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                <title>मानव संसाधन विकास मंत्रालय की टीम पहुंची सरसा,  जाने क्या है वजह</title>
                                    <description><![CDATA[– पहले दिन टीम ने जेएनवी ओढां में निरीक्षण कर जांची व्यवस्थाएं सरसा (सुनील वर्मा)। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (human resource development ministry) की टीम रविवार को सरसा पहुंची। टीम ने प्रथम दिन ओढ़ां स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टीम का नेतृत्व एनसीईआरटी से ऐश्वर्या, प्रवक्ता आसीमा, समग्र शिक्षा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/human-resource-development-ministry/article-39824"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/sirsa-13.jpg" alt=""></a><br /><h4><strong>– पहले दिन टीम ने जेएनवी ओढां में निरीक्षण कर जांची व्यवस्थाएं</strong></h4>
<p><strong>सरसा (सुनील वर्मा)।</strong> मानव संसाधन विकास मंत्रालय <strong>(<span class="HwtZe" lang="en" xml:lang="en"><span class="jCAhz ChMk0b"><span class="ryNqvb">human resource development ministry</span></span></span>)</strong> की टीम रविवार को सरसा पहुंची। टीम ने प्रथम दिन ओढ़ां स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टीम का नेतृत्व एनसीईआरटी से ऐश्वर्या, प्रवक्ता आसीमा, समग्र शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक बूटाराम, सहायक जिला समन्वयक शशि सचदेवा कर रही है। टीम सोमवार को कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय व आरोही विद्यालय में विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लेगी। जिले के छह खंडों में 12 कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय व आरोही विद्यालय है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें– <a href="http://10.0.0.122:1245/cattle-free-city/">कैटल फ्री शहर में पशुओं की भरमार, हादसों का इंतजार</a></strong></p>
<h3><strong>– विद्यार्थियों से की बातचीत | <span class="HwtZe" lang="en" xml:lang="en"><span class="jCAhz ChMk0b"><span class="ryNqvb">human resource development ministry</span></span></span><br />
</strong></h3>
<p>केंद्रीय टीम रविवार को जवाहर नवोदय विद्यालय में पहुंची। टीम ने विद्यार्थियों को दी जा रही शिक्षा के स्तर की जांच की। इसी के साथ छात्रावास में विद्यार्थियों को दिए जा रहे खाने की क्वालिटी जांची गई। उन्होंने विद्यार्थियों को खाने के बारे में पूछताछ की। वहीं विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं के बारे में आंकलन किया गया। टीम ने जांच रिपोर्ट भी तैयार की ताकि उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा सके। समग्र शिक्षा अभियान की सहायक जिला परियोजना समन्वयक शशि सचदेवा ने बताया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की टीम आवासीय स्कूलों में निरीक्षण करेगी। टीम सभी खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय व आरोही स्कूलों में निरीक्षण करेगी।</p>
<h3><strong>– टीम इन स्कूलों में करेगी निरीक्षण</strong></h3>
<p><strong>खंड, कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, आरोही विद्यालय</strong></p>
<ul>
<li><strong>बड़ागुढ़ा, फतेहपुरिया झिड़ी</strong></li>
<li><strong>डबवाली, रत्ताखेड़ा, कालुआना</strong></li>
<li><strong>ऐलनाबाद, धोलपालिया, खारी सुरेरा</strong></li>
<li><strong>ना. चौपटा, रामपुरा ढिल्लो, नाथूसरी कलां</strong></li>
<li><strong>ओढां, च_ा, श्रीजलालआना साहिब</strong></li>
<li><strong>रानियां, केहरवाला, मोहम्मदपुरिया</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Nov 2022 20:29:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वह दिन दूर नहीं है जब हम विमान बनाएंगे: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[महेसाणा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने रविवार को कहा कि पहले गुजरात साइकिल बनाने में भी अक्षम था। अब गुजरात में गाड़ियाँ बनने लगी हैं। अब वह दिन भी दूर नहीं है जब हम विमान बनाएँगे। मोदी ने आज मेहसाणा से भारत का सर्वप्रथम निरंतर सौर ऊर्जा संचालित मोढेरा ‘सूर्य ग्राम’ राष्ट्र को समर्पित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/narendra-modi-gujarat-became-the-center-of-new-energy-of-development/article-38824"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/modi-1-e1645691420853.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>महेसाणा।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने रविवार को कहा कि पहले गुजरात साइकिल बनाने में भी अक्षम था। अब गुजरात में गाड़ियाँ बनने लगी हैं। अब वह दिन भी दूर नहीं है जब हम विमान बनाएँगे। मोदी ने आज मेहसाणा से भारत का सर्वप्रथम निरंतर सौर ऊर्जा संचालित मोढेरा ‘सूर्य ग्राम’ राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा कि इस सूर्य ग्राम के समर्पण के साथ ही समग्र उत्तर गुजरात विकास की नई ऊर्जा का केन्द्र बना है। भगवान सूर्य के धाम मोढेरा में शरद पूर्णिमा तथा महर्षि वाल्मीकि की पुण्यतिथि का त्रिवेणी संगम बना है। सूर्य की भाँति विकास का प्रकाश देशभर में सर्वत्र फैलाने के लिए कटिबद्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि आस्था तथा प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) का समन्वय होने से अनेक लोगों के सपने साकार हो रहे हैं। साथ ही साथ स्मार्ट गुजरात-भारत का संकल्प साकार हो रहा है। मोढेरा ‘सूर्य ग्राम’ घोषित होने से मोढेरा सहित समग्र उत्तर गुजरात के लिए यह अनूठा अवसर आया है। सूर्य मंदिर के विख्यात मोढेरा गाँव अब ‘सूर्य ग्राम’ के रूप में विख्यात बना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले गुजरात साइकिल बनाने में भी अक्षम था। अब गुजरात में गाड़ियाँ बनने लगी हैं। अब वह दिन भी दूर नहीं है, जब हम विमान बनाएँगे। उन्होंने कहा कि बहुचराजी, मोढेरा, चाणस्मा क्षेत्र में फ़ोरलेन रोड बनाने हैं। इसी प्रकार तारंगा-अंबाजी रेलवे लाइन प्रोजेक्ट से इस क्षेत्र की कायापलट करनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि विश्व के पर्यावरण इतिहास में मोढेरा का नाम स्वर्णाक्षर से अंकित होगा। मोढेरा सूर्य मंदिर को ध्वस्त करने के लिए आक्रांताओं ने अनेक प्रयास किए थे अनेक अत्याचार हुए थे। आज पौराणिक महत्व के साथ समग्र विश्व के लिए मोढेरा दृष्टांत बना है। विश्व में जब भी सौर ऊर्जा की चर्चा होगी, तब मोढेरा का उल्लेख अवश्य होगा। मोढेरा गाँव में सब कुछ सौर ऊर्जा से संचालित हो रहा है, जो हमारे लिए गौरव की बात है। 21वीं शताब्दी के आत्मनिर्भर भारत के लिए यह विशेष भेंट है। आगामी पीढ़ी को सुरक्षा देने के लिए हम दिन-रात निरंतर प्रयास कर रहे हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Oct 2022 09:03:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ताकि नागरिक और राष्ट्र का विकास सुनिश्चित हो सके</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में बरसों से उच्च शिक्षा शोध और नवाचार को लेकर चिंता जताई जाती रही है। बाजारवाद शनै: शनै: शिक्षा की अवस्था को मात्रात्मक बढ़ाया है मगर गुणवत्ता में यह फिसड्डी ही रही। शायद यही कारण है कि विश्वविद्यालयों की जब वैश्विक रैंकिंग जारी होती है तो उच्च शिक्षण संस्थाएं बड़ी छलांग नहीं लगा पाती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/ensure-the-development-of-citizens-and-the-nation/article-38806"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/nation-development.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत में बरसों से उच्च शिक्षा शोध और नवाचार को लेकर चिंता जताई जाती रही है। बाजारवाद शनै: शनै: शिक्षा की अवस्था को मात्रात्मक बढ़ाया है मगर गुणवत्ता में यह फिसड्डी ही रही। शायद यही कारण है कि विश्वविद्यालयों की जब वैश्विक रैंकिंग जारी होती है तो उच्च शिक्षण संस्थाएं बड़ी छलांग नहीं लगा पाती हैं। दो टूक कहें तो नवाचार लाने की प्रमुख जिम्मेदारी ऐसी ही शिक्षण संस्थाओं की है। फिलहाल नवाचार किसी भी देश की सशक्तता का वह परिप्रेक्ष्य है जहां से यह समझना आसान होता है कि जीवन के विभिन्न पहलू और राष्ट्र के विकास के तमाम आयामों में नूतनता का अनुप्रयोग जारी है। भारत में नवाचार को लेकर जो कोशिशें अभी तक हुई हैं वह भले ही आशातीत नतीजे न दे पायी हो बावजूद इसके उम्मीद को एक नई उड़ान मिलते दिखाई देती है। वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी आॅगेर्नाइजेशन द्वारा जारी 2022 के ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में उछाल के साथ भारत 40वें स्थान पर आ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह इस लिहाज से कहीं अधिक प्रभावशाली है क्योंकि यह पिछले साल की तुलना में 6 स्थानों की छलांग है। विदित हो कि भारत 2021 में 46वें और 2015 में 81वें स्थान पर था। इस रैंकिंग की पड़ताल बताती है कि स्विट्जरलैण्ड, यूएसए और स्वीडन क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर है। अमेरिका, कोरिया और सिंगापुर को छोड़ दिया जाये तो प्रथम 10 में सभी यूरोपीय देश शामिल हैं। दुनिया में स्विट्जरलैण्ड नवाचार को लेकर सर्वाधिक अच्छे प्रयोग के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि वह पिछले 12 वर्षों से इस मामले में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। इतना ही नहीं नवाचार निर्गत के मामले में अग्रणी स्विट्जरलैण्ड मूल साफ्टवेयर खर्च व उच्च तकनीक निर्माण में भी अव्वल है। गौरतलब है कि तकनीक का प्रयोग सभी सीखने वालों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसके आधार पर विज्ञान क्षेत्र का वास्तविक जीवन के परिदृश्य के बीच सम्बंध स्थापित करने की कोशिश करता है। भारत में नवाचार को लेकर जो स्थिति मौजूदा समय में है वह नीति आयोग के नवाचार कार्यक्रम अटल इनोवेशन प्रोग्राम तथा भारत सरकार द्वारा संचालित अन्य प्रौद्योगिकी का नतीजा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में स्टार्टअप सेक्टर हेतु तैयार बेहतर माहौल के चलते ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग में सुधार वाला सिलसिला जारी है। वैसे सुधार और सुशासन के बीच एक नवाचार से युक्त गठजोड़ भी है। बशर्ते सुधार में संवेदनशीलता, लोक कल्याण, लोक सशक्तिकरण तथा खुला दृष्टिकोण के साथ पारदर्शिता और समावेशी व्यवस्था के अनुकूल स्थिति बरकरार रहे। इसमें कोई दुविधा नहीं कि सुशासन की पहल और नवाचार में आई बढ़त देश को कई संभावनाओं से भरेगा। जीवन के हर पहलू में ज्ञान-विज्ञान, शोध, शिक्षा और नवाचार की अहम भूमिका होती है। भारतीय वैज्ञानिकों का जीवन और कार्य प्रौद्योगिकी विकास के साथ राष्ट्र निर्माण का शानदार उदाहरण समय-समय पर देखने को मिलता रहा है। देश में मल्टीनेशनल रिसर्च एण्ड डवलेपमेंट केन्द्रों की संख्या साल 2010 में 721 थी जो अब 12 सौ के आस-पास पहुंच गयी है। शिक्षा, शोध, तकनीक और नवाचार ऐसे गुणात्मक पक्ष हैं जहां से विशिष्ट दक्षता को बढ़ावा मिलता है साथ ही देश का उत्थान भी सम्भव होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब सत्ता सुशासनमय होती है तो कई सकारात्मक कदम स्वत: निरूपित होते हैं। हालांकि सुशासन को भी शोध व नवाचार की भरपूर आवश्यकता रहती है। कहा जाये तो सुशासन और नवाचार एक-दूसरे के पूरक हैं। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2022 का थीमेटिक फोकस नवाचार संचालित विकास के भविष्य पर केन्द्रित है। इनमें जो संभावनाएं दिखती हैं उसमें सुपर कम्प्यूटरिंग, आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस और आॅटोमेशन के साथ डिजिटल युग है। इसके अलावा जैव प्रौद्योगिकी, नैनो तकनीक और अन्य विज्ञान में सफलताओं पर निर्मित गहन नवाचार जो समाज के उन तमाम पहलुओं को सुसज्जित करेगा जिसमें स्वास्थ्य, भोजन, पर्यावरण आदि शामिल हैं। सुशासन भी समावेशी ढांचे के भीतर ऐसी तमाम अवधारणाओं को समाहित करते हुए सु-जीवन की ओर अग्रसर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बेशक साल 2015 में इनोवेशन इंडेक्स रैंकिंग में भारत 81वें स्थान पर था जो अब 40वें पर आ गया है। बावजूद इसके भारत शोध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों ही चिंतनीय है। शोध से ही ज्ञान के नये क्षितिज विकसित होते हैं और इन्हीं से संलग्न नवाचार देश और उसके नागरिकों को बड़ा आसमान देता है। पड़ताल बताती है कि अनुसंधान और विकास में सकल व्यय वित्तीय वर्ष 2007-08 की तुलना में 2017-18 में लगभग तीन गुने की वृद्धि ले चुका है। फिर भी अन्य देशों की तुलना में भारत का शोध विन्यास और विकास कमतर ही कहा जायेगा। भारत शोध व नवाचार पर अपनी जीडीपी का महज 0.7 फीसद ही व्यय करता है जबकि चीन 2.1 और अमेरिका 2.8 फीसद खर्च करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं दक्षिण कोरिया और इजराइल जैसे देश इस मामले में 4 फीसद से अधिक खर्च के साथ कहीं अधिक आगे हैं। हालांकि केन्द्र सरकार ने देश में नवाचार को एक नई ऊँचाई देने के लिए साल 2021-22 के बजट में 5 वर्ष के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन हेतु 50 हजार करोड़ रूपए आबंटित किये थे। इसमें कोई शक नहीं कि इनोवेशन इंडेक्स में भारत की सुधरती रैंकिंग से केन्द्र सरकार गदगद होगी। मगर अभी इसके लाभ से देश का कई कोने अभी भी अछूते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीते वर्षों में भारत एक वैश्विक अनुसंधान एवं नवाचार के रूप में तेजी से उभर रहा है। भारत के प्रति मिलियन आबादी पर शोधकतार्ओं की संख्या साल 2000 में जहां 110 थी वहीं 2017 तक यह आंकड़ा 255 का हो गया। भारत वैज्ञानिक प्रकाशन वाले देशों की सूची में तीसरे स्थान पर है जबकि पेटेन्ट फाइलिंग गतिविधि के स्थान पर 9वें स्थान पर है। भारत में कई अनुसंधान केन्द्र हैं और प्रत्येक के अपने कार्यक्षेत्र हैं। चावल, गन्ना, चीनी से लेकर पेट्रोलियम, सड़क और भवन निर्माण के साथ पर्यावरण, वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरिक्ष केन्द्र देखे जा सकते हैं। ऐसे केन्द्रों पर देश का नवाचार भी टिका हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा नये प्रारूपों के परिप्रेक्ष्य की संलग्नता इसे और बड़ा बनाने में कारगर है। स्विट्जरलैण्ड का पहले स्थान पर होना यह दर्शाता है कि कई मायनों में भारत को अभी इनोवेशन लीडरशिप को बड़ा करना बाकी है। नई शिक्षा नीति 2020 का आगामी वर्षों में जब प्रभाव दिखेगा तो नवाचार में नूतनता का और अधिक प्रवेश होगा। फिलहाल नवाचार का पूरा लाभ जन मानस को मिले ताकि सुशासन को तरक्की और जन जीवन में सुगमता का संचार हो। दशकों पहले मनोसामाजिक चिंतक पीटर ड्रकर ने ऐलान किया था कि आने वाले दिनों में ज्ञान का समाज किसी भी समाज से ज्यादा प्रतिस्पर्धात्मक बन जायेगा। दुनिया में नवाचार को लेकर जो प्रयोग व अनुप्रयोग मौजूदा वक्त में जरूरी हो गया है वह ज्ञान की इस प्रतिस्पर्धा का ही एक बेहतरीन उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>वरिष्ठ स्तंभकार एवं प्रशासनिक चिंतक -डॉ. सुशील कुमार सिंह</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Oct 2022 10:00:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘विदेशी एयरलाइंस न ले उड़ें विकास का लाभ ’</title>
                                    <description><![CDATA[मेरा मानना है कि जिस रफ्तार से घरेलू विमान सेवा कंपनियाँ अपने बेड़े का विस्तार कर रही हैं, खास कर वाइड बॉडी विमानों की संख्या बढ़ा रही हैं उससे स्थिति में उचित बदलाव आयेगा और हमारी सफलता विकास का कारण भी बनेगी तथा हम उससे लाभांवित भी होंगे। हमारी एयरलाइंस सीधे यात्रियों को सीधे उनके अंतिम गंतव्य तक पहुँचाने में सक्षम होंगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/civil-aviation-minister-hardeep-singh-puri-said/article-12378"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/foreign-airlines.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा ,घरेलू विमान सेवा कंपनियाँ अपने बेड़े का विस्तार कर रही हैं</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3><strong>कंपनियां विमानों की संख्या बढ़ा रही हैं</strong></h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश का  विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है तथा इसके साथ ही हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इस विकास का लाभ सिर्फ (Foreign airlines) विदेशी विमान सेवा कंपनियाँ न ले उड़ें। पुरी ने गुरुवार रात एक कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण विमानन क्षेत्र में जो लाभ मिल रहा है हमारी निजी तथा सरकारी एयरलाइंस भी उसका फायदा उठाने में समर्थ हों। मेरा मानना है कि जिस रफ्तार से घरेलू विमान सेवा कंपनियाँ अपने बेड़े का विस्तार कर रही हैं, खास कर वाइड बॉडी विमानों की संख्या बढ़ा रही हैं उससे स्थिति में उचित बदलाव आयेगा और हमारी सफलता विकास का कारण भी बनेगी तथा हम उससे लाभांवित भी होंगे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">हमारी एयरलाइंस सीधे यात्रियों को सीधे उनके अंतिम गंतव्य तक पहुँचाने में सक्षम होंगी।</li>
<li style="text-align:justify;">तब यह नहीं होगा कि कोई विदेशी एयरलाइन यात्रियों को अपने देश में ले जाकर वहाँ से उनके अंतिम गंतव्य तक ले जायें।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">घरेलू मार्गों पर यात्रियों की संख्या 11 प्रतिशत बढ़ी</h3>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि वह विमानन के बिजनेस मॉडल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास का लाभ विदेशी कंपनियों के साथ भारतीय कंपनियों को भी मिले। पुरी ने कहा कि पिछले साल एक बड़ी विमान सेवा कंपनी का परिचालन बंद होने के बावजूद नवंबर में घरेलू मार्गों पर यात्रियों की संख्या 11 प्रतिशत बढ़ी। यह इस बात को दिखाता है कि इस क्षेत्र में अब भी विकास की काफी संभावनायें हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस समय देश के सात से आठ प्रतिशत लोग ही हवाई सफर करते हैं</li>
<li style="text-align:justify;">भविष्य में यह अनुपात बढ़कर 15-16 प्रतिशत पर पहुँचेगा।</li>
<li style="text-align:justify;">हवाई अड्डों की संख्या भी पाँच साल में दुगुनी होगी।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">कंपनियों ने एयर इंडिया में रुचि दिखाई है</h3>
<p style="text-align:justify;">नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा कि सरकारी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण के लिए निविदा दस्तावेजों को अंतिम रूप दे दिया गया है और जल्द ही आरंभिक सूचना दस्तावेज जारी कर बोली प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> जिस प्रकार से कंपनियों ने एयर इंडिया में रुचि दिखाई है।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्हें लगता है कि सरकार सही दिशा में बढ़ रही है।</li>
<li style="text-align:justify;">इससे घरेलू विमानन उद्योग मजबूत होगा ।</li>
<li style="text-align:justify;"> अल्पावधि तथा मध्यम अवधि में इसके विस्तार में इस विनिवेश का योगदान होगा।</li>
</ul>
<p> </p>
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</strong></span></pre>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/civil-aviation-minister-hardeep-singh-puri-said/article-12378</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2020 16:06:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिवानी उपमंडल को विकास की दरकार</title>
                                    <description><![CDATA[मार्केट कमेटी की फीस अदा करने भी किसानों के लिए
अनाज मंडी में किसानों के अनाज रखने के
 लिए शैड ना होने के कारण किसान परेशान हैं
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sewani-sub-division-needs-development/article-11084"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/development.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">शिक्षा, बिजली, पानी व किसानों की समस्याओं का अंबार</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सिवानी मंडी(सच कहूँ न्यूज)</strong>। सिवानी मंडी तहसील व उपमंडल आज 34 साल बाद भी हरियाणा का सबसे पिछडा क्षेत्र है । सिवानी उपमंडल मेंं शिक्षा, बिजली, पानी व किसानों की समस्याओं का अंबार है लेकिन सरकार है कि सुनती ही नहीं है। उल्लेखनीय है कि सिवानी उपमंडल का गठन 1986 में हुआ था। भिवानी जिले का उपमंडल सिवानी कि जनता क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर बहुत परेशान हैं। बिजली,पीने व खेती के पानी व महिला शिक्षा इस क्षेत्र का मुख्य मुद्दा है और इस के कारण इस क्षेत्र की मुख्य मांग यह है कि सिवानी मंंडी को हिसार जिले में मिलाया जाए क्योंकि इस क्षेत्र के मुख्य कार्य हिसार से सम्बंधित होते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">उपमंडल का दूसरा मुद्दा लड़कियों की शिक्षा को लेकर है</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि सिवानी में महिला महाविद्यालय नहीं होने के कारण छात्राओं को हिसार जाना पड़ता है,</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन अभिभावक उन्हें उच्च शिक्षा के लिए हिसार नहीं भेजते हैं</li>
<li style="text-align:justify;">इस लिए अधिकतर छात्राओं की शिक्षा छूट जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">मार्केट कमेटी की फीस अदा करने भी किसानों के लिए</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong><em> -अनाज मंडी में किसानों के अनाज रखने के लिए शैड ना होने के कारण किसान परेशान हैं क्योंकि उनकी फसलें बरसात के मौसम में भी खुले आसमान के नीचे खराब हो जाती हैं।</em> </strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">गावों में रोडवेज बस सुविधाओं की मांग</h3>
<p style="text-align:justify;">सिवानी खण्ड के गावों में हरियाणा रोडवेज की बसों की व्यवस्था की जाए ताकि लोगों को आने जाने में परेशानी ना हो और सबसे बड़ी मांग किसानों की है कि अंतिम छोर तक सिंचाई का पानी पहुंचाया जाए और ढाणियों तक बिजली की सप्लाई मिलनी चाहिए और हरेक ढाणी तक पक्की सड़क होनी चाहिए। अब हरियाणा में भाजपा की दूसरी बार सरकार बनी है और जनता को विश्वास है कि अब की बार लोगों की समस्याओं का समाधान हो सकता है क्योंकि अबकी बार सरकार ने जनता से अनेक वादे पूरे करने का वायदा किया है ।</p>
<p> </p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Nov 2019 18:04:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में स्कूली शिक्षा का विकास, बदलाव व चुनौतियां</title>
                                    <description><![CDATA[सर्वजनिक शिक्षा एक आधुनिक विचार है,जिसमें सभी बच्चों को चाहे वे किसी भी लिंग, जाति, वर्ग, भाषा आदि के हों, शिक्षा उपलब्ध कराना शासन का कर्तव्य माना जाता है। भारत में वर्तमान आधुनिक शिक्षा का राष्ट्रीय ढांचा और प्रबन्ध औपनिवेशिक काल और आजादी के बाद के दौर में ही खड़ा हुआ है। 1757 में जब […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">सर्वजनिक शिक्षा एक आधुनिक विचार है,जिसमें सभी बच्चों को चाहे वे किसी भी लिंग, जाति, वर्ग, भाषा आदि के हों, शिक्षा उपलब्ध कराना शासन का कर्तव्य माना जाता है। भारत में वर्तमान आधुनिक शिक्षा का राष्ट्रीय ढांचा और प्रबन्ध औपनिवेशिक काल और आजादी के बाद के दौर में ही खड़ा हुआ है। 1757 में जब ईस्ट इंडिया कम्पनी की हुकूमत की शुरूआत हुई तब यहां राज्य द्वारा समर्थित एवं संचालित कोई ठोस शिक्षा व्यवस्था नहीं थी। हिन्दुओं और मुसलमानों दोनों की अपनी निजी शिक्षा व्यवस्थाएं थीं। प्रारंभ में अंग्रेजों की नीति भारत में पहले से चली आ रही शिक्षा व्यवस्था का सहयोग करने की थी और जोर इस पर था कि देश का शासन चलाने में उनकी मदद करने के लिए भारतीय अधिकारियों को संस्कृत,फारसी और अरबी में अच्छी तरह निपुण किया जाये और परंपरागत हिन्दू और मुस्लिम अभिजात वर्ग में अपनी साख बनायी जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी को ध्यान में रखते हुए 1781 में इस्लामी अध्ययन मुहैया कराने के लिए कलकत्ता मदरसा, 1792 में बनारस में बनारस संस्कृत कालेज आदि की स्थापना की गयी।कालांतर में इस नीति में बदलाव हुआ अंग्रेजी शासन के लिए आधुनिक शिक्षा प्राप्त वर्ग की जरूरत महसूस की गयी। भाव भी था कि कैसे अज्ञानी भारतियों को अंधकार से दूर करके उन्हें सभ्य बनाया जाये जिसमें यूरोप के विज्ञान, कला, अंग्रेजी शिक्षा जैसे ईसाइयत के प्रचार को साधन भी माना गया। मैकाले के अनुसार अंग्रेजी शिक्षा का उद्देश्य व्यक्तिओं के एक ऐसे वर्ग का निर्माण करना था जो रंग और रक्त में भारतीय हो लेकिन रुचियों, विचारों, नैतिकता और बुद्धि में अंग्रेज हो। एक ऐसा वर्ग जो सरकार और लाखों लोगों के बीच मध्यस्थ के तौर पर सेवा दे सके। इसके बाद 1837 में बड़ा बदलाव होता है और राजकाज एवं न्यायालय की भाषा से फारसी को हटाकर अंग्रेजी कर दी जाती है। 1844 में इस बात की विधिवत घोषणा कर दी जाती है कि सरकारी नियुक्तियों में अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त भारतीयों को ही तरजीह दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी के साथ ही कलकत्ता,मद्रास और बम्बई विश्वविद्यालयों जैसे आधुनिक शिक्षा केन्द्रों की स्थापना की जाती है।इस दौर में एक खास बात यह होती है कि ईस्ट इंडिया कम्पनी, मिशनरियों और ब्रितानी हुकूमत द्वारा स्थापित स्कूल-कॉलेज सभी भारतीयों के लिए खुले थे। इस दौरान अंग्रेजो द्वारा एक स्पष्ट नीति अपनाई गई कि किसी अछूत बच्चे के सरकारी स्कूल में प्रवेश से इंकार नहीं किया जाएगा। यह एक बड़ा बदलाव था जिसने सभी भारतीयों के लिए शिक्षा का दरवाजा खोल दिया।1911 में गोपाल कृष्ण गोखले ने प्राथमिक शिक्षा को नि:शुल्क और अनिवार्य करने का प्रयास किया। पहली बार किसी राष्ट्रीय मंच से अनिवार्य शिक्षा का सवाल उठाया गया। इसके विरोध में सरकारी पक्ष के सदस्य एवं सामंती तत्व एकजुट हो गये। फलत: गोखले का प्रस्ताव बहुमत से खारिज हो गया लेकिन गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा उठायी गयी अनिवार्य शिक्षा की मांग अभी तक बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजादी के बाद भारतीय राज्य का फोकस प्राथमिक शिक्षा पर नहीं था इसलिए शुरूवाती वर्षों में इसको लेकर कोई विशेष प्रयास नहीं किये गए, पूरा जोर उद्योगिकी विकास और उच्च शिक्षा पर था। इसलिए 1948 में उच्च शिक्षा के लिए राधाकृष्णन आयोग का गठन किया गया। इसी तरह 1952 में दूसरा आयोग गठित किया गया जिसका संबंध माध्यमिक शिक्षा से था। प्राथमिक शिक्षा पर आते-आते लगभग 17 साल लग गए और 1964 में कोठारी आयोग का गठन किया गया। प्रो. दौलत सिंह कोठारी की अध्यक्षता में गठित यह भारत का ऐसा पहला शिक्षा आयोग था जिसने प्राथमिक शिक्षा पर विचार किया और इसको लेकर कुछ ठोस सुझाव दिए पहला आयोग था जिसने सामंती एवं परंपरागत ढांचे पर आधारित औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा अब देश को ऐसी शिक्षा प्रणाली की जरूरत है जो अपने में बुनियादी मानवीय मूल्यों को समाहित करते हुए आधुनिक लोकतांत्रिक समाजवादी समाज के जरूरतों के अनुरूप हो। कोठारी आयोग ने विस्तार से भारतीय-शिक्षा पद्धति का अध्ययन किया। इसके परिणामस्वरूप ही वर्ष 1968 में भारत की पहली राष्ट्रीय शिक्षा-नीति अस्तित्व में आ सकी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोठारी आयोग ने भारतीय शिक्षा के निम्न उद्देश्य निर्धारित किये जिसमें सामाजिक एवं राष्ट्रीय एकता का विकास, जनतंत्र को सुढृढ़ बनाना, देश का आधुनिकीकरण करना, सामाजिक, नैतिक तथा अध्यात्मिक मूल्यों का विकास करना उत्पादन में वृद्धि करने के कई ऐसे महत्वपूर्ण सुझाव दिये थे जो आज भी लक्ष्य बने हुए हैं। आयोग या सुझाव था कि समाज के अन्दर व्याप्त जड़ता सामाजिक भेद-भाव को समूल नष्ट करने के लिए समान स्कूल प्रणाली एक कारगर औजार होगा। समान स्कूल व्यवस्था के आधार पर ही सभी वर्गों और समुदायों के बच्चे एक साथ सामान शिक्षा पा सकते हैं अगर ऐसा नहीं हुआ तो समाज के उच्च वर्गों के लोग सरकारी स्कूल से भागकर प्राइवेट स्कूलों का रुख करेंगे और पूरी प्रणाली ही छिन्न-भिन्न हो जाएगी। आयोग ने कई और महत्वपूर्ण सुझाव दिये थे जिसमें कुछ प्रमुख सुझाव निम्नानुसार हैं। शिक्षा के बजट पर कुल घरेलू उत्पाद का 6% खर्च करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">देश की शिक्षा स्नातकोत्तर स्तर तक अपनी भाषाओं में दी जानी चाहिए आयोग शिक्षा की बुनियादी इकाइयों-विधार्थी,शिक्षक और स्कूल को स्वायत्तता दिए जाने का समर्थक था। आयोग परीक्षा की सबसे बड़ी कमी इसके लिखित स्वरूप को देखता है और अवलोकन,मौखिक परीक्षण तथा व्यवहारिक अभ्यासों को इसके साथ जोड़ने की अनुशंसा करता है। परीक्षा के परिणाम में उत्तीर्ण-अनुत्तीर्ण की टिप्पणी को प्रयुक्त न करने की सलाह दी थी। बस्ते के बोझ को कम करने,मूल्यांकन पद्धति को भयमुक्त इत्यादि अनेक सिफारिशें की हैं। शिक्षा को काम से जोड़ा जाना चाहिए। 1968 में भारत की पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति लायी गयी जिसमें 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा ,शिक्षको के बेहतर क्षमतावर्धन के लिए उचित प्रशिक्षण जैसे प्रावधान किये गये और मातृभाषा मे शिक्षण पर विशेष जोर दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा नयी शिक्षा नीति तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। शिक्षा नीति, 2017 का मसौदा तैयार करने के लिए प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक एवं पद्म विभूषण विजेता डॉ। कस्तूरीरंजन  के नेतृत्व में एक 9 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। 1951 में साक्षरता दर, 18.43 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 74.04 प्रतिशत पहुँच गयी है। 1950 में देश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 42.60 प्रतिशत बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, आज शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों की संख्या 92 प्रतिशत से भी अधिक है। प्राथमिक स्तर पर सकल दाखिला अनुपात 1950-51 के 42.6 प्रतिशत से बढ़कर 2003-04 में 98.3 प्रतिशत पहुँच गया है। इसी प्रकार उच्च प्राथमिक स्तर के लिए इसी अवधि में यह दर 12.7 प्रतिशत से बढ़कर 62.5 प्रतिशत हो गई है। 1950 में देश में प्राथमिक विद्यालयों की कुल संख्या 2.10 लाख थी जो साल 2003-04 तक 7.12 लाख हो गई। उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 13600 से 19 गुना बढ़कर लगभग 2.62 लाख हो गई है। सन 1950-51 में कुल प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की संख्या 6.24 लाख थी जो 2002-03 तक बढ़कर 36.89 लाख हो गई। महिला शिक्षकों की संख्या भी इसी अवधि में बढ़कर 0.95 लाख से 14.88 लाख हो गई। चुनौतियाँ जो अभी भी कायम हैं</p>
<p style="text-align:right;"><strong>लेखक जावेद</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/article/development-of-education/article-7676</link>
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                <pubDate>Wed, 13 Feb 2019 20:35:13 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकास का एजेंडा लेकर चुनाव लड़े पार्टियां</title>
                                    <description><![CDATA[‘स्टेट्समैन’ राजनीतिज्ञ हमेशा अगली पीढ़ी के बारे में सोचता है एक बहुत अच्छी कहावत है कि नेता हमेशा अगला चुनाव के बारे में सोचता है मगर एक ‘स्टेट्समैन’ राजनीतिज्ञ हमेशा अगली पीढ़ी के बारे में सोचता है। दरअसल यह कहावत आने वाले वक्त में देश की जरूरत बनने वाली है क्योंकि नए साल का इंतजार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>‘स्टेट्समैन’ राजनीतिज्ञ हमेशा अगली पीढ़ी के बारे में सोचता है</h2>
<p style="text-align:justify;">एक बहुत अच्छी कहावत है कि नेता हमेशा अगला चुनाव के बारे में सोचता है मगर एक ‘स्टेट्समैन’ राजनीतिज्ञ हमेशा अगली पीढ़ी के बारे में सोचता है। दरअसल यह कहावत आने वाले वक्त में देश की जरूरत बनने वाली है क्योंकि नए साल का इंतजार तो सब को होता है मगर चुनावी साल के इंतजार विपक्षी पार्टियाँ पिछले 5 सालों से करती आ रही होती हैं। देश की राजनीति धीरे-धीरे खुद को आम चुनाव के लिए तैयार करने में जुट गई है। जहाँ सभी राजनीतिक पार्टियाँ अपने खेमे को मजबूत बनाने में कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">यूपीए गठबंधन के अलावा तीसरा महागठबंधन भी खुद को जनता का प्रतिनिधि बनने को तैयार</h2>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चुनाव हमेशा विकल्प का खेल होता है जिसमें जिस राजनीतिक पार्टी का ज्यादा बेहतर विकल्प जनता को बेहतर लगती है जनता भी उसी को चुनाव मेंं चुनने का काम करती है। मगर कभी-कभी ज्यादा विकल्प का खामियाजा भी जनता के लिए मुसीबत का सबब बन जाता है जैसा कि मौजूदा वक्त के अंदर देश की राजनीति में दिखाई दे रहा है। जहँ एनडीए और यूपीए गठबंधन के अलावा तीसरा महागठबंधन भी खुद को जनता का प्रतिनिधि बनने को तैयार करता नजर आ रहा है। इस तीसरे खेमे का प्रतिनिधित्व करने का काम दूसरी बार तेलंगाना से जीतने वाले मुख्यमंत्री ‘केसीआर’ कर रहे हैं। जिनका मानना है कि तीसरा दल देशवासियों को मोदी-राहुल सरकार से बेहतर विकल्प देने का काम करेगी’।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसका खामियाजा मोदी सरकार को आने वाले आम चुनाव में उठाना पड़ सकता है। लोकतंत्र में ज्यादा विकल्प भले ही अच्छे संकेत हैं मगर मौजूदा समय में यह विकल्प देश और देशवासियों की चिंंताओं को प्राथमिकता ना देते हुए ‘मोदी हटाओ या देश बचाओ और 70 साल देश बेहाल’ जैसे नारों पर ज्यादा केंद्रित है। जहाँ ना तो जनता की समस्या के कोई मायने हैं और ना ही कोई देश के विकास का कोई रोडमैप किसी राजनीतिक पार्टी के पास नजर आ रहा है।मौजूदा राजनीति में तीसरा मोर्चा कितना सफल हो पाएगा वह तो आने वाले वक्त ही बताएगा। मगर सबसे ज्यादा जरूरी है कि विपक्ष अपने एजेंडे को देश के सामने रखे जिससे देश की जनता को लगे कि विपक्षी दल सिर्फ मौजूदा सरकार को हटाने के लिए नहीं बल्कि देश के भविष्य को लेकर भी सोच रही है।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/editorial/election-agencies-with-development-agenda/article-7193</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Jan 2019 13:16:55 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साक्षरता के साथ ज्ञान एवं कौशल विकास भी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया से निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यूनेस्को ने 17 नवंबर, 1965 के दिन 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाने का फैसला लिया था। निरक्षरता अंधेरे और साक्षरता प्रकाश के समान है। आठ सितंबर 2018 को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस साक्षरता और कौशल विकास विषय के साथ दुनिया भर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/knowledge-and-ill-development-with-literacy-are-also-important/article-5794"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/artical-01.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दुनिया से निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यूनेस्को ने 17 नवंबर, 1965 के दिन 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाने का फैसला लिया था। निरक्षरता अंधेरे और साक्षरता प्रकाश के समान है। आठ सितंबर 2018 को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस साक्षरता और कौशल विकास विषय के साथ दुनिया भर में मनाया जाएगा। साक्षरता के साथ ज्ञान एवं कौशल विकास भी जरूरी है। ज्ञान एवं कौशल विकास के लिए साक्षर बनकर आगे बढ़ा जा सकता है। साक्षर, नवसाक्षर व असाक्षरों को साक्षर करने के बाद उन्हें कौशल उन्नयन से जोड़ा जाना और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करने की महती आवश्यकता है। शिक्षा चाहे जैसी भी हो वह अपने और परिवार के प्रति काम आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कौशल उन्नयन के क्षेत्र में और भी अधिक काम करने की आवश्यकता है कौशल प्रशिक्षण के बाद हितग्राहियों को रोजगार से जोड़ा जाना नितांत आवश्यक है। साक्षरता और कौशल विकास का चोली दामन का साथ है। साक्षरता की सफलता रोजगार से जुड़ी है। हम साक्षर व्यक्ति को रोजी रोटी की सुविधा सुलभ करा कर देश से निरक्षरता के अँधेरे को भगा सकते हंै। हालाँकि केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न स्तरों पर कौशल विकास के कार्यक्रम संचालित कर रही हैं मगर जब तक ऐसे व्यक्ति अपने पैरों पर खड़े नहीं होंगे तब तक साक्षरता अभियान को पूर्ण रूप से सफल नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">
साक्षरता का मतलब केवल पढ़ना-लिखना या शिक्षित होना ही नहीं है। यह लोगों में उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है। इसका सामाजिक एवं आर्थिक विकास से गहरा संबंध है। साक्षरता का कौशल मानव में आत्मविश्वास का संचार करता हैै। गरीबी उन्मूलन में इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। महिलाओं एवं पुरुषों के बीच समानता के लिए जरूरी है कि महिलाएं भी साक्षर बनें।<br />
जीने के लिये खाने की तरह ही साक्षरता भी महत्वपूर्णं है। गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ना बहुत जरुरी है। साक्षरता में वो क्षमता है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का उद्देश्य व्यक्ति, समुदाय तथा समाज के हर वर्ग को साक्षरता का महत्व बताकर उन्हें साक्षर करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">
साक्षरता एवं शिक्षा में बहुत बड़ा अंतर है। साक्षरता का आधार शिक्षा अर्जित करना होता है और शिक्षा का आधार ज्ञान। एक व्यक्ति बिना साक्षर हुए भी शिक्षित हो सकता है। साक्षरता एक मानव अधिकार है, सशक्तिकरण का मार्ग है और समाज तथा व्यक्ति के विकास का साधन है। लोकतंत्र की सुनिश्चितता के लिए साक्षरता आवश्यक है। वर्ष 2010 में जब बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का कानून 2009 लागू हुआ, यह देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। सभी के लिए प्रारंभिक शिक्षा की दिशा में देश के प्रयासों को इस कानून के लागू होने से जबरदस्त बढ़ावा मिला। आज शिक्षा का अर्थ केवल साक्षरता से लिया जाता है, आर्थिक प्रगति के लिए शिक्षा जरुरी है साक्षरता नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षित व्यक्ति अपनी आय का साधन बढ़ा सकता है और आये हुए धन को सहेज कर अमीर भी बन सकता है परन्तु साक्षर व्यक्ति ये काम नहीं कर सकता। यहाँ शिक्षा और साक्षरता का अंतर समझना बहुत जरुरी है. शिक्षा का अर्थ है किसी उपयोगी कल को सीखना जबकि साक्षरता केवल मात्र अक्षर ज्ञान है।<br />
साक्षरता दक्षता और व्यवहार वे शक्तिशाली साधन है, जो स्वास्थ्य की बेहतर संभावनाएँ निर्मित करने के लिए महिलाओं और पुरुषों में आवश्यक क्षमताओं तथा आत्मविश्वास को विकसित करती है। साक्षरता और स्वास्थ्य में भी गहरा संबंध है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाकर शिशु और मातृ मृत्युदर में कमी लाना, लोगों को जनसंख्या विस्फोट के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना इसके उद्देश्यों में शामिल है। साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ने-लिखने और हिसाब-किताब करने की योग्यता प्राप्त करना ही नहीं है, बल्कि हमें नवसाक्षरों में नैतिक मूल्यों के प्रति आदरभाव रखने की भावना पैदा करना होगी।</p>
<p style="text-align:right;">बाल मुकंद ओझा</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Sep 2018 08:41:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ठेकेदार द्वारा टैंडरों प्रति नहीं दिखाई गई रुचि</title>
                                    <description><![CDATA[दो करोड़ की राशि के बावजूद नहीं हो सके विकास कार्य लुधियाना/रायकोट(राम गोपाल रायकोटी)। रायकोट शहर की मुख्य सड़को व गलियों की हालत दयनीय बनी हुई है। शहर के विकास कामों में लम्बे समय से रुकावट आई हुई है। कुछ समय पहले नगर कौंसिल विकास के कामों में आई रुकावट के संबंध में बुरी वित्तीय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/contractors-did-not-get-money-stop-development-work/article-4863"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/tender.jpg" alt=""></a><br /><h1>दो करोड़ की राशि के बावजूद नहीं हो सके विकास कार्य</h1>
<p style="text-align:justify;">
<strong>लुधियाना/रायकोट(राम गोपाल रायकोटी)।</strong> रायकोट शहर की मुख्य सड़को व गलियों की हालत दयनीय बनी हुई है। शहर के विकास कामों में लम्बे समय से रुकावट आई हुई है। कुछ समय पहले नगर कौंसिल विकास के कामों में आई रुकावट के संबंध में बुरी वित्तीय हालत का हवाला दिया जाता था परंतु पिछले छह माह से कौंसिल के पास विकास कामों के लिए दो करोड़ की राशि अनुदान राशि के तौर पर आई हुई है फिर भी शहर में किसी भी नए विकास काम को अब तक शुरू नहीं करवाया जा सका है। जिक्रयोग्य है कि पंजाब सरकार द्वारा शहर के विकास के लिए नगर कौंसिल रायकोट को आज से करीब छह माह पहले दो करोड़ रुपये की अनुदान राशि का चैक भेजा गया था, परंतु अब तक नगर कौंसिल इस दो करोड़ की रकम के साथ शहर में किसी भी विकास काम को शुरू नहीं करवा सकी है।</p>
<h1>ठेकेदार द्वारा इन टैंडरों प्रति अपनी रुचि नहीं दिखाई</h1>
<p style="text-align:justify;">
बेशक नगर कौंसिल द्वारा शहर के अलग-अलग विकास कामों के लिए कई बार अखबारों में विज्ञापन देकर कामों के लिए टैंडरों की मांंग की गई है, परंतु अब तक किसी भी ठेकेदार द्वारा इन टैंडरों प्रति अपनी रुचि नहीं दिखाई गई है, जिस कारण शहर के विकास काम पूरी तरह ठप्प हो चुके हैं। जब इस संबंधी एक ठेकेदार के साथ बात की गई तो उसने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार ने टैंडर डालने के लिए नियम ही ऐसे बना दिए हैं कि कोई भी ठेकेदार काम के लिए आगे नहीं आ रहा। नियमों अनुसार एक काम के लिए तीन टैंडर डाले जाने जरूरी हैं। उस के अलावा काम लेने वाले ठेकेदार की कुल रकम का 30 प्रतिशत सरकार की तरफ से अपने के पास रिजर्व रखा जाता है, जिसकी अदायगी काम मुकम्मल होने के बाद भी आसानी के साथ नहीं होती है।</p>
<h1>कई सालों से नगर कौंसिल की तरफ बकाया पड़े हैं ठेकेदारों के लाखों रुपये</h1>
<p style="text-align:justify;">एक अन्य कारण नगर कौंसिल द्वारा किए जाने वाले कामों की अदायगी में देरी होना भी है। उन्होंने बताया कि अब तक ठेकेदारों द्वारा किए कामों के लाखों रु पये पिछले कई सालों से नगर कौंसिल की तरफ बकाया पड़े हैं, जिनकी अदायगी नहीं की जा रही है, जिस कारण ठेकेदारों को काम चलाने काफी कठिन हो गए हैं। अगर विकास काम शुरू न हुए तो विकास कामों के लिए आई दो करोड़ की रकम वापिस भी जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी जब नगर कौंसिल के अध्यक्ष सलिल जैन से बात की गई तो उनका कहना था कि ठेकेदारों की 30 प्रतिशत रकम की अदायगी सरकारी नियमों कारण ही कौंसिल द्वारा रोकी जाती है, जो कि ठेकेदारों को काम मुकम्मल होने के बाद सारी कागजी कार्रवाई व किये कामों प्रति संतुष्टि के बाद ही की जाती है। विकास कामों में आई रुकावट संबधी उन्होंने कहा कि कामों के टैंडर डाले जा चुके हैं जो कुछ दिनों में खुल जाएंगे, जिस के बाद शहर के विकास काम शुरू हो जाएंगे।ठेकेदारों की रोकी गई अदायगी के संबंध में जब नगर कौंसिल के कार्य कारी अधिकारी बलवीर सिंह गिल के साथ बात की तो उनका कहना था कि अदायगी उन कुछ ठेकेदारों की रोकी गई है जिनके कामों के सम्बन्ध कोई आपत्ति जताई गई है, उन्होंने कहा कि ठेकेदार आपत्तियों का निपटारा कर दें, कौंसिल उनकी अदायगी साथ ही कर देगी।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/contractors-did-not-get-money-stop-development-work/article-4863</link>
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                <pubDate>Mon, 16 Jul 2018 04:50:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकास के मुद्दे पर लडेगें चुनाव: सैनी</title>
                                    <description><![CDATA[अगला विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जायेगा सीकर। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन लाल सैनी ने कहा है कि अगला विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जायेगा। श्री सैनी ने आज यहां पत्रकारों से कहा कि पार्टी चुनाव में जाति ,धर्म के मुद्दे नहीं उठाकर विकास को मुद्दा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1>अगला विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जायेगा</h1>
<p><strong>सीकर।</strong></p>
<p>भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन लाल सैनी ने कहा है कि अगला विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जायेगा। श्री सैनी ने आज यहां पत्रकारों से कहा कि पार्टी चुनाव में जाति ,धर्म के मुद्दे नहीं उठाकर विकास को मुद्दा बनायेगी। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्ष में भजपा सरकार में काफी काम हुआ है। उन्होंने दोहराया कि वह अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाकर ही घर में प्रवेश करेगें। पार्टी दफ्तर में वह रात -दिन कार्यकतार्ओं की सुनवाई करेगें। भाजपा मे विवाद को खारिज करते हुए श्री सैनी ने कहा कि पार्टी एक है तथा सभी नेता मिलकर चुनाव लडेंगें। शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी एवं चिकित्सा राज्य मंत्री बंशीधर बाजिया के बीच विवाद को सोशल मीडिया की उपज बताते हुए कहा कि तेज आवाज में बातचीत को झगड़ा नहीं कहा जा सकता।श्री सैनी ने कहा कि उन्हें जातीय आधार पर पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनाया। मैं सभी को साथ लेकर काम करूंगा। उन्होंने सालासर बालाजी के दर्शन भी किये ।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/saini-contest-development-issue/article-4651</link>
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                <pubDate>Wed, 04 Jul 2018 00:46:07 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा में कौशल विकास के डेढ़ सौ कार्यक्रम शुरू होंगे: मनो</title>
                                    <description><![CDATA[कौशल विकास के इस क्रम को अन्य युवाओं तक भी पहुंचाना है चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा सरकार कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए डेढ़ सौ प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ‘इंडिया स्कील्स कंपीटिशन वेस्ट 2018’ में विजेता रहे राज्य के 15 कौशल युवाओं को सम्मानित करते […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hundred-programs-of-ill-development/article-4311"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/mnohar-lal.jpg" alt=""></a><br /><h1>कौशल विकास के इस क्रम को अन्य युवाओं तक भी पहुंचाना है</h1>
<p><strong>चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा सरकार कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए डेढ़ सौ प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ‘इंडिया स्कील्स कंपीटिशन वेस्ट 2018’ में विजेता रहे राज्य के 15 कौशल युवाओं को सम्मानित करते हुए कहा कि सरकार की कौशल विकास के 150 प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करने की योजना है। उन्होंने विजेता कौशल युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि कौशल विकास के इस क्रम को अन्य युवाओं तक भी पहुंचाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा कौशल विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा हरियाणा कौशल विकास मिशन के उपाध्यक्ष टी सी गुप्ता ने बताया कि इस प्रतियोगिता में महाराष्ट्र के बाद हरियाणा ने सर्वाधिक स्थान प्राप्त किए हैं। हरियाणा विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति एवं हरियाणा कौशल विकास मिशन के मिशन निदेशक राज नेहरू ने कौशल विकास कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hundred-programs-of-ill-development/article-4311</link>
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                <pubDate>Tue, 19 Jun 2018 09:14:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी आज छत्तीसगढ़ में विकास यात्रा पर</title>
                                    <description><![CDATA[भिलाई (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज छत्तीसगढ़ की राजधानी नया रायपुर और भिलाई में इस्पात संयंत्र की विस्तार योजना तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी) का शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री की एक दिवसीय इस यात्रा के दौरान कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा। इनमें भारतनेट परियोजना का भूमि पूजन, छत्तीसगढ़ में उड़ान परियोजना की शुरुआत और नया रायपुर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/modi-today-on-the-development-visit-to-chhattisgarh/article-4149"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/pm-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भिलाई (एजेंसी)। </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज छत्तीसगढ़ की राजधानी नया रायपुर और भिलाई में इस्पात संयंत्र की विस्तार योजना तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी) का शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री की एक दिवसीय इस यात्रा के दौरान कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा। इनमें भारतनेट परियोजना का भूमि पूजन, छत्तीसगढ़ में उड़ान परियोजना की शुरुआत और नया रायपुर में स्मार्ट सिटी के तहत इंटीग्रेटेड कमांड एण्ड कंट्रोल सेंटर का उद्घाटन शामिल है। इस अवसर पर नागरिक उड्डयन तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु, संचार मंत्री मनोज सिन्हा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी, इस्पात मंत्री चौधरी बिरेन्द्र सिंह और मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह मौजूद रहेंगे। श्री मोदी भिलाई इस्पात संयंत्र की अत्याधुनिक विस्तारित इकाई राष्ट्र को समर्पित करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस इकाई को बनाने में ऐसी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया है जिससे उत्पादन और गुणवत्ता तो बढ़ेगी ही साथ में ऊर्जा की बचत होगी और पर्यावरण का भी संरक्षण किया जा सकेगा। इसके साथ ही वह भारतनेट के दूसरे चरण का शुभारंभ भी करेंगे। भारत नेट परियोजना में ग्राम पंचायतों को भूमिगत आॅप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा जायेगा।प्रधानमंत्री जगदलपुर और रायपुर के बीच विमान सेवा का शुभारंभ भी करेंगे। वह विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाभकर्ताओं को लैपटॉप, प्रमाणपत्र और चैक वितरण करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। वह नया रायपुर स्मार्ट शहर का दौरा करेंगे और शहर के लिए एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र का उद्घाटन करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Jun 2018 08:31:56 +0530</pubDate>
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