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                <title>In The - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>सपनों की सुन्दरता पर यकीन करें</title>
                                    <description><![CDATA[सफल जिंदगी के लिये चुनौतियां होना जरूरी है। कुछ चुनौतियों से आप आसानी से पार पा लेते हैं, पर कुछ (Believe In The Beauty Of Dreams) आपसे खुद को बदलने की मांग करती हैं। कामयाबी इस पर निर्भर करती है कि आप कितने बेहतर ढंग से खुद को बदल पाते हैं? चुनौतियों से पार पाने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">सफल जिंदगी के लिये चुनौतियां होना जरूरी है। कुछ चुनौतियों से आप आसानी से पार पा लेते हैं, पर कुछ (Believe In The Beauty Of Dreams) आपसे खुद को बदलने की मांग करती हैं। कामयाबी इस पर निर्भर करती है कि आप कितने बेहतर ढंग से खुद को बदल पाते हैं? चुनौतियों से पार पाने के लिये जीवन में सहने का अभ्यास जरूरी है। इसके बिना किसी का भविष्य उज्ज्वल नहीं हो सकता। जेन मास्टर मैरी जैक्श कहती हैं, अपनी उलझनों का सामना करते हुए अनजान चीजों को गले लगाना हमें विकास की ओर ले जाता है। हमें आगे बढ़ाता है। जीव-विज्ञान बायोलोजी के अनुसार जीव-जंतुओं की वे ही प्रजातियाँ अपना अस्तित्व सुरक्षित रख सकती हैं जिनमें हर परिस्थिति और चुनौती को झेलने की क्षमता होती है। सरवाईकल आॅफ दि फिटेस्ट डार्विन के इस सिद्धांत का भी यही तात्पर्य है। हर व्यक्ति को अपने जीवन में कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करना होता है। यह एक सार्वभौम सत्य है। कोई घटना हो, व्यक्ति या फिर वस्तु, हम दो तरह से चीजों को देखते हैं। कभी हम पर प्यार का चश्मा चढ़ा होता है तो कभी डर का।</p>
<p style="text-align:justify;">लेंस बदलते ही हमारी पूरी सोच बदल जाती है। डर चीजों को एक रूप दे रहा होता है, तो (Believe In The Beauty Of Dreams) प्रेम एक अलग ही धरातल। लेखिका व वक्ता गैब्रियल बर्नस्टेन कहती हैं, हम इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं कि हमारी आंखें क्या देखती हैं? हम जिम्मेदार इस बात के लिए हैं कि उसे कैसे अपनाते हैं। समस्याओं को देखने के लिये भी सकारात्मक नजरिया बहुत अपेक्षित होता है। क्योंकि समय और परिस्थिति के अनुसार समस्याओं का रूपांतरण होता रहता है, पर जिंदगी के साथ उनका अटल संबंध है। वे पहले भी थी, आज भी हैं और आगे भी रहेंगी। जो सहिष्णुता, धैर्य एवं आत्मविश्वास का कवच धारण कर लेते हैं उनके लिए समस्याएँ भी समाधान बन जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जो प्रगति के बाधक तत्त्व हैं, वे भी साधक और सहयोगी बन जाते हैं। जो सुविधाएँ सहज रूप से सुलभ हैं उनका उपयोग करने में कठिनाई नहीं हैं। पर उन्हें दिमाग पर हावी नहीं होने देना चाहिए। जिनकी मनोवृत्ति सुख एवं सुविधावादी हो जाती है उनके लिए छोटी-सी प्रतिकूलता को सहना कठिन हो जाता है। आज जिन राष्ट्रों में सुख-सुविधा के साधनों का विस्तार हो रहा है, वहाँ सहने का अभ्यास घटता जा रहा है। जिसके परिणामस्वरूप वहाँ नाना प्रकार के मनोरोगों की वृद्धि हो रही है तथा आत्महत्या के आँकड़े भी बढ़ते जा रहे हैं। खुद के बारे में सच जानना हो तो जरूरी है कि आप यह महसूस करें कि आप एक बेहतर इंसान हैं। जो लोग खुद को बुरा मानते हैं, वे आमतौर पर हारे हुए और शर्म से भरे हुए, प्रताड़ित और टूटे हुए होते हैं। तो फिर सवाल उठता है कि अच्छाई आती कहां से है? यह एक ऐसा कठिन सवाल है, जिसका सामना धर्म, दर्शनशास्त्र और अब विज्ञान मिलकर कर रहे हैं। जीवन में ऊँचाई और गहराई का समन्वय आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोग कठिनाइयों के काँटों से घबराकर मार्ग बदलते रहते हैं। पर वे अपने जीवन में कभी भी शांति और सफलता के दर्शन नहीं कर सकते। जहाँ किसी प्रकार की कठिनाई और समस्या नहीं हो, इस प्रकार के जीवन की कल्पना एक दिवास्वप्न है, जो कभी भी सफल और सार्थक नहीं हो सकता। विश्व में जितने भी महापुरुष हुए हैं, उन्होंने नानाप्रकार के अवरोधों और संघर्षों का सामना किया है। जिस प्रकार अग्नि में तपने से सोने की आभा में नया निखार आता है, उसी प्रकार संघर्षों की आग में उनका आभामंडल और अधिक तेजस्वी और प्रभावशाली हो जाता है। हम चाहते हैं कि हमारी जिंदगी हमारे हिसाब से चले। हम ही अपने फैसले लें। अकसर लेते भी हैं। बावजूद खुश नहीं होते। अपने लिए फैसलों का दोष भी दूसरों पर ही मढ़ते हैं। हम अपनी मर्जी चलाने के बावजूद रोते रहते हैं, क्योंकि जिम्मेदारी नहीं उठाना चाहते। उपन्यासकार पेट्रिक नेस कहते हैं, ये कहना कि मेरे पास कोई चारा ही नहीं है, खुद को जिम्मेदारियों से मुक्त करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज हर व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास चाहता है। लेकिन इसके लिए सहना और तपना जरूरी है। अंग्रेजी भाषा का प्रसिद्ध वाक्य है-फर्स्ट डिजर्व, देन डिजायर पहले योग्य बनो, बाद में सफलता की कामना करो। जो प्रगति और विकास के सपने को साकार करना चाहते हैं, उनके लिए इस वाक्य का मनन और अनुसरण करना जरूरी है। अधिकतर लोग साधना और तपस्या से बचने के लिए शोर्टकट रास्ते की खोज करते हैं। इससे क्षणिक सफलता मिल सकती है, पर इसके दूरगामी परिणाम हानिकारक होते हैं। इसके कारण मानसिक और सामाजिक प्रदूषण उत्पन्न हो रहा है। विश्व के महापुरुषों ने पुरुषार्थ के बल पर हर परिस्थिति को झेलते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। किसी भी कार्य के प्रारंभ में अवरोधों का सामना करना होता है। जो उनसे विचलित हो जाते हैं वे अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो सकते। जो धीरज से आगे बढ़ते हैं वे उन अवरोधों का निराकरण खोजने में सफल हो जाते हैं। जिंदगी उन्हीं का साथ देती है, जो अपने बल पर कुछ अलग करने की ठानते हैं। जितने बड़े सपने होते हैं, जीवन उतना बड़ा नजर आता है। अरमानों का यह फलक और बढ़ जाता है, जब सपने दूसरों से भी जुड़ जाते हैं। तब उनकी खुशी हम तक ही सीमित नहीं रहती। अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला एलिनोर रूजवेल्ट कहती हैं, भविष्य उनका होता है, जो सपनों की सुंदरता पर यकीन करते हैं।<br />
<strong>ललित गर्ग</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Jan 2019 12:20:53 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिडनी टेस्ट : पुजारा ने सीरीज में तीसरा शतक लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[पुजारा ने इस सीरीज के एडिलेड और मेलबर्न टेस्ट में भी शतक लगाया था सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार मैच की सीरीज के आखिरी टेस्ट के पहले दिन भारत ने पहली पारी में 90 ओवर (Sydney Test: Pujara Made The Third Century In The Series) में चार विकेट पर 303 रन बनाए। चेतेश्वर पुजारा टॉप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">पुजारा ने इस सीरीज के एडिलेड और मेलबर्न टेस्ट में भी शतक लगाया था</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सिडनी।</strong> ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार मैच की सीरीज के आखिरी टेस्ट के पहले दिन भारत ने पहली पारी में 90 ओवर (Sydney Test: Pujara Made The Third Century In The Series) में चार विकेट पर 303 रन बनाए। चेतेश्वर पुजारा टॉप स्कोरर रहे। वे 130 रन बनाकर नाबाद रहे। मंयक अग्रवाल ने भी अहम योगदान दिया। उन्होंने 77 रन बनाए। लोकेश राहुल फिर बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। वे नौ रन ही बना पाए। विराट कोहली 23 और अजिंक्य रहाणे 18 रन बनाकर पवेलियन लौटे। ऑस्ट्रेलिया की ओर से जोश हेजलवुड सबसे सफल रहे। उन्होंने दो, जबकि मिशेल स्टार्क और नाथन लियोन ने एक-एक विकेट लिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5वां टेस्ट शतक लगाया</h2>
<p style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार मैच की सीरीज के चौथे और आखिरी टेस्ट के पहले दिन (Sydney Test: Pujara Made The Third Century In The Series) चेतेश्वर पुजारा ने शतक लगाया। उन्होंने इस सीरीज में तीसरी बार शतक लगाया। उन्होंने एडिलेड और मेलबर्न टेस्ट में भी शतक लगाए थे। यह पुजारा के करियर का 18वां और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांचवां टेस्ट शतक है। पुजारा ने इस सीरीज में जिस-जिस टेस्ट में शतक लगाया, टीम इंडिया ने उसमें जीत हासिल की। इस मैच में उन्होंने मिशेल स्टार्क की गेंद पर चौका मारकर अपना शतक पूरा किया। पुजारा ने इस पारी में अपना अर्धशतक भी चौका मारकर पूरा किया था।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Jan 2019 12:44:37 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली: सब-इंस्पेक्टर की हत्या में शामिल हिज्बुल आतंकी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[महिला मित्र के जरिए मुखबिरी करवाई थी 28 नवंबर को पुलवामा में मिली थी इम्तियाज अहमद मीर की बॉडी नई दिल्ली। पुलवामा में पिछले महीने हुई सब-इंस्पेक्टर इम्तियाज अली की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक हिज्बुल ऑपरेटिव को गिरफ्तार किया। दिल्ली पुलिस के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि अंसार उल हक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/delhi-hizbul-militants-arrested-in-the-murder-of-sub-inspector/article-6676"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/delhi-hizbul-militants-arrested-in.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">महिला मित्र के जरिए मुखबिरी करवाई थी</h1>
<h1 style="text-align:justify;">28 नवंबर को पुलवामा में मिली थी इम्तियाज अहमद मीर की बॉडी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पुलवामा में पिछले महीने हुई सब-इंस्पेक्टर इम्तियाज अली की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक हिज्बुल ऑपरेटिव को गिरफ्तार किया। दिल्ली पुलिस के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि अंसार उल हक नाम के हिज्बुल आतंकी को इम्तियाज की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कहा कि महिला मित्र के जरिए अंसार ने इम्तियाज की मुखबिरी करवाई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रमोद कुशवाहा ने बताया िक अंसार ने अपनी एक महिला मित्र से इम्तियाज अहमद से लिफ्ट मांगने को कहा था। महिला मित्र के जरिए ही हिज्बुल आतंकवादियों को इम्तियाज के बारे में जानकारी मिली थी। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 28 अक्टूबर को आतंकियों ने सीआईडी में सब-इंस्पेक्टर इम्तियाज अहमद मीर (30) की हत्या कर दी थी। इम्तियाज छुट्टी लेकर माता-पिता से मिलने घर जा रहे थे।आतंकी उन्हें पहचान न पाएं, इसके लिए इम्तियाज ने दाढ़ी कटा ली थी। लेकिन बच निकलने में वह नाकाम रहे। यह बात इम्तियाज के साथियों ने बताई है। मीर को चेतावनी दी गई थी कि घर जाते वक्त उन पर आतंकी हमला हो सकता है।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Nov 2018 13:39:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टेस्ट शृंखला में उमेश और भारत का ‘परफेक्ट-10’</title>
                                    <description><![CDATA[आखिरी टेस्ट में विंडीज को 10 विकेट से दी करारी शिकस्त Umesh in the Test series and India’s Perfect-10 हैदराबाद (एजेंसी)। तेज़ गेंदबाज़ उमेश यादव (133 रन पर 10 विकेट) के करियर की शानदार गेंदबाज़ी की बदौलत  भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ दूसरे एवं अंतिम क्रिकेट टेस्ट के तीसरे ही दिन रविवार को 10 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/umesh-in-the-test-series-and-indias-perfect-10/article-6276"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/umesh-in-the-test-series-and-indias-perfect-10-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">आखिरी टेस्ट में विंडीज को 10 विकेट से दी करारी शिकस्त Umesh in the Test series and India’s Perfect-10</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हैदराबाद (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">तेज़ गेंदबाज़ उमेश यादव (133 रन पर 10 विकेट) के करियर की शानदार गेंदबाज़ी की बदौलत  भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ दूसरे एवं अंतिम क्रिकेट टेस्ट के तीसरे ही दिन रविवार को 10 विकेट से एकतरफा जीत अपने नाम करने के साथ सीरीज़ में 2-0 से क्लीन स्वीप कर ली। भारत ने वेस्टइंडीज़ की दूसरी पारी को 46.1 ओवर में 127 रन पर ढेर कर दिया था जिससे उसे 72 रन का मामूली लक्ष्य हासिल हुआ था और उसने तीसरे दिन के खेल की समाप्ति से चंद ओवर पहले बिना कोई विकेट खोए 16.1 ओवर में 75 रन बनाने के साथ जीत अपने नाम कर ली।  युवा बल्लेबाज़ पृथ्वी शॉ ने चौका लगाकर भारत के लिए विजयी रन बटोरा उन्होंने नाबाद 33 रन और लोकेश राहुल ने नाबाद 33 रन की पारियां खेलीं। भारत ने इससे पहले राजकोट टेस्ट को भी तीन दिन में समाप्त कर दिया था जिसमें उसे पारी और 272 रन से करियर की सबसे बड़ी जीत मिली थी। भारत ने इसी के साथ दूसरा मैच 10 विकेट से अपने नाम कर लिया और सीरीज़ को 2-0 से जीता जो उसकी वेस्टइंडीज़ के खिलाफ लगातार सातवीं सीरीज़ जीत है। पहले टेस्ट में शतकीय पारी के साथ पदार्पण करने वाले पृथ्वी ने इस मैच की पहली पारी में 70 रन बनाए थे। भारत को पहली पारी में बढ़त में भी पृथ्वी की अह्म भूमिका रही।</p>
<p style="text-align:justify;">सुबह भारत की पहली पारी लंच तक 367 रन पर सिमट गई थी जिससे उसे 56 रन की बढ़त मिली। भारत की मामूली बढ़त से एक समय वेस्टइंडीज़ मैच में नियंत्रित लग रही थी लेकिन भारतीय गेंदबाज़ों खासकर 30 वर्षीय अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ उमेश ने अपने प्रदर्शन से मेहमान टीम को उसकी दूसरी पारी में टिकने ही नहीं दिया और ओपनर कार्लाेस ब्रेथवेट को शून्य पर रिषभ पंत के हाथों कैच कराकर दूसरी ही गेंद पर भारत को पहला विकेट दिला दिया। इसके बाद कीरोन पावेल रविचंद्रन अश्विन की गेंद पर अजिंक्या रहाणे को कैच दे बैठे और विंडीज़ के दोनों ओपनर खाता खोले बिना लौट गए। वेस्टइंडीज़ के लिए दूसरी पारी में मध्यक्रम के सुनील अम्ब्ररीस ने 95 गेंदों में चार चौके लगाकर सर्वाधिक 38 रन बनाए और शीर्ष स्कोरर रहे जबकि शाई होप ने 28 रन जोड़े जिन्हें जडेजा ने आउट किया। वेस्टइंडीज़ ने मात्र 68 रन तक अपने पांच विकेट खो दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">रोस्टन चेज़ (06) और शेन डाउरिच (00) पर दोनों बल्लेबाज़ों को बोल्ड किया। कप्तान जेसन होल्डर 19 रन ही बना पाए और रवींद्र जडेजा के हाथों आउट हुए। जेम्स वारिकन (07) को रविचंद्रन अश्विन ने आउट किया और वेस्टइंडीज़ का नौंवा विकेट गिर गया। उमेश अपने 10 विकेट के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से एक विकेट ही दूर थे कि कप्तान विराट कोहली ने उन्हें गेंद देने का फैसला किया और उमेश ने उन्हें निराश नहीं किया और शैनन गैबरिएल (01) को बोल्ड करने के साथ न सिर्फ वेस्टइंडीज़ की पारी समेट दी। इससे पहले भारत की पहली पारी तीसरे दिन लंच तक 106.4 ओवर में 367 रन पर सिमट गई। भारत ने अपने छह विकेट 53 रन के भीतर ही गंवा दिए। भारत ने पारी की शुरुआत कल के चार विकेट पर 308 रन से आगे बढ़ाते हुए की।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/sports/umesh-in-the-test-series-and-indias-perfect-10/article-6276</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Oct 2018 12:13:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आधुनिक युग में नए नजरिए से गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[आधुनिक भारतीय चिंतन प्रवाह में गांधी के विचार सार्वकालिक हैं। वे भारतीय उदात्त सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत के अग्रदूत भी हैं और सहिष्णुता, उदारता और तेजस्विता के प्रमाणिक तथ्य भी। सत्यशोधक संत भी और शाश्वत सत्य के यथार्थ समाज वैज्ञानिक भी। राजनीति, साहित्य, संस्कृति, धर्म, दर्शन, विज्ञान और कला के अद्भुत मनीषी और मानववादी विश्व निर्माण के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/from-a-new-perspective-in-the-modern-era-gandhi/article-6092"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/from-a-new-perspective-in-the-modern-era-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आधुनिक भारतीय चिंतन प्रवाह में गांधी के विचार सार्वकालिक हैं। वे भारतीय उदात्त सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत के अग्रदूत भी हैं और सहिष्णुता, उदारता और तेजस्विता के प्रमाणिक तथ्य भी। सत्यशोधक संत भी और शाश्वत सत्य के यथार्थ समाज वैज्ञानिक भी। राजनीति, साहित्य, संस्कृति, धर्म, दर्शन, विज्ञान और कला के अद्भुत मनीषी और मानववादी विश्व निर्माण के आदर्श मापदंड भी। सम्यक प्रगति मार्ग के चिंह्न भी और भारतीय संस्कृति के परम उद्घोषक भी। गांधी के लिए वेद, पुराण एवं उपनिषद् का सारतत्व ही उनका ईश्वर है और बुद्ध, महावीर की करुणा ही उनकी अहिंसा। सत्य, अहिंसा, ब्रहमचर्य, अस्तेय, अपरिग्रह, शरीर श्रम, आस्वाद, अभय, सर्वधर्म समानता, स्वदेशी और समावेशी समाज निर्माण की परिकल्पना ही उनका आदर्श रहा है। गांधी के आदर्श विचार उनके निजी तथा सामाजिक जीवन तक ही सीमित नहीं रहे। उन विचारों को उन्होंने आजादी की लड़ाई से लेकर जीवन के विविध पक्षों में भी आजमाया। तब लोगों का कहना था कि आजादी के लक्ष्य में सत्य और अहिंसा नहीं चलेगी। लेकिन गांधी ने दिखा दिया कि सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर भी आजादी को हासिल किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजादी के आंदोलन के दौरान गांधी ने लोगों को संघर्ष के तीन मंत्र दिए-सत्याग्रह, असहयोग और बलिदान। उन्होंने खुद इसे समय की कसौटी पर कसा भी। सत्याग्रह को सत्य के प्रति आग्रह बताया। यानी आदमी को जो सत्य दिखे उस पर पूरी शक्ति और निष्ठा से डटा रहे। बुराई, अन्याय और अत्याचार का किन्हीं भी परिस्थितियों में समर्थन न करे। सत्य और न्याय के लिए प्राणोत्सर्ग करने को बलिदान कहा। अहिंसा के बारे में उनके विचार सनातन भारतीय संस्कृति की प्रतिध्वनि है। गांधी पर गीता के उपदेशों का व्यापक असर रहा। वे कहते थे कि हिंसा और कायरता पूर्ण लड़ाई में मैं कायरता की बजाए हिंसा को पसंद करुंगा। मैं किसी कायर को अहिंसा का पाठ नहीं पढ़ा सकता वैसे ही जैसे किसी अंधे को लुभावने दृश्यों की ओर प्रलोभित नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अहिंसा को शौर्य का शिखर माना। उन्होंने अहिंसा की स्पष्ट व्याख्या करते हुए कहा कि अहिंसा का अर्थ है ज्ञानपूर्वक कष्ट सहना। उसका अर्थ अन्यायी की इच्छा के आगे दबकर घुटने टेक देना नहीं। उसका अर्थ यह है कि अत्याचारी की इच्छा के विरुद्ध अपनी आत्मा की सारी शक्ति लगा देना। अहिंसा के माध्यम से गांधी ने विश्व को यह भी संदेश दिया कि जीवन के इस नियम के अनुसार चलकर एक अकेला आदमी भी अपने सम्मान, धर्म और आत्मा की रक्षा के लिए साम्राज्य के सम्पूर्ण बल को चुनौती दे सकता है। गांधी के इन विचारों से विश्व की महान विभुतियों ने स्वयं को प्रभावित बताया। आज भी उनके विचार विश्व को उत्प्रेरित कर रहे हैं। लोगों द्वारा उनके अहिंसा और सविनय अवज्ञा जैसे अहिंसात्मक हथियारों को आजमाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे समय में जब पूरे विश्व में हिंसा का बोलबाला है, राष्ट्र आपस में उलझ रहे हैं, मानवता खतरे में है, गरीबी, भुखमरी और कुपोषण लोगों को लील रही है तो गांधी के विचार बरबस प्रासंगिक हो जाते हैं। अब विश्व महसूस भी करने लगा है कि गांधी के बताए रास्ते पर चलकर ही विश्व को नैराश्य, द्वेष और प्रतिहिंसा से बचाया जा सकता है। गांधी के विचार विश्व के लिए इसलिए भी प्रासंगिक हैं कि उन विचारों को उन्होंने स्वयं अपने आचरण में ढालकर सिद्ध किया। उन विचारों को सत्य और अहिंसा की कसौटी पर जांचा-परखा। 1920 का असहयोग आंदोलन जब जोरों पर था उस दौरान चौरी-चौरा में भीड़ ने आक्रोश में एक थाने को अग्नि की भेंट चढ़ा दिया। इस हिंसक घटना में 22 सिपाही जीवित जल गए। गांधी जी द्रवित हो उठे। उन्होंने तत्काल आंदोलन को स्थगित कर दिया। उनकी खूब आलोचना हुई लेकिन वे अपने इरादे से टस से मस नहीं हुए। वे हिंसा को एक क्षण के लिए भी बर्दाश्त करने को तैयार नहीं थे। उनकी दृढ़ता कमाल की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जब उन्होंने महसूस किया कि ब्रिटिश सरकार अपने वादे के मुताबिक भारत को आजादी देने में हीलाहवाली कर रही है तो उन्होंने भारतीयों को टैक्स देने के बजाए जेल जाने का आह्नान किया। विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आंदोलन चलाया। ब्रिटिश सरकार द्वारा नमक पर टैक्स लगाए जाने के विरोध में दांडी यात्रा की और समुद्र तट पर नमक बनाया। उनकी दृढ़ता को देखते हुए उनके निधन पर अर्नोल्ड टोनी बी ने अपने लेख में उन्हें पैगंबर कहा। प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन का यह कथन लोगों के जुबान पर है कि आने वाले समय में लोगों को सहज विश्वास नहीं होगा कि हांड़-मांस का एक ऐसा जीव था जिसने अहिंसा को अपना हथियार बनाया। हिंसा भरे वैश्विक माहौल में गांधी के विचारों की ग्राहयता बढ़ती जा रही है। जिन अंग्रेजों ने विश्व के चतुर्दिक हिस्सों में युनियन जैक को लहराया और भारत में गांधी की अहिंसा को चुनौती दी, आज वे भी गांधी के अहिंसात्मक आचरण को अपनाने की बात कर रहे हैं। विश्व का पुलिसमैन कहा जाने वाला अमेरिका जो अपनी धौंस-पट्टी से विश्व समुदाय को आतंकित करता है अब उसे भी लगने लगा है कि गांधी की विचारधारा की राह पकड़कर ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। सच तो यह है कि गांधी के शाश्वत मूल्यों की प्रासंगिकता बढ़ी है। गांधी अहिंसा के न केवल प्रतीक भर हैं बल्कि मापदण्ड भी हैं जिन्हें जीवन में उतारने की कोशिश हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अभी गत वर्ष पहले ही अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस में अफ्रीकी महाद्वीप के 50 देशों के युवा नेताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि आज के बदलते परिवेश में युवाओं को गांधी जी से प्रेरणा लेने की जरुरत है। गत वर्ष पहले अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका ने महात्मा गांधी की अगुवाई वाले नमक सत्याग्रह को दुनिया के सर्वाधिक दस प्रभावशाली आंदोलनों में शुमार किया। याद होगा अभी कुछ साल पहले जाम्बिया के लोकसभा सचिवालय द्वारा विज्ञान भवन में संसदीय लोकतंत्र पर एक सेमिनार आयोजित किया गया जिसमें राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों ने शिरकत की। जाम्बिया की नेशनल असेम्बली के अध्यक्ष असुमा के. म्वानामवाम्बवा ने इस सम्मेलन के दौरान गांधी के सिद्धान्तों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और कहा कि भारत के साथ हम भी महात्मा गांधी की विरासत में साझेदार हैं। उन्होनें बताया कि अहिंसा के बारे में गांधी जी की शिक्षाओं ने जाम्बिया के स्वतंत्रता आन्दोलन को बेहद प्रभवित किया। सच तो यह है कि अब गांधी के वैचारिक विरोधियों को भी लगने लगा है कि गांधी के बारे में उनकी अवधारणा संकुचित थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें विश्वास होने लगा है कि गांधी के नैतिक नियम पहले से कहीं और अधिक प्रासंगिक और प्रभावी हैं और उनका अनुपालन होना चाहिए। गांधी जी राजनीतिक आजादी के साथ सामाजिक-आर्थिक आजादी के लिए भी चिंतित थे। समावेशी समाज की संरचना को कैसे मजबूत आधार दिया जाए उसके लिए उनका अपना स्वतंत्र चिंतन था। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में विषमता रहेगी, हिंसा भी रहेगी। हिंसा को खत्म करने के लिए विषमता मिटाना जरुरी है। विषमता के कारण समृद्ध अपनी समृद्धि और गरीब अपनी गरीबी में मारा जाएगा। इसलिए ऐसा स्वराज हासिल करना होगा, जिसमें अमीर-गरीब के बीच खाई न हो। शिक्षा के संबंध में भी उनके विचार स्पष्ट थे। उन्होंने कहा है कि मैं पाश्चात्य संस्कृति का विरोधी नहीं हूं। मैं अपने घर के खिड़की दरवाजों को खुला रखना चाहता हूं जिससे बाहर की स्वच्छ हवा आ सके। लेकिन विदेशी भाषाओं की ऐसी आंधी न आ जाए कि मैं औंधें मुंह गिर पड़ूं। गांधी जी नारी सशक्तीकरण के प्रबल पैरोकार थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जिस देश अथवा समाज में स्त्री का आदर नहीं होता उसे सुसंस्कृत नहीं कहा जा सकता। लेकिन दुर्भाग्य है कि गांधी के ही देश में उनके आदर्श विचारों की कद्र नहीं है। आज के दौर में भारत ही नहीं बल्कि विश्व समुदाय को भी समझना होगा कि उनके सुझाए रास्ते पर चलकर ही एक समृद्ध, सामर्थ्यवान, समतामूलक और सुसंस्कृत विश्व का निर्माण किया जा सकता है। <strong><em>अरविंद जयतिलक</em></strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Oct 2018 12:49:11 +0530</pubDate>
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                <title>वर्ल्ड शूटिंग चैम्पियनशिप में भारत को आज दो स्वर्ण पदक</title>
                                    <description><![CDATA[हृदय हजारिका और महिला टीम ने जीता सोना India today won two gold medals in the World Shooting Championship एजेेंसी। चांग्वू (दक्षिण कोरिया) वर्ल्ड शूटिंग चैम्पियनशिप में शुक्रवार को भारत ने दो स्वर्ण पदक जीते। शूटर हृदय हजारिका ने स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल के शूटऑफ में गोल्ड पर निशाना लगाया। वहीं, महिला […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/india-today-won-two-gold-medals-in-the-world-shooting-championship/article-5771"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/india-today-won-two-gold-medals-in-the-world-shooting-championship.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">हृदय हजारिका और महिला टीम ने जीता सोना India today won two gold medals in the World Shooting Championship</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>एजेेंसी। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">चांग्वू (दक्षिण कोरिया) वर्ल्ड शूटिंग चैम्पियनशिप में शुक्रवार को भारत ने दो स्वर्ण पदक जीते। शूटर हृदय हजारिका ने स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल के शूटऑफ में गोल्ड पर निशाना लगाया। वहीं, महिला टीम ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में 188.7 के स्कोर के साथ सोना अपने नाम किया। हजारिका और ईरान के आमिर फाइनल राउंड तक 250.1 अंक के साथ बराबरी पर थे। इसके बाद दोनों के बीच शूटऑफ हुआ, जिसमें हजारिका को 10.3 अंक और आमिर को 10.2 अंक हासिल हुए। 0.1 अंक के साथ शूटऑफ जीतकर हजारिका चैम्पियन बन गए। फाइनल में क्वालीफाई करने के लिए उन्होंने 627.3 का स्कोर किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इलावेनिल ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड: टीम स्पर्धा में 1872.3 अंक लेकर भारत चौथे स्थान पर रहा। भारतीय टीम में हजारिका, दिव्यांश और अर्जुन शामिल थे। महिला टीम में शामिल इलावेनिल वालारिवान (631), श्रेया अग्रवाल (628.5) और मानिनी कौशिक (621.5) ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। इलावेनिल ने 631 के स्कोर के साथ नया जूनियर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Sep 2018 13:36:57 +0530</pubDate>
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