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                <title>SC ST Act - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>SC ST Act RSS Feed</description>
                
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                <title>फैसला : एससी/एसटी एक्ट में तुरंत होगी गिरफ्तारी</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने पलटा अपना फैसला, पुराना कानून लागू | SC /ST Act केंद्र सरकार ने समीक्षा याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से पिछले साल के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी केन्द्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद पुराने फैसले को रद्द कर दिया। नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/verdict-arrest-in-sc-st-act-immediatelyverdict-arrest-in-sc-st-act-immediately/article-10574"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/suprim-court.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सुप्रीम कोर्ट ने पलटा अपना फैसला, पुराना कानून लागू | SC /ST Act</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>केंद्र सरकार ने समीक्षा याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से पिछले साल के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी</strong></li>
<li><strong>केन्द्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद पुराने फैसले को रद्द कर दिया।</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने <strong>(SC / ST Act)</strong> अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारण कानून के प्रावधानों को हल्का करने के दो सदस्यीय पीठ के फैसले को मंगलवार को निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति भूषण गवई की पीठ ने केन्द्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद पुराने फैसले को रद्द कर दिया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>गौरतलब है कि न्यायमूर्ति मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>खंडपीठ ने केन्द्र एवं अन्य की पुनर्विचार याचिकाओं को तीन सदस्यीय पीठ के सुपुर्द कर दिया था। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>दो सदस्यीय पीठ ने मार्च 2018 में एससी/एसटी कानून के प्रावधानों को हल्का</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> किया था, जिसे केन्द्र एवं अन्य ने पुनर्विचार का अदालत से अनुरोध किया था। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पिछले साल दिए इस फैसले में शीर्ष अदालत ने माना था कि एससी/एसटी </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी की व्यवस्था के चलते कई बार बेकसूर लोगों को जेल जाना पड़ता है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> कोर्ट ने तुंरत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। इसके खिलाफ सरकार ने पुनर्विचार</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> अर्जी दायर की थी। जिस पर मंगलवार को तीन जजों की बेंच का फैसला आया है।</strong></li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर देशभर में हुआ था हंगामा</h2>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से एससी/एसटी ऐक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी पर रोक और अग्रिम जमानत को मंजूरी दे दी गई थी। तमाम दलित संगठनों समेत कई राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया था। देशभर में फैसले के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे। आगजनी, हंगामा और ट्रेनें रोकी गईं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पहले सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था</h2>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एससी-एसटी ऐक्ट के प्रॉविजन से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। कोर्ट ने कहा था कि वह इस ऐक्ट के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन निदोर्षों को सजा नहीं मिलनी चाहिए। दो जजों की बेंच ने कहा था कि हमारा काम कानूनी बिंदुओं पर बात करना और संविधान के तहत कानून का आकलन करना है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार ने किए थे संशोधन</h2>
<p style="text-align:justify;">व्यापक प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने कोर्ट में एक याचिका दायर की थी और बाद में कोर्ट के आदेश के खिलाफ कानून में आवश्यक संशोधन किए थे। संशोधित कानून के लागू होने पर कोर्ट ने किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई थी। सरकार के इस फैसले के बाद कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Oct 2019 20:22:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एससी-एसटी अधिनियम सवर्णों पर अत्याचार के लिए नहीं : रामदास</title>
                                    <description><![CDATA[रांची 12 अक्टूबर (एजेंसी)- केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले (Ramdas Athawale)ने अनुसूचित जाति (एससी) एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) अधिनियम का दुरुपयोग नहीं किये जाने का आश्वासन देते हुये आज कहा कि यह अधिनियम सवर्णों पर अत्याचार करने के लिए लागू नहीं किया गया है। अठावले ने यहां झारखंड के समाज कल्याण एवं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sc-st-act-torture-upper-castes-ramdas-athawale/article-6234"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/ramdas-athawale.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची 12 अक्टूबर (एजेंसी)-</strong> केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले (<strong>Ramdas Athawale</strong>)ने अनुसूचित जाति (एससी) एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) अधिनियम का दुरुपयोग नहीं किये जाने का आश्वासन देते हुये आज कहा कि यह अधिनियम सवर्णों पर अत्याचार करने के लिए लागू नहीं किया गया है। अठावले ने यहां झारखंड के समाज कल्याण एवं महिला, बाल विकास विभाग के साथ आयोजित बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, हमारी सरकार दलित विरोधी नहीं, यह सबका साथ सबका विकास के सिद्धांत पर काम करने वाली सरकार है।</p>
<p>एससी- एसटी अधिनियम अनुसूचित जाति-जनजाति के सहयोग के लिए बनाया गया है ना कि सवर्णों पर अत्याचार करने के लिए। जो अत्याचार करते हैं उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। मैं सभी सामान्य वर्ग के लोगों को आश्वासन देना चाहता हूं कि इस अधिनियम का कहीं दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज पूरे देश में कई जातियां आरक्षण की मांग कर रही हैं। सरकार इन जातियों को 25 प्रतिशत आरक्षण सामान्य वर्ग के 50 प्रतिशत में से कटौती करके दे। उन्होंने कहा कि इन जातियों को आरक्षण का लाभ देने के लिए एससी-एसटी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को प्राप्त आरक्षण में कटौती न की जाए।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/sc-st-act-torture-upper-castes-ramdas-athawale/article-6234</link>
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                <pubDate>Fri, 12 Oct 2018 17:40:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&amp;#8216;पहले जेल फिर जांच’ के काले कानून के विरोध में बाजार बंद सफल</title>
                                    <description><![CDATA[सर्व समाज के लोगों ने घूम-घूमकर बंद करवाई दुकानें हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। एससी एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में सर्व समाज संघर्ष समिति गुरुवार को सड़क पर उतर आई। ‘पहले जेल फिर जांच’(Pehle Jaanch Fir Jail)के काले कानून का विरोध जताया । समिति के आह्वान पर बाजार बंद का जिला मुख्यालय पर भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/market-closed-successfully-protest-black-law-pehle-jaanch-fir-jail/article-5762"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/h05.jpg" alt=""></a><br /><h2>सर्व समाज के लोगों ने घूम-घूमकर बंद करवाई दुकानें</h2>
<p><strong>हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> एससी एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में सर्व समाज संघर्ष समिति गुरुवार को सड़क पर उतर आई। ‘पहले जेल फिर जांच’(<strong>Pehle Jaanch Fir Jail</strong>)के काले कानून का विरोध जताया । समिति के आह्वान पर बाजार बंद का जिला मुख्यालय पर भी अच्छा-खासा असर दिखा। जंक्शन-टाउन में दोपहर तक चुनिंदा दुकानों को छोड़कर पूरा बाजार बंद रहा। सुबह से ही बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। टाउन में बाजार बंद का व्यापक असर नजर आया। बंद की सूचना से अनभिज्ञ लोग बाजार पहुंचे लेकिन वे दुकानें बंद होने के कारण परेशान होते रहे। जिला मुख्यालय पर बंद को ब्राह्मण समाज, अग्रवाल समाज, व्यापारिक संगठनों, शिक्षण संस्थाओं, सेल टैक्स यूनियन, कपड़ा व्यापारी यूनियन आदि ने समर्थन दिया।</p>
<h2>शहर के निजी स्कूल में भी की छुट्टी</h2>
<p>शहर के निजी स्कूल खुले लेकिन बाजार बंद करवा रहे विभिन्न संगठनों के लोगों के अनुरोध के बाद कुछ स्कूलों में छुट्टी कर दी गई। सामान्य एवं ओबीसी अनारक्षित वर्ग के राजकीय एवं निजी विद्यालयों से जुड़े अध्यापक, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी स्वैच्छिक अवकाश लेकर बंद में सहयोग किया। व्यापारियों ने भी समिति की मांग के समर्थन में अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। इस कारण मंडी में किसी भी कृषि जिंस की बोली नहीं हो पाई। संघर्ष समिति के सदस्यों ने अलग-अलग टोलियां बनाकर बाजार में चक्कर लगाए तथा दुकानदारों से आग्रह कर खुली दुकानें बंद करवाई।</p>
<p>सर्व समाज के लोग जंक्शन में भगत सिंह चौक व टाउन की हिसारिया मार्किट में एकत्रित हुए और बाजुओं पर काली पट्टियां बांध इस काले कानून का विरोध किया। जंक्शन में सौरभ राठौड़, पार्षद महेश शर्मा, गणेश बंसल, राजेश मदान, कालूराम शर्मा, रामचन्द्र महाजनी, विकास शर्मा, एसएन गुप्ता, विजय बलाड़िया, अशोक व्यास, दीपक कुक्कड़, प्रशांत भारतीय, मुकेश मित्तल, दुर्गा प्रसाद शर्मा, भारतभूषण कौशिक, आशु गर्ग, श्याम राजपुरोहित आदि के नेतृत्व में संघर्ष समिति सदस्य शहर के ह्रदयस्थल भगतसिंह चौक पर एकत्रित हुए।</p>
<p>इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने सभी राजनीतिक दलों की ओर से संसद में पास के किए ‘पहले जेल फिर जांच’(<strong>Pehle Jaanch Fir Jail)</strong>के काले कानून का विरोध जताया। उन्होंने कहा कि उक्त काले कानून के पास होने के कारण अब सामान्य वर्ग के किसी भी व्यक्ति से अपनी द्वेषता निकालने के लिए कोई भी एससी एसटी वर्ग का व्यक्ति या अन्य किसी वर्ग का व्यक्ति एससीएसटी के व्यक्ति से मुकदमा करवाकर अपनी द्वेषता निकाल सकेगा। वक्ताओं ने आरोप लगाया गया कि वोटबैंक की राजनीति के चलते सरकार ने उक्त काले कानून को पास कर सामान्य वर्ग के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है।</p>
<p>केंद्र सरकार जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है, लेकिन केंद्र के इस मंसूबे को पूरा नहीं होने दिया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि वोट की राजनीति में देश के सवर्ण और ओसीबी समाज पर थोपे गए काले कानून को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस एक्ट के विरोध में सामान्य वर्ग के जन प्रतिनिधियों को भी साथ देना चाहिए। सभा के बाद समिति सदस्यों ने बाजार में घूम-घूमकर दुकानें बंद करने का आग्रह दुकानदारों से किया। सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस कर्मी तैनात रहे। वहीं टाउन में प्रदीप ऐरी, रिंकू मिश्रा आदि के नेतृत्व में सर्व समाज के लोगों ने बाजार बंद करवाया। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में एससी एसटी के दुरुपयोग को लेकर नया फैसला सुनाया था, लेकिन केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदल दिया। नए एससी-एसटी एक्ट का सर्व समाज की ओर से विरोध किया जा रहा है।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Sep 2018 19:04:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करणी सेना ने एससी/एसटी एक्ट के विरोध में सौंपा ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[ महासचिव विराज ठाकुर ने  एससी/एसटी एक्ट (SC ST Act)के विरोध में केन्द्र सरकार पर साधा निशाना जौनपुर (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के जौनपुर में वीरवार को करणी सेना के नेतृत्व में विभिन्न संगठनो ने अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम(SC ST Act) के विरोध में राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। करणी सेना के प्रदेश महासचिव विराज ठाकुर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/karni-sena-submits-memorandum-against-sc-st-act/article-5285"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/sc-st-act-2.jpg" alt=""></a><br /><h2> महासचिव विराज ठाकुर ने  एससी/एसटी एक्ट (SC ST Act)के विरोध में केन्द्र सरकार पर साधा निशाना</h2>
<p><strong>जौनपुर (एजेंसी)</strong>। उत्तर प्रदेश के जौनपुर में वीरवार को करणी सेना के नेतृत्व में विभिन्न संगठनो ने अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम(<strong>SC ST Act</strong>)</p>
<p>के विरोध में राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। करणी सेना के प्रदेश महासचिव विराज ठाकुर ने कहा कि देश के लिए यह इक तरफा और काला कानून है जिसमें 22 प्रतिशत के लोंगो को खुश करने के लिये 78 प्रतिशत लोंगो के साथ केन्द्र सरकार ने विश्वासघात किया है।</p>
<p>करणी सेना के जिलाध्यक्ष दीपक सिंह सोनू ने कहा इस एक्ट में अगर केन्द्र सरकार ने संशोधन नही किया तो पूरे देश में उग्र आन्दोलन होगा। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश प्रवक्ता सुधांशु सिंह और जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा कि देश में कानून का राज खत्म हो चुका है। लोकतंत्र की जगह केन्द्र सरकार राजतंत्र के पथ पर अग्रसित है।</p>
<p>राष्ट्रीय ब्राम्हण महासंघ के जिला प्रवक्ता परमानन्द चैबे ने कहा,केन्द्र सरकार सवर्णो और पिछड़ों के साथ विश्वासघात किया है। हम लोकसभा चुनाव में भाजपा को बहिष्कृत करते है। कायस्थ सेवा संघ के महामंत्री अमन अस्थाना ने कहा कि यह सामान्य वर्ग के लोंगो के साथ विश्वासघात है, बिना जांच के जेल जाना लोकतंत्र के लिए एकतरफा धब्बा है।</p>
<p>यादव महासंघ के जिलासचिव मुकेश यादव ने कहा कि ये पिछड़ों के साथ अन्याय है। एस.सी./एस.टी. एक्ट में सबसे ज्यादा मुकदमा पिछड़े वर्ग के लोंगो के साथ हुआ है। इस कानून का हम पुरजोर रूप से विरोध करते है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Aug 2018 19:03:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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