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                <title>disaster - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>आपदाओं से सीख लेने का वक्त</title>
                                    <description><![CDATA[Disaster : प्रकृति के समक्ष सरकारें भी बेबस हैं, फिर आम मनुष्य तो चीज ही क्या है। हमने अनेकों बार देखा एवं अनुभव किया कि हम प्रकृति से लड़ नहीं सकते, मुकाबला भी नहीं कर सकते, लेकिन बेहद दुखद बात है कि हम प्राकृतिक आपदाओं से सीख भी नहीं ले रहे। भौतिकवाद के नशे में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/time-to-learn-from-disasters/article-50032"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/haryana-flood-2.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Disaster : प्रकृति के समक्ष सरकारें भी बेबस हैं, फिर आम मनुष्य तो चीज ही क्या है। हमने अनेकों बार देखा एवं अनुभव किया कि हम प्रकृति से लड़ नहीं सकते, मुकाबला भी नहीं कर सकते, लेकिन बेहद दुखद बात है कि हम प्राकृतिक आपदाओं से सीख भी नहीं ले रहे। भौतिकवाद के नशे में चूर विकास के आसमान को चूमने को आतुर, विनाश के धरातल पर खड़ा मनुष्य कब समझता है कि हम प्रकृति के साथ कितना खिलवाड़ करते हैं। कुछ साल पहले ही हम कोरोना काल का दंश झेल चुके हैं। मनुष्य द्वारा प्रकृति पर बार-बार उत्पात करने तथा सजा भुगतने का यह क्रम अनवरत रूप से चल रहा है। सड़क दुर्घटनाएं, रेल हादसे, आगजनी, पुल टूटना, गैस रिसाव, इमारतों का ढहना तथा महामारी आदि आपदाएं होना आम बात है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सर्वविदित है कि जहां मानवीय जीवन होगा, वहां पर आग, बाढ़, तूफान, सूखा, हिमस्खलन, भूकंप, सुनामी, बिजली गिरने, बादल फटने तथा महामारी की संभावना भी होगी। मौसम विभाग के रेड अलर्ट, आॅरेंज अलर्ट तथा चेतावनियां भी अब आम बात हो गई है। यह भी सत्य है कि हम आपदाओं को समाप्त तो नहीं कर सकते, बल्कि उनको कम करने के लिए प्रयत्न तो कर ही सकते हैं। हम आपदा और समस्याओं की संवेदनशीलता को नकार नहीं रहे हैं, लेकिन मानसून के मौसम में ये दृश्य हर साल दिखाई देते हैं, इन पर गौर नहीं किया जाता।</p>
<p style="text-align:justify;">नदियां जिस तरह से उफान पर हैं, उसे देखते हुए सिर्फ आपदा प्रबंधन की घंटियां ही बजाई जा सकती हैं या अब बाढ़ जैसी स्थिति के इतिहास से बहुत कुछ सीखना होगा। दरअसल जल निकासी की प्राकृतिक भूमिका से जहां-जहां छेड़छाड़ हुई या विकास की हिदायतों को नजरअंदाज किया गया, वहां-वहां मौसम ने कहर बरपाया है। Editorial Hindi</p>
<p style="text-align:justify;">यह ठीक है कि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन, सड़कों, पुलों, विद्युत परियोजनाओं का निर्माण, बड़ी-बड़ी इमारतों तथा कारखानों का निर्माण भी लोगों की जीवन शैली को सुखद बनाने तथा, प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए किया जाता है, परन्तु यह मानवीय जीवन की कीमत पर हरगिज नहीं होना चाहिए। हिमाचल प्रदेश में आवश्यक है कि आपदाओं की तीव्रता तथा इनकी आवृत्ति में कमी हो। लोगों की जान-माल तथा सम्पत्ति की सुरक्षा होना अति आवश्यक है। संदेश स्पष्ट है कि जल-प्रबंधन पर हमें ईमानदारी व गंभीरता से काम करना होगा। Disaster</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–  </strong><a title="मुफ्त योजनाओं के नाम पर जनता गुमराह ना हो, ये सभी योजनाएं जनता पर बोझ बनने वाली हैंः- प्रहलाद जोशी" href="http://10.0.0.122:1245/bjp-newly-appointed-state-election-in-charge-and-union-minister-pralhad-joshi-came-to-jaipur-on-a-tour/">मुफ्त योजनाओं के नाम पर जनता गुमराह ना हो, ये सभी योजनाएं जनता पर बोझ बनने वाली हैंः- प्रहलाद जोशी</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2023 16:46:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>WHO ने पाकिस्तान में दूसरी आपदा की संभावना पर जताई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद (एजेंसी)। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पाकिस्तान में ‘दूसरी आपदा : बीमारियों और मौतों की लहर की संभावना के मद्देनजर गहरी चिंता व्यक्त की है। जलवायु परिवर्तन के कारण पाकिस्तान में आयी अभूतपूर्व बाढ़ से देश का एक तिहाई हिस्सा जलमग्न हो गया है वहीं इसकी चपेट में आकर 1,500 से अधिक लोगों की जानें […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/who-expressed-concern-over-the-possibility-of-second-disaster-in-pakistan/article-37950"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/who1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद (एजेंसी)।</strong> विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पाकिस्तान में ‘दूसरी आपदा : बीमारियों और मौतों की लहर की संभावना के मद्देनजर गहरी चिंता व्यक्त की है। जलवायु परिवर्तन के कारण पाकिस्तान में आयी अभूतपूर्व बाढ़ से देश का एक तिहाई हिस्सा जलमग्न हो गया है वहीं इसकी चपेट में आकर 1,500 से अधिक लोगों की जानें जा चुकी है। WHO के महानिदेशक डॉ टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने एक बयान में कहा, ‘मैं पाकिस्तान में दूसरी आपदा (Disaster in Pakistan) की संभावना को लेकर चिंतित हूं। जलवायु परिवर्तन से जुड़ी इस तबाही से देश के लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में पानी की आपूर्ति बाधित होने के कारण लोग असुरक्षित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे हैजा और अन्य डायरिया संबंधी बीमारियां फैलने की आशंका है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">घेब्रेयसस ने कहा कि रुके हुए पानी से मच्छरों के पनपने तथा मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों को फैल रही है। करीब 20 हजार स्वास्थ्य केंद्रों के बाढ़ से घिर जाने के कारण लोगों को सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं सुलभ होना मुश्किल हो गया है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि अगर हम स्वास्थ्य की रक्षा करने और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए जल्दी से कार्य करते हैं, तो हम इस आसन्न संकट के प्रभाव को काफी कम कर सकते हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/s-jaishankar-to-lead-the-indian-delegation-to-the-77th-session-of-the-un-general-assembly/"><strong>यह भी पढ़ें – संरा महासभा के 77वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे जयशंकर</strong></a></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पाकिस्तान में बाढ़ से मरेन वालों की संख्या 1,500 हुई</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान में इस मौसम की मानसूनी बारिश और बाढ़ के कारण जून के मध्य से अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,545 हो गई है जबकि 12,860 घायल हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने यह जानकारी दी। एनडीएमए की ओर से शनिवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में अलग-अलग बारिश या बाढ़ जनित हादसों में जान गंवाने वालों में 552 बच्चे और 315 महिलाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार इसके अलावा, पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में 1,943,978 घर क्षतिग्रस्त हो गए और 943,909 पशुधन मारे गए। एनडीएमए द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, इसके अतिरिक्त 81 जिले और अनुमानित 3,30,46,329 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Sep 2022 09:08:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आपदा प्रशिक्षण से रोकी जा सकेगी मानव क्षति</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में बीते कुछ वर्षो से प्राकृतिक और मानवजनित आपदाएं-घटनाएं बढ़ी हैं। मानवीय हिमाकत ने पिछले दिनों दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में बड़ी घटना को जन्म दिया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Disaster training)ने आगजनी को मानवजनित आपदाओं में अव्वल स्थान दिया है। लेकिन आपदा विशेषज्ञों की मानें तो ऐसी घटनाओं को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/disaster-training-will-prevent-human-loss/article-12089"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/disaster-training.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:center;"><strong><em><span style="text-decoration:underline;">भारत में बीते कुछ वर्षो से प्राकृतिक और मानवजनित आपदाएं-घटनाएं बढ़ी हैं। मानवीय हिमाकत ने पिछले दिनों दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में बड़ी घटना को जन्म दिया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Disaster training)ने आगजनी को मानवजनित आपदाओं में अव्वल स्थान दिया है। लेकिन आपदा विशेषज्ञों की मानें तो ऐसी घटनाओं को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण से रोका जा सकता है। इस क्षेत्र में एक नाम ऐसा है जो वर्षों से न सिर्फ सरकारी अधिकारियों, बल्कि आमजनों को भी आपदाओं से निपटने का गुर सिखा रही है। डॉ. अंजलि क्वात्रा अंतराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ जो स्वयंसेवी संगठन फिलांथ्रोफे की प्रमुख भी हैं। वह कहती हैं कि देश में बाढ़, भूकंप, चक्रवात व भूस्लखन कभी भी दस्तक दे देते हैं। इसलिए स्वंय के जानमाल के बचाव को प्रत्येक इंसान को आपदा प्रबंधन के हुनर सीखने चाहिए। दिल्ली की घटना को ध्यान में रखकर डॉ. अंजलि क्वात्रा से आपदा प्रबंधन मुद्दे पर रमेश ठाकुर की विस्तृत बात हुई। पेश हैं बातचीत के प्रमुख हिस्से।</span></em></strong></p>
<h3></h3>
<h3 style="text-align:justify;">दिल्ली जैसी अचानक घटने वाली घटनाओं को आपदा प्रबंधन के जरिए कैसे बचाया जा सकता है?</h3>
<p style="text-align:justify;">घटना नि:संदेह दर्दनाक थी। लेकिन आगे ऐसी घटनाएं न घटें इसके लिए सबक लेना चाहिए। हमारी टीम पिछले 12 सालों से राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन (Disaster training) का प्रशिक्षण दे रही है। आपने पूछा दिल्ली घटना को कैसे टाला जा सकता था। दिल्ली की घटना में फायर ब्रिगेड के एक कर्मी ने अपनी जान जोखिम में डाल कर कईंयों को बचाया। हमें ऐसे ही कर्मियों की संख्या बढ़ानी है। पुलिसकर्मियों के लिए आपदा प्रशिक्षण का ज्ञान अनिवार्य कर देना चाहिए। हमारी संस्था ने कॉमनवेल्थ गेम के समय ऐसे कई वॉलेंटियर तैयार किए थे, दिल्ली, मुंबई और औरंगाबाद के पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने के साथ ही हमने पांच सितारा होटल के कर्मचारियों को भी हादसों में क्षति को रोकने का प्रशिक्षण दिया है जिसका रिजल्ट बहुत अच्छा है। घटना के वक्त दोषारोपण के बजाय बचाव के विकल्प खोजने चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्राकृतिक आपदाओं के अलावा मानवजनित घटनाओं में ज्यादा इजाफा हो रहा है। कोलकाता के कोचिंग सेंटर में लगी आग और दिल्ली में शॉर्ट सर्किट होना ताजा उदाहरण है?</h3>
<p style="text-align:justify;">देखिए, प्राकृतिक आपदाएं कुदरती होती हैं। पर, मानवजनित आपदाएं रोकी जा सकती हैं। हम छोटी लेकिन बेहद जरूरी बातों को नजरअंदाज करते हैं, जिसका परिणाम बड़े हादसे से चुकाना पड़ता है। घर में यदि बिजली के उपकरण पुराने हो गए हैं, किसी तार से चिंगारी निकल रही है या फिर करंट आ रहा है तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। आग अधिकतर शार्ट सर्किट से लगती है जिसपर आसानी से काबू किया जा सकता है। एक अहम बात और भी है लोगों को बचाव करने की जानकारी अधूरी होती है। यूं कहें कि आपदा प्रबंधन का ज्ञान न के बराबर होता है। घटनाओं के वक्त लोग मूकबधिर बनकर तमाशा देखते हैं। हालांकि उस वक्त वह कर भी क्या सकते हैं। कई लोग बिजली से लगी आग में पानी के इस्तेमाल को गलत मानते हैं हम लगभग सभी वर्ग के लोगों में आपदा प्रबंधन की क्लास के समय यही बताते हैं कि शॉट सर्किट के वक्त पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। दिल्ली के कारखाने में जब आग लगी थी तो समय रहते अगर पानी डाला जाता तो धुंआ नहीं निकलता।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कुछ घटनाएं ऐसी जगहों पर घट जाती हैं जहां आपदा के वक्त बचाव कार्य संभंव नहीं हो पाता ?</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर आप किसी और की जान नहीं भी बचा पा रहे तो ऐसे हादसे में सबसे जरूरी है खुद को सुरक्षित रखें। हमने बीते कुछ सालों से ऐसी संकरी बस्तियों में भी शिविर लगाए हंै। अभी दक्षिण दिल्ली के कुछ इलाकों में रोजाना आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कैंप का आयोजन किया जा रहा है, जिससे यदि संबंधित अधिकारी या अग्निशमन दल को पहुंचने में देर हो तो पहला प्रयास खुद किया जा सके। आग लगने में सबसे अधिक मौत दम घुटने की वजह से होती हैं, ऐसे में लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल न करें, आग की लपटे क्योंकि नीचे से ऊपर की ओर उठती हैं, इसलिए सीढ़ियों से नीचे उतरने का प्रयास करें, यदि किसी को एफेक्सियां या सांस लेने में तकलीफ तो बाहर निकलने के बाद तुरंत उसे सीपीआर दें, जिससे सांस को तुरंत वापस लाया जा सकता है। इसमें हथेली के बल से मरीज की पसली पर पांच से दस मिनट तक दबाना होता है यह बहुत आसान प्रक्रिया है, जिसे हर कोई कर सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">घरेलू स्तर पर छोटी आपदाओं से लोग कैसे अपना बचाव कर सकते हैं?</h3>
<p style="text-align:justify;">देखिए, हम किसी बड़ी घटना की बात न भी करें, तो हमारी जानकारी घरों में रोज होने वाली ऐसी घटनाओं के बारे में बहुत कम होती है, उदाहरण के लिए किसी की सांस नली में खाना अटक गया या फिर गाड़ी पानी में फंस गई, घरों में बच्चे अकसर बर्तन सिर में फंसा लेते हैं। ऐसे में सही जानकारी नहीं होने पर जान तक जा सकती है। सांस नली में खाना फंसने पर व्यक्ति के पीछे से कमर के हिस्से से नाभि पर मुठ्ठी रखकर उसे दो से दिन बार झटके के साथ दबाना है, जिससे तुरंत सांस नली में फंसा हुआ खाना बाहर आ जाएगा। इसी तरह चाकू से यदि हाथ कट गया है तो जिस तरफ खून का बहाव होता है उस तरफ हाथ सीधा न करके विपरित दिशा में किया जा जाए तो खून की क्षति को रोका जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सरकारी स्तर पर आपदा प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों से आप कितना संतुष्ट हैं ?</h3>
<p style="text-align:justify;">आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए अभी देश में बहुत कुछ किया जाना बाकी है, दिल्ली या सूरत या कहीं भी ऐसे हादसे न हों इसके लिए आपदा प्रबंधन के साथ ही बेसिक लाइफ सपोर्ट कोर्स भी कराया जाना चाहिए। ऐसे किसी भी हादसे में क्षति को कम करना और अपनी जान बचाना यह दो काम प्रमुख होते हैं, हालांकि विदेशी में इमारतों का निर्माण इस तरह किया जाता है कि आपात स्थिति में अधिक से अधिक लोगों को आपातकालीन मार्ग से निकाला जा सकता है, इसके लिए कई आधुनिक उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है, जहां वॉटर केनिन नहीं पहुंच सकते वहां वॉटर बॉल या पानी के बड़े गोलों का इस्तेमाल किया जाता है, इसके साथ ही कई ऐसी अग्निरोधक चीजों का प्रयोग आपदा प्रबंधन के लिए किया जा रहा है। इमारतों का नक्शा पास करते हुए इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए कि इमारत में आपदा से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हों, इसके साथ ही सुरक्षा संयंत्र भी मानकों के अनुसार लगाए जाने चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आप इस बात को मानती हो, इस क्षेत्र में हमारी तैयारियां अभी भी काफी कमजोर हैं?</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक मुहिम चलानी चाहिए, जिससे प्रत्येक व्यक्ति आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण प्राप्त करें, ताकी समय पड़ने पर किसी की जान बचा सकें, हम अपने प्रशिक्षण शिविर में बेहद सामान्य तरीकों को समझाते हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर कोई भी किसी और को भी यह सिखा सकता है। पिछले कई सालों में हमने मेडिकल इमरजेंसी जैसे हृदयघात या सड़क दुर्घटना आदि में इसका प्रयोग अधिक देखा है अब लोग जागरुक हो रहे हैं उन्हें अपने साथ ही दूसरों की जान की परवाह होती है। लेकिन सरकारी एजेंसियों को भी अपना काम जिम्मेदारी से करना होगा, जिससे हादसे ही न हों।</p>
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<p> </p>
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<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 29 Dec 2019 20:53:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>राजस्थान: दक्षिण पूर्वी जिलों में आफत बनी बरसात</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर (एजेंसी)। राजस्थान में फिर से सक्रिय हुए मानसून तंत्र ने दक्षिण पूर्वी राजस्थान South Eastern Rajasthan में जन जीवन अस्त व्यस्त कर दिया। बारां में वर्षाजनित हादसों में दो की मौत होने के साथ कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है। आसपास के क्षेत्रों में कल से हो रही तेज बरसात से बारां […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/disaster-in-south-eastern-rajasthan/article-5819"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/rajasthan.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर (एजेंसी)।</strong> राजस्थान में फिर से सक्रिय हुए मानसून तंत्र ने दक्षिण पूर्वी राजस्थान <strong>South Eastern Rajasthan</strong> में जन जीवन अस्त व्यस्त कर दिया। बारां में वर्षाजनित हादसों में दो की मौत होने के साथ कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है।</p>
<p>आसपास के क्षेत्रों में कल से हो रही तेज बरसात से बारां जिले में बहने वाली सभी नदियां उफान पर हैं जिसके कारण यहां बाढ़ के हालात बन गये हैं। बारां से सवाई माधोपुर तथा कोटा श्योपुर सड़क मार्ग बंद हो गए। इसके अलावा कुछ कच्चे मकानों के ढहने की भी सूचना है।</p>
<p>शहरी क्षेत्रों में भी जलभराव के चलते मकानों, दुकानों के साथ सड़कों ने भी दरिया का रूप ले लिया साथ ही कयी गांव टापू बन गए। इन प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिये है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में रास्ते अवरुद्ध हो जाने से राहत पहुंचाने के काम में दिक्कतें आ रही है।</p>
<p>मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में राज्य के पूर्वी सीमावर्ती धौलपुर, सवाईमाधोपुर, कोटा, बारां तथा झालावाड़ में भारी वर्षा की चेतावनी दी है। इधर प्रदेश के पश्चिमी भाग में अभी भी अच्छी बारिश के एक दौर का इंतजार है।</p>
<p>हालांकि राज्य के कृषि विभाग ने इन दिनों में हो रही बरसात को खेती के लिए लाभदायक बताते हुए इसे अगली फसल के लिए फायदमंद बताया।</p>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Sep 2018 18:21:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आपदा से निपटने की तैयारी आवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[केरल में आई विनाशकारी बाढ़ पिछले कुछ दशकों में देश में आई सबसे भीषणतम प्राकतिक आपदा है। देश में बाढ़Þ के कारण प्रति वर्ष हजारों लोग प्रभावित होते हैं फिर भी देश में आपदा प्रबंधन रणनीति नहीं है जोकि अतयावश्यक है और यह इसलिए भी आवश्यक है कि ऐसी आपदाओं में गरीब और आर्थिक रूप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/prepare-to-deal-with-disaster/article-5602"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/flood-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केरल में आई विनाशकारी बाढ़ पिछले कुछ दशकों में देश में आई सबसे भीषणतम प्राकतिक आपदा है। देश में बाढ़Þ के कारण प्रति वर्ष हजारों लोग प्रभावित होते हैं फिर भी देश में आपदा प्रबंधन रणनीति नहीं है जोकि अतयावश्यक है और यह इसलिए भी आवश्यक है कि ऐसी आपदाओं में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सर्वाधिक प्रभावित होता है। हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2017 की सरकार की लेखा परीक्षा रिपोर्ट के अनुसार केरल में कोई आकस्मिक कार्य योजना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">वस्तुत: नियंत्रक व महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में पाया गया कि मार्च 2016 तक केवल 349 बडेÞ बांधों के संबंध में आपात कार्य योजना बनाई गई है। ऐसे मानचित्रों व कार्य योजनाओं के अभाव में हालांकि जिला प्राधिकारी स्थानीय लोगों को बांधों में बढ़ते जल स्तर के बारे में चेतावनी दे सकते हैं किंतु उन्हें यह आभास नहीं होता है कि कितना क्षेत्र बाढ़Þ की चपेट में आएगा। इसलिए बाढ़Þ से प्रभावित डूब क्षेत्र के मानचित्र बनाए जाने चाहिए जो राहत कार्यों में उपयोगी हो सकते हैं। जब दर्जनों बांधों के द्वार खोले गए और पानी छोड़ा गया इससे बाढ़ की स्थिति भयावह बनी और इसके कारण केरल में लगभग 7 लाख लोग विस्थापित हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रश्न उठता है कि क्या सरकार के पास ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए वित्तीय संसाधन हैं? अधिकतर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार के पास इतने आर्थिक संसाधन नहीं हैं। बीमा दावे 4-5000 करोड़ रूपए तक पहुंचने की संभावना है। इससे अंदाजा लगाया हा सकता है कि लोगों को कितनी हानि हुई है। इसके अलावा कोच्चि हवाई अड्डे के बाढ़Þ में डूब जाने से पहली बार पता चला है कि नदियों के प्रवाह क्षेत्र में हवाई अड्डे भी बाढ़Þ की चपेट में आ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2005 में मुंबई में और 2015 में चेन्नई में अभूतपूर्व बारिश के कारण भीषण बाढ़Þ आई थी और इन दोनों शहरों में हवाई अड्डों को बंद करना पड़ा था। ये हवाई अड्डे न केवल नदियों के निकट बनाए गए हैं अपितु इनका रनवे भी नदियों के पास है। किंतु इसका तात्पर्य यह नहीं है कि नदियों के पास बना हर हवाई अड्डा बाढ़Þ की चपेट में आ सकता है और इसका उदाहरण गोवा व मैसूर है।</p>
<p style="text-align:justify;">शहरों के विस्तार व सरकार द्वारा दो नए हवाई अड्डों के निर्माण की योजना पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। शहरी वनीकरण के बजाय शहरों में पेड़ों की कटाई व जल स्रोतों के भराव के कारण महानगर और शहरों में बाढ़Þ की स्थिति बढ़ी है। भूस्खलन, भूकंप और बाढ़Þ आम बातें हो गई हैं। जलवायु परिवर्तन के बाद ये आपदाएं कुछ ज्यादा ही दिखने को मिल रही हैं</p>
<p style="text-align:justify;">और इसमें गरीब और कमजोर वर्गों को सर्वाधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बाढ़Þ के अनेक कारण हैं और हर क्षेत्र में तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इसके विभिन्न कारण हैं। अति वृष्टि एक प्रुमख कारण है। उदहारण के लिए जुलाई 2017 में माउंट आबू में 300 सालों में सबसे भारी वर्षा हुई यहां 24 घंटे में 700 मिमी वर्षा हुई जिसके कारण वहां भारी बाढ़Þ आई।</p>
<p style="text-align:justify;">नदियों में गाद भरने और नालों की सफाई न होना भी बाढ़ का प्रमुख कारण है। पहाड़ी क्षेत्रों में बाढ़ का मुख्य कारण भूस्खलन है। जून 2013 में उत्तराखंड में भूस्खलन के कारण नदियों का प्रवाह रूक गया जिसके चलते भारी बाढ़ आयी और जिसमें 5748 मौतें हुई। तूफान, भूकंप, नदी के तटों पर अतिक्रमण आदि भी बाढ़ के प्रमुख कारण हैं। केरल को राहत राशि के नाम पर सरकार ने बहुत कम राशि दी है। सुनामी और 2013 में उत्तरखंड की बाढ़ के दौरान सरकार ने बहुत कम राहत राशि दी थी। राज्यों की खराब अर्थव्यवस्था के चलते ये ऐसी आपदाओं से निपटने में अक्षम रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी भी खबरें हैं कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पास आपदा निवारण उपायों विशेषकर बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में निवारण उपायों के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है। इसलिए आपदाओं से निपटने के लिए निरंतर तैयारी की जानी चाहिए तथा केन्द्र और राज्य सरकारों को विशेषकर बाढ़ से निपटने के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए। इसके लिए उन्हें बाढ़ प्रवण क्षेत्रों का मानचित्रण करना चाहिए। बाढ़ के दौरान जन धन की हानि को कम करने के लिए भू उपयोग नियंत्रण करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">संभावित खतरे वाले क्षेत्रों से लोगों का पुनर्वास किया जाना चाहिए। एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत का 12 प्रतिशत क्षेत्र बाढ़ प्रवण क्षेत्र है। केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार 1970 से 2000 तक बाढ़ के कारण सकल घरेलू उत्पाद में कुल .90 का नुकसान हुआ है। उसके बाद यह नुकसान कम होकर .20 रह गया है। फिर भी यह राशि काफी बड़ी है। जनसंख्या वृद्धि और नदी तथा समुद्र तटों पर जन घनत्व के बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों के बाढ़ के समय डूबने की संभावनाएं अधिक रहती हैं। इसलिए इन गरीब लोगों को बचाने के लिए उपमंडल स्तर पर तैयारी की जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">धुर्जति मुखर्जी</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 30 Aug 2018 14:02:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आफत बनी बरसात, गई 17 जानें</title>
                                    <description><![CDATA[प्रभावित लोगों को सेना कर रही एयरलिफ्ट जालोर, पाली, सिरोही और उदयपुर से पांच सौ लोगों को बचाया जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। प्रदेश के कई जिलों में इस बार सावन अपने साथ आफत की बारिश लेकर आया है। सावन के दौरान प्रदेश भर में कई जिलों में हुई बारिश ने अब तक 17 लोगों की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/disaster-from-heavy-rain-17-died/article-2602"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/flood-2.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">प्रभावित लोगों को सेना कर रही एयरलिफ्ट</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>जालोर, पाली, सिरोही और उदयपुर से पांच सौ लोगों को बचाया</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रदेश के कई जिलों में इस बार सावन अपने साथ आफत की बारिश लेकर आया है। सावन के दौरान प्रदेश भर में कई जिलों में हुई बारिश ने अब तक 17 लोगों की जान ले ली है। कई जिलों में रेस्क्यू का काम अभी भी जारी है। आपदा प्रबंधन और स्थानीय पुलिस की टीमों के साथ ही सेना ने भी रेस्क्यू कार्य शुरू कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश के कुछ जिलों में तो लोग घर से बेघर हो गए हैं। दो दिन की बारिश के दौरान सेना, आपदा प्रबंधन और स्थानीय पुलिस ने जालोर, पाली, सिरोही और उदयपुर से करीब पांच सौ लोगों को तो बचा लिया है। अन्य फंसे लोगों को लेकर राहत और बचाव कार्य जारी है। सेना ने भी आज सवेरे पांच हैलीकॉप्टर भेजे हैं। इनमें से दो गुजरात और तीन राजस्थान में बचाव कार्य कर रहे हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">आकाशीय बिजली से सात की मौत</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश भर में बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने के मामले इस बार ज्यादा देखने को मिले हैं। प्रदेश भर में बिजली गिरने के कारण होने वाले हादसों में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है और आठ अन्य गंभीर रूप से झुलस चुके हैं। मिली जानकारी के अनुसार पाली के मारवाड़ में खेत में बिजली गिरने से लक्ष्मण सिंह की मौत हो गई। वहीं उदयपुर के मोरवाल गांव पंचायत में बिजली गिरने से गणेश, बसंती और सुशीला झुलस गए। वहीं डग झालावाड़ में बिजली गिरने से खेत में काम कर रहे कालूराम और दशरथ सिंह की मौत हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह से भीलवाड़ा के बिगोद में किसान गोपाल की भी खेत में काम करने के दौरान बिजली गिरने से मौत हो गई। गोपाल के साथ काम कर रहे पांच लोग भी झुलस गए। अलवर में बिजली गिरने से गिर्राज की मौत हो गई। जयपुर जिले में शाहपुरा में बारिश के दौरान बचने के लिए बिजली बॉक्स के पीछे छुपे धमेन्द्र कलवानिया की मौत हो गई उसे बचाने आया भाई रोहिताश भी झुलस गया। वहीं बाड़मेर के निकटवर्ती बोला गांव स्थित एक ढाणी में सोमवार रात भारी बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से महिला की मौत हो गई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">डूबने से अब तक 10 मरे</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश भर में अब तक बारिश के पानी मे बहने और डूबने दस लोगों की मौत हो चुकी है। जोधपुर के गंगाणा गांव में बरसाती नाले में नहाने के दौरान सेठू खां और सोलम खां की मौत हो गई। वहीं उदयपुर में कार बहने से प्यारेलाल मीणा की मौत हो गई। सिरोही के स्वरूपगंज में पानी में छह स्कूली बच्चे बहे, चार को बचाया दो बहनें इराना और सपना की मौत हो गई। बांसवाड़ा में कुशलगढ़ एसडीएम रामेश्वर लाल मीणा की पानी में बहने से मौत हुई। चार दिन बाद शव मिला।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नहाने गए दो बच्चों की मौत</h3>
<p style="text-align:justify;">नागौर के कुचामन सिटी में मेगा हाईवे पर बरसाती नाले में नहाने के दौरान दो बच्चों की मौत हो गई। भीलवाड़ा के गंगापुर के तिलोनी गांव में बारिश के चलते दीवार ढहने से उसके नीचे दबे एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं जयपुर के बस्सी में भी बारिश के चलते दीवार ढहने से एक युवक की मौत हो गई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सेना ने भेजे पांच हैलीकॉप्टर</h2>
<p style="text-align:justify;">भारी बारिश के दौरान बाढ़ और अन्य जगहों पर फसे लोगों को एयर लिफ्ट करने के लिए सेना ने पांच हैलीकॉप्टर को रवाना किया है। इनमें से दो को गुजरात भेजा गया है। तीन को पाली, जालोर और जोधपुर में लगाया गया है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि बारिश कुछ धीमी होने के कारण राहत और बचाव कार्य आसान हो सकता है। आर्मी के पांच हैलीकॉप्टर उतारे हैं राहत और बचाव कार्य में, तीन पाली और जालोर और जोधपुर में जोधपुर से इनने उड़ान भरी है और बाकि दो बनास कांठा और पाटन गुजरात गए हैं। इन हैलीकॉप्टर ने डीसा एयरपोर्ट से उड़ान भरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/disaster-from-heavy-rain-17-died/article-2602</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Jul 2017 07:08:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आपदा जोखिम में कमी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सहयोग जरूरी:मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली:  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि तेजी से हो रहा शहरीकरण आपदाओं की आशंकाओं को जन्म दे रहा है लेकिन ठोस नीतियों , क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परस्पर सहयोग तथा लोगों को जागरूक बनाकर हम इस बड़ी चुनौती का मुकाबला कर सकते हैं और दुनिया को आपदाओं से सुरक्षित बनाने की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/pm-outlines-10-point-agenda-for-renewing-efforts-for-disaster-reduction/article-252"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/nmodi-speeching.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली:</strong>  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि तेजी से हो रहा शहरीकरण आपदाओं की आशंकाओं को जन्म दे रहा है लेकिन ठोस नीतियों , क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परस्पर सहयोग तथा लोगों को जागरूक बनाकर हम इस बड़ी चुनौती का मुकाबला कर सकते हैं और दुनिया को आपदाओं से सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम कर सकते हैं।<br />
श्री मोदी ने आपदा जोखिम में कमी लाने संबंधी एशियाई देशों के सातवें मंत्री स्तरीय सम्मेलन में यहां अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि भारत 2015 में जापान में इस बारे में अपनाये गये सेन्डई फ्रेमवर्क को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।<br />
भारत किसी भी आपदा की घड़ी में अपने पडोसियों और अन्य देशों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। (वार्ता)</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/pm-outlines-10-point-agenda-for-renewing-efforts-for-disaster-reduction/article-252</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Nov 2016 04:17:50 +0530</pubDate>
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