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                <title>जीएसटी कानून एक कमियां अनेक</title>
                                    <description><![CDATA[50 से अधिक वस्तुओं पर टैक्स की दर में कटौती नहीं की गई, जीएसटी की पहली वर्षगांठ मनाने के बाद भी इस टैक्स की उलझनों से सरकार बाहर नहीं आ पाई। व्यापारी वर्ग तो परेशान था ही बल्कि राज्य सरकारों को भी इसमें बार-बार लेकिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीते दिनों 50 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/many-drawbacks-in-gst-law/article-4994"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/gst.jpg" alt=""></a><br /><h2>50 से अधिक वस्तुओं पर टैक्स की दर में कटौती नहीं की गई,</h2>
<p style="text-align:justify;">जीएसटी की पहली वर्षगांठ मनाने के बाद भी इस टैक्स की उलझनों से सरकार बाहर नहीं आ पाई। व्यापारी वर्ग तो परेशान था ही बल्कि राज्य सरकारों को भी इसमें बार-बार लेकिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीते दिनों 50 से अधिक वस्तुओं पर टैक्स की दर में कटौती नहीं ही की गई, कई उत्पादों को 28 फीसदी टैक्स की सूचि से निकालकर नीचे किया गया है। हालांकि सरकार ने टैक्स लागू होने का एक वर्ष पूरा होने पर राजस्व में भारी बढ़ोत्तरी का दावा किया है, लेकिन अभी भी कई राज्यों द्वारा टैक्स की व्यवस्था में कमियों का मुद्दा उठाया जा रहा है।</p>
<h2>पंजाब व बिहार सहित कई राज्यों ने राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर जीएसटी लागू किया था</h2>
<p style="text-align:justify;">टैक्स दरों में कटौती के साथ विपक्षी पार्टियों की आपत्ति की पुष्टि हो जाती है। जीएसटी का विरोध सिर्फ पार्टीबाजी के कारण ही नहीं हुआ बल्कि आर्थिक विशेषज्ञों ने इसमें कमियों का भी जिक्र किया। पंजाब व बिहार सहित कई राज्यों ने राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर जीएसटी लागू किया था। भाजपा के पूर्व नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा भी जीएसटी में सुधारों की बात करते आएं हैं। विरोध को शांत करने के लिए सरकार समय-समय पर टैक्स में कटौती करती आई है। मसला विरोध शांत करने का नहीं बल्कि देश को एक दुरूस्त व टिकाऊ टैक्स प्रणाली देने की आवश्यकता है।</p>
<h2>सबसे बड़ी आपत्ति टैक्स की 28 फीसद दर पर है</h2>
<p style="text-align:justify;">सबसे बड़ी आपत्ति टैक्स की 28 फीसद दर पर है। सुधार की मांग थी तब न चाहते हुए भी इस दर को ही घटाया गया। नि:संदेह एक देश, एक टैक्स जरूरी है, लेकिन किसी ऐतिहासिक पहल के लिए बड़ी तैयारी की जरूरत रहती है। हमारे शासन-प्रशासन में यह आदत बन गई है कि किसी भी कार्य को पेशेवर तरीके से करने की बजाए उसे राजनीतिक नजरिये से देखा जाता है। वित्त विशेषज्ञों की यह आपत्ति जायज है कि कानून को मानसून सैशन में पास करवाने के लिए रिव्यू समिति की सिफारिशों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया।</p>
<h2>बाजार में मांग कम होने के कारण कारखाने ठप्प हो गए</h2>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह राज्यों व टैक्स देने वाले लोगों के सदस्यों को शामिल नहीं किया गया। कोई भी कानून जनता की बेहतरी के लिए है, उसमें समय की मांग अनुसार बदलाव आवश्यक है, लेकिन थोड़े समय बाद ही बड़े बदलाव कहीं न कहीं मुद्दे में गंभीरता की कमी को प्रदर्शित करते हैं। जीएसटी के कारण उद्योग धंधे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। बाजार में मांग कम होने के कारण कारखाने ठप्प हो गए हैं। एसोचैम ने भी सरकार की नीतियों में बड़े बदलावों को उद्योगों के लिए जोखिम भरा करार दिया है। सरकार जीएसटी की प्रतिष्ठा को बहाल करने के लिए ठोस नीति अपनाए ताकि विकास के लिए कानून रूकावट न बनें।</p>
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                <pubDate>Tue, 24 Jul 2018 03:55:07 +0530</pubDate>
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