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                <title>Kollam Sudhi Death: सड़क दुर्घटना में अभिनेता कोल्लम सुधी की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[त्रिशूर। Kollam Sudhi Death अभिनेता और मिमिक्री कलाकार कोल्लम सुधी (39) की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, जब उनकी कार एक मालवाहक वाहन से टकरा गई। दुर्घटना में तीन अन्य मिमिक्री कलाकार-बिनु आदिमाली, उल्लास और महेश घायल हो गए। हादसा यहां कैपमंगलम में सोमवार सुबह करीब साढ़े चार बजे हुआ। मीडिया रिपोर्ट के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/kollam-sudhi-death/article-48484"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/kollam-sudhi-death.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>त्रिशूर। </strong>Kollam Sudhi Death अभिनेता और मिमिक्री कलाकार कोल्लम सुधी (39) की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, जब उनकी कार एक मालवाहक वाहन से टकरा गई। दुर्घटना में तीन अन्य मिमिक्री कलाकार-बिनु आदिमाली, उल्लास और महेश घायल हो गए। हादसा यहां कैपमंगलम में सोमवार सुबह करीब साढ़े चार बजे हुआ। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चारों वातकरा में एक कार्यक्रम के बाद घर लौट रहे थे।  Kollam Sudhi Death</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे हुआ हादसा पुलिस ने बताया | Kollam Sudhi Death</h3>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने पीटीआई-भाषा को बताया, “यह आमने-सामने की टक्कर थी। सभी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन सुधी की मौत हो गई। अन्य तीन का इलाज चल रहा है।”हादसे में सुधी के सिर में गंभीर चोट आई है। हालांकि उन्हें कोडुंगल्लूर के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया। घायलों का कोडुंगल्लुर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोल्लम सुधी ने अजमल द्वारा निर्देशित 2015 की रिलीज ‘कंथारी’ के साथ अपनी फिल्म की शुरूआत की। सुधी ने ‘कट्टापनयिले ऋत्विक रोशन’, ‘कुट्टानदन मरप्पाप्पा’, ‘केसु ई वेदीन्ते नाधन’, ‘एस्केप’ और ‘स्वर्गथाइल कट्टुरुम्बु’ कोल्लम’ सहित कई फिल्मों में अभिनय किया है। वह विभिन्न टेलीविजन चैनलों पर स्टेज शो और कॉमेडी कार्यक्रमों से प्रसिद्ध हुए।</p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 17:43:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन साल की उम्र में ही नृत्य सीखने लगी थी यामिनी रेड्डी</title>
                                    <description><![CDATA[यामिनी रेड्डी (जन्म-1 सितंबर, 1982) भारत की शास्त्रीय नृत्यांगना हैं। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया, रूस और संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया है। यामिनी रेड्डी (Yamini Reddy) का जन्म नई दिल्ली में कुचीपुडी नर्तक और ‘पद्म भूषण’ विजेता डॉ. राजा रेड्डी और राधा रेड्डी के घर हुआ था। उन्होंने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/yamini-reddy-started-learning-dance-at-the-age-of-three/article-26429"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/yamini-reddy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यामिनी रेड्डी (जन्म-1 सितंबर, 1982) भारत की शास्त्रीय नृत्यांगना हैं। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया, रूस और संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया है। यामिनी रेड्डी (Yamini Reddy) का जन्म नई दिल्ली में कुचीपुडी नर्तक और ‘पद्म भूषण’ विजेता डॉ. राजा रेड्डी और राधा रेड्डी के घर हुआ था। उन्होंने अपने माता-पिता से नृत्य का प्रशिक्षण लिया और जब वह केवल तीन साल की थीं, तब उन्होंने नई दिल्ली में अपना पहला प्रदर्शन दिया। वा उम्र में ही यामिनी रेड्डी ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुश्किल संतुलित संतुलन रखने की उनकी क्षमता से वह अपने लय के लम्बे भाव से भाव को आसानी से दर्शकों को चकाचौंध कर सकती हैं। दुनिया भर में प्रदर्शन देने के अलावा यमीनी रेड्डी हैदराबाद के नाट्यतरंगीनी नृत्य स्कूल से कुचिपुड़ी का अध्ययन कर रही हैं। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया, रूस और संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया है। डबलिन में, डबलिन के मेयर ने उन्हें स्वर्णिम कुंजी प्रस्तुत की थी। इसके अलावा युवा रत्न अवार्ड, युवा वोकेशनल एक्सलंस अवार्ड, एफआईसीसीआई युवा प्राप्तकर्ता हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Sep 2021 09:52:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों को कम उम्र में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दें : चारू</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। शास्त्रीय गायिका डॉ. चारू कपूर ने कहा है कि स्कूलों में संगीत प्रोत्साहन क्लबों को सही तरीके से शुरू किया जाना चाहिए। ताकि युवा पीढ़ी शास्त्रीय पहलू से रूबरू हो सके और इसकी सराहना करें। हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन की विशारद तथा डागर बंधुओं एवं सविता देवी की शिष्या रही डॉ. […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/teach-children-classical-music-at-an-early-age-charu/article-24865"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/charu-kapoor.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> शास्त्रीय गायिका डॉ. चारू कपूर ने कहा है कि स्कूलों में संगीत प्रोत्साहन क्लबों को सही तरीके से शुरू किया जाना चाहिए। ताकि युवा पीढ़ी शास्त्रीय पहलू से रूबरू हो सके और इसकी सराहना करें। हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन की विशारद तथा डागर बंधुओं एवं सविता देवी की शिष्या रही डॉ. कपूर ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को समय के साथ बदलने के लिए कुछ नया करना होगा। ताकि इसे जीवित रखा जा सके। गजल, सूफी, भजन, सदाबहार नगमें और कविता गाने वालीं डॉ. चारू अपना कविता पेज ‘कुछ एहसास’ के नाम से चलाती हैं तथा वह गंगा-यमुना तहजीब पर भी लिखती हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>प्रश्न : क्या समकालीन पॉप या बॉलीवुड संगीत शास्त्रीय संगीत की विरासत और संस्कृति की चमक को चुरा रहे हैं?</strong><br />
<strong>डा. कपूर :</strong> मैं दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाती हूँ, मैं युवा दिमाग के साथ काम करती हूं और मुझे लगता है कि इस तेज गति वाली दुनिया में, युवा सभी प्रकार के दबाव से निकलने के लिए हिप हॉप या ईडीएम के लिए समय निकालना चाहते हैं, ना कि शास्त्रीय संगीत जैसी गंभीर चीजों के लिए।<br />
<strong>प्रश्न : शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में बड़े बदलावों के बारे में क्या सोचती हैं?</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>डॉ. कपूर :</strong> एक बड़ी तकनीकी छलांग अभी बाकी है। मेरा पहला स्टेज प्रदर्शन छह साल की उम्र में हुआ था, जब मैंने फिल्म ‘शोर’ में ‘‘एक प्यार का नगमा है’’ गाया था तो शास्त्रीय संगीत में मेरा औपचारिक प्रशिक्षण नौ साल की उम्र से शुरू हुआ।’ हाँ, प्रौद्योगिकी में बहुत बड़ी छलांग है, इसने संगीत पर भी आक्रमण किया है। अब, प्रौद्योगिकी का सहारा लेकर, वे लोग भी गायक बन गए हैं, जिनका संगीत से कोई लेना देना नहीं रहा है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>प्रश्न : इंटरनेट ने संगीत के पेशे को कैसे बदल दिया है?</strong><br />
<strong>डॉ. कपूर :</strong> इंटरनेट ने आपको दुनिया से संपर्क करने की प्रकिया को बहुत आसान बनाया है, लोगों की पहुंच इस तक हो गई है और प्रौद्यौगिकी की बदौलत अब आपके वीडियो वायरल हो सकते हैं।<br />
अब तक किए गए अपने संगीत प्रदर्शन को और अधिक मनोरंजक बताते हुए, बहुमुखी गायिका ने कहा कि लाइव प्रदर्शन बहुत सुखद होते हैं, क्योंकि आपको दर्शकों से त्वरित प्रतिक्रिया मिलती है। वे फुट टैपिंग नंबरों पर ताली बजाने लगते हैं और एक उदास गीत या गजल पर भावुक हो जाते हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>प्रश्न : शास्त्रीय परंपरा के समकालीन होेने पर क्या कहेंगी ?</strong><br />
<strong>डॉ. कपूर :</strong> शुद्धतावादी होने के बजाय, राग आधारित गजल, सूफी, भजन आदि को आत्मसात किया जा सकता है, जो इसकी पवित्रता को अक्षुण्ण बनाकर रखे हुए है मगर फिर भी समकालीन हैं।</h6>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jul 2021 17:00:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>फिल्म निर्माण की विशिष्ट शैली बनायी थी फिरोज खान ने</title>
                                    <description><![CDATA[पुण्यतिथि 27 अप्रैल | Feroz Khan मुम्बई। हिन्दी फिल्मों के निर्माता. निर्देशक और अभिनेता फिरोज खान बॉलीवुड की ऐसी शख्सियत के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने फिल्म निर्माण की अपनी विशेष शैली बनायी थी। फिरोज खान की निर्मित फिल्मों पर नजर डालें तो उनकी फिल्में बडे़ बजट की हुआ करती थीं। जिनमें बड़े […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/feroz-khan-had-created-a-distinct-style-of-film-making/article-22936"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/firoz-khan.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>पुण्यतिथि 27 अप्रैल | Feroz Khan</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुम्बई।</strong> हिन्दी फिल्मों के निर्माता. निर्देशक और अभिनेता फिरोज खान बॉलीवुड की ऐसी शख्सियत के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने फिल्म निर्माण की अपनी विशेष शैली बनायी थी। फिरोज खान की निर्मित फिल्मों पर नजर डालें तो उनकी फिल्में बडे़ बजट की हुआ करती थीं। जिनमें बड़े बड़े सितारे आकर्षक और भव्य सेट, खूबसूरत लोकशन, दिल को छू लेने वाला गीत-संगीत और उम्दा तकनीक देखने को मिलती थी। अभिनेता के रूप में भी फिरोज खान ने बालीवुड के नायक की परम्परागत छवि के विपरीत अपनी एक विशेष शैली गढ़ी जो आकर्षक और तड़क भड़क वाली छवि थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी अकड़ कर चलने की अदा और काउब्वाय वाली इमेज दर्शकों के मन में आज भी बसी हुई है। वह पूर्व के ..क्लाइंट ईस्टवुड.. कहे जाते थे और फिल्म उद्योग के ..स्टाइल आइकान.. माने जाते थे। 25 सितम्बर 1939 को बेंगलूर में जन्में फिरोज खान ने बेंगलूर के बिशप काटन ब्वायज स्कूल और सेंट जर्मन ब्वायज हाई स्कूल से पढ़ाई की और अपनी किस्मत आजमाने के लिए मुम्बई आ गए। वर्ष 1960 में फिल्म.. दीदी.. में उन्हें पहली बार अभिनय करने का मौका मिला। इस फिल्म में वह सहनायक थे। इसके बाद अगले पांच साल तक अधिकतर फिल्मों में उन्हें सहनायक की भूमिकाएं ही मिलीं।</p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Apr 2021 17:44:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कभी गैराज में काम कर गुजारा करते थे अभिनेता धर्मेन्द्र</title>
                                    <description><![CDATA[फिल्म इंडस्ट्री में दाखिल होने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा मुंबई (एजेंसी)। बॉलीवुड के हीमैन धर्मेन्द्र कहते हैं कि फिल्मों में आने से पहले वे गैराज में काम किया करते थे। उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में आए हुए छह दशक हो गये हैं। उनकी छवि इंडस्ट्री में एक एक्शन हीरो के रूप में स्थापित हुई। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/actor-dharmendra-was-worked-in-a-garage/article-19396"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/actor-dharmendra.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>फिल्म इंडस्ट्री में दाखिल होने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> बॉलीवुड के हीमैन धर्मेन्द्र कहते हैं कि फिल्मों में आने से पहले वे गैराज में काम किया करते थे। उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में आए हुए छह दशक हो गये हैं। उनकी छवि इंडस्ट्री में एक एक्शन हीरो के रूप में स्थापित हुई। लेकिन उन्होंने कई सारी सुपरहिट अन्य फिल्मों में भी काम किया है। धर्मेन्द्र ने अपनी एक्टिंग के जरिए जबरदस्त फैन फॉलोइंग हासिल की है। एक समय ऐसा भी रहा था, जब धर्मेन्द्र को फिल्म इंडस्ट्री में दाखिल होने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। हाल ही में धर्मेन्द्र ने इंडियन आइडल के मंच पर शिरकत की। इस दौरान उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में बातें कहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">धर्मेन्द्र ने कहा कि फिल्मों में करियर बनाने से पहले मैं गैराज में रहा करता था। मुंबई में मेरे पास रहने के लिए घर नहीं था। उस समय मैं ड्रिलिंग फर्म में काम किया करता था।मुझे सिर्फ 200 रुपए मिलते थे। इतने में मेरा गुजारा नहीं हो पाता था। इसलिए इसके बाद मुझे और पैसा कमाने के लिए ओवरटाइम करना पड़ा था।</p>
<ul>
<li><strong>फिल्मों में आने से पहले ड्रिलिंग फर्म में करते थे काम</strong></li>
<li><strong>200 रुपये मिलती थी सैलरी</strong></li>
<li><strong>घर का नहीं होता था गुजारा</strong></li>
<li><strong>ओवरटाइम को मजबूर थे धर्मेन्द्र</strong></li>
<li><strong>इंडियन आइडल के मंच पर किया खुलासा</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Oct 2020 03:36:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>हेमा मालिनी को पहचान बनाने के लिये करना पड़ा था संघर्ष</title>
                                    <description><![CDATA[..जन्मदिवस 16 अक्टूबर के अवसर पर .. मुम्बई (एजेंसी)। बॉलीवुड की जानी मानी अभिनेत्री हेमा मालिनी ने लगभग पांच दशक के कैरियर में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया लेकिन कैरियर के शुरआती दौर में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा था और वह दिन भी देखना पड़ा था जब एक निर्माता-निर्देशक ने उन्हें यहां तक कह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/hema-malini-had-to-struggle-to-make-an-identity/article-19320"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/hema-malini.png" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">..जन्मदिवस 16 अक्टूबर के अवसर पर ..</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुम्बई (एजेंसी)। </strong>बॉलीवुड की जानी मानी अभिनेत्री हेमा मालिनी ने लगभग पांच दशक के कैरियर में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया लेकिन कैरियर के शुरआती दौर में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा था और वह दिन भी देखना पड़ा था जब एक निर्माता-निर्देशक ने उन्हें यहां तक कह दिया था कि उनमें स्टार अपील नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">..ड्रीमगर्ल.. हेमा मालिनी ने जब फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा ही था तब एक तमिल निर्देशक श्रीधर ने उन्हें अपनी फिल्म में काम देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि उनमें स्टार अपील नहीं है। बाद में सत्तर के दशक में इसी निर्माता.निर्देशक ने उनकी लोकप्रियता को भुनाने के लिए उन्हें लेकर 1973 में ..गहरी चाल.. फिल्म का निर्माण किया।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Oct 2020 03:40:28 +0530</pubDate>
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                <title>कादर खान के डायलॉग, जो फिल्मों की ‘जान’ बने</title>
                                    <description><![CDATA[कादर खान के कुछ यादगार लम्हें मुंबई (एजेंसी)। बहुमुखी प्रतिभा के धनी दिग्गज कलाकार कादर खान अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन 300 से अधिक फिल्मों में उनके दिये गये डायलॉग प्रशंसकों के दिलो-दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। कादर खान के डायलॉग का ही कमाल था कि महानायक अमिताभ के किरदार वाली कई फिल्मों ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/artist-kader-khan-is-no-longer-in-our-midst/article-19199"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/artist-kader-khan-is-no-longer-in-our-midst.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>कादर खान के कुछ यादगार लम्हें</strong></h2>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> बहुमुखी प्रतिभा के धनी दिग्गज कलाकार कादर खान अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन 300 से अधिक फिल्मों में उनके दिये गये डायलॉग प्रशंसकों के दिलो-दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। कादर खान के डायलॉग का ही कमाल था कि महानायक अमिताभ के किरदार वाली कई फिल्मों ने नयी ऊंचाइयों को छुआ। कादर खान का 81 वर्ष की आयु में मंगलवार को कनाडा में निधन हो गया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वर्ष 1978 में अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘मुकद्दर का सिकन्दर’ में कादर खान का डायलॉग ‘जिंदा हैं वो लोग जो मौत से टकराते हैं। मुर्दों से बदतर हैं वो लोग जो मौत से घबराते हैं। आज भी लोगों की जुबां पर गाहे-बगाहे आ जाते है। फिल्म में फकीर बाबा का रोल निभाने वाले कादर खान का यह डायलॉग  सुख तो बेवफा है, आता है जाता है, दुख ही अपना साथी है, अपने साथ रहता है। दुख को अपना ले तब तकदीर तेरे कदमों में होगी और तू मुकद्दर का बादशाह होगा।ह्व खूब प्रचलित हुआ।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">अमिताभ के साथ 1979 में ‘मिस्टर नटवरलाल’ का कादर खान का लिखा डायलॉग ‘आप हैं किस मर्ज की दवा, घर में बैठे रहते हैं, ये शेर मारना मेरा काम है, कोई मवाली स्मगलर हो तो मारुं मैं शेर क्यों मारुं, मैं तो खिसक रहा हूं और आपमें चमत्कार नहीं है तो आप भी खिसक लो। खूब पसंद किया गया था।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वर्ष 1983 में ‘कुली’ फिल्म जिसमें महानायक को गंभीर चोट भी लगी थी, कादर खान के उनके लिए लिखे डायलॉग ने फिल्म को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इस फिल्म में अमिताभ ने कुली का अभिनय किया था और कादर खान का यह डायलॉग बचपन से सर पर अल्लाह का हाथ और अल्लाहरक्खा है अपने साथ, बाजू पर 786 का है बिल्ला, 20 नंबर की बीड़ी पीता हूं और नाम है ‘इकबाल’। खूब गूंजा था।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">महान अभिनेता की 1983 में ‘हिम्मतवाला’ फिल्म आई। इस फिल्म में कादर खान दिवंगत अमजद खान के हंसोड़ मुंशी का किरदार निभाया। कादर खान को इस फिल्म में सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। फिल्म में उनका डायलॉग ‘मालिक मुझे नहीं पता था कि बंदूक लगाये आप मेरे पीछे खड़े हैं। मुझे लगा कि कोई जानवर अपने सींग से मेरे पीछे खटबल्लू बना रहा है। लोगों की जुबां पर लंबे समय तक बना रहा। कादर खान की 1989 में आई फिल्म ‘जैसी करनी, वैसी भरनी’ के कई डायलॉग खूब प्रचलित और मशहूर हुए। फिल्म में उनका डायलॉग ‘हराम की दौलत इंसान को शुरू.शुरू में सुख जरूर देती है। मगर बाद में ले जाकर एक ऐसे दुख: के सागर में धकेल देती है, जहां मरते दम तक सुख का किनारा कभी नजर नहीं आता।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">इसी फिल्म में महान अभिनेता का यह डायलॉग ‘सुख तो बेवफा तवायफ की तरह है जो आज इसके पास कल उसके पास। अगर इंसान दुख से दोस्ती कर ले तो फिर जिंदगी में कभी उसको सुख की तमन्ना ही नहीं रहेगी। वर्ष 1989 में ही कानून अपना-अपना फिल्म में ‘हम का है मालूम। आरडीयू यानी रिक्शा ड्राइवर यूनियन का लीडर हूं, इसे अलावा एचजीयू मतलब हाथ्र गाड़ी की जो यूनियन है, उसका भी लीडर हूं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">कोई मामूली आदमी नहीं हूं। खूब चला। अमिताभ बच्चन के अभिनय वाली 1990 में आई ह्य अग्निपथ ह्ण को राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाने में कादर खान के लिखे डायलॉग का प्रमुख योगदान रहा । फिल्म का डायलॉग ह्ल विजय दीनानाथ चौहान, पूरा नाम, बाप का नाम दीनानाथ चौहान, मां का नाम सुहासिनी चौहान, गांव मांडवा, उम्र 36 साल नौ महीना आठ दिन और ये सोलहवां घंटा चालू है। ने जमकर धाक जमाई।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वर्ष 1990 की ‘बाप नंबरी बेटा-दस नंबरी’ में चालाक ठग का अभिनय करने वाले कादर खान के डायलॉग तुम्हें बख्शीश कहां से दूं, मेरी गरीबी का तो ये हाल है कि किसी फकीर की अर्थी को कंधा दूं तो वो उसे अपनी इंसल्ट मान कर अर्थी से कूद जाता है। ने खूब सुर्खियां बटोरी।</h6>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Oct 2020 16:11:25 +0530</pubDate>
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                <title>नरगिस का इंटरव्यू लेते समय नर्वस हो गए थे सुनील दत्त</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। बॉलीवुड के दमदार अभिनेता सुनील दत्त , नरगिस का इंटरव्यू लेते समय नर्वस हो गये थे। हिंदी फिल्मों की मशहूर अदाकारा नरगिस की आज पुण्यतिथि है। नरगिस और सुनील दत्त की पहली मुलाकात का किस्सा यूं शुरू हुआ था। सुनील दत्त अपने करियर के शुरूआती दौर रेडियो में बतौर रेडियो जॉकी काम करते थे। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> बॉलीवुड के दमदार अभिनेता सुनील दत्त , नरगिस का इंटरव्यू लेते समय नर्वस हो गये थे। हिंदी फिल्मों की मशहूर अदाकारा नरगिस की आज पुण्यतिथि है। नरगिस और सुनील दत्त की पहली मुलाकात का किस्सा यूं शुरू हुआ था। सुनील दत्त अपने करियर के शुरूआती दौर रेडियो में बतौर रेडियो जॉकी काम करते थे। उस समय तक उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम भी नहीं रखा था, लेकिन नरगिस बड़ी सुपरस्टार बन चुकी थीं। सुनील की नरगिस से पहली बार मुलाकात एक इंटरव्यू के सिलसिले में हुई थी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सुनील दत्त को रेडियो के लिए नरगिस का इंटरव्यू लेना था।</li>
<li style="text-align:justify;">इंटरव्यू के दौरान अपने सामने नरगिस को देखकर सुनील दत्त काफी नर्वस हो गए।</li>
<li style="text-align:justify;">वह उनसे एक भी सवाल नहीं पूछ पाए। सुनील दत्त की नौकरी उस समय जाते-जाते बची थी।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/rangmanch/sunil-dutt-was-nervous-while-taking-nargis-interview/article-14983</link>
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                <pubDate>Sun, 03 May 2020 13:42:02 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विद्या बालन ने कोरोना वारियर्स को दिये 1000 पीपीई किट</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। बॉलीवुड की जानी मानी अभिनेत्री विद्या बालन ने कोरोना वारियर्स को 1000 पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) किट डोनेट किया है। कोरोना वायरस से लड़ाई में पूरा देश जुटा हुआ है। बॉलीवुड के कई सेलेब्रिटीज कोरोना से लड़ रहे लोगों की मदद कर रहे हैं। विद्या बालन ने इस लड़ाई के एक अहम हथियार पीपीई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/vidya-balan-gave-1000-ppe-kit-to-corona-warriors/article-14753"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/vidya-balan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> बॉलीवुड की जानी मानी अभिनेत्री विद्या बालन ने कोरोना वारियर्स को 1000 पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) किट डोनेट किया है। कोरोना वायरस से लड़ाई में पूरा देश जुटा हुआ है। बॉलीवुड के कई सेलेब्रिटीज कोरोना से लड़ रहे लोगों की मदद कर रहे हैं। विद्या बालन ने इस लड़ाई के एक अहम हथियार पीपीई किट कोरोना योद्धाओं को दान करने का एलान किया है। साथ ही लोगों से अपील की है कि वो इसके लिए आगे आएं।</p>
<p style="text-align:justify;">विद्या ने इस अपील का वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि वह 1000 पीपीई डॉक्टरों, नर्सेज और वॉर्ड ब्वॉय के लिए दान कर रही हैं। कोविड 19 से लड़ाई में यही लोग पहली पंक्ति में खड़े हैं और सीधे तौर पर मरीजों के संपर्क में आते हैं। यदि किसी एक मेडिकल स्टाफ को संक्रमण होता है तो कम से कम 8-12 लोग 2-3 हफ़्तों के लिए क्वारंटाइन में भेज दिये जाते हैं। इसी वजह से कई अस्पतालों में स्टाफ की कमी हो गयी है। विद्या ने नागरिकों का पीपीई किट्स खरीदने के लिए फंड जुटाने में मदद करने का आह्वान किया है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2020 14:38:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>दैनिक कामगारों की मदद को आगे आए सलमान खान, देंगे 15 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। कोरोना के चलते पूरे देश में लॉकडाउन के चलते लोग घरों में बंद हैं। ऐसे में रोजाना मजदूरी करके गुजारा करने वाले लोगों को भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे लोगों की मदद के लिए प्रसिद्ध अभिनेता सलमान खान ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। उन्होंने 25000 दैनिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/salman-khan-will-give-15-crores-to-help-the-daily-laborers/article-14347"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/salman-khan-give-help.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> कोरोना के चलते पूरे देश में लॉकडाउन के चलते लोग घरों में बंद हैं। ऐसे में रोजाना मजदूरी करके गुजारा करने वाले लोगों को भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे लोगों की मदद के लिए प्रसिद्ध अभिनेता सलमान खान ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। उन्होंने 25000 दैनिक कामगारों की मदद करने का फैसला किया और वे दो महीने तक उन्हें आर्थिक मदद करेंगे। सलमान खान सीधे उनके बैंक खातों में पैसे भेज रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पॉटब्वॉय की रिपोर्ट के अनुसार, एफडब्ल्यूआईसीई अध्यक्ष बी.एन. तिवारी और महासचिव अशोक दुबे ने दैनिक कामगारों की सूची सलमान खान को सौंपी हैं और कामगारों को पैसे भेजने का काम भी शुरू हो गया है। अशोक दुबे ने वेबसाइट को बताया, ‘सलमान खान की कंपनी की सीईओ समीरा ने फेडरेशन से सलमान की ओर से मदद की जाने की बात की थी, जिसके बाद सलमान खान ने फॉलोअप जानने के लिए मुझे फोन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पहले सलमान खान को 19 हजार कामगारों की सूची दी गई थी, लेकिन इसमें बदलाव किया गया, क्योंकि इसमें से 3000 कामगारों को दूसरे प्रोडक्शन हाउस से मदद मिल चुकी थी। इसके बाद 16000 कामगारों की मदद की जानी थी, जिसके बाद सलमान खान को अब 9000 नए कामगारों की सूची दी गई है। ऐसे में अब सलमान खान 25000 कामगारों की मदद करेंगे। दुबे ने बताया कि वो हर कामगार को हर महीने 3000 रुपये दिए जाएंगे। ऐसे में सलमान खान करीब 15 करोड़ दान दे रहे हैं।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2020 12:13:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डीडी नेशनल पर रामायण और डीडी भारती पर महाभारत का प्रसारण शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना के कहर के चलते सरकार ने लिया निर्णय ताकि घरों में लोगों का समय आसानी से हो पास नई दिल्ली। जानलेवा कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए पूरा देश लॉकडाऊन है। लोग अपने घरों में कैद हैं। ऐसे में सिर्फ टेलीविजन और इंटरनेट ही उनके टाइम पास का साधन रह गए हैं। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/ramayana-and-mahabharata-will-be-shown-on-tv-in-lockdown/article-13948"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/ramayan-and-mahabharat.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;"><strong>कोरोना के कहर के चलते सरकार ने लिया निर्णय</strong></h2>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ताकि घरों में लोगों का समय आसानी से हो पास</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> जानलेवा कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए पूरा देश लॉकडाऊन है। लोग अपने घरों में कैद हैं। ऐसे में सिर्फ टेलीविजन और इंटरनेट ही उनके टाइम पास का साधन रह गए हैं। लोगों के लिए एक राहत भरी खबर ये है कि सरकार ने इसी के मद्देनजर 28 मार्च से रामायण का डीडी नेशनल पर सुबह 9 बजे व रात 9 बजे और महाभारत का डीडी भारती पर दोपहर 12 बजे और सायं 7 बजे प्रसारण शुरू कर दिया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr" xml:lang="hi">कल 28th March से DD Bharati पर दोपहर 12.00 बजे और शाम 7.00 बजे  'महाभारत' के रोज 2 एपिसोड दिखाए जायेंगे।<a href="https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw">@narendramodi</a><a href="https://twitter.com/PIB_India?ref_src=twsrc%5Etfw">@PIB_India</a><a href="https://twitter.com/DDNewslive?ref_src=twsrc%5Etfw">@DDNewslive</a><a href="https://twitter.com/BJP4India?ref_src=twsrc%5Etfw">@BJP4India</a><a href="https://twitter.com/BJP4Maharashtra?ref_src=twsrc%5Etfw">@BJP4Maharashtra</a><a href="https://twitter.com/hashtag/StayAwareStaySafe?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#StayAwareStaySafe</a><a href="https://twitter.com/hashtag/IndiaFightsCoronavirus?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#IndiaFightsCoronavirus</a></p>
<p>— Prakash Javadekar (@PrakashJavdekar) <a href="https://twitter.com/PrakashJavdekar/status/1243542914199945218?ref_src=twsrc%5Etfw">March 27, 2020</a></p></blockquote>
<p></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr" xml:lang="hi">जनता की मांग पर कल शनिवार 28 मार्च से 'रामायण' का प्रसारण पुनः दूरदर्शन के नेशनल चैनल पर शुरू होगा।  पहला एपिसोड सुबह 9.00 बजे और दूसरा एपिसोड रात 9.00 बजे होगा । <a href="https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw">@narendramodi</a><a href="https://twitter.com/PIBIndia?ref_src=twsrc%5Etfw">@PIBIndia</a><a href="https://twitter.com/DDNational?ref_src=twsrc%5Etfw">@DDNational</a></p>
<p>— Prakash Javadekar (@PrakashJavdekar) <a href="https://twitter.com/PrakashJavdekar/status/1243381916654424064?ref_src=twsrc%5Etfw">March 27, 2020</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों का मानना है कि रामायण और महाभारत का प्रसारण हुआ तो लोगों को समय घरों में आसानी से कट जाएगा। साथ ही नई पीढ़ी भी इनसे परिचित हो सकेगी। प्रसार भारती से सीईओ ने ट्विटर पर यह जानकारी दी है।<br />
प्रसार भारती से सीईओ शशि शेखर ने लिखा है, हाँ हम रामायण और महाभारत के फिर से प्रसारण को लेकर बात कर रहे हैं। इसलिए हमें उन पक्षों से बात करना होगी, जिनके पास इनके राइट्स हैं। बने रहिए। जल्द अपडेट देंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से की थी मांग</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">लॉकडाउन के बाद से कई लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को टैग करते हुए ट्वीट किए थे। लोग अब ये भी याद दिला रहे हैं कि कैसे इतवार के दिन जब रामायण का प्रसारण होता था, जो सड़कें सूनी हो जाती थीं। आज भी सड़कें वैसे ही सूनी हैं तो क्यों न रामायण का प्रसारण किया जाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>लोग चुंबक की तरह टीवी से चिपकेंगे</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">एक व्यक्ति ने ट्वीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सूचना तथा प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को टैग करते हुए लिखा है कि टीवी पर रामानंद सागर की रामायण और बीआर चोपड़ा की महाभारत रोज दिखाए जाएं। दो एपिसोड रोज दिखाए जाएं। आइसोलेशन के दौरान ये दोनों सीरियल देखने के लिए लोग टीवी से चुम्बक की तरह चिपक जाएंगे।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2020 12:47:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनमोहन देसाई ने अपनी फिल्मों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया</title>
                                    <description><![CDATA[रुझान बचपन से ही फिल्मों की ओर था मुंबई (एजेंसी)। बॉलीवुड में मनमोहन देसाई का नाम एक ऐसे फिल्मकार के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अपनी निर्मित फिल्मों के जरिये इंटरटेनर नंबर वन के रूप में दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई। फिल्म इंडस्ट्री में ‘मनजी’ के नाम से मशहूर मनमोहन देसाई का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/manmohan-desai-entertained-the-audience-with-his-films/article-13331"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/manmohan-desai.gif" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">रुझान बचपन से ही फिल्मों की ओर था</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> बॉलीवुड में मनमोहन देसाई का नाम एक ऐसे फिल्मकार के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अपनी निर्मित फिल्मों के जरिये इंटरटेनर नंबर वन के रूप में दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई। फिल्म इंडस्ट्री में ‘मनजी’ के नाम से मशहूर मनमोहन देसाई का जन्म 26 फरवरी 1937 को हुआ था। उनके पिता किक्कू देसाई फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे और उन्होंने वर्ष 1930 में एक फिल्म का निर्देशन भी किया था। वह पारामाउंट स्टूडियो के मालिक भी थे। घर में फिल्मी माहौल रहने के कारण उनका रुझान बचपन से ही फिल्मों की ओर हो गया था। वर्ष 1960 में जब मनमोहन देसाई जब महज 24 वर्ष के थे तो उन्हें अपने भाई सुभाष देसाई द्वारा निर्मित फिल्म ‘छलिया’ को निर्देशित करने का मौका मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">       राज कपूर और नूतन जैसे दिग्गज कलाकारों की उपस्थित में भी फिल्म बॉक्स आॅफिस पर बुरी तरह से इन्कार दी गई। हालांकि संगीतकार कल्याणजी-आंनद जी के संगीतबद्ध गीत ‘छलिया मेरा नाम’ और ‘डम-डम डिगा डिगा’ उन दिनों काफी लोकप्रिय हुए थे। वर्ष 1964 में मनमोहन देसाई को फिल्म ‘राजकुमार’ को निर्देशित करने का मौका मिला। इस बार भी फिल्म में उनके चहेते अभिनेता और मित्र शम्मी कपूर थे। इस बार मनमोहन देसाई की मेहनत रंग लाई और फिल्म के सफल होने के साथ ही वह फिल्म इंडस्ट्री में बतौर निर्देशक अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सच्चा झूठा से सफलता की ओर बढ़ा करियर</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">      वर्ष 1970 में प्रदर्शित ‘सच्चा झूठा’ मनमोहन देसाई के सिने करियर की अहम फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में उन्हें उस जमाने के सुपर स्टार राजेश खन्ना को निर्देशित करने का मौका मिला। फिल्म में राजेश खन्ना दोहरी भूमिका में थे। खोया पाया फार्मूले पर बनी इस फिल्म में मनमोहन देसाई ने अपनी निर्देशन प्रतिभा का लोहा मनवा लिया। फिल्म सच्चा-झूठा बॉक्स आफिस पर सुपरहिट साबित हुई। इस बीच मनमोहन देसाई ने भाई हो तो ऐसा, रामपुर का लक्ष्मण, आ गले लग जा, रोटी जैसी फिल्मों का निर्देशन किया, जो दर्शकों को काफी पसंद आई। वर्ष 1977 मनमोहन देसाई के लिए सिने करियर का अहम् वर्ष साबित हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">        इस वर्ष उनकी परवरिश, धरमवीर, चाचा भतीजा, अमर अकबर एंथनी जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदर्शित हुई। इन सभी फिल्मों में उन्होंने अपने खोया-पाया फार्मूले का सफल प्रयोग किया। वह अक्सर यह सपना देखा करते थे कि वह दर्शकों के लिए भव्य पैमाने पर मनोरंजक फिल्म का निर्माण करेंगे। अपने इसी ख्वाब को पूरा करने के लिए उन्होंने फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ के जरिये फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रख दिया और ‘एमकेडी’ बैनर की स्थापना की।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>प्रयोग करने में थे माहिर</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">        अमर अकबर एंथनी उनके सिने करियर की सबसे सफल फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में यूं तो सभी गाने सुपरहिट हुए लेकिन फिल्म का ‘हमको तुमसे हो गया है प्यार’ गीत संगीत जगत की अमूल्य धरोहर के रूप में आज भी याद किया जाता है। इस गीत में पहली और अंतिम बार लता मंगेशकर, मुकेश, मोहमद रफी और किशोर कुमार जैसे नामचीन पार्श्वगायकों ने अपनी आवाज दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">        अमर अकबर एंथनी की सफलता के बाद मनमोहन देसाई ने निश्चय किया कि आगे जब कभी वह फिल्म का निर्देशन करेंगे तो उसमें अमिताभ बच्चन को काम करने का मौका अवश्य देंगे। हमेशा अपने दर्शकों को कुछ नया देने वाले मनमोहन देसाई ने वर्ष 1981 में फिल्म ‘नसीब’ का निर्माण किया। इस फिल्म के एक गाने ‘जॉन जॉनी जर्नादन’ में उन्होंने सितारों की पूरी फौज ही खड़ी कर दी। यह फिल्म जगत के इतिहास में यह पहला मौका था, जब एक गाने में फिल्म जगत के कई दिग्गज कलाकारों की उपस्थिति थी। इसी गाने से प्रेरित होकर शाहरुख खान अभिनीत फिल्म ‘ओम शांति ओम’ के एक गाने में कई सितारों को दिखाया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>‘कुली’ ने रचा इतिहास</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">       वर्ष 1983 में मनमोहन देसाई की एक और फिल्म ‘कुली’ प्रदर्शित हुई, जो हिंदी सिनेमा जगत के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा गयी। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन को पेट में गंभीर चोट लग गई और वह लगभग मौत के मुंह में चले गए थे। फिल्म ‘कुली’ बॉक्स आॅफिस पर सुपरहिट साबित हुई। वर्ष 1985 में मनमोहन देसाई की फिल्म ‘मर्द’ प्रदर्शित हुई, जो उनके सिने करियर की अंतिम हिट फिल्म थी। वर्ष 1988 में मनमोहन देसाई ने फिल्म ‘गंगा जमुना सरस्वती’ का निर्देशन किया लेकिन कमजोर पटकथा के कारण फिल्म बॉक्स आॅफिस पर बुरी तरह से पिट गई। इसके बाद उन्होंने अपने चहेते अभिनेता अमिताभ बच्चन को लेकर फिल्म ‘तूफान’ का निर्माण किया लेकिन यह फिल्म भी बॉक्स आॅफिस पर कोई तूफान नहीं ला सकी। इसके बाद उन्होंने निर्णय लिया कि भविष्य में वह किसी भी फिल्म का निर्माण और निर्देशन नहीं करेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बालकनी से गिरकर हुई थी मौत</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">       बहुमखी प्रतिभा के धनी मनमोहन देसाई ने राजकुमार और किस्मत फिल्म की कहानी भी लिखी। इसके अलावा वर्ष 1963 में प्रदर्शित फिल्म ब्लफ मास्टर का स्क्रीनप्ले भी उन्होंने ही लिखा था। मनमोहन देसाई ने अपने तीन दशक से भी ज्यादा लंबे सिने करियर में लगभग बीस फिल्मों का निर्देशन किया। जिनमें से ज्यादातर फिल्में हिट हुई। अपनी फिल्मों के जरिये दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने वाले मनमोहन देसाई 01 मार्च 1994 को इस दुनिया को अलविदा कह गए। उनकी मौत बालकनी से गिरने से हुई थी।</p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Feb 2020 12:09:33 +0530</pubDate>
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