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                <title>GDP - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि 7 प्रतिशत रहने का अनुमान: एडीबी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। New Delhi: एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने बुधवार को भारत की आर्थिक वृद्धि के मजबूत रहने का अनुमान व्यक्त करते हुए कहा कि 31 मार्च 2025 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.0 प्रतिशत और इसके अगले वित्त वर्ष में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि होने की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/gdp-growth-expected-to-be-seven-percent-in-the-current-financial-year-adb/article-62612"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/new-delhi-20.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> New Delhi: एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने बुधवार को भारत की आर्थिक वृद्धि के मजबूत रहने का अनुमान व्यक्त करते हुए कहा कि 31 मार्च 2025 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.0 प्रतिशत और इसके अगले वित्त वर्ष में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। ये अनुमान एडीबी के एशियाई विकास आउटलुक सितंबर 2024 में लगाया गया है। ये अनुमान एडीबी के पहले के अनुमान के अनुरूप ही है। एडीबी के भारत के कंट्री डायरेक्टर मियो ओका ने कहा, ह्लभारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करते हुए उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है और स्थिर विकास के लिए तैयार है। कृषि सुधार ग्रामीण खर्च को बढ़ाएगा, जो उद्योग और सेवा क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन के प्रभावों को पूरक करेगा। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि देश के अधिकांश हिस्सों में औसत से अधिक मानसून से मजबूत कृषि विकास होगा, जिससे चालू वित्त वर्ष में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वृद्धि होगी। यह चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष के लिए उद्योग और सेवा क्षेत्रों, निजी निवेश और शहरी खपत के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखता है। इसके अतिरिक्त, श्रमिकों और फर्मों को रोजगार से जुड़े प्रोत्साहनों की पेशकश करने वाली एक नई सरकारी नीति श्रम मांग को बढ़ा सकती है और अगले वित्त वर्ष से शुरू होने वाले रोजगार सृजन का समर्थन कर सकती है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के राजकोषीय समेकन प्रयासों के साथ, केंद्र सरकार का ऋण पिछले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद के 58.2 प्रतिशत से घटकर चालू वित्त वर्ष में 56.8 प्रतिशत होने का अनुमान है। सामान्य सरकारी घाटा, जिसमें राज्य सरकारें शामिल हैं चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद के 8 प्रतिशत से नीचे रहने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">उच्च कृषि उत्पादन अपेक्षाओं के बावजूद, खाद्य कीमतों में वृद्धि के कारण चालू वित्त वर्ष में उपभोक्ता मुद्रास्फीति बढ़कर 4.7 प्रतिशत होने का अनुमान है। इसने भारत के केंद्रीय बैंक को अधिक उदार मौद्रिक नीति अपनाने से रोका है। यदि बेहतर कृषि आपूर्ति से खाद्य कीमतों में वृद्धि कम होती है, तो केंद्रीय बैंक चालू वित्त वर्ष में नीतिगत दरों को कम करना शुरू कर सकता है, जिससे ऋण विस्तार की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें कहा गया है कि भारत का चालू खाता घाटा चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद का 1.0 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में 1.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो बेहतर निर्यात, कम आयात और मजबूत प्रेषण प्रवाह के कारण दोनों वर्षों के लिए 1.7 प्रतिशत के पिछले पूवार्नुमान से कम है। निकट अवधि के विकास जोखिमों में भू-राजनीतिक झटके शामिल हैं जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और कमोडिटी की कीमतों को बाधित कर सकते हैं, साथ ही कृषि उत्पादन के लिए मौसम संबंधी जोखिम भी शामिल हैं। यह दृष्टिकोण केंद्र सरकार द्वारा चालू वित्त वर्ष में अपने पूंजीगत व्यय लक्ष्य को प्राप्त करने पर आधारित है। इन जोखिमों को उच्च प्रत्यक्ष विदेशी निवेश द्वारा आॅफसेट किया जा सकता है, जो विशेष रूप से विनिर्माण में विकास और निवेश का समर्थन कर सकता है। इसके अतिरिक्त, कृषि उत्पादों की आपूर्ति में सुधार से खाद्य कीमतों में कमी आ सकती है, जिससे संभावित रूप से उपभोक्ता मुद्रास्फीति पूवार्नुमान से कम हो सकती है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="वार्ड 22 की जनता के लिए रेलवे अंडर पास न बनना सबसे बड़ा मुद्दा" href="http://10.0.0.122:1245/the-biggest-issue-for-the-people-of-kaithal-ward-twenty-two-is-not-building-a-railway-underpass/">वार्ड 22 की जनता के लिए रेलवे अंडर पास न बनना सबसे बड़ा मुद्दा</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 25 Sep 2024 15:56:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>भारतीय अर्थव्यवस्था ने रच दिया इतिहास, पूरी दुनिया हैरान!</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। देश की अर्थव्यवस्था (Economy) के लिहाज से आज का दिन यादगार बन गया जब भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पहली बार 4 ट्रिलियन डॉलर के पार निकल गई। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। भारत की जीडीपी में पिछले कुछ वर्षों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/india-gdp-crosses-four-trillion-dollars/article-55052"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/challenge-to-bring-economy-back-on-track.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> देश की अर्थव्यवस्था (Economy) के लिहाज से आज का दिन यादगार बन गया जब भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पहली बार 4 ट्रिलियन डॉलर के पार निकल गई। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। भारत की जीडीपी में पिछले कुछ वर्षों में लगातार वृद्धि हुई है। 2021 में, भारत की जीडीपी 3.2 ट्रिलियन डॉलर थी, 2022 में, यह बढ़कर 3.6 ट्रिलियन डॉलर हो गई और 2023 में, यह बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर हो गई। जर्मनी अभी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जर्मनी की अर्थव्यवस्था अभी 4.28 ट्रिलियल डॉलर है। चालू वर्ष में अब तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार में 28.1 अरब डॉलर की वृद्धि हो चुकी है। Economy</p>
<h3 style="text-align:justify;">सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ | Economy</h3>
<p style="text-align:justify;">इस बीच देश की आर्थिक तरक्की को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। देश की इस तरक्की के लिए प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी जा रही है। सोशली मीडिया प्लेटफॉर्म पर अधिकांश यूजर कह रहे हैं कि मोदी हो तो सबकुछ मुमकिन हैं। इसके अलावा देश के दिग्गज उद्यमी, नेता और दिग्गज हस्तियां भी प्रधानमंत्री की प्रशंसा कर रही है।केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक्स पर पोस्ट किया, ह्लभारत के लिए यह वैश्विक गौरव का क्षण है क्योंकि हमारी जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गई है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में नए भारत का उदय। नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व वास्तव में अद्वितीय है। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस आर्थिक तरक्करी के लिए पीएम मोदी की जमकर तारफी की है। उन्होंने एक्स पर लिखा,ह्लगतिशील, दूरदर्शी नेतृत्व ऐसा दिखता है। खूबसूरती से प्रगति कर रहा हमारा नयाभारत ऐसा ही दिखता है। मेरे साथी भारतीयों को बधाई क्योंकि हमारा राष्ट्र 4 ट्रिलियन अरब डॉलर जीडीपी के आंकड़े को पार कर गया है। आपको अधिक शक्ति, आपका अधिक सम्मान, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Earthquake: दो देशों में भूकंप के जोरदार झटके, टूटे शीशे, लोगों में दहशत" href="http://10.0.0.122:1245/moderate-earthquake-felt-in-chinas-tonga-islands/">Earthquake: दो देशों में भूकंप के जोरदार झटके, टूटे शीशे, लोगों में दहशत</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 20 Nov 2023 17:10:38 +0530</pubDate>
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                <title>देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ी खबर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। वैश्विक अर्थव्यवस्था (Economy) की अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में मजबूत घरेलू मांग और निवेश के समर्थन से सकल घरलू उत्पाद (जीडीपी) (वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन) में एक साल पहले इसी अवधि की तुलना में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/india-economy-news/article-51822"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/challenge-to-bring-economy-back-on-track.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> वैश्विक अर्थव्यवस्था (Economy) की अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में मजबूत घरेलू मांग और निवेश के समर्थन से सकल घरलू उत्पाद (जीडीपी) (वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन) में एक साल पहले इसी अवधि की तुलना में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। इस तरह भारत ने अप्रैल-जून 2023 की तिमाही में चीन के जीडीपी में वृद्धि को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे तेजी से वृद्धि कर रही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की आलोच्य तिमाही की वृद्धि 6.3 प्रतिशत थी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा गुरुवार शाम को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘2023-24 की पहली तिमाही में स्थिर कीमतों पर ( आधार वर्ष 2011-12 ) पर वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 40.37 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर रहने का अनुमान है, जबकि 2022-23 की पहली तिमाही में यह 37.44 लाख करोड़ रुपये था। Economy</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर अप्रैल-जून 2023 की तिमाही में रही 7.8 प्रतिशत</h3>
<p style="text-align:justify;">इस तरह यह सालाना आधार पर जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दशार्ता है। 2022-23 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 13.1 प्रतिशत थी। पिछले साल के आंकड़ों में निम्न तुलनात्मक आधार का भी प्रभाव था। विशेषज्ञों ने पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़ों के बाजार के अनुमानों के अनुरूप बताया है लेकिन जिंस की कीमतों में गिरावट के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि का आंकड़ा कम रहने पर थोड़ी निराशा जतायी है । विनिर्माण क्षेत्र ने पहली तिमाही में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि दिखायी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में कृषि-वानिकी-मत्स्य पालन क्षेत्र का उत्पादन पिछले साल इसी अवधि की तुलना में 3.5 प्रतिशत बढ़ा तथा खनन क्षेत्र का उत्पादन की वृद्धि 5.8 प्रतिशत रही । पिछले वर्ष इन क्षेत्रों की इसी तिमाही की वृद्धि दर क्रमश: 2.4 प्रतिशत और 9.5 प्रतिशत थी।</p>
<p style="text-align:justify;">विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि एक साल पहले के 6.1 प्रतिशत की तुलना में 4.7 प्रतिशत रही जबकि बिजली,गैस, जलापूर्ति और अन्य जन सुविधाओं के क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि 2.9 प्रतिशत रही । पिछले वर्ष इसी दौरान जनसुविधा क्षेत्र की वृद्धि 14.9 प्रतिशत थी। अप्रैल-जून 2023 की तिमाही में निर्माण क्षेत्र की वृद्धि 7.9 प्रतिशत और व्यापार, होटल, परिवहन संचार एवं प्रसारण और अन्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्पादन सालाना आधार पर 9.2 प्रतिशत बढ़ा । एक साल पहले इन क्षेत्रों की वृद्धि दर क्रमश: 16 प्रतिशत और 25.7 प्रतिशत थी। वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवा क्षेत्र ने आलोच्य तिमाही में एक साल पहले के 8.5 प्रतिशत की तुलना में 12.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जबकि लोक-प्रशासन रक्षा और ऐसी अन्य सेवाओं के क्षेत्र की वृद्धि 7.9 प्रतिशत (पिछले वर्ष 21.3 प्रतिशत) रही। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">प्रथमिक कीमत पर सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 2023-24 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत दर्ज किया गया जबकि करों में शुद्ध रूप से 7.7 प्रतिशत की वृद्धि रही। आंकड़ों के अनुसार 2023-24 की पहली तिमाही में वर्तमान कीमतों पर जीडीपी 70.67 लाख करोड़ रुपये रहा जो 2022-23 की पहली तिमाही के 65.42 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 8.0 प्रतिशत की वृद्धि दशार्ता है । 2022-23 की पहली तिमाही में वर्तमान मूल्य पर जीडीपी में 27.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में जीडीपी में व्यय के हिस्से के रूप में सकल स्थायी पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) पर व्यय 29.3 प्रतिशत रहा जो पिछले वर्ष इसी दौरान 29.1 प्रतिशत रहा। जीएफसीएफ का आंकड़ा अर्थव्यवस्था में पूंजीगत निवेश के रुझान को दशार्ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘पहली तिमाही की जीडीपी वृद्धि के आंकड़े हमारी उम्मीद के अनुरूप है पर इसमें अलग अलग हिस्सों के योगदान की स्थिति पर कुछ आश्चर्य होता है । जिंसों की कीमतों में वार्षिक आधार पर गिरावट के चलते आदर्श रूप से विनिर्माण क्षेत्र की फर्मों के परिचालन लाभ में वृद्धि और इस क्षेत्र के उत्पादन के मूल्य में तेज वृद्धि होनी चाहिए थी , पर इस क्षेत्र ने जिस तरह निराश किया वह आश्चर्यजनक है। उन्होंने कहा कि सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर मजबूत वृद्धि बनी हुई है। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">मिलवुड केन इंटरनेशनल के संस्थापक एवं सीईओ नीश भट्ट ने कहा,‘निवेश में सुधार, घरेलू मांग में वृद्धि, सेवा और कृषि क्षेत्र की तगड़ी वृद्धि जैसे कई कारकों ने पहली तिमाही में भारत के जीडीपी को 7.8 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि आलोच्य तिमाही में भारत की वृद्धि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के 6.3 प्रतिशत से ऊपर रही और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था की अपनी ख्याति बनाए हुए है। रियल एस्टेट क्षेत्र की परामर्श कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया के निदेशक (अनुसंधान) विवेक राठी ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की यह वृद्धि घरलू उपभोग और निवेश की गतिविधियों में तेजी की बदौलत है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="तरनतारन में हेरोइन बरामद" href="http://10.0.0.122:1245/heroin-seized-in-tarn-taran/">तरनतारन में हेरोइन बरामद</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/business/india-economy-news/article-51822</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 15:22:27 +0530</pubDate>
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                <title>Rs 2000 Note: 2 हजार के नोट पर हुआ बड़ा खुलासा!</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Rs 2000 Note news: 2 हजार का नोट बंद हो चुका है। 2 हजार के नोट पर एक बड़ी बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक का 2 हजार रुपये के नोट चलन से वापस लेने का फैसला चालू वित्त वर्ष में खपत को बढ़ावा देकर आर्थिक वृद्धि दर को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/rs-two-thousand-note-news/article-49037"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/2000-rupee-note-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Rs 2000 Note news: 2 हजार का नोट बंद हो चुका है। 2 हजार के नोट पर एक बड़ी बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक का 2 हजार रुपये के नोट चलन से वापस लेने का फैसला चालू वित्त वर्ष में खपत को बढ़ावा देकर आर्थिक वृद्धि दर को 6.5% से भी आगे ले जाने में काफी मददगार साबित हो सकता है। इस बारे में एक रिपोर्ट पेश की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने रिपोर्ट में खुलासा किया कि वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 8.1% हो जाएगी और समूचे वित्त वर्ष के लिए 6.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान भी पीछे छूट सकता है। Rs 2000 Note गौरतलब है कि बीते 19 मई 2023 को 2,000 रुपये के गुलाबी नोटों को सकुर्लेशन से बाहर करने का ऐलान किया था। इन बंद किए गए नोटों को बदलने की प्रक्रिया 23 मई से शुरू हो गई है, जो कि 30 सितंबर तक जारी रहेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रिपोर्ट में खुलासा | Rs 2000 Note</h4>
<p style="text-align:justify;">भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अर्थशास्त्रियों ने सोमवार को एक रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 8.1 प्रतिश हो जाएगी व समूचे वित्त वर्ष के लिए 6.5 प्रतिशत वृद्धि का आरबीआई का अनुमान भी पीछे छूट सकता है।  Rs 2000 Note</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार 2 हजार के नोट के रूप में कुल 3.08 लाख करोड़ रुपये प्रणाली में जमा के रूप में लौटेंगे। इनमें से करीब 92 हजार करोड़ रुपये बचत खातों में जाम किए जाएंगे जिसका 60% यानी करीब 55 हजार करोड़ रुपये निकाली के बाद लोगों के पास खर्च के लिए पहुंच जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, खपत में गुणक बढ़ोत्तरी की वजह से लंबे समय में यह कुल बढ़ोत्तरी 1.83 लाख करोड़ रुपये तक रह सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सोने के आभूषणों की खरीद बढ़ी | 2000 notes news</h3>
<p style="text-align:justify;">लोग 2000 के नोटों को लेकर बैंकों की लाइन में नहीं लगना चाहते। हालांकि बैंकों में इस वक्त भीड़ भी नहीं है। फिर भी लोग इन नोटों से खरीदारी ज्यादा कर रहे हैं। वैसे तो ज्वेलरी की शॉप पर आमतौर पर ग्राहक को सोने की ज्वेलरी पर अधिकृत बिल मिलता है। लेकिन शहर या फिर गांव में ज्वेलरी की ऐसी भी दुकानें हैं जो बिना बिल के आभूषण बना कर देते हैं। ऐसी स्थिति में जीएसटी की चोरी से सरकार को भी चूना लग रहा है। लेकिन इस तरफ किसी का भी ध्यान नहीं है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">फटे हुए नोट पर कितनी मिलेगी कीमत | 2000 Rupee Note</h4>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई के अनुसार, फटे नोटों का उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। रिपोर्ट के अनुसार दो हजार रुपये के नोट की लंबाई 16.6, चौड़ाई- 6.6 और एरिया 109.56 होता है। ऐसे में 200 नोट का 88 वर्ग सेंटीमीटर होने पर पूरा पैसा मिलेगा वहीं 44 वर्ग सीएम पर आधा ही पैसा मिलेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कहां कराए जमा पैसा | 2000 Rupee Note</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि बैंक ग्राहकों से कटे-फटे नोटों को बदलने के लिए कोई भी चार्ज नहीं लेता है, लेकिन वह ज्यादा खराब स्थिति वाले नोटों को बदलने से मना कर सकता है। जिन नोटों की स्थिति ज्यादा खराब होती है उनको आप आरबीआई के कार्यालय में जमा करा सकते हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 11:01:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जीडीपी और वाहन बिक्री के आंकड़ों का बाजार पर रहेगा असर</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। दुनिया के केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर में आगे भी बढ़ोतरी करने की आशंका से बीते सप्ताह ढाई फीसदी से अधिक लुढ़के घरेलू शेयर बाजार पर अगले सप्ताह वैश्विक रुख के साथ ही स्थानीय स्तर पर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और फरवरी की वाहन बिक्री के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/gdp-and-vehicle-sales-figures-will-affect-the-market/article-43925"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/gdp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> दुनिया के केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर में आगे भी बढ़ोतरी करने की आशंका से बीते सप्ताह ढाई फीसदी से अधिक लुढ़के घरेलू शेयर बाजार पर अगले सप्ताह वैश्विक रुख के साथ ही स्थानीय स्तर पर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और फरवरी की वाहन बिक्री के जारी होने वाले आंकड़ों का असर रहेगा।<br />
बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1538.64 अंक अर्थात 2.52 प्रतिशत का गोता लगाकर सप्ताहांत पर 60 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 59463.93 अंक पर आ गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 478.4 अंक यानी 2.7 प्रतिशत की बड़ी गिरावट लेकर 17465.80 अंक पर रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">समीक्षाधीन सप्ताह में बीएसई की दिग्गज कंपनियों की तरह मझौली और छोटी कंपनियों में भी जमकर बिकवाली हुई। इससे सप्ताहांत पर मिडकैप 506.47 अंक यानी 2.1 प्रतिशत लुढ़ककर 24178.73 अंक और स्मॉलकैप 461.81 अंक अर्थात 1.65 प्रतिशत टूटकर 27584.59 अंक पर आ गया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी लगातार छठे दिन गिरते हुए सप्ताहांत पर ढाई प्रतिशत से अधिक की गिरावट पर रहा। बाजार पहले से ही उच्च स्तर पर जाने के लिए संघर्ष कर रहा था और अब अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में उछाल के कारण वैश्विक बाजारों में बिकवाली सेंसेक्स-निफ्टी के लिए बाधक बनी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">घरेलू शेयर बाजार बाजार निकट अवधि में अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल और डॉलर सूचकांक की गति के साथ-साथ वैश्विक बाजारों की दिशा पर नजर रखेगा क्योंकि वर्ष 2023 की पहली छमाही में अमेरिका में ब्याज दर परिदृश्य एक प्रमुख कारक बना रहेगा। वर्तमान में बाजार भू-राजनीतिक स्थिति पर अधिक प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। स्थानीय स्तर पर अगले सप्ताह 28 फरवरी को वित्त वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी होने वाले हैं, जिसका बाजार पर स्पष्ट असर देखा जा सकेगा। इसके साथ ही अगले सप्ताह फरवरी की वाहन बिक्री के आंकड़े भी आने वाले हैं। बाजार को दिशा देने में इसकी भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                <pubDate>Sun, 26 Feb 2023 12:19:40 +0530</pubDate>
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                <title>GDP आंकड़ों पर रहेगी निवेशकों की नजर</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका और फेड रिजर्व के ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अटकलों से विदेशी बाजारों में आई गिरावट के दबाव में बीते सप्ताह 1.36 प्रतिशत तक गिरे घरेलू शेयर बाजार की नजर अगले सप्ताह जारी होने वाले आर्थिक विकास, कार बिक्री और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/investor-monitor-will-be-on-gdp-figures/article-37145"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/dmestic-stock-market1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका और फेड रिजर्व के ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अटकलों से विदेशी बाजारों में आई गिरावट के दबाव में बीते सप्ताह 1.36 प्रतिशत तक गिरे घरेलू शेयर बाजार की नजर अगले सप्ताह जारी होने वाले आर्थिक विकास, कार बिक्री और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों पर रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 812.28 अंक टूटकर सप्ताहांत पर 59 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 58833.87 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 199.55 अंक गिरकर 17558.90 अंक पर रहा। वहीं, समीक्षाधीन सप्ताह में बीएसई की दिग्गज कंपनियों के विपरीत छोटी और मझौली कंपनियों में तेजी रही। सप्ताहांत पर मिडकैप 153.43 अंक चढ़कर 25119 अंक और स्मॉलकैप 240.51 अंक की तेजी लेकर 28415.89 अंक पर रहा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े भी आएंगे</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">विश्लेषकों के अनुसार, अगले सप्ताह 31 अगस्त को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े जारी होने वाले हैं। इस आंकड़े पर निवेशकों की नजर रहेगी। इसका असर अगले सप्ताह बाजार पर दिखेगा। इसके साथ ही 01 सितंबर को अगस्त में हुई वाहनों की बिक्री तथा अगले सप्ताह ही अगस्त के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े भी आएंगे। बाजार की दिशा निर्धारित करने में इन कारकों की भी अहम भूमिका होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल की दो दिन पूर्व हुई जैक्सन हॉल बैठक के दौरान उनके वक्तव्य में महंगाई को दो प्रतिशत के लक्ष्य के दायरे में लाने के लिए सभी आवश्यक कदम तेजी से उठाए जाने के संकेत पर अगले सप्ताह वैश्विक बाजार की प्रतिक्रिया सामने आएगी। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि ऊंची ब्याज दरें, धीमी विकास दर और श्रम बाजार में नरमी से मुद्रास्फीति में कमी आएगी। हम इसे तब तक जारी रखेंगे जब तक हमें विश्वास नहीं हो जाता कि काम पूरा हो गया है। ऐसे में छोटे निवेशकों को सलाह है कि वह सतर्कता बरतें।</p>
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                <pubDate>Sun, 28 Aug 2022 11:28:59 +0530</pubDate>
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                <title>जीडीपी और वाहन बिक्री आंकड़ों का बाजार पर रहेगा असर</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। वैश्विक बाजार के मजबूत रुख से हुई चौतरफा लिवाली की बदौलत बीते सप्ताह एक प्रतिशत से अधिक की तेजी में रहे घरेलू शेयर बाजार पर अगले सप्ताह समाप्त वित्त वर्ष के लिए जारी होने वाले सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), अप्रैल में वाहन बिक्री एवं विनिर्माण पीएमआई आंकड़ों का असर रहेगा। बीते सप्ताह बीएसई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/gdp-and-vehicle-sales-figures-will-have-an-impact-on-the-market/article-33968"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/sales-of-expensive-cars1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> वैश्विक बाजार के मजबूत रुख से हुई चौतरफा लिवाली की बदौलत बीते सप्ताह एक प्रतिशत से अधिक की तेजी में रहे घरेलू शेयर बाजार पर अगले सप्ताह समाप्त वित्त वर्ष के लिए जारी होने वाले सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), अप्रैल में वाहन बिक्री एवं विनिर्माण पीएमआई आंकड़ों का असर रहेगा। बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 558.27 अंक की उछाल लेकर 54884.66 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 86.3 अंक की बढ़त लेकर 16352.45 अंक पर रहा। समीक्षाधीन सप्ताह में बीएसई की दिग्गज और मझौली कंपनियों की तेजी के विपरीत छोटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही। इस दौरान मिडकैप 10.89 अंक बढ़कर 22517.74 अंक पर पहुंच गया जबकि स्मॉलकैप 729.72 अंक लुढ़ककर 25621.57 अंक पर आ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बाजार विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक रुख के दबाव में बीते सप्ताह घरेलू शेयर तीन दिन गिरावट वहीं अंतिम दो दिन तेजी पर रहा। सेंसेक्स और निफ्टी पर अगले सप्ताह भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार के रुख का असर देखा जा सकेगा। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों के समर्थन से बाजार को मदद मिलने की उम्मीद है। अगले सप्ताह 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष 2021-22 और इसी वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़े जारी होंगे। साथ ही अप्रैल 2022 के लिए जारी होने वाले वाहन बिक्री एवं विनिर्माण पीएमआई के आंकड़ों की बाजार की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                <pubDate>Sun, 29 May 2022 12:50:31 +0530</pubDate>
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                <title>जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान 50 प्रतिशत: आर्थिक सर्वेक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2021-22 पेश करते हुए कहा कि भारत के सकल घरेलू उत्?पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक रहा। समीक्षा में इस बात का भी उल्?लेख किया गया है कि चालू वित्?त वर्ष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/service-sector-contributes-50-percent-to-gdp-economic-survey/article-30399"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/gdp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2021-22 पेश करते हुए कहा कि भारत के सकल घरेलू उत्?पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक रहा। समीक्षा में इस बात का भी उल्?लेख किया गया है कि चालू वित्?त वर्ष की पहली छमाही के दौरान सेवा क्षेत्र में क्रमबद्ध सुधार भी दर्ज किया गया। इसमें कहा गया है कि 2021-22 की प्रथम छमाही के दौरान सेवा क्षेत्र में कुल मिलाकर 10.8 प्रतिशत वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि हुई। वर्ष 2021-22 में समग्र सेवा क्षेत्र का जीवीए 8.2 प्रतिशत बढ़ने की आशा है। हालांकि, आर्थिक समीक्षा में इस बात पर विशेष जोर देते हुए कहा गया है कि कोरोना के ओमि?क्रॉन वैरिएंट के फैलने के कारण विशेषकर उन क्षेत्रों में निकट भविष्य में कुछ हद तक अनिश्चितता रहने की संभावना है जिनमें मानव संपर्क आवश्यक होता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>विश्व वाणिज्यिक सेवाओं के निर्यात में भागीदारी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत में सेवा क्षेत्र एफडीआई प्रवाह का सबसे बड़ा प्राप्?तकर्ता रहा है। वर्ष 2021-22 की पहली छमाही के दौरान सेवा क्षेत्र को 16.73 अरब डॉलर का प्रवाह हुआ है। वित्?तीय, व्?यापार, आउटसोर्सिंग, अनुसंधान एवं विकास, कुरियर, शिक्षा उप-क्षेत्र के साथ प्रौद्योगिकी परीक्षण एवं विश्?लेषण में एफडीआई अधिक रहा है। आर्थिक समीक्षा में इस बात को रेखांकित किया गया है कि वैश्विक सेवा निर्यात में भारत का प्रमुख स्?थान रहा। वर्ष 2020 में वह शीर्ष 10 सेवा निर्यातक देशों में बना रहा। विश्?व वाणिज्यिक सेवाओं के निर्यात में इसकी भागीदारी वर्ष 2019 में 3.4 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में 4.1 प्रतिशत हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">समीक्षा में कहा गया कि व्?यापारिक निर्यात की तुलना में भारत के सेवाओं के निर्यात पर कोविड-19 प्रेरित वैश्विक लॉकडाउन का प्रभाव कम गंभीर था। परिवहन सेवा के निर्यात पर कोविड-19 के प्रभाव के बावजूद सॉफ्टवेयर निर्यात, व्यापार और ट्रांसपोर्टेशन सेवाओं की सहायता की बदौलत सेवाओं के सकल निर्यात में दहाई आंकड़े में वृद्धि दर्ज की गई जिसके परिणामस्वरूप वित्?त वर्ष 2021-22 की पहली छमाही में सेवाओं के शुद्ध निर्यात में 22.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">विकास एवं नवाचार के अगले स्तर तक पहुंचाएगा।</h4>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक समीक्षा में आईटी-बीपीएम सेवा को भारत के सेवा क्षेत्र के प्रमुख खंड के रूप में वर्णित किया गया है। नेस्?कॉम के अनुमान के अनुसार वर्ष 2020-21 के दौरान आईटी-बीपीएम राजस्व (ई-कॉमर्स के अतिरिक्त) वार्षिक 2.26 प्रतिशत बढ़कर 1.38 लाख कर्मचारियों को जोड़ते हुए 194 अरब डॉलर तक पहुंच गया। समीक्षा में कहा गया है कि आईटी-बीपीएम क्षेत्र के अंतर्गत आईटी सेवाओं की हिस्?सेदारी अधिक है। पिछले साल के दौरान अन्य सेवा प्रदाता विनियमों, दूरसंचार क्षेत्र के सुधारों और उपभोक्?ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम 2020 सहित क्षेत्र में नवाचार और प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए कई नीतिगत पहल की गई। समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि इससे प्रतिभा तक अभिगम का विस्?तार होगा, रोजगार सृजन बढ़ेगा और इस क्षेत्र को विकास एवं नवाचार के अगले स्?तर तक पहुंचाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समीक्षा में बताया गया है कि भारत में पिछले 6 वर्षों में स्टार्ट-अप की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इनमें से अधिकांश स्?टार्ट-अप सेवा क्षेत्र से संबंधित हैं। 10 जनवरी 2022 तक 61,400 से ज्?यादा स्टार्ट-अप को मान्?यता दिया जा चुका है। इसके अलावा यह भी बताया गया है कि भारत में 2021 में रिकॉर्ड 44 स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न स्थिति तक पहुंचे। इसमें इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि बौद्धिक संपदा विशेषकर पेटेंट आधारित अर्थव्यवस्था की कुंजी है। भारत में दायर पेटेंट की संख्या 2010-11 में 39,400 से बढ़कर 2020-21 में 58,502 हो गई है और इसी अवधि के दौरान भारत में दिये गये पेटेंट 7,509 से बढ़कर 28,391 हो गए हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">समीक्षा में कहा गया है कि सामान्यत</h4>
<p style="text-align:justify;">जीडीपी वृद्धि, विदेशी मुद्रा आय और रोजगार में पर्यटन क्षेत्र का प्रमुख योगदान रहता है। हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण भारत सहित सभी जगहों पर वैश्विक यात्रा तथा पर्यटन को कमजोर करने वाला प्रभाव पड़ा है। आर्थिक समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन का पुन: आरंभ होना काफी हद तक यात्रा प्रतिबंधों, सामंजस्यपूर्ण सुरक्षा और सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा उपभोक्ताओं के विश्वास को बहाल करने में सहायता करने के लिए प्रभावी संचार के संदर्भ में देशों के बीच एक समन्वित प्रतिक्रिया पर निर्भर करता रहेगा। वंदे भारत मिशन के तहत विशेष अंतर्राष्?ट्रीय उड़ानें संचालित की जा रही हैं, जो वर्तमान में अपने 15वें चरण में है और 63.55 लाख यात्रियों को ले जा चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">समीक्षा में कहा गया है कि बंदरगाहों का विकास अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। बंदरगाह आयात-निर्यात कार्गो का लगभग 90 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 70 प्रतिशत संभालते हैं। मार्च 2021 तक सभी बंदरगाहों की कुल कार्गो क्षमता बढ़कर 1,246.86 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) हो गई, जबकि मार्च 2014 में 1052.23 एमटीपीए थी। वर्ष 2020-21 में कोविड-19 के कारण उत्पन्न बाधाओं से प्रभावित होने के बाद अप्रैल-नवम्?बर 2021 के दौरान 10.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज किये जाने के साथ वर्ष 2021-22 में बंदरगाह यातायात में भी वृद्धि हुई है। देश में बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा देने के प्रति लक्षित सागरमाला कार्यक्रम का भी समीक्षा में उल्लेख किया गया है। वर्तमान में 5.53 लाख करोड़ रुपये की कुल 802 परियोजनाएं इस कार्यक्रम का अंग हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Jan 2022 16:58:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वित्त वर्ष 2022 में जीडीपी 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान: एडीबी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। एशियाई विकास बैंक ने बुधवार को कहा कि घरेलू मांग और निर्यात में तेजी के बल पर वित्त वर्ष 2021 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 10 फीसदी रह सकती है, लेकिन वित्त वर्ष 2022 में यह नरम पड़कर 7.5 प्रतिशत रह सकता है। एडीबी ने अपनी एशियन डेवलपमेंट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/gdp-forecast-to-be-7-5-percent-in-fy22-adb/article-27091"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/gdp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> एशियाई विकास बैंक ने बुधवार को कहा कि घरेलू मांग और निर्यात में तेजी के बल पर वित्त वर्ष 2021 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 10 फीसदी रह सकती है, लेकिन वित्त वर्ष 2022 में यह नरम पड़कर 7.5 प्रतिशत रह सकता है। एडीबी ने अपनी एशियन डेवलपमेंट आउटलुक 2021 के अपडेट रिपोर्ट में कहा है कि मार्च 2022 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में कोरोना महामारी की दूसरी लहर से सेवायें बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका असर घरेलू उपभोग और शहरी क्षेत्र पर भी हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">उसने कहा कि कोरोना टीकाकरण में तेजी से महामारी के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया है। इसके साथ ही कारोबारियों, आम लोगों और हेल्थकेयर क्षेत्र की तैयारियों से महामारी के प्रभाव को कम करने में मदद मिली है। एडीबी के भारत में निदेशक टाकिओ कोनिशि ने कहा कि भारत अर्थव्यवस्था में सुधार के बेहतर संकेत दिख रहे क्योंकि दूसरी लहर के प्रभाव को काफी हद तक कम किया गया है। सरकार की वैक्सीनेशन पहल, वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए अधिक संसाधनों में राहत देने की पहल के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़े उपायों को सशक्त बनाने से तीव्र सुधार में बहुत मदद मिली है।</p>
<p style="text-align:justify;">एडीबी ने कहा कि वित्त वर्ष2021 की तीन अंतिम तिमाहियों में अर्थव्यवस्था में जबदरस्त तेजी का अनुमान लगाया गया था क्योंकि ई वेबिल, मोेबिलिटी डेटा और पीएमआई में सुधार से कोरोना की दूसरी लहर के बावजूद चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी 20.1 प्रतिशत की गति से बढ़ा है। निजी उपभोक और निवेश के कमजोर रहने का अनुमान है क्योंकि दूसरी लहर से लोगों की आय के साथ ही व्यय क्षमता और ऋण उठाव प्रभावित हो रहा है। हालांकि सरकार की राट्रीय मौद्रीकरण योजनाा से सरकारी व्यय में इंफ्रास्ट्रक्चर व्यय में तेजी आने का अनुमान है। कृषि क्षेत्र में तेजी बन रह सकती है। वैश्विक मांग से निर्यात में तेजी आ सकती है। एडीबी ने कहा कि तेल की वैश्विक कीमतों आ रही तेजी के साथ ही घरेलू स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में तेजी रहने से मुद्रास्फीति का दबाव बना रहा सकता है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
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                <pubDate>Wed, 22 Sep 2021 12:07:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार पर दिखेगा जीडीपी के आंकड़ों का असर</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। कोविड-19 के मामलों में कमी से घरेलू शेयर बाजारों में बीते सप्ताह लगातार दूसरी साप्ताहिक तेजी के बाद आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर कोविड के ग्राफ के साथ ही जीडीपी के आंकड़ों पर भी रहेगी। वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/the-impact-of-gdp-figures-will-be-seen-on-the-stock-market/article-24016"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/dmestic-stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> कोविड-19 के मामलों में कमी से घरेलू शेयर बाजारों में बीते सप्ताह लगातार दूसरी साप्ताहिक तेजी के बाद आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर कोविड के ग्राफ के साथ ही जीडीपी के आंकड़ों पर भी रहेगी। वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े सोमवार को जारी होने हैं। महामारी के कारण जीडीपी में गिरावट तय है। देखने वाली बात यह होगी कि यह गिरावट कितनी रहती है और चौथी तिमाही में कितना सुधार देखने को मिलता है। पिछला सप्ताह निवेशकों के लिए अच्छा रहा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सभी पांच कारोबारी दिवस बढ़त में रहा। पूरे सप्ताह के दौरान 260.35 अंक यानी 1.72 फीसदी चढ़कर ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर 15,435.65 अंक पर बंद हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स भी 882.40 अंक यानी 1.75 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त के साथ 51,422.88 अंक पर पहुंच गया जो करीब तीन महीने का उच्चतम स्तर है। इसमें मंगलवार को छोड़ अन्य चार दिन तेजी रही। मझौली कंपनियों का सूचकांक मिडकैप 176.08 अंक यानी 0.82 प्रतिशत की मजबूती के साथ 21,661.83 अंक पर बंद हुआ। छोटी कंपनियों का सूचकांक स्मॉलकैप 348.29 अंक यानी 1.51 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त में 23,478.69 अंक पर पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप भी गुरुवार को ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गये थे हालांकि शुक्रवार को इनमें गिरावट रही।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 30 May 2021 09:24:45 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जीडीपी में 7.5 प्रतिशत गिरावट का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को घोषित मौद्रिक नीति में लगातार तीसरी बार रेपो दर और रिवर्स रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज इसका ऐलान किया। आरबीआई ने रेपो दर चार प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/7-5-percent-decline-in-gdp/article-20329"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/gdp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को घोषित मौद्रिक नीति में लगातार तीसरी बार रेपो दर और रिवर्स रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज इसका ऐलान किया। आरबीआई ने रेपो दर चार प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर भी 3.35 फीसदी पर यथावत रखी है। यह लगातार तीसरी बार है जब आरबीआई ने दोनों दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। दास ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी) दर नकारात्मक 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी मांग में सुधार देखने को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण मांग में सुधार से और मजबूती मिलने की उम्मीद है जबकि शहरी मांग भी गति पकड़ रही है। शक्तिकांत दास ने कहा है कि समिति ने मौद्रिक नीति समायोजन का सिलसिला तब तक जारी रखने का फैसला किया, जब तक कम से कम चालू वित्त वर्ष तक और अगले साल तक टिकाऊ आधार पर विकास गति नहीं पकड़ लेता है। इसके अलावा मुद्रास्फीति के लक्ष्य को सुनिश्चित करते हुए कोविड-19 के प्रभाव को कम न कर लिया जाए। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि खरीफ की बंपर पैदावार से सर्दी के मौसम में मुद्रास्फीति में कुछ राहत के बावजूद इसके अधिक रहने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">नीति में इसके अलावा एमएसएफ और बैंक दर में भी कोई बदलाव नहीं कर इसे भी 4.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। दास ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति तीसरी तिमाही में 6.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के झटके के बाद अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार नजर आ रहा है और रोज नये क्षेत्र भी सुधार की राह पर लौटते दिख रहे हैं। दास ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 0.1 प्रतिशत के साथ सकारात्मक दायरे में लौटने का अनुमान लगाया गया है। अंतिम तिमाही में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है। वित्त वर्ष जीडीपी में 7.5 प्रतिशत की गिरावट रहने का अनुमान लगाया गया है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 04 Dec 2020 16:32:27 +0530</pubDate>
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                <title>चालू वित्त वर्ष में भारत के जीडीपी में 9 फीसदी की आयेगी गिरावट: एडीबी</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। एशियाई विकास बैंक( एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में नौ फीसदी की गिरावट आने का अनुमान जताते हुये आज कहा कि काेरोना वायरस महामारी का भारतीय आर्थिक गतिविधियों ओर उपभोक्ताधारणा पर बहुत गंभीर प्रभाव पड़ा है। एडीबी ने एशियाई विकास परिदृष्य 2020 के आज जारी नयी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-gdp-to-fall-9-in-current-fiscal-adb/article-18445"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/gdp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> एशियाई विकास बैंक( एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में नौ फीसदी की गिरावट आने का अनुमान जताते हुये आज कहा कि काेरोना वायरस महामारी का भारतीय आर्थिक गतिविधियों ओर उपभोक्ताधारणा पर बहुत गंभीर प्रभाव पड़ा है। एडीबी ने एशियाई विकास परिदृष्य 2020 के आज जारी नयी रिपोर्ट के हालांकि कहा है कि वर्ष 2021 में मोबिलिटी और कारोबारी गतिविधियों में तेजी आने से अर्थव्यवस्था में तीव्र सुधार होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था आठ फीसदी की दर से बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री यासुयुकी सवादा ने रिपोर्ट जारी करते हुये कहा कि भारत ने कोरोना से निपटने के लिए कठोर लॉकडाउन लागू किया और इसका अर्थव्यवस्था पर बहुत ही विपरीत प्रभाव हुआ। उन्होंने कहा कि काेरोना महामारी को नियंत्रित करने के लिए जांच में तेजी, काेरोना पीड़ितों की पहचान और उपचार की क्षमता बढ़ाने जैसे उपाय किये जाने की जरूरत है ताकि अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में सुधार हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारत में अभी वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक कोरोना मरीज है। उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी ऋण के स्तर को भी कम करने की जरूरत है क्योंकि इससे प्रौद्योगिकी और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश प्रभावित हो रहा है और इससे आगे वित्तीय क्षेत्र कमजोर होे सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2020 में महंगाई में गिरावट आ सकती है। अगले वित्त वर्ष में महंगाई चार फीसदी पर आ सकती है। चालू वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा के जीडीपी के 0.3प्रतिशत पर आ सकता है और अगले वित्त वर्ष में इसके बढ़कर 0.6 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2020 11:47:17 +0530</pubDate>
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