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                <title>Cotton - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>फाजिल्का मंडी में कपास की सरकारी खरीदी शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[फाजिल्का की अबोहर, फाजिल्का व किलियांवाली मंडियों में खरीद शुरू 7271 रुपए प्रति क्विंटल के दर से नरमे की फसल खरीदी गई | Fazilka News फाजिल्का (सच कहूँ न्यूज)। Fazilka News: फाजिल्का की नरमा मंडी में सोमवार से सरकारी खरीदी का कार्य शुरू हो गया है। मंडी में सीसीआई (भारतीय कपास निगम) के अधिकारी पहुंचे, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/government-purchase-of-cotton-started-in-fazilka-mandi/article-65400"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/fazilka-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">फाजिल्का की अबोहर, फाजिल्का व किलियांवाली मंडियों में खरीद शुरू</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>7271 रुपए प्रति क्विंटल के दर से नरमे की फसल खरीदी गई | Fazilka News</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>फाजिल्का (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Fazilka News: फाजिल्का की नरमा मंडी में सोमवार से सरकारी खरीदी का कार्य शुरू हो गया है। मंडी में सीसीआई (भारतीय कपास निगम) के अधिकारी पहुंचे, जिन्होंने मार्केट कमेटी के सुपरवाइजर के साथ मिलकर किसानों से नरमे की फसल की खरीद शुरू की। इस सरकारी खरीद में 7271 रुपए प्रति क्विंटल के दर से नरमे की फसल खरीदी जा रही है। Fazilka News</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि निजी स्तर पर नरमे की फसल किसानों से कम भाव में खरीदी जा रही थी, जिससे किसान नाराज थे। मंडी सुपरवाइजर राज कुमार ने बताया कि किसान पिछले कुछ दिनों से शिकायत कर रहे थे कि प्राइवेट खरीदार उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं दे रहे। इस समस्या के समाधान के लिए मार्केट कमेटी के सचिव और जिला मंडी अधिकारी ने सीसीआई को सक्रिय किया। अब सरकारी स्तर पर उचित दर पर फसल खरीदी जा रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कागजात लाना अनिवार्य | Fazilka News</h3>
<p style="text-align:justify;">मंडी में पहुंचे सीसीआई अधिकारी विजय कुमार ने जानकारी दी कि फाजिल्का जिले की अबोहर, फाजिल्का और किलियांवाली मंडियों में भी नरमे की फसल की खरीद शुरू की गई है। किसान को अपनी फसल बेचने के लिए खुद उपस्थित होना होगा और गिरदावरी, जमाबंदी तथा आधार कार्ड साथ लाना अनिवार्य होगा। सीसीआई द्वारा फसल की खरीद 7271 रुपए प्रति क्विंटल के सरकारी भाव पर की जाएगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जिला बार एसोसिएशन के चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरू" href="http://10.0.0.122:1245/nomination-process-for-district-bar-association-election-begins/">जिला बार एसोसिएशन के चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरू</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 20:17:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>बाजार में सफेद सोने की आवक तेज</title>
                                    <description><![CDATA[फाजिल्का (सच कहूँ/रजनीश रवि)। जिले की मंडियों में सफेद सोने (कपास) की आवक कपास की फसल (Cotton Crop) को लेकर अच्छे संकेत दे रही है। इस वर्ष मंडी में पिछले वर्ष की तुलना में उसी दिन काफी अधिक फसल की आवक हुई, जिससे साबित होता है कि उपज पिछले वर्ष की तुलना में अधिक होगी। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/cotton-crop-is-showing-good-signs-in-the-market/article-53337"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/fazilka-news-1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>फाजिल्का (सच कहूँ/रजनीश रवि)।</strong> जिले की मंडियों में सफेद सोने (कपास) की आवक कपास की फसल (Cotton Crop) को लेकर अच्छे संकेत दे रही है। इस वर्ष मंडी में पिछले वर्ष की तुलना में उसी दिन काफी अधिक फसल की आवक हुई, जिससे साबित होता है कि उपज पिछले वर्ष की तुलना में अधिक होगी। Fazilka News</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में, यह इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने किसानों और कृषि विशेषज्ञों की मांग के अनुसार समय से पहले ही अप्रैल महीने में किसानों को नहरों के माध्यम से सिंचाई का पानी उपलब्ध करा दिया, जिसके कारण बुआई जल्दी हो गई। पंजाब के इस दक्षिण पश्चिमी जिले में किया गया था। शुरुआती वानस्पतिक विकास के साथ फसल सफेद मक्खी और अन्य कीड़ों के हमले का विरोध करने में सक्षम थी और जब पिंक बॉल वर्म का हमला हुआ तो पौधे के निचले और मध्य भागों में पहले से ही अच्छी संख्या में बॉल्स विकसित हो गए थे, जिससे किसानों के लिए अच्छी कपास की पैदावार हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष जिले में 91500 हेक्टेयर में कपास की बुआई हुई थी, जबकि चालू वर्ष में यह रकबा 92800 हेक्टेयर है। हालांकि कपास के रकबे में बढ़ोतरी मामूली रही, लेकिन मंडियों में अब तक आई फसल के आंकड़े किसानों के लिए राहत देने वाले हैं। पिछले साल फाजिल्का की मंडी में कुल 38000 क्विंटल कपास की आवक हुई थी, जबकि इस साल अब तक 15200 क्विंटल कपास की आवक हो चुकी है। Fazilka News</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार कपास की मुख्य मंडी अबोहर में पिछले वर्ष अब तक 38300 क्विंटल की आवक हुई थी, जबकि इस वर्ष अब तक 65160 क्विंटल की आवक हो चुकी है। जबकि अभी कपास विपणन सीजन के शुरुआती दिन हैं। दूसरी ओर, कपास अभी भी आम तौर पर सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर बेचा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाजार में कपास बेचने आए किसानों का भी मानना है कि सरकार द्वारा समय पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के कारण ही फसल की अच्छी पैदावार हुई और अगर सरकार पहले से पानी की व्यवस्था नहीं करती तो कपास की फसल की कोई उम्मीद नहीं थी। इस साल वहीं, किसानों का यह भी कहना है कि फसल की बुआई जल्दी होने से अब कपास की फसल भी जल्दी तैयार हो जाएगी और समय पर खेत खाली होने से वे अब गेहूं की बुआई भी समय पर करेंगे जबकि पिछले वर्षों में कपास की कटाई देर से होने के कारण उनकी गेहूं की बुआई भी देर से होती थी। Fazilka News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Old Pension Scheme: लागू हो सकती है ओल्ड पेंशन स्कीम?" href="http://10.0.0.122:1245/can-old-pension-scheme-be-implemented/">Old Pension Scheme: लागू हो सकती है ओल्ड पेंशन स्कीम?</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Oct 2023 19:16:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>नरमे पर गुलाबी सुंडी की मार, बेबस किसान दे रहे कीटनाशकों के छिड़काव पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[किसान बोले : सुंडी टिंडे के अंदर होने के चलते उस पर नहीं हो रहा दवा का असर ओढां (सच कहूँ/राजू)। विगत वर्ष की बजाय इस बार नरमे की फसल बेहद अच्छी दिख रही है, लेकिन गुलाबी सुंडी किसानों को दोहरी चपेट मार रही है। किसान सुंडी पर नियंत्रण करने हेतु कीटनाशकों के छिड़काव पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/gulabi-sundi-in-cotton/article-51825"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/gulabi-sundi.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">किसान बोले : सुंडी टिंडे के अंदर होने के चलते उस पर नहीं हो रहा दवा का असर</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां (सच कहूँ/राजू)।</strong> विगत वर्ष की बजाय इस बार नरमे की फसल बेहद अच्छी दिख रही है, लेकिन गुलाबी सुंडी किसानों को दोहरी चपेट मार रही है। किसान सुंडी पर नियंत्रण करने हेतु कीटनाशकों के छिड़काव पर जोर दे रहे हैं, लेकिन सुंडी टिंडे के अंदर होने के चलते उस पर असर न के बराबर हो रहा है। परेशान किसानों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर क्या किया जाए। गांव नुहियांवाली, रत्ताखेड़ा, जंडवाला जटान, चोरमार खेड़ा, मलिकपुरा व ओढां सहित अन्य गांवों में नरमे की फसल पर गुलाबी सुंडी का काफी प्रकोप देखा जा रहा है। Gulabi Sundi</p>
<p style="text-align:justify;">गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए किसान एक सप्ताह के भीतर कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन फिर भी निजात नहीं मिल रही। नुहियांवाली के किसान डॉ. जगदीश सहारण व चेतराम दादरवाल, ओढां के किसान कौर सिंह कुंडर, गुरचेत सिंह आदि ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल रहने व पर्याप्त बरसात होने के चलते फसल पूर्व ही अपेक्षा बेहद अच्छी है, लेकिन गुलाबी सुंडी का प्रकोप बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसान सुंडी पर नियंत्रण करने हेतु महंगे कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन फिर भी नियंत्रण नहींं हो पा रहा। सुंडी मर नहीं रही और टिंडे गलकर खराब हो रहे हैं। ऐसे में उत्पादन पर काफी विपरीत असर पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों ने बताया कि सुंडी की रोकथाम के लिए वे एक सप्ताह के भीतर छिड़काव कर रहे हैं। वे 8 से 10 बार छिड़काव कर चुके हैं, लेकिन फिर भी सुंडी का ख्रात्मा नहीं हो रहा। उन्होंने बताया कि छिड़काव में प्रति एकड़ करीब 2 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। ऊपर से इस बार मजदूर भी एक हजार रुपये क्विंटल चुगाई मांग रहे हैं। विगत वर्ष 850 रुपये का रेट था। ऐसे में किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। किसान जगदीश सहारण ने बताया कि वह अब से पहले 10 बार नरमे में छिड़काव कर चुका है तथा 2 छिड़काव और होंगे। लेकिन फिर भी सुंडी का खात्मा नहीं हो पा रहा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये करें उपचार :-</h3>
<p style="text-align:justify;">कृषि विभाग ओढां के कार्यवाहक खंड कृषि अधिकारी पवन यादव ने बताया कि अपने खेतों में नरमे के 100 फूलों का निरीक्षण करें। यदि इनमें करीब 10 फूल गुलाबी सुंडी से ग्रसित मिलते हैं या फिर 20 टिंडों को फाड़कर देखने पर कुछ टिंडों में गुलाबी सुंडी मिलती है तो कीटनाशक के छिड़काव की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि गुलाबी सुंडी का प्रकोप फलीय भागों पर 5 से 10 प्रतिशत तक होने पर रोकथाम के लिए प्रोफेनोफॉस 50 ईसी की 3 मिलीलीटर मात्रा प्रतिलीटर पानी की दर से छिड़काव करें। इसके बाद अगला छिड़काव जरूरत पड?े पर क्यूनालफॉस 20 एफ की 4 मिलीलीटर या थियोडिकार्ब 75 डबल्यूपी की 1.5 ग्राम मात्रा प्रतिलीटर की दर से 10-12 दिनों बाद करें। उन्होंने कहा कि एक ही कीटनाशक का बार-बार छिड़काव न करें। Gulabi Sundi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जानें ‘One Nation’, ‘One Election’ से क्या होगा फायदा, पहली बार कब हुआ ‘एक देश एक चुनाव’" href="http://10.0.0.122:1245/one-nation-one-election-news/">जानें ‘One Nation’, ‘One Election’ से क्या होगा फायदा, पहली बार कब हुआ ‘एक देश एक चुनाव’</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 16:14:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सफेद सोने की आवक शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[अबोहर (सच कहूँ न्यूज)। अबोहर की अनाज मंडी में सफेद सोने (नरमे) की आवक शुरू हो गई है। सोमवार को नरमे (Cotton) की खरीद का भी श्रीगणेश किया गया। मै. सोहन लाल नत्थू राम पर श्री राम कॉटन इंडस्ट्रीज की ओर से 6571 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से पहली ढ़ेरी खरीदी। इस अवसर पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/cotton-arrivals-have-started-in-abohar-grain-market/article-51473"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/abohar-news-17.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> अबोहर की अनाज मंडी में सफेद सोने (नरमे) की आवक शुरू हो गई है। सोमवार को नरमे (Cotton) की खरीद का भी श्रीगणेश किया गया। मै. सोहन लाल नत्थू राम पर श्री राम कॉटन इंडस्ट्रीज की ओर से 6571 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से पहली ढ़ेरी खरीदी। इस अवसर पर मौजूद प्रधान पीयूष नागपाल ने बताया कि अनाज मंडी में नरमे की आवक हुई है। अभी फिलहाल श्रीराम कॉटन इंडस्ट्रीज की ओर से खरीद का आगाज किया गया है और पहली ढेरी 6571 रुपए प्रति क्विटल के हिसाब से बिकी। Abohar News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि यह भी किसानों, आढ़तियों व मजदूर वर्ग के लिए अच्छा रहे। अभी तक फिलहाल प्राइवेट व्यापारी ही आए हैं। सरकारी खरीद कब शुरू होगी, इस बारे में अभी कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी फसल का अधिक से अधिक ध्यान रखें और कोई दिक्कत आती है तो कृषि अधिकारियों से सलाह कर ही कोई कीटनाशक का इस्तेमाल करें। इधर, फर्म के संचालक सेठी ने कहा कि किसान लाखन की ओर से आज डेढ़ क्विंटल नरमा उनकी दुकान पर लाया गया है। नरमे की क्वालिटी अच्छी है और परमात्मा की कृपा रही, तो क्वालिटी इसी तरह ही रहेगी। आज मंडी में करीब 700 मन नरमे की आवक हुई है। Abohar News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सर्वसम्मति से चुनी गई पंचायतों को मिलेंगे पांच लाख विशेष अनुदान: सीएम मान" href="http://10.0.0.122:1245/panchayats-elected-unanimously-will-get-five-lakh-special-grants-cm-mann/">सर्वसम्मति से चुनी गई पंचायतों को मिलेंगे पांच लाख विशेष अनुदान: सीएम मान</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Aug 2023 21:01:24 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>अलवर की कपास की विदेशों में मांग होने से भाव में तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[अलवर (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान में अलवर की कपास की विदेशो में मांग होने के कारण इस बार कपास के भाव में तेजी है और यहां के किसानों को इसमें काफी फायदा साबित हो रहा है। अलवर में इस साल पिछले साल की तुलना में कपास की बुवाई ज्यादा की गई।अलवर के कपास की डिमांड […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/alwar-cotton-prices-rise-due-to-demand-in-abroad/article-40418"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/msp-on-cotton.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अलवर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान में अलवर की कपास की विदेशो में मांग होने के कारण इस बार कपास के भाव में तेजी है और यहां के किसानों को इसमें काफी फायदा साबित हो रहा है। अलवर में इस साल पिछले साल की तुलना में कपास की बुवाई ज्यादा की गई।अलवर के कपास की डिमांड अमेरिका चाइना और यूएसए सहित कई देशों में होने के कारण कपास में तेजी है और इसी तेजी के चलते किसानों ने फायदा लेने के लिए कपास को बेचने से रोका हुआ है। अलवर कृषि उपज मंडी समिति के क्षेत्रीय उपनिदेशक इसाक हारून ने बताया कि अलवर खंड में पिछले साल की तुलना में इस साल कपास अधिक बुवाई की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल 123500 क्विंटल पैदावार थी जहां इसाल 51000 क्विंटल बढ़कर 177000 क्विंटल पैदावार हुई है एवं भाव अच्छे हैं। उन्होंने बताया कि अलवर की मंडी में इन दिनों 8000 से लेकर 8400 प्रति क्विंटल कपास बिक रही है और विदेशों में भी इस कपास की मांग है और एक्सपोर्ट की जा रही है। हल्की क्वालिटी की कपास इंडियन मिल में चली जाती है। अच्छी कपास बाहर जा रही है। कृषि उपज मंडी समिति के अध्यक्ष सुरेश जलालपुरिया ने बताया कि विगत साल की तुलना में इस साल पैदावार अधिक है और भाव भी अच्छे हैं। पिछले साल इसके 6000 से 7000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव थे जो इस साल 8000 से 9000 प्रति क्विंटल भाव चल रहे हैं। विदेशों में इस साल कपास की काफी डिमांड है। यह फसल धीरे-धीरे बाजार में आ रही है और आवक भी बढ़ती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">केडलगंज व्यापार संचालन समिति के पूर्व अध्यक्ष अनिल गुप्ता ने बताया कि यहां कपास खुली बोली के माध्यम से बिक रही है। बाहर के व्यापारी खरीदने आ रहे हैं और अमेरिका यूएसए चाइना में इसकी डिमांड ज्यादा है। इसलिए अलवर की कपास भी एक्सपोर्ट हो रही है । इस समय मंडी में 2000 पोट प्रतिदिन आ रहे हैं जिसके भाव 9000 रुपए तक हैं। इस साल 1000 रुपए की तेजी कपास में देखी गई है। किसानों ने भी अपना माल अभी रोका हुआ है।उनको यह उम्मीद है कि भाव में तेजी आएगी क्योंकि विदेश में कपास एक्सपोर्ट होने के कारण इसकी डिमांड इस वक्त बहुत ज्यादा है।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Dec 2022 14:48:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नरमा की आवक के साथ भाव में आया उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज)। अनाज मंडी में नरमा की आवक के साथ भाव में उछाल आने लगा है। नरमा के रेट में मंगलवार को 188 का उठाल आते ही दस हजार रुपये पार कर गया। अनाज मंडी में 10120 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिका। इससे पहले फरवरी माह में दस हजार रुपये से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/with-the-arrival-of-cotton-there-was-a-jump-in-the-price/article-37486"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/cotton.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> अनाज मंडी में नरमा की आवक के साथ भाव में उछाल आने लगा है। नरमा के रेट में मंगलवार को 188 का उठाल आते ही दस हजार रुपये पार कर गया। अनाज मंडी में 10120 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिका। इससे पहले फरवरी माह में दस हजार रुपये से अधिक रेट में नरमा बिका था। इसके बाद इसमें धीरे धीरे गिरावट आती रही। अब पिछले कई दिनों से फिर भाव में बढ़ोतरी होनी शुरू हुई। हालांकि कपास अभी भी 8500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। इस बार बारिश व गुलाबी सुंडी के कारण क्षेत्र में नरमा की फसल चौपट हो गई। जिले का नाम देशभर में काटन के उत्पादन में भी प्रदेश में टाप पर है। जिले में कपास की 2 लाख 8 हजार हेक्टेयर पर बिजाई की जाती है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/farmers-get-insurance-claim-of-about-rs-366-crore-agriculture-minister/"><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़े:</strong>– </span>किसानों को मिला करीब 366 करोड़ रूपए का बीमा क्लेम: कृषि मंत्री</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">नरमा की मंडी में कम हो रही है आवक</h3>
<p style="text-align:justify;">अनाज मंडी में किसान सुबह से ट्रैक्टर ट्राली में नरमा की फसल बेचने के लिए आने लगे हैं। खेतों में अभी चुंगाई का कार्य पूरी गति से शुरू नहीं हुआ है। इसी के चलते अनाज मंडी में अभी नरमा की आवक कम ही हो रही है। इस सीजन के शुरुआत में नरमा के भाव नौ हजार रुपये प्रति क्विंटल था। इसके बाद नरमा के भाव में बढ़ोतरी होती रही। मंडी में सोमवार को 9932 रुपये में बिका। जो अब बढ़कर 10120 रुपये तक पहुंच गये हैं। गुलाबी सुंडी व बारिश से नरमा की फसल को जिले में 60 से 70 प्रतिशत फसलों को नुकसान हुआ है। कृषि विभाग द्वारा फसलों की गिरदावरी भी फसल खराब होने पर की जा रही है।</p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Sep 2022 19:55:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कपास की खेती बहुत महत्वपूर्ण, भारत सबसे बड़ा उत्पादक: तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि कपास की खेती देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, भारत इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है और लाखों किसान इस खेती में जुटे हुए हैं। तोमर ने कहा, ‘हमारा कृषि क्षेत्र, अर्थव्यवस्था की रीढ़ के समान है। कृषि क्षेत्र में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/cotton-cultivation-is-very-important-india-is-the-largest-producer/article-32364"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/tomar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि कपास की खेती देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, भारत इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है और लाखों किसान इस खेती में जुटे हुए हैं। तोमर ने कहा, ‘हमारा कृषि क्षेत्र, अर्थव्यवस्था की रीढ़ के समान है। कृषि क्षेत्र में कपास की भूमिका महत्वपूर्ण है। खाद्यान्न और कपड़े के बिना काम नहीं चल सकता है, खाद्यान्न का तो हमारे देश में बंपर उत्पादन हो रहा है, वहीं कपास की खेती भी और उन्नत होनी चाहिए, जिसके लिए सरकार तत्परता से प्रयत्नशील है। कपास सेक्टर में करोड़ों लोगों को रोजगार मिला हुआ है, वहीं व्यावसायिक फसल की दृष्टि से किसानों के लिए कपास की खेती का महत्व है। कपास के क्षेत्र में किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों का अनुसंधान तथा उद्योगों का योगदान है, वहीं उत्पादकता बढ़ाने को सरकार बहुत गंभीरता से ले रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कपास के विभिन्न पहलुओं पर काफी गंभीर विचार-मंथन हुआ</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (सीटी) के अनुसंधान संघ- कॉटन डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएशन के स्वर्ण जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए तोमर ने कहा कि कोविड के प्रतिकूल समय में भी खेती से जुड़े लोगों ने बेहतर भूमिका का निर्वहन किया है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र है। इस समारोह के विभिन्न सत्रों के दौरान पैनलिस्टों के बीच कपास के विभिन्न पहलुओं पर काफी गंभीर विचार-मंथन हुआ, जिसके आधार पर कपास के विकास के लिए एक रोडमैप तैयार करके आगे काम किया जा सकता है, जो परिवर्तन लाने में मदद करेगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सरकार कपास क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी ।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कपास भारत में सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसलों में से एक</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">राज्य मंत्र दर्शना विक्रम जरदोश ने कहा कि कपास भारत में सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसलों में से एक है और लाखों कपास किसानों सहित संबद्ध क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार पैदा करके भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए रीढ़ के रूप में कार्य करता है। इसके अलावा, कपड़ा और परिधान के अधिकांश निर्यात उत्पाद भी कपास आधारित हैं। अब भारत का कृषि निर्यात तेजी से बढ़ रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 14:28:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कपास पर एमएसपी के लिए 17,408 करोड़ रुपए मंजूर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। सरकार ने आगामी कपास विपणन सत्र में कपास किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने के लिए 17,408 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता की बुधवार को घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) के इस निर्णय की जानकारी सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rs-17408-crore-approved-for-msp-on-cotton/article-28261"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/anurag-thakur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सरकार ने आगामी कपास विपणन सत्र में कपास किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने के लिए 17,408 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता की बुधवार को घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) के इस निर्णय की जानकारी सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने दी। उन्होंने कहा कि सीसीईए ने कपास आयोग को मूल्य समर्थन के लिए 17408 करोड़ रुपए की प्रतिबद्धता के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इससे 11 राज्यों के कपास की खेती करने वाले 58 लाख किसानों और इस काम में लगे चार करोड़ श्रमिकों को उनकी आजीविका में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी एजेंसियों ने कोविड के दौरान भी कपास की खरीद जारी रखी। कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस निर्णय से किसानों के हित की रक्षा होगी। गोयल ने ट्वीट कर कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कैबिनेट द्वारा कपास की खरीद में एमएसपी कार्यक्रम लागू करने हेतु 17,408 करोड़ के समर्थन मूल्य को स्वीकृति दी गयी। इससे कपास की खेती में देश आत्मनिर्भर होगा तथा लगभग 58 लाख किसानों के हितों की रक्षा होगी।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Nov 2021 19:44:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>देश की मंडियों में पहुंची कपास की 75 हजार गांठें , रुई में 150 रुपए की तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[फरीदकोट (सच कहूँ न्यूज)। देश के विभिन्न कपास उत्पादक राज्यों की मंडियों में न?ए कपास की अब तक लगभग पांच लाख गांठें पहुंच गई हैं। विभिन्न राज्यों की मंडियों में आज लगभग 75,500 गांठों की कपास आमद हुई तथा गत शनिवार को कपास आमद 59,500 गांठों की थी। आगामी दिनों में कपास की आवक और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/75-thousand-bales-of-cotton-reached-in-the-mandi-of-the-country-cotton-increased-by-rs-150/article-19172"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/cotton.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>फरीदकोट (सच कहूँ न्यूज)।</strong> देश के विभिन्न कपास उत्पादक राज्यों की मंडियों में न?ए कपास की अब तक लगभग पांच लाख गांठें पहुंच गई हैं। विभिन्न राज्यों की मंडियों में आज लगभग 75,500 गांठों की कपास आमद हुई तथा गत शनिवार को कपास आमद 59,500 गांठों की थी। आगामी दिनों में कपास की आवक और इसमें तेजी आने के मद्देनजर कपड़ा मंत्रालय के उपक्रम भारतीय कपास निगम लिमिटेड (सीसीआई) ने हरियाणा, राजस्थान व पंजाब में किसानों का व्हाइट गोल्ड न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू कर दी है। सी.सी.आई. सूत्रों के अनुसार चालू नए कपास सीजन साल 2020-21 के दौरान भारतीय कपास निगम लिमिटेड पिछले साल के मुकाबले 20 लाख गांठों का व्हाइट गोल्ड अधिक किसानों से सीधा खरीदने जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल निगम देश में 1.25 करोड़ गांठों का व्हाइट गोल्ड खरीदेगा जबकि पिछले साल निगम ने एक करोड़ पांच लाख 14000 गांठों का व्हाइट गोल्ड न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा था। सूत्रों के अनुसार सी.ए.बी.का अनुमान है कि चालू कपास सीजन के दौरान 3.60 करोड़ गांठों का व्हाइट गोल्ड उत्पादन होगा। जबकि पिछले साल यह उत्पादन 3.57 करोड़ गांठों का रहा। निजी व्यापारियों द्वारा देश में इस बार 4 से 4.25 करोड़ गांठ उत्पादन के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन यह अनुमान रुई तेजड़ियों के गले नीचे कत?ई नहीं उतर रहा है। पिछले साल तेजड़ियों ने लाखों गांठ रुई का स्टाक जमा कर लिया क्योंकि उन्हें बड़ी उम्मीद थी कि रूई में मोटी तेजी हाथ लगेगी लेकिन हुआ इसके विपरीत जिससे स्टाक रखने से बड़ी आर्थिक चोट पहुंची हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में कपास आमद बढ़ने के बावजूद भारतीय रूई बाजार में तेजी का रुझान चल पड़ा है। बाजार में पिछले हफ्ते के मुकाबले 140- 150 रुपए प्रति मन की तेजी आ चुकी है। इस तेजी ने एक बार तो रुई बाजार के मंदडिय़ों के चेहरे पर मुस्कान कम कर दी है लेकिन मंदडिय़ों का कहना है कि यह रुई की तेजी अस्थायी है और ये कीमतें बहुत जल्दी वापस आएंगी क्योंकि बाजार में अधिकतर बड़े घरानों ने रुई खरीदारी से चुप्पी साध रखी है। कुछेक कताई मिलरों की खरीद शुरू है। उधर ,रुई तेजड़ियों का मानना है कि जब बाजार में कुछेक कताई मिलों की डिमांड से बाजार में तेजी का रुझान चल पड़ा है। यदि बाजार में अन्य कताई मिलों की डिमांड आ गई तो रुई में अच्छी तेजी बनेंगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Oct 2020 15:45:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मंडियों में आवक तेज, कपास खरीद रफ्तार धीमी</title>
                                    <description><![CDATA[मंडियों के हालात ऐसे हैं कि टाउन व जंक्शन मंडी में इस वक्त दस हजार क्विंटल से अधिक कपास की आवक हो रही है। हनुमानगढ़ । किसानों की ओर से कई दिनों तक संघर्ष करने के बाद बीते सप्ताह जंक्शन मंडी में कपास की सरकारी खरीद शुरू हो गई। लेकिन टाउन मंडी में अभी तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/cotton-case-of-procurement/article-10979"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/cotton.jpg" alt=""></a><br /><h2>मंडियों के हालात ऐसे हैं कि टाउन व जंक्शन मंडी में इस वक्त दस हजार क्विंटल से अधिक कपास की आवक हो रही है।</h2>
<p style="text-align:left;"><strong>हनुमानगढ़ ।</strong> किसानों की ओर से कई दिनों तक संघर्ष करने के बाद बीते सप्ताह जंक्शन मंडी में कपास की सरकारी खरीद शुरू हो गई। लेकिन टाउन मंडी में अभी तक सरकारी खरीद का श्रीगणेश भी नहीं हुआ है। टाउन में खरीद अभी तक ठप रहने के कारणों का उल्लेख करते हुए मंडी समिति सचिव ने इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है। वहीं टाउन मंडी में सरकारी खरीद कब से शुरू होगी, इस सवाल का जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है। मंडियों के हालात ऐसे हैं कि टाउन व जंक्शन मंडी में इस वक्त दस हजार क्विंटल से अधिक कपास की आवक हो रही है।</p>
<p style="text-align:left;">लेकिन सरकारी दर पर इसे खरीदने में सीसीआई अधिकारी आनाकानी कर रहे हैं। दबे मन से बोली लगाने के लिए अधिकारी मंडी में आते जरूर हैं मगर खरीद में रुचि नहीं दिखाने के कारण सरकारी खरीद की रफ्तार काफी धीमी है। इससे किसान हैरान-परेशान हो रहे हैं। पूर्व में सीसीआई अधिकारी नमी का बहाना बनाकर खरीद करने से बच रहे थे। लेकिन अब नमी की मात्रा भी खरीद नियमों के आसपास आने के बावजूद अधिकारी सरकारी खरीद करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। आवक की तुलना में नामात्र की खरीद होने से किसान परेशान हो रहे हैं। चालू सीजन में नियमानुसार आठ प्रतिशत तक नमी रहने पर किसानों को ५४५० रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान करने का निर्देश है। लेकिन इस भाव पर ज्यादातर कपास की खरीद नहीं होने से किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।</p>
<h2 style="text-align:left;">गत वर्ष सुस्ती पड़ी थी भारी</h2>
<p style="text-align:left;">गत वर्ष कपास की सरकारी खरीद शुरू करवाने में जिला प्रशासन से सुस्ती दिखाई थी। इसके कारण एक भी जिनिंग फैक्ट्री सीसीआई को नहीं मिल पाई थी। हनुमानगढ़ जिले में कपास की सरकारी खरीद को लेकर इस वर्ष सीसीआई ने जंक्शन में जो अनुबंधित किया था, उसमें भी बाद में कई दिक्कतें आ गई। लापरवाही के चलते गत वर्ष सीसीआई के अफसर जिले में एक क्विंटल कपास की सरकारी खरीद भी नहीं कर पाए थे। इस बार भी सरकारी खरीद के हालात ज्यादा संतोषजनक नहीं लग रहे।</p>
<ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2019 16:22:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कपास की फसल पर बीमारियों का छाया प्रकोप</title>
                                    <description><![CDATA[कपास की  फसलें(Cotton Crops)सफेद काली मच्छरी, कातरा नामक रोग से प्रभावित खाटलबाना (सच कहूँ न्यूज)। सीमावर्ती क्षेत्र के गांव खाटलबाना सहित आसपास के गांव में नरमे में कपास(Cotton Crops)की फसलों पर कई तरह की बीमारियों का प्रकोप देखने को मिल रहा है। गांव का खाटलबाना के किसान मंसाराम, धर्मचंद सिकंदर सिंह व रमेश कुमार आदि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/shadow-outbreak-diseases-cotton-crops/article-5246"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/cotton-crop.jpg" alt=""></a><br /><h2>कपास की  फसलें(Cotton Crops)सफेद काली मच्छरी, कातरा नामक रोग से प्रभावित</h2>
<p><strong>खाटलबाना (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सीमावर्ती क्षेत्र के गांव खाटलबाना सहित आसपास के गांव में नरमे में कपास(<strong>Cotton Crops</strong>)की फसलों पर कई तरह की बीमारियों का प्रकोप देखने को मिल रहा है। गांव का खाटलबाना के किसान मंसाराम, धर्मचंद सिकंदर सिंह व रमेश कुमार आदि ने जानकारी देते हुए बताया कि नरमे में सफेद काली मच्छरी, कातरा नामक रोग फसलों पर देखने को मिल रहे हैं। इसके साथ पत्तों का सिकुड़ना इस तरह की बीमारियों की जानकारी दी।</p>
<p>पत्तों के सिकुड़ने से नरमे के पौधे का विकास रुक जाता है और धीरे-धीरे पौधा खत्म हो जाता है, अगर समय पर दवा का छिड़काव कर  देखभाल नहीं की गई ।नरमा नामक बारीक तरह की सुंडी होती है जो पत्तों व टिंडों को धीरे-धीरे कुतरती रहती है। जिससे नरमे व कपास (<strong>Cotton Crops</strong>)का पौधा सुखने लगता है, और पौधे से खत्म हो जाता है, फूलों का गिरना शुरू हो जाता है।</p>
<p>इस तरह से नरमा,कपास (<strong>Cotton Crops</strong>)का पौधा धीरे-धीरे सूखने लग जाता है। धीरे-धीरे पूरे खेत में लगती है, किसानों ने बताया कि कई बार तीन-चार बार दवाई का छिड़काव किया गया, मगर यह बीमारी कुछ कम हुई है, अगर दवाई का छिड़काव करें तो फसल पूरी तरह से खराब हो जाती है।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Aug 2018 15:43:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इस बार जरुर मिलेगा कपास का 5150 रुपये प्रति क्विंटल भाव</title>
                                    <description><![CDATA[कहा बाजरा उगाने वाले किसानों को मिला सबसे ज्यादा लाभ बरवाला(सच कहूँ न्यूज)। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि कपास बोने वाले किसानों को कपास की 3433 रुपये प्रति क्विंटल की लागत के मुकाबले अब उन्हें कम से कम 5150 रुपये का प्रति क्विंटल भाव जरूर मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खरीफ फसलों का समर्थन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cotton-will-get-rs-5150-per-quintal/article-5172"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/cotton-will-get-rs-5150-per-quintal-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1>कहा बाजरा उगाने वाले किसानों को मिला सबसे ज्यादा लाभ</h1>
<p><strong>बरवाला(सच कहूँ न्यूज)।</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि कपास बोने वाले किसानों को कपास की 3433 रुपये प्रति क्विंटल की लागत के मुकाबले अब उन्हें कम से कम 5150 रुपये का प्रति क्विंटल भाव जरूर मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य लागत से डेढ़ गुणा करके उस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है जिसके तहत 2022 तक किसानों की आय को दोगुना किया जाएगा। रविवार को वे यहां बरवाला की कपास मंडी में आयोजित कपास-किसान धन्यवाद रैली में प्रदेश के किसानों के विशाल जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बाजरा उगाने वाले किसानों को सर्वाधिक लाभ दिया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा लागू की जा रही योजनाओं के बाद खुशहाली में किसान पीछे नहीं रहेगा। इस अवसर पर एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख नए बीपीएल राशन कार्ड बनाए जाएंगे ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ और अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके।</p>
<p>उन्होंने बरवाला हलका को 110 करोड़ रुपये की सौगातें देते हुए रैली के संयोजक भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पूनिया को मांगों की सूची में 20 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कामों को जोड़ने का अधिकार दिया। इससे पूर्व उन्होंने बरवाला में 1 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले खेल स्टेडियम तथा 3 करोड़ 5 लाख रुपये की लागत से बनने वाले सामुदायिक भवन की आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल स्वयं ट्रैक्टर चलाकर रैली स्थल तक पहुंचे। इस दौरान वित्त एवं राजस्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पूनिया सहित अन्य पदाधिकारी भी उनके साथ ट्रैक्टर पर सवार थे। मंच पर पहुंचने के बाद भाजपा की संयोजक टीम ने कपास की विशाल माला तथा हल देकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, राज्यमंत्री डॉ. बनवारी लाल तथा हिसार विधायक व हरियाणा ब्यूरो आॅफ पब्लिक इंटरप्राइजेज के चेयरमैन डॉ. कमल गुप्ता सहित अन्य भाजपा नेताओं को भी हल व कपास के फूलों के गुलदस्ते देकर उनका स्वागत किया।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Aug 2018 12:10:09 +0530</pubDate>
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