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                <title>energy - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>14 दिसंबर को मिलेगा राजस्थान को नेशनल एनर्जी कंजर्वेशन अवार्ड</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान को चौदह दिसंबर को नेशनल एनर्जी कंजरवेशन अवार्ड से सम्मानित किया जायेगा। खान, पेट्रोलियम एवं ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं अक्षय ऊर्जा निगम के अध्यक्ष डॉ. सुबोध अग्रवाल ने आज यह जानकारी देते हुए बताया कि केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह नेशनल एनर्जी कंजरवेशन दिवस पर 14 दिसंबर को नई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajasthan-will-get-national-energy-conservation-award-on-december-14/article-28992"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/energy-conservation-award.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान को चौदह दिसंबर को नेशनल एनर्जी कंजरवेशन अवार्ड से सम्मानित किया जायेगा। खान, पेट्रोलियम एवं ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं अक्षय ऊर्जा निगम के अध्यक्ष डॉ. सुबोध अग्रवाल ने आज यह जानकारी देते हुए बताया कि केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह नेशनल एनर्जी कंजरवेशन दिवस पर 14 दिसंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित समारोह में राजस्थान को इस अवार्ड से सम्मानित करेंगे। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि अन्य प्रदेशों के लिए राजस्थान की अनुकरणीय उपलब्धियों के मद्देनजर स्टेट परफोरमेंस श्रेणी में राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम को यह पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दिशानिर्देश, मार्गदर्शन एवं राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2019, राजस्थान पवन व हाईब्रिड नीति, 2019 एवं राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना, 2019 के क्रियान्वयन से राजस्थान नवीकरणीय उर्जा क्षेत्र में निवेशकों का प्रमुख आकर्षण केन्द्र बन गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से ऊर्जा क्षेत्र में नवाचारों के साथ ही ऊर्जा संरक्षण क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां अर्जित की गई है। राज्य के ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस क्षेत्र से जुड़े सभी अधिकारियों, कार्मिकों और प्रदेशवासियों को बधाई दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार के लिए चयन होना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र में प्रबंधकीय दक्षता से कार्य किया जा रहा है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि राज्य के लिए यह गौरव की बात है कि देश के ऊर्जा क्षेत्र के गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडू, मध्यप्रदेश, हरियाणा जैसे अधिक ऊर्जा उपभोग वाले़े राज्यों की श्रेणी में एनर्जी एफिशिएंसी के क्षेत्र में राजस्थान के कुशल प्रबंधन को देखते हुए चयन किया गया है।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Dec 2021 11:05:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Rajasthan: सौर उर्जा से रोशन होगी बीएसएफ की चौकियां</title>
                                    <description><![CDATA[सीमावर्ती क्षेत्रों में सोलर प्लांट विकसित किए जाएंगे | solar energy जयपुर (एजेंसी)। पाकिस्तान से सटे राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में हल्की सर्दी का अहसास होने लगा है। जैसलमेर, बाड़मेर और श्रीगांगनगर जिलों में हल्की सर्दी का अहसास होते ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने सुरक्षा बढ़ा दी है। वहीं पाकिस्तान से सटी राजस्थान की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/bsf-posts-will-illuminate-with-solar-energy/article-10820"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/bsf.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:left;">सीमावर्ती क्षेत्रों में सोलर प्लांट विकसित किए जाएंगे | <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">solar energy</span></span></h2>
<p style="text-align:left;"><strong>जयपुर (एजेंसी)।</strong> पाकिस्तान से सटे राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में हल्की सर्दी का अहसास होने लगा है। जैसलमेर, बाड़मेर और श्रीगांगनगर जिलों में हल्की सर्दी का अहसास होते ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने सुरक्षा बढ़ा दी है। वहीं पाकिस्तान से सटी राजस्थान की 1070 किलोमीटर की सीमा पर अब सौर उर्जा से रोशनी <strong>(<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">solar energy</span></span>)</strong> फैलाने की कवायद चल रही है। सीमा के निकट खाली पड़ी जमीन पर सौर उर्जा पार्क विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।</p>
<h2 style="text-align:left;">अगले कुछ दिनों बढ़ाई जाएगी कैमल और व्हीकल पेट्रोलिंग</h2>
<p style="text-align:left;">सीमावर्ती क्षेत्रों में सोलर प्लांट विकसित किए जाएंगे, जहां से बिजली पैदा करके सीधे डेडिकेटेड फीडर्स के माध्यम से फ्लड लाइटों तक पहुंचाई जाएगी। इन इलाकों में फिलहाल जोधपुर विधुत वितरण के माध्यम से बिजली पहुंचाई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हर माह करीब 40 लाख यूनिट बिजली खर्च होती है। इसका मासिक बिल 3 करोड़ तक आता है। राज्य के उर्जा मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने बताया कि पिछले दिनों केंद्रीय उर्जा राज्यमंत्री आर. के. सिंह ने सीमावर्ती इलाकों में सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने को लेकर बात की थी।</p>
<ul style="text-align:left;">
<li><strong>बीएसफ की प्रत्येक सीमा चौकी पर 1.5 किलोवाट का ब्रेनी इको सौर इंवर्टर लगाया जाएगा</strong></li>
<li><strong>जिसमें 500 मेगावाट सोलर पैनल और बैटरी होती है। </strong></li>
<li><strong>इसके माध्यम से रोशनी के साथ ही दो से तीन पंखे भी चलाए जा सकेंगे। </strong></li>
<li><strong>कल्ला ने बताया कि केंद्रीय नवीन एवं नवीनीकरण उर्जा मंत्रालय राज्य सरकार के सहयोग से सीमा के निकट खाली पड़ी जमीन पर सौर उर्जा पार्क भी विकसित करना चाहता है। </strong></li>
<li><strong>इसके लिए राज्य सरकार जमीन उपलब्ध कराने को तैयार है।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2019 15:15:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गैर परंपरागत ऊर्जा पर बढ़ता जोर</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष लगभग तीन गुण वृद्धि के कारण ऊर्जा संकट आज के युग की वास्तविकता बन चुका है। विश्व में चार करोड़ 36 लाख 65 हजार टन कोयला भंडार है। गैस भंडार तो केवल 41 हजार मेगा टन है। वहीं पेट्रोल उत्पादों के बढ़ते दामों से सरकार ने गैर-परंपरागत ऊर्जा स्त्रोतों पर जोर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/increasing-emphasis-on-non-conventional-energy/article-3458"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/pargrti.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष लगभग तीन गुण वृद्धि के कारण ऊर्जा संकट आज के युग की वास्तविकता बन चुका है। विश्व में चार करोड़ 36 लाख 65 हजार टन कोयला भंडार है। गैस भंडार तो केवल 41 हजार मेगा टन है। वहीं पेट्रोल उत्पादों के बढ़ते दामों से सरकार ने गैर-परंपरागत ऊर्जा स्त्रोतों पर जोर देना शुरू कर दिया है। यही कारण हैं कि सरकार ने सौर और पवन ऊर्जा पर 30 हजार करोड़ रुपए खर्च करने की मंजूरी दी है। दरअसल सरकार गैर परंपरागत ऊर्जा स्त्रोतों को बढ़ावा दे रही है। आने वाले 10-12 वर्षों में इस क्षेत्र में अच्छी सफलता मिलने की उम्मीद है। अगले तीन वर्ष में ही सौर ऊर्जा उत्पादन जोकि इस समय नाममात्र का ही है, बढ़कर 1300 मेगावाट तक पहुंच जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार सौर ऊर्जा मिशन को 2020 तक भारत में 20,000 मेगावाट उत्पादन की क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसको लेकर पिछले वर्ष 90,000 करोड़ रुपए की लागत वाले राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन के मसौदा दस्तावेज को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी भी दी है। सौर ऊर्जा के बेहतर भविष्य को देखते हुए हाल ही में बिजली उत्पादन करने वाली सरकारी कंपनी एटीपीसी ने भी गैर परंपरागत ऊर्जा के उत्पादन पर 81 अरब रुपए के निवेश की घोषणा की है। सरकार पवन ऊर्जा के विकास पर भी जोर दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, पवन ऊर्जा का उत्पादन 2022 तक तीन गुना बढ़कर 33 हजार मेगावाट तक पहुंच जाएगा। इसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में भागीदारी होगी। मंत्रालय के पास निजी क्षेत्र के अनेक प्रस्ताव आए हैं। दरअसल बिजली पैदा करने तथा पानी उठाने का सबसे सस्ता उपाय है हवा। जापान में भूंकप तथा सूनामी के बाद परमाणु बिजली घरों के सुरक्षित होने के बारे में उत्पन्न संदेह ने ऊर्जा संकट को और बढ़ा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गुजरात में लाम्बा नामक स्थान पर एशिया का सबसे बड़ा पॉवर प्रोजेक्ट चालू किया गया है, जिसमें हवा की 50 टरवाइनें 200 किलोवाट बिजली उत्पन्न करते हैं। इनमें से किसी भी काम से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। देश में इस समय 5 पवन फार्म हैं, जिनकी क्षमता 3.63 मेगावाट है और जो 45 लाख ऊर्जा इकाइयां तैयार करती है। नब्बे के दशक में तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्यप्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों को पवन ऊर्जा के संभावनाशील क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया। वहीं कई निजी क्षेत्र की कंपनियों ने पवन ऊर्जा पर निवेश किया है। भारत के भूमध्य रेखा पर स्थित होने के कारण सौर ऊर्जा का असीम भंडार हमारे ऊपर बरस रहा है। भारत ने सूर्य से 200 मेगावाट प्रति वर्ग किलोमीटर ऊर्जा प्राप्त होती है। इसकी भौगोलिक क्षेत्र 3.28 मिलियन वर्ग किलोमीटर है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अनुसार यहां 657.4 मिलियन मेगावाट ऊर्जा उपलब्ध है। पर इस क्षेत्र का सिर्फ 12.5 फीसदी अर्थात् 0.413 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र ही सौर ऊर्जा विकास के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए यदि 10 फीसदी भूमि भी उपलब्ध हो जाए, तो 8 मिलियन मेगावाट बिजली मिल सकती है। यह उपलब्ध ऊर्जा वर्तमान खपत की 26 गुना है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह से भारत नें पवन ऊर्जा से 45000 मेगावाट बिजली की क्षमता आंकी गई है। लेकिन अभी तक 5340 मेगावाट क्षमता का ही उपयोग हम कर सके हैं। देश में बायोमास के विद्युत उत्पादन की अनुमानित क्षमता लगभग 19,500 मेगावाट है, पर अभी तक 912 मेगावाट की बायोमास परियोजनाओं का ही पूरा किया जा सका है। इसके अलावा 1180 मेगावाट क्षमता की परियोजना पर काम हो रहा है। कुल मिलाकर ऊर्जा स्त्रोतों से अब तक कुल 8,095 मेगावाट बिजली ही ग्रिड को उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें छोटी पनबिजली परियोजनाओं का उत्पादन भी शामिल है। जबकि भारत में गर्मियों में प्रचंड सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा उपलब्ध है। इसका उपयोग करके हम अनेक जिलों के तमाम कस्बों और गांवों की बिजली की समस्या हल कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">–<strong>लेखक मानवेन्द्र कुमार</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Oct 2017 03:13:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अब तरल कचरे से ऊर्जा बनाएगा हरियाणा</title>
                                    <description><![CDATA[सुविधा। निकाय मंत्री कविता जैन ने कजाखिस्तान से सीखी नई तकनीक प्रदेश में लागू किए जाने की तैयारी चण्डीगढ़(सच कहूँ ब्यूरो)। हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में सीवरों के अंदर जमा गाद के कारण होने वाली परेशानी को दूर करते हुए हरियाणा में तरल कचरा से भी ऊर्जा बनाने के विकल्प पर काम किया जाएगा। कजाकिस्तान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-will-now-make-energy-from-liquid-waste/article-2195"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/kavita-jain.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">सुविधा। निकाय मंत्री कविता जैन ने कजाखिस्तान से सीखी नई तकनीक</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>प्रदेश में लागू किए जाने की तैयारी</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चण्डीगढ़(सच कहूँ ब्यूरो)।</strong> हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में सीवरों के अंदर जमा गाद के कारण होने वाली परेशानी को दूर करते हुए हरियाणा में तरल कचरा से भी ऊर्जा बनाने के विकल्प पर काम किया जाएगा। कजाकिस्तान दौरे के दौरान हरियाणा की शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन ने इसकी प्रक्रिया को जाना और इस तकनीक को प्रदेश में भी लागू किए जाने पर बल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">कजाकिस्तान के शहर अल्माटी के सिमकेंट में हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन ठोस कचरा की तरह तरल कचरा से भी ऊर्जा उत्पादन की तकनीक जानने के लिए संयंत्र पहुंची, जहां ईकालाग ब्ल्यू एन्ड ग्रीन टेक्नोलॉजी के शेयर होल्डर होरोडेकी व उनकी टीम ने सीवरेज में एकत्रित गाद और तरल से मीथेन गैस को उच्च स्तर एकत्रित करते हुए बिजली उत्पादन करने की प्रक्रिया दिखाई। उन्होंने बताया कि ठोस कचरे की भांति तरल कचरा विशेषकर सीवरेज गाद का निपटान वैश्विक स्तर पर बड़ी समस्या है, जिसके कारण भारत में भी इस तरल कचरे के निपटान के सीमित विकल्प हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ठोस कचरा निस्तारण को15 कलस्टर्स में काम जारी</h3>
<p style="text-align:justify;">मीथेन गैस प्लांट और तरल कचरे का प्रबंधन देखने के बाद शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन ने इसे बेहतर विकल्प बताते हुए कहा कि हरियाणा में इस विकल्प का प्रयोग करने के लिए सरकार विचार करेगी। उन्होंने कहा कि ठोस कचरे के निस्तारण के लिए हरियाणा को 15 क्लस्टर में विभाजित करके तेजी से काम किया जा रहा है। सरकार सभी क्लस्टरों में कचरा से ऊर्जा, खाद और बायोगैस तैयार करने के संयंत्र विभिन्न क्लस्टर की आवश्यकतानुसार स्थापित कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 08:39:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए साहस की आवश्यकता : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत उतनी प्रगति नहीं कर पाया जितनी उसे करनी चाहिए थी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए साहस की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने यहां 2015 बैच के आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिन देशों ने भारत के बाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/need-of-adventure-for-pursue-the-change-modi/article-1910"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/modi1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत उतनी प्रगति नहीं कर पाया जितनी उसे करनी चाहिए थी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए साहस की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने यहां 2015 बैच के आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिन देशों ने भारत के बाद आजादी प्राप्त की तथा जिनके सामने संसाधनों की कमी थी, उन्होंने विकास के मामले में नई उंचाइयों को छुआ है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">परिवर्तन के लिए गतिशील बदलाव की आवश्यकता</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने दावा किया कि बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए साहस की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने युवा प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि उन्हें उस सोच से बचना चाहिए जो बदलाव का विरोध करती है। उन्हें भारत की प्रशासनिक प्रणाली को नए भारत की उर्जा से भर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में परिवर्तन के लिए गतिशील बदलाव की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे सहायक सचिवों के रूप में अपने कार्यकाल की अगले तीन माह की अवधि के दौरान केन्द्र सरकार के वरिष्ठतम अधिकारियों के साथ निस्संकोच होकर बातचीत करें ताकि व्यवस्था को उनकी उर्जा एवं नए विचारों तथा सचिव स्तर के अधिकारियों के प्रशासनिक अनुभव के मेल का लाभ मिल सके। प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे यूपीएससी परिणामों के दिन तक अपने जीवन, उनके द्वारा झेली गई चुनौतियों और अब उनके समक्ष पेश अवसरों पर विचार करें ताकि वे व्यवस्था और आम आदमी के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jul 2017 07:21:06 +0530</pubDate>
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                <title>स्वच्छ ऊर्जा कोष में 100 करोड़ डॉलर निवेश करेंगे बिल गेट्स सहित कई हस्ती</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन: माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प के संस्थापक बिल गेट्स, फेसबुक इंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग और अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड के अध्यक्ष जैक मा सहित कई उच्च पदस्थ अधिकारी एक स्वच्छ ऊर्जा कोष में 100 करोड़ डॉलर से भी अधिक निवेश कर रहे हैं। इस कोष का इस्तेमाल ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को कम कर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/clean-energy-fund-will-invest-100-million-figure-including-bill-gates/article-491"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/bilgates.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन:</strong> माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प के संस्थापक बिल गेट्स, फेसबुक इंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग और अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड के अध्यक्ष जैक मा सहित कई उच्च पदस्थ अधिकारी एक स्वच्छ ऊर्जा कोष में 100 करोड़ डॉलर से भी अधिक निवेश कर रहे हैं।<br />
इस कोष का इस्तेमाल ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को कम कर शून्य के स्तर तक लाने के लिए ऊर्जा अनुसंधान पर किया जायेगा।<br />
इस कोष के निवेशकों में सॉफ्टबैंक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मसायेशी सन, लिंक्डइन कॉर्प के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन, अमेज़न इंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेफ बेजोस और वर्जिन समूह के संस्थापक रिचर्ड ब्रैनसन शामिल हैं। <a href="http://www.univarta.com/clean-energy-fund-will-invest-100-million-figure-including-bill-gates/world/topnews/716416.html"><em>(वार्ता) </em></a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Dec 2016 22:09:18 +0530</pubDate>
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