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                <title>Nasa - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>ब्लैक होल्स : ये है ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य, इसमें है प्रकाश को भी निगलने की अद्भुत शक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। ब्रह्मांड के गहनतम रहस्यों में यदि किसी एक पिंड का नाम सबसे पहले लिया जाता है, तो वह है ब्लैक होल। नाम से भले ही यह किसी छिद्र का आभास कराए, किंतु वास्तव में यह अत्यंत सघन द्रव्यमान वाला खगोलीय पिंड होता है, जिसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति इतनी प्रबल होती है कि प्रकाश तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/this-is-the-universes-biggest-mystery-with-the-amazing-power-to-swallow-even-light/article-81694"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/black-hole.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। ब्रह्मांड के गहनतम रहस्यों में यदि किसी एक पिंड का नाम सबसे पहले लिया जाता है, तो वह है ब्लैक होल। नाम से भले ही यह किसी छिद्र का आभास कराए, किंतु वास्तव में यह अत्यंत सघन द्रव्यमान वाला खगोलीय पिंड होता है, जिसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति इतनी प्रबल होती है कि प्रकाश तक उससे बाहर नहीं निकल पाता। इसी कारण यह प्रत्यक्षतः काला दिखाई देता है। NASA News</p>
<p style="text-align:justify;">ब्लैक होल के चारों ओर गैस और धूल का एक तीव्र गति से घूमता हुआ चक्र बनता है, जिसे ‘एक्रीशन डिस्क’ कहा जाता है। यह क्षेत्र अत्यधिक तापमान के कारण एक्स-रे तथा अन्य उच्च ऊर्जा विकिरण उत्सर्जित करता है। वैज्ञानिक इन्हीं संकेतों के माध्यम से ब्लैक होल की उपस्थिति और व्यवहार का अध्ययन करते हैं। इसके केंद्र में एक सीमा-रेखा होती है, जिसे ‘इवेंट होराइजन’ कहा जाता है। यह वह बिंदु है जिसके भीतर प्रवेश करने के बाद कोई भी वस्तु—यहां तक कि प्रकाश भी—वापस नहीं लौट सकती।</p>
<h3>ब्लैक होल अपने प्रबल गुरुत्वाकर्षण से पास से गुजरने वाले प्रकाश को मोड़ देते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">ब्लैक होल अपने प्रबल गुरुत्वाकर्षण से पास से गुजरने वाले प्रकाश को मोड़ देते हैं। यह प्रभाव किसी लेंस की भांति कार्य करता है और दूर स्थित तारों या आकाशगंगाओं की छवि को विकृत या बहुगुणित कर सकता है। इस घटना को ‘गुरुत्वीय लेंसिंग’ कहा जाता है। इसी तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक उन ब्लैक होल्स का पता लगाते हैं, जो प्रत्यक्षतः दिखाई नहीं देते। NASA News</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी आकाशगंगा मिल्की वे के केंद्र में एक अतिविशाल ब्लैक होल स्थित है, जिसे सैजिटेरियस ए* कहा जाता है। इसका द्रव्यमान सूर्य से लगभग 40 लाख गुना अधिक है। यह पृथ्वी से हजारों प्रकाश वर्ष दूर स्थित होते हुए भी खगोलशास्त्रियों के लिए अध्ययन का प्रमुख विषय बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक ज्ञात सबसे विशाल ब्लैक होल टीओएन 618 है, जिसका द्रव्यमान सूर्य से सैकड़ों अरब गुना अधिक माना जाता है। वहीं, कुछ ब्लैक होल अपेक्षाकृत छोटे भी पाए गए हैं, जिनका द्रव्यमान सूर्य के कुछ गुणा के बराबर है। यदि कोई वस्तु ब्लैक होल के अत्यंत समीप पहुंच जाए, तो तीव्र गुरुत्वाकर्षण के कारण वह लंबी और पतली हो जाती है। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक ‘स्पेगेटीफिकेशन’ कहते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे बनता है ब्लैक होल? | NASA News</h3>
<p style="text-align:justify;">ब्लैक होल सामान्यतः तब बनते हैं जब अत्यंत विशाल तारे अपने जीवन के अंतिम चरण में सुपरनोवा विस्फोट के साथ ध्वस्त हो जाते हैं। उनके अवशेष इतने सघन हो जाते हैं कि गुरुत्वाकर्षण का संतुलन टूट जाता है और ब्लैक होल का निर्माण होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह धारणा गलत है कि ब्लैक होल सब कुछ निगल लेने वाले ‘वैक्यूम क्लीनर’ होते हैं या किसी अन्य ब्रह्मांड का द्वार हैं। दूर से इनका प्रभाव अन्य तारों की भांति ही गुरुत्वीय नियमों के अधीन होता है। ब्लैक होल आज भी वैज्ञानिकों के लिए गहन शोध का विषय हैं और ब्रह्मांड की संरचना तथा समय-स्थान के सिद्धांतों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 15:54:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Aurora Lights: रात के शांत आसमान में फैली ये रंग-बिरंगी लहरें क्या हैं? क्या है इनका रहस्य?</title>
                                    <description><![CDATA[Aurora Lights: नई दिल्ली। रात के शांत आकाश में जब हरे, गुलाबी, बैंगनी, लाल और नीले रंगों की लहरें लहराती दिखती हैं, तो वह दृश्य किसी स्वप्न से कम नहीं लगता। इस प्राकृतिक प्रकाश-प्रदर्शन को ऑरोरा कहा जाता है। उत्तरी गोलार्ध में इसे ऑरोरा बोरेलिस या नॉर्दर्न लाइट्स और दक्षिणी गोलार्ध में ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस या […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/what-are-these-colorful-waves-spreading-across-the-quiet-night-sky-what-is-their-mystery/article-81500"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/aurora-lights.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Aurora Lights: नई दिल्ली। रात के शांत आकाश में जब हरे, गुलाबी, बैंगनी, लाल और नीले रंगों की लहरें लहराती दिखती हैं, तो वह दृश्य किसी स्वप्न से कम नहीं लगता। इस प्राकृतिक प्रकाश-प्रदर्शन को ऑरोरा कहा जाता है। उत्तरी गोलार्ध में इसे ऑरोरा बोरेलिस या नॉर्दर्न लाइट्स और दक्षिणी गोलार्ध में ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस या सदर्न लाइट्स के नाम से जाना जाता है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अनुसार, यह घटना सौर गतिविधियों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के परस्पर प्रभाव का परिणाम है। NASA News</p>
<h3 style="text-align:justify;">ऑरोरा कैसे बनता है? |NASA News</h3>
<p style="text-align:justify;">सूर्य से निरंतर ऊर्जा और आवेशित कणों—मुख्यतः प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन—का प्रवाह निकलता है, जिसे सौर पवन कहा जाता है। जब यह सौर पवन पृथ्वी के निकट पहुंचती है, तो पृथ्वी का चुंबकीय कवच, जिसे मैग्नेटोस्फीयर कहते हैं, इन कणों से टकराता है। इस टकराव के कारण ऊर्जा संचित होती है और फिर अचानक वायुमंडल में प्रवेश करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वायुमंडल में प्रवेश करने पर ये कण ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसी गैसों से टकराते हैं। टकराव के परिणामस्वरूप गैसों के अणु ऊर्जित होकर प्रकाश उत्सर्जित करते हैं। यही प्रकाश विभिन्न रंगों में दिखाई देता है और ऑरोरा का मनोहारी दृश्य बनाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रंगों का रहस्य | NASA News</h3>
<p style="text-align:justify;">ऑरोरा के अलग-अलग रंग गैस के प्रकार और ऊँचाई पर निर्भर करते हैं—</p>
<p style="text-align:justify;">हरा रंग: लगभग 100–200 किमी की ऊँचाई पर ऑक्सीजन से उत्पन्न होता है और सबसे अधिक दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लाल रंग: 200 किमी से अधिक ऊँचाई पर ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से बनता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नीला व बैंगनी रंग: नाइट्रोजन गैस की उत्तेजना से उत्पन्न होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गुलाबी या लाल-बैंगनी: अपेक्षाकृत कम ऊँचाई पर नाइट्रोजन की प्रतिक्रिया से दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कभी-कभी ये रंग परस्पर मिलकर आकाश में श्वेत या मिश्रित प्रकाश की छटा भी उत्पन्न कर देते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सौर तूफान और ऑरोरा | NASA News</h3>
<p style="text-align:justify;">जब सूर्य पर तीव्र गतिविधि होती है, जैसे सौर ज्वाला (सोलर फ्लेयर) या विशाल विस्फोट, तब चुंबकीय तूफान उत्पन्न होते हैं। इन्हें जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म कहा जाता है। ऐसे समय में वायुमंडल में अधिक ऊर्जा प्रवेश करती है और ऑरोरा सामान्य से अधिक उज्ज्वल तथा दूर-दराज के क्षेत्रों में भी दिखाई दे सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिक ऑरोरा का अध्ययन मैग्नेटोमीटर से पृथ्वी के चुंबकीय परिवर्तनों को मापकर, रडार से ऊपरी वायुमंडल की जांच कर तथा विशेष कैमरों से प्रत्यक्ष चित्र लेकर करते हैं। विश्व की अनेक अंतरिक्ष एजेंसियां इस क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान करती हैं, जिससे अंतरिक्ष मौसम और पृथ्वी के पर्यावरण को बेहतर समझा जा सके। ऑरोरा केवल एक सुंदर दृश्य नहीं, बल्कि अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच चल रहे अदृश्य संवाद का सजीव प्रमाण है। NASA News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:59:51 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>26 फरवरी को नासा करने जा रहा है बड़ा काम, जानकर आपको होगा गर्व</title>
                                    <description><![CDATA[लॉस एंजिल्स (एजेंसी)। अमेरिकी कंपनी इंट्यूटिव मशीन इस महीने के अंत में नासा विज्ञान को चंद्रमा की सतह पर पहुंचाने के लिए अपना दूसरा चंद्र मिशन शुरू करेगी। नासा ने यह जानकारी दी। इस मिशन का कोडनेम आईएम-2 है। यह बुधवार 26 फरवरी को फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स फाल्कन 9 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nasa-is-going-to-do-a-big-thing-on-february-26-you-will-be-proud-to-know/article-67600"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-02/nasa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लॉस एंजिल्स (एजेंसी)।</strong> अमेरिकी कंपनी इंट्यूटिव मशीन इस महीने के अंत में नासा विज्ञान को चंद्रमा की सतह पर पहुंचाने के लिए अपना दूसरा चंद्र मिशन शुरू करेगी। नासा ने यह जानकारी दी। इस मिशन का कोडनेम आईएम-2 है। यह बुधवार 26 फरवरी को फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट पर उड़ान भरेगा। नासा के अनुसार प्रक्षेपण के बाद इंट्यूटिव मशीन का चंद्र लैंडर, एथेना, गुरुवार 06 मार्च से पहले चंद्रमा की सतह पर उतरने से पहले लगभग एक सप्ताह चंद्रमा पर पारगमन में बिताएगा।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/soaked-makhana-benefits/">Soaked Makhana Benefits: रात में दूध में भिगो दें ये सफेद चीज, सुबह खाली पेट सेवन करें और फिर जो होगा, वो हैरान कर देगा!</a></p>
<p style="text-align:justify;">नासा के अनुसार लैंडर चंद्रमा के पर्यावरण को और अधिक समझने के लिए नासा विज्ञान जांच और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन ले जाएगा और भविष्य के मानव मिशनों को चंद्र सतह पर तैयार करने में मदद करेगा। आईएम-2 के साथ राइडशेयर के रूप में लॉन्च होने वाला नासा का लूनर ट्रेलब्लेजर अंतरिक्ष यान भी चंद्र कक्षा की ओर अपनी यात्रा शुरू करेगा जहाँ यह चंद्रमा पर पानी के विभिन्न रूपों के वितरण का मानचित्रण करेगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Feb 2025 10:13:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Nasa News: अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स को बचाने के लिए नासा ने मांगे प्लान! 16 लाख देने का ऐलान!</title>
                                    <description><![CDATA[Nasa: नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) और बुच विल्मोर (Butch Wilmore) काफी समय से अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं। ये सारी परेशानी स्पेस एक्स के ‘कैप्सूल’ में गडबड़ी के चलते हुई है। Nasa News अब बताया जा रहा है कि ये दोनों आठ माह बाद वापिस धरती पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nasa-asks-for-plans-to-save-sunita-williams-trapped-in-space-announces-to-give-16-lakhs/article-65057"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/nasa-help.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Nasa: नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) और बुच विल्मोर (Butch Wilmore) काफी समय से अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं। ये सारी परेशानी स्पेस एक्स के ‘कैप्सूल’ में गडबड़ी के चलते हुई है। Nasa News</p>
<p style="text-align:justify;">अब बताया जा रहा है कि ये दोनों आठ माह बाद वापिस धरती पर आ सकेंगे। अब ऐसी समस्याओं के हल के लिए नासा ने दुनियाभर के तकनीकी विशेषज्ञों के लिए एक चैलेंज शुरू किया है। इसके तहत चंद्रमा पर घायल या असमर्थ अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बचाने के लिए लूनर रेस्क्यू सिस्टम डिजाइन करने का मौका दिया गया है। इस चैलेंज में कुल 45,000 डॉलर (38 लाख) का पुरस्कार रखा गया है, जिसमें सबसे अच्छे सुझाव पर 20,000 डॉलर (16 लाख) तक का इनाम दिया जाएगा। इस संबंध में अपना रजिस्ट्रेशन 23 जनवरी 2025 तक Hero पोर्टल पर सबमिट की जा सकती हैं। Nasa News</p>
<p><a title="Gold Price Today: सोने की कीमतों में फिर आया उछाल! जानें, MCX Gold की ताजा कीमतें!" href="http://10.0.0.122:1245/gold-prices-rise-again-know-the-latest-prices-of-mcx-gold/">Gold Price Today: सोने की कीमतों में फिर आया उछाल! जानें, MCX Gold की ताजा कीमतें!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Dec 2024 11:16:13 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>NASA News: नासा ने किया चौंकाने वाला खुलासा मंगल की सतह में हैं बड़ी मात्रा में पानी</title>
                                    <description><![CDATA[NASA News: नासा के इनसाइट्स लैंडर के नए सेस्मिक आंकड़ो से एक जानकारी सामने आई हैं जिसके मुताबिक मंगल की सतह के नीचे पानी का एक विशाल भंडार हो सकता हैं। इससे पहले भी मंगल ग्रह पर पानी के लिए स्टडी की गई थी जिनमें मंगल ग्रह के ध्रुवों पर जमे हुए पानी और वातावरण […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nasa-made-a-shocking-revelation-that-there-is-a-large-amount-of-water-on-the-surface-of-mars/article-61111"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/nasa-news-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">NASA News: नासा के इनसाइट्स लैंडर के नए सेस्मिक आंकड़ो से एक जानकारी सामने आई हैं जिसके मुताबिक मंगल की सतह के नीचे पानी का एक विशाल भंडार हो सकता हैं। इससे पहले भी मंगल ग्रह पर पानी के लिए स्टडी की गई थी जिनमें मंगल ग्रह के ध्रुवों पर जमे हुए पानी और वातावरण में जल वाष्प की मौजूदगी के सबूत मिले थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसी ग्रह के विकास में पानी की अहम भुमिका | NASA News</h3>
<p style="text-align:justify;">कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी बर्कले के प्रोफेसर माइकल मंगा ने कहा कि किसी ग्रह के विकास में पानी की भुमिका बहुत अहम हैं पानी के बिना जीवन संभव नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह खोज एक बड़े सवाल को जन्म देती हैं कि मंगल ग्रह का सारा पानी कहा गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अध्ययन में वाटर चैनल्स और लहरों का प्रमाण</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रोफेसर मंगा ने बताया कि मंगल ग्रह पर किये गए अध्ययनों से ग्रह पर चैनल्स और लहरों के प्रमाण मिले हैं जो यह साबित करते हैं कि प्राचीन काल में मंगल ग्रह पर नदियां और झीले मौजूद थी। इसके बावजूद ग्रह तीन अरब साल से एक रेगिस्तान रहा हैं इसकी वजह हैं अपना वायुमंडल खोने के बाद इसका सारा पानी सूरज की भेंट चढ़ गया हैं। यह पानी मंगल ग्रह के लिए बहुत अहम हो सकता हैं उन्होंने कहा कि धरती का अधिकांश पानी जमीन के निचे हैें।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इस बात की संभावना हैं कि मंगल पर भी पानी जमीन के निचे हो सकता हैं जिससे इसे हम धरती का जुड़वा कह सकें। पानी के बिना जीवन संभव नहीं हैं ऐसे में यह खोज इस बात की ओर इशारा करती है कि जमीन के अन्दर रहने लायक पानी हो सकता हैं NASA News</p>
<h3 style="text-align:justify;">नासा के सनसाइट लैंडर ने किये मंगल पर 1319 भुकं प दर्ज</h3>
<p style="text-align:justify;">नासा के सनसाइट लैंडर ने दिसंबर 2022 में अपना मिशन पुरा कर लिया हैं। इस दौरान इस लैंडर ने मंगल ग्रह पर 1319 भूकंप दर्ज किए हैं इस दौरान भूकंपीय तरंगों की गति को मापकर वैज्ञानिकों ने यह भी पता लगाने की कोशिश कि हैं कि जमीन के अंदर किसी तरह की चीजें होने की संभावना हैं। इससे संबंधित खोज नेशनल एकेडमी आॅफ साइंसेज में प्रकाशित हुई हैं। इस तरह की तकनीक धरती में पानी,गैंस या तेल की संभावना जांचने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में किया बड़ा ऐलान" href="http://10.0.0.122:1245/on-the-occasion-of-78th-independence-day-pm-modi-made-a-big-announcement-about-nalanda-university/">78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में किया बड़ा ऐलान</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Aug 2024 11:59:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>OMG News: बह्मांड में नई खोज, पृथ्वी के बाहर जीवन मिलने की संभावना बढ़ी! दावा, इंसानों के जैसे एलियन मिलना असंभव नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[Earth: डॉ. संदीप सिंहमार।  खगोलीय विज्ञान बह्मांड में नई खोजों के लिए जाना जाता है। आए दिनों कोई न कोई खोज सामने आते रहती है,जो एक नई उम्मीद जगाती है। पृथ्वी के बाहर जीवन की तलाश में भी वर्षों से खगोल विज्ञान सक्रिय हैं। अन्तरिक्ष विज्ञान के सहयोग से खगोलशास्त्री इस नई खोज में लगे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-discovery-in-the-universe-chances-of-finding-life-outside-earth-increased/article-57172"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/omg-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Earth: <strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong>  खगोलीय विज्ञान बह्मांड में नई खोजों के लिए जाना जाता है। आए दिनों कोई न कोई खोज सामने आते रहती है,जो एक नई उम्मीद जगाती है। पृथ्वी के बाहर जीवन की तलाश में भी वर्षों से खगोल विज्ञान सक्रिय हैं। अन्तरिक्ष विज्ञान के सहयोग से खगोलशास्त्री इस नई खोज में लगे हुए हैं। हाल ही में हुई नई खोज ने पृथ्वी से बाहर जीवन के मिलने की संभावना बढ़ा दी है। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के जरिए हुई इस खोज के बाद यूएफओ एक्सपर्ट ने दावा कर रहे हैं कि इंसानों के जैसे एलियन मिलना अब असंभव नहीं है, बल्कि एलियन के कई रूप हो सकते हैं। यह भी बात ध्यान रहे कि हमारे धर्म एलियन को पहले ही स्वीकार करते हैं। अब विज्ञान की भी मुहर लगने लगी है। इस नई खोज के बाद धरती से बहत जीवन तलाशने की संभावनाएं पहले से अधिक बढ़ी है,जिस दिशा में लगातार काम चल भी रहा है। OMG News</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/bones-will-be-healthy-and-strong-follow-these-tips/#google_vignette">Healthy Bones: हड्डियाँ होंगी स्वस्थ और मजबूत, अपनाएं ये टिप्स!</a></p>
<p style="text-align:justify;">जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के जरिए हुई इस खोज को अब तक खोजे गए एलियन जीवन के सबसे दिलचस्प संकेतों में से एक माना जा रहा है। इसकी जांच करने के लिए तकनीक ने दूसरे सौर मंडल में एक दूर के ग्रह की ओर वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से हुई खोज ने वेब वैज्ञानिकों को उत्साहित कर दिया है कि अब पृथ्वी से बाहर के एलियन जीवन की तलाश में सफलता मिल सकती है। एलियन के शोधकर्ताओं का मानना है कि एलियन की खोज इतनी असंभव भी नहीं है,जितनी हमें लगती है। प्रयास से सब कुछ संभव है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पृथ्वी की त्रिज्या से 2.6 गुना है एक अनोखी दुनिया! OMG News</h3>
<p style="text-align:justify;">इस नई खोज के मुताबिक यह ग्रह K2-18b पृथ्वी की त्रिज्या से 2.6 गुना अधिक महासागर से ढकी हुई एक अनोखी दुनिया है। वैज्ञानिकों ने इसके वायुमंडल में छिपी डाइमिथाइल सल्फाइड,या डीएमएस,नामक गैस के संकेत देखे हैं। नासा के विशेषज्ञों ने आधिकारिक तौर पर माना है कि गैस मुख्य रूप से समुद्री वातावरण में फाइटोप्लांकटन से आती है। यह गैस केवल जीवन की प्रक्रियाओं से ही पैदा होती है। इसका मतलब धरती के बाहर जीवन से नकारा नहीं जा सकता।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शोध अध्ययन के मुखिया के लिए हैरानीजनक है ये खोज</h3>
<p style="text-align:justify;">इस शोध अध्ययन का के मुख वैज्ञानिक कैंब्रिज के खगोलशास्त्री डॉ. निक्कू मधुसूदन ने गैस की खोज के बारे में माना कि यह उनके लिए बहुत हैरानीजनक खोज थी। इस खोज के दौरान वे एक सप्ताह तक सो नहीं सके थे। वैज्ञानिक निक्कू का सिद्धांत है कि K2-18b एक हाइसीन जल जगत है। इस शब्द को उन्होंने हाइड्रोजन और महासागर की उपस्थिति को की ओर इशारा करने के लिए प्रयुक्त किया था। खोज में यूएफओ के शोधकर्ता फिलिप मेंटल ने सुझाव दिया है कि फिल्म और टेलिविज़न में विदेशी जीवन रूपों के चित्रण ने विशेष प्रभावों की सीमाओं के कारण मानवीय रूप ले लिया है। पर एक बात के कारण यह वास्तविकता से बहुत दूर नहीं हो सकता है। फिलिप ने कहा, ह्यूमनॉइड्स को कभी भी बड़े और छोटे स्क्रीन पर देखा जाता है। क्योंकि लंबे समय तक अतिरिक्त स्थलीय लोगों को प्लास्टिक के सिर पहने सूट वाले पुरुषों की तरह पेश किया जाता रहा है। पर अब इस दिशा में एक उम्मीद की किरण बढी है।</p>
<p style="text-align:justify;">शोधकर्ता फिलिप मेन्टल ने पुष्टि करते हुए कहा कि हालांकि एलियंस कई रूप ले सकते हैं। पर एलियन की एक प्रजाति अन्य एलियन प्रजातियों की तुलना में अन्य ग्रहों पर बसने की अधिक संभावना हो सकती है। इन संभावनाओं से कभी भी नकारा नहीं जा सकता।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 May 2024 12:47:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>NASA Helicopter Flying On Mars: मंगल ग्रह पर उड़ा नासा का हेलीकॉप्टर, नासा ने दी जानकारी, देखें&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[NASA Helicopter Flying On Mars: नासा के मंगल हेलीकॉप्टर ने लाल ग्रह पर अपनी 56 उड़ानें पूरी कर ली। यह जानकारी एजेंसी ने दी। नासा के अनुसार, मंगल हेलीकॉप्टर ने 25 अगस्त को अपनी 56वीं उड़ान शुरू की थी, जिसमें वह 12 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और 141 सेकंड में 410 मीटर की यात्रा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nasas-helicopter-flew-on-mars-nasa-sent-video-see/article-51811"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/nasa-helicopter-flying-on-mars.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">NASA Helicopter Flying On Mars: नासा के मंगल हेलीकॉप्टर ने लाल ग्रह पर अपनी 56 उड़ानें पूरी कर ली। यह जानकारी एजेंसी ने दी। नासा के अनुसार, मंगल हेलीकॉप्टर ने 25 अगस्त को अपनी 56वीं उड़ान शुरू की थी, जिसमें वह 12 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और 141 सेकंड में 410 मीटर की यात्रा की। इंजेनुइटी नामक यह हेलीकॉप्टर 18 फरवरी, 2021 को मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर पर पहुंचा था, जो नासा के पर्सिवरेंस रोवर से जुड़ा हुआ था। यह हेलीकॉप्टर एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन है, जिसे किसी अन्य ग्रह पर संचालित उड़ान का परीक्षण करने के लिए पहली बार डिजाइन किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नासा के अनुसार, हेलीकॉप्टर को 90 सेकंड तक उड़ान भरने, एक समय में लगभग 300 मीटर की दूरी तक करने और जमीन से लगभग तीन से 4.5 मीटर की दूरी तक उडने के लिए डिजाइन किया गया था। नासा के अनुसार, अब तक, इस हेलीकॉप्टर ने मंगल ग्रह पर 100.2 उड़ान मिनट पूरा किया है, 12.9 किलोमीटर की दूरी तय की है और 18 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/nasas-helicopter-flew-on-mars-nasa-sent-video-see/article-51811</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 11:01:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नासा ने आर्कटिक वार्मिंग प्रयोग के लिए लॉन्च सेवा की घोषणा की</title>
                                    <description><![CDATA[लॉस एंजिल्स (एजेंसी)। अमेरिका की नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने एजेंसी के पोलर रेडियंट एनर्जी फार-इन्फ्रारेड एक्सपेरिमेंट (प्रीफायर) मिशन के लिए लॉन्च सेवा प्रदान करने के लिए कैलिफोर्निया स्थित एक एयरोस्पेस निमार्ता और लॉन्च सेवा प्रदाता रॉकेट लैब यूएसए इंक का चयन किया है। नासा ने सोमवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nasa-announces-launch-service-for-arctic-warming-experiment/article-51264"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/2019_5largeimg14_may_2019_091959180.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लॉस एंजिल्स (एजेंसी)।</strong> अमेरिका की नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने एजेंसी के पोलर रेडियंट एनर्जी फार-इन्फ्रारेड एक्सपेरिमेंट (प्रीफायर) मिशन के लिए लॉन्च सेवा प्रदान करने के लिए कैलिफोर्निया स्थित एक एयरोस्पेस निमार्ता और लॉन्च सेवा प्रदाता रॉकेट लैब यूएसए इंक का चयन किया है। नासा ने सोमवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि मिशन का उद्देश्य शोधकतार्ओं को पृथ्वी में प्रवेश करने और छोड़ने वाली ऊर्जा की अधिक सटीक तस्वीर देना है। NASA</p>
<p style="text-align:justify;">प्रीफायर मिशन आर्कटिक और अंटार्कटिका से यह समझने में अंतर को कम करने में मदद करेगा कि पृथ्वी की कितनी गर्मी अंतरिक्ष में खो जाती है। नासा के अनुसार, प्रीफायर माप का विश्लेषण जलवायु और बर्फ मॉडल को सूचित करेगा, जिससे बेहतर अनुमान मिलेगा कि गर्म होती दुनिया समुद्री बर्फ के नुकसान, बर्फ की चादर के पिघलने और समुद्र के स्तर में वृद्धि को कैसे प्रभावित करेगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पंजाब में कई गांवों में बाढ़ का खतरा, प्रशासन अलर्ट" href="http://10.0.0.122:1245/flood-threat-in-many-villages-in-punjab/">पंजाब में कई गांवों में बाढ़ का खतरा, प्रशासन अलर्ट</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2023 15:47:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नासा का मार्स हेलीकॉप्टर मंगल ग्रह पर नई उड़ान भरेगा</title>
                                    <description><![CDATA[लॉस एंजिल्स (एजेंसी)। नासा के मार्स हेलीकॉप्टर की शनिवार को मंगल ग्रह (रेड प्लानेट) पर एक नई उड़ान भरने की उम्मीद है। एजेंसी ने यह जानकारी दी है। नासा एजेंसी के अनुसार हेलीकॉप्टर को अपनी नई उड़ान में 10 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने और 203 मीटर की यात्रा करने के लिए लगभग 137 सेकंड […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nasas-mars-helicopter-will-make-a-new-flight-to-mars/article-50283"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/nasa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लॉस एंजिल्स (एजेंसी)।</strong> नासा के मार्स हेलीकॉप्टर की शनिवार को मंगल ग्रह (रेड प्लानेट) पर एक नई उड़ान भरने की उम्मीद है। एजेंसी ने यह जानकारी दी है। नासा एजेंसी के अनुसार हेलीकॉप्टर को अपनी नई उड़ान में 10 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने और 203 मीटर की यात्रा करने के लिए लगभग 137 सेकंड लेने की उम्मीद है। जो मंगल ग्रह पर यह 53वीं उड़ान है।</p>
<p style="text-align:justify;">इनजेन्युटी मार्स हेलीकॉप्टर 18 फरवरी, 2021 को मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर पर पहुंचा, जो नासा के पर्सविरंस रोवर से जुड़ा हुआ था। यह हेलीकॉप्टर पहली बार किसी अन्य ग्रह पर संचालित उड़ान का परीक्षण करने के लिए टेक्नोलॉजी प्रदर्शन पर जा रहा है। नासा के अनुसार हेलीकॉप्टर को एक बार में लगभग 300 मीटर की दूरी और सतह से लगभग तीन से 4.5 मीटर की दूरी 90 सेकंड में उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jul 2023 11:27:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Donut Rocks: मंगल पर अमंगल की आशंका से वैज्ञानिक हैरान!</title>
                                    <description><![CDATA[Donut rocks: ह्यूस्टन। मंगल ग्रह (Planet Mars) पर एक विचित्र पत्थर (Donut rocks) देखकर नासा (NASA) के वैज्ञानिक हैरान हैं। यह पत्थर डोनट के आकार का विचित्र पत्थर है। वैज्ञानिक भी ये सोचकर हैरान हैं कि ये पत्थर बीच में गोलाकार आकार का कैसे काटा गया है और आया कहां से है। नासा ने इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/planet-mars-news-donut-rocks/article-49618"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/donut-rocks.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Donut rocks: ह्यूस्टन। मंगल ग्रह (Planet Mars) पर एक विचित्र पत्थर (Donut rocks) देखकर नासा (NASA) के वैज्ञानिक हैरान हैं। यह पत्थर डोनट के आकार का विचित्र पत्थर है। वैज्ञानिक भी ये सोचकर हैरान हैं कि ये पत्थर बीच में गोलाकार आकार का कैसे काटा गया है और आया कहां से है। नासा ने इस चट्टान को देखकर कहा कि इस चट्टान के आस पास कई और छोटे-छोटे पत्थर हैं, जिसे देख कर लगता है कि ये एक तरह का उल्कापिंड  भी हो सकता है। Donut Rocks</p>
<p style="text-align:justify;">इसको लेकर मंगल ग्रह पर इंसान लगातार खोज कर रहे हैं। पृथ्वी के वैज्ञानिक ये भी अनुमान लगा रहे हैं कि वे मंगल ग्रह पर इंसानों को बसा सकते हैं। लेकिन हाल ही में मंगल ग्रह पर ऐसा पत्थर देखकर उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। क्योंकि मंगल पर ऐसा पत्थर मिला है जिसे देख सभी इंसान आश्चर्यचकित हैं। दरअसल, इस पत्थर की आकृति बच्चों की उस मनपसंद चीज से मिलती है जो इंसानों द्वारा भी बेहद पसंद किया जाता है। भारत के बड़े शहरों समेत दुनिया भर में लोग इस चीज के दीवाने हैं। बच्चों में तो इस चीज का इतना क्रेच है कि उन्हें हर रोज ये खाना होता है। आपको बता दें कि हम जिस चीज की बात कर रहे हैं, वो डोनट है। मंगल ग्रह पर जो पत्थर मिला है वो बिल्कुल डोनट के आकार का है। Donut Rocks</p>
<p style="text-align:justify;">नासा के अनुसार नासा का एक प्रिसर्वेंस रोवर इस वक्त मंगल ग्रह पर घूम रहा है और वहां की तस्वीरें पृथ्वी तक पहुंचा रहा है। उसी रोवर ने हाल ही में एक ऐसी तस्वीर खींची जिसकी चर्चा दुनियाभर में है। ये तस्वीर मंगल ग्रह पर पड़े एक पत्थर जैसी है। ये पत्थर बिल्कुल एक डोनट के आकार का है। दिखने में थोड़ा गोल और इसके बीच में बना सुराख इस पत्थर को हुबहू एक डोनट की शक्ल देता है, जो अमेरिका समेत पूरे यूरोप में लोकप्रिय है। इस तस्वीर को रिमोट माइक्रोस्कोपिक इमेजर की मदद से लिया गया है। वहीं तस्वीर को खींचते वक्त रोवर इस पत्थर से करीब 100 मीटर की दूरी पर था। नासा के अनुसार ये तस्वीर 22 जून 2023 को ली गई थी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नासा ने इस तस्वीर को लेकर क्या कहा? Donut Rocks</h4>
<p style="text-align:justify;">नासा ने इस चट्टान को देखकर यह कहा कि यह चट्टान जहां है, उसके आस पास कई और छोटे छोटे पत्थर हैं, नासा ये अनुमान लगा रहा है कि ये एक तरह का उल्कापिंड है, जिसे देखकर नासा का कहना है कि ये चट्टान मंगल ग्रह का नहीं बल्कि किसी और ग्रह का है जो उल्कापिंड के रूप में मंगल ग्रह पर गिरा है। दरअसल, इससे पहले भी मंगल ग्रह पर कई इस तरह के चट्टान पाए गए थे, जो बाद में उल्कापिंड निकले। ये पत्थर इतने वर्षों तक इसलिए संरक्षित हैं क्योंकि मंगलग्रह पर वर्षा बेहद कम होती है। फिलहाल वैज्ञानिक इसके नमूने इकट्ठा करने में जुटे हैं और इससे वो ये तस्दीक करना चाहते हैं कि क्या कभी मंगल ग्रह पर जीवन मौजूद था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jul 2023 14:19:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Earth: पृथ्वी संकट में? अंतरिक्ष से गिर रहे 3-3 एस्टरॉयड का जानें कैसा होगा असर?</title>
                                    <description><![CDATA[Earth: अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि आज 3 बड़े एस्टरॉयड जोकि लघु ग्रह के नाम से भी जाने जाते हैं और जिन्हें क्षुद्र ग्रह भी कहा जाता है, धरती की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। ये एस्टरॉयड धरती के बहुत करीब पहुंचने वाले हैं। ऐसा हाल ही में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/earth-in-trouble-know-what-will-be-the-effect-of-3-3-asteroids-falling-from-space/article-49542"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/earth.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Earth: अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि आज 3 बड़े एस्टरॉयड जोकि लघु ग्रह के नाम से भी जाने जाते हैं और जिन्हें क्षुद्र ग्रह भी कहा जाता है, धरती की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। ये एस्टरॉयड धरती के बहुत करीब पहुंचने वाले हैं। ऐसा हाल ही में नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIS) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है। रिपोर्ट की मानें तो अंतरिक्ष से तीन विशालकाय एस्टेरॉइड धरती की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि इनमें से एक एस्टेरॉइड MT-1 का आकार इंडिया गेट जितना बड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान का कहना है कि ये तीनों एस्टेरॉइड पृथ्वी के काफी करीब से गुजरने वाले हैं जिसे लेकर संस्थान के प्रभारी डॉ. वीरेंद्र यादव ने जानकारी दी है। इसे लेकर उन्होंने पब्लिक आउटरीच प्रोग्राम में बात की। हालांकि, उन्होंने ये भी बताया कि इन तीनों एस्टेरॉइड से पृथ्वी को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा।</p>
<h3>वहीं वैज्ञानिकों ने किया खुलासा | Earth</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि तीनों एस्टेरॉयड जुलाई में पृथ्वी के पास से गुजरेंगे। हालांकि, तीनों घटना अलग-अलग तारीखों पर देखने को मिलेंगी। डॉ. यादव का कहना है कि 2023 MT-1 एस्टेरॉयड और ME-4 एस्टेरॉयड 8 जुलाई को पृथ्वी से 1.36 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरेंगे। ये एस्टेरॉइड पृथ्वी के करीब से 12 किलोमीटर प्रति सेकेंड से गुजरेंगे। अमेरिका और यूरोप के ऊपर से गुजरते हुए नजर आएंगे। वहीं तीसरा यूक्यू 3 एस्टेरॉयड 18 जुलाई को पृथ्वी और चंद्रमा के बीच से गुजरेगा जो करीब 18 से 20 मीटर व्यास का होगा। डॉ. यादव ने बताया कि हर साल पृथ्वी की ओर आते हैं एस्टेरॉइड।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. यादव ने आगे बताया कि एस्टेरॉइड हर साल पृथ्वी (Earth) की ओर आते हैं। कुछ एस्टेरॉइड का पृथ्वी से टकराने का खतरा बना रहता जिन्हें खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि, ये तीनों एस्टेरॉइड पृथ्वी और चंद्रमा के बीच से गुजरने वाले हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस एस्टेरॉयड का व्यास 524 फीट के आसपास होगा जबकि इसकी रफ्तार 11.8 किमी प्रति सेकंड है। ये एस्टेरॉयड एक घंटे में 26 हजार मील से ज्यादा की दूरी तय कर रहे हैं, जो ध्वनि की गति से भी 34 गुना ज्यादा रफ्तार है।</p>
<p style="text-align:justify;">एस्टेरॉयड 2013 WV44 हमारे ग्रह से 2.1 मिलियन मील दूरी से गुजरने वाला है जो अंतरिक्ष के हिसाब से सुरक्षित दूरी मानी जाती है। एक एक्सपर्ट के अनुसार ये दूरी चंद्रमा से लगभग 9 गुना ज्यादा है, फिर भी ये एस्टेरॉयड को नियर अर्थ आॅब्जेक्ट के रूप में वगीर्कृत किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन एस्टेरॉयड का पृथ्वी पर कोई असर नहीं होगा। अगर एक छोटा एस्टेरॉयड हमारे ग्रह से टकराया तो वो वायुमंडल में ही जलकर राख हो जाएगा। हालांकि, अगर कोई बड़ा एस्टेरॉयड टकराया तो उससे नुकसान होने का खतरा हो सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jul 2023 12:05:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नासा लॉन्च करेगा अंतरिक्ष स्टेशन में नया विज्ञान मिशन</title>
                                    <description><![CDATA[लॉस एंजिल्स (एजेंसी)। अमेरिकी अंतरिक्ष केंद्र NASA ने दिल की बीमारियों, अंतरिक्ष में जीवन और अन्य चीजों का अध्ययन करने के लिए मार्च में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में एक नया विज्ञान मिशन शुरू करने की योजना बनाई है। एजेंसी ने सोमवार को इसकी घोषणा की। यह नासा का 27वां स्पेसएक्स वाणिज्यिक पुन: आपूर्ति सेवा मिशन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nasa-will-launch-a-new-science-mission-to-the-space-station/article-44248"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/nasa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लॉस एंजिल्स (एजेंसी)।</strong> अमेरिकी अंतरिक्ष केंद्र NASA ने दिल की बीमारियों, अंतरिक्ष में जीवन और अन्य चीजों का अध्ययन करने के लिए मार्च में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में एक नया विज्ञान मिशन शुरू करने की योजना बनाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">एजेंसी ने सोमवार को इसकी घोषणा की। यह नासा का 27वां स्पेसएक्स वाणिज्यिक पुन: आपूर्ति सेवा मिशन होगा। बिना चालक दल के ड्रैगन अंतरिक्ष यान द्वारा किया जाने वाला मिशन, फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा। नासा के अनुसार मिशन अंतरिक्ष में हृदय कैसे बदलता है, इसकी जांच करने, छात्र द्वारा डिजाइन किए गए कैमरा माउंट का परीक्षण करने, बायोफिल्म निर्माण को नियंत्रित करने वाली सतहों की तुलना करने और अंतरिक्ष में जीवन का अध्ययन करने सहित अनुसंधान का संचालन करेगा।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Mar 2023 09:54:18 +0530</pubDate>
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