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                <title>Fund - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>Raise Funds For Education : बच्चों की हायर एजुकेशन के लिए जुटाएं फंड</title>
                                    <description><![CDATA[– Raise Funds For Education – आजकल बच्चों की पढ़ाई का खर्चा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। शुरूआती शिक्षा में ही इतना खर्च हो जाता है फिर हायर स्टडीज की तो बात अलग ही है। यदि अच्छे शिक्षण संस्थान से कोई प्रोफेशनल कोर्स करवाना चाहते हैं तो उसके लिए अच्छा खासा बजट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/raise-funds-for-education/article-57800"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/child-mutual-fund.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Raise Funds For Education –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आजकल बच्चों की पढ़ाई का खर्चा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। शुरूआती शिक्षा में ही इतना खर्च हो जाता है फिर हायर स्टडीज की तो बात अलग ही है। यदि अच्छे शिक्षण संस्थान से कोई प्रोफेशनल कोर्स करवाना चाहते हैं तो उसके लिए अच्छा खासा बजट रखना होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए आजकल पैरेंट्स ने पहले से ही बच्चों की हायर स्टडीज के लिए फंड इकट्ठा करना शुरू कर दिया है जिससे बाद में उनको किसी तरह के लोन के लिए परेशान नहीं होना पड़े। यदि आप भी अपने बच्चों के लिए थोड़ा-थोड़ा पैसा निवेश कर एक बड़ा फंड खडा करना चाह रहे हैं, तो इन स्कीमों में निवेश कर सकते हैं। जानते हैं इन योजनाओं के बारे में:</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>1. पब्लिक प्रोविडेंट फंड:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सरकार की इस योजना का लाभ अब आप अपने बच्चे के लिए भी ले सकते हैं। बच्चे के नाम से बैंक या पोस्ट आॅफिस में पीपीएफ अकाउंट खुलवाकर आप उसमें अपनी क्षमता के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा कर सकते हैं। इसमें 15 साल के लिए इसमें लॉक-इन-पीरियड रहता है। बच्चे के 18 साल के होने पर आप यह तय कर सकते हैं कि इस अकाउंट को आगे चालू रखना है या नहीं। इसमें साल भर में आप 1.5 लाख रुपए तक जमा कर सकते हैं। इसमें ब्याज दर अच्छी है। कम से कम 7 से 8 फीसदी ब्याज तो मिल ही जाता है। साथ ही आपको इसमें निवेश से टैक्स बेनिफिट भी मिलता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>2. म्यूच्यूअल फंड:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के लिए बेहतर रिटर्न पाने के लिए आप अच्छे म्यूच्यूअल फंड्स में भी निवेश कर सकते हैं। इसमें शेयर मार्केट की तुलना में रिस्क कम है खासतौर पर लार्ज-कैप म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश करना बेहतर आॅप्शन है। स्टेट बैंक ने खास मैग्नम चिल्ड्रेंस बेनिफिट फंड की शुरूआत की है। इसमने छह महीने में करीब 7.84 फीसदी, एक साल में 4.59 फीसदी और 2 साल में लगभग 51.27 फीसदी का रिटर्न मिलता है। इसके अलावा आप आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल चाइल्ड केयर, एचडीएफसी चिल्ड्रन गिफ्ट फंड, टाटा यंग सिटीजन फंड और यूटीआई चिल्ड्रेन्स करियर प्लान जैसे फंड्स में भी पैसा लगा सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>3. नेशनल सेविंग्स स्कीम:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) में 5 साल का लॉक इन पीरियड रहता है। इसमें रिटर्न काफी अछा है। साथ ही इस स्कीम पर आप 80सी के तहत टैक्स छूट भी क्लेम कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>4. सुकन्या समृद्धि योजना:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यदि आपकी बेटी है और उसकी उम्र 10 साल से कम है तो यह योजना आपके लिए सबसे बढ़िया निवेश का विकल्प है। इस स्कीम में निवेशक हर साल 1.5 लाख रुपये निवेश कर सकता है। इन 1.5 लाख रुपये पर आपको आयकर की धारा 80सी के तहत आपको टैक्स डिडक्शन भी मिलता है। यानी यदि आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनी है तो आपको 1.5 लाख रुपये निवेश की गई राशि आपके इनकम मे से डिडक्ट होगी जिसपर आपको टैक्स नहीं देना होगा। यह योजना 21 साल के बाद मैच्यौर होती है। तो, आप भी इन योजनाओं में निवेश करके अपने बच्चों की हायर स्टडीज के लिए निश्चिंत होकर बैठिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>जल्द करें निवेश की शुरूआत</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यदि बच्चों के हायर एजुकेशन के लिए आप बड़ा फंड जुटाना चाहते हैं तो आपको जितना जल्द हो सके उनता इनवेस्टमेंट शुरू कर देना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आप बड़ा फंड नहीं जुटा सकेंगे। इसकी सबसे बड़ी वजह है एजुकेशन इनफ्लेशन। अच्छा होगा कि आप अपने बच्चे के जन्म के ठीक बाद उसके लिए फंड जुटाना शुरू कर दें।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 May 2024 10:52:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सरकारी कोष नेताओं की निजी जागीर नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[लगता है वोट की राजनीति देश को बर्बाद करके ही छोड़ने वाली है। इसने तो अपराधी और कानून के मानने वालों में अंतर समझना ही बंद कर दिया। अपराधियों और कुपात्र की मदद के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए देश की दूसरी संस्थाओं को आगे आना होगा। गत दिवस पंजाब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/government-funds-are-not-private-fiefdoms-of-leaders/article-28403"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/fund.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लगता है वोट की राजनीति देश को बर्बाद करके ही छोड़ने वाली है। इसने तो अपराधी और कानून के मानने वालों में अंतर समझना ही बंद कर दिया। अपराधियों और कुपात्र की मदद के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए देश की दूसरी संस्थाओं को आगे आना होगा। गत दिवस पंजाब की चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार ने निर्णय लिया है कि 26 जनवरी को लाल किले पर हुए उपद्रव में गिरफ्तार 83 लोगों को वह दो-दो लाख रुपये की मदद करेगी। केंद्र द्वारा संसद में पारित तीनों कृषि कानून को उसने लागू न करने का भी निर्णय लिया है। पंजाब सरकार इस उपद्रव में मरने वाले दो लोगों को पहले ही पांच-पांच लाख रुपये दे चुकी है। यह सब क्या हो रहा है?</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीति में यह बहुत बुरा चलन शुरू हो गया है। मदद के लिए दिया जाने वाला धन किसी मुख्यमंत्री की निजी संपत्ति नहीं होती, राजकीय कोष होता है। प्रदेश और देश के जिम्मेदार नागरिकों द्वारा दिए गए टैक्स से संग्रह हुआ धन है, इसको इस तरह से लुटाने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता। मुख्यमंत्री या किसी मंत्री के निर्णय को उचित-अनुचित बताने वाली कार्य पालिका मौजूद है। संबंधित अधिकारी हैं। उन्हें इसे रोकना चाहिए। क्योंकि जिम्मेदारी उनकी बनती है, किसी मंत्री या मुख्यमंत्री की नहीं। केंद्र द्वारा प्रदेश में राज्यपाल इसीलिए बैठाए जाते हैं कि वह सरकार के गलत और सही निर्णय पर विचार करें। गलत निर्णय पर रोक लगाएं। इसके ऊपर संसद और राष्ट्रपति हैं। न्यायपालिका गलत और सही निर्णय का परीक्षण करने के लिए है।</p>
<p style="text-align:justify;">लखीमपुर खीरी में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई मौत में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक मरने वाले के परिवार को 45-45 लाख रुपये दिये। फिर इनको पंजाब और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने क्यों 50-50 लाख रुपए अपने प्रदेश के कोष से दिया? पंजाब और छत्तीसगढ़ के प्रदेश का धन दूसरे प्रदेशों में लुटाने का अधिकार इन प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को किसने दिया? स्वत: संज्ञान लेने वाली न्यायपालिका को इस पर विचार करना चाहिए। पंजाब समेत पांच प्रदेशों में चुनाव होने वाले हैं। मदद करनी है तब नेता अपनी जेब से करें। अपने निजी पैसे से करें। किसी उपद्रवी की मदद करनी है तब प्रदेश के आम नागरिकों के नुक्सान पर दिये जाने वाले मुआवजे की राशि पीड़ित नागरिक को उपद्रवियों की राशि से दुगनी राशि दी जाए, नहीं दी जाती तब आमजन द्वारा स्वार्थी नेताओं का बहिष्कार किया जाना चाहिए।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Nov 2021 09:51:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनिया ने सांसद निधि की पूरी राशि कोरोना पर खर्च के लिये दी</title>
                                    <description><![CDATA[रायबरेली (एजेंसी)। कांग्रेस अध्यक्ष और रायबरेली से सांसद सोनिया गांधी ने प्रशासन को पत्र के माध्यम से सम्पूर्ण सांसद निधि को कोरोना महामारी से बचाव में खर्च करने की अनुशंसा की है। सांसद सोनिया गांधी ने पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी रायबरेली वैभव श्रीवास्तव को अपनी शेष सम्पूर्ण सांसद निधि जो कि 1 करोड़ 17 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sonia-gave-the-entire-amount-of-mp-funds-to-spend-on-the-corona/article-23156"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/minister-of-the-modi-government-met-sonia-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रायबरेली (एजेंसी)।</strong> कांग्रेस अध्यक्ष और रायबरेली से सांसद सोनिया गांधी ने प्रशासन को पत्र के माध्यम से सम्पूर्ण सांसद निधि को कोरोना महामारी से बचाव में खर्च करने की अनुशंसा की है। सांसद सोनिया गांधी ने पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी रायबरेली वैभव श्रीवास्तव को अपनी शेष सम्पूर्ण सांसद निधि जो कि 1 करोड़ 17 लाख 77 हजार है के विषय मे कोविड-19 महामारी से उनके संसदीय इलाके के निवासियों के बचाव के लिए अनुशंसा की है। इस विषय मे उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी इस सम्पूर्ण धनराशि का कोरोना महामारी से बचाव के उपकरण या अन्य जो भी बचाव आदि में उपयोगी कार्य हो उनपर व्यय कर सकते है। श्रीमती गांधी ने यह पत्र जिलाधिकारी को भेजा।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Apr 2021 12:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब कॉलेजों को सरकार से मिलने वाले फंड और खर्चों का देना होगा हिसाब</title>
                                    <description><![CDATA[ इंटरनल आॅडिटिंग कराने के लिए उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से निर्देश जारी (College Fund)  सरसा में फंड व खर्चों का ब्यौरा तैयार करने के लिए एसोसिएट प्रोफेसरों की टीम गठित सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा। राजकीय कॉलेजों में मिलने वाले फंड में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी तो नहीं की जा रही, इसकी पूरी तरह […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/now-colleges-will-have-to-account-for-the-funds-and-expenses-from-the-government/article-21606"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/fund.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong> इंटरनल आॅडिटिंग कराने के लिए उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से निर्देश जारी (College Fund)</strong></h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong> सरसा में फंड व खर्चों का ब्यौरा तैयार करने के लिए एसोसिएट प्रोफेसरों की टीम गठित</strong></h5>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा।</strong> राजकीय कॉलेजों में मिलने वाले फंड में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी तो नहीं की जा रही, इसकी पूरी तरह से जांच होगी। अब सरकारी कॉलेजों को फंड व खर्चों का ब्यौरा देना होगा। ब्यौरा तैयार करने के लिए पहली बार जिला स्तर पर कर्मचारियों की नियुक्ति करने की योजना बनाई गई है। कॉलेजों में इंटरनल आॅडिटिंग कराने के लिए उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी कॉलेजों को निर्देश जारी किए गये हैं। इसकी रिपोर्ट निदेशालय को देनी जरूरी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">फंड व खर्चों का ब्यौरा तैयार करने के लिए जिलावार एसोसिएट प्रोफेसरों को जिम्मेवारी सौंपी गई। सरसा में राजकीय नेशनल कॉलेज से डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. नवीन मक्कड़ व राजकीय महिला कालेज से डॉ. अमनदीप को टीम में शामिल किया गया है। इनकी मदद से कॉलेज प्रशासन इंटरनल आॅडिंटिंग प्रक्रिया पूरी करेंगे। बतौर अधिकारी तैनात किए गए ये प्रोफेसर कालेजों के फंडों व खातों के ब्यौरे का रिकार्ड तैयार करने में मदद करेंगे। कॉलेजों की ओर से इंटरनल आॅडिटिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट निदेशालय में मुख्यालय को भेजी जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>खातों को करना होता है मेंटेन</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">कॉलेजों को उच्चतर निदेशालय की ओर से निर्देश दिए गये हैं। इसमें फंड व खर्च के लिए डायरेक्टर लोकल आॅडिट कार्यालय की ओर से आॅडिटिंग होगी। वहीं इससे पहले कॉलेजों को इंटरनल आॅडिटिंग प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके तहत कालेजों में आए विभिन्न फंडों की जांच होगी। निदेशालय के मुताबिक शिक्षा के अनुच्छेद 327 के अनुसार संस्थानों को वार्षिक आधार पर निर्धारित प्रफोर्मा के तहत खातों के मेंटेन करना होता है। कॉलेजों में इंटरनल आॅडिटिंग कराने के लिए टीम गठित की गई है। इसकी मदद से कालेज प्रशासन इंटरनल आॅडिंटिंग प्रक्रिया पूरी करेंगे।<br />
<strong>– डॉ. संदीप गोयल, प्राचार्य, राजकीय नेशनल कालेज, सरसा।</strong></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Feb 2021 20:36:46 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सॉफ्ट बैंक अपना दूसरा विजन फंड लाने की तैयारी में</title>
                                    <description><![CDATA[एक जैसे दृष्टिकोण वाली कंपनियों में होगा निवेश नई दिल्ली। दुनिया का सबसे बड़ा प्राइवेट इक्विटी फंड जुटाने वाला सॉफ्ट बैंक अपना दूसरा विजन फंड लाने की तैयारी में है। जानकारी देते हुए कंपनी ने बताया कि 2016 में पहला विजन फंड 100 अरब डॉलर यानी 6.7 लाख करोड़ रुपए का बनाया था। इस दौरान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/soft-bank-prepares-second-vision-fund/article-4421"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/softbnk-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1>एक जैसे दृष्टिकोण वाली कंपनियों में होगा निवेश</h1>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p>दुनिया का सबसे बड़ा प्राइवेट इक्विटी फंड जुटाने वाला सॉफ्ट बैंक अपना दूसरा विजन फंड लाने की तैयारी में है। जानकारी देते हुए कंपनी ने बताया कि 2016 में पहला विजन फंड 100 अरब डॉलर यानी 6.7 लाख करोड़ रुपए का बनाया था। इस दौरान इसमें से सॉफ्ट बैंक ने 93% हिस्सा यानी 6.3 लाख करोड़ रुपए जुटा लिए थे। और 2 लाख करोड़ रुपए इन्वेस्ट भी कर दिए थे। अब दूसरा विजन फंड भी 100 अरब डॉलर का होगा। विजन फंड एक जैसे दृष्टिकोण को लेकर काम करने वाली कंपनियों में निवेश के लिए बनाया गया फंड होता है।</p>
<p> </p>
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</pre>
<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Jun 2018 11:55:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उच्च शिक्षा के लिए अधिक धनराशि की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही है। उच्च शिक्षा को न केवल प्रासंगिक अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर की भी बनाए जाने की आवश्यकता है। उक्त संस्थान किस तरह कार्य करेगा इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। इस दिशा में सरकर ने पहला महत्वपूर्ण कदम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/need-more-funding-for-higher-education/article-2787"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही है। उच्च शिक्षा को न केवल प्रासंगिक अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर की भी बनाए जाने की आवश्यकता है। उक्त संस्थान किस तरह कार्य करेगा इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। इस दिशा में सरकर ने पहला महत्वपूर्ण कदम आईआईटी सहित सभी केन्द्र द्वारा वित्त पोषित संस्थानों को अंतर्राष्ट्रीय रैकिंग में भाग लेने के लिए कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में 600 विश्वविद्यालयों और 32 हजार कालेजों में से केवल कुछ को ही राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रमाणन परिषद से प्रमाण पत्र मिला है। एक अन्य महत्वपूर्ण कदम में केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की सरकार पर निर्भरता कम करने के लिए सभी पाठ्यक्रमों का शुल्क बढ़ाने की अनुमति दी गयी है तथा अवसंरचना विकास, वेतन, आदि में वृद्धि को देखते हुए यह उचित है। मानद विश्वविद्यालयों की तलना में सरकारी विश्वविद्यालय बहुत कम शुल्क लेते है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान की परिषद और भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की परिषद ने अगले तीन वषों तक प्रति वर्ष दस प्रतिशत शुल्क वृद्धि की अनुमति दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था के अनुरूप उच्च शिक्षा में भी सुधार आना चाहिए किंतु दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हो रहा है और इसके कारण सत्यनिष्ठा का अभाव, शिक्षकों के कौशल, शिक्षण विधि, अधितकर संस्थानों को पूर्ण स्वयात्तता, शिक्षा का राजनीतिकरण, शिक्षण संस्थानों में बढ़ती हिंसा, प्रयोगशाला सुविधाओं का अभाव, बुनियादी विज्ञान में अनुसंधान को प्रोत्साहन का अभाव आदि है। साथ ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। वैज्ञानिक प्रकाशनों में भारत का योगदान केवल 3.5 प्रतिशत रहा है जबकि चीन का 21 प्रतिशत रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षण और अनुसंधान की गुणवत्ता के कारण अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने भारतीय विश्वविद्यालयों को अच्छी रैकिंग नहीं दी है। दु:खद तथ्य यह है कि भारत का कोई भी विश्वविद्यालय शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची में नहीं है। आईआईटी भी 200 से 350 के बीच में है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और पूणे विश्वविद्यालयों की रैंकिंग 800 से अधिक है। जबकि चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों के विश्वविद्यालयों का प्रदर्शन अच्छा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईआईएम और एम्स तथा अन्य विशेषज्ञ संस्थान हमारे देश के लिए प्रभावी मॉडल नहीं है। ये संस्थान केवल विज्ञान और इंजीनियंरिग पर ध्यान देते हैं और उनमें केवल 0.5 प्रतिशत छात्र जाते हंै। कुछ आईआईटी में गैर-इंजीनियरिंग संकाय भी शामिल कर दिए गए है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए आईआईटी की स्थापना एक स्वागत योग्य कदम है। विद्यमान आईआईटी की स्थिति में सुधार भी आवश्यक है। शिक्षा में अवसंचना सुधार और व्यय में वृद्धि की आवश्यकता है। भारत मेें प्रति व्यक्ति के हिसाब से शिक्षा में उच्च शिक्षा पर 2419 डालर खर्च होते हैं जबकि अमरीका में 10888 और चीन में 17851 डालर खर्च किए जाते हैं। साथ ही इन संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त किया जान चाहिए और उन्हें अधिक स्वयत्तता दी जानी चाहिए। विद्यमान शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है और इसमें प्रस्तावित संस्थान सहायक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समाज के निम्न वर्ग के छात्रों को शिक्षा पूर्ण करने के बाद रोजगार की आवश्यकता होती है और इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। भारत में प्रति वर्ष एक करोड से सवा करोड़ लोग रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं। इसलिए रोजगार के अवसर सृजित होने चाहिए तथा इस संबंध मे स्टार्ट अप इंजन में गति लाई जानी चाहिए। हमारे स्टार्ट अप्स को जल, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और अवंसनचना जैसी चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए और इन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा में बदलाव से सहायता मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी उच्च शिक्षा प्रणाली में आए संकट को दूर किया जाना चाहिए तथा इसके हर पहलू में बदलाव लाया जाना चाहिए। उच्च शिक्षा के उच्च मानक स्थापित किए जाने चाहिए। छात्रों के लिए विभिन्न अवसर दिए जाने चाहिए। अनावश्यक विनियमों को समाप्त किया जाना चाहिए तथा इन संस्थानों में होनहार प्रतिभाआें को आकर्षित करने के लिए उन्हें अधिक स्वायत्तता दी जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>समाज के निम्न वर्ग के छात्रों को शिक्षा पूर्ण करने के बाद रोजगार की आवश्यकता होती है और इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। भारत में प्रति वर्ष एक करोड से सवा करोड़ लोग रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं। इसलिए रोजगार के अवसर सृजित होने चाहिए तथा इस संबंध मे स्टार्ट अप इंजन में गति लाई जानी चाहिए।</em></p>
<p style="text-align:justify;">
<em><strong>-डॉ. ओइशी मुखर्जी</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/need-more-funding-for-higher-education/article-2787</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 04:12:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो पाकिस्तान को फंड नहीं देगा अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन। आतंकवादी संगठनों को फलने-फूलने में पूरी मदद देने वाला पाकिस्तान अब इस मोर्चे पर बुरी तरह घिरता हुआ नजर आ रहा है। यूएस की प्रतिनिधि सभा ने पाकिस्तान को रक्षा क्षेत्र में मदद के लिए दी जाने वाली अमेरिकी फंडिंग की शर्तों को और सख्त बनाने के लिए 3 विधायी संशोधनों पर वोट किया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/america-will-not-give-fund-to-pakistan-if-it-does-not-take-action-against-terrorism/article-2311"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/pakistan-us.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन।</strong> आतंकवादी संगठनों को फलने-फूलने में पूरी मदद देने वाला पाकिस्तान अब इस मोर्चे पर बुरी तरह घिरता हुआ नजर आ रहा है। यूएस की प्रतिनिधि सभा ने पाकिस्तान को रक्षा क्षेत्र में मदद के लिए दी जाने वाली अमेरिकी फंडिंग की शर्तों को और सख्त बनाने के लिए 3 विधायी संशोधनों पर वोट किया है। इसमें शर्त रखी गई है कि वित्तीय मदद दिए जाने से पहले पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में संतोषजनक प्रगति दिखानी होगी। साफ है कि अगर पाकिस्तान ने आतंकवादियों को मदद देना बंद नहीं किया, तो न केवल उसे अमेरिका द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता से हाथ गंवाना पड़ेगा, बल्कि उसे अमेरिका की सख्त कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आतंकवादियों को दी जा रही मदद</h3>
<p style="text-align:justify;">ये सभी शर्तें पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को दी जा रही मदद से संबंधित हैं। इसे लेकर पहले भी कई शीर्ष अमेरिकी अधिकारी और सांसद चिंता जताते रहे हैं। शुक्रवार को कांग्रेस की निचली सदन ने 651 अरब डॉलर वाले नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन ऐक्ट 2018 के इन तीनों विधायी संशोधनों को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन ने 81 के मुकाबले 344 मतों से इसे पारित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सदन द्वारा पारित एक संशोधन में इस बात का प्रस्ताव रखा गया है कि जब तक सेक्रटरी आॅफ स्टेट यह पुष्टि न कर सकें कि पाकिस्तान अमेरिका द्वारा घोषित किसी भी आतंकवादी को सैन्य, वित्तीय मदद या साजो-सामान उपलब्ध नहीं करा रहा, तब तक पाकिस्तान को दिया जाने वाला फंड जारी न किया जाए। एक संशोधन में यह भी कहा गया है कि शकील अफरीदी एक अंतरराष्ट्रीय नायक हैं और पाकिस्तान सरकार को चाहिए कि वह तुरंत उन्हें जेल से रिहा कर दे। अफरीदी ने एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी का पता लगाने में अमेरिका की मदद की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><strong><br />
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2017 05:39:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वच्छ ऊर्जा कोष में 100 करोड़ डॉलर निवेश करेंगे बिल गेट्स सहित कई हस्ती</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन: माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प के संस्थापक बिल गेट्स, फेसबुक इंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग और अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड के अध्यक्ष जैक मा सहित कई उच्च पदस्थ अधिकारी एक स्वच्छ ऊर्जा कोष में 100 करोड़ डॉलर से भी अधिक निवेश कर रहे हैं। इस कोष का इस्तेमाल ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को कम कर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/clean-energy-fund-will-invest-100-million-figure-including-bill-gates/article-491"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/bilgates.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन:</strong> माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प के संस्थापक बिल गेट्स, फेसबुक इंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग और अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड के अध्यक्ष जैक मा सहित कई उच्च पदस्थ अधिकारी एक स्वच्छ ऊर्जा कोष में 100 करोड़ डॉलर से भी अधिक निवेश कर रहे हैं।<br />
इस कोष का इस्तेमाल ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को कम कर शून्य के स्तर तक लाने के लिए ऊर्जा अनुसंधान पर किया जायेगा।<br />
इस कोष के निवेशकों में सॉफ्टबैंक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मसायेशी सन, लिंक्डइन कॉर्प के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन, अमेज़न इंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेफ बेजोस और वर्जिन समूह के संस्थापक रिचर्ड ब्रैनसन शामिल हैं। <a href="http://www.univarta.com/clean-energy-fund-will-invest-100-million-figure-including-bill-gates/world/topnews/716416.html"><em>(वार्ता) </em></a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Dec 2016 22:09:18 +0530</pubDate>
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