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                <title>CAT Admit Card 2024 Out: कैट परीक्षा इस दिन! 170 शहरों में होगी परीक्षा, एडमिट कार्ड जारी</title>
                                    <description><![CDATA[CAT Admit Card 2024 Out नई दिल्ली (एजेंसी)। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कोलकाता की ओर से कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) के एडमिट कार्ड का लिंक मंगलवार को एक्टिव हो गया। यह परीक्षा 24 नवंबर को 170 शहरों में होगी। इस साल आईआईएम कोलकाता कैट परीक्षा आयोजित कर रहा है। CAT 2024 कॉमन एडमिशन टेस्ट में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/cat-exam-on-this-day-exam-will-be-held-in-170-cities-admit-card-released/article-64047"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/neet-exam-ki-taiyari-kaise-karen-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">CAT Admit Card 2024 Out नई दिल्ली (एजेंसी)। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कोलकाता की ओर से कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) के एडमिट कार्ड का लिंक मंगलवार को एक्टिव हो गया। यह परीक्षा 24 नवंबर को 170 शहरों में होगी। इस साल आईआईएम कोलकाता कैट परीक्षा आयोजित कर रहा है। CAT 2024</p>
<p style="text-align:justify;">कॉमन एडमिशन टेस्ट में टॉप स्कोर के साथ पास होने वाले अभ्यर्थी देशभर में स्थित आईआईएम व बिजनेस स्कूलों के पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (पीजीपी) और मैनेजमेंट में फेलोशिप (एफपीएम)/(पीएचडी) प्रोग्राम में एडमिशन ले सकते हैं। कैट कैंडिडेटस के पास बैचलर डिग्री होना जरूरी है। जनरल कैटेगरी के लिए मिनिमम 50 परसेंट मार्क्स या सीजीपीए होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">एससी/एसटी/पीडब्लयूडी के लिए 45% अक होना जरूरी है। ऐसे अभ्यर्थी जो अभी फाइनल ईयर के विद्यार्थी हैं, वे भी इस एग्जाम के लिए एलिजिबल होते हैं। कैट एग्जाम दो भागों में बांटा जाता है। कैट क्वालिफाइड कैंडिडेटस 21 आईआईएम और 1000 से ज्यादा बिजनेस स्कूल में दाखिला ले सकते हैं। एमबीए डिग्री कोर्स में एडमिशन के लिए कैट में टॉप स्कोर होना जरूरी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तीन शिफ्ट में होगी परीक्षा | CAT 2024</h3>
<p style="text-align:justify;">पहली शिफ्ट सुबह 8:30 से 10:30 बजे तक</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी शिफ्ट दोपहर 12:30 से 2:30 बजे तक</p>
<p style="text-align:justify;">तीसरी शिफ्ट शाम 4:30 से 6:30 बजे तक होगी।</p>
<p><a title="Girl Students Special Incentive Scheme: छात्राओं के लिए खुशखबरी! प्रोत्साहन स्वरूप मिलेंगे अधिकतम 40 हजार! इस तारीख तक करें आवेदन" href="http://10.0.0.122:1245/good-news-for-girl-students-they-will-get-a-maximum-of-40-thousand-rupees-as-incentive/">Girl Students Special Incentive Scheme: छात्राओं के लिए खुशखबरी! प्रोत्साहन स्वरूप मिलेंगे अधिकतम 40 हजार! इस तारीख तक करें आवेदन</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Nov 2024 16:54:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अजब-गजब: जब एक बिल्ली 30 मिनट तक कोबरा के सामने डटी रही, जानें, फिर क्या हुआ&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ डेस्क)। आपने पालतू कुत्ते की वफादारी के चर्चा तो बहुत सुने होंगे लेकिन आज जो हम आपको खबर बताने वाले है उसे सुनकर आप भी अचंभित हो जाएंगे। जी हां भुवनेश्वर की एक पालतू बिल्ली ने ऐसा कुछ कर दिया जिसके सोशल मीडिया पर वायरल वीडियों के खुब चर्चे हो रहे हैं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/a-cat-stood-in-front-of-a-cobra-for-30-minutes/article-25380"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/cat-vs-cobra.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ डेस्क)।</strong> आपने पालतू कुत्ते की वफादारी के चर्चा तो बहुत सुने होंगे लेकिन आज जो हम आपको खबर बताने वाले है उसे सुनकर आप भी अचंभित हो जाएंगे। जी हां भुवनेश्वर की एक पालतू बिल्ली ने ऐसा कुछ कर दिया जिसके सोशल मीडिया पर वायरल वीडियों के खुब चर्चे हो रहे हैं। दरअसल, बिल्ली ने अपने परिवार को खतरनाक कोबरा से बचाया। वह 30 मिनट तक कोबरा सांप के सामने ही बैठी रही और उसे अंदर आने से रोकती रही। आपको बता दें कि संपद कुमार के घर जब एक कोबरा घर में घुसने वाला था। तभी बिल्ली बीच में आ गई।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Odisha | A pet cat stood guard to prevent a cobra from entering a house in Bhubaneswar </p>
<p>Cat has prevented Cobra from entering inside for nearly 30 min till the Snake Helpline reached the spot. Our cat is around 1.5 years old &amp; live with us like a family member: Sampad K Parida <a href="https://t.co/dWZXTMf9V5">pic.twitter.com/dWZXTMf9V5</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1417917688765042688?ref_src=twsrc%5Etfw">July 21, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">संपदा का परिवार सांप को देखकर डर गया था और उसके बाद परिवार स्नेक हेल्पलाइन को कॉल किया। लेकिन जब तक बचाव कार्य वाले आ नहीं गए तब तक बिल्ली बड़ी ही बहादुरी से घरवालों की रक्षा की और सांप को घुसने नहीं दिया। परिवार के एक सदस्य ने कहा कि हमारी बिल्ली ने कोबरा को घर में आने से रोके रखा। बिल्ली हमारे साथ डेढ़ वर्ष से हैं, हम इसे अपने परिवार के सदस्य की तरह अपने साथ रखते हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jul 2021 11:28:28 +0530</pubDate>
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                <title>बिल्ली के गले में घंटी बांधने की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 1975 की गर्मियों में सैगोन के पतन के बाद राजनीतिक दमन के भय से दक्षिण वियतनाम से हजारों लोगों ने पलायन किया। वे टूटी फूटी नौकाओं में भाग निकले। यह पलायन समुद्र द्वारा शरण लेने वाले लोगों का सबसे बड़ा पलायन था और इसके चलते उन्हें बोट पीपुल की संज्ञा दी गयी। विश्व के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/need-to-bell-the-cats-throat/article-5195"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/boat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वर्ष 1975 की गर्मियों में सैगोन के पतन के बाद राजनीतिक दमन के भय से दक्षिण वियतनाम से हजारों लोगों ने पलायन किया। वे टूटी फूटी नौकाओं में भाग निकले। यह पलायन समुद्र द्वारा शरण लेने वाले लोगों का सबसे बड़ा पलायन था और इसके चलते उन्हें बोट पीपुल की संज्ञा दी गयी। विश्व के देशों ने काफी नाटक करने के बाद उन्हें शरण दी।</p>
<p style="text-align:justify;">अमरीका ने आरंभ में आनाकानी की ंिकंतु बाद में उसने इन लोगों को शरण दी। उसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, थाईलैंड, मलेशिया, जापान और यहां तक छोटे से देश बरमुडा ने भी उन्हें शरण दी। 14 वर्ष बाद 1989 में विश्व के देशों का मन बदला और ये बोट पीपुल उनके गले की फांस बन गए क्योंकि समुद्र से नए बोट पीपुल आने लगे थे और वे आर्थिक शरणार्थी थे। उनमें किसान, फैक्टरी कामगार, और श्रमिक थे जो सुरक्षित स्थानों पर आजीविका की तलाश में गए थे। उनके पास इस बात का कोई प्रमाण नहीं था कि यदि वे वापस लौटे तो उनका दमन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2016 में फिर से बोट पीपुल देखने को मिले। सीरिया के 22 मिलियन लोगों ने छह वर्ष के गृह युद्ध के बाद विश्व के विभिन्न देशों में शरण मांगी जिनमें से 13.5 मिलियन लोगों को मानवीय सहायता चाहिए थी और पांच मिलियन लोगों ने विभिन्न यूरोपीय देशों में शरण मांगी। एक वर्ष बाद एक लाख 64 हजार रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार के राखिने प्रांत से भागे और उन्होंने भारत और बंगलादेश में शरण ली। भारत में लगता है इतिहास ने अपना एक चक्कर पूरा कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">बंगलादेश से आए अवैध अप्रवासियों ने असम को अपना घर बना दिया था किंतु लगता है अब ऐसा नहीं होगा और इसका कारण राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर है जिसमें 3.29 करोड लोगों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया। जिनमें से 2.89 करोड लोगों को नागरिकता दी गयी और 40 लाख लोगों का भाग्य अधर में लटक गया। अवैध अप्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की दिशा में पहला कदम उठने के लिए सरकार साधुवाद की पात्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर विपक्षी नेताओं ने खूब शोर मचाया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खून खराबे और गृह युद्ध की धमकी दे रही हैं। वे यह भूल गयी हैं कि इस समस्या की शुरूआत 1951 में हुई जब पूर्वी पाकिस्तान से आए अप्रवासी असम में बसे और इसका मुख्य कारण 4096 किमी लंबी भारत-बंगलादेश सीमा पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना है।</p>
<p style="text-align:justify;">उसके बाद आॅल असम स्टूडेंट यूनियन (आसू)ने 1985 में आंदोलन किया और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम समझौते के अंतर्गत अव्रैध अप्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने का वायदा किया। इन अवैध अप्रवासियों के कारण विशेषकर असम के सीमावर्ती जिलों तथा पूर्वोत्तर के अन्य छह राज्यों और पश्चिम बंगाल में जनांकिकी बदली जिसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तीन दशक तक यह मुद्दा राजनीतिक बहसका विषय बना रहा और अंतत: 2015 में उच्चतम न्यायालय ने सरकर को निर्देश दिया कि वह नागरिकता ;नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारीकरनाद्ध नियम 2003 के अंतर्गत राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर को अद्यतन बनाए। यह प्रक्रिया 2016 में शुरू हुई और भाजपा इससे राजनीतिक लाभ लेना चाहीत है और कांग्रेस तथा तूणमूल कांग्रेस को हाशिए पर ले जाना चाहती है साथ ही उन पर अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का आरोप भी लगाना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोधाभास देखिए। धर्मनिरपेक्ष दल धर्मनिरपेक्षता की कसमें खाते हैं किंतु अल्पसंख्यक वोट बैंक की प्रतिस्पर्धा के कारण उन्होंने इस मुद्दे का साम्प्रदायीकरण किया। इनमें से अधिकतर दलों ने अपने वोट बैंक को बढाने की खातिर इन अव्रैध अप्रवासियों को आने दिया जिसके परिणामस्वरूप असम की जनांकिकी पूरी तरह बदल गयी है और इससे स्थानीय लोगों की आजीविका और पहचान के लिए खतरा पैदा हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">असम के 27 जिलों में से आठ जिले मुस्लिम बहुल जिले बन गए हैं और 126 विधान सभा सीटों में से 60 सीटों पर उनकी निर्णायक भूमिका है। असम में जिस वन भूमि पर अतिकम्रण किया गया है उसमें से 85 प्रतिशत पर बंगलादेशी बसे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खुफिया रिपोर्टों के अनुसार 1901 से 1971 के दौरान असम की जनसंख्या 3.29 मिलियन से बढकर 14.6 मिलियन हो गयी अर्थात इसमें 343.77 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि भारत की जनसंख्या में 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान असम की प्रजनन दर 126.5 प्रतिशत थी जो अखिल भारतीय 137.3 प्रतिशत से कम है। असम के बंगलादेश से लगे जिलों में मुसलमानों की जनसंख्या में 60 प्रतिशत की वृद्धि र्हइु। स्पष्ट है कि यह अवैध अप्रवासियों के कारण अस्वाभाविक वृद्धि थी।</p>
<p style="text-align:justify;">असम में बाहरी लोगों के प्रति विरोध के कारण वहां बार-बार हिंसक छात्र आंदोलन होते रहते हैं। नागालैंड की जनसंख्या में मुसलमानों खासकर अवैध बंगलादेशी अप्रवासियों की संख्या पिछले दशक में 20 हजार से बढकर 75 हजार तक पहुंची। त्रिपुरा में स्थानीय पहचान लगभग समाप्त हो गयी है। यही नहीं बिहार के सात जिलों, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश भी अवैध अप्रवासियों के कारण प्रभावित हुए हैं। देश की राजधानी में 12 लाख और महाराष्ट्र में एक लाख से अधिक अवैध बंगलादेशी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान और मध्य प्रदेश में बंगलादेशियों ने राशन कार्ड तक प्राप्त कर लिए हैं जो स्थानीय लोगों के रोजगार को छीन रहे हैं। भारत में पहले से डेढ लाख तिब्बती शरणाीर्थी, 70 हजार अफगानी, एक लाख श्रीलंकाई तमिल, 3.50 लाख नेपाली श्रणार्थी रहे रहे हैं जबकि देश की जनसंख्या लगातार बढ रही है। देश में अवैध अप्रवासियों का अनुपात प्रति 100 लोगों पर 2.5 है जो स्थानीय संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाल रहा है जिसके कारण बेरोजगारी बढ रही है और मजदूरी कम हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जर्मन चांसलर मर्केल अपने निर्णय पर अब पश्चाताप कर रही हैं। फ्रांस 2030 तक अपने देश के इस्लामीकरण से डर रहा है। डेनमार्क और स्कैंडेनेवियन देश ऐसे शरणार्थियों को बाहर खदेड रहे हैं। ये सभी देश समझने लगे हैं कि इससे न केवल जनांकिकीय बदलाव और सांस्कृतिक बदलाव आ रहे हैं अपितु उनके देशों में सीमित संसाधनों के कारण बेरोजगारी और अपराध भी बढ रहे हें।</p>
<p style="text-align:justify;">अमरीकी राष्ट्रपति टंप ने अप्रवासियों का जीवन कठिन बना दिया है। फिर इस समस्या का समाधान क्या है? वोट बैंक की राजनीति करें? अव्रैध अप्रवासियों की की पुश एंड पुल थ्योरी को चलने दें? इन अवैध अप्रवासियों को वापस भेजें या भारत में रहने दें? विकल्प सीमित हैं और इस समस्या का समाधान भारत के मुख्य हितों: एकता और स्थिरता को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">किंतु यह आसान नहीं है क्योंकि विपक्ष चाहता है कि सरकार इन अवैध अप्रवासियों के बारे में मानवीय दृष्टिकोण अर्थात उनके वोट बैंक का ख्याल रखे। बंगलादेशी अपने वोटों को यहां ठहरने के अधिकार के व्यापार के रूप में उपयोग कर सकते हैं और उसके लिए उन्हें धर्मनिरपेक्ष पार्टियों का समर्थन प्राप्त है। क्या सरकार इस बारूद के ढे़र को निष्क्रिय करने में सक्षम है?</p>
<p style="text-align:justify;">अवैध अप्रवासियों को स्पष्ट संदेश देने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। इस मुद्दे पर ढुलमुल रवैये से काम नहीं चलेगा। इस समस्या की गंभीरता को समझना होगा और इसका समयबद्ध ढंग से समाधान करना होगा। राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर ने राह दिखा दी है। केवल कठोर बातों को करने के अलावा मोदी को अवैध अप्रवासी रूपी बिल्ली के गले में घंटी बांधनी होगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Aug 2018 19:25:17 +0530</pubDate>
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