, अर्जुन वशिष्ठ, रामबहादुर सिंह, गौरव अरोड़ा, तिलकराज बांगा ने शिरकत की। नाटक में कलाकार अविनाश सैनी, सुजाता रोहिल्ला, सुरेंद्र शर्मा, विश्वदीपक त्रिखा, महक, पावनी, सुभाष नगाड़ा ने भूमिका निभाई।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्देशक विश्वदीपक त्रिखा के मुताबिक हरिभाई बडगांवकर द्वारा लिखे गए इस नाटक (Drama Show) का मंचन पहली बार वर्ष 1990 में किया गया था। आज इसे 32 साल हो गए हैं। कोई भी व्यक्ति इस नाटक को दुबारा देखता है तो उसे यह नया ही नजर आता है। इसमें हंसी-ठिठोली भी है और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी बातें भी हैं। नाटक में किसी तरह की फूहड़ता नहीं है। परिवार के बीच में बैठकर नाटक को देखा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस शहर, जिस मंच पर आज तक यह नाटक मंचित किय गया है, वहां से दुबारा इसके मंचन की मांग आती रही है। नाटक में अमीरी-गरीबी के विषय पर गंभीरता दिखाई देती है। नाटक में ज्यादातर कलाकार शुरू से ही जुड़े हैं। नाटक के कलाकारों में डायलॉग की टाइमिंग बेहतरीन रही। नाटक को दर्शकों ने खूब पसंद किया।</p>
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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 17:03:55 +0530</pubDate>
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                <title>कर्नाटक में सत्ता का नाटकः गिर सकती है कुमारस्वामी सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)।विधानसभा चुनावों के करीब सात माह बाद कर्नाटक में फिर सत्ता का नाटक शुरू हो गया है। प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जदएस गठबंधन ने भाजपा पर ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है। वहीं, भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उलटा कांग्रेस-जदएस गठबंधन भाजपा विधायकों को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong>विधानसभा चुनावों के करीब सात माह बाद कर्नाटक में फिर सत्ता का नाटक शुरू हो गया है। प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जदएस गठबंधन ने भाजपा पर ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है। वहीं, भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उलटा कांग्रेस-जदएस गठबंधन भाजपा विधायकों को लुभाने की कोशिश कर रहा है। लिहाजा पार्टी के सभी विधायकों को गुरुग्राम शिफ्ट कर दिया है।</p>
<h2>भाजपा की कोशिश है कि ये 13 विधायक जल्द से जल्द इस्तीफा दे दें।</h2>
<p style="text-align:justify;">हालांकि सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के 10 और जेडीएस के तीन विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। भाजपा की कोशिश है कि ये 13 विधायक जल्द से जल्द इस्तीफा दे दें। भाजपा अगले हफ्ते प्रदेश सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी ला सकती है। बताते चलें कि विधानसभा चुनावों में भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें हासिल हुई थीं और पार्टी नेता बीएस येद्दयुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली थी, लेकिन बाद में कांग्रेस और जेडीएस ने हाथ मिलाकर एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार बना ली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">ताजा घटनाक्रम में कांग्रेस-जदएस के 13 विधायक बेंगलुरु से गायब हैं। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का आरोप है कि भाजपा सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों को लुभाने का प्रयास कर रही है, लेकिन गठबंधन का कोई भी विधायक पाला नहीं बदलेगा, लेकिन कांग्रेस के अंदर बेचैनी है। दरअसल, कर्नाटक में कांग्रेस और जदएस ने मिलकर सरकार तो बना ली थी, लेकिन उनके पास बड़ा बहुमत नहीं है। ऐसे में अगर 13 विधायकों ने इस्तीफा दिया तो दिक्कत बढ़ जाएगी। रविवार को राज्य के जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार ने भी माना था कि तीन कांग्रेस विधायक मुंबई के एक होटल में ठहरे हुए हैं। इस बारे में जब उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर से पूछा गया तो उनका जबाव था, ‘उन्हें रहने दीजिए.. वे वहां क्यों गए हैं, कोई नहीं जानता। वे छुट्टियां मनाने गए होंगे या मंदिर दर्शन को गए होंगे या फिर नेताओं से मिलने गए होंगे।’</p>
<h2 style="text-align:justify;">कुमारस्वामी ने कहा, भाजपा के सभी विधायक मेरे लोग</h2>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा है कि राज्य में कांग्रेस-जेडीएस सरकार की ‘अस्थिरता’ का सवाल ही नहीं है। उन्होंने उन रिपोटरे को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया है कि भाजपा उनकी सरकार गिराने के लिए ‘ऑपरेशन लोटस’ चला रही है। जब उनसे डीके शिवकुमार के उस दावे के बारे में पूछा गया कि कांग्रेस के तीन विधायक मुंबई में कुछ भाजपा नेताओं के साथ हैं, तो कुमारस्वामी ने कहा, ‘वे मेरे मित्र हैं। जो विधायक मुंबई में हैं या भाजपा के सभी 104 विधायक जो दिल्ली में हैं, सभी मेरे लोग हैं। इसलिए इस सरकार की अस्थिरता का सवाल ही नहीं उठता। (कांग्रेस) विधायक मेरी जानकारी के बाद मुंबई गए थे, वे मेरे साथ संपर्क में हैं।’</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Jan 2019 08:49:10 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>विपक्षी एकता का नाटक और कुमारस्वामी के आंसू</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले दिनों कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी एक सभा में रो पड़े। यह भी माना जा सकता है कि गठबंधन सरकार का प्रमुख बनने के बाद की परिस्थितियों ने उनके आंसू निकाल दिए। कुमारस्वामी के आंसू जेडीएस और कांग्रेस के खट्टे और तल्ख रिश्तों की पोल तो उजागर करते ही हैं, वहीं देश में विपक्ष एकता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-drama-of-opposition-unity-and-the-tears-of-kumaraswamy/article-4893"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/kumar-sawamy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले दिनों कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी एक सभा में रो पड़े। यह भी माना जा सकता है कि गठबंधन सरकार का प्रमुख बनने के बाद की परिस्थितियों ने उनके आंसू निकाल दिए। कुमारस्वामी के आंसू जेडीएस और कांग्रेस के खट्टे और तल्ख रिश्तों की पोल तो उजागर करते ही हैं, वहीं देश में विपक्ष एकता की सच्चाई का बयान भी करते हैं। ये वहीं कुमारस्वामी हैं जिनके शपथ ग्रहण समारोह के मंच पर विपक्षी दलों ने अपनी ताकत और मित्रता को संदेश पूरे देश को दिया था। अभी तो कर्नाटक की सरकार को बने चंद महीने ही हुए हैं और गठबंधन की सरकार के प्रमुख कुमारस्वामी के आंसू पूरा देश देख रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमं़त्री कुमारस्वामी के सहयोगी दल कांग्रेस ने उनके दुखी होने पर तंज कसा है कि मुख्यमंत्री को खुश रहना चाहिए वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल भाजपा ने कुमारस्वामी के आंसुओं को अवार्ड मिलने लायक बताकर उनका मजाक उड़ाया है। मुख्यमंत्री वाकई रोये या उन्होंने इसका अभिनय किया ये तो वही बेहतर बता सकते हैं लेकिन जिस तरह जम्मू कश्मीर में भाजपा और पीडीपी का गठबंधन बेमेल विवाह जैसा था ठीक वैसे ही कर्नाटक में कांग्रेस द्वारा फेंके दाने को जिसे कुमार ने लपका उसमें कोई सैद्धांतिक सोच तो थी नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल दोनों ही पार्टियां आगामी चुनाव के मद्देनजर अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी हुई हैं। गठबंधन कब तक चलेगा ये भी नहीं कहा जा सकता। ऐसे में शुरूवाती दौर में ही कुमार स्वामी ने आंसू पोछते हुए जो सन्देश दिया वह बेहद साफ है। इससे यह तो साफ हो गया है कि कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। वैसे देखा जाए तो नेता आंसुओं की ताकत जानते हैं। कई ने इसके जरिए अपना भविष्य ही संवार लिया। नेताओं के लिए आंसू बहुत सी चीजों का इंश्योरेंस होते हैं। एचडी कुमारस्वामी भी बहुत मंझे हुए नेता है।</p>
<p style="text-align:justify;">तभी उन्होंने हिंदू मान्यता की याद दिलाते हुए आंसू बहाए कि वह भी शिवजी की तरह विषपान कर रहे हैं। कुमारस्वामी का ये बयान पूरी मीडिया में हेडलाइन बना। इससे सहयोगी दल कांग्रेस चिंतित भी है और उसकी किरकिरी भी हुई, विपक्षी बीजेपी ने इसे डरामा करार दिया और कहा कि उन्हें बेस्ट एक्टर का अवार्ड दिया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने तो इसे गठबंधन की समाप्ति की शुरूआत तक कह दिया। राजनीति के कुछ जानकार कह रहे हैं कि यह गठबंधन के कमजोर होने का संकेत है। आगे चल कर सरकार भी गिर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन कुछ मान रहे हैं कि ये सोची समझी रणनीति है। इस रणनीति का अपना एक मकसद भी है। जेडीएस कार्यकतार्ओं के सामने आंसू बहा कर कुमारस्वामी ने एक चतुराई भरा कदम उठाया है। गौड़ा के सुपुत्र इस ताकतवर सेंटीमेंटल कार्ड को खेल कर एक तरह से कांग्रेस को चेतावनी दी है कि अगर वे टांग खिंचना जारी रखेगी तो दिक्कत होगी। वह अपने को सताया हुआ साबित कर देंगे। साथ ही उन्होंने बीजेपी को भी संकेत दे दिए कि 11 साल पहले उनके सहयोगी रहे बीएस येदुरप्पा ने जैसे उनके साथ ह्यविश्वासघातह्ण किया था वैसा वह भी कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके पिता, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगैड़ा ने भी कर्नाटक के हुबली जिले में एक तरह से अपने बेटे के इस रुख का समर्थन किया। साथ ही कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर हमला भी किया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कुमारस्वामी को खुल कर काम करने नहीं दिया जा रहा है। उन पर बहुत अधिक दबाव है। दो महीने पहले जब यह कांग्रेस जेडीएस की साझा सरकार बनी तभी से पिता-पुत्र दोनों सताए जाने का कार्ड खेल रहे हैं ताकि कुछ सहानुभूति पैदा की जा सके। कुमारस्वामी अक्सर अपनी बेचारगी के बयान करते रहे हैं कि वे तो कांग्रेस के रहम पर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि 104 सदस्यों वाला विपक्ष उन्हें हटाने में लगा है। गठबंधन के कोआर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सार्वजनिक तौर पर सरकार के स्थिरता को लेकर विवादास्पद बयान दे चुके हैं। उन्हें कभी गौड़ा का प्रतिद्वंदी माना जाता रहा। बीजेपी इसमें लगी है कि सरकार को उत्तर कर्नाटक के विरोधी के रूप में स्थापित किया जाय। बीजेपी के मुताबिक सरकार वहीं विकास के काम कर रही है जहां उसकी पकड़ मजबूत है। वैसे कर्नाटक की राजनीति को करीब से जानने वाले यह कहते हैं कि पिता-पुत्र दोनों बहुत चतुर हैं। अांसू बहाकर उन्होंने सरकार को सुरक्षित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर कांग्रेस उनके लिए परेशानी पैदा करती है, तो लोगों की भावना कांग्रेस के विरोध में और जेडीएस के पक्ष में ही होगी. अगर बीजेपी उनके खिलाफ जाती है तो वो भगवा-दल को पुराने मैसूर और वोकालिंगा समुदाय के विरुद्ध बता सकते हैं। हाल में किसानों के कर्जमाफी के बाद कांग्रेस और बीजेपी दोनों को मजबूर कर दिया। सहयोगी कांग्रेस भी कर्जमाफी नहीं चाह रही थी, क्योंकि पूरा के्रडिट जेडीएस को मिल जाएगी। राहुल गांधी को इसे मुद्दा न बनाने के लिए कांग्रेसियों को मनाना पड़ा। बीजेपी को डर है कि आने वाले लोक सभा चुनाव में यह मुद्दा उनके खिलाफ जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमारस्वामी के इस भावुक भाषण की तात्कालिक वजह सोशल मीडिया पोस्ट हैं। मीडिया में आयी रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के भावुक भाषण के पीछे सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चल रहा वह अभियान है जिसमें ‘कुमारस्वामी हमारे सीएम नहीं हैं।’ बताया गया है। इसके अलावे एक वीडियो में कोडागू के एक लड़के को यह कहते सुना जा रहा है कि जिले में भारी बारिश के बाद सड़कें बह गई हैं लेकिन मुख्यमंत्री को इसकी फिक्र नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमारस्वामी ने गठबंधन की मजबूरियां बताते हुए कहा कि बिना बहुमत के सरकार चलाना काफी मुश्किल है। स्पष्ट जनादेश नहीं मिलने से सरकार चलाने में मुझे ज्यादा खुशी नहीं हो रही है। विपक्षी पार्टियां अगले लोकसभा चुनाव से पहले एकजुटता दिखाने के तरीके खोज रही हैं। इस बीच कुमारस्वामी का बयान विपक्षी एकता के झूठे नाटक को शीशा दिखाने का काम कर रहा है। असल में सत्ता पाने और मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए जो देश भर में परस्पर विरोधी और विचारधारा से विपरीत दल आपस में गले मिल रहे हैं, उसकी जमीनी सच्चाई यही है, जो इन दिनों कर्नाटक में दिख रहा है। कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस की सरकार के शपथ लेने के मौके पर देश भर के विपक्षी नेता बेंगलुरू में जुटे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उसके बाद अभी ऐसी जुटान का दूसरा मौका नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि चेन्नई में विपक्षी पार्टियों के नेताओं का जमावड़ा होगा। डीएमके नेता एमके स्टालिन तमाम विपक्षी नेताओं की मेजबानी करेंगी। यह भी कहा जा रहा है कि विपक्षी पार्टियां भारत बंद की योजना भी बना रही हैं। किसानों के मसले पर और रोजगार व आर्थिक गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष मानसून सत्र के दौरान भारत बंद का ऐलान कर सकता है। कुमारस्वामी के बयान के बाद विपक्षी एकता को धक्का लगना तय है।</p>
<p style="text-align:justify;">गठबंधन की सरकार बनने के बाद कुमारस्वामी ने भगवान शंकर जी की तरह विषपान करने की जो बात कही वह सरासर गलत है क्योंकि ऐसा करने के लिए उन्हें किसी ने मजबूर नहीं किया था। स?ाा की लालच में जिसे वे अमृत समझकर गटक गए अब यदि वह उन्हें विष लग रहा है तो उसके लिए कोई दूसरा कसूरवार नहीं है। हालांकि रोने और आंसू पोछने की विवशता के बावजूद कुमारस्वामी ने अब तक पद से इस्तीफा नहीं दिया है। यह भी लगभग निश्चित है कि वह इस्तीफा तब तक नहीं देंगे जब तक उसके लिए मजबूर नहीं कर दिए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ये पहला अवसर नहीं जब देवेगौड़ा परिवार स?ाा के लालच में कांग्रेस के शिकंजे में फंसा हो लेकिन दूसरी तरफ ये भी सच है कि कुमार यदि स?ाा में न आते तो वे कर्नाटक की राजनीति में हांशिये पर सिमटने की स्थिति में आ चुके थे। उस लिहाज से तो ये स?ाा उनके लिए अमृत जैसी हो गई। वे खुद भी जानते हैं ये ज्यादा दिन रहेगी नहीं इसीलिए वे इस तरह का नाटक दिखाकर सहानुभूति बटोरना चाह रहे हैं। फिलवक्त कर्नाटक के नाटक से कांग्रेस और भाजपा दोनों की मुसीबतें तो बढ़ी ही हैं, वहीं विपक्षी एकता की गाड़ी में भी फिलवक्त ब्रेक लगता दिख रहा है।</p>
<p> </p>
<p><strong>राजेश महेश्वरी</strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 18 Jul 2018 08:19:15 +0530</pubDate>
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