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                <title>दुनिया का एक ऐसा गांव जहां रहते हैं पुतले&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया में जापान एक ऐसा देश है जिसके एक गांव में सिर्फ पुतले रहते हैं। इस गांव में पिछले 18 साल से कोई भी बच्चा पैदा नहीं हुआ। इस गांव में महज 27 लोग रहते हैं जिनकी आयु लगभग 65 के पार है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/japans-village-of-the-dolls/article-11955"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/doll-village.jpg" alt=""></a><br /><h2>अकेलापन दूर करने के लिए 70 वर्षीय बुजुर्ग सुकिमी अयानो ने गांव में 350 पुतले बनाकर लगाए | Village Dolls</h2>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p><strong>टोक्यो(सच कहूँ डेस्क)।</strong> दुनिया में जापान एक ऐसा देश है जिसके एक गांव में सिर्फ पुतले <strong>(Village Dolls)</strong> रहते हैं। इस गांव में पिछले 18 साल से कोई भी बच्चा पैदा नहीं हुआ। इस गांव में महज 27 लोग रहते हैं जिनकी आयु लगभग 65 के पार है। गांव के सूनेपन को दूर करने के लिए 350 पुतले बनाकर स्कूल, बस स्टेंड, पार्कों व अन्य स्थानों पर रखे गए हैं। पुतलों की संख्या अधिक होने के कारण इसे पुतलों का गांव भी कहा जाता है। आज आपको सच कहूँ टीम इस गांव के बारे में विस्तार से अवगत करवाएगी।</p>
<h2>नगोरो डैम के कारण बसाया गया था ‘नगोरो’ गांव| Village Dolls</h2>
<p>जापान में शिकोकू टापू पर नागोरो नाम से यह गांव बसा हुआ है। जिसमें सिर्फ 27 बुजुर्ग लोग ही रहते हैं। गांव में रोजगार की तलाश में हुए पलायन के बाद हालात ये है कि अब यहां बच्चे ही नहीं बचे। जिसके कारण नोगोरो में बना प्राइमरी स्कूल 2012 में बंद कर दिया गया। दरअसल, नगोरो को नगोरो डैम के कारण बसाया गया था। जो हाइड्रल पावर प्रोजेक्ट का हिस्सा था। ये डैम 1961 में बन गया था। पलायन के बाद अब ये इलाका खाली हो चुका है। नगोरो जापान का अकेला ऐसा इलाका नहीं है जहां ये हालात हैं।</p>
<h2>अकेलापन महसूस हुआ तो बुजुर्ग महिला ने बना डाले 350 पुतले | Village Dolls</h2>
<p>इंसान के जीवन में अकेलापन क्या होता है वो सिर्फ नगोरो गांव में रह रहे बुजुर्ग ही जानते हैं। जिन्होंने आज तक गांव नहीं छोड़ा। इस गांव में रह रही 70 वर्षीय बुजुर्ग<br />
महिला सुकिमी अयानो ने वीरान होते गांव को बचाने के लिए युक्ति निकाली और जगह-जगह 350 पुतले लगाने का फैसला लिया। ताकि गांव में ज्यादा से ज्यादा लोग गांव में दिखाई दें। इसके बाद आयनो ने गांव के स्कूल, बस स्टॉप, किराने की दुकान और खेल के मैदान में पुतले ही पुतले लगा दिए। इनमें कुछ बच्चे, पुरुष और महिलाएं हैं। आयनो को जब भी अकेलापन महसूस होता तो वह इन पुतलों के साथ खेलती हैं और इनसे बातें भी करती हैं। हालांकि गांव में हर जगह पुतले होने के कारण कोई भी गांव में डर के मारे जाना पसन्द नहीं करता।</p>
<h2>गांव के बारे में पता चला तो पहुंचने लगे टूरिस्ट</h2>
<ul>
<li><strong>आयानो बताती है कि यहां न तो मेडिकल क्लीनिक हैं और न ही डिनर या पार्लर। </strong></li>
<li><strong>खरीदारी के लिए एक दुकान तक नहीं है। </strong></li>
<li><strong>आयानो ने 350 पुतले बनाएं हैं जो लकड़ी, वायर फ्रेम, पुराने कपड़े और अखबार से तैयार किए गए हैं ।</strong></li>
<li><strong> ये देखने में इतने खूबसूरत लगते हैं कि इन्हें खरीदने का मन करता है। </strong></li>
<li><strong>पुतलों के इस गांव में के बारे में जब टूरिस्टों पता चला तो वो इन्हें देखकर हैरान रह गए। </strong></li>
<li><strong>गांव में जगह-जगह पुतलों के इस कदर रखा मानों गांव की खूबसूरती इन पुतलों से ही हो।</strong></li>
<li><strong>जापान रिसर्च इंस्टिट्यूट की अर्थशास्त्री ताकुमी फुजीनामी का कहना है कि जापान की गिरती जनसंख्या को सुधारने के लिए लोगों को ऐसे इलाकों में जाकर रहना होगा।</strong></li>
<li><strong> ऐसे में ये जरूरी है कि ऐसे इलाकों में जो बचे हुए लोग हैं ।</strong></li>
<li><strong>उनके लिए अच्छे रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/japans-village-of-the-dolls/article-11955</link>
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                <pubDate>Tue, 24 Dec 2019 15:00:35 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रैंडस्लैम जीतने वाली जापान की पहली महिला बनी ओसाका</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका की चेम्पियन सेरेना विलियम्स को दी मात|| Osaka win grand slam न्यूयॉर्क, एजेंसी। जापान की नाओमी ओसाका ने यूएस ओपन के फाइनल में अमेरिका की (Osaka win grand slam) चैम्पियन सेरेना विलियम्स को हरा दिया। इस जीत के साथ ओसाका ग्रैंडस्लैम जीतने वाली जापान की पहली महिला खिलाड़ी बन गईं। उन्होंने सेरेना को सीधे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/japans-first-woman-osaka-win-the-grand-slam/article-5830"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/osaka-win.jpg" alt=""></a><br /><h2>अमेरिका की चेम्पियन सेरेना विलियम्स को दी मात|| Osaka win grand slam</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>न्यूयॉर्क, एजेंसी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जापान की नाओमी ओसाका ने यूएस ओपन के फाइनल में अमेरिका की <strong>(Osaka win grand slam)</strong> चैम्पियन सेरेना विलियम्स को हरा दिया। इस जीत के साथ ओसाका ग्रैंडस्लैम जीतने वाली जापान की पहली महिला खिलाड़ी बन गईं। उन्होंने सेरेना को सीधे सेटों में 6-2, 6-4 से हरा दिया। ओसाका ने पहला सेट आसानी से जीत लिया। दूसरे सेट में सेरेना वापसी की कोशिशें कर रही थीं। इस दौरान उनके कोच पर कथित रूप से हाथ से इशारा करने पर एक गेम का जुर्माना लगा। चेयर अंपायर ने कोच की हरकत को नियमों का उल्लंघन माना। चेयर अंपायर कार्लोस रामोस के फैसले के बाद सेरेना ने गुस्से में अपना रैकेट पटक दिया। हालांकि बाद में उन्होंने माफी मांगी। सेरेना ने गुस्से में अंपायर को कथित रूप से चोर भी कहा। इसका खंडन करते हुए सेरेना ने अंपायर से कहा, “मैं आपसे माफी मांगती हूं। मैंने कभी बेईमानी नहीं की। मेरी एक बेटी है और मैं उसके सामने एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहती हूं। बेईमानी के बजाय मैं मैच हारना पसंद करूंगी।”</p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Sep 2018 11:22:54 +0530</pubDate>
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