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                <title>Ruhanisatsang - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>हम सब एक हैं, हमारा मालिक एक है: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[बरनावा। पावन भंडारे की नामचर्चा में पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के अनमोल वचनों की रिकॉर्डिड वीडियो चलाई गई। पावन वचनों में पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जैसा सबको मालूम है कि ये महीना सच्चे दाता, रहबर मालिक, बेपरवाह शाह सतनाम जी महाराज के अवतार माह के रूप में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/our-master-is-one-pujya-guruji/article-31307"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/hajur-pita-ji-6-scaled.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा। </strong>पावन भंडारे की नामचर्चा में पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के अनमोल वचनों की रिकॉर्डिड वीडियो चलाई गई। पावन वचनों में पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जैसा सबको मालूम है कि ये महीना सच्चे दाता, रहबर मालिक, बेपरवाह शाह सतनाम जी महाराज के अवतार माह के रूप में साध-संगत मनाती है। आप सबको मुर्शिद-ए-कामिल के पाक पवित्र अवतार माह की बहुत-बहुत मुबारकबाद, बहुत-बहुत आशीर्वाद। मालिक आपके घरों में बरकतें दे, आप दिन-दोगुनी रात चौगुनी मानवता, इन्सानियत में आगे बढ़ते जाएं, मालिक की तमाम खुशियों के हकदार बनते जाएं और मालिक की वो कृपा, दया-मेहर आपके ऊपर मूसलाधार बरसती जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सच्चे दाता रहबर इस पवित्र महीने में इस धरा पर आए। जीवों को सच का संदेश दिया। सच के राह पर चलना सिखाया और ये बताया कि आप राम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब, किसी भी नाम से पुकारो, ये परमपिता परमात्मा का है। उस सुप्रीम पावर, उस गॉड का है, अल्लाह, ओम, हरि, उस मालिक का है। भाषा बदलने से मालिक नहीं बदलते। भाषा में हर वस्तु का नाम लगभग अलग होता है। पानी को जल, नीर, वाटर, वॉशर, आब, नीलू, नीरू, अनि आदि बहुत से नामों से पुकारा जाता है। लेकिन पानी का नाम बदलने से क्या पानी स्वाद या पानी का रंग बदल जाएगा? नहीं बदलता। तो सोचने वाली बात है कि जब पानी का नाम बदलने से पानी नहीं बदलता तो मालिक का नाम बदलने से वो मालिक कैसे बदल सकता है। नाम अलग-अलग लिए जाते हैं पर सबका मालिक एक है। हम सब एक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी ने फरमाया कि भाषा अलग, पहनावा अलग, खान-पान अलग लेकिन परमपिता परमात्मा, अल्लाह, राम, गॉड, खुदा, रब्ब ने और किसी को कुछ भी अलग नहीं दिया। यह नहीं है कि एक धर्म वाले के सिंग उगे हों और एक के पूंछ, ऐसा कुछ नहीं है। मालिक ने सबको हाथ, पांव, नाक, मुंह , कान, दांत, हड्डियां, चर्बी यानि ऊपर लपेटा चमड़ा दिया, सब माँ के गर्भ से पैदा हुए हैं। ये नहीं कि जो ऊंचे बड़े वाला है वो आसमान से टपका हो। तो भगवान अल्लाह, राम ने कुछ अलग नहीं दिया। इसलिए हमारी जात आदमियत, इन्सानियत, मानवता, मनुष्यता है। ये एकता का संदेश पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी दाता रहबर ने दिया और अमल करना सिखाया और अमल करवाया। आज बेपरवाह जी के वचनों पर अमल करने वाले पूरी दुनिया में एक नहीं, सौ-हजार नहीं, लाख-करोड़ नहीं, बल्कि करोड़ों हैं। ये सतगुरु, मुर्शिद-ए-कामिल के वचनों पर अमल करने वाले लोग हैं, उनके मुरीद हैं, जिन्होंने इन्सानियत के इस रास्ते को अपनाया है। ये माना है कि हम सब एक हैं और हमारा मालिक एक है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि लोग भाषा के नाम पर, जात-धर्म के नाम पर एक-दूसरे को लड़ाते हैं। जोकि बेहद गलत है। अपना उल्लू सीधा करने के लिए भोले-भाले लोगों को लड़ा दिया जाता है, अपना उल्लू सीधा करने के लिए लोग, लोगों को बुद्धू बनाकर मुर्गों की तरह आपस में लड़ा देते हैं और खुद खड़े तमाशा देखते हैं, नाजायज फायदा उठाते हैं। इसलिए ऐसे लोगों की बातों में कभी नहीं आना चाहिए। आपजी ने फरमाया कि आप कब से साथ रह रहे होते हैं, भाईचारा होता है, आपस में प्यार होता है, पता नहीं कौन कैसी आग या कान में कोई बात फूंकता है तो आपसी झगड़े-फसाद, खुद भाई ही भाई का दुश्मन हो जाता है। लोग दिमाग से काम नहीं लेते।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि कहने से तो भेड़ चलती है। कहते हैं कि एक भेड़ अगर कुंए में गिर जाए तो 10-15 साथ में जरूर गिर जाती हैं। उन्हें लगता है कि अंदर काफी खाने-पीने का सामान है। तो आप तो इन्सान, आदमी, मनुष्य हैं। आप किसी के कहने पर क्यों एक-दूसरे के कत्लोगारत पर उतर आते हैं। क्यों झगड़े-नफरतें फैलाने लगते हैं? दीवार से दीवार सांझी होती है, खेत से खेत सांझा होता है, अरे गलियां सांझी, बीच में बैठने की जगह सांझी, रिश्ते-नाते सांझे, आखिर क्या हुआ कि जरा सी बात पर भड़के और झगड़े शुरू, आखिर क्यों? क्योंकि उकसाने वाले भाग जाते हैं और आपका अकाज हो जाता है। इसलिए ऐसे लोगों की बात कभी न मानों, मुर्शिद ने यहीं सिखाया है कि रहना मस्त और होना होशियार चाहिए।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Mar 2022 05:26:23 +0530</pubDate>
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                <title>जरूर फलती-फूलती है मेहनत की कमाई</title>
                                    <description><![CDATA[रूहानी सत्संग। कभी सुख-शांति नहीं देता भ्रष्टाचार से कमाया धन, ठगी-बेईमानी छोड़ मेहनत करके खाओ : पूज्य गुरु जी 11670 लोगों ने लिया गुरुमंत्र हजारों ने ग्रहण किया रूहानी जाम Sirsa, SachKahoon News: जो इंसान सत्संग में चलकर आता है उसकी सभी परेशानियां और रास्ते में आने वाली रुकावटें दूर हो जाती हैं। मनमते लोग जीव […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/hard-earned-money-is-definitely-thriving/article-488"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/02-copy.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>रूहानी सत्संग। कभी सुख-शांति नहीं देता भ्रष्टाचार से कमाया धन, ठगी-बेईमानी छोड़ मेहनत करके खाओ : पूज्य गुरु जी</strong></li>
<li><strong>11670 लोगों ने लिया गुरुमंत्र </strong></li>
<li><strong>हजारों ने ग्रहण किया रूहानी जाम</strong></li>
</ul>
<p><strong>Sirsa, SachKahoon News: </strong>जो इंसान सत्संग में चलकर आता है उसकी सभी परेशानियां और रास्ते में आने वाली रुकावटें दूर हो जाती हैं। मनमते लोग जीव को सत्संग में आने से रोकते हंै। मन कहता है कि सत्संग में जाने से क्या मिल जाएगा। तेरे इतने काम बकाया पड़े हैं, वो कर ले। अगर तू सत्संग में नहीं जाएगा तो कौन पूछता है। उक्त अनमोल वचन पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम जी इन्सां ने रविवार को शाह सतनाम जी धाम में आयोजित रूहानी सत्संग के दौरान फरमाए। लाखों की तादाद में पहुंची साध-संगत ने पूज्य गुरु जी के अनमोल वचनों का लाभ उठाया। इस अवसर पर 11670 लोगों ने पूज्य गुरु जी से गुरुमंत्र की अनमोल दात ग्रहण कर नशों व सामाजिक बुराईयों से तौबा की।<br />
रूहानी सत्संग के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने ‘रूहानी जाम जाम-ए-इन्सां’ भी ग्रहण किया। सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सत्संग में मालिक की चर्चा होती है, सतगुरु से प्यार-मोहब्बत बढ़ता है। इंसान को उसकी परेशानियों व दुखों का हल मिलता है। इसलिए सत्संग में चलकर जरुर आना चाहिए। सत्संग सबके भले के लिए होता है। सत्संग सुनने से आत्मबल बढ़ता है। आत्मबल बढ़ाने के लिए लोग दुनियाभर में चक्कर लगाते हैं।<br />
आत्मा की शांति नहीं तो बाकी सब चीजें फिजूल की हंै। चाहे इंसान के पास कितनी ही जमीन जयदाद हो, ऐशों आराम के साधन हों, अगर आत्मिक शांति नहीं तो सब व्यर्थ है। आत्मिक शांति सबसे जरुरी है।पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि वाहेगुरु, अल्लाह, गॉड के नाम में वो शक्ति है जो आगे बढ़ने के लिए प्ररेणा देती है। हर इंसान जीवन में तरक्की चाहता है, सुख-शांति चाहता है, अपनी और परिवार की तंदरुस्ती चाहता है। इसमें कोई गलत नहीं है। हक-हलाल की कमाई करके खाओ। किसी दूसरे के मुंह से निवाला छीनकर अपने बच्चों को खिलाना जहर के समान है। ठगी, बेईमानी, भ्रष्टाचार से कमाया हुआ धन कभी सुखशांति नहीं देता। मेहनत से हार्ड वर्क करके जो कमाई की जाती है वह जरुर फलती-फूलती है। जीने के लिए कमाना चाहिए। कमाने के लिए जीना गलत है। ठगी, बेईमानी, भ्रष्टाचार से कमाने की बजाए मेहनत की करके खाओ। दिमागी मेहनत, शारीरिक मेहनत और अच्छे कर्म करके खाओ। वो कमाई हमेशा सुखदायी होगी। अगर मेहनत की कमाई को कोई चोर-उचक्का भी चुरा ले जाता है, जब तक वह उसे वापिस न लौटा दे तब तक उसे भी चैन नहीं मिलता। राम का नाम जपो, ईश्वर की भक्ति करो। हां, इच्छाएं हैं तो आदमी है, लेकिन इच्छाओं के मक्कड़जाल में नहीं फंसना चाहिए। इतनी इच्छाएं पैदा ही न करो कि जिन्हें पूरा करते-करते सारी उम्र ही खत्म हो जाए। रूहानी सत्संग की समाप्ति पर लाखों श्रद्धालुओं को चंद मिनटों में ही लंगर-भोजन खिला दिया गया।</p>
<p><strong>पूज्य गुरु जी ने महामहिम राष्ट्रपति को दी जन्मदिन की बधाई</strong><br />
सरसा। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने माननीय महामहिम राष्टÑपति प्रणब मुखर्जी के 81वें जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं दी। अपने ट्विटर अकाऊंट से किए ट्वीट में पूज्य गुरु जी ने महामहिम राष्टÑपति को जन्मदिन की हार्दिक बधाई दी है।</p>
<p><strong>परमात्मा के आगे नहीं चलता ढ़ोंग</strong><br />
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इंसान को दीनता और नम्रता के साथ जीना चाहिए। सब कुछ मिल जाए, लेकिन अहंकार नहीं आना चाहिए। जब अहंकार आ जाता है तो वहां से मालिक का प्यार चला जाता है। मालिक के रहमोकर्म को याद रखना चाहिए। हमेशा उसका शुक्राना करते रहना चाहिए। अगर भगवान से कुछ मांगना ही है तो भगवान से भगवान को मांगो। फिर देखना किसी चीज की कमी नहीं रहेगी। बस इंसान की कथनी-करनी में फर्क नहीं होना चाहिए। परमात्मा के आगे ढ़ोंग, ड्रामेबाजी नहीं चलती। जिनके अंदर सतगुरु के लिए तड़प होती है। सतगुरु उन्हें जरुर मिलते हैं। सेवा, सिमरन और अपने सतगुरु पर दृढ़ विश्वास रखना जरुरी है। दृढ़ विश्वास सत्संग सुनने से ही आता है। सत्संग में आने से मन की जिज्ञासा शांत होती है। मन को कभी भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 12 Dec 2016 01:24:28 +0530</pubDate>
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