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                <title>संसदीय मर्यादा का पालन करें ममता बनर्जी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर अपने तीखे तेवरों व अशिष्ट बोली के लिए चर्चा में हैं। बनर्जी ने मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी को भाजपा का तोता कह दिया है। राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के मध्य कई बार अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से होने के चलते संबंधों में तनाव आ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/mamata-banerjee-to-follow-parliamentary-limit/article-2036"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/mamata.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर अपने तीखे तेवरों व अशिष्ट बोली के लिए चर्चा में हैं। बनर्जी ने मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी को भाजपा का तोता कह दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के मध्य कई बार अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से होने के चलते संबंधों में तनाव आ जाता है, परंतु मुख्यमंत्री की ओर से राज्यपाल के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग बेहद निंदनीय है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य में यदि लॉ एंड आर्डर की स्थिति बिगड़ती है, राज्य सरकार तनाव व दंगे की परिस्थितियों को सूझबूझ की बजाए हठधर्मिता से ठीक करती है तब राज्यपाल मुख्यमंत्री को अपनी सलाह दे सकते हैं कि किस तरह राज्य में अमन-शांति रखी जाए। आखिर राज्यपाल भारतीय शासन व्यवस्था में राज्य सरकार का प्रमुख है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री व मंत्रीमंडल में हालांकि व्यवहारिक शक्तियां निहित रहती हैं, लेकिन उनका वास्तविक धारक राज्यपाल ही है। अब अगर राज्यपाल राज्य के शासन में अच्छे-बुरे पर कुछ बोल ही नहीं सकता, तब वह अपने संवैधानिक दायित्वों को भला कैसे निभा पाएगा?</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक पश्चिम बंगाल की बात है, ममता बनर्जी हर मामले में केन्द्र सरकार के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर लेती हैं। उन्हें भाजपा सरकार के हर निर्णय में साजिश की बू नजर आती है। अनेक दफा उन्हें राज्य सरकार की नाकामियों को छुपाने के लिए ठीकरा केन्द्र सरकार के सिर फोड़ा है। यह बिना तोल-मोल की भाषा ही है, जिस कारण ममता बनर्जी सुर्खियों में बनी रहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ताजा घटनाक्रम में ममता बनर्जी ने हदें ही पार कर दी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री व राज्यपाल के बीच विचार-विमर्श की गोपनियता की परम्परा का भी अपमान किया है। परिस्थितियां ऐसी हो गई हैं कि पश्चिम बंगाल में संसदीय मर्यादा एक तमाशा बन गई है। जबकि देश में पश्चिम बंगाल के बाहर संसदीय मर्यादाओं की बेहतरीन मिसालें भी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा से हैं, जिसके कि कांग्रेस से राजनीतिक व सैद्धांतिक बहुत ज्यादा मतभेद हैं। उधर, राष्ट्रपतिप्रणब मुखर्जी कांग्रेस पृष्ठभूमि से आए हैं, फिर भी दोनों नेताओं का संवैधानिक एवं व्यक्तिगत तालमेल बहुत ही प्रशंसनीय रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अभी राष्ट्रपति पद से प्रणब मुखर्जी की विदाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि श्री मुखर्जी ने एक पिता की तरह केन्द्र सरकार को दिशा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही चंद घटनाओं पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने केन्द्र सरकार को सार्वजनिक मंचों से अपने दायित्व निभाने के लिए भी निर्देशित किया। ममता बनर्जी को केन्द्र में प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति पद पर आसीन व्यक्तियों से प्रेरणा लेनी चाहिए। अगर सुश्री बनर्जी को राज्यपाल की किसी बात पर असंतोष था, तब उनका नाराजगी व्यक्त करने का अंदाज सभ्य होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यपाल कोई क्लर्क नहीं है कि उन्हें ट्वीट किया जाए। उनसे वक्त लेकर शांति से बात की जानी चाहिए। आखिर मुख्यमंत्री के भी तो कुछ कर्त्तव्य हैं। राजनीति, राजनीतिक दलों तक ही सीमित रहे। राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री जैसे सम्मानित पदों को इसमें न उलझाया जाए। फिर अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए राज्यपाल को निशाना बनाना तो कतई उचित नहीं। संविधान सर्वोपरि है, उसका सम्मान करना प्रत्येक भारतीय का धर्म है, कर्त्तव्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 22:46:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>धर्म के पालन का संदेश दे गया गीता जयंती उत्सव</title>
                                    <description><![CDATA[गीता जयंती उत्सव। अगले साल के लिए अभी से तैयारियों में जुटे शिल्पकार व कलाकार अगले साल नई शिल्पकला संग हाजिर होंगे कलाकार इस बार खूब हुई पीतल मूर्तियों की बिक्री Kurkshetra, SachKahoon News:  कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतर्राष्टÑीय गीता जयंती उत्सव इस बार फिर धर्म के पालन व विश्व शांति का संदेश दे गया। देश-विदेश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/follow-the-religion-message-by-gita-jayanti-celebration/article-482"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/02-12.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>गीता जयंती उत्सव। अगले साल के लिए अभी से तैयारियों में जुटे शिल्पकार व कलाकार</strong></li>
<li><strong>अगले साल नई शिल्पकला संग हाजिर होंगे कलाकार </strong></li>
<li><strong>इस बार खूब हुई पीतल मूर्तियों की बिक्री </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Kurkshetra, SachKahoon News:</strong>  कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतर्राष्टÑीय गीता जयंती उत्सव इस बार फिर धर्म के पालन व विश्व शांति का संदेश दे गया। देश-विदेश से आने वाले शिल्पकार, पर्यटकों और शहरवासियों को 2017 के गीता जयंती महोत्सव का बेसब्री से इंतजार रहेगा। कई जाने-माने शिल्पकारों ने अभी से ही वर्ष 2017 के महोत्सव के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। अहम पहलु यह है कि 2016 शिल्पकारों के लिए अच्छा साबित हुआ हैं। इससे प्रोत्साहित होकर शिल्पकार अगले साल आने वाले महोत्सव नई शिल्प कला को लेकर पहुंचेंगे। अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव-2016 का शिल्प और सरस मेला रविवार को शिल्पकला और संस्कृति के संगम के साथ संपन्न हुआ। शिल्पकारों का कहना है कि अन्य महोत्सवों व मेलो से ज्यादा गीता जयंती महोत्सव में उनकी कला के कद्रदान पहुंचते हैं और पूरे उत्साह के साथ उनके द्वारा बनाए शिल्प की खरीददारी करते हैं। उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ से पीतल की मूर्तियां लेकर पहुंचे दलीप चौरसिया ने बताया कि गीता जयंती महोत्सव में पीतल की मूर्तियों की पर्यटकों ने जमकर खरीददारी की है। अगली बार वे मेले में पीतल की श्रीमद्भागवत गीता लेकर पहुंचेंगे। इसमें गीता के 18 शखेक अंकित होंगे। जयपुर से पहुंची पेंटिंग कलाकार वर्षा का कहना है कि कपड़े की मखमली पेंटिंग को पर्यटकों ने खूब पंसद किया है, अगली बार वे गीता जयंती महोत्सव में धर्मनगरी के पर्यटन स्थलों की पेंटिंग लेकर पहुंचेंगी, क्योंकि पर्यटक गीता जयंती पर धार्मिकता से जुड़ी पेंटिंग को खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते है।</p>
<p><strong>पर्यटकों पसंद आई जैमस्टोन पेंटिंग</strong><br />
जयपुर के मोहन लाल सैनी प्राकृतिक राशि नगों के चूरे से पेंटिंग बनाने के लिए मशहुर है। प्रदर्शनी में उनकी जैमस्टोन पेंटिंग लोगों द्वारा खुब पसंद की गई। उनकी पेंटिंग की कीमत 100 रुपए से शुरू है और 5 हजार रुपए तक की पेंटिंग भी लोगों द्वारा खरीदी गई। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा बनाई गई की-रिंग डायरी महोत्सव में पहुंचने वाले पर्यटकों को खूब भायी। मेले में सबसे कम कीमत वाली उनकी कलात्मकता के क्रददान मेले में सबसे ज्यादा मिले।</p>
<p><strong>विदेशों में भी है पसमीना शाल की डिमांड</strong><br />
अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में कश्मीर से आएं शिल्पकार फिरोज अहमद का कहना है कि विदेशों में भी पसमीना शाल की अच्छी-खासी डिमांड है। इस बार आस्ट्रिया, इंडोनेशिया, कनाडा, आस्टेलिया व जापान से विदेशी पर्यटक व कलाकार महोत्सव में पहुंचे। उन्होंने पसमीना शाल की कास्तकारी की तारीफ की और खरदीदारी में भी दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने बताया कि देश के हर हिस्से में पसमीना शाल के कद्रदान है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक लगने वाले प्रांतीय मेलों में पसमीना शाल अच्छी मांग रहती है।</p>
<p><strong>खादी की मोदी जैकेट बिकी हाथों-हाथ</strong><br />
खादी ग्रामोउद्योग मंडल कुरुक्षेत्र के लिए अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव खास रहा हैं। इस खादी की स्टाल पर मोदी जैकेट को लोगों ने खूब पसंद किया। खादी ग्रामोउद्योग मंडल के मैनेजर सतपाल सैनी ने बातचीत करते हुए बताया कि यह महोत्सव खादी वस्त्रों के लिए खास रहा हैं। इस बार लोगों ने खादी वस्त्र खूब खरीदे हैं। इस बार पर्यटकों के लिए मोदी जैकेट, महिला कोट व डब्बी जैकेट विशेष रुप से तैयार करके लाएं थे और लोगों ने इन जैकेटो को सबसे ज्यादा पसंद किया। उन्होंने पर्यटकों के साथ-साथ अच्छे प्रबंध करने के लिए जिला प्रशासन का भी आभार व्यक्त किया हैं।</p>
<p><strong>वुडन लुक के टेराकोटा पोट भी खूब बिके</strong><br />
चंड़ीगढ़ से मामचंद मेले में वुडन लुक वाले टेराकोटा पोट लेकर लेकर आएं जिसे लोगों ने जमकर खरीदा। इन टेराकोटा पोट पर हस्तशिल्प कला ने पर्यटकों को आकर्षित किया। पोट की इस खासियत ने ही पर्यटकों को अपनी तरफ खींचा। मामंचद का कहना है कि टेरोकोटा पोट तो बहुत शिल्पी बनाते है, लेकिन उनके द्वारा बनाए गए पोट वुडन लुक होने के चलते सबसे अलग थे। खासतौर पर यह घर के इंटिरियर से मेल खाते है।</p>
<p><strong>पश्चिम बंगाल का कॉटन सिल्क भी खूब भाया</strong><br />
गीता जयंती महोत्सव में पश्चिम बंगाल से आए आलोक कुमार जना का कहना हैं कि यह महोत्सव सबसे ज्यादा अच्छा साबित हुआ हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आंनद लेने के साथ-साथ लोगों ने पश्चिम बंगाल का कॉटन सिल्क खूब पंसद किया। वे पिछले 6 सालों से गीता जयंती में आ रहे हैं और यह महोत्सव सबसे अच्छा रहा हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Dec 2016 00:28:24 +0530</pubDate>
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