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                <title>Hindi language - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Hindi Language Mandatory In Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार का हिंदी भाषा को लेकर बड़ा निर्णय: तत्काल प्रभाव से हिंदी होगी अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[पहली से पाँचवीं तक मराठी और अंग्रेजी माध्यम में हिंदी होगी तीसरी भाषा Hindi Language Mandatory In Maharashtra: मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में भाषा नीति को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य के मराठी और अंग्रेजी माध्यम के सभी विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/hindi-language-will-be-compulsory-with-immediate-effect-in-maharashtra/article-72274"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/devendra-fanandvis-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 class="ai-optimize-11">पहली से पाँचवीं तक मराठी और अंग्रेजी माध्यम में हिंदी होगी तीसरी भाषा</h3>
<p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">Hindi Language Mandatory In Maharashtra: मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में भाषा नीति को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य के मराठी और अंग्रेजी माध्यम के सभी विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य किया जाएगा। इस निर्णय की आधिकारिक अधिसूचना बुधवार को जारी कर दी गई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल अध्ययन के स्तर पर लागू होगा और इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषायी विविधता और राष्ट्रभाषा से जोड़ना है। आदेश के अनुसार, सभी माध्यमों के स्कूलों में मराठी एक अनिवार्य भाषा बनी रहेगी और इसकी व्यवस्था राज्य शिक्षा विभाग द्वारा सुनिश्चित की जाएगी। Hindi Language News</p>
<h3 class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;">अन्य भारतीय भाषाओं के लिए विकल्प भी मौजूद</h3>
<p class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;">हालांकि यदि विद्यार्थी हिंदी के स्थान पर अन्य किसी भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें यह विकल्प भी दिया गया है। बशर्ते कि उस कक्षा में कम से कम 20 विद्यार्थी उस वैकल्पिक भाषा को पढ़ने की इच्छा व्यक्त करें। ऐसे में उस भाषा को पढ़ाने के लिए एक विशेष शिक्षक उपलब्ध कराया जाएगा। यदि शिक्षक की व्यवस्था संभव न हो तो वह भाषा ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जाएगी।</p>
<p class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि अन्य माध्यमों के विद्यालयों में भी कक्षा 1 से 5 तक तीन भाषाएं अनिवार्य होंगी—विद्यालय का माध्यम, मराठी और अंग्रेजी। वहीं, कक्षा 6 से 10 के लिए भाषायी ढांचा राज्य पाठ्यक्रम रूपरेखा और स्कूल मार्गदर्शिका के अनुसार तय किया जाएगा।</p>
<h3 class="ai-optimize-10" style="text-align:justify;">तत्काल प्रभाव से लागू होगा निर्णय</h3>
<p class="ai-optimize-10" style="text-align:justify;">राज्य सरकार ने यह भी बताया कि यह नई नीति तत्काल प्रभाव से राज्यभर में लागू होगी और इसका डिजिटल आदेश सरकारी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। आदेश का कोड नंबर 202506172233593421 है। यह अधिसूचना डिजिटल हस्ताक्षर सहित विधिवत जारी की गई है। Hindi Language News</p>
<p class="ai-optimize-13"><a title="Axiom-4 mission postponed: एक्सिओम-4 मिशन एक बार फिर टला, लॉन्चिंग की नई तारीख की गई तय" href="http://10.0.0.122:1245/axiom-4-mission-postponed-again-new-launch-date-fixed/">Axiom-4 mission postponed: एक्सिओम-4 मिशन एक बार फिर टला, लॉन्चिंग की नई तारीख की गई तय</a></p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Jun 2025 13:46:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Hindi Language: भारत के अलावा इन देशों में भी बोली जाती है हिंदी, एक की तो है आधिकारिक भाषा, पढ़े पूरी डिटेल</title>
                                    <description><![CDATA[Hindi Language: हिंदी हमारे भारत देश की प्रमुख भाषा हैं, या ये कहें कि हिंदी भारत की राजभाषा हैं। हर भाषा में से हिंदी भाषा का इस्तेमाल भारत में सबसे ज्यादा किया जाता हैं, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि भारत के अलावा और किन देशों में हिंदी भाषा बोली जाती हैं? और इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/apart-from-india-hindi-is-also-spoken-in-these-countries/article-63141"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/hindi-language.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Hindi Language: हिंदी हमारे भारत देश की प्रमुख भाषा हैं, या ये कहें कि हिंदी भारत की राजभाषा हैं। हर भाषा में से हिंदी भाषा का इस्तेमाल भारत में सबसे ज्यादा किया जाता हैं, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि भारत के अलावा और किन देशों में हिंदी भाषा बोली जाती हैं? और इस भाषा का इस्तेमाल किया जाता हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल हिंदी विश्व में चौथी ऐसी भाषा हैं, जिसे सबसे ज्यादा लोग बोलते हैं। वहीं आंकड़ो के मुताबित वर्तमान में भारत में 43.63 फीसदी लोग हिंदी भाषा का ही इस्तेमाल करते हैं। वहीं पूरे विश्व में तकरीबन 80 करोड़ लोग ऐसे हैं, हिंदी भाष को बोलने के साथ-साथ समझ भी सकते हैं, इतना ही नहीं कई देशों मे लोग हिंदी भाषा का इस्तेमाल स्कूलों से लेकर ऑफिस तक करते हैं। इसी के कारण हिंदी इतनी लोकप्रिय भाषा हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/have-you-started-wearing-glasses-in-your-youth-then-eat-these-things-by-mixing-them-in-ghee/">Healthy Eyes: जवानी में ही आ गई चश्मा लगाने की नौबत? तो घी में मिलाकर खाएं ये चीजें</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">इन देशों में बोली जाती हैं हिंदी भाषा | Hindi Language</h3>
<p style="text-align:justify;">अधिकतर लोग ये सोचते हैं कि सिर्फ भारत देश में हिंदी भाषा बोली जाती हैं, लेकिन ये सरासर गलत हैं, आपको बता दें कि भारत के बाहर हिंदी जिन देशों में बोली जाती हैं, उनमें पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, म्यांमार, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, चीन, जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, मॉरिशस, यमन, युगांडा और त्रिनाड एंड टोबैगो, कनाडा आदि देश शामिल हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यहां है हिंदी भाषा का बोलबाल | Hindi Language</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि फ्रिजी दक्षिण प्रशांत महासागर के मेलोनेशियाका वह द्वीप देश हैं, जहां कि आधिकारिक भाषा ही हिंदी हैं। दरअसल भारत की तरह ही फिजी भी ब्रिटेन सरकार की गुलामी का शिकार रहा हैं, जब ब्रिटेन ने इस द्वीप को अपने नियंत्रण में लेकर इसे अपना एक उपनिवेश बना लिया था, तब ब्रिटिश अक्सर भारतीय मजदूरों को यहां ठेके पर गन्ने की खेती में काम करने के लिए लेकर गए थें, यहां अग्रेजी, फ़िजी हिंदी आधि कई भाषाएं बोली और प्रयोग की जाती हैं, यहां बोली जाने वाली हिंदी अवधी भाषा का ही स्वरूप हैं, फिजी में अवध क्षेत्र और रामायण का बोली में बहुत प्रभाव हैं, अवध में प्रयोग होने वाली शब्दावली आज भी यहां ज्यों के त्यों ही प्रचलित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं द इकोनोमिस्ट के मुताबिक 1977 में 255000 की संख्या के साथ फिजी मूल के नागरिक अल्पसंख्यक हो गए थे, 600000 की कुल जनसंख्या में से लगभग आधे नागरिक भारतीय मूल के थे, जबकि शेष चीनी, यूरोपीय और मिश्रित वंश के हैं, हिंदी की लोकप्रियता अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया में बढ़ रही हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Oct 2024 09:58:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Hindi Language: अब विदेशियों पर चढ़ा हिंदी का खुमार!</title>
                                    <description><![CDATA[हिसार (सच कहूँ न्यूज)। हिंदी भाषा अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह एक विशिष्ठ भाषा है, जो सभी को आत्मीयता से अपने साथ जोड़ती है। हिंदी का प्रचार-प्रसार विदेशों तक है। विदेशी लोग भी आमजन जीवन में हिंदी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए हमे भी अपनी मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hisar/now-foreigners-are-crazy-about-hindi/article-62182"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/features-of-hindi-make-it-language-of-communication.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हिसार (सच कहूँ न्यूज)। हिंदी भाषा अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह एक विशिष्ठ भाषा है, जो सभी को आत्मीयता से अपने साथ जोड़ती है। हिंदी का प्रचार-प्रसार विदेशों तक है। विदेशी लोग भी आमजन जीवन में हिंदी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए हमे भी अपनी मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए। हिंदी भाषा देश का स्वाभिमान है। ये शब्द जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज दयाल ने ‘हिंदी दिवस ‘ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर कहे। Hindi Language</p>
<h3>”हिंदी भाषा देश का स्वाभिमान, हिंदी का महत्वपूर्ण स्थान”!</h3>
<p style="text-align:justify;">गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार के जनसंचार विभाग द्वारा आज हिंदी दिवस मनाया गया। हिंदी भाषा की प्राथमिकताओं को बताते हुए विभाग के प्रो. विक्रम कौशिक ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमें अपने दैनिक जीवन में हिंदी को अपनाना होगा। मीडिया के विद्यार्थियों को भाषा से खास प्रेम होना चाहिए। इसमें हजारों शब्द हैं, जिनका प्रयोग सही ढंग से करना आना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य भाषा के प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाना है। जिससे वे मीडिया के के क्षेत्र में कामयाब हो सकें। इस कार्यक्रम के आयोजन में आयुषी, विरेन्द्र, अमन व निकिता ने विशेष भूमिका निभाई। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक डॉ. भूपेंद्र सिंह व डॉ. प्रेम भी उपस्थित रहे। Hindi Language</p>
<p><a title="Haryana Assembly Election 2024: किसके नामांकन हुए स्वीकृत, किसके हुए रद्द! जानें छंटनी के बाद की स्थिति!" href="http://10.0.0.122:1245/whose-nominations-were-accepted-whose-were-cancelled/">Haryana Assembly Election 2024: किसके नामांकन हुए स्वीकृत, किसके हुए रद्द! जानें छंटनी के बाद की स्थ…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>हिसार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Sep 2024 10:50:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Declare Hindi as National Language : हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[द इगल फाउंडेशन सदस्यों ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन Declare Hindi as National Language : हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित करने की मांग के संबंध में द इगल फाउंडेशन सदस्यों ने सोमवार को प्रधानमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। फाउंडेशन अध्यक्ष प्रशांत सोनी ने बताया कि भारत देश […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/declare-hindi-as-national-language/article-60162"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/hindi-lenguage.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">द इगल फाउंडेशन सदस्यों ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन</h3>
<p style="text-align:justify;">Declare Hindi as National Language : हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित करने की मांग के संबंध में द इगल फाउंडेशन सदस्यों ने सोमवार को प्रधानमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। फाउंडेशन अध्यक्ष प्रशांत सोनी ने बताया कि भारत देश अपनी विभिन्नताओं के लिए जाना जाता है। यहां हर राज्य की अपनी राजनैतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान है लेकिन उसके बाद भी देश की कोई राष्ट्रभाषा नहीं है। Hindi Language</p>
<p style="text-align:justify;">हिन्दी को 14 सितंबर 1949 को राज्य भाषा का दर्जा तो मिला लेकिन राष्ट्र भाषा का नहीं। हमारे देश में लगभग मुख्य भाषाएं हैं लेकिन कोई राष्ट्रभाषा नहीं है। हर राज्य की अपनी एक मुख्य भाषा बनकर रह गई है फिर चाहे वह आधार कार्ड हो, या रेलवे स्टेशन या सडक़ पर लगे दूरी के पत्थर। आज एक राज्य का कोई व्यक्ति किसी अन्य राज्य में व्यापार या घूमने के उद्देश्य से जाता है तो भाषा के कारण उसे अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते वह ठगी का शिकार भी हो जाता है। Hindi Language</p>
<h3 style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार को हिन्दी भाषा के प्रसार-पचार व विकास को बढ़ावा देने का अधिकार</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत के कई राज्य जैसे केरल, तमिलनाडू, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि ऐसे भी हैं जहां न तो विद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है और शायद लोगों को हिन्दी का अर्थ पता नहीं हो। संविधान के अनुच्छेद 351 में केन्द्र सरकार को हिन्दी भाषा के प्रसार-पचार व विकास को बढ़ावा देने का अधिकार है लेकिन सरकार का इस ओर कभी ध्यान ही नहीं गया। आज देश पिछडऩे का कारण यह भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए हिन्दी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए और देश के हर विद्यालय में हिन्दी अनिवार्य कर पढ़ाई जानी चाहिए। ज्ञापन के जरिए हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा घोषित कर प्रत्येक राज्य में अनिवार्य रूप से स्कूलों में हिन्दी पढ़ाई जाना सुनिश्चित करने की मांग की। इस मौके पर राहुल, अर्जुन शाक्य, करण, आकाश, अभिषेक, यादविन्द्र सिंह, भरत आदि मौजूद थे। Hindi Language</p>
<p><a title="गला काट पत्नी की हत्या कर थाने पहुंच पुलिस को बताया यह बड़ा कारण!" href="http://10.0.0.122:1245/wife-murdered-by-slitting-her-throat-with-a-sharp-weapon-in-hanumangarh/">गला काट पत्नी की हत्या कर थाने पहुंच पुलिस को बताया यह बड़ा कारण!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/declare-hindi-as-national-language/article-60162</link>
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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 14:31:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तटबंधों को तोड़ती हिंदी भाषा</title>
                                    <description><![CDATA[कभी गोविंदवल्लभ पंत ने कहा था कि हिंदी और नागरी का प्रचार तथा विकास कोई रोक नहीं सकता। उनकी कही बातें आज अक्षरश: सच साबित हो रही है। भाषा के तौर पर हिंदी अपने सभी प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ लोकप्रियता का आसमान छू रही है और उसकी वैश्विक स्वीकार्यता लगातार बढ़ती जा रही है। वैश्विक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/breaking-the-embankments-hindi-language/article-5914"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/breaking-the-embankments-hindi-language.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कभी गोविंदवल्लभ पंत ने कहा था कि हिंदी और नागरी का प्रचार तथा विकास कोई रोक नहीं सकता। उनकी कही बातें आज अक्षरश: सच साबित हो रही है। भाषा के तौर पर हिंदी अपने सभी प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ लोकप्रियता का आसमान छू रही है और उसकी वैश्विक स्वीकार्यता लगातार बढ़ती जा रही है। वैश्विक स्तर पर यूजर्स के लिहाज से 1952 में हिंदी पांचवे पायदान पर थी, जो अस्सी के दशक में चीनी और अंग्रेजी भाषा के बाद तीसरे स्थान पर आ गयी। 1999 में मशीन ट्रांसलेशन शिखर बैठक में टोकियो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर होजुमि तनाका द्वारा पेश नए भाषायी आंकड़ों के मुताबिक अब चीनी भाषा के बाद हिंदी दूसरे स्थान पर है। गौर करें तो विगत कुछ दशकों में हिंदी का उत्तरोतर विकास हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आश्चर्य नहीं जब आने वाले दिनों में हिंदी चीनी भाषा को पछाड़कर शीर्ष पर पहुंच जाए। एक आंकड़े के मुताबिक आज विश्व में 50 करोड़ से अधिक लोग हिंदी बोलते हैं और इससे कहीं ज्यादा समझते हैं। आज दुनिया के 40 से अधिक देशों के 600 से अधिक विश्वविद्यालयों और स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई हो रही है। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में हिंदी की धूम मची है। यहां 30 से अधिक विश्वविद्यालयों में भाषायी पाठ्यक्रम में हिंदी को महत्वपूर्ण दर्जा हासिल है। यही नहीं पिछले दिनों लैंग्वेज यूज इन यूनाइटेड स्टेट्स-2011 की हालिया रिपोर्ट से भी उद्घाटित हुआ कि अमेरिका में बोली जाने वाली टॉप दस भाषाओं में हिंदी भी है और इसे बोलने वालों की संख्या 6.5 लाख से उपर है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के अलावा यूरोपिय देशों में भी हिंदी का तेजी से विकास हो रहा है। इंग्लैण्ड के लंदन, कैम्ब्रिज और यार्क विश्वविद्यालयों में हिंदी को चाहने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है। पहले से कहीं ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन हो रहा है। आज अगर प्रवासिनी, अमरदीप और भारत भवन पत्र-पत्रिकाएं अपना अस्तित्व बनाए हुए हैं और उसके पाठकों की तादाद बढ़ रही है तो यह हिंदी की बढ़ती स्वीकार्यता और लोकप्रियता का ही कमाल है। जर्मनी के हीडलबर्ग, लोअर सेक्सोनी के लाइपजिंग, बर्लिन के हम्बोलडिट और बॉन विश्वविद्यालय में भी हिंदी भाषा को पाठ्यक्रम के रुप में शामिल किया गया है। एक दशक से रुस के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी साहित्य पर शोध हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां हिंदी का बोलबाला बढ़ा है। अनेक रुसी विद्वानों ने हिंदी साहित्य का अनुवाद किया है। इनमें से एक तुलसीकृत रामचरित मानस भी है जिसका अनुवाद प्रसिद्ध विद्वान वारान्निकोव द्वारा किया गया है। यह तथ्य है कि रुस में हिंदी गं्रथों का जितना अनुवाद हुआ है उतना शायद ही विश्व में किसी भाषा का हुआ हो। जर्मन के लोग भी हिंदी को एशियाई आबादी के एक बड़े तबके से संपर्क साधने का सबसे बड़ा हथियार मानते हैं। यहां जानना जरुरी है कि जर्मनी में भारतीय भाषा संस्कृत को भी गौरव हासिल है। कई संस्कृत ग्रंथों का जर्मन भाषा में अनुवाद हुआ है। हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता का ही आलम है कि वेस्टइंडीज के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी पीठ की स्थापना की गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">एशियाई देश जापान में हिंदी भाषा का बहुत अधिक सम्मान है। मजेदार बात यह भी कि जापान की यात्रा पर जाने वाले भारतीय राजनेता जापान में हिंदी भाषा में अपने विचार व्यक्त करते हैं। गत वर्ष जापान यात्रा पर गए भारतीय प्रधानमंत्री ने भी अपने विचार हिंदी में व्यक्त किए और उससे न सिर्फ जापान बल्कि विश्व बिरादरी भी प्रभावित दिखी। जापान की दो नेशनल यूनिवर्सिटी ओसाका और टोकियो में स्नातक और परास्नातक स्तर पर हिंदी की पढ़ाई की व्यवस्था है। प्रोफेसर दोई ने टोकियो विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग की स्थापना की है। रुस की तरह जापान में भी हिंदी साहित्य का अनुवाद हुआ है। प्रोफेसर तोबियोतनाका ने भीष्म साहनी के उपन्यास तमस का जापानी में अनुवाद किया है। प्रोफेसर कोगा ने ‘जापानी-हिंदी कोष’ की रचना की है। उन्होंने गांधी जी की आत्मकथा का भी जापानी में अनुवाद किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रोफेसर मोजोकामी हर वर्ष हिंदी का एक नाटक तैयार करते हैं और उसका मंचन भारत में करते हैं। महात्मा गांधी और टैगोर के अनन्य भक्तों में से एक साइजी माकिनो जब भारत आए तो हिंदी के रंग में रंग गए। उन्होंने गांधी जी के सेवाग्राम में रहकर हिंदी सीखी। गौर करने वाली बात यह कि जापान और भारत का लोकसाहित्य समान है। मणिपुर और राजस्थान की लोककथाएं जापान की लोककथाओं जैसी है। गुयाना और मॉरिशस में भी भारतीय मूल के लोगों की संख्या सर्वाधिक है। यहां प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातक स्तर पर हिंदी के पठन-पाठन की समुचित व्यवस्था है। मारीशस में अंग्रेजी राजभाषा है। फ्रेंच बोलने वालों की तादात अच्छी है। लेकिन हिंदी की लोकप्रियता में कमी नहीं है। यहां बहुत पहले ही हिंदी सचिवालय की स्थापना हो चुकी है और ढेरों हिंदी पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन हो रहा है। इसी तरह फिजी, नेपाल, भूटान, मालदीव और श्रीलंका में भी हिंदी का जलवा कायम है। विगत वर्षों में खाड़ी देशों में हिंदी का तेजी से प्रचार-प्रसार हुआ है। वहां के सोशल मीडिया में हिंदी का दखल बढ़ा है और कई पत्र-पत्रिकाओं को आॅनलाइन पढ़ा जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात में हिंदी एफएम चैनल लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नए-पुराने हिंदी गीतों को चाव से सुना जा रहा है। हिंदी फिल्मों ने भी यहां धूम मचा रखी है। बॉलीवुड स्टार अपनी फिल्मों के प्रचार-प्रसार के लिए अकसर इन देशों में शो आयोजित करते हैं। पिछले कुछ वर्षों से दुबई में लगातार हिंदी कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है जो अपने-आप में एक बड़ी उपलब्धि है। हिंदी भाषा की यह असाधारण उपलब्धि कही जाएगी कि जिन देशों में भाषा को विचारों की पोषाक और राष्ट्र का जीवन समझा जाता है वहां भी हिंदी तेजी से अपना पांव पसार रही है। गौरतलब है कि हंगरी, बुल्गारिया, रोमानिया स्विटजरलैंड, स्वीडन, फ्रांस, नार्वे, जापान, इटली, मिस्र, कजाकिस्तान, तुकेर्मेनिस्तान, कतर और अफगानिस्तान, रुस और जर्मनी अपनी भाषा को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। वे इसे अपनी सांस्कृतिक अस्मिता से जोड़कर देखते हैं। लेकिन इन देशों में हिंदी को भरपूर स्नेह और सम्मान मिल रहा है। यह हिंदी भाषा के लिए बड़ी उपलब्धि है। आज दुनिया का कोई ऐसा कोना नहीं जहां भारतीयों की उपस्थिति न हो और वहां हिंदी का तेजी विस्तार न हो रहा हो।</p>
<p style="text-align:justify;">एक आंकड़ें के मुताबिक दुनिया भर में ढ़ाई करोड़ से अधिक अप्रवासी भारतीय 160 से अधिक देशों में रहते हैं। यह सुखद है कि वह अपनी भाषा व संस्कृति से जुड़े हैं और हिंदी के फैलाव में योगदान कर रहे हैं। गौर करें तो बहुराष्ट्रीय देशों की कंपनियां भी अपने-अपने देशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सरकारों पर दबाव बना रही हैं। दरअसल उनका मकसद हिंदी के जरिए एशियाई देशों में अपनी व्यपारिक गतिविधियों को बढ़ाना है। यह स्वीकारने में हिचक नहीं कि बाजार ने भी हिंदी की स्वीकार्यता को नई उंचाई दी है। यह सार्वभौमिक सच है कि जो भाषाएं रोजगार और संवादपरक नहीं बन पाती उनका अस्तित्व खत्म हो जाता है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में तकरीबन 6900 मातृभाषाएं बोली जाती हैं। इनमें से तकरीबन 2500 मातृभाषाएं अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रही हैं। इनमें से कुछ को भाषाओं की चिंताजनक स्थिति वाली भाषाओं की सूची में रख दिया गया है। दुनिया भर में तकरीबन दो सैकड़ा ऐसी मातृभाषाएं हैं जिनके बोलने वालों की तादाद महज दस-बारह है। आज अगर मैक्सिकों की अयापनेको, उक्रेन की कैरेम, ओकलाहामा की विचिता, इंडोनेशिया की लेंगिलू भाषा अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रही हैं तो इसका मूलकारण यही है कि वह रोजगारपरक तथा संवाद की भाषा नहीं बन सकी हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की चमक प्रमाणित करती है कि संसार में उसकी प्रतिष्ठा और उपादेयता बढ़ी है और वह तेजी से वैश्विक भाषा बन रही है। <em>अरविंद जयतिलक</em></p>
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                <pubDate>Fri, 14 Sep 2018 13:18:31 +0530</pubDate>
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                <title>हिंदी अब विदेशियों के लिए भी बनी रोजी-रोटी की भाषा</title>
                                    <description><![CDATA[पोर्ट लुई (मॉरीशस) (एजेंसी)। हिंदी भाषा (Hindi language) सीखने और पढ़ने से रोजगार नहीं मिलने का भ्रम टूटने लगा है तथा अब तो कई विदेशी भी मान रहे हैं कि हिंदी ही उनकी रोजी-रोटी का जरिया है। गोस्वामी तुलसीदास नगर में आयोजित तीन दिवसीय 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में आये चीन में हिंदी के पुरोधा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/hindi-language-now-livelihood-for-foreigners-also/article-5509"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/hindi-language.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पोर्ट लुई (मॉरीशस) (एजेंसी)।</strong> हिंदी भाषा <strong>(Hindi language)</strong> सीखने और पढ़ने से रोजगार नहीं मिलने का भ्रम टूटने लगा है तथा अब तो कई विदेशी भी मान रहे हैं कि हिंदी ही उनकी रोजी-रोटी का जरिया है।</p>
<p>गोस्वामी तुलसीदास नगर में आयोजित तीन दिवसीय 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में आये चीन में हिंदी के पुरोधा एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चीन यात्रा के दौरान उनके अनुवादक रहे जियान चिग खेईना ने वह चीन में हिंदी के सैनिक हैं और उनकी रोजी-रोटी हिंदी भाषा के कारण ही चलती है।</p>
<p>वह चीन में हिंदी के प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा कि भारत को जानने के लिए हिंदी सीखना जरूरी है। हिंदी से ही भारत की सभ्यता एवं संस्कृति हो समझा जा सकता है। खेईना ने कहा कि वर्ष 2000 के बाद से चीन में हिंदी की स्थिति बहुत अच्छी हुई है।</p>
<p>अब वहां 15-16 विश्वविद्यालयों में हिंदी <strong>(Hindi language)</strong> की पढ़ाई हो रही है। उन्होंने कहा कि चीन के लोगों को लगता है कि भारत को समझने की जरूरत है। वहां की युवा पीढ़ी भारत को समझना चाहती है और भारत में व्यापार करना चाहती है।</p>
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                <pubDate>Wed, 22 Aug 2018 17:29:07 +0530</pubDate>
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