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                <title>Lunar Eclipse - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Lunar Eclipse RSS Feed</description>
                
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                <title>चंद्रग्रहण से पहले ही भूकंप से सहमा जापान | Earthquake</title>
                                    <description><![CDATA[टोक्यो (एजेंसी)। जापान के मध्यवर्ती प्रान्त इशिकावा और (Earthquake) आसपास के इलाकों में शुक्रवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (जेएमए) ने बताया कि स्थानीय समयानुसार अपराह्न 02:42 बजे आये इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.3 मापी गयी।इसका केंद्र सतह से 10 किमी की गहराई पर था। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/earthquake-in-japan-today/article-47215"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/earthquake.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>टोक्यो (एजेंसी)।</strong> जापान के मध्यवर्ती प्रान्त इशिकावा और (Earthquake) आसपास के इलाकों में शुक्रवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (जेएमए) ने बताया कि स्थानीय समयानुसार अपराह्न 02:42 बजे आये इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.3 मापी गयी।इसका केंद्र सतह से 10 किमी की गहराई पर था। भूकंप से जान-माल के नुकसान की फिलहाल कोई रिपोर्ट नहीं है <strong>।</strong></p>
<h2>भूकंप के दौरान ऐसा करने से बचें | Earthquake</h2>
<ul>
<li><strong>– भूकंप के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल न करें।</strong></li>
<li><strong>– बाहर जाने के लिए लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।</strong></li>
<li><strong>– कहीं फंस गए हों तो दौड़ें नहीं।</strong></li>
<li><strong>– अगर गाड़ी या कोई भी वाहन चला रहे हो तो उसे फौरन रोक दें।</strong></li>
<li><strong>– वाहन चला रहे हैं तो पुल से दूर सड़क के किनारे गाड़ी रोक लें।</strong></li>
<li><strong>– भूकंप आने पर तुरंत सुरक्षित और खुले मैदान में जाएं।</strong></li>
<li><strong>– भूकंप आने पर खिड़की, अलमारी, पंखे आदि ऊपर रखे भारी सामान से दूर हट जाएं।</strong></li>
</ul>
<h2>क्या होता है रिक्टर स्केल</h2>
<p>भूकंप के समय भूमि में हुई कंपन को रिक्टर स्केल या मैग्नीट्यूड कहा जाता है। रिक्टर स्केल का पूरा नाम रिक्टर परिणाम परीक्षण ( रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल ) है। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर जितनी ज्यादा होती है, भूमि में उतना ही अधिक कंपन होता है। जैसे-जैसे भूकंप की तीव्रता बढ़ती है नुकसान भी ज्यादा होता है। जैसे रिक्टर स्केल पर 8 की तीव्रता वाला भूकंप ज्यादा नुकसान करेगा। वहीं 3 या 4 की तीव्रता वाला भूकंप हल्का होगा।</p>
<h2>भूकंप की तीव्रता के हिसाब से क्‍या हो सकता है असर | Earthquake</h2>
<ul>
<li><strong> 0 से 1.9 की तीव्रता वाले भूकंप का पता सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही चलता है।</strong></li>
<li><strong> 2 से 2.9 की तीव्रता वाले भूकंप से सिर्फ हल्की कंपन होती है।</strong></li>
<li><strong> 3 से 3.9 की तीव्रता वाले भूकंप के दैरान ऐसा लगता की कोई ट्रक आपके बगल से गुजरा हो।</strong></li>
<li><strong> 4 से 4.9 की तीव्रता वाला भूकंप खिड़कियां तोड़ सकता हैं।</strong></li>
<li><strong> 5 से 5.9 की तीव्रता पर घर का सामान हिल सकता है।</strong></li>
<li><strong> 6 से 6.9 की तीव्रता वाले भूकंप से इमारतों की नींव में दरार आ सकती है।</strong></li>
<li><strong> 7 से 7.9 की तीव्रता वाला भूकंप इमारतों को गिरा सकता है।</strong></li>
<li><strong> 8 से 8.9 की तीव्रता वाला भूकंप आने पर बड़े पुल भी गिर सकते हैं।</strong></li>
<li><strong> 9 से ज्यादा की तीव्रता वाले भूकंप पूरी तरह से तबाही मचा सकते हैं।</strong></li>
<li><strong>अगर समंदर नजदीक हो तो सुनामी भी आ सकती है।</strong></li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 May 2023 18:49:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चंद्रग्रहण का आंशिक चरण भारत में 26 मई को दिखाई देगा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारत में 26 मई को चंद्र ग्रहण का आंशिक चरण दिखाई देगा और यह चंद्रमा के उदय होने के तत्काल बाद देश के उत्तर पूर्वी हिस्सों (सिक्किम को छोड़कर), पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों, ओड़िशा के कुछ तटीय भागों तथा अंडमान एवं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/partial-phase-of-lunar-eclipse-will-appear-in-india-on-26-may/article-23867"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/lunar-eclipse.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारत में 26 मई को चंद्र ग्रहण का आंशिक चरण दिखाई देगा और यह चंद्रमा के उदय होने के तत्काल बाद देश के उत्तर पूर्वी हिस्सों (सिक्किम को छोड़कर), पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों, ओड़िशा के कुछ तटीय भागों तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह से दिखाई देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह ग्रहण दक्षिण अमरीका, उत्तर अमरीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्टिका, प्रशांत महासागर तथा हिंद महासागर के क्षेत्रों में दिखाई देगा। ग्रहण की आंशिक प्रावस्था का प्रारम्भ भारतीय मानक समयानुसार(आईएसटी). 1515 पर होगा। ग्रहण की पूर्णावस्था 1639 पर आरम्भ होगी ।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रहण की पूर्णावस्था का अंत 1658 पर होगा तथा इसकी आंशिक प्रावस्था का अंत 1823 होगा। 19 नवम्बर 2021 को होने वाला अगला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा । यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को होता है जब पृथ्वी सूर्य एवं चंद्रमा के बीच आ जाती है तथा ये तीनों एक सीधी रेखा में स्थित रहते हैं ।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्ण चंद्र ग्रहण तब घटित होता है जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया से ढक जाता है तथा आंशिक चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा का एक हिस्सा ही पृथ्वी की छाया से ढक जाता है।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 May 2021 18:26:01 +0530</pubDate>
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                <title>21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण आज</title>
                                    <description><![CDATA[एक ही रात में तीन खगोलीय घटनाएं नई दिल्ली (एजेंसी) । 27 जुलाई शुक्रवार यानी पूर्ण चंद्रग्रहण की रात बेहद खास खगोलीय घटनाओं में शुमार होने जा रही है। मंगल ग्रह 21वीं शताब्दी के सर्वाधिक लंबे चंद्रग्रहण का गवाह बनेगा, वहीं आसमानी आतिशबाजी इस घटना को रोमांचकारी बनाएगी। इस रात डेल्टा एक्वारिड्स उल्का वृष्टि चरम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/longest-lunar-eclipse-of-the-21st-century-today/article-5021"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/chandergareng.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">एक ही रात में तीन खगोलीय घटनाएं</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी) ।</strong> 27 जुलाई शुक्रवार यानी पूर्ण चंद्रग्रहण की रात बेहद खास खगोलीय घटनाओं में शुमार होने जा रही है। मंगल ग्रह 21वीं शताब्दी के सर्वाधिक लंबे चंद्रग्रहण का गवाह बनेगा, वहीं आसमानी आतिशबाजी इस घटना को रोमांचकारी बनाएगी। इस रात डेल्टा एक्वारिड्स उल्का वृष्टि चरम पर रहने वाली है। एक ही रात में होने जा रही तीन आकर्षक खगोलीय घटनाएं इसे यादगार बनाने जा रही हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">रात 11.55 से 3.49 बजे तक 03.54 घंटे रहेगा चंद्रग्रहण</h2>
<p style="text-align:justify;">चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना तो आधी रात से शुरू होगी। इससे पहले शाम ढलते ही लाल ग्रह पूरब दिशा में अनूठी चमक बिखेरते हुए उदय हो रहा होगा। इसके बाद पूर्ण खिला हुआ चांद नजर आएगा। इस बीच खास बात यह होगी कि आसमानी आतिशबाजी के रूप में जलती हुई चमकदार उल्काएं आसमान से धरती की ओर गिरने लगेंगी। जिन्हे सूर्यास्त के समय देखने की अधिक संभावना है।</p>
<h2>मंगल व चंद्रमा एक दूसरे के बेहद करीब नजर आएंगे</h2>
<p style="text-align:justify;">वहीं पूर्ण ग्रहण के दौरान के अलावा सूर्योदय से पहले देखे जाने की संभावना है। इस बीच मंगल व चंद्रमा एक दूसरे के बेहद करीब नजर आएंगे। मंगल की चमक अपनी औसत चमक से करीब 12 गुना अधिक होगी। आसमानी आतिशबाजी में डेल्टा एक्वारिड्स उल्का वृष्टि 27 जुलाई की रात चरम पर रहने वाली है। इसके बाद भी इसे अगस्त माह तक देखा जा सकेगा। चंद्रग्रहण रात 11.55 बजे शुरू हो जाएगा। एक बजे पूर्ण ग्रहण लगा चांद नजर आने लगेगा, जो 2.43 बजे तक पूरी तरह धरती की छाया के आगोश में रहेगा। 3.49 बजे चंद्रमा ग्रहण से मुक्त हो जाएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">होगा चंद्रग्रहण, नजरें होंगी मंगल पर</h2>
<p style="text-align:justify;">मंगल इन दिनों हमारे सर्वाधिक करीब आ पहुंचा है। यह संयोग पिछले 60 हजार साल में दूसरी बार बनने जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2003 में मंगल हमारे सर्वाधिक नजदीक पहुंचा था। आर्यभटट् प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वरिष्ठ खगोलीय वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे के अनुसार यह तीनों घटनाएं खगोलीय दृष्टि से बेहद खास हैं। वहीं वैज्ञानिक नजरिए से मंगल ग्रह अध्ययन के लिए खास होगा। मंगल मिशन के लिए भावी योजनाओं के अलावा इन दिनों मंगल के वातावरण पर छाए धूल के गुबार का अध्ययन किए जाने में मदद मिलेगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">इसलिए कहते हैं ‘ब्लड मून’</h2>
<p style="text-align:justify;">पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा जब पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है तो वह नाटकीय रूप से चमकीले नारंगी रंग से लाल रंग का हो जाता है। यही कारण है कि इस अवधि में उसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। सूतक काल दोपहर 2.55 बजे से धर्मशास्त्र के अनुसार, सूर्य ग्रहण में 12 घंटे व चंद्रग्रहण में नौ घंटे पूर्व सूतक लग जाता है। इस लिहाज से सूतक काल दोपहर 2.55 बजे से होगा।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Jul 2018 02:21:49 +0530</pubDate>
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