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                <title>Uniform Civil Code: यूसीसी लागू हुआ तो मुस्लिम, सिख व अन्य धर्म पर कितना असर पड़ेगा, सरल भाषा में जाने</title>
                                    <description><![CDATA[Uniform Civil Code: यूसीसी यूसीसी का मतलब है समान नागरिक संहिता यानि सभी धर्मो के लोगों के लिए एक समान कानून हो और ऐसा कानून जो क्रिमिनल नहीं संप्रदायिक नहीं बल्कि सभी लोगों के लिए कॉमन हो। वैसे तो अभी हमारे देश में दो कानून है पहला क्रिमिनल लो और दूसरा सिविल लो। क्रिमिनल लो: […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/uniform-civil-code/article-49481"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/uniform-civil-code.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Uniform Civil Code: यूसीसी यूसीसी का मतलब है समान नागरिक संहिता यानि सभी धर्मो के लोगों के लिए एक समान कानून हो और ऐसा कानून जो क्रिमिनल नहीं संप्रदायिक नहीं बल्कि सभी लोगों के लिए कॉमन हो। वैसे तो अभी हमारे देश में दो कानून है पहला क्रिमिनल लो और दूसरा सिविल लो।</p>
<p style="text-align:justify;">क्रिमिनल लो: क्रिमिनल लो सभी धर्मों के लिए समान है, क्योंकि यह हत्या चोरी डकैती और दूसरे अपराधों में जितनी सजा हिंदू धर्म के लोगों को होती है उतनी ही सजा दूसरे धर्म के लोगों को भी होगी। Uniform Civil Code:</p>
<p style="text-align:justify;">सिविल लो: सिविल लो को लेकर हमारे देश में आज भी एक समान कानून नहीं है। सिविल लॉ का मतलब है शादी संपत्ति और ताला से जुड़े कानून। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि भारत में ऐसे मामलों में जैन सिख और बौद्ध धर्म के लोग एक समान कानून के दायरे में आते हैं, लेकिन यह कानून भारत के मुसलमानों पर ईसाइयों पर और पारसी धर्म के लोगों पर लागू नहीं होता क्योंकि इन सभी धर्म के अपने-अपने पर्सनल कानून होते हैं। Uniform Civil Code</p>
<p style="text-align:justify;">बात करें यूसीसी (Uniform Civil Code) की तो अगर भारत में यूसीसी लागू हो गया, तो सभी लोग एक समान कानून के दायरे में आ जाएंगे और तभी सही मायने में भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष बन पाएगा और एक सामान बन पाएगा क्योंकि अभी भारत का संविधान निरपेक्ष की बात तो करता है, और यह भी कहता है कि भारत में एक समान कानून व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन एक तरफ हमारे भारत देश में हर धर्म के अपने अलग-अलग कानून है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत का कानून | Uniform Civil Code</h3>
<p style="text-align:justify;">जैसे भारत का कहता है कि यहां अगर 18 साल से कम उम्र की लड़की की शादी की जाती है, तो यह शादी मान्य नहीं होगी और यह आप भी जानते हैं कि इस विवाह को गैरकानूनी विवाह कहा जाएगा, लेकिन वही मुस्लिम कानून के मुताबिक अगर 15 साल की लड़की का विवाह हो जाता है, तो यह विवाह माननीय भी होगा और गैरकानूनी भी नहीं माना जाएगा, तो है ना एक ही देश में दो अलग-अलग कानून।</p>
<p style="text-align:justify;">बता देगी भारत में अब तक यूसीसी (UCC) को हमेशा राजनीतिक नजरिए से देखा गया है। बहुत सारी पार्टियों ने मुस्लिम दृष्टि करण के लिए इसका विरोध करती आई है।। लेकिन bjp ने अपने शुरुआती वर्ष में जो वादे किए थे उनमें से एक वादा यूसीसी भी था। bjp सरकार ने अपने सभी वादे पूरे कर दिए हैं जैसे राम मंदिर का निर्माण, तीन तलाक के वादे पूरे कर दिए हैं। अब बारी है यूसीसी की जिसके लिए भारत बिल्कुल तैयार है, और वह भी सकता है कि कुछ महीनो के अंदर ही आपको ये खास कानून देखने को मिलेगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">Uniform Civil Code में क्या होगा?</h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">लड़कियों के शादी करने की उम्र बढ़ाई जाएगी ताकि वे ग्रेजुएट हो सके।</li>
<li style="text-align:justify;">ग्राम स्तर पर शादी के रजिस्ट्रेशन की सुविधा होगी, बजे गंज स्टेशन के सरकारी सुविधा नहीं मिल पाएगी।</li>
<li style="text-align:justify;">पति पत्नी दोनों के तलाक के लिए समान अधिकार होंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी।</li>
<li style="text-align:justify;">उत्तराधिकारी मामले में लड़का-लड़की का बराबर का हिस्सा होगा।</li>
<li style="text-align:justify;">पत्नी की मौत के बाद अगर उसके माता-पिता अकेले हैं तो उनका सहारा पति बनेगा।</li>
<li style="text-align:justify;">नौकरी पेशा में अगर बेटे की मौत हो जाए तो उसके बाद पत्नी को मिले मुआवजे में माता-पिता का भी बराबर का हिस्सा होगा।</li>
<li style="text-align:justify;">लिव – इन रिलेशन का डिक्लेरेशन देना होगा।</li>
<li style="text-align:justify;">यूसीसी का कौन से धर्म पर क्या पड़ेगा असर</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">हिंदू: अगर यूसीसी आता है तो मौजूदा कानून जैसे हिंदू मैरिज एक्ट 1955 और हिंदू सेक्सेशन एक्ट, 1956 में संशोधन करना जरूरी ही हो जाएगा। उदाहरण के लिए हिंदू मैरेज एक्ट के सेक्शन 2(2) में कहा गया है की इसमें प्रवधान अनुसूचित जनजाति पर लागूं नहीं होता। लेकिन UCC में इस तरह के अपवादों को जगह नहीं होगी Uniform Civil Code</p>
<p style="text-align:justify;">इस्लाम: दा मुस्लिम पर्सनल एप्लीकेशन एक्ट 1937 में कहां गया हैकि शरीयत या इस्लामिक कानून से सादिया तलाक होगा। ऐसे में अगर UCC आता है, तो शरीयत कानून के तहत न्यूनतम उम्र में बदलाव किया जाएगा साथ ही पॉलीगैमी यानि एक से ज्यादा पत्नियां रखने का कानून खत्म होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सिख: आनंद मैरिज एक्ट 1901 के तहत समुदाय में सादिया होती है, लेकिन खास बात यह है कि यहां तलाक का कोई प्रावधान नहीं है। अब अगर पति पत्नी अलग होते थे, तो हिंदू मैरिज एक्ट को माना जाता था। लेकिन अगर UCC आता है तो आनंद एक्ट मे शामिल सभी समुदाय और सादिया एक कानून के तहत आएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पारसी: पारसी मैरेज एंड डिवोर्स एक्ट, 1936 के तहत कहा गया है कि अगर कोई पारसी महिला किसी अन्य धर्म में शादी करती है तो, तो वह पारसी परंपराओ से जुड़े सभी अधिकार खो देंगी। साथ ही पारसी समुदाय में गोद ली गई बेटियों को भी उनके अधिकार के लिए मान्यता नहीं दी जाएगी। जबकि गोद लिया गया बेटा बाप का अंतिम संस्कार कर सकता है। लेकिन कहीं अगर यूसीसी आता है तो सभी पर एक सामान नियम लागू होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ईसाई: ईसाई समुदाय में UCC के आने का असर उत्तराधिकारी, गोद लेना और विरासत जैसी चीजों पर पड़ेगा। क्रिश्चियन डिवोर्स लॉ के सेक्शन (1) के तहत अगर कोई शादीशुदा जोड़ा अलग होना चाहता है, तो उन्हें तालाक के लिए 2 साल अलग ही रहना होगा। वहीं सेक्सेशन एक्ट 1925 में कहा गया है कि मां को मृत बच्चों के संपत्ति पर अधिकार नहीं मिलेगा। ऐसी संपत्ति पिता को मिलती हैं। लेकिन अगर UCC आता है तो ये प्रावधान खत्म हो जाएगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 14:53:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बढ़ेगा शिक्षकों का कौशल ज्ञान</title>
                                    <description><![CDATA[डीईईओ से लेकर अध्यापक तक सभी शिक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी करेंगे चयनित ब्लॉकों के स्कूलों का दौरा हैडमास्टर मिडल स्कूलों में जाकर देखेंगे शैक्षिक व्यवस्था सरसा(सच कहूँ/सुनील वर्मा)। शिक्षण के सभी क्षेत्रों में समुचित प्रगति करने हेतु शिक्षकों के कौशल में वृद्धि एंव विकास करने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालय पर्यवेक्षण योजना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/ill-knowledge-of-teachers-will-increase/article-37191"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/schooll.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>डीईईओ से लेकर अध्यापक तक सभी शिक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी करेंगे चयनित ब्लॉकों के स्कूलों का दौरा</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>हैडमास्टर मिडल स्कूलों में जाकर देखेंगे शैक्षिक व्यवस्था</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा(सच कहूँ/सुनील वर्मा)।</strong> शिक्षण के सभी क्षेत्रों में समुचित प्रगति करने हेतु शिक्षकों के कौशल में वृद्धि एंव विकास करने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालय पर्यवेक्षण योजना शुरू की जा रही है। योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में एक-दूसरे जिले के शिक्षाधिकारी एकेडमिक मॉनिटरिंग करेंगे। जिसमें जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी से लेकर अध्यापक तक सभी अधिकारी शामिल होंगे। एकेडमिक मॉनिटरिंग का खास पहलू यह है कि जिन-जिन जिलों में मॉनिटरिंग के लिए जिस ब्लॉक का चयन किया गया है। उस ब्लॉक का कोई भी अधिकारी व शिक्षक पर्यवेक्षण के लिए दूसरे जिले में नहीं जाएगा। जल्द शुरू हो रहे एकेडमिक मॉनिटरिंग को लेकर समग्र शिक्षा अभियान के अधिकारियों ने तैयारियां शुरू कर दी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सरसा व फतेहाबाद जिले के इन ब्लॉक में होगी एकेडमिक मॉनिटरिंग</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बात अगर एकेडमिक मॉनिटरिंग में जिला सरसा व फतेहाबाद जिले की करें तो यहां जिला मुख्यालय स्थित सरसा व फतेहाबाद ब्लॉक का चयन किया गया है। सरसा में 7 व फतेहाबाद जिले में कुल 6 ब्लॉक शामिल हैं। फतेहाबाद ब्लॉक में सरसा जिला के सरसा ब्लॉक को छोड़कर जिले के बाकी छह ब्लॉक के अधिकारी व शिक्षक फतेहाबाद ब्लॉक का पर्यवेक्षण करेंगे। जबकि सरसा ब्लॉक में फतेहाबाद जिले के फतेहाबाद ब्लॉक को छोड़कर वहां के सभी शिक्षक व अन्य अधिकारी सरसा ब्लॉक का पर्यवेक्षण करने के लिए आएगे और कौशल ज्ञान अर्जित करेंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सरसा में 146 तो फतेहाबाद में शामिल हैं 166 स्कूल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा विभाग द्वारा जारी पत्र के मुताबिक जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, स्कूलों के प्रिंसीपल, डाइट स्टाफ, जिला विज्ञान विशेषज्ञ, जिला गणित विशेषज्ञ, समग्र शिक्षा अभियान के सहायक जिला परियोजना समन्वयक चयनित ब्लॉक के सीनियर सेकेंडरी व हाई स्कूलों की एकेडमिक मॉनिटरिंग करेंगे। जबकि हैडमास्टर मिडल स्कूलों में जाकर वहां शैक्षिक व्यवस्था को देखेंगे। जिला मौलिक मुख्यअध्यापक व अन्य शिक्षक प्राइमरी स्कूलों में जाकर पर्यवेक्षण करेंगे। एकेडमिक मॉनिटरिंग के लिए चयनित सरसा ब्लॉक में 145 व फतेहाबाद ब्लॉक में 166 स्कूल है। इन स्कूलों में एक-दूसरे जिले के शिक्षाधिकारी व कर्मचारी पर्यवेक्षण करेंगे।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Aug 2022 11:30:45 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अजूबा है आपका शरीर, जानिए विशेष बातें</title>
                                    <description><![CDATA[एक व्यस्क इन्सान के शरीर में 206 हड्डियां होती हैं, लेकिन बच्चे के शरीर में करीब 300 हड्डियां पाई जाती है। बच्चे की आयु जैसे-जैसे बड़ी होती है उसकी हड्डियों की संख्या कम होती जाती है। शरीर में उपस्थित कुल 206 हड्डियों में से आधी से ज्यादा हड्डियां हाथ और पांव में होती है। हाथ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/human-body-is-unique-know-special-things/article-23721"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/human-body.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>एक व्यस्क इन्सान के शरीर में 206 हड्डियां होती हैं, लेकिन बच्चे के शरीर में करीब 300 हड्डियां पाई जाती है। बच्चे की आयु जैसे-जैसे बड़ी होती है उसकी हड्डियों की संख्या कम होती जाती है।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>शरीर में उपस्थित कुल 206 हड्डियों में से आधी से ज्यादा हड्डियां हाथ और पांव में होती है। हाथ में 27 और पांव में 26 हड्डियां होती है।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>इन्सान की जांघों की हड्डियां कंक्रीट से भी ज्यादा मजबूत होती है।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>फीमर या जांघ की हड्डी शरीर की सबसे लंबी और मजबूत हड्डी होती है।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सबसे छोटी और हल्की हड्डी कान के अंदर मौजूद स्टेपीज होती है, जो 0.28 सेंटीमीटर लंबी होती है।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>इन्सान के शरीर में हड्डियों का वजन हमारे शरीर के वजन का करीब 15 प्रतिशत होता है। ज्यादातर हड्डियां बीच से खोखली होती हैं। हड्डियों के बीच में एक जैली होती है, जिसे बोनमैरो कहते हैं।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>खोपड़ी एक तरह का सुरक्षा बॉक्स है, जिसमें हमारा दिमाग सुरक्षित रहता है। यह 28 हड्डियों से बनता है। खोपड़ी की सभी हड्डियां आपस में जुड़ी होती है।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>बेकबोन या रीढ की हड्डी खड़ा होने और बैलेंस बनाए रखने में मदद करती है। यह छोटी-छोटी 33 हड्डियों से मिलकर बनती है।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>मानव शरीर में जबड़े की हड्डी बहुत मजबूत होती है। दुर्घटनाओं में आमतौर पर जबड़े की हड्डी सबसे कम टूटती है।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>चेस्ट की 24 पसलियां हार्ट, लंग्स जैसे अंगों के चारों ओर ढाल बनकर रक्षा करती है। चेस्ट की पसलियां आगे से ब्रेस्टबोन से जुड़ी होती है और पीछे से स्पाइनल कार्ड बैकबोन से जुड़ी होती हैं।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>स्टेल के मुकाबले हड्डी 5 गुना ज्यादा मजबूत होती है।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>पांव की अंगुली बहुत ज्यादा कमजोर होती है जो जरा सी चोट लगने पर भी टूट सकती है।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>हमारी गर्दन में 7 हड्डियां होती है। मानव शरीर में गले की हायोड नाम की ‘वी’ के आकार की अकेली ऐसी हड्डी है, जो किसी दूसरी हड्डी से जुड़ी नहीं होती।</h5>
</li>
</ul>
<h5></h5>
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                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/education-employement/human-body-is-unique-know-special-things/article-23721</link>
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                <pubDate>Tue, 18 May 2021 14:48:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत का मंगलयान</title>
                                    <description><![CDATA[मंगलयान भारत का प्रथम मंगल अभियान है। यह भारत की प्रथम ग्रहों के बीच का मिशन है। वस्तुत: यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की एक महत्वाकांक्षी अन्तरिक्ष परियोजना है। इस परियोजना के अन्तर्गत 5 नवम्बर 2013 को 2 बजकर 38 मिनट पर मंगल ग्रह की परिक्रमा करने हेतु छोड़ा गया एक उपग्रह आंध्र प्रदेश के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/mangalyaan-of-india/article-21915"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/mangalyaan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मंगलयान भारत का प्रथम मंगल अभियान है। यह भारत की प्रथम ग्रहों के बीच का मिशन है। वस्तुत: यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की एक महत्वाकांक्षी अन्तरिक्ष परियोजना है। इस परियोजना के अन्तर्गत 5 नवम्बर 2013 को 2 बजकर 38 मिनट पर मंगल ग्रह की परिक्रमा करने हेतु छोड़ा गया एक उपग्रह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसलवी) सी-25 के द्वारा सफलतापूर्वक छोड़ा गया। इसके साथ ही भारत भी अब उन देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने मंगल पर अपने यान भेजे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे अब तक मंगल को जानने के लिये शुरू किये गये दो तिहाई अभियान असफल भी रहे हैं परन्तु 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुँचने के साथ ही भारत विश्व में अपने प्रथम प्रयास में ही सफल होने वाला पहला देश तथा सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद दुनिया का चौथा देश बन गया। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी है। भारत एशिया का भी ऐसा करने वाला प्रथम पहला देश बन गया। क्योंकि इससे पहले चीन और जापान अपने मंगल अभियान में असफल रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">वस्तुत: यह एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन परियोजना है जिसका लक्ष्य अन्तरग्रहीय अन्तरिक्ष मिशनों के लिये आवश्यक डिजाइन, नियोजन, प्रबन्धन तथा क्रियान्वयन का विकास करना है। अंतरिक्ष यान पर वर्तमान में इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (इस्ट्रैक),बंगलौर के अंतरिक्षयान नियंत्रण केंद्र से भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क एंटीना की सहायता से नजर रखी जा रही मंगलयान मिशन की लागत 450 करोड़ रुपए आई थी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/education-employement/mangalyaan-of-india/article-21915</link>
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                <pubDate>Sun, 21 Feb 2021 10:11:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रेरणास्त्रोत : ज्ञान और कर्म</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान बुद्ध के प्रवचन सुनने के लिए एक व्यक्ति नियमित रूप से आता था। इस प्रकार उसे एक माह हो चुका था। किन्तु उसके जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। भगवान बुद्ध उपदेश में कहते थे कि धर्म पर चलो, अपने जीवन से राग-द्वेष को दूर करो, काम, क्रोध, लोभ, मोह और अंहकार से सदा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/knowledge-and-action/article-12961"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/knowledge-and-action.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">भगवान बुद्ध के प्रवचन सुनने के लिए एक व्यक्ति नियमित रूप से आता था। इस प्रकार उसे एक माह हो चुका था। किन्तु उसके जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। भगवान बुद्ध उपदेश में कहते थे कि धर्म पर चलो, अपने जीवन से राग-द्वेष को दूर करो, काम, क्रोध, लोभ, मोह और अंहकार से सदा दूर रहो। बुद्ध के उपदेशों से लोगों को बहुत शान्ति मिलती थी। किन्तु उस व्यक्ति का मन अशांत रहता था। एक दिन उसने बुद्ध से जाकर कहा- हे प्रभु! मैं एक माह से आपका उपदेश सुन रहा हूँ, किन्तु उसका तनिक भी असर मेरे आचरण पर नहीं पड़ा। मैं बहुत परेशान हूँ। मुझे क्या करना चाहिए? बुद्ध उनकी बात सुनकर बोले- तुम कहाँ के रहने वाले हो? उसने कहा, श्रावस्ती का। बुद्ध ने अगला प्रश्न किया। वह यहाँ से कितनी दूर है। उसने अनुमान से बता दिया। बुद्ध ने पुन: जिज्ञासा प्रकट की, कितना समय लगता है? उस व्यक्ति ने हिसाब लगाकर बता दिया। बुद्ध ने कहा- अब बताओ कि क्या तुम यहाँ पर बैठे-बैठे ही अपने घर पहुँच सकते हो? उसने कहा-यह कैसे हो सकता हैं? वहाँ पहुँचने के लिए तो चलना होगा। तब बुद्ध ने बड़े प्रेम से उसे समझाया कि जैसे चलने पर ही पहुँचा जा सकता है, वैसे ही अच्छी बातों पर अमल करने से लाभ होता है। हे प्यारे! तुम मेरे ज्ञान के साथ अपने कर्म को जोड़ दो, तब तुमको उत्तम-फल मिलेगा। उस व्यक्ति को अपनी गलती समझ में आ गई। उसने अपने जीवन में सुधार कर लिया, जिससे उसका जीवन सदाचारी बन गया।</h4>
<h3 style="text-align:justify;">सूझ-बूझ और साहस</h3>
<h4 style="text-align:justify;">सफलता की मुख्य शर्त है- सकारात्मक चिंतन। एक प्रसिद्ध उद्योगपति अपने कारखाने में घूम रहे थे। अचानक उनकी दृष्टि चारदीवारी पर उग गए एक पीपल के पौधे पर पड़ी। उन्होंने वहाँ के प्रबंधक से कहा, ‘दीवार पर पीपल उग गया है। कुछ दिनों में यह विशाल वृक्ष दीवार को तोड़ देगा। जल्द ही उसे उखड़वा दो।’ प्रबंधक ने सोचा, ‘पीपल के पेड़ को उखड़वाना तो अपराध है।’ प्रबंधक ने सूझ-बूझ से काम लेते हुए उसे पेड़ को वहीं पास में खुली जगह में लगा दिया। दूसरे दिन उद्योगपति ने देखा कि पीपल का पौधा अब दीवार पर नहीं है, बल्कि वहीं कुछ दूर जमीन में लगा दिया गया है। उन्होंने प्रबंधक को पदोन्नति देते हुए कहा, तुममें सूझ-बूझ के साथ साहस भी है।</h4>
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                <pubDate>Sat, 08 Feb 2020 20:57:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रेरणास्त्रोत: आचरण और ज्ञान</title>
                                    <description><![CDATA[यह बात राजा के कानों तक पहुंच गई। तीसरे दिन जब राज पुरोहित ने फिर तीन मुद्राएं उठाई तो यह बात सारे दरबारियों को भी मालूम हो गई। अगले दिन पुरोहित के दरबार में आने पर कोई सम्मान में खड़ा नहीं हुआ।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/behavior-and-knowledge/article-12765"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/behavior-and-knowledge.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राज पुरोहित का राज्य में बहुत सम्मान था। वह राजा को आवश्यक परामर्श दिया करता था। प्रतिदिन स्वर्ण-मुद्राओं का थाल पुरोहित के सामने रख दिया जाता था जिसमें से वह केवल एक मुद्रा सम्मान-निधि के रूप में स्वीकार कर लिया करता था। एक दिन पुरोहित ने सबकी नजर बचा कर दो मुद्राएं उठा कर जेब में रख लीं। खजांची ने सोचा कि उन्होंने अनजाने में ऐसा किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे दिन, पुरोहित ने तीन मुद्राएं उठा लीं। यह बात राजा के कानों तक पहुंच गई। तीसरे दिन जब राज पुरोहित ने फिर तीन मुद्राएं उठाई तो यह बात सारे दरबारियों को भी मालूम हो गई। अगले दिन पुरोहित के दरबार में आने पर कोई सम्मान में खड़ा नहीं हुआ। राजा ने पुरोहित से प्रश्न किया, ‘यदि राजा का विश्वासपात्र भी चोरी करे तो उसे क्या दंड दिया जाए?’ पुरोहित ने उत्तर दिया, ‘उसे मौत की सजा दी जानी चाहिए।’</p>
<p style="text-align:justify;">राजा ने फिर पूछा, ‘लेकिन आप जो लगातार तीन दिन से थाल से तीन मुद्राएं चोरी कर रहे हैं, तो आपको क्या सजा दी जाए?’ पुरोहित ने उत्तर दिया, ‘मुझे भी मौत की सजा दी जाए। लेकिन इससे पहले एक रहस्य जान लें। यह मेरा एक प्रयोग था, जिसके द्वारा मैं यह अनुभव करना चाहता था कि मेरा सम्मान मेरे ज्ञान के कारण है या सदाचरण के कारण। अब मुझे समझ में गया कि सदाचरण सबसे ऊपर है। उसके बिना ज्ञान का कोई अर्थ नहीं है। अब आप चाहे जो दंड दें, वह मैं स्वीकार करूंगा।’ राजा ने पुरोहित को क्षमा कर दिया।</p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/behavior-and-knowledge/article-12765</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Jan 2020 20:33:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>साक्षरता के साथ ज्ञान एवं कौशल विकास भी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया से निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यूनेस्को ने 17 नवंबर, 1965 के दिन 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाने का फैसला लिया था। निरक्षरता अंधेरे और साक्षरता प्रकाश के समान है। आठ सितंबर 2018 को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस साक्षरता और कौशल विकास विषय के साथ दुनिया भर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/knowledge-and-ill-development-with-literacy-are-also-important/article-5794"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/artical-01.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दुनिया से निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यूनेस्को ने 17 नवंबर, 1965 के दिन 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाने का फैसला लिया था। निरक्षरता अंधेरे और साक्षरता प्रकाश के समान है। आठ सितंबर 2018 को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस साक्षरता और कौशल विकास विषय के साथ दुनिया भर में मनाया जाएगा। साक्षरता के साथ ज्ञान एवं कौशल विकास भी जरूरी है। ज्ञान एवं कौशल विकास के लिए साक्षर बनकर आगे बढ़ा जा सकता है। साक्षर, नवसाक्षर व असाक्षरों को साक्षर करने के बाद उन्हें कौशल उन्नयन से जोड़ा जाना और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करने की महती आवश्यकता है। शिक्षा चाहे जैसी भी हो वह अपने और परिवार के प्रति काम आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कौशल उन्नयन के क्षेत्र में और भी अधिक काम करने की आवश्यकता है कौशल प्रशिक्षण के बाद हितग्राहियों को रोजगार से जोड़ा जाना नितांत आवश्यक है। साक्षरता और कौशल विकास का चोली दामन का साथ है। साक्षरता की सफलता रोजगार से जुड़ी है। हम साक्षर व्यक्ति को रोजी रोटी की सुविधा सुलभ करा कर देश से निरक्षरता के अँधेरे को भगा सकते हंै। हालाँकि केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न स्तरों पर कौशल विकास के कार्यक्रम संचालित कर रही हैं मगर जब तक ऐसे व्यक्ति अपने पैरों पर खड़े नहीं होंगे तब तक साक्षरता अभियान को पूर्ण रूप से सफल नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">
साक्षरता का मतलब केवल पढ़ना-लिखना या शिक्षित होना ही नहीं है। यह लोगों में उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है। इसका सामाजिक एवं आर्थिक विकास से गहरा संबंध है। साक्षरता का कौशल मानव में आत्मविश्वास का संचार करता हैै। गरीबी उन्मूलन में इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। महिलाओं एवं पुरुषों के बीच समानता के लिए जरूरी है कि महिलाएं भी साक्षर बनें।<br />
जीने के लिये खाने की तरह ही साक्षरता भी महत्वपूर्णं है। गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ना बहुत जरुरी है। साक्षरता में वो क्षमता है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का उद्देश्य व्यक्ति, समुदाय तथा समाज के हर वर्ग को साक्षरता का महत्व बताकर उन्हें साक्षर करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">
साक्षरता एवं शिक्षा में बहुत बड़ा अंतर है। साक्षरता का आधार शिक्षा अर्जित करना होता है और शिक्षा का आधार ज्ञान। एक व्यक्ति बिना साक्षर हुए भी शिक्षित हो सकता है। साक्षरता एक मानव अधिकार है, सशक्तिकरण का मार्ग है और समाज तथा व्यक्ति के विकास का साधन है। लोकतंत्र की सुनिश्चितता के लिए साक्षरता आवश्यक है। वर्ष 2010 में जब बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का कानून 2009 लागू हुआ, यह देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। सभी के लिए प्रारंभिक शिक्षा की दिशा में देश के प्रयासों को इस कानून के लागू होने से जबरदस्त बढ़ावा मिला। आज शिक्षा का अर्थ केवल साक्षरता से लिया जाता है, आर्थिक प्रगति के लिए शिक्षा जरुरी है साक्षरता नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षित व्यक्ति अपनी आय का साधन बढ़ा सकता है और आये हुए धन को सहेज कर अमीर भी बन सकता है परन्तु साक्षर व्यक्ति ये काम नहीं कर सकता। यहाँ शिक्षा और साक्षरता का अंतर समझना बहुत जरुरी है. शिक्षा का अर्थ है किसी उपयोगी कल को सीखना जबकि साक्षरता केवल मात्र अक्षर ज्ञान है।<br />
साक्षरता दक्षता और व्यवहार वे शक्तिशाली साधन है, जो स्वास्थ्य की बेहतर संभावनाएँ निर्मित करने के लिए महिलाओं और पुरुषों में आवश्यक क्षमताओं तथा आत्मविश्वास को विकसित करती है। साक्षरता और स्वास्थ्य में भी गहरा संबंध है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाकर शिशु और मातृ मृत्युदर में कमी लाना, लोगों को जनसंख्या विस्फोट के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना इसके उद्देश्यों में शामिल है। साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ने-लिखने और हिसाब-किताब करने की योग्यता प्राप्त करना ही नहीं है, बल्कि हमें नवसाक्षरों में नैतिक मूल्यों के प्रति आदरभाव रखने की भावना पैदा करना होगी।</p>
<p style="text-align:right;">बाल मुकंद ओझा</p>
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                <pubDate>Sat, 08 Sep 2018 08:41:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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