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                <title>medical - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>medical RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Medical Strike: देशव्यापी दवा विक्रेताओं की हड़ताल का खरखौदा में भी रहा असर</title>
                                    <description><![CDATA[दवा विक्रेता की देशव्यापी हड़ताल का असर खरखौदा में भी दिखाई दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/countrywide-drug-sellers-strike-had-its-impact-in-kharkhoda-also/article-85155"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/kharkhoda-news-(3).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>खरखौदा (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Kharkhoda News: दवा विक्रेता की देशव्यापी हड़ताल का असर खरखौदा में भी दिखाई दिया। खरखौदा मेडिकल एसोसिएशन के प्रधान प्रदीप मलिक ने बताया कि एक दिन पहले सभी दवा विक्रेताओं की मीटिंग ली गई थी जिसमें सभी ने सरल संपत्ति से निर्णय लिया कि दवा विक्रेताओं द्वारा 20 मई को देशव्यापी हड़ताल में हिस्सा लिया जाएगा। यह हड़ताल केवल ऑनलाइन दवाइयाँ जो आम जनता तक पहुंचाई जा रही है ,उसके विरोध में की गई है। जो कंपनियां ऑनलाइन का काम करती हैं वह आमजन को सस्ते दामों पर दवाइयां मुहैया करवा रही है। क्योंकि सस्ती दवाइयां का लालच देकर वह आमजन की जिंदगी को खतरे में डालने का काम कर रही  है।</p>
<p style="text-align:justify;"> क्योंकि ऑनलाइन से जो दवाइयां पहुंच रही है वह नकली  व लोकल भेजी जा रही है। इसके अलावा कुछ ऐसी दवाइयां जो  सरकार द्वारा प्रतिबंध की गई है वह दवाइयां भी ऑनलाइन के जरिए आम जनता तक पहुंच रही है। जैसे नशे की दवाइयां, गर्भपात की दवाइयां आदि। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ऑनलाइन व्यापार को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है। जिससे छोटे व्यापारी दुकानदारों को इसका काफी नुकसान हो रहा है। एक तरफ तो महंगाई की मार दूसरी तरफ ऑनलाइन व्यापार जिससे  मध्यम वर्ग के व्यक्तियों का  गुर्जर बसर करना मुश्किल हो गया है। परिवार के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि अभी तक तो यह है एक दिन की हड़ताल की गई है।  भविष्य में यदि सरकार ने इसकी तरफ कोई निर्णय नहीं लिया तो ऑल इंडिया केमिस्ट एसोसिएशन व हरियाणा केमिस्ट एसोसिएशन के संयुक्त निर्देशानुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि मानवता की भलाई के लिए संगठन का निर्णय था कि यदि आपातकालीन  स्थिति में दुर्घटना या अन्य स्थिति मे दवाई की सख्त जरूरत किसी व्यक्ति को पड़ेगी तो उसको दवाइयां उपलब्ध करवा दी जाएगी। हड़ताल के दौरान दवा विक्रेता हरबीर ,भूषण, कमल राज, अतुल, पीयूष मिगलानी ,मनजीत, आदि ने हड़ताल का समर्थन किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/kharkhoda-news-(3).jpg" alt="Kharkhoda News (3)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:21:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में योग आयुर्वेद का सम्मिलन करेगा रोगों का उन्मूलन: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में योग एवं आयुर्वेद के सम्मिलन को प्रमाण आधारित प्रभावी उपचार का माध्यम साबित होने पर खुशी जाहिर की और आशा जतायी कि भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का प्रयोग देश में रोगों के उन्मूलन एवं किफायती उपचार में महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/combination-of-yoga-and-ayurveda-in-modern-medical-science-will-eradicate-diseases/article-41426"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/modi-1-e16456914208532.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में योग एवं आयुर्वेद के सम्मिलन को प्रमाण आधारित प्रभावी उपचार का माध्यम साबित होने पर खुशी जाहिर की और आशा जतायी कि भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का प्रयोग देश में रोगों के उन्मूलन एवं किफायती उपचार में महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा। मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में कहा कि यानि सत्य को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती, जो प्रत्यक्ष है, उसे भी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन बात जब आधुनिक मेडिकल विज्ञान की हो, तो उसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है – प्रमाण। सदियों से भारतीय जीवन का हिस्सा रहे योग और आयुर्वेद जैसे हमारे शास्त्रों के सामने प्रमाण आधारित शोध की कमी, हमेशा-हमेशा एक चुनौती रही है – परिणाम दिखते हैं, लेकिन प्रमाण नहीं होते हैं। लेकिन, खुशी की बात है कि प्रमाण आधारित उपचार के युग में, अब योग और आयुर्वेद, आधुनिक युग की जाँच और कसौटियों पर भी खरे उतर रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>योग बहुत ज्यादा असरकारी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सभी ने मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर के बारे में जरूर सुना होगा। इस संस्थान ने शोध, नवान्वेषण और कैंसर केयर में बहुत नाम कमाया है। इस सेंटर द्वारा किये गये एक गहन शोध में सामने आया है कि स्तन कैंसर के मरीजों के लिए योग बहुत ज्यादा असरकारी है। टाटा मेमोरियल सेंटर ने अपने शोध के नतीजों को अमेरिका में हुई बहुत ही प्रतिष्ठित, स्तन कैंसर सम्मेलन में प्रस्तुत किया है। इन नतीजों ने दुनिया के बड़े-बड़े विशेषज्ञों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। क्योंकि, टाटा मेमोरियल सेंटर ने प्रमाण के साथ बताया है कि कैसे मरीजों को योग से लाभ हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सेंटर के शोध के मुताबिक, योग के नियमित अभ्यास से, स्तन कैंसर के मरीजों की बीमारी के, फिर से उभरने और मृत्यु के खतरे में, 15 प्रतिशत तक की कमी आई है। भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में यह पहला उदाहरण है, जिसे, पश्चिमी तौर-तरीकों वाले कड़े मानकों पर परखा गया है। साथ ही, यह पहला अध्ययन है, जिसमें स्तन कैंसर से प्रभावित महिलाओं में, योग से, जीवन की गुणवत्ता के बेहतर होने का पता चला है। इसके दीर्घकालिक लाभ भी सामने आये हैं। टाटा मेमोरियल सेंटर ने अपने अध्ययन के नतीजों को पेरिस में हुए यूरोपियन सोसाइटी आॅफ मेडिकल आॅन्कोलॉजी सम्मेलन में प्रस्तुत किया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>योग के लाभों को लेकर अध्ययन किया जा रहा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मोदी ने कहा कि आज के युग में, भारतीय चिकित्सा पद्दतियाँ, जितनी ज्यादा प्रमाण आधारित होंगी, उतनी ही पूरे विश्व में उनकी स्वीकार्यता, बढ़ेगी। इसी सोच के साथ, दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भी एक प्रयास किया जा रहा है। यहाँ, हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्दतियों को वैधानिकता प्रदान करने लिए छह साल पहले सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च की स्थापना की गई। इसमें अत्याधुनिक तकनीक और शोध विधियों का उपयोग किया जाता है। यह सेंटर पहले ही प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शोधपत्रिकाओं में 20 शोधपत्र प्रकाशित कर चुका है। अमेरिकन कॉलेज आॅफ कार्डियोलॉजी के जर्नल में प्रकाशित एक शोधपत्र में सिन्कपी से पीड़ित मरीजों को योग से होने वाले लाभ के बारे में बताया गया है। इसी प्रकार, न्यूरोलॉजी जर्नल में, माईग्रेन में, योग के फायदों के बारे में बताया गया है। इनके अलावा कई और बीमारियों में भी योग के लाभों को लेकर अध्ययन किया जा रहा है जैसे हृदय रोग, अवसाद, अनिद्रा और गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होने वाली समस्यायें।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही गोवा में विश्व आयुर्वेद कांग्रेस का आयोजन हुआ। इसमें 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए और यहां 550 से अधिक वैज्ञानिक शोधपत्र प्रस्तुत किये गए। भारत सहित दुनियाभर की करीब 215 कंपनियों ने यहाँ प्रदर्शनी में अपने उत्पाद को प्रदर्शित किया। चार दिनों तक चले इस एक्स्पो में एक लाख से भी अधिक लोगों ने आयुर्वेद से जुड़े अपने अनुभव का आनंद उठाया। उन्होंने कहा, ‘आयुर्वेद कांग्रेस में भी मैंने दुनिया भर से जुटे आयुर्वेद विशेषज्ञ के सामने प्रमाण आधारित शोध का आग्रह दोहराया। जिस तरह कोरोना वैश्विक महामारी के इस समय में योग और आयुर्वेद की शक्ति को हम सभी देख रहे हैं, उसमें इनसे जुड़ा प्रमाण आधारित शोध बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होगा। मेरा आपसे भी आग्रह है कि योग, आयुर्वेद और हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े हुए ऐसे प्रयासों के बारे में अगर आपके पास कोई जानकारी हो तो उन्हें सोशल मीडिया पर जरुर साझा करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>मन की बात</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में हमने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी चुनौतियों पर विजय पाई है। इसका पूरा श्रेय हमारे चिकित्सा विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और देशवासियों की इच्छाशक्ति को जाता है। हमने भारत से चेचक, पोलियो और ‘गिनी वाम’ जैसी बीमारियों को समाप्त करके दिखाया है। उन्होंने कहा, ‘आज, ‘मन की बात’ के श्रोताओं को, मैं, एक और चुनौती के बारे में बताना चाहता हूं, जो अब, समाप्त होने की कगार पर है। ये चुनौती, ये बीमारी है ‘कालाजार’। इस बीमारी का परजीवी यानि बालू मक्खी के काटने से फैलता है। जब किसी को ‘कालाजार’ होता है तो उसे महीनों तक बुखार रहता है, खून की कमी हो जाती है, शरीर कमजोर पड़ जाता है और वजन भी घट जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत को 2025 तक टी.बी. मुक्त</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह बीमारी, बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी को भी हो सकती है। लेकिन सबके प्रयास से, ‘कालाजार’ नाम की ये बीमारी, अब, तेजी से समाप्त होती जा रही है। कुछ समय पहले तक, कालाजार का प्रकोप, 4 राज्यों के 50 से अधिक जिलों में फैला हुआ था। लेकिन अब ये बीमारी, बिहार और झारखंड के 4 जिलों तक ही सिमटकर रह गई है। मुझे विश्वास है, बिहार-झारखंड के लोगों का सामर्थ्य, उनकी जागरूकता, इन चार जिलों से भी ‘कालाजार’ को समाप्त करने में सरकार के प्रयासों को मदद करेगी। ‘कालाजार’ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से भी मेरा आग्रह है कि वो दो बातों का जरूर ध्यान रखें। एक है – बालू मक्खी पर नियंत्रण, और दूसरा, जल्द से जल्द इस रोग की पहचान और पूरा इलाज। ‘कालाजार’ का इलाज आसान है, इसके लिए काम आने वाली दवाएं भी बहुत कारगर होती हैं। बस, आपको सतर्क रहना है।</p>
<p style="text-align:justify;">बुुखार हो तो लापरवाही ना बरतें, और, बालू मक्खी को खत्म करने वाली दवाइयों का छिड़काव भी करते रहें। जरा सोचिए, हमारा देश जब ‘कालाजार’ से भी मुक्त हो जाएगा, तो ये हम सभी के लिए कितनी खुशी की बात होगी। उन्होंने कहा कि सबका प्रयास की इसी भावना से, हम, भारत को 2025 तक टी.बी. मुक्त करने के लिए भी काम कर रहे हैं। बीते दिनों, जब, टी.बी. मुक्त भारत अभियान शुरू हुआ, तो हजारों लोग, टी.बी. मरीजों की मदद के लिए आगे आए। ये लोग निक्षय मित्र बनकर, टी.बी. के मरीजों की देखभाल कर रहे हैं, उनकी आर्थिक मदद कर रहे हैं। जनसेवा और जनभागीदारी की यही शक्ति, हर मुश्किल लक्ष्य को प्राप्त करके ही दिखाती है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Dec 2022 14:16:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>डॉक्टरों ने दिखाया कमाल! देश में पहली बार ऑपरेट कर निकाला गया 12 किलो का लिवर</title>
                                    <description><![CDATA[हैदराबाद (एजेंसी)। आधुनिक चिकित्सीय तकनीक कैसे चमत्कार कर सकती है इसका पता उस समय चला जब हैदराबाद के केआईएमएस अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम ने एक ही दिन एक ही मरीज के दो दो ट्रांसप्लांट कर एक अभूतपूर्व उपलब्धि तो हासिल की ही साथ ही देश में अब तक का सबसे भारी 12 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/for-the-first-time-in-india-12-kg-liver-was-removed-by-operation/article-40736"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/doctor.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हैदराबाद (एजेंसी)।</strong> आधुनिक चिकित्सीय तकनीक कैसे चमत्कार कर सकती है इसका पता उस समय चला जब हैदराबाद के केआईएमएस अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम ने एक ही दिन एक ही मरीज के दो दो ट्रांसप्लांट कर एक अभूतपूर्व उपलब्धि तो हासिल की ही साथ ही देश में अब तक का सबसे भारी 12 किलो का लिवर निकाला गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि देश में यह पहली बार है जब 12 किलो के लिवर को सफलतापूर्वक निकाला गया है। इतना ही नही एक साथ किड़नी और लिवर दोनों का ट्रांसप्लांट किया गया। पचास साल की पश्चिम बंगाल की एक महिला ऊषा अग्रवाल का यह आॅपरेशन किया गया है । इस तरह न केवल उनका जीवन बचाया गया है बल्कि उन्हें सामान्य जीवन जीने का तोहफा भी दिया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कैसे हुआ ये चमत्कार</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">डॉ रविचंदा सिद्दाचरी चीफ लिवर ट्रांसप्लांट और कंसल्टेंट और एचपीबी सर्जरी ने कहा ह्ल पॉलीसिस्टिक लिवर और किडनी की बीमारी एक आनुवांशिक स्थिति है जो जीन में उत्परिवर्तन के कारण होती है और इसमें किडनी और लिवर में तरल से भरी कैविटीज बन जाती है। पीड़ित मरीज को इस बीमारी के बारे में 30 साल की उम्र तक कुछ भी पता नही चलता है। सिस्ट के बढ़ने के साथ इसके लक्षण दिखायी देते है । जबरदस्त वृद्धि के कारण पेट में पानी भरने लगता है और इससे हर्निया तथा सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. उमा महेश्वर राव कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट और रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ़ उमा महेश्वर राव ने बताया कि ऐसे बढ़े हुए आकार वाले लिवर को काटकर निकालना और ट्रांसप्लांटेशन के लिए जरूरी संरचनाओं को बचा पाना यह दोनों काम बेहद ही जटिल हैं लेकिन हम न केवल बीमार लिवर निकालने बल्कि नया लिवर भी मरीज के भीतर ट्रांसप्लांट करने में कामयाब रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>चिकित्सक इस बात से उत्साहित …</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">एक ही मरीज के भीतर एक ही दिन यह दुलर्भ ट्रांसप्लांटेशन करने वाले चिकित्सक इस बात से उत्साहित हैं कि मरीज अब पूरी तरह से ठीक होकर अस्पताल से छुट्टी ले चुका है। यह अब तक के सबसे संतोषप्रद आॅपरेशंस में से एक रहा क्योंकि इसके सफल होने से एक मरीज का न केवल जीवन बचाया गया बल्कि उसको मानसिक रूप से हो रही परेशानियों और दूसरी बड़ी दिक्कतों से भी निजात दिला दी गयी। मरीज का जीवन बचाने के लिए लगभग 14 घंटे तक चले इस आॅपरेशन को डॉ़ सिद्दाचरी, डॉ़ सचिन दागा,डॉ़ के एक परमेशा और डॉ़ उमा राव की टीम ने किया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2022 10:38:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हिन्दी में चिकित्सा पढ़ाई एक क्रांतिकारी कदम</title>
                                    <description><![CDATA[हिन्दी को उसका गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के प्रयासों से देश में पहली बार मध्य प्रदेश में चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी में शुरू होने जा रही है। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई का शुभारम्भ कर एक नए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/medical-study-in-hindi-a-revolutionary-step/article-39923"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/fifty-medical-degrees.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हिन्दी को उसका गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के प्रयासों से देश में पहली बार मध्य प्रदेश में चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी में शुरू होने जा रही है। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई का शुभारम्भ कर एक नए युग की शुरूआत की है, इससे न केवल हिन्दी का गौरव बढ़ेगा बल्कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा एवं राज-काज की भाषा बनाने में आ रही बाधाएं दूर होंगी। अंग्रेजी भाषा पर निर्भरता की मानसिकता को जड़ से खत्म करने की दिशा में यह एक क्रांतिकारी एवं युगांतकारी कदम होने के साथ अनुकरणीय भी है, जिसके लिये अन्य प्रांतों की सरकारों को बिना राजनीतिक आग्रहों एवं पूर्वाग्रहों के पहल करनी चाहिए। आजादी का अमृत महोत्सव मना चुके देश के लिये यह चिन्तन का महत्वपूर्ण पहलु है कि भारत और अन्य देशों में 70 करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं, फिर भी चिकित्सा-इंजीनियरिंग एवं अन्य उच्च पाठ्यक्रम एवं अदालती कार्रवाई आज भी हिन्दी में क्यों नहीं हो पा रही? हिन्दी में चिकित्सा की पढ़ाई के प्रयोग की प्रतीक्षा लंबे समय से की जा रही थी, क्योंकि चीन, जापान, जर्मनी, फ्रांस और रूस समेत कई देश अपनी भाषा में उच्च शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छा होता कि भारत में इसकी पहल स्वतंत्रता के बाद ही की जाती। देर से ही सही, चिकित्सा की हिंदी में पढ़ाई का शुभारंभ भारतीय भाषाओं को सम्मान प्रदान करने की दृष्टि से एक मील का पत्थर है। इस प्रयोग की सफलता के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए। मातृभाषा में पढ़ाई की अत्यन्त आवश्यकता इसलिये है कि इससे स्व-गौरव एवं स्व-संस्कृति का भाव जागता है। जब नया भारत बन रहा है, सशक्त भारत बन रहा है, विकास के नये अध्याय लिखे जा रहे है तो स्व-भाषा को सम्मान दिया जाना चाहिए। कई देशों ने यह सिद्ध किया है कि मातृभाषा में उच्च शिक्षा प्रदान कर उन्नति की जा सकती है। मातृभाषा में शिक्षा इसलिए आवश्यक है, क्योंकि एक तो छात्रों को अंग्रेजी में दक्षता प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा नहीं खपानी पड़ती और दूसरे वे पाठ्यसामग्री को कहीं सुगमता से आत्मसात करने में सक्षम होते हैं। इसी के साथ वे स्वयं को कहीं सरलता से अभिव्यक्त कर पाते हैं। राष्ट्र-भाषा को लेकर छाए धूंध को मिटाने के लिये कुछ ऐसे ही ठोस कदम उठाने ही होंगे।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Nov 2022 09:50:49 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय भाषा में मेडिकल शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश ने इस वैज्ञानिक तथ्य को स्वीकार कर लिया है कि किसी भी विषय की शिक्षा के लिए मातृ भाषा सबसे समर्थ माध्यम होती है। प्रदेश सरकार ने मेडिकल की शिक्षा एमबीबीएस हिंदी भाषा में करवाने का निर्णय लिया है व बकायदा हिंदी में मेडिकल की पुस्तकों को प्रकाशित कर दिया है। नि:संदेह मध्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/medical-education-in-indian-language/article-39080"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/fifty-medical-degrees.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश ने इस वैज्ञानिक तथ्य को स्वीकार कर लिया है कि किसी भी विषय की शिक्षा के लिए मातृ भाषा सबसे समर्थ माध्यम होती है। प्रदेश सरकार ने मेडिकल की शिक्षा एमबीबीएस हिंदी भाषा में करवाने का निर्णय लिया है व बकायदा हिंदी में मेडिकल की पुस्तकों को प्रकाशित कर दिया है। नि:संदेह मध्य प्रदेश इस तर्कसंगत व भाषा वैज्ञानिक कार्य के लिए बधाई का पात्र है। केंद्र व अन्य राज्य सरकारों को भी इस संबंधी कदम उठाने के लिए पहल करनी चाहिए। वास्तव में भाषा वैज्ञानिक, सहित मनोवैज्ञानिक अर्थशास्त्री व शिक्षा शास्त्री विगत 50 वर्षों से ही इस बात पर जोर देते रहे हैं कि मातृ भाषा ही शिक्षा का माध्यम होनी चाहिए। मातृ भाषा के महत्व को समझते हुए अधिकतर राज्य सरकारों ने अपने-अपने राज्य की भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर भी इन राज्यों ने विशेष तौर पर 11वीं व 12वीं में मेडिकल के साथ-साथ नॉन-मेडिकल की शिक्षा के लिए इंग्लिश मीडियम चुना हुआ है। अब सवाल यह उठता है कि यदि एमबीबीएस की शिक्षा हिंदी में संभव है तब 11वीं व 12वीं में साइंस की पढ़ाई के लिए हिंदी-पंजाबी या अन्य क्षेत्रीय भाषाएं क्यों माध्यम नहीं बन सकती? यह भी तथ्य है कि हमारे देश के विद्यार्थी यूक्रेन में रूसी भाषा में एमबीबीएस पास करते रहे हैं व इधर देश में आकर वह सफल डॉक्टर बन गए हैं। यदि भारत रूसी माध्यम में सफल हो जाता है तब फिर हिंदी-पंजाबी या अन्य क्षेत्रीय भाषा में यह शिक्षा और भी आसान होगी। यूक्रेन के अलावा भी विश्व के कई देश अंगे्रजी की बजाए अपनी भाषाओं में मेडिकल शिक्षा दे रहे हैं। भारतीय भाषाएं भी ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा के समर्थ हैं। होना तो यह चाहिए कि माध्यम केवल राज्य की भाषा तक सीमित न हो, अन्य भाषा समूहों को भी शामिल किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">मिसाल के तौर पर हरियाणा में हिंदी भाषा को सरकारी भाषा के साथ-साथ शिक्षा में माध्यम के तौर पर अपनाया गया है। हरियाणा में पंजाबी भाषा बोलने वाले विद्यार्थियों की संख्या 25 फीसदी के करीब है तब भाषा वैज्ञानिकों के नजरिए से हरियाणा में पंजाबी बोलने वाले विद्यार्थियों को उनकी मातृ-भाषा पंजाबी माध्यम के रूप में चुनने का प्रबंध होना चाहिए। दरअसल, भाषा को वैज्ञानिक नजरिये के साथ देखने की आवश्यकता है, न कि इसे सांप्रदायिकता से जोड़ा जाए। देश में भाषा संबंधी गैर-वैज्ञानिक व सांप्रदायिक नीतियों के कारण क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा का प्रबंध नहीं हो सका। उम्मीद है कि मध्य प्रदेश सरकार का फैसला भारतीय भाषाओं के विकास के लिए आशा की नई किरण लेकर आएगा।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Oct 2022 09:43:14 +0530</pubDate>
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                <title>&amp;#8216;मातृ मृत्यु दर को कम करने हेतु बेहतर चिकित्सा देखभाल, जागरूकता आवश्यक&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[हैदराबाद (एजेंसी)। तेलंगाना की राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन ने मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को कम करने के लिए सुरक्षित मातृत्व और बेहतर चिकित्सा देखभाल के बारे में जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया है। श्रीमती सुंदराजन ने सोमवार को कहा कि मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन लेने, चिकित्सा सहायता प्राप्त […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/better-medical-care-awareness-necessary-to-reduce-maternal-mortality/article-24941"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/mother.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हैदराबाद (एजेंसी)।</strong> तेलंगाना की राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन ने मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को कम करने के लिए सुरक्षित मातृत्व और बेहतर चिकित्सा देखभाल के बारे में जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया है। श्रीमती सुंदराजन ने सोमवार को कहा कि मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन लेने, चिकित्सा सहायता प्राप्त करने, टीकाकरण और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के बारे में जागरूकता फैलाना एक महत्वपूर्ण कारक है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने ये बातें भारतीय चिकित्सा संगठन (आईएमए) द्वारा वर्जुल तरीके मातृ स्वास्थ्य और बाल देखभाल के महत्व को लेकर “सुरक्षित मातृत्व सप्ताह एवं बाल देखभाल समारोह” के को संबोधित करते हुए कहीं। राजभवन की ओर से सोमवार को देर रात जारी विज्ञप्ति में कहा गया, ‘गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार करने की कई घटनाएं सामने आती हैं, जो वास्तव में अमानवीय हैं। अस्पतालों को प्राथमिकता के आधार पर सभी गर्भवती महिलाओं को आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हमें महिलाओं को हर संभव सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा देनी चाहिए</h4>
<p style="text-align:justify;">श्रीमती सुंदराजन ने देश में सतत विकास लक्ष्यों के अनुसार मातृ मृत्यु दर को प्रति एक लाख पर 90 से कम करने के लिए सभी पक्षों से ठोस प्रयास करने का भी आह्वान किया है। उन्होंने कहा, “हालांकि हमारे देश ने एमएमआर को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, फिर भी हम विकसित देशों की तुलना में काफी पीछे हैं। हमें महिलाओं को हर संभव सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा देनी चाहिए।”</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jul 2021 10:36:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान, भारत को देगा 30 टन मेडिकल सामग्री</title>
                                    <description><![CDATA[काहिरा (एजेंसी)। ईरान ने कहा है कि वैश्विक महामारी की कड़ी मार झेल रहे भारत को कोविड-19 से लड़ने में मदद के लिए 30 टन मेडिकल सामग्री भेजी जायेगी। ईरान के स्वास्थ्य मंत्री हला जायेद ने बयान जारी करके कहा कि तीन सौ ऑक्सीजन सिलेंडर, 20 वेंटिलेटर, 50 इलेक्ट्रिक सीरिंज, 100 मेडिकल बेड, 20 इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/iran-india-will-provide-30-tons-of-medical-supplies/article-23336"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/medical-equipment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>काहिरा (एजेंसी)।</strong> ईरान ने कहा है कि वैश्विक महामारी की कड़ी मार झेल रहे भारत को कोविड-19 से लड़ने में मदद के लिए 30 टन मेडिकल सामग्री भेजी जायेगी। ईरान के स्वास्थ्य मंत्री हला जायेद ने बयान जारी करके कहा कि तीन सौ ऑक्सीजन सिलेंडर, 20 वेंटिलेटर, 50 इलेक्ट्रिक सीरिंज, 100 मेडिकल बेड, 20 इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम मशीन और 30 डेफिब्रिलेटर समेत 30 टन मेडिकल सामग्री भारत रवान की जायेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जायेद ने कहा कि सशस्त्र बलों के सहयोग से ये सामग्री भारत भेजी जायेंगीं। भारत में कल कोरोना संक्रमण के विश्वभर में सर्वाधिक मामले चार लाख 19 हजार 93 मामले सामने आये थे। ऑक्सीजन की कमी के कारण अस्पतालों में मरीज दम तोड़ रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी के बत्रा अस्पताल में तरल मेडिकल ऑक्सीजन की कमी के कारण शनिवार को 12 मरीजों की मौत हो गयी। इससे पहले सर गंगा राम और जयपुर गोल्डन अस्पताल में कम से कम 45 मरीजों की जानें जा चुकी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अमेरिका ने भारत यात्रा पर प्रतिबंध से छात्रों, पत्रकारों को दी छूट</h4>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने वैश्विक महामारी कोविड-19 के नए स्ट्रेन के तेजी से बढ़ते मामले के मद्देनजर चार मई से भारत यात्रा पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध से छात्रों, शिक्षाविदों और पत्रकारों को छूट देने का निर्णय लिया है। व्हाइट हाउस से जारी बयान में कहा गया है कि भारत में कोरोना के मामले थम नहीं रहे हैं जिसके मद्देनजर अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र (सीडीसी) की सलाह पर भारत यात्रा पर प्रतिबंध लगाए जाने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाइडेन की ओर से हस्ताक्षरित एक घोषणा पत्र में कहा गया है कि विश्वभर में कोरोना के नए स्ट्रेन का एक तिहाई से अधिक मामले भारत में हैं और देश के लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा सुनिश्चित करके मद्देनजर यह प्रतिबंध आवश्यक है। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि छात्रों, बुद्धिजीवियों और पत्रकारों को यात्रा प्रतिबंध से छूट दी जाएगी।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 May 2021 09:47:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में 86 प्रतिशत मेडिकल उपकरण आयातित</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। देश में 86 प्रतिशत मेडिकल उपकरण और मशीन आयात किये जाते हैं और केंद्र सरकार ने देश को इस दिशा में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य के साथ कई योजनाएं शुरु की हैं। ऐसी ही एक योजना, राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के तहत देश के पांच राज्यों में मेडिकल उपकरण विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/86-percent-of-medical-equipment-imported-in-india/article-22678"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/medical-equipment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> देश में 86 प्रतिशत मेडिकल उपकरण और मशीन आयात किये जाते हैं और केंद्र सरकार ने देश को इस दिशा में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य के साथ कई योजनाएं शुरु की हैं। ऐसी ही एक योजना, राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के तहत देश के पांच राज्यों में मेडिकल उपकरण विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए 148.79 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बुधवार को लोकसभा में एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए यह ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के तहत मेडिकल उपकरणों के विनिर्माण और उनकी जांच के लिए आधारभूत ढांचा निर्माण के लिए 148.79 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। इसके लिए नौ फैसिलिटी को आर्थिक सहायता दी गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके तहत आंध्रप्रदेश को 83.20 करोड़ रुपये , तेलंगाना को 22.71 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश को 19.09 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 12.70 करोड़ रुपये तथा महाराष्ट्र को 11.09 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। चौबे ने बताया कि जिन मेडिकल उपकरणों का आयात किया जाता है,उनमें मेडिकल संबंधी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सर्जिकल उपकरण, डिस्पोज किये जाने वाले मेडिकल सामान, आईवीडी रिजेंट और प्रत्यारोपण से जुड़े सामान आदि शामिल हैं। केंद्र सरकार ने मेडिकल उपकरणों के निर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन और मेडिकल डिवाइस पार्क को बढावा देने सहित कई पहलें की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बायोटेक्नोलॉजी विभाग द्वारा आंध्रप्रदेश मेड टे जोन के साथ मिलकर शुरु किया गया डीबीटी- एएमटीजेड कमांड, सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत नेशनल बायोमेडिकल रिसोर्स कंसर्टियम, बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल की बायोनेस्ट योजना।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Apr 2021 15:40:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सच हो सकता है सीकर में मेडिकल कॉलेज का सपना</title>
                                    <description><![CDATA[हरी झंडी मिलते ही मेडिकल कॉलेज को शुरू करने की एलओपी मिल जाएगी। अगले साल फरवरी में फाइनल निरीक्षण होने पर आगामी सत्र से कॉलेज का पहला बैच शुरू हो जाएगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/sikar-medical-college/article-10819"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/sikar-medical-college.jpg" alt=""></a><br /><h2>मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया की टीम  सर्वे के लिए आएगी | Sikar Medical College</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सीकर(एजेंसी)।</strong> पिछले दस साल से जिले में सियायत का केन्द्र रहा बहुप्रतीक्षित सीकर मेडिकल कॉलेज ( Sikar Medical College ) के शुरू होने के उम्मीद अब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया  के निरीक्षण पर टिकी हुई है। मेडिकल कॉलेज को शुरू करवाने के लिए राजनेता और चिकित्सा विभाग  के अफसर जनता से किए अपने वादों पर खरे उतरे तो जिलेवासियों का मेडिकल कॉलेज का सपना इस साल ही पूरा हो सकता है। सांवली स्थित मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए ने जोर-शोर से निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इस माह में कभी भी मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया की टीम छह हजार 67 स्क्वायर मीटर में बन रहे मेडिकल कॉलेज के सर्वे के लिए आएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">टीम की हरी झंडी मिलते ही मेडिकल कॉलेज को शुरू करने की एलओपी मिल जाएगी। अगले साल फरवरी में फाइनल निरीक्षण होने पर आगामी सत्र से कॉलेज का पहला बैच शुरू हो जाएगा। गौरतलब है कि सांवली में कल्याण आरोग्य सदन की ओर से दी गई भूमि पर मार्च 2016 में सीकर मेडिकल कॉलेज के निर्माण को स्वीकृति मिली थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">स्वीकृति फिर सियासत ने पकड़ लिया जोर |Sikar Medical College</h2>
<p style="text-align:justify;">सीकर मेडिकल कॉलेज को हरी झंडी मिलते ही पहले से चली आ रही सियासत ने जोर पकड़ लिया और कॉलेज के निर्माण कार्य को लेकर राजनीति शुरू हो गई। इस कारण निर्माण कार्य प्रदेश के अन्य जिलो से पिछड़ गया। स्वीकृति के बाद जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुए जिससे कॉलेज पिछड़ता गया। मेडिकल कॉलेज के अधीन नया अस्पताल बनाने के लिए भूमि का विवाद होने के कारण अब एसके अस्पताल को अधीन रखने का निर्णय किया है और यहां पीडियाट्रिक और गायनी वार्ड की एक-एक यूनिट खोली जाएगी। इसके लिए स्टाफ और लेबर रूम तैयार किए गए हैं।</p>
<p><strong>एमसीआई की ओर से निरीक्षण के दौरान निकाली गई अधिकांश खामियों को पूरा कर लिया है। </strong><strong>एसके अस्पताल का पट्टा, मेडिकल कॉलेज के लिए फर्नीचर और उपकरण की खरीद प्रदेश स्तर पर की जानी है।</strong><strong> स्थानीय स्तर पर भामाशाह के जरिए बजट लेकर खामियां पूरी की जा रही है।</strong><strong> पूरा प्रयास है कि निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की खामी नहीं हो। </strong><strong>जो खामियां रह जाएंगी उन्हें फाइनल निरीक्षण से पहले पूरा कर लिया जाएगा।</strong></p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/sikar-medical-college/article-10819</link>
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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2019 14:45:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेडिकल रिसर्च के काम आएगी राजरानी इन्सां की मृत देह</title>
                                    <description><![CDATA[– ब्लॉक की दसवीं शरीरदानी बनी राजरानी इन्सां सच कहूँ/सुनील कमार खारियां। कलयुग के इस भंयकर समय में जहां हर किसी से एक फूटी कोड़ी तक दान नहीं की जाती वहीं डेरा सच्चा सौदा अनुयायी जीते जी 134 मानवता भलाई के कार्यों में सेवा करते हैं तथा मरणोपरांत शरीरदान कर समाज में भलाई के कार्यों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>– ब्लॉक की दसवीं शरीरदानी बनी राजरानी इन्सां</h2>
<p><strong>सच कहूँ/सुनील कमार</strong><br />
<strong>खारियां।</strong> कलयुग के इस भंयकर समय में जहां हर किसी से एक फूटी कोड़ी तक दान नहीं की जाती वहीं डेरा सच्चा सौदा अनुयायी जीते जी 134 मानवता भलाई के कार्यों में सेवा करते हैं तथा मरणोपरांत शरीरदान कर समाज में भलाई के कार्यों को आगे बढा रहे हैं। इसी कड़ी को जोड़ते हुए ब्लॉक रामपुरथेड़ी-चक्कां के गांव खाजाखेड़ा के पूर्व भंगीदास धनराज इन्सां की धर्मपत्नि राजरानी इन्सां अपनी स्वांसों रूपी पूंजी पूर्ण कर कुल मालिक के चरणों में जा बिराजी। राजरानी इन्सां ने जीते जी यह प्रण लिया था कि वे अपनी मृत्यु के बाद देहदान करेंगी। उनकी अन्तिम इच्छा के अनुसार परिजनों ने उनके पार्थिव शरीर को उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित एफ. एम. मैडिकल कॉलेज इटमादपुर को रिसर्च के लिए दान कर दिया। इसी के साथ ब्लॉक राजरानी इन्सां ब्लॉक की दसवीं देहदानी बनी।</p>
<h2>बेटियों ने अर्थी को कंधा देकर दिया निभाया बेटे का फर्ज</h2>
<p>शरीरदानी राजरानी इन्सां की अन्तिम विदाई के समय समाज से बेटा बेटी के भेदभाव को नकारते हुए उनकी बेटियों रानी इन्सां, अकी इन्सां, गीता इन्सां, बेटे प्रेम इन्सां व अंग्रेज इन्सां ने सामुहिक रूप से अर्थी को कंधा देकर समाज को अनुकरणीय संदेश दिया। इस समय ब्लॉक भंगीदास राजाराम इन्सां ने संगत के साथ विनती भजन बोलकर बहन राजरानी इन्सां की देह को मेडिकल रिसर्च के लिए रवाना किया। इस अवसर पर ब्लॉक भंगीदास राजाराम इन्सा, पूर्व भंगीदास धनराज इन्सां, 15 मैम्बर जगजीत इन्सां, श्रीराम इन्सां, विजय इन्सां, राजेन्द्र इन्सां, गुरजीत इन्सां, भजन लाल इन्सां, भीम सेन इन्सां, शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैलफेयर फोर्स विंग के सदस्य, परिजन, रिश्तेदार, ग्रामिण व बड़ी संख्या में संगत मौजूद रही।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/rajarani-insan-body-donate-for-medical-research/article-7693</link>
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                <pubDate>Thu, 14 Feb 2019 20:05:35 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोलकाता मेडिकल कॉलेज में भीषण आग, 250 मरीज सुरक्षित बाहर निकाले गए</title>
                                    <description><![CDATA[दमकल की 10 गाड़ियां आग पर काबू करने में जुटी कोलकाता (एजेंसी) Edited By Vijay Sharma । पश्चिम बंगाल में कोलकाता मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल के फार्मेसी विभाग में बुधवार सुबह भीषण आग लग गई। सूचना मिलते ही दमकल की 10 गाड़ियों को मौके पर रवाना कर दिया गया। फिलहाल आग पर काबू पाने की कोशिश की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/fire-in-the-pharmacy-store-of-kolkata-medical-college/article-6105"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/fire.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">दमकल की 10 गाड़ियां आग पर काबू करने में जुटी</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता (एजेंसी) Edited By Vijay Sharma ।</strong> पश्चिम बंगाल में कोलकाता मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल के फार्मेसी विभाग में बुधवार सुबह भीषण आग लग गई। सूचना मिलते ही दमकल की 10 गाड़ियों को मौके पर रवाना कर दिया गया। फिलहाल आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है। हॉस्पिटल से करीब 250 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इस हादसे में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की अभी कोई सूचना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह कोलकता के मेडिकल कॉलेज में फार्मेसी स्टोरी में आग लग गई। आग की लपटों को देखकर वहां अफरा-तफरी मच गई। मरीजों और उनके तीमारदारों ने शोर मचाना शुरू किया। इस बीच प्रशासन ने दमकल विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर रवाना कर दी गईं। फिलहाल दमकल की 10 गाड़ियां आग बुझाने में जुटी हैं। स्थानीय पुलिस की टीम भी मौके पर मौजूद है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मेडिकल कॉलेज के सभी मरीज सुरक्षित हैं। बताया जा रहा है कि आग लगने की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए करीब 250 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Oct 2018 10:03:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होम्योपैथिक मेडीकल कॉलेज के छात्रों ने निकाला रोष मार्च</title>
                                    <description><![CDATA[मामला : होम्योपैथिक कॉलेज के प्रबंधकों की लापरवाही के चलते कॉलेज को बैंक द्वारा सील किए जाने का डीएसपी ने प्रबंधकों को विद्यार्थियों की सुरक्षा मुहैया करवाने की चेतावनी अबोहर/सच कहूँ न्यूज (सुधीर अरोड़ा)। होम्योपैथिक कॉलेज के प्रबंधकों की लापरवाही के चलते कॉलेज को बंैक द्वारा सील किए जाने के बाद दर दर भटक रहे कॉलेज […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/homeopathic-medical-college-students-overcome-rage-march/article-4731"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/rosh-copy.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">मामला : होम्योपैथिक कॉलेज के प्रबंधकों की लापरवाही के चलते कॉलेज को बैंक द्वारा सील किए जाने का</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li>डीएसपी ने प्रबंधकों को विद्यार्थियों की सुरक्षा मुहैया करवाने की चेतावनी</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर/सच कहूँ न्यूज (सुधीर अरोड़ा)। </strong>होम्योपैथिक कॉलेज के प्रबंधकों की लापरवाही के चलते कॉलेज को बंैक द्वारा सील किए जाने के बाद दर दर भटक रहे कॉलेज के छात्रों ने आज रोष स्वरूप शहर में रोष मार्च निकाला, जिसमें अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों ने मैनेजमैंट के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद उन्होंने डीएसपी को ज्ञापन सौंपा और कॉलेज प्रिंसीपल व कॉलेज प्रबंधकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। जानकारी के अनुसार बंैक द्वारा शुक्रवार शाम तक पूरे कॉलेज व इसके छात्रावास को ताले लगा दिए जाने से छात्रावास में रहने वाले 125 विद्यार्थियों सहित कॉलेज में पढने वाले कुल 200 छात्र-छात्राएं व 80 स्टाफ सदस्य सड़कों पर आ गए। इधर कॉलेज प्रबंधन ने अपने जिम्मेवारी निभाते हुए इनके रहने खाने का प्रबंधन करने की बजाए वहां से निकल गए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मैनेजिंग कमेटी के खिलाफ कड़ी कार्यवाई करने की मांग</h3>
<p style="text-align:justify;">जिसके बाद दर्जनों छात्राआें ने उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों के घर पनाह ली जबकि अनेक छात्र छात्राआें ने नेहरू पार्क के सामने बने होम्योपैथिक अस्पताल में बिनां सुविधाआें के पूरी रात गुजारी। देश के विभिन्न 12 राज्यों से आकर यहां शिक्षा हासिल कर रहे इन विद्यार्थियों ने उनके भविष्य को अंधकार मय बनाने के विरोध में आज कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ शहर में रोष मार्च निकाला व नारेबाजी करते हुए डीएसपी कार्यायल पहुचें।</p>
<p style="text-align:justify;">डीएसपी ने उनकी बात गंभीरता से सुनते हुए कालेज प्रिंसीपल मनजीत कौर को बुलाया और चेतावनी देते हुए कहा कि रविवार सुबह तक इन बच्चों के रहने, खाने पीने व पढाई का बंदोबस्त किया जाए अन्यथा वे कॉलेज प्रिंसीपल व प्रबंधकों पर मामला दर्ज करने को मजबूर होंगें। इस मौके पर कपिल खत्री, डॉ. विशाल तनेजा, डॉ. हिमाली, डॉ. मनप्रीत, डॉ. सिमर, डॉ. पूनम, डॉ. अनिल मुलड़ी, डॉ. पाल मदान, डॉ. अरविंद के अलावा अन्य छात्र व स्टाफ मौजूद था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/homeopathic-medical-college-students-overcome-rage-march/article-4731</link>
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                <pubDate>Sun, 08 Jul 2018 07:13:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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