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                <title>NRC - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Budget session : सीएए-एनआरसी के मुद्दे पर आज संसद में हंगामे के आसार</title>
                                    <description><![CDATA[संसद के बजट सत्र में सोमवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के मुद्दे पर हंगामे के आसार हैं। कांग्रेस, तृणमूल, माकपा और राजद समेत विपक्षी दलों ने मोदी सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/budget-session-uproar-in-parliament-today-on-the-issue-of-caa-nrc/article-12901"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/budget-session.jpg" alt=""></a><br /><h2>विपक्ष ने राज्यसभा में इन मुद्दाें पर तत्काल चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया |Budget session</h2>
<h6>Edited By Vijay Sharma</h6>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> संसद के बजट सत्र <strong>(Budget session )</strong> में सोमवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के मुद्दे पर हंगामे के आसार हैं। कांग्रेस, तृणमूल, माकपा और राजद समेत विपक्षी दलों ने मोदी सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। विपक्ष ने राज्यसभा में इन मुद्दाें पर तत्काल चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उधर, लाेकसभा में कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी पार्टियां भी नोटिस दे सकती हैं।</p>
<h2>तृणमूल सांसदों ने शुक्रवार को राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान भी प्रदर्शन किया था। Budget session</h2>
<p>वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण में सीएए, एनआरसी और कश्मीर में प्रतिबंधों को शामिल नहीं करने पर सवाल उठाए हैं। पार्टी इसमें संशोधन की मांग कर रही है। तृणमूल सांसदों ने शुक्रवार को संसद (लोकसभा और राज्यसभा) के संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान भी प्रदर्शन किया था।</p>
<h2>विपक्ष सीएए-एनआरसी के विरोध में | Budget session</h2>
<ul>
<li><strong>विपक्ष ने संसद द्वारा पारित नागरिकता कानून को असंवैधानिक करार दिया है । </strong></li>
<li><strong>और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। </strong></li>
<li><strong>इस पर इसी महीने सुनवाई होने वाली है। </strong></li>
<li><strong>विपक्षी पार्टियों ने उन मुख्यमंत्रियों से एनपीआर लागू नहीं करने का आग्रह किया है। </strong></li>
<li><strong> जो नागरिकता कानून का विरोध कर रहे हैं।</strong></li>
<li><strong>इस दशक का पहला बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू हुआ। </strong></li>
<li><strong>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को बजट पेश किया। </strong></li>
<li><strong>सोमवार से लोकसभा और राज्यसभा राष्ट्रपति के </strong><strong>अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हैं।</strong></li>
</ul>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/budget-session-uproar-in-parliament-today-on-the-issue-of-caa-nrc/article-12901</link>
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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2020 11:17:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CAA, और NRC  के खिलाफ भारत बंद, मुंबई में रोकी ट्रेन</title>
                                    <description><![CDATA[नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और  राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ बुधवार को विभिन्न संगठनों ने भारत बंद का ऐलान किया है। इस बंद को समर्थन देने के लिए शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने भी सड़कों पर उतरने का फैसला किया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-shut-down-against-caa-nrc/article-12791"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/nrc.jpg" alt=""></a><br /><h2>राज्यों ने सुरक्षा के कड़े इंतजा, शांति-सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने के निर्देश |CAA NRC</h2>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और  राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ बुधवार को विभिन्न संगठनों ने भारत बंद का ऐलान किया है। इस बंद को समर्थन देने के लिए शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने भी सड़कों पर उतरने का फैसला किया है। इसको देखते हुए राज्यों ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। अफसरों ने दावा किया है कि कोई भी व्यक्ति बंद के नाम पर किसी की दुकान जबरन बंद नहीं करा पाएगा। वहीं मुंबई के कुछ प्रदर्शनकारियों ने लोकल ट्रेन को रक दिया। इधर, गृह विभाग ने पुलिस को सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखने व शांति-सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।</p>
<ul>
<li><strong>बिहार के कई जिलों में सुबह से ही बंद को लेकर वामदलों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर गए हैं ।</strong></li>
<li><strong>सड़क जाम कर नारेबाजी प्रदर्शन कर रहे हैं।</strong></li>
<li><strong>भारत बंद के दौरान रांची में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। </strong></li>
<li><strong>पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को अलर्ट कर दिया है ।</strong></li>
<li><strong>इतना ही नहीं, जिलों को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष नजर रखने का निर्देश दिया गया है।</strong></li>
</ul>
<h2>बहुजन क्रांति मोर्चा के सदस्यों ने कांजुरमार्ग स्टेशन में रेलवे ट्रैक बाधित कर दिया हैं |CAA NRC</h2>
<p>मुंबई नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान बहुजन क्रांति मोर्चा के सदस्यों ने कांजुरमार्ग स्टेशन में रेलवे ट्रैक को बाधित कर दिया हैं। संगठन ने आज ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। बहुजन क्रांति मोर्चा के भारत बंद को देखते हुए राज्यों ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। राज्यों ने सभी जिलों को अलर्ट कर दिया है। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष नजर रखने का निर्देश दिया गया है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/india-shut-down-against-caa-nrc/article-12791</link>
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                <pubDate>Wed, 29 Jan 2020 12:01:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार में एनआरसी लागू करने का सवाल ही नहीं : नीतीश</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 1930 के बाद देश में जातीय आधार पर जनगणना नहीं हुई है। वर्ष 2010 में भी इस संबंध में मांग उठी थी लेकिन उस समय जातीय आधार पर जो जनगणना हुई उसके आंकड़े प्रकाशित नहीं हुए लेकिन उनका मत है कि एकबार यह काम हो जाना चाहिए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/there-is-no-question-of-implementing-nrc-in-bihar-nitish/article-12456"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/chief-minister-nitish-kumar.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">अभी एनपीआर का काम तीन-चार महीने बाद ही शुरू होगा (Chief Minister Nitish Kumar)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटना (एजेंसी)।</strong> बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) ने सोमवार को कहा कि बिहार में राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) को लागू नहीं किया जाएगा। कुमार ने अनुसचित जाति-जनजाति वर्ग को आरक्षण देने की अवधि दस साल और बढ़ाने से संबंधित संविधान के 126वें संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए आहूत विधानसभा के विशेष सत्र में कहा कि सदन के अंदर हर मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए, जहां तक एनआरसी का प्रश्न है तो उसे बिहार में लागू करने का सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि जब केंद्र में राजीव गांधी की सरकार थी तब असम के संदर्भ में एनआरसी की बात हुई थी लेकिन पूरे देश के लिए इसकी बात कभी हुई ही नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बारे में स्पष्ट कर दिया है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">ऐसे में अब एनआरसी पर चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) पर राज्य ने सहमति दी है।</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन बीच में कुछ नया जोड़ा गया है तो इस पर भी सदन में चर्चा हो सकती है।</li>
<li style="text-align:justify;">अभी एनपीआर का काम तीन-चार महीने बाद ही शुरू होगा।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">वर्ष 1930 के बाद देश में जातीय आधार पर जनगणना नहीं हुई है</h3>
<p style="text-align:justify;">कुमार ने कहा कि वह जातीय आधार पर जनगणना कराए जाने के पक्षधर हैं। वर्ष 1930 के बाद देश में जातीय आधार पर जनगणना नहीं हुई है। वर्ष 2010 में भी इस संबंध में मांग उठी थी लेकिन उस समय जातीय आधार पर जो जनगणना हुई उसके आंकड़े प्रकाशित नहीं हुए लेकिन उनका मत है कि एकबार यह काम हो जाना चाहिए। धर्म के आधार पर जनगणना होती है, अनुसूचित जाति-जनजाति के अंदर भी जितनी उपजातियां हैं उसकी भी जनगणना होती है तो फिर जातीय आधार पर जनगणना कराने में क्या समस्या हो सकती है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> वह इस संबंध में सार्वजनिक तौर पर कहते रहे हैं</li>
<li style="text-align:justify;"> यदि सदन में इस पर चर्चा हुई तो बिहार की भावना से भी केंद्र को अवगत कराया जाएगा।</li>
</ul>
<p> </p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/there-is-no-question-of-implementing-nrc-in-bihar-nitish/article-12456</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2020 15:46:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NRC-CAA को लेकर विपक्ष की बैठक आज, माया-ममता और AAP ने बनाई दूरी</title>
                                    <description><![CDATA[देश में हो रहे छात्रों के विरोध, नागरिकता कानून, एनआरसी  और मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा के लिए विपक्षी पार्टियां सोमवार को 2 बजे बैठक करेंगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/opposition-meeting-on-nrc-caa-today/article-12448"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/caa.jpg" alt=""></a><br /><h2>देश भर में नए नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी |NRC-CAA</h2>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> देश में हो रहे छात्रों के विरोध, नागरिकता कानून, एनआरसी<strong> (NRC-CAA )</strong> और मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा के लिए विपक्षी पार्टियां सोमवार को 2 बजे बैठक करेंगी। इसमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बसपा प्रमुख मायावती शामिल नहीं होंगी। आम आदमी पार्टी ने भी मीटिंग में शामिल न होने का ऐलान किया है।</p>
<h2>आज दोपहर 2 बजे विपक्षी दलों की बैठक | NRC-CAA</h2>
<p>बता दें, कांग्रेस ने सभी समान विचारधारा वाले दलों को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) पर एक संयुक्त रणनीति को औपचारिक बनाने के लिए बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है, इस बीच देश भर में नए नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। कांग्रेस, विपक्षी दलों के साथ संसद भवन में दोपहर 2 बजे बैठक करेगी। सोमवार को सीएए पर एक संयुक्त रणनीति बनाने के लिए और छात्रों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कई मुख्यमंत्रियों ने कहा- वे अपने राज्यों में सीएए-एनआरसी लागू नहीं करेंगे</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>सीएए को लेकर विरोध कर रहे जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसके बाद देशभर के यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन शुरू हो गए थे।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसमें राजनीतिक दल भी शामिल हो गए थे। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>भाजपा ने सीएए को लेकर कांग्रेस पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> कांग्रेस शासित राज्यों में कई मुख्यमंत्रियों ने कहा है कि वे अपने राज्यों में सीएए या एनआरसी की अनुमति नहीं देंगे। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>उधर, केरल के विधानसभा में सीएए को राज्य में पारित नहीं किए जाने संबंधी प्रस्ताव भी पास किया गया था।</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/opposition-meeting-on-nrc-caa-today/article-12448</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2020 11:26:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनआरसी पर फिलहाल केंद्र ने निर्णय नही लिया: विजयवर्गीय</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि देश की जनता बेहतर तरीके से समझ रही है कि कौन देशहित में तथा कौन देश के अहित के लिए काम कर रहा है। उन्होंने सीएए को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों पर दावा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को कुछ ऐसी खुफिया जानकारी भी मिली है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/center-not-yet-decided-on-nrc-vijayvargiya/article-12206"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/general-secretary-kailash-v.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> कुछ देश विरोधी तत्व देश में अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं ( NRC)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>नागरिकता देना न देना पूरी तरह केंद्र सरकांर का विषय</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>इंदौर (एजेंसी)।</strong> भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार ( NRC) द्वारा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है। विजयवर्गीय ने यहां पत्रकारों से चर्चा में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज एनआरसी औ? नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध कर रहे हैं, इन्होंने ही कभी इसकी शुरूआत की थी। उन्होंने कहा कि देश की जनता बेहतर तरीके से समझ रही है कि कौन देशहित में तथा कौन देश के अहित के लिए काम कर रहा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने सीएए को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों पर दावा करते हुए कहाहैं।</li>
<li style="text-align:justify;"> केंद्र सरकार को कुछ ऐसी खुफिया जानकारी भी मिली है ।</li>
<li style="text-align:justify;">कि कुछ देश विरोधी तत्व देश में अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने केंद्र सरकार के निर्णयों को लोक हितैषी करार देते हुए कहा हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएए, तीन तलाक और अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर देशहित में काम किया है।</li>
</ul>
<h3>विजयवर्गीय ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि नागरिकता देना न देना पूरी तरह केंद्र सरकांर का विषय है</h3>
<p style="text-align:justify;">भाजपा महासचिव ने कहा कि सीएए सहित तमाम मुद्दों पर यदि किसी को कोई असहमति है तो वे किसी भी मंच पर मुझसे अथवा किसी भी भाजपा नेता से सवाल पूछ सकता है। हम हर सवाल का जवाब देने को तैयार है। उन्होंने कांग्रेस सहित सीएए का विरोध कर रहे अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष गैर जिम्मेदाराना राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा हर मुद्दे पर कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति शुरू कर देती है। विजयवर्गीय ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि नागरिकता देना न देना पूरी तरह केंद्र सरकांर का विषय है। जो राज्य सरकारें इसे अपने राज्य में लागू नही करने की घोषणा कर रही है। वे केवल राजनीति कर रही हैं।</p>
<p> </p>
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</span></span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jan 2020 16:08:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिंसा के लिए आप और कांग्रेस जिम्मेदार, माफी मांगें</title>
                                    <description><![CDATA[मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने के लिए कहा गया की उनकी नागरिकता पर असर पड़ेगा जबकि वास्तविकता यह है कि यह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंगलादेश से धार्मिक प्रताड़ना की वजह से भारत आये शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का कानून है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/aap-and-congress-responsible-for-violence-apologize/article-12155"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/aap-and-congress-responsibl.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">दिल्ली में सीएए विरोध पर केन्द्रीय मंत्री जावड़ेकर ने आप और कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा- (Prakash Javadekar)</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री (Prakash Javadekar) एवं भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के दिल्ली मामलों के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में राजधानी में हिंसा के लिए आम आदमी पार्टी(आप) और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि दोनों दल इस कृत्य के लिए जनता से माफी मांगें। जावड़ेकर ने दिल्ली विधानसभा के जल्दी ही होने वाले चुनाव में भाजपा के पूरी ताकत से लड़ने और शानदार विजय पाने का विश्वास जताते हुए कहा कि पार्टी सकारात्मक एजेंडा के साथ मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा का चुनाव अभियान तीन मुद्दों ‘सच- बनाम झूठ, विकास बनाम विनाश’ और ‘अराजक विरोध बनाम राष्ट्रवाद’ पर आधारित होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कांग्रेस और आप ने मुस्लिम समुदाय को किया गुमराह</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">दिल्ली प्रभारी ने कहा कि सीएए को लेकर झूठा भ्रम फैलाया गया ।</li>
<li style="text-align:justify;">मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने के लिए कहा गया की उनकी नागरिकता पर असर पड़ेगा</li>
<li style="text-align:justify;">जबकि वास्तविकता यह है कि यह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंगलादेश  से धार्मिक प्रताड़ना की वजह से भारत आये शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का कानून है।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि दिल्ली में कानून के विरोध के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।</li>
<li style="text-align:justify;">आप और कांग्रेस ने हिंसा को लेकर चुप्पी साधे रखी।</li>
<li style="text-align:justify;">दोनों ही दल इस हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;"> उन्हें इस कृत्य के लिए दिल्ली की जनता से माफी मांगनी होगी।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/aap-and-congress-responsible-for-violence-apologize/article-12155</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Jan 2020 17:49:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूरे देश में लागू होगा ‘एनआरसी’</title>
                                    <description><![CDATA[प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि कश्मीर में किसी भी थाना
 क्षेत्र में धारा 144 लागू नहीं है।
 केवल कुछ थाना क्षेत्रों में रात आठ बजे लेकर सुबह छह बजे में कुछ प्रतिबंध लागू हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/nrc-will-be-applicable-across-the-country/article-11214"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/amit-shah.jpg" alt=""></a><br /><h2>एनआरसी पर राज्यसभा में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बड़ा बयान</h2>
<ul>
<li>असम में एनआरसी से बाहर रह गए लोगों की पूरी मदद की जाएगी</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि अवैध लोगों की पहचान के लिए पूरे देश में राष्ट्रीय भारतीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू होगा और इसमें सभी धर्मों और संप्रदायों के लोगों को शामिल किया जाएगा। शाह ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोगों में राष्ट्रीय भारतीय नागरिक रजिस्टर और नागरिकता अधिनियम में संशोधनों को लेकर भ्रम की स्थिति है जबकि ये दोनों अलग अलग हैं। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर असम में एनआरसी लागू किया जा रहा है और यह घुसपैठियों की पहचान करने के लिए है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कहा कि जब पूरे देश में एनआरसी लागू होगा तो असम में भी यह प्रक्रिया फिर होगी</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि असम में एनआरसी से बाहर रह गये लोगों की पूरी मदद की जाएगी और उनके लिए राज्य की प्रत्येक तहसील में एक न्यायाधिकरण स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों को असम सरकार कानूनी सेवा उपलब्ध करायेगी। उन्होंने कहा कि नागरिकता अधिनियम के प्रस्तावित संशोधन में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आये हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी तथा इसाई धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कश्मीर में जल्द शुरु होगी इंटरनेट सेवा: शाह</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने राज्यसभा में कहा कि कश्मीर, विशेष रुप से घाटी में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं और क्षेत्र में जल्दी ही इंटरनेट सेवा शुरू कर दी जाएगी। गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि कश्मीर में किसी भी थाना क्षेत्र में धारा 144 लागू नहीं है। केवल कुछ थाना क्षेत्रों में रात आठ बजे लेकर सुबह छह बजे में कुछ प्रतिबंध लागू हैं। उन्होंने कहा कि घाटी में तेजी से हालात सामान्य हो रहे हैं। क्षेत्र में मोबाइल फोन सेवा शुरू कर दी गयी है। उन्होेंने कहा कि सरकार यह मानती है कि इंटरनेट सेवा बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन देश और नागरिकों की सुरक्षा इससे भी ज्यादा जरुरी और महत्वपूर्ण है। घाटी में पड़ोसी देश और अन्य तत्वों की हरकतों से सभी वाकिफ हैं इसलिए इंटरनेट सेवा को बहाल नहीं किया गया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/nrc-will-be-applicable-across-the-country/article-11214</link>
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                <pubDate>Wed, 20 Nov 2019 21:14:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनआरसी पर ठोस रणनीति बनाये सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[इन दिनों देश की जनसंख्या एक सौ पैंतीस करोड़ से अधिक है
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम 2015 में शुरू हुआ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/government-should-formulate-concrete-strategy-on-nrc/article-10713"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/nrc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में नागरिक कौन है और कौन नहीं हैं इसकी चिन्ता इन दिनों तेजी लिये हुए है। देखा जाये तो यह काल और परिस्थिति के बदलाव स्वरूप लिया गया एक ऐसा फैसला है जिसके चलते सरकार गैर नागरिकों की तलाश कर रही है पर इस निर्णय के चलते सरकार की नीति और नीयत पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं। इसकी एक वजह राजनीति तो दूसरी सरकार का दुरूस्त होमवर्क का ना होना भी माना जा सकता हैं। जबकि दो टूक यह है कि एनआरसी घुसपैठियों को चिन्हित करने की एक सकारात्मक व्यवस्था है जो सात दशक पुराना है हालांकि इसकी जद में केवल असम राज्य था अब पूरे देश में लाने की बात हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दिनों देश की जनसंख्या एक सौ पैंतीस करोड़ से अधिक है। फिलहाल जनसंख्या विस्फोट के चलते देश कई समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में यह कदम लाजमी है कि घुसपैठियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए। बावजूद इसके सवाल यह है कि क्या जिस संतुलन के साथ एनआरसी को विस्तार देना चाहिए वैसा सरकार द्वारा किया जा रहा हैं। प्रश्न तो यह भी है कि एनआरसी के चलते परेशानी और बेचैनी का सामना किसे करना पड़ रहा है। जाहिर है घुसपैठियों की खोज में मूल नागरिक भी दस्तावेज आदि की पेशगी को लेकर कुछ समस्याएं ंतो झेलेंगे ही।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल सच्चाई क्या है इसके लिए एक बड़े शोध की आवश्यकता है मगर सरसरी तौर पर देखें तो एनआरसी का मतलब धुसपैठियों को चिन्हित करके उन्हें देश निकाला देना है पर असम में जो हालिया स्थिति बनी उसमें करीब सवा तीन करोड़ से अधिक जनसंख्या में 19 लाख लोग ऐसे हंै जो एनआरसी के चलते सूची से बाहर हैं जिसमें 13 लाख हिन्दू शामिल हंै। जिसे लेकर सरकार के समक्ष बड़ा सवाल यह है कि यह हिन्दू कहां से आये हैं सम्भव है कि यह या तो भारत के हैं और सूचीबद्ध नही हैं या फिर बंगलादेश से पलायन करके आये हंै स्थिति कुछ भी हो असम में सरकार जैसा सोच रही थी नतीजे वैसे नही हैं। फलस्वरूप सरकार खुद ही दुविधा में फंसी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">असम में पहली बार एनआरसी 1951 में बना था तब बने रजिस्टर में उसी साल हुई जनगणना में शामिल हर व्यक्ति को राज्य का नागरिक माना गया था। वक्त बीतने के साथ भूगोल और इतिहास भी बदल गया। इस बदलाव ने बीते कुछ सालों से एक नई आवाज इस रूप में आयी की एक बार फिर एनआरसी को अपडेट किया जाये। जिसके चलते असम में एक बार फिर एनआरसी की रोपाई हुई। दरअसल पिछले कई दशकों से राज्य में पड़ोसी देशों खासकर बंगालदेश से हो रही अवैध घुसपैठ ने एनआरसी की आवाज को बुलन्द किया। जिसे देखते हुए असम में 2013 में एनआरसी कार्यालय बना मगर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम 2015 में शुरू हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">पहली सूची 2017 में तो 2018 में प्रकाशित हुई। जिसके बाद उक्त चित्र सामने आया और शायद सरकार के सामने एक अलग चुनौती भी खड़ी हो गई बावजूद इसके सरकार इसे भारत के पूरे मानचित्र पर उतारना चाहती है। गौरतलब है भारतीय संविधान के भाग-2 में अनुच्छेद 5 से 11 के बीच नागरिकता की चर्चा है। 1951 में जब एनआरसी असम में लाया गया तब बंगलादेश नहीं बना था ऐसे में अब इसमें संशोधन लाना जरूरी समझा गया। इसी के चलते अब सिर्फ उन लोगों का नाम सूची में शामिल किया गया जो 25 मार्च 1971 के पहले से असम में रह रहे हैं पर इस सूची में 19 लाख लोग शामिल नहीं हैं जिसके चलते तनाव व आक्रोश का माहौल व्याप्त है। वैसे देखा जाये तो 1971 से 1991 के बीच असम में बड़ी संख्या में मतदाता बढ़े थे इससे लगता है कि घुसपैठ तेजी से हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">असल मुद्दा क्या है इस पर भी गौर करने की जरूरत है। 1979 में आॅल असम स्टूडेंट्स यूनियन और आॅल असम गण संग्राम परिषद् ने असम में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के खिलाफ हिंसक आन्दोलन छेड दिया जो 6 वर्ष तक जारी रहा। साल 1995 में भारत सरकार और इन संगठनों के बीच समझौते के चलते हिंसा पर रोक लगी और असम में नई सरकार का गठन हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी समझौते में एक अहम बात यह भी थी 1951 के एनआरसी में संशोधन किया जायेगा जिसके फलस्वरूप मोदी सरकार का एनआरसी पर स्टैण्ड इन दिनों काफी कड़ा दिखायी दे रहा है। इसमें कोई दुविधा नहीं की म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमान और बंगलादेशी नागरिक पूर्वेत्तर समेत पश्चिम बंगाल में घुसपैठ किये हैं। शायद रोहिंग्या देश के अन्य हिस्सों में मिल सकते हैं और यही बात बांग्लादेशियों के लिए भी कहा जा सकती है। एनआरसी के लागू होने से अनागरिकों की पहचान तो सम्भव है पर यह इतना आसान काज शायद नहीं है। वैसे सरकार जिस शीघ्रता से मैदान मारने की फिराक में रहती है वह भी लोगों की बेचैनी का मूल कारण हो सकता है। एनआरसी घुसपैठियों की पहचान कराने में मदद तो करेगी मगर उसके बाद सरकार का क्या कदम होगा इस पर भी उन्हें शायद अभी होमवर्क करना बाकी है।<br />
<strong><em>सुशील कुमार सिंह</em> </strong></p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
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                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Oct 2019 20:25:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम के मुख्यमंत्री ने कहा- जो सूची में नहीं हैं, उन्हें बंदी नहीं बनाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[साढ़े चार साल में 1288 करोड़ रु. खर्च कर 62 हजार कर्मियों द्वारा बनाई गई सूची को सरकार से विपक्ष तक कोई भी सही मानने को तैयार नहीं असम में एनआरसी की आखिरी सूची शनिवार को जारी हुई, इसमें 19 लाख से ज्यादा लोग बाहर मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा- एनआरसी का काम सुप्रीम कोर्ट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/assam-cm-said-we-will-not-arrest-those-who-are-not-on-the-list/article-10358"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/nrc.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">साढ़े चार साल में 1288 करोड़ रु. खर्च कर 62 हजार कर्मियों द्वारा बनाई गई सूची को सरकार से विपक्ष तक कोई भी सही मानने को तैयार नहीं</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">
<h3>असम में एनआरसी की आखिरी सूची शनिवार को जारी हुई, इसमें 19 लाख से ज्यादा लोग बाहर</h3>
<h3><span style="font-family:Roboto;">मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा- एनआरसी का काम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ, गलतियों का सवाल ही नहीं</span></h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली | </strong>कश्मीर के बाद आबादी में सबसे ज्यादा मुस्लिम हिस्सेदारी वाले राज्य असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन यानी एनआरसी की आखिरी सूची शनिवार काे जारी हाे गई। 19 लाख से ज्यादा लाेगाें के नाम सूची में नहीं हैं। साढ़े चार साल में 1288 करोड़ रु. खर्च कर 62 हजार कर्मियों द्वारा बनाई गई इस सूची को सरकार से विपक्ष तक कोई भी सही मानने को तैयार नहीं है। ज्यादातर लाेगाें का कहना है कि एनआरसी से बाहर रहे लाेगाें की संख्या बेहद कम है।</p>
<p style="text-align:justify;">बांग्लादेशियाें के बजाय मूल निवासियाें के नाम इससे छूट गए हैं। सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के साथ ही ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने फाइनल लिस्ट पर असंताेष जताया। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि एनआरसी जारी होने के बाद यहां के हालात शांतिपूर्ण हैं। गुवाहाटी में रविशंकर रवि ने उनसे बातचीत की।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">
<h3>सवाल: जिनके नाम एनआरसी में नहीं हैं, उनका क्या होगा?</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">सोनोवाल: 120 दिन में फॉरेनर्स टिब्यूनल में अपील कर सकते हैं। 200 ट्रिब्यूनल हैं, 1000 और बनाए जा रहे हैं। ट्रिब्यूनल के फैसला तक किसी को विदेशी घोषित नहीं करेंगे, न ही बंदी बनाएंगे। उसके बाद कोर्ट जा सकते हैं।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">
<h3>सवाल: सूची में कई ऐसे लोगों के नाम नहीं हैं, जो सेना में रहे हैं और सरकारी कर्मचारी रहे हैं, उनका क्या होगा?</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">सोनोवाल: भारतीय मूल के लोगों की हरसंभव मदद की जाएगी। सूची प्रदेश सरकार ने नहीं बनाई है। सारा काम सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में हुआ। इसलिए यह कहना संभव नहीं है कि गलतियां कैसे हो गईं।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">
<h3>सवाल: सरकार अब आगे क्या करेगी?</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">सोनोवाल: राज्य को घुसपैठियों से मुक्त कराने के लिए असम समझौते की धारा-6 को लागू करने का प्रयास करेंगे।आगे क्या : एनआरसी के स्टेट को-ऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला के अनुसार 3 करोड़ 11 लाख 21 हजार 4 का नाम सूची में है। 19 लाख में से अभी किसी को विदेशी नहीं माना जाएगा। इनके पास ट्रिब्यूनल में अपील के लिए 120 दिन का समय है। उसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Sep 2019 16:43:34 +0530</pubDate>
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                <title>अवैध प्रवासियों का बोझ क्यों उठाए भारत</title>
                                    <description><![CDATA[असम में अंतरराष्टÑीय रजिस्टर आॅफ सिटीजन की दूसरी लिस्ट में 40 लाख लोगों को भारतीय नहीं माना गया। यह समाचार आते ही पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सूची में संशोधन करने की मांग की है। बात साफ है कि आगामी वर्ष लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। बांग्लादेशियों की वोटों का मामला है। इसलिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/why-india-take-the-burden-of-outsiders/article-5089"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/mamta-banerji.jpg" alt=""></a><br /><p>असम में अंतरराष्टÑीय रजिस्टर आॅफ सिटीजन की दूसरी लिस्ट में 40 लाख लोगों को भारतीय नहीं माना गया। यह समाचार आते ही पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सूची में संशोधन करने की मांग की है। बात साफ है कि आगामी वर्ष लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। बांग्लादेशियों की वोटों का मामला है। इसलिए बयानबाजी होगी लेकिन मामले का हल तब तक नहीं निकलेगा जब तक समस्या को ईमानदारी के साथ नहीं समझा जाता। यह मामला इस कारण भी पेचीदा बन गया है कि गैर कानूनी तौर पर दाखिल हुए लोगों को आधी सदी का समय बीत गया है।</p>
<p>यह लोग केवल मतदाता ही नहीं बने बल्कि पंचायतों से लेकर विधानसभा के सदस्य भी बन गए हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ममता बनर्जी पर देश की सुरक्षा को नजरअंदाज करने का आरोप लगा रहे हैं लेकिन सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा उठाने के साथ इस समस्या की सही व्याख्या नहीं की जा सकती।</p>
<p>अगर 40 लाख लोग भारत के लिए खतरा न भी हों, फिर भी इतनी बड़ी संख्या लोगों को देश, जगह व सुविधाएं देनी देश की योजनाबद्धी के लिए चुनौती है। सीरीया व कई अन्य देशों पर हो रही हिंसा से परेशान हुए लाखों लोग अमेरिका व दर्जनों यूरोपीय देशों में गैर-कानूनी तौर पर दाखिल हो रहे हैं।</p>
<p>इन देशों में दाखिल हो रहे लोगों पर कोई सुरक्षा का खतरा नहीं फिर भी रोका जा रहा है। कारण वहां की सरकारें नई आबादी के लिए सभी आवश्यक प्रबंध नहीं कर सकती। इसलिए असम के मामले में न तो सिर्फ सुरक्षा का शोर मचाना सही है व न ही बांग्लादेश से आए लोगों की वोटों का मोह करना उनकी आंखें बंद कर समर्थन करना सही है। गैर-कानूनी प्रवासी भारत से लेकर अमेरिका तक की समस्या है, जिससे निपटने के लिए दूर-दृष्टि से विभिन्न देशों को मिल बैठ कर इस समस्या का हल निकालना चाहिए।</p>
<p>रोहिंग्या के मामले के प्रकाश में भी इस बात का हल निकाला जा सकता है। भूटान से निकाले गए रोहिंग्या को आखिर बांग्लादेश ने वापिस लेने की घोषणा कर दी है। रोहिंग्या-बांग्लादेश से अन्य देशों में गैर-कानूनी तौर पर दाखिल हुए हैं। गैर-कानूनी प्रवास के बावजूद इस मामले का एक मानवीय पहलु भी है, जिस संबंधी सोचने की जिम्मेवारी भारत सहित बांग्लादेश व संयुक्त राष्टÑ की भी है। राजनीतिक पार्टियों को इस गंभीर मुद्दे पर अपने स्वार्थ साधने से बचना चाहिए। केन्द्र व राज्यों की राजनीतिक पार्टियां ईमानदारी के साथ इस मामले पर विचार करें।</p>
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                <pubDate>Wed, 01 Aug 2018 06:06:19 +0530</pubDate>
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