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                <title>अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[रिलायंस ग्रुप ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ सहित कांग्रेस के कई वक्ताआें को लीगल नोटिस भेज कर लोकतंत्र को हलके में लिया है। जाखड़ ने नोटिस का जहाज बनाकर व उसे हवा में उड़ाकर रिलांयस को जवाब भी अपने तरीके से दे दिया है। शायद इस तरीके के साथ जाखड़ का जवाब किसी वकील […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/attack-on-freedom-of-expression/article-5522"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/artical-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रिलायंस ग्रुप ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ सहित कांग्रेस के कई वक्ताआें को लीगल नोटिस भेज कर लोकतंत्र को हलके में लिया है। जाखड़ ने नोटिस का जहाज बनाकर व उसे हवा में उड़ाकर रिलांयस को जवाब भी अपने तरीके से दे दिया है। शायद इस तरीके के साथ जाखड़ का जवाब किसी वकील द्वारा दिए गए जवाब से कहीं अधिक मजबूत व चर्चित बन गया है। वैसे भी रिलायंस में ऐसी कोई उम्मीद नहीं थी कि वह संसद में चल रही कार्रवाई के खिलाफ किसी नेता को नोटिस भेजेंगे। अगर अनिल अंबानी अपना पक्ष ही रख देते तो यह काफी होना था। दरअसल यह रूझान अनिल अंबानी का गैर-जरूरी उत्साह व अपने आप को राजनीतिक पार्टियों को टक्कर देने के अहसास की उपज है।</p>
<p style="text-align:justify;">नि:संदेह रिलायंस गु्रप देश का बड़ा कारोबारी घराना है, जो देश की आर्थिकता का अटूट अंग भी बन गया है। रिलांयस को अपने उत्पादों व तकनीक का प्रचार-प्रसार करने का भी अधिकार है लेकिन जब कोई जनप्रतिनिधि किसी लोक मसले पर संसद में आवाज उठाता है तो उसकी अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाना लोकतंत्रीय विरोधी कार्रवाई ही मानी जाएगी। अगर देखा जाए तो जाखड़ का विरोध रिलांयस ग्रुप के साथ ही नहीं बल्कि केन्द्र सरकार के साथ है। जाखड़ तो सरकार पर दोष लगा रहे हैं कि सरकार ने उद्योगपति को फायदा पहुंचाने का कार्य किया है। लीगल नोटिस भेजने की कार्रवाई रिलायंस के लिए ही नमोशी वाली बन गई है। कोई भी राजनीतिक पार्टी लीगल नोटिस का समर्थन नहीं करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटनाचक्र देश में राजनीतिक व्यवस्था में कार्पोरेट के हावी होने को दर्शाता है। पता नहीं कितने ही नेता संसद के अंदर व बाहर सरकार व निजी कंपनियों की सौदेबाजी के खिलाफ बोल चुके हैं। अगर विधायकों/सांसदों के खिलाफ पैसों के जोर पर बोलने पर पाबंदी लगानी है तो फिर लोकतंत्र की जरूरत ही नहीं रह जाती। कार्पोरेट घरानों ने राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ के साथ बेशुमार लाभ कमाया व सरकारी निर्णयों को भी प्रभावित करने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। रिलायंस ग्रुप की ताजा कार्रवाई के साथ किसी संदेह की गुंजाईश नहीं रह जाती। कार्पोरेट इतना संयम जरूर बरतें कि कम से कम सच-झूठ संबंधी बोलने का अधिकार किसी से न छीना जाए। आम जनता के हितों की अहमियत को समझा जाए या न समझा जाए लेकिन यह बेआवाज नहीं होने चाहिए।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Aug 2018 08:46:52 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस ने उठाया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा</title>
                                    <description><![CDATA[हर बात के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं: राठोड़ नई दिल्ली (एजेंसी) कांग्रेस ने एक निजी टेलीविजन चैनल के तीन कर्मचारियों को सरकार के खिलाफ ‘सच की खोज’ के लिए सरकार के दबाव में हटाये जाने का आरोप लगाते हुये आज लोकसभा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/congress-releases-freedom-of-expression/article-5129"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/congress-releases-freedom-expression.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">हर बात के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं: राठोड़</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)</strong> कांग्रेस ने एक निजी टेलीविजन चैनल के तीन कर्मचारियों को सरकार के खिलाफ ‘सच की खोज’ के लिए सरकार के दबाव में हटाये जाने का आरोप लगाते हुये आज लोकसभा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुये कहा कि पिछले कुछ समय से मीडिया पर पाबंदी लगायी जा रही है और ऐसी कोई भी खबर देने पर जो सरकार को नापसंद हो, उन पर कार्रवाई की जा रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मीडिया पर दबाव बना रही है सरकार</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात में किये गये दावे की ‘रियलिटी चेक’ करने के लिए छत्तीसगढ़ के एक गाँव में संवाददाता भेजने के बाद एक निजी टेलीविजन चैनल पर इतना दबाव बनाया गया कि उसे अपने एक वरिष्ठ पत्रकार तथा दो एंकरों को निकालना पड़ा। उन्होंने कहा कि ‘रियलिटी चेक’ में दावा गलत साबित हुआ था। खड़गे ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह चैनलों और मीडिया को दबाना चाहती है जो अच्छी बात नहीं है। इसके जवाब में सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि ये आरोप गलत हैं। चैनल की पहली खबर गलत निकलने के बाद भी सरकार ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जब विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं होता है तो वह हर बात के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराती है।</p>
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                <pubDate>Fri, 03 Aug 2018 09:52:28 +0530</pubDate>
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