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                <title>अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि आपातकाल जैसे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[जनसंख्या विस्फोट से संसाधनों की अपर्याप्तता के कारण उत्पन्न हुई जब भी देश में जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर वैचारिक विमर्श प्रारंभ होता है, तो कुछ लोगों की प्रतिक्रिया इस प्रकार होती है जैसे कि उनका हक छीना जा रहा हो। कुछ लोग इतने असहिष्णु हो जाते हैं मानो की उनके निजी जीवन पर हमला […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/uncontrolled-population-growth/article-6261"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/population.jpg" alt=""></a><br /><h2>जनसंख्या विस्फोट से संसाधनों की अपर्याप्तता के कारण उत्पन्न हुई</h2>
<p style="text-align:justify;">जब भी देश में जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर वैचारिक विमर्श प्रारंभ होता है, तो कुछ लोगों की प्रतिक्रिया इस प्रकार होती है जैसे कि उनका हक छीना जा रहा हो। कुछ लोग इतने असहिष्णु हो जाते हैं मानो की उनके निजी जीवन पर हमला किया जा रहा हो। वहीं, एक बुद्धिजीवी वर्ग इसे धार्मिक रूप – रंग देकर जरूरी मुद्दों के प्रति सामाजिक जागरूकता को भटकाने का प्रयास करता है, लेकिन जनसंख्या बृद्धि की समस्या इन सभी तर्कों से ऊपर है।  जनसंख्या विस्फोट से संसाधनों की अपर्याप्तता के कारण उत्पन्न हुई समस्याओं का असर सब पर पड़ेगा। चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो। जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर देश में बड़ी-बड़ी योजनाएं बनीं। अब तक सरकारें जनसंख्या नियंत्रण के लिए कोई ठोस नीति बनाने के बजाय केवल नारों और स्लोगनों से ही काम चलाते आई हैं। ‘ हम दो हमारे दो ‘ जैसे नारों से लेकर परिवार नियोजन के सरकारी विज्ञापनों से बड़े – बड़े अभिनेता पैसा कमा कर चले गए, लेकिन जनसंख्या वृद्धि पर कोई असर नहीं हुआ।</p>
<h2 style="text-align:justify;">वर्ष 2050 तक देश में चालीस करोड लोग और बढ़ जाएंगें।</h2>
<p style="text-align:justify;">आज जनसंख्या वृद्धि देश की हर समस्या के पीछे का मूल कारण बनती जा रही है। जैसे गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, अशिक्षा स्वास्थ्य सेवाएं, अपराध, स्वच्छ पानी की कमी, इन सब के पीछे भी जनसंख्या बृद्धि एक बड़ा कारण है। देश के पास दुनिया की कुल जमीन का 2.4 फीसद हिस्सा है और इसमें दुनिया की अठारह फीसद आबादी निवास करती है। देश में जमीन के कुल साठ फीसद हिस्से पर खेती होने के बावजूद बीस करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हैं।देश की आबादी लगातार अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण ट्रैफिक जाम भी भविष्य में देश की बड़ी समस्याओं में से एक होगा, क्योंकि जनसंख्या वृद्धि से देश में वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन जनसंख्या वृद्धि के हिसाब से सड़कों का निर्माण नहीं हो रहा है। इसी कारण देश की बढ़ती आबादी का बोझ सड़कों पर आसानी से देखा जा सकता है। वर्ष 1950 में भारत की जनसंख्या 37 करोड़ थी। वर्तमान तक यह आंकड़ा 135 करोड़ के आसपास पहुंच गया होगा। इस वृद्धि से अनुमानत: वर्ष 2050 तक देश में चालीस करोड लोग और बढ़ जाएंगें।</p>
<ul>
<li> जून 2017 में आई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत 2024 तक दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा</li>
<li> देश में 10 से 35 वर्ष के मध्य आयुवर्ग के युवाओं की आबादी लगभग 60 करोड़ है।</li>
<li>इस युवा आबादी को सही दिशा और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो तो, इनके माध्यम से देश रक्षा, चिकित्सा, अभियांत्रिकी में दुनिया का सिरमौर बन सकता है।</li>
<li>सच्चाई यह है कि देश में केवल अनपढ़ युवाओं की ही आबादी लगभग तीस करोड़ है और देश में दस करोड़ युवा ऐसे हैं, जो शिक्षित होने के बावजूद स्किल्ड नहीं है।</li>
<li> बर्ष 2030 तक दस करोड नई नौकरियों की जरूरत होगी।</li>
<li>इसके लिए इतने स्किल्ड युवा तैयार करना भी एक चुनौती होगी। बढ़ती जनसंख्या लोगों की सोच और तंत्र की कमियों को दशार्ती है</li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">जापान की राजधानी टोक्यो सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर</h2>
<p style="text-align:justify;">जापान की राजधानी टोक्यो सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है। टोक्यो की जनसंख्या तीन करोड़ सत्तर लाख है। जबकि वर्तमान में राजधानी दिल्ली की जनसंख्या दो करोड़ नब्बे लाख है। लेकिन एक अनुमान के मुताबिक लगभग दस वर्षों में ही दिल्ली की जनसंख्या टोक्यो को भी पीछे छोड़ देगी। ऐसा नहीं है कि विस्फोटक रूप से जनसंख्या वृद्धि केवल दिल्ली में ही हो रही है। बल्कि पूरे देश की हालत ऐसी ही है। वैसे तो पूरी दुनियां की जनसंख्या में वृद्धि हो रही है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रभाव भारत पर पड़ रहा है। ग्रामीण आबादी के रोजगार की तलाश में लगातार शहरों की ओर पलायन करने से, शहरी लोगों की जिंदगी भी मुश्किल बनती जा रही है। इसके लिए भी सरकारी नीतियां ही जिम्मेदार हैं। आजादी के 70 वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकारें कोई ऐसी नीति नहीं बना पाईं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><ul>
<li style="text-align:justify;"> देश में लोग गांव छोड़कर शहरों में पलायन कर रहे हैं</li>
<li style="text-align:justify;">देश की सरकारें गांव में रोजगार, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कर पाईं।</li>
<li style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2050 तक दुनिया की 68फीसद आबादी शहरों में रहने लगेगी।</li>
<li style="text-align:justify;">वर्तमान में लगभग पचपन फीसद जनसंख्या शहरों में निवास करती है।</li>
<li style="text-align:justify;">देश की आबादी इसी तरह विस्फोटक रूप से बढ़ती रहेगी, तो सबसे पहले दिल्ली में आपातकाल जैसे हालात पैदा होंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">2021 का मास्टर प्लान लागू हो जाना चाहिए था। इस  के अनुसार 2021 तक दिल्ली में हर आदमी को रहने के लिए चालीस स्क्वायर मीटर जगह की आवश्यकता होगी।</li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">2030 तक दिल्ली दुनियां का सबसे अधिक आबादी वाला शहर बन जाएगा</h2>
<p style="text-align:justify;">जनसंख्या वृद्धि में दिल्ली सबसे आगे है। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2030 तक दिल्ली दुनियां का सबसे अधिक आबादी वाला शहर बन जाएगा। देश में जब भी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर नीति निर्माण की चर्चा होती है तो कुछ बुद्धिजीवी चीन की जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहन देने की नीति का उदाहरण देकर, देश की जनसंख्या वृद्धि को उचित ठहराते हैं। इस परिपेक्ष्य में जनसंख्या नीति को लेकर भारत – चीन की तुलना उचित नहीं है। चीन की जनसंख्या नीति इसलिए लचीली है, क्योंकि चीन में कामकाजी युवाओं की आवश्यकता अनुसार अपर्याप्तता बढ़ती जा रही है। चीन ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2060 तक 60 वर्ष से ऊपर के प्रति दो बुजुर्गों पर तीन युवा होगें। ऐसे में संकट यह होगा कि युवा नौकरी करेंगे या बुजुर्गों की सेवा करेंगे। जबकि भारत एक युवा देश है जिसकी वर्तमान युवा आबादी साठ फीसद से अधिक है। ऐसे में भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए भारत के संदर्भ में चीन की जनसंख्या नीति अनुपयुक्त है। चीन ने अपनी बढ़ती हुई आबादी को संसाधन मानकर, लोगों को अर्थव्यवस्था के विकास में भागीदार बनाया। इसलिए चीन आज दुनियां का सबसे बड़ा उत्पादक है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>अश्विनी शर्मा</strong></p>
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<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Oct 2018 09:06:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>जीडीपी बढ़ी फिर भी रोजगार विहीन विकास</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले हफ्ते सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की बढ़ोतरी को लेकर अच्छी खबर आई। चालू वित्त वर्ष के प्रथम तिमाही में जीडीपी विकास दर अनुमान से कहीं अधिक 8.2% रही। लेकिन इस ऐतिहासिक विकास दर के दौरान रोजगार के आँकड़े चिंतनीय रहे। इसी दौरान रोजगार में 1% की कमी आई है। तिमाही की जीडीपी संगठित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/gdp-growth-even-after-unemployment/article-5793"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/artical.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले हफ्ते सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की बढ़ोतरी को लेकर अच्छी खबर आई। चालू वित्त वर्ष के प्रथम तिमाही में जीडीपी विकास दर अनुमान से कहीं अधिक 8.2% रही। लेकिन इस ऐतिहासिक विकास दर के दौरान रोजगार के आँकड़े चिंतनीय रहे। इसी दौरान रोजगार में 1% की कमी आई है। तिमाही की जीडीपी संगठित क्षेत्रों के प्रदर्शन पर आधारित होती है। दूसरी तिमाही में भी रोजगार में तेजी से गिरावट आई है। जुलाई 2017 से जुलाई 2018 के बीच काम करने वालों की संख्या में 1.4% की गिरावट आई है। अगस्त में 1.2% की गिरावट है। नवंबर 2017 से ही रोजगार में गिरावट आती जा रही है। सबसे चिंता जनक मामला यह है कि रोजगार में गिरावट तब जारी है,जब लेबर फोर्स बढ़ती जा रही है। लेबर फोर्स बढ़ने से आशय है कि काम के लिए ज्यादा लोगों की उपलब्धता होते जाना। नोटबंदी के बाद लेबर फोर्स सिकुड़ गया था। लोगों को काम मिलने की उम्मीद नहीं रही थी,इसलिए वे लेबर मार्केट से चले गए थे।<br />
वर्तमान में बैंकिंग व्यवस्था चरमराई हुई है। महंगाई की चिंता में भारतीय रिजर्व बैंक ने लंबे अरसे के बाद नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी शुरू की है। रुपए की स्थिति इतिहास के किसी भी समय के मुकाबले सबसे खराब है। व्यापार संतुलन ठीक करने की तमाम कोशिशें नाकाम रही हैं। ऐसे में रोजगार के घटते आँकड़े अर्थव्यवस्था के गंभीर संकट को प्रतिबिंबित करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रोजगार को लेकर कुछ और भी आँकड़े हैं, जो और भी डरावने हैं। 2014-15 में 8 ऐसी कंपनियाँ हैं,जिनमें से हर किसी ने औसत 10,000 लोगों को काम से निकाला है। इसमें प्राइवेट और सरकारी कंपनियाँ दोनों हैं। वेदांता ने 49,141 लोगों की छंटनी की,तो फ्यूचर एंटरप्राइज ने 10,539 लोगों की। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र की सुप्रसिद्ध कंपनी फोर्टिस हेल्थकेयर ने 18,000 लोगों की छंटनी की। टेक महेंद्रा ने 10,470 कर्मचारी कम किए हैं। सेल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है,इसने 30,413 लोगों की छंटनी की है,तो बीएसएनएल ने 12,765 लोगों को काम से निकाला। इंडियन आॅयल कॉरपोरेशन ने भी 11,924 लोगों की छंटनी की। इस तरह केवल तीन सरकारी कंपनियों ने करीब 55,000 नौकरियां कम की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएमआईई नामक संस्था लगातार रोजगार के आँकड़ों पर नजर रखती है। इस संस्था के अनुसार 2013-14 में 1443 कंपनियों ने 67 लाख रोजगार देने के आँकड़े दिए,जबकि 2016-17 में 3,441 कंपनियों ने 84 लाख रोजगार देने का डेटा दिया है। इस हिसाब से देखें तो कंपनियों की संख्या में दुगुनी से भी ज्यादा वृद्धि के बावजूद रोजगार के आँकड़ों में खास वृद्धि नहीं दिखती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आँकड़े भी रोजगार को लेकर चिंता प्रकट करने वाले हैं। पिछले साल सितंबर से इस साल मई के बीच कितने कर्मचारी इससे जुड़े हैं,इसकी समीक्षा की गई है। पहले अनुमान बताया गया था कि इस दौरान 45 लाख कर्मचारी जुड़े। समीक्षा के बाद इसमें 12.4% की कमी आ गई। इस तरह अब यह संख्या 39 लाख हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">लघु एवं मध्यम उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। नोटबंदी ने लघु एवं मध्यम उद्योगों की कमर तोड़ दी। आरबीआई के अनुसार मार्च 2017 से मार्च 2018 के बीच उनके लोन न चुकाने की क्षमता दुगुनी हो गई है। मार्च 2017 तक लोन न चुकाने का मार्जिन 8,249 करोड़ था,जो मार्च 2018 तक बढ़कर 16,111 करोड़ हो गया। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है, और अब तो रूपया डॉलर के मुकाबले 72.12 के स्तर को भी पार कर गया है। इस तरह रूपया लगातार कमजोर हो रहा है। ऐसे में आवश्यक है कि हमारी अर्थव्यवस्था नियार्तोंन्मुखी बने, लेकिन भारत का निर्यात लंबे समय से ठहराव की दशा में है। इस स्थिति में देश का कपड़ा उद्योग संपर्ू्ण अर्थव्यवस्था में प्राण फूंक सकती थी। मौजूदा वर्ष देश के वस्त्र निर्यात के लिए अच्छा साबित नहीं हो रहा है। क्लोथिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया(सीएमआई) के आँकड़ों के अनुसार इस साल अप्रैल और मई में वस्त्र निर्यात पिछले वर्ष के समान महीनों की तुलना में क्रमश:23 और 17 प्रतिशत गिरा। वर्ष 2017-18 में भी इस क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर रहा था और पूरे साल के दौरान देश के वस्त्र निर्यात में 4% की कमी आई। सरकार इसके कमजोर प्रदर्शन के लिए यूरोप और अमेरिका में माँग में कमी को मानती है। लेकिन अगर उदाहरणों को देखा जाए तो समस्या वैश्विक बाजारों की स्थिति की नहीं है,बल्कि उसका संबंध देश के परिस्थितियों से है।</p>
<p style="text-align:justify;">उदाहरण के लिए जरा वियतनाम पर विचार कीजिए,जिसके वस्त्र निर्यात में इस वर्ष अब तक 14% की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। पिछले वित्त वर्ष में जहाँ भारतीय वस्त्र निर्यात में 4% की गिरावट दर्ज की गई ,वहीं बांग्लादेश ने इसी अवधि में तैयार वस्त्रों के निर्यात के जरिए 9 फीसदी की राजस्व वृद्धि हासिल की। इसके पहले बांग्लादेश में कपड़ा एवं वस्त्र मिलों के बुनियादी ढ़ांचे में जबरदस्त सुधार किया गया ताकि उच्च सुरक्षा मानकों का पालन किया जा सके। मई 2018 में जब देश का वस्त्र निर्यात 17% गिरा तो इसी अवधि में श्रीलंका का वस्त्र निर्यात में सालाना आधार पर 9% की वृद्धि हुई। अप्रैल में जरूर उसके वस्त्र निर्यात में 4% की गिरावट आई थी,लेकिन फिर भी वह भारत की 23% गिरावट से बहुत कम थी। उद्योग जगत एवं सरकार ने कपड़ा उद्योग के घटते निर्यात के लिए अंतरराष्ट्रीय स्थितियों को जिम्मेवार माना है। लेकिन वियतनाम, बांग्लादेश एवं श्री लंका के उदाहरणों से स्पष्ट है कि भारत में कपड़ा उद्योग के प्रतिस्पर्धा की ढ़ाचागत कमी है और इसकी मांग की परिस्थितियों से कोई लेना देना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">वियतनाम के कपड़ा उद्योग की निर्यात वृद्धि के लिए हम लोग तर्क दे सकते हैं कि आसियान के टाइगर इकॉनमी के कारण यह संभव है। लेकिन बांग्लादेश और श्री लंका से भी भारतीय कपड़ा उद्योग का पिछड़ जाना, इसके कई गंभीर मूलभूत समस्याओं की ओर हमारा ध्यानाकर्षण कर रहा है। दरअसल सरकार को समझना होगा कि रोजगार विहीनता विकास हमें आर्थिक असमानता के गहरी खाई की ओर अग्रसर करेगी। हमें विकास को रोजगारपरक बनाना होगा। इसके लिए आवश्यक है कि सरकार रोजगार प्रदान करने वाले विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान करे तथा उसे प्राथमिकता भी प्रदान करें। उद्योग जगत की यह शिकायत भी है कि वस्तु एवं सेवा कर के आगमन के बाद से करों की मामलों में उसकी स्थिति थोड़ी कमजोर हुई है। कपड़ा और वस्त्र उद्योग के साथ दिक्कत यह भी है कि हमारी फैक्टरियां प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में निहायत छोटी हैं। इससे लागत बढ़ती है और छोटे आॅर्डर से निपटने या नई तरह की इन्वेट्री तैयार करने में दिक्कत होती है। आॅकड़े बताते है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के स्वरोजगार में खासी कमी आई है और उसके स्थानों पर दिहाड़ी मजदूरों की संख्या में वृद्धि हुई है। एक तरफ जीडीपी तेजी से बढ़ रही है,लेकिन रोजगार में वृद्धि तो दूर कमी ही दिखाई दे रही है। तो फिर, इसे रोजगार विहीन विकास कहना अनुचित नहीं होगा। आवश्यक है कि हमलोग अपने विकास को रोजगारोन्मुखी भी बनाएं।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>राहुल लाल</strong></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Sep 2018 08:33:41 +0530</pubDate>
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                <title>जनसंख्या वृद्धि ने रोकी विकास की रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[बाल मुकुन्द ओझा  बढ़ती जनसंख्या के खतरों से जन साधारण को आगाह करते हुए लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। आज विश्व की जनसंख्या सात अरब 63 करोड़ से ज्यादा है। अकेले भारत की जनसंख्या लगभग 1 अरब 35 करोड़ के आसपास है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/population-growth-stops-progress/article-4782"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/populesion.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बाल मुकुन्द ओझा </strong></p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती जनसंख्या के खतरों से जन साधारण को आगाह करते हुए लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। आज विश्व की जनसंख्या सात अरब 63 करोड़ से ज्यादा है। अकेले भारत की जनसंख्या लगभग 1 अरब 35 करोड़ के आसपास है। भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। आजादी के समय भारत की जनसंख्या 33 करोड़ थी जो आज चार गुना तक बढ़ गयी है। परिवार नियोजन के कमजोर तरीकों, अशिक्षा, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के अभाव, अंधविश्वास और विकासात्मक असंतुलन के चलते आबादी तेजी से बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में जिस तेज दर से विश्व की आबादी बढ़ रही है उसके हिसाब से विश्व की आबादी में प्रत्येक साल आठ करोड़ लोगों की वृद्धि हो रही है और इसका दबाव प्राकृतिक संसाधनों पर स्पष्ट रूप से पड़ रहा है, इतना ही नहीं, विश्व समुदाय के समक्ष माइग्रेशन भी एक समस्या के रूप में उभर रहा है, क्योंकि बढ़ती आबादी के चलते लोग बुनियादी सुख-सुविधा के लिए दूसरे देशों में पनाह लेने को मजबूर हैं।भारत की पिछले दशक की जनसंख्या वृद्धि दर 17.64 प्रतिशत है। विश्व की कुल आबादी का आधा या कहें इससे भी अधिक हिस्सा एशियाई देशों में है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन, भारत और अन्य एशियाई देशों में शिक्षा और जागरुकता की कमी की वजह से जनसंख्या विस्फोट के गंभीर खतरे साफ दिखाई देने लगे हैं। स्थिति यह है कि अगर भारत ने अपनी जनसंख्या वृद्धि दर पर रोक नहीं लगाई तो वह 2030 तक दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा। सम्पूर्ण विश्व में चीन को अपनी 1.42 अरब जनसंख्या के चलते विश्व में प्रथम स्थान हासिल है। वहीं दूसरी ओर भारत भी अपनी 1.35 अरब जनसंख्या के साथ विश्व में दूसरे नंबर पर है। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि अगर भारत की जनसंख्या इसी दर से बढ़ती रही तो 2030 तक उसे विश्व में प्रथम स्थान हासिल हो जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विभिन्न अध्ययनों से यह पता चला है कि सन 2025 तक भारत चीन को भी पछाड़ देगा और विश्व का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। इस तथ्य के बावजूद कि यहां जनसंख्या नीतियां, परिवार नियोजन और कल्याण कार्यक्रम सरकार ने शुरू किए हैं और प्रजनन दर में लगातार कमी आई है पर आबादी का वास्तविक स्थिरीकरण केवल 2050 तक ही हो पाएगा। उच्च जन्मदर और बेहतर सफाई व स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते घट रही मृत्यु दर उच्च जनसंख्या वृद्धि दर की मुख्य वजहें हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी आबादी में अभी भी हर दिन पचास हजार की वृद्धि हो रही है । इतनी बड़ी जनसंख्या को भोजन मुहैया कराने के लिए यह आवश्यक है कि हमारा खाद्यान्न उत्पादन प्रतिवर्ष 54 लाख टन से बढ़े जबकि वह औसतन केवल 40 लाख टन प्रतिवर्ष की दर से ही बढ़ पाता है। जनसंख्या वृद्धि के दो मूल कारण अशिक्षा एवं गरीबी है। लगातार बढ़ती आबादी के चलते बड़े पैमाने पर बेरोजगारी तो पैदा हो ही रही है, कई तरह की अन्य आर्थिक और सामाजिक समस्याएं भी पैदा हो रही हैं । भारत के सामने अनेक समस्याएँ चुनौती बनकर खड़ी हैं। जनसंख्या-विस्फोट उनमें से सर्वाधिक है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अरब भारतीयों के पास धरती, खनिज, साधन आज भी वही हैं जो 50 साल पहले थे परिणामस्वरूप लोगों के पास जमीन कम, आय कम और समस्याएँ अधिक बढ़ती जा रही हैं भारत के पास विश्व की समस्त भूमि का केवल 2.4 प्रतिशत भाग ही है जबकि विश्व की 16.7 प्रतिशत जनसंख्या भारत में निवास करती है। जनसंख्या में वृद्धि होने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों पर और भार बढ़ जाएगा। जनसंख्या दबाव के कारण कृषि के लिए व्यक्ति को भूमि कम उपलब्ध होगी जिससे खाद्यान्न, पेय जल की उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, इसके अलावा लाखों लोग स्वास्थ्य और शिक्षा के लाभों एवं समाज के उत्पादक सदस्य होने के अवसर से वंचित हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आधे बिलियन से अधिक भारतीय 25 वर्ष से कम आयु के हैं। जनसंख्या वृद्धि एक नयी चुनौती बनकर हमारे सामने आई है और आज भी इस पर काबू पाने में सरकार को कठिनाई हो रही है। जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम देश को भोगने पड़ रहे हैं। बढ़ती जनसंख्या की दुश्वारियां सिर चढ़कर बोलने लगी हैं। भूखों की संख्या निरंतर बढ़ रही हैं। विकास कार्य सिकुड़ रहे हैं। रोटी, कपडा और मकान की बुनियादी सुविधाओं की बात करना बेमानी हो गया है। विकास का स्थान विनाश ने ले लिया है। अधिक जनसंख्या के कारण बेरोजगारी की विकराल समस्या उत्पन्न हो गयी है। लोगों के आवास के लिए कृषि योग्य भूमि और जंगलों को उजाड़ा जा रहा है । इससे बचने का एक मात्र उपाय यही है की हम येन केन प्रकारेण बढ़ती आबादी को रोकें। अन्यथा विकास का स्थान विनाश को लेते अधिक देर नहीं लगेगी।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Jul 2018 02:57:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जनता की आकांक्षायें पूरा करना हमारा लक्ष्य: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[ सरकार की योजनाओं और आर्थिक वृद्धि दर बढ़ाने पर की चर्चा धरने पर बैठे केजरीवाल नीति आयोग की बैठक में नहीं पहुंचे नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर दोहरे अंकों में पहुंचाने को एक बड़ी चुनौती करार देते हुए रविवार को कहा कि जनता की आकांक्षायें पूरा करना केंद्र और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/discussion-on-meeting-of-policy-commission-increasing-economic-growth/article-4252"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/pm-modi.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;"> सरकार की योजनाओं और आर्थिक वृद्धि दर बढ़ाने पर की चर्चा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>धरने पर बैठे केजरीवाल नीति आयोग की बैठक में नहीं पहुंचे</strong><br />
<strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर दोहरे अंकों में पहुंचाने को एक बड़ी चुनौती करार देते हुए रविवार को कहा कि जनता की आकांक्षायें पूरा करना केंद्र और राज्य सरकारों का लक्ष्य होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी ने राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक भवन में नीति आयोग की संचालन परिषद की चौथी बैठक के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2017 – 18 की चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गयी है लेकिन अब इसे दोहरे अंकों तक ले जाना एक बड़ी चुनौती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। प्रधानमंत्री ने वस्तु एवं सेवाकर को लागू करने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सहकारी संघवाद का बेहतरीन उदाहरण है। जटिल मुद्दों पर ‘टीम इंडिया’ की भावना परिलक्षित हुई है। मुख्ममंत्रियों की विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वच्छ भारत अभियान, डिजीटल लेन देन और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर बनी समिति और उपसमितियो के सुझावों को केंद्र सरकार और विभिन्न मंत्रालयों ने लागू किया है। संचालन परिषद देश में ऐितहासिक परिवर्तन लाने का एक सशक्त माध्यम बन सकती है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।</p>
<h1 style="text-align:justify;"> सरकार की योजनाओं के बारे में भी बताया</h1>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 1.5 लाख हेल्थ सेंटर खोले गए हैं। 10 करोड़ गरीब परिवारों को हर साल 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा। – समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकार सभी बच्चों की पढ़ाई पर जोर दे रही है। मुद्रा योजना, जन-धन योजना और स्टेंड अप इंडिया जैसी योजनाओं का भी लोगों को लाभ मिला है।<br />
ग्राम स्वराज अभियान को नए तरह से लागू किया गया है। इसमें 45 हजार गांवों को शामिल किया गया है</p>
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<p> </p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Jun 2018 16:10:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>70 प्रतिशत विकास कार्य पूर्ण: नागवा</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाईल वैन को हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना राज्य सरकार सभी के विकास हेतु प्रतिबद्ध सुराज संकल्प यात्रा के वादे किए जाएंगे पूरे राज्य सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतार कर जनता को किया लाभान्वित खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हेतु जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों से सहयोग की अपील Sikar, SachKahoon News:  राज्य सरकार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/completed-70-percent-growth-nagwa/article-507"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/photo-sikar.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>मोबाईल वैन को हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना</strong></li>
<li><strong>राज्य सरकार सभी के विकास हेतु प्रतिबद्ध</strong></li>
<li><strong>सुराज संकल्प यात्रा के वादे किए जाएंगे पूरे </strong></li>
<li><strong>राज्य सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतार कर जनता को किया लाभान्वित</strong></li>
<li><strong>खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हेतु जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों से सहयोग की अपील</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Sikar, SachKahoon News:</strong>  राज्य सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मंगलवार को डाक बंगले से मोबाईल वैन को भूदान बोर्ड के अध्यक्ष रामनारायण नागवा, धोद विधायक गोरधन वर्मा, सीकर विधायक रतनलाल जलधारी, जिला प्रमुख अपर्णा रोलन, नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष हरीराम रणवां ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। भूदान बोर्ड के अध्यक्ष रामनारायण नागवा ने कहा कि राज्य सरकार ने सफलता पूर्वक तीन वर्ष पूर्ण कर लिए हंै। राज्य सरकार योजनाबद्ध तरीके से गांव-गांव, ढ़ाणी-ढ़ाणी में विकास कार्यों के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने प्रदेश में सड़क, शिक्षा, चिकित्सा, विद्युत सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से जनता को लाभ पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों में से 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुके हंै। बाकी कार्यों को शीघ्र ही पूर्ण करने के प्रयास किए जाएंगे। राज्य सरकार ने जनता के विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास किया है तथा सुराज संकल्प यात्रा में जनता से जो वायदे किए थे, उन्हें पूरा करने का भरसक प्रयास किया जाएगा।<br />
उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करने के लिए उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों को सहयोग की अपील की। नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष हरीराम रणवां ने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को देने के लिए मोबाईल वैन को रवाना किया गया है। इन योजनाओं एवं कार्यों को जनता के बीच पहुंचाना है। इन योजनाओं को पढ़कर अनेक योजनाओं से लाभान्वित हो सकते हैं। वहीं सीकर विधायक रतनलाल जलधारी ने कहा कि जन-धन योजना, स्वच्छ भारत अभियान, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतार कर जनता को लाभान्वित किया गया है। सरकार के विकास कार्यों एवं योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए मोबाईल वैन को रवाना किया गया है।</p>
<p><strong>इस अवसर पर इनकी रही उपस्थिति: </strong><br />
इस अवसर पर अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रकाश चन्द चौधरी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी केएल बाडेतिया, उपखण्ड अधिकारी सीकर अनुपम कायल, कोषाधिकारी लीलाधर, संयुक्त निदेश्क पशुपालन डॉ. जीएल लूणियां, उपनिदेशक प्रमोद कुमार, एडीईओ अरूण माथुर, सांख्यिकी सहायक निदेशक अरविन्द सामौर, राजकु मार जोशी, पवन शर्मा, अशोक चौधरी, सीओ स्काऊट बंसत लाटा, नेहरू युवा केन्द्र समन्वयक गजेन्द्र सिंह शेखावत, पार्षद, जिला स्तरीय अधिकारीगण, मीडियाकर्मी सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Dec 2016 00:35:22 +0530</pubDate>
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