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                <title>Privatization - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अजमेर में निजीकरण के विरोध में दूसरे दिन भी रही बैंकों की हड़ताल</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान के अजमेर में यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स के आवाह्न पर आज दूसरे दिन भी निजीकरण के विरोध में बैक कर्मियों की हड़ताल रही। अजमेर में बैंक कर्मियों ने एकजुटता के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए यहां दुपहिया वाहन रैली निकाली। रैली अजमेर के पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय से प्रारम्भ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/banks-strike-for-the-second-day-in-protest-against-privatization-in-ajmer/article-29215"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/banks-strik.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अजमेर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान के अजमेर में यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स के आवाह्न पर आज दूसरे दिन भी निजीकरण के विरोध में बैक कर्मियों की हड़ताल रही। अजमेर में बैंक कर्मियों ने एकजुटता के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए यहां दुपहिया वाहन रैली निकाली। रैली अजमेर के पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय से प्रारम्भ होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई कलेक्टर कार्यालय के सामने स्टेट बैंक मुख्य शाखा के बाहर सम्पन्न हुई । बैंक यूनियन नेता एवं कार्मिकों ने बैंक निजीकरण का पुतला फूंक कर विरोध प्रदर्शन किया। रैली में केन्द्र सरकार के निजीकरण फैसले के खिलाफ हाथों में तख्तियां, बैनर-पोस्टर थामे बैंक कर्मियों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">फोरम की अजमेर ईकाई के संयोजक अरविंद मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के लिये केंद्र सरकार का संसद में बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में संशोधन बिल लाने की योजना है , जिसका देश के सभी बैंककर्मी विरोध करते है। यदि ऐसा हुआ तो सरकारी क्षेत्र के बैंकों का निजी क्षेत्र में जाना निश्चित हो जायेगा , जिसका हम विरोध करते है। उल्लेखनीय है कि अजमेर की 225 से ज्यादा बैंक शाखाओं में कार्य बंद रहा। दो हजार से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर रहे और करीब 250 करोड़ का कारोबार प्रभावित रहा।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Dec 2021 16:28:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बैंकों के निजीकरण से बढ़ेगी बेरोजगारी</title>
                                    <description><![CDATA[देश के इन दिनों निजीकरण की खूब चर्चाएं हो रही हैं। इसमें बैंकिंग सेक्टर भी शुमार है। केंद्र सरकार आईडीबीआई सहित वह दो अन्य सरकारी बैंकों का निजीकरण करने जा रही है। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भरोसा दिया है कि निजीकरण के बावजूद बैंक कर्मचारियों के हितों को अनदेखा नहीं किया जाएगा। उनकी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/privatization-of-banks-will-increase-unemployment/article-22423"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-03/privatization-of-banks.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश के इन दिनों निजीकरण की खूब चर्चाएं हो रही हैं। इसमें बैंकिंग सेक्टर भी शुमार है। केंद्र सरकार आईडीबीआई सहित वह दो अन्य सरकारी बैंकों का निजीकरण करने जा रही है। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भरोसा दिया है कि निजीकरण के बावजूद बैंक कर्मचारियों के हितों को अनदेखा नहीं किया जाएगा। उनकी सैलरी व अन्य सुविधाओं को ध्यान में रखा जाएगा। मगर अतीत की घटनाओं के मद्देनजर बैंक कर्मचारियों को विश्वास नहीं हो रहा। अपने देश में सबसे पहले भारतीय रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण 1949 में हुआ था, जिसके बाद 1955 में स्टेट बैंक आॅफ इंडिया का हुआ। इंदिरा गांधी ने 19 जुलाई 1969 को जब एक ही झटके में देश के 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था, तो उसका एक खास मकसद था।</p>
<p style="text-align:justify;">ये बैंक उस समय देश के कुल कर्ज वितरण में 85 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते थे, लेकिन सरकार को लग रहा था कि यह सारा कर्ज केवल बड़े कारोबारी घरानों को जा रहा था और प्राथमिक क्षेत्र पूंजी से वंचित रह जा रहे थे। सन 2005 के आसपास जाने-माने अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने 2001 के आंकड़ों के हवाले से यह बताया था कि अमेरिका में जितनी गैर-बराबरी 1920 के दशक में थी, उससे कहीं ज्यादा 2000 के दशक में दिखने लगी है। बैंकों के निजीकरण से भी कुछ ऐसे ही खतरे हैं। यह सही है कि अभी सरकार के पास संसाधनों का अभाव है, इसलिए राजस्व जुटाने के लिए उसने निजीकरण का सहारा लिया है। मगर इससे देश की आर्थिक तस्वीर कहीं ज्यादा स्याह हो सकती है। भारत एक ऐसा राष्ट्र है, जहां गरीबी पसरी हुई है। यहां की करीब 90 फीसदी आबादी गरीब है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ही इन सबकी सुध लेते हैं। इसी कारण गांवों और कस्बों तक में सरकारी बैंकों की शाखाएं दिख जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि निजी बैंक सामाजिक जवाबदेही से कन्नी काटते हैं, इसलिए वे वहीं अपनी शाखा खोलते हैं, जहां पर उनको फायदा नजर आता है। शायद बैंक कर्मचारियों का डर है कि निजी होते ही बैंकों से नौकरियां जानी शुरू हो जाएंगी, क्योंकि निजी बैंकों को सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़े कर्मचारियों की शायद ही दरकार होगी। उनका यह डर बिल्कुल वाजिब है, क्योंकि ऐसा पहले होता रहा है कि बैंकों के विलय के बाद भी कुछ कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाता रहा है। दुनिया भर में जहां-जहां विलय या निजीकरण हुए हैं, वहां रोजगार कम हुए हैं। यही कारण है कि सरकार पर निजीकरण के बहाने छंटनी की जमीन तैयार करने का आरोप बैंककर्मी लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अभी भी देश का एक तबका निजीकरण को हर मर्ज की दवा समझता है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। कई निजी बैंक डूब चुके हैं। ताजा मामला यस बैंक और पीएमसी का है। कोरोना काल में निजी और सरकारी बैंकों ने कैसा प्रदर्शन किया है, यह किसी से छुपा नहीं है? सरकारी बैंकों के विनिवेश से कुछ हजार करोड़ जरूर मिल सकते हैं, लेकिन उससे सरकार को कितना फायदा होगा का भी आकलन करने की जरूरत है। फायदा नकदी में हो, यह जरूरी नहीं है। सवाल रोजगार जाने का और बचे हुए सरकारी बैंकों पर काम का दबाव बढ़ने का भी है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Mar 2021 10:48:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>संसद: कांग्रेस बोली- अब बंदरगाहों को भी निजी हाथों में देना चाहती है सरकार, भाजपा ने ऐसे दिया जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)  कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि सरकार देश के कुछ हवाई अड्डों को अपने उद्योगपति मित्रों को देने के बाद अब प्रमुख बंदरगाहों को भी पिछले दरवाजे से निजी हाथों में देना चाहती है। कांग्रेस के शक्तिसिंह गोविल ने बुधवार को राज्यसभा में प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण विधेयक 2020 पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/congress-says-now-the-government-wants-to-privatization-of-port/article-21644"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/exportation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज) </strong> कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि सरकार देश के कुछ हवाई अड्डों को अपने उद्योगपति मित्रों को देने के बाद अब प्रमुख बंदरगाहों को भी पिछले दरवाजे से निजी हाथों में देना चाहती है। कांग्रेस के शक्तिसिंह गोविल ने बुधवार को राज्यसभा में प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण विधेयक 2020 पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कहा कि इस विधेयक का मसौदा तैयार करते समय अनेक मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया जिससे इसमें काफी खामी हैं। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को संसद की स्थायी समिति के पास भेजा गया था और समिति ने अपनी रिपोर्ट भी दे दी थी लेकिन लोकसभा के भंग होने के कारण यह विधेयक दोबारा लाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह अफसोसजनक है कि दोबारा लाये गये विधेयक में स्थायी समिति की सिफारिशों को शामिल नहीं किया गया है। इसलिए विधेयक को दोबारा स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए और इसमें बंदरगाहों के निजीकरण की सभी आशंकाओं का समाधान किया जाना चाहिए। गोविल ने आरोप लगाया कि संभवत विधेयक का मसौदा तैयार करते समय जानबूझकर इस तरह के प्रावधान किये गये हैं जिससे कि सरकार बंदरगाहों को अपने मित्र उद्योगपतियों को दे सके। उन्होंने कहा कि बंदरगाहों के निजीकरण की आशंका इस बात से पैदा होती है कि संचालन के लिए विधेयक में जिस बोर्ड के गठन की बात कही गयी है उसमें 13 में से सात सदस्य निजी होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सदस्यों की योग्यता और विशेषज्ञता के बारे में भी कुछ नहीं कहा गया है। इस बोर्ड के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन करने वाली समिति के गठन के बारे में भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गयी है। बोर्ड में कामगारों का प्रतिनिधित्व भी बहुत कम है। बंदरगाह संबंधित इस्तेमाल और गैर बंदरगाह संबंधित इस्तेमाल को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सरकार ने दिया जवाब</h4>
<p style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी के सुरेश प्रभु ने कहा कि देश की 7600 किलोमीटर लंबी तटीय सीमा को देखते हुए यह विधेयक जरूरी है और इसके कानून बन जाने से देश में अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य केवल बंदरगाहों का विकास करना नहीं है बल्कि देश में बंदरगाह आधारित विकास का मार्ग प्रशस्त करना है। विधेयक में बंदरगाह प्रबंधन को स्वायत्तता देने का प्रावधान है जिससे उसका कामकाज पेशेवर बनेगा और उसमें पारदर्शिता आयेगी। इससे पहले केंद्रीय पोत परिवहन राज्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि यह विधेयक देश में प्रमुख बंदरगाहों के नियमन, संचालन और नियोजन तथा उनके प्रशासन, नियंत्रण और प्रबंधन को मुख्य बंदरगाह प्रशासन के बोर्ड को देने से संबंधित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे निर्णय लेने की पूर्ण स्वायत्तता और मुख्य बंदरगाहों के संस्थागत ढांचे का आधुनिकीकरण करके प्रमुख बंदरगाहों को अधिक दक्षता के साथ काम करने का अधिकार मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह कानून बन जाने के बाद बंदरगाह बदलते समय की जरूरतों के अनुसार निजी बंदरगाहों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनेंगें क्योंकि उनमें डिजीटल प्रौद्योगिकी और व्यापार सुगमता पर अधिक से अधिक जोर दिया जायेगा।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Feb 2021 12:44:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एयर इंडिया का कर्ज 80 हजार करोड़ पर पहुँचा</title>
                                    <description><![CDATA[हालाँकि, निजीकरण नहीं होने की स्थिति में छह महीने में कंपनी के बंद होने की मीडिया में आयी खबरों को वह टाल गए। पुरी ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर संवाददाताओं से संवाद के दौरान कहा कि एयर इंडिया की देनदारी 80 हजार करोड़ रुपए पर पहुँच चुकी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/air-indias-debt-has-reached-80-thousand-crore-rupees/article-12119"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/air-india.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">चिंताजनक: अगले कुछ सप्ताह में कंपनी के निजीकरण के लिए निविदा जारी की जाएगी (Air India)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दी जानकारी</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सरकारी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया का कर्ज बढ़कर 80 हजार करोड़ रुपए पर पहुँच गया है और उसे रोजाना 22 से 25 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संवाददाताओं को बताया कि एयर इंडिया पर कर्ज का बोझ इस हद तक पहुँच चुका है जहाँ ऋण प्रबंधन असंभव है और एयरलाइन के निजीकरण के अलावा कोई उपाय नहीं है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ सप्ताह में कंपनी के निजीकरण के लिए निविदा जारी की जाएगी। हालाँकि, निजीकरण नहीं होने की स्थिति में छह महीने में कंपनी के बंद होने की मीडिया में आयी खबरों को वह टाल गए। पुरी ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर संवाददाताओं से संवाद के दौरान कहा कि एयर इंडिया की देनदारी 80 हजार करोड़ रुपए पर पहुँच चुकी है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस वर्ष उसे आठ से नौ हजार करोड़ रुपए के बीच नुकसान हुआ है</li>
<li style="text-align:justify;">और इस प्रकार रोजाना 22 करोड़ से 25 करोड़ के बीच घाटा हो रहा है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">सरकार चाहती है कि एयर इंडिया को कोई भारतीय कंपनी खरीदे</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘हमें एयर इंडिया का निजीकरण करना है, इसमें कोई संदेह नहीं है। कई निजी कंपनियों तथा स्थापित विमान सेवा कंपनियों ने इसमें रुचि दिखायी है। आने वाले कुछ सप्ताह में इसके लिए निविदा जारी की जाएगी। तभी पता चल सकेगा कि कितनी कंपनियाँ वाकई इसे खरीदने में रुचि रखती हैं। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘रणनीतिक कारणों से’ सरकार चाहती है कि एयर इंडिया को कोई भारतीय कंपनी खरीदे। ‘एयरक्राफ्ट रूल्स’ के अनुसार, किसी विमान सेवा कंपनी में विदेशी कंपनी की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/air-indias-debt-has-reached-80-thousand-crore-rupees/article-12119</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Dec 2019 15:47:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>यात्री ध्यान दें, आज से दो दिन तक रोडवेज का चक्का जाम है!</title>
                                    <description><![CDATA[निजीकरण के विरोध में प्रदेशभर में हड़ताल पर रहेंगे रोडवेज कर्मी रोडवेज को होगा करोड़ों का नुकसान वहीं निजी वाहन चालकों की रहेगी चांदी सच कहूँ/सुनील वर्मा/ सरसा। अगर आप रोडवेज में यात्रा करते हैं तो आज से सोच समझकर यात्रा करें। आज से रोडवेज कर्मचारियों की ओर से दो दिवसीय चक्का जाम कार्यक्रम निर्धारित […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/roadways-workers-on-strike-across-the-state-in-protest-of-privatization/article-5198"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/protest-rodays-worker.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">निजीकरण के विरोध में प्रदेशभर में हड़ताल<br />
पर रहेंगे रोडवेज कर्मी</h1>
<ul>
<li><strong>रोडवेज को होगा करोड़ों का नुकसान वहीं निजी वाहन चालकों की रहेगी चांदी </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा/ सरसा।</strong> अगर आप रोडवेज में यात्रा करते हैं तो आज से सोच समझकर यात्रा करें। आज से रोडवेज कर्मचारियों की ओर से दो दिवसीय चक्का जाम कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। रोडवेज कर्मचारियों द्वारा की जा रही हड़ताल के कारण यात्रियों को खासी परेशानी होने वाली है। हजारों यात्री रोजाना रोडवेज की बसों में यात्रा करते हैं। रोडवेज विभाग को रोजाना लाखों रुपए की आय भी रोडवेज की बसों से होती है। दो दिनों के चक्का जाम से जहां विभाग को लाखों रुपए का नुकसान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं रोडवेज बसों में सफर करने वाले यात्रियों को भी परेशानियां झेलनी पडेगी। चक्का जाम कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सोमवार को रोडवेज कर्मचारियों ने बस स्टेंड परिसर में प्रभात फेरी निकाली। प्रभात फेरी का नेतृत्व डिपो प्रधान रामकुमार चुरनियां व सुरजीत अरोड़ा ने संयुक्त रूप से किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पर सुरजीत अरोड़ा ने कहा कि कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर काफी समय से संघर्ष करते आ रहे हैं। लेकिन सरकार की ओर से मांगों के प्रति कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई है। कर्मचारियों द्वारा चक्का जाम की घोषणा की जाती है तो सरकार बातचीत के लिए बुला लेती है। लेकिन बैठक में सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिलता। अरोड़ा ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से रोडवेज विभाग घाटे में जा रहा है। सरकार मोटर व्हीकल एक्ट संशोधित बिल 2017 ला रही है। जिसे रोडेवज कर्मी किसी भी सूरत में सहन नहीं करेंगे।</p>
<h1 style="text-align:center;">ये हंै कर्मचारियों की मांगें</h1>
<p style="text-align:justify;">मोटर व्हीकल एक्ट संशोधित बिल-2017 को रोका जाए, नियमित भर्ती की जाए। पुरानी पेंशन स्कीम बहाल की जाए। समान काम समान वेतन लागू किया जाए। कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए, निजी कंपनियों से हायर की जा रही 700 बसों पर रोक लगाई जाए, आऊट सोर्सिंग पर भर्ती करने व बिना किसी लाभ वाले मार्र्गों पर प्रतिदिन नए-नए निजी परमिट जारी करने पर रोक लगाई जाए। नई पेंशन स्कीम रद्द की जाए, सभी श्रेणियों की प्रमोशन करवाने, बोनस की स्थाई नीति बनाई जाए।</p>
<h1 style="text-align:center;">यात्रियों को भुगतना पड़ता है खामियाजा</h1>
<p style="text-align:justify;">सरकारें आती हैं और जाती हैं। सत्ता में आने से पहले हर पार्टी कर्मचारियों से लुभावने वादे करती है। लेकिन सत्ता में आने के बाद पार्टी अपने वादे पर खरा नहीं उतरती। मजबूरन कर्मचारियों को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ती है। सरकार व कर्मचारियों की चक्की में यात्रियों को पिसना पड़ता है। जो रोजाना रोडवेज की बसों में सफर करते हैं। न तो सरकार की ओर से यात्रियों को होने वाली असुविधा का ख्याल रखा जाता है और न ही कर्मचारियों की ओर से।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/roadways-workers-on-strike-across-the-state-in-protest-of-privatization/article-5198</link>
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                <pubDate>Mon, 06 Aug 2018 19:33:53 +0530</pubDate>
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