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                <title>Government Hospital - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Government Hospital RSS Feed</description>
                
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                <title>‘गुरुग्राम के सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर न होना दुर्भाग्यपूर्ण’</title>
                                    <description><![CDATA[निजी अस्पताल कर रहे लोगों को परेशान (Government Hospital) अधिकारियों के ढीले रवैये पर सीएम से कार्रवाई की मांग सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम। केंद्रीय योजना एवं सांख्यिकी मंत्री राव इंद्रजीत ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 के दौर में शहर के सरकारी अस्पताल (Government Hospital) में वेंटिलेटर तक उपलब्ध नहीं है। यह हमारे लिए दुर्भाग्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/unfortunate-not-to-have-ventilator-in-government-hospital-in-gurugram/article-20422"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/unfortunate-not-to-have-ventilator-in-government-hospital-in-gurugram.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>निजी अस्पताल कर रहे लोगों को परेशान (Government Hospital)</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>अधिकारियों के ढीले रवैये पर सीएम से कार्रवाई की मांग</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम</strong>। केंद्रीय योजना एवं सांख्यिकी मंत्री राव इंद्रजीत ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 के दौर में शहर के सरकारी अस्पताल (Government Hospital) में वेंटिलेटर तक उपलब्ध नहीं है। यह हमारे लिए दुर्भाग्य है। शहर में निजी अस्पताल लोगों को परेशान कर रहे हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल के पुनर्निर्माण का काम जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए। चंडीगढ़ में बैठे अधिकारी लैंड ट्रांसफर करने में ही करीब एक वर्ष से अधिक का समय ले रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात उन्होंने मंगलवार को गुरुग्राम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा ली गई जीएमडीए की बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़कर यह बात कही। उन्होंने गुरुग्राम शहर की विकास योजनाओं को लेकर अधिकारियों के ढीले रवैये पर आपत्ति जताई। गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवेलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए) की बैठक में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष कहा कि विकास की योजनाओं में चंडीगढ़ में बैठे अधिकारी ढुलमुल रवैया अपना रहे हैं। जीएमडीए की बैठक में जो मामले करीब एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। उनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट जीरो है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से कहा कि शहर की विकास योजनाओं पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही समय सीमा भी तय की जाए, ताकि योजनाओं को समय रहते पूरा किया जा सके। राव इंद्रजीत की मांग पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जीएमडीए के सीईओ को इस बारे में रिपोर्ट देने व योजनाओं में लंबित होने का कारण बताने को कहने के साथ ही यह भी आदेश दिए कि कहां से और किस अधिकारी से देरी हुई, इस बात की भी सूचना उन्हें दी जाए।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Dec 2020 19:00:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बठिंडा के सरकारी अस्पताल में नहीं है डॉक्टर</title>
                                    <description><![CDATA[इस अस्पताल में साल 2017 -18 दौरान जन्म समय पर 25 बच्चों जबकि 2019 में 15 बच्चों की मौत हो गई।
स्टाफ ने इन बच्चों की मौत का कारण जन्म समय से ही होती बीमारियों व कुछ का समय से पहले जन्म होना बताया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/shortage-of-doctors-in-government-hospital-of-bathinda/article-12340"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/civil-hospital.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">जच्चा-बच्चा अस्पताल में नहीं वेंटिलेटर, गंभीर मरीजों को करना पड़ता है अन्य अस्पतालों में रैफर | <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Civil Hospital</span></span></h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा(सुखजीत मान)</strong>। बठिंडा के शहीद भाई मनी सिंह <strong>(Civil Hospital)</strong> सिविल अस्पताल की इमारत तो बदलनी शुरू हो गई परंतु अंदर के हालात बहुत ही दयनीय हैं। वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल की ओर से जारी की 4.38 करोड़ की लागत से सिविल अस्पताल की इमारत का नवीनीकरण हो रहा है परंतु इमारत में स्टाफ की कमी चुभ रही है।  विवरणों मुताबिक बठिंडा के सिविल अस्पताल सहित पूरे जिले भर में डॉक्टरों के 48 प्रतिशत पद रिक्त हैं जबकि लैबोरेट्री टैक्निशियन की 65 प्रतिशत, स्टाफ नर्सों की 52 प्रतिशत और दर्जा चार कर्मचारियों के 53 प्रतिशत पद रिक्त हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जच्चा-बच्चा अस्पताल भी पदों की कमी के साथ भिड़ रहा है। डिलिवरी के लिए आते मामलों और अलग -अलग वार्डों मुताबिक एक शिफ्ट में काम करने के लिए कम से कम 5 स्टाफ नर्सों की जरूरत है परंतु यहां कुल ही 5 हैं। इसलिए एक शिफ्ट में सिर्फ 1 ही स्टाफ नर्स ड्यूटी निभाती है। अस्तपाल में साजो-सामान की कमी संबंधी पूछने पर पता चला कि यहां वेंटिलेटर भी नहीं है, जिसके निष्कर्ष के तौर पर गंभीर समस्या पैदा होने पर मरीज को फरीदकोट के सरकारी अस्पताल के लिए रैफर करना पड़ता है।</p>
<h2>साल 2017 -18 में जन्म समय 25 बच्चों जबकि 2019 में 15 बच्चों की मौत</h2>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल में साल 2017 -18 दौरान जन्म समय पर 25 बच्चों जबकि 2019 में 15 बच्चों की मौत हो गई स्टाफ ने इन बच्चों की मौत का कारण जन्म समय से ही होती बीमारियों व कुछ का समय से पहले जन्म होना बताया है। सिविल अस्पतालों में जो जो हाई डिपेंडीस यूनिट खोलने की स्कीम है वह भी अभी बठिंडा तक नहीं पहुंची यदि इस स्कीम के अंतर्गत यहाँं यूनिट खुलता है तो नया स्टाफ मिलने के साथ-साथ आधुनिक साजो-सामान भी मिलेगा जिसका मरीजों को काफी फायदा मिलेगा।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अस्पताल प्रबंधकों का तर्क है कि मरीजों के वारिस मरीजों के लिए रोटी आदि लाते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">वह बची हुई रोटी फैंक देते हैं, जिस कारण कुत्ते यहां ज्यादा आते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">कुछ समय पहले जब वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल सिविल अस्पताल में इमारत का नवीनीकरन शुरू करवाने पहुंचे।</li>
<li style="text-align:justify;">वहां प्रोगराम दौरान मुख्य स्टेज से डॉक्टरों की कमी का भी जिक्र हुआ था।</li>
<li style="text-align:justify;">वित्त मंत्री ने कहा था कि सिविल अस्पतालों में रिक्त पड़े पदों के लिए जल्दी भर्ती की जाएगी।</li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">जच्चा-बच्चा अस्पताल में साल भर में लाख के नजदीक पहुंचती है ओपीडी</h2>
<p style="text-align:justify;">यहां के जच्चा-बच्चा अस्पताल में स्टाफ और सामान की कमी के बावजूद ओपीडी लाख के नजदीक पहुंचती है। विवरणों मुताबिक साल 2017 में ओपीडी का संख्या 94798 पर पहुंची जबकि साल 2018 में 90649 पर रही और साल 2019 के मुकम्मल विवरण हासिल नहीं हो सके। डिलिवरी संबंधी पूछे जाने पर पता चला कि साल 2017 में 5100 और 2018 में 4177 डिलिवरियां इस अस्पताल में हुई हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">रिक्त पदों संबंधी मुख्य दफ़्तर को अवगत करवाया : सिविल सर्जन |</h2>
<p style="text-align:justify;">सिविल सर्जन बठिंडा डॉ. अमरीक सिंह संधू का कहना है कि अस्पताल की इमारत के नवीनीकरन का काम शुरू हो चुका है और बठिंडा सहित पूरे जिले में डॉक्टरों व अन्य स्टाफ के रिक्त पदों संबंधी मुख्य दफ़्तर को अवगत करवाया गया है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है जल्दी ही अस्पताल की सभी कमियां दूर हो जाएंगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नवीनीकरण अच्छा परंतु कमियां भी हों दूर: महेशवरी | <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Civil Hospital</span></span></h2>
<p style="text-align:justify;">युवा वैलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष सोनू महेश्वरी का कहना है कि सिविल अस्पताल की इमारत का नवीनीकरण होना अच्छी बात है परंतु इसका फायदा फिर ही है यदि यहां डॉक्टरों सहित व अन्य जरूरी वस्तुओं को पूरा किया जाए।</p>
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</span></span></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2020 20:29:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संगरूर : कैंसर की जकड़ में आया संगरूर का सरकारी अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[जिला संगरूर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल को कैंसर जैसी नामुराद बीमारी ने जकड़ लिया है।
अस्पताल की इमारत में बनाई एक निजी कंपनी के कैंसर अस्पताल ने सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग को अपने काम के लिए प्रयोग करना शुरू कर दिया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/government-hospital-in-sangrur-came-in-the-grip-of-cancer/article-12311"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/cancer.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सरकारी अस्पताल के कमरों का ज्यादातर प्रयोग कर रहा कैंसर अस्पताल का स्टॉफ | Cancer</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>आम बीमारियों वाले मरीजों को भीड़ बढ़ने से इलाज करवाने में हो रही दिक्कत</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)।</strong> जिला संगरूर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल को कैंसर जैसी नामुराद बीमारी ने जकड़ लिया है। इस अस्पताल की इमारत में बनाई एक निजी कंपनी के कैंसर अस्पताल ने सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग को अपने काम के लिए प्रयोग करना शुरू कर दिया है। बेशक कैंसर जैसी नामुराद बीमारी के ईलाज के लिए संगरूर के अस्पताल के साथ एक कैंसर अस्पताल की बड़ी बिल्डिंग बनाई गई है तथा दूर दराज के के मरीजों को भले ही सुविधा हुई है</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन आम बीमारियों का इलाज करवाने आ रहे मरीजों को परेशानियां जरूर हो रही हैं क्योंकि सरकारी अस्पताल के अधिकतर कमरे कैंसर अस्पताल के स्टाफ ने रोक लिए हैं जिस कारण केवल मरीजों को ही नहीं अपितु सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों को भी परेशानी आ रही है। सूत्रों से पता चला है कि कैंसर अस्पताल में जितने मरीज एक महीने में आते हैं, उससे कहीं अधिक संख्या में सरकारी अस्पताल में मरीज आम बीमारियों का इलाज करवाने वाले के लिए पहुंचते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कैंसर अस्पताल की बिल्डिंग सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग के साथ बनाई गई है लेकिन कैंसर अस्पताल के लिए वह भी कम पड़ रही है, जिससे सरकारी अस्पताल के कमरों को भी कैंसर अस्पताल ने इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। सरकार द्वारा कैंसर अस्पताल को हर स्तर पर सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं लेकिन सरकारी अस्पताल में सुविधाओं की कमी नजर आ रही है। कैंसर अस्पताल में सभी टैस्ट इत्यादि अंदर ही किए जा रहे हैं जबकि सरकारी अस्पताल में मरीजों को दवाईयां, टैस्ट, अल्ट्रासाऊंड इत्यादि बाहर से करवाने पड़ रहे है तथा सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए मरीजों को अपनी जेब ढीली करवानी पड़ रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बाहर से लेकर आया 1500 रु. की दवाइंया | Cancer</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी बातचीत करते हुए एक मरीज सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि वह दवाइयां तथा टैस्ट बाहर से करवाकर आया हूँ तथा उसका1500 रुपए के करीब का खर्च हो गया है। उसने बताया कि उसे कई दिनों से बुखार तथा खांसी की शिकायत थी। अंदर से सिर्फ कुछ ही दवाईयां मिली हैं जबकि मंहगी दवाईयां सिर्फ बाहर की दुकानों पर ही उपलब्ध हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अच्छा चल रहा है अस्पताल, कोई दिक्कत नहीं</h2>
<p style="text-align:justify;">जब इस संबंधी ‘सच कहूँ’ ने सरकारी अस्पताल संगरूर के सीनियर मेडिकल अधिकारी किरपाल सिंह से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि कैंसर अस्पताल का सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग में विस्तार होने संबंधी वह कुछ नहीं बता सकते, यह मामला उनके लेवल का नहीं है। उन्होंने दावा किया है कि सरकारी अस्पताल में मरीजों की दवाईयों पर टेस्ट अंदर ही करवाए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि यदि गायनी वार्ड की बात की जाए तो यहां 42 बैड मौजूद हैं तथा हर महीने 500 से ज्यादा डिलीवरी हो रही हैं तथा किसी से कोई पैसा नहीं लिया जाता। रोजाना 100 के करीब अल्ट्रासाऊंड हो रहे हैं, 150 से 200 सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काऊंट) के टेस्ट होते हैं। इसके अलावा काला पीलिया की दवाई पिछले लंबे समय से मरीजों को दी जा रही है तथा सरकारी अस्पताल बढ़ियां तरीके से चल रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मरीजों को मिलें सस्ती दवाइयां | Cancer</h2>
<p style="text-align:justify;">समाज सेवी नौजवान रूपेन्द्र धीमान किक्की ने कहा कि यह जरूर है कि संगरूर में कैंसर अस्पताल के खुलने से मरीजों को काफी सुविधा मिली है लेकिन इससे सरकार को सरकारी अस्पताल का भी ध्यान रखना चाहिए। सरकारी अस्पताल में दवाई लेने आए मरीजों को उनका ईलाज सस्ते में करना संभव बनाना चाहिए।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/government-hospital-in-sangrur-came-in-the-grip-of-cancer/article-12311</link>
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                <pubDate>Tue, 07 Jan 2020 20:33:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी अस्पताल अबोहर में 24 घंटों में तीन दुराचार पीड़ित</title>
                                    <description><![CDATA[अबोहर(सुधीर अरोड़ा)। एक तरफ सरकार का नारा है ह्यबेटी पढ़ाओ बेटी बचाओह्ण वहीं दूसरी ओर अबोहर के सरकारी अस्पताल में तीन तीन मासूम बेटियां दुराचार से पीड़ित पड़ी है। इनमें से 2 मामले तो 3 साल व 7 साल की बच्चियों के है। जैसे ही मेरा अबोहर के प्रमुख एडवोकेट अमित असीजा बावा व एडवोकेट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/three-miscreants-suffer-24-hours-government-hospital-abohar/article-5123"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/three-miscreants-suffer-24-hours-government-hospital-abohar-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>अबोहर(सुधीर अरोड़ा)।</p>
<p>एक तरफ सरकार का नारा है ह्यबेटी पढ़ाओ बेटी बचाओह्ण वहीं दूसरी ओर अबोहर के सरकारी अस्पताल में तीन तीन मासूम बेटियां दुराचार से पीड़ित पड़ी है। इनमें से 2 मामले तो 3 साल व 7 साल की बच्चियों के है। जैसे ही मेरा अबोहर के प्रमुख एडवोकेट अमित असीजा बावा व एडवोकेट तेजिंद्र सिंह खालसा टीम के इन दो बच्चियों का कुशलक्षेम जानने सरकारी अस्पताल पहुंचे तो स्तब्ध रह गये । एक ओर 16 वर्षीय बच्ची भर्ती के लिये अपने परिवार के सदस्यों के साथ आयी हुई थी । मेरा अबोहर की टीम जिनमें डॉ. विशाल तनेजा , डॉ ममता तनेजा सेशन कोर्ट वकील मुकेश पाल बिश्नोई आदी शामिल थे । सबसे पहले 7 साल की बच्ची के परिवार से मिले उनको हौसला दिया व आश्वस्त किया की किसी भी तरह की जरूरत के समय मेरा अबोहर फ्री लीगल सर्विस के सभी सदस्य उनके साथ खड़े हैं ओर सारा मामला भी वो बिलकुल मुफ्त लड़ेंगे , चाहे अबोहर ओर चाहे फाजिल्का सेशन कोर्ट । इसी तरह अन्य दोनों बच्चियों के परिवार वालों को भी हौसला ओर साथ देने का वायदा किया, व फ्री मुकदमा लड़ने का भरोसा भी दिया । अमित असीजा बावा का मानना है। इन सब में प्रशासन कसूरवार नहीं क्योंकि वो अपना काम बखूबी कर रहा है ओर गिरफ्Þतारिया भी हो रही हैं। इन सब में कसूर है घटिया मानसिकता का 70 साल की उम्र के करीब का एक बूढ़ा अगर 7 साल की बच्ची से दुराचार करता है तो किस हद तक उसकी मानसिकता में गिरावट आई होगी। डूब मरना चाहिए, ऐसी घटिया मानसिकता के लोगों को।</p>
<p>असल में ये लोग बीमार है, जिन्हें समाज से अलग कर देना चाहिए, ताकि इनकी ये बीमारी और ना फैले। असीजा ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा ऐसे लोगों को कठोर से कठोर सजÞा मिले। ताकि इसके बाद कोई ऐसा काम करने की हिम्मत ना करें। डॉ. ममता तनेजा ने कहा के एक महिला होकर वो इन बच्चियों का दर्द खुद महसूस कर सकती है व एक मां होने के कारण वो इनकी मां पर क्या बीत रही वो भी भली-भांति महसूस कर रही है। आज बेटियां सुरक्षित नहीं। तजिंद्र खालसा ने कहा कि मोबाइल चैन खींचते खींचते ये गुंडातत्व अब इस हद तक पंहुच गये के इज्जत पर हाथ डालने लग गये। तभी इनका सही इलाजÞ हो जाता तो ये नौबत ना आती।</p>
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                <pubDate>Fri, 03 Aug 2018 06:35:16 +0530</pubDate>
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